Tuesday, August 6, 2024

वक्फ बोर्ड: हिन्दू मंदिरों और गाँवों से लेकर फाइव स्टार होटलों तक जमीन हड़पने का षड्यंत्र

7 August 2024

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🚩वक्फ बोर्ड के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की घटनाएं केवल कल्पना नहीं हैं। ऐसी खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं जहाँ वक्फ बोर्ड ने सार्वजनिक या निजी भूमि को वक्फ के रूप में पंजीकृत करने का दावा किया है। इसमें तमिलनाडु में एक संपूर्ण हिन्दू गाँव, सूरत में सरकारी इमारतें, बेंगलुरु में तथाकथित ईदगाह मैदान, हरियाणा में जठलाना गाँव, और हैदराबाद का एक पाँच सितारा होटल शामिल हैं।


🚩भूमि अधिग्रहण के सामान्य तरीके

🚩वक्फ बोर्ड के भूमि अधिग्रहण के तीन सामान्य तरीके हैं:


🚩कब्रिस्तान के रूप में दावा करना: किसी भूमि पर कब्रिस्तान का दावा करके उसे वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत करना।

मजार/दरगाह का निर्माण करना: सार्वजनिक या निजी भूमि पर मजार या दरगाह का निर्माण करना और फिर उसे वक्फ संपत्ति के रूप में घोषित करना।

सार्वजनिक भूमि पर नमाज अदा करना: सार्वजनिक जमीनों पर नमाज अदा करना ताकि उसे वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत करने की संभावना बनाई जा सके।

🚩सामाजिक संघर्ष और सांप्रदायिक वैमनस्य

🚩इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि बिना उचित नियमन के कानून और इससे उत्पन्न भ्रष्ट तंत्र सामाजिक संघर्ष और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देते हुए हिन्दुओं की सम्पत्तियों के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड का कानूनी अस्तित्व अत्यधिक विवादास्पद है। वक्फ की कानूनी संस्था और बोर्ड की नौकरशाही का अस्तित्व केवल इस्लामिक राजनीति के लिए एक गढ़ के रूप में समझा जा सकता है।


🚩धर्मनिरपेक्षता और कानूनी प्रणाली

🚩यह ध्यान देने योग्य है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में केवल एक तर्कसंगत कानूनी प्रणाली को लोकहित में काम करना चाहिए, न कि किसी विशेष समुदाय की पहचान को चिह्नित करने के लिए। वक्फ कानून वर्तमान में जिस स्थिति में है, वह सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरनाक है। यह निजी संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन करता है और चरमपंथी राजनीति को प्रोत्साहित करता है।


🚩संविधान का उल्लंघन

वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ न्यायशास्त्र वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए समानता के अधिकार का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करते हैं। यह अधिनियम एक समुदाय की संपत्तियों और धार्मिक प्रतिष्ठानों को एक विशेष सुरक्षा प्रणाली प्रदान करता है, जो अन्य समुदायों के लिए अनुपलब्ध है।


🚩निष्कर्ष

वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुद्दा न केवल एक कानूनी समस्या है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और सांप्रदायिक चिंता भी है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक है कि वक्फ कानून की समीक्षा की जाए और इसे सभी समुदायों के लिए समान और निष्पक्ष बनाया जाए। समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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Monday, August 5, 2024

शिवलिंग के ऊपर बांधे जाने वाले जल के कलश को क्या कहते है, इसे कब और क्यों बांधते है?


6 August 2024

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🚩 कई बार शिवलिंग के ऊपर एक जल का कलश बंधा हुआ दिखाई देता है, जिसमें से बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है।


🚩ये दृश्य अक्सर गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। इस परंपरा से जुड़ी कई बातें है।


🚩 वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर एक जल से भरा कलश बांधने की परंपरा है। इस कलश से बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है। इसको गलंतिका कहा जाता है। गलंतिका का शाब्दिक अर्थ है जल पिलाने का करवा या बर्तन। 


🚩इस जल के कलश में नीचे की ओर एक छोटा सा छेद होता है जिसमें से एक-एक बूंद पानी शिवलिंग पर निरंतर गिरता रहता है। ये जल का कलश मिट्टी या किसी अन्य धातु का भी हो सकता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि इस कलश का पानी खत्म न हो।


क्या है इस परंपरा से जुड़ी कथा?


🚩 धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन करने पर सबसे पहले कालकूट नामक भयंकर विष निकला, जिससे समग्र संसार में त्राहि-त्राहि मच गई।

 

🚩तब समस्त विश्व के कल्याण के लिए शिवजी ने उस कालकुट विष को अपने गले में धारण कर लिया। मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास में जब अत्याधिक गर्मी पड़ने लगती है तब कालकूट विष के कारण शिवजी के शरीर का तापमान में बढ़ने लगता है। उस तापमान को नियंत्रित रखने के लिए ही शिवलिंग पर गलंतिका बांधी जाती है। 

जिसमें से बूंद-बूंद टपकता जल, भगवान शिव को ठंडक प्रदान करता है।


🚩इसीसे शुरू हुई शिवजी को जल चढ़ाने की परंपरा?

शिवलिंग पर प्रतिदिन लोगों द्वारा जल चढ़ाया जाता है। इसके पीछे ही यही कारण है कि शिवजी के शरीर का तापमान सामान्य रहे।

गर्मी के दिनों तापमान अधिक रहता है इसलिए इस समय गलंतिका बांधी जाती है ताकि निरंतर रूप से शिवलिंग पर जल की धारा गिरती रहे।


🚩वैशाख मास में लगभग हर मंदिर में शिवलिंग के ऊपर गलंतिका बांधी जाती है। 

इस परंपरा में ये बात ध्यान रखने वाली है तो गलंतिका में डाला जाने वाला जल पूरी तरह से शुद्ध हो। चूंकि ये जल शिवलिंग पर गिरता है, इसलिए इसका शुद्ध होना जरूरी है।


अत : सफाई और शुद्धता का ध्यान रखना जरूरी है।




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Sunday, August 4, 2024

सनातन धर्म के पर्व एवं त्योहर - आषाढ अमावस्या - दीप अमावस्या

 5 August 2024

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महाराष्ट्र में आषाढ़ अमावस्या को दीप अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन दीप पूजा की जाती है। दीप पूजा के दिन, लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते है और उसे सजाते है। फिर घर के सभी दीयों को साफ करते है और उन्हें सजाते है। मेज के चारों ओर रंगोली बनाकर दीयों को मेज पर रखते है और उन दियों की पूजा की जाती है। 



कई लोग उनको जलाते है और कई लोग सिर्फ पूजा करके उनको साल भर में एक दिन आराम देते है। फिर घर में मिष्ठान बनाकर उनको भोग लगाया जाता है।



तमसो मा ज्योतिर्गमय की तर्ज पर दियों का पूजन किया जाता है ताकि दीऐं हमे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाएं।



हिन्दू धर्म में दिया जलाने का बहुत महत्व है चाहे वह कोई मांगलिक कार्य हो, पितरों का तर्पण हो या फिर किसीका देहांत, दियों का स्थान तो अग्रगणी है।
हर कार्य में दिए लगाने का उद्देश अलग अलग है।



इतना ही नहीं, सनातन संस्कृति में दीयों का बुझना,या उन्हें बुझाना अशुभ माना जाता है।



इसीलिए, जन्म दिवस पर पाश्चात्य अंधानुकरण करके दिए बुझाने की बजाए , हिन्दू संस्कृति के अनुसार उन्हें जलाना चाहिए ऐसा संत श्री आशारामजी बापू कहते है।



आज, पाश्चात्य अंधनुकरण और सांस्कृतिक पतन के कारण लोग दीप अमावस्या को गटारी अमावस्या कहते है और उस दिन जमकर अभक्ष्य भक्षण और मदिरा पान करते है जो की सर्वथा अनुचित है।



आप को बता दे की हिन्दू धर्म में ऐसा कोई भी त्योहार नहीं जिस दिन,अभक्ष्य भक्षण और मदिरा पान की अनुमति दी गई हो बल्कि यह असभ्य मनुष्यों द्वारा जानबूझकर विकृति पैदा की गई है ताकि हम हमारी दिव्य संस्कृति से दूर चले जाएं।



इसीलिए, प्रत्येक हिन्दू को सजग होने की आवश्यकता है ताकि हम हमारी प्राचीन परंपराएं और त्योहार अबाधित रख सके।



सभी के जीवन में ज्ञान का प्रकाश हो,स्वास्थ्य,आनंद और यश हो, यहीं प्रार्थना करते हुए सभी दियों को मेरा शत-शत नमन 🙏



दीपज्योति परब्रह्म दीपज्योति जनार्दन ।
दीपो हरतु में पापम,संध्या दीपो नमोस्तुते  ।।



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Saturday, August 3, 2024

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद पर अब उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान

4  August 2024

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🚩उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लव जिहाद से जुड़े कानून को और सख्त बनाने जा रही है। नए कानून के मुताबिक अब किसी का जबरन धर्मांतरण करवाने वाले आरोपी को 10 -15 साल की सजा नहीं बल्कि उम्रकैद तक की सजा होगी। इस नियम को लागू कराने के लिए योगी सरकार ने इससे जुड़ा विधेयक सोमवार (29 जुलाई 2024) को सदन में पेश किया। विधेयक में कई नए अपराधों को भी शामिल करने की तैयारी है। जैसे विधि विरुद्ध धर्मांतरण के लिए फंडिग को भी कानून के तहत अपराध के तगत दायरे में लाने की तैयारी है।

🚩विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक -2024 पेश किया गया था। इस में कहा गया था कि अब यदि कोई व्यक्ति धर्मांतरण कराने की नीयत से किसी व्यक्ति को उसके जीवन या संपत्ति के लिए धमकाता है, हमला करता है, विवाह या विवाह करने का वादा करता है अथवा इन सब चीजों के लिए षड्यंत्र करता है, नाबालिग, महिला या किसी व्यक्ति की तस्करी तो उसके अपराध को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा और उसे उल्लेखित सजा भुगतनी होगी।

🚩बता दें कि लव जिहाद की घटनाओं की रोकथाम के लिए योगी सरकार ने साल 2020 में पहली बार लव जिहाद विरोधी कानून बनाने की बात सामने आई थी। बाद में साल 2021 में यूपी विधानसभा में धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक पारित किया गया । इस में लव जिहाद आरोपितों के लिए 1 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था।

🚩कानून में कहा गया था कि सिर्फ शादी के लिए किया गया धर्मांतरण अमान्य होगा। इसके अलावा झूठ बोलकर, धोखा देकर, धर्मपरिवर्तन को अपराध माना जाएगा। वहीं स्वेच्छा से धर्मपरिवर्तन के मामले में 2 महीने पहले मजिस्ट्रेट को बताना होगा।

🚩पहले विधेयक के मुताबिक जबरन धोखे से धर्म परिवर्तन के लिए 15000 रुपए जुर्माने के साथ 1-5 साल की जेल की सजा का प्रावधान था। वहीं अगर ये धोखेबाजी दलित लड़की के साथ ऐसा होता है तो 25000 रुपए जुर्माने के साथ 3-10 साल की सजा का प्रावधान था। हालाँकि अब अगर इस मामले में बदलाव होता है तो ऐसे केसों में आरोपी की सजा दुगनी होगी यानी 10 साल या फिर आजीवन कारावास का प्रावधान होगा।

🚩गौरतलब है कि साल 2020-21 के बीच लव जिहाद के तमाम मामले सोशल मीडिया और अखबारों तथा न्यूज़ चैनल्स के जरिए सामने आए थे। उन्हीं मामलों की शिकायत जब योगी सरकार के पास पहुँची तो उन्होंने मामलों की जाँच करवाई और पुष्टि होने के बाद आरोपी गिरफ्तार हुआ। साथ ही, प्रदेश में ये कानून लाया गया कि धर्मपरिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

🚩लव जिहाद द्वारा हिन्दू युवतियों को छल करके प्रेम जाल में फँसाने की अनेक घटनाएँ सामने आईं है। बाद में, वहीं लड़कियां बहुत पश्चाताप करती है ,क्योंकि वहाँ उनकी जिंदगी नारकीय हो जाती है। उनपर धर्मपरिवर्तन करने का दबाव बनाया जाता है, लव जिहादियों की अनेक पत्नियां होती है। गौमाँस खिलाया जाता है, दर्जनों बच्चे पैदा करते है , पिटाई करते है, तलाक भी दिया जाता है। यहाँ तक कि लव जिहाद में फंसाकर उनको आतंकवादियों के पास भेजने की भी अनेक घटनाएं सामने आई है।

🚩जनता की मांग है कि योगी सरकार की तरह सभी राज्यों की सरकार को लव जिहाद और धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाना चाहिए।


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Friday, August 2, 2024

गोल्डी - अशोक के मसलों में खतरनाक कीटनाशक, किडनी-लीवर हो जाएँगे डैमेज

 3  August 2024

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🚩जिन मसालों को हम अपनी रसोई का अहम हिस्सा मानते है, वे हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। गोल्डी, अशोक, भोला सब्जी मसाले समेत 13 कंपनियों के नूमने जाँच में फेल हो गए है। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का कहना है कि इन कंपनियों के कई उत्पाद खाने के योग्य नहीं है। इससे पहले MDH और एवरेस्ट के मसालों पर सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग ने प्रतिबंध लगा दिया था।


🚩दरअसल, इस साल मई में कानपुर स्थित मसालों की 13 कंपनियों पर FSDA के अफसरों ने छापा मारा था। इनके अलग-अलग मसालों के 35 उत्पाद के नमूने जाँच के लिए भेजे थे। इनमें से 23 की रिपोर्ट सामने आई है। इन मसालों में पेस्टीसाइड और कीटनाशक की मात्रा काफी अधिक मिली है। इसमें कीड़े भी मिले है। इसके बाद FSDA ने इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है।


🚩FSDA के अफसरों ने कानपुर के दादानगर की शुभम गोल्डी मसाला कंपनी से सैंपल इकट्ठा किए थे। उनमें सांभर मसाला, चाट मसाला और गरम मसाला खाने योग्य नहीं है। इसमें कीटनाशक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाया गया है। दरअसल, शुभम गोल्डी कंपनी गोल्डी ब्रांड नाम से मसाला प्रोडक्ट बनाती है। बता दें कि गोल्डी मसाले के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान है।


🚩इसी तरह नामी अशोक मसालों की दो कंपनियों के उत्पादों में भी खामियाँ पाई गई हैं। इनके धनिया पाउडर, गरम मसाला और मटर पनीर मसाला खाने योग्य नहीं है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। वहीं, भोला मसाले के प्रोडक्ट की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है। इसके बिरयानी मसाला, सब्जी मसाला और मीट मसाला सेफ नहीं है।


🚩लोकल लेवल पर बिकने वाली 14 अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट में भी हानिकारक पदार्थ पाए गए है। इन कंपनियों के हल्दी पाउडर में भी पेस्टिसाइट्स मिला है। एक अन्य नामचीन मसाले में प्रोपरगाइट मिला है। इसका इस्तेमाल कीड़ों, खासकर मकड़ी से फसलों की रक्षा के लिए किया जाता है। 16 सैंपल में खतरनाक कीटनाशक और 7 में माइक्रो बैक्टीरिया मिले है।   स्त्रोत ओप इंडिया 


🚩अब खाद्य विभाग इन सभी कंपनियों के खिलाफ एडीएम सिटी कोर्ट में वाद दायर करेगा। इसके बाद जुर्माना तय होगा। जानकारों ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियों के मसाले गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, वाराणसी, फतेहपुर, बहराइच समेत कई शहरों में बेचे जा रहे है। सहायक खाद्य आयुक्त संजय प्रताप सिंह ने बताया कि इनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। स्त्रोत: ओप इंडिया 


🚩कीटनाशक वाले मसालों के कारण हृदय, लिवर और किडनी पर बुरा प्रभाव पर सकता है। MDH और एवरेस्ट मसालों के नमूने फेल होने के बाद शासन के निर्देश पर सैंपल लिए गए थे। खाद्य एवं औषधि विभाग ने मई में अभियान चलाकर शहर की 16 मसाला फैक्ट्रियों पर रेड की थी। MDH और एवरेस्ट के मसालों पर सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में प्रतिबंध लगा दिए थे।


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Thursday, August 1, 2024

खुलासा : माता पिता ध्यान दे स्कूल में अपने बच्चें धर्मांतरण की चपेट में तो नहीं आ रहे है?

 2  August 2024

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🚩उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रविवार (28 जुलाई, 2024) को ईसाई धर्मान्तरण के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था, तब पुलिस ने नाबालिग बच्चों को ईसाई बनाने के आरोप में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान प्रेम जायल, विनोद और नितिन के तौर पर हुई थी। बाद में पुलिस ने इस रैकेट की जाँच की तो कई नए और बड़े खुलासे हुए। बताया जा रहा है कि बच्चों को ईसाई धर्म का इतिहास पढ़ा कर उसी से संबंधित इम्तिहान लिया जाता था। इस एग्जाम में मिले नंबरों के ही आधार पर नाबालिगों का धर्म परिवर्तन करवाया जाता था


🚩मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र के इस मामले में आरोपित पादरी अपने साथियों सहित पहले गरीब बच्चों को चिन्हित किया करता था, फिर इन बच्चों को खाने-पीने की चीजें देकर मेलजोल बढ़ाया जाता था। बच्चों के घर जाने पर ये आरोपित खुद को धर्म उपदेशक और शिक्षक बताया करते थे, फिर इनके परिवार से मिलकर उन्हें बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं आदि का लालच दिया जाता था। शुरुआत में गरीब बच्चों को पढ़ाई के नाम पर अपने ठिकाने पर बुलाया जाता था। बच्चों को नए-नए खेल भी खिलाए जाते थे जिस से वो बार-बार वहाँ जाना चाहते थे।


🚩यहाँ उन सभी को पहले ईसाई इतिहास बताया जाता था। बाद में इसी इतिहास से सवाल बना कर उन बच्चों का एग्जाम लिया जाता था। आरोप है कि ईसाई इतिहास की इस परीक्षा में हासिल किए जाने वाले नम्बरों के आधार पर भी आरोपित धर्मान्तरण के लिए बच्चों का चुनाव करते थे। जिस बच्चे को जितने ज्यादा नंबर मिलते थे उनको उतनी ही अधिक सुविधा और सहूलियत दी जाती थी। इस काम के लिए बाहर से फंडिंग हो रही थी जिसके स्रोत की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस न सिर्फ आरोपितों के खातों बल्कि उनकी कॉल रिकॉर्ड भी निकलवा रही है। इनके पास मिले ईसाई साहित्यों की भी जाँच करवाई जा रही है।


🚩क्या है FIR में

गौरतलब है कि इन सभी आरोपितों को गुलशन कुमार नाम के शिकायतकर्ता की तहरीर पर गिरफ्तार किया गया है। गुलशन कुमार का आरोप है कि आरोपित पहले भी कई बच्चों को ईसाई बना चुके है। उनको इस साजिश की भनक लगी तो वो भी आरोपितों की सभा में बैठने गए, तब बच्चों के साथ पादरी प्रेम जोनल ने उन्हें भी ईसाई बनने का लालच दिया। आरोपितों ने गुलशन को नीले कवर वाली एक किताब दी जिस पर सुनहरे रंग से ‘पवित्र शस्त्र भजन संहिता और नीति वचन’ लिखा हुआ था।


🚩पादरी जोनल ने गुलशन के हाथ में किताब पकड़ाते हुए उनसे कहलवाया, “हे ईशु भगवान। मैं आपकी शरण में आ गया हूँ और ईसाई धर्म कबूल करता हूँ।” पीड़ित के मुताबिक उनके साथ आरोपितों ने धोखा और विश्वासघात किया है। बकौल पीड़ित इस हरकत से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहात हुई है। पुलिस ने इस शिकायत पर तीनों आरोपितों के खिलाफ lभारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5(1) के तहत कार्रवाई की है। मामले में जाँच व आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। स्त्रोत: ओप इंडिया 


🚩गांधीजी कहते थे…

“हमें गोमांस भक्षण और शराब पीने की छूट देने वाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए। धर्म परिवर्तन वह ज़हर है जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है। मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा, रीति रिवाज़ के द्वारा विघटन हुआ है। यदि मुझे क़ानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म परिवर्तन बंद करवा देता। इसे तो मिशनरियों ने व्यापार बना लिया है पर धर्म आत्मा की उन्नति का विषय है। इसे रोटी, कपड़ा या दवाई के बदले में बेचा या बदला नहीं जा सकता।


🚩महान विचारक वीर सावरकर धर्मान्तरण को राष्ट्रान्तरण मानते थे। वे कहते थे "यदि कोई व्यक्ति धर्मान्तरण करके ईसाई या मुसलमान बन जाता है तो फिर उसकी आस्था भारत में न रहकर उस देश के तीर्थ स्थलों में हो जाती है जहाँ के धर्म में वह आस्था रखता है, इसलिए धर्मान्तरण यानी राष्ट्रान्तरण है।


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Wednesday, July 31, 2024

धर्मांतरण रोकने की सजा? माँ-बाप-बहन सब मर गए, पर 24 साल से दारा सिंह को नहीं मिली पेरोल

1  August 2024

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🚩साल 1999 में ओडिशा के मनोहरपुर में स्थानीय लोगों को ईसाईयत में धर्मान्तरण कराने के आरोप में ऑस्ट्रेलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस की हत्या उनकी 2 बेटों के साथ कर दी गई थी। इस मामले में दारा सिंह का नाम चर्चा में आया था। साल 2000 में ओडिशा की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दारा सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से दारा सिंह को एक दिन का भी परोल नहीं मिला है।


🚩दारा सिंह की गिरफ्तारी के 24 साल गुजर गए है। इन 24 वर्षों में दारा सिंह के परिवार में कई बदलाव हुए है। परिवार कई बार ख़ुशी और गम के मौकों से गुजरा है। इन सभी अवसरों पर तमाम प्रयासों के बावजूद दारा सिंह को परोल नहीं मिला। ऑपइंडिया ने दारा सिंह के परिवार से मुलाकात करके इस मामले की शुरुआत से अब तक के हालातों की जानकारी जुटाई है।


🚩ओडिशा में दारा सिंह ने क्योंझर जिले में प्राइवेट तौर पर बच्चों को पढ़ाने की नौकरी कर ली। वे बच्चों को हिंदी भाषा पढ़ाते थे और साथ ही उन्हें हिन्दू धर्म की अच्छी अच्छी बातें बताते थे। यहाँ बताना जरूरी है कि दारा सिंह का असली नाम रवींद्र कुमार पाल है और वे मूलत: उत्तर प्रदेश के औरैया के रहनेवाले थे। हालाँकि, अब उन्होंने ओडिशा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।


🚩वो स्कूल से समय मिलने के बाद जनजातीय समुदाय की बस्तियों में घूमने लगे और उन्हें हिन्दू धर्म के बारे में जागरूक करने लगे। 


🚩जब दारा सिंह ने बजरंग दल पदाधिकारी के तौर पर कार्यभार सँभाला तब ओडिशा ईसाई धर्मान्तरण से बुरी तरह से प्रभावित था। उनका कहना है कि गाँव के गाँव कन्वर्ट हो रहे थे। कन्वर्जन के इस रैकेट का मुखिया ग्राहम स्टेंस को माना जा रहा था। ग्राहम स्टेंस ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला एक पादरी था।


🚩बताते है कि ग्राहम स्टेंस 25 साल पहले लोगों को प्रभावित करने के लिए खूब पैसे उड़ाता है। वह उस समय वैसे ही जीप में चला करता था, जिस तरह की गाड़ी में उस समय सांसद-विधायक चला करते थे। बकौल अरविन्द, उनके भाई ने धर्मान्तरण के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। इसी वजह से वो कई साजिशकर्ताओं के निशाने पर भी आ चुके थे।


🚩दारा सिंह के भाई अरविन्द कुमार बताते है कि क्योंझर के साथ कटक व एक अन्य जेल में दारा सिंह की अदला-बदली की गई। कटक जेल में दारा सिंह पर विवाद की एक FIR अलग से भी दर्ज की गई थी। पिछले 24 वर्षों में उनके पिता, माँ और फिर एक बहन की अकाल मौत हो गई। ये सभी दारा सिंह के लिए हमेशा परेशान रहते थे।


🚩इन सभी की इच्छा मौत से पहले एक बार दारा सिंह से मिलने की थी। हालाँकि, इन सभी की इच्छा अधूरी ही रह गई। दारा सिंह ने अपने पिता, माता और बहन आदि की मौत के बाद पेरोल की अर्जी डाली पर उनको जेल से बाहर नहीं निकलने दिया गया। किसी न किसी स्तर पर दारा सिंह की अर्जी पर अड़ंगा डाला गया।


🚩अरविंद कुमार का कहना है कि उनके परिवार को अभी भी उम्मीद है कि दारा सिंह अपने जीवन के अंतिम समय को अपने घर और परिवार के साथ ही बिताएँगे। फिलहाल, अगस्त2024 में दारा सिंह की रिहाई वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।


🚩दारा सिंह जैसा ही मामला आशाराम बापू का है।


🚩हिन्दू संत आशाराम बापू ने देशभर के आदिवासी क्षेत्रों में जाकर उनको अनाज, पैसे, जीवन उपयोगी सामग्री, मकान बनाकर दिए और सनातन हिन्दू धर्म की महिमा समझाई, लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवाई, करोड़ों लोगों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक किया, इस कारण से मिशनरियों की दुकान बंद होने लगी उसके बाद विदेशी कंपनियों, ईसाई मिशनरियों और स्वार्थी नेताओं ने मिलकर उनको एक षड्यंत्र के तहत बिकाऊ मीडिया द्वारा बदनाम करवाया और फर्जी केस बनाकर 2013 में जेल भिजवाया गया।आज 88 वर्ष की उम्र है,12 साल में 1 बार भी जमानत नहीं मिली, सोचो कितनी बड़ी साजिश रची है?


🚩क्या समाज, राष्ट्र और संस्कृती की सेवा करना गुनाह है?


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