Thursday, August 31, 2023

वर्ष 2013 में 31 अगस्त की आधी रात को आशाराम बापू को गिरफ्तार क्यों किया था ? जानिए.....

 31 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩आज से 11 साल पहले 31 अगस्त 2013 को ठीक रात के 12 बजे 87 वर्षीय हिन्दू संत आशारामजी बापू की गिरफ्तारी हुई थी। विदेशी फंडिंग वाली मीडिया ने आज तक जितना उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चलाया होगा शायद किसी के खिलाफ चलाया होगा, क्योंकि कांग्रेस सरकार के समय हिंदू धर्म के पक्ष में कोई बोलता नही था उस समय आशाराम बापू ने ईसाई बना दिए गए लाखों हिंदू आदिवासियों की घर वापसी करवा दी थी, करोड़ों लोगों को सनातन धर्म के प्रति कट्टर बना दिया था, सैंकड़ों गुरुकुल और 17000 से अधिक बाल संस्कार केंद्र खोलकर बच्चों को भारतीय संस्कृति के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया, कत्लखाने जाती हजारों गायों को बचाकर अनेकों गौशालाएं खोल दी, वेलेंटाइन डे के दिन करोडों लोगों द्वारा मातृ-पितृ पूजन शुरू करवा दिया । विदेशों में भी उनके लाखों अनुयायी बन चुके थे और वे भारतीय संस्कृति की वहाँ प्रचार करने लगे थे, करोड़ों लोगों को व्यभिचारी से सदाचारी बना दिया उसके बाद उन करोडों लोगों ने व्यसन छोड़ दिये, सिनेमा में जाना छोड़ दिया, क्लबों में जाना छोड़ दिया, ब्रह्मचर्य का पालन करने लगे, स्वदेशी अपनाने लगे इसके कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अरबों-खरबों रुपयों का घाटा हुआ और ईसाई मिशनरियों की धर्मान्तरण की दुकानें बंद होने लगीं, फिर पूरे सुनियोजित ढंग से उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा गया।


🚩बताया जाता है कि अरबों-खरबों का कंपनियों को घाटा होने और धर्मान्तरण की दुकानें बंद होने के कारण हिन्दू धर्म व राष्ट्र विरोधी ताकतों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा । डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी और सुदर्शन न्यूज़ चैनल के सुरेश चव्हाणके जी ने बताया है कि आशाराम बापू को पहले ही बता दिया था कि आप जो धर्मान्तरण रोकने का कार्य कर रहे हैं, उसके कारण वेटिकन सिटी बहुत नाराज है और वे सोनिया गांधी को बोलकर आपको जेल भेजने की तैयारी कर रहा है, पर आशारामजी बापू ने कहा कि “देश व धर्म की रक्षा के लिए सूली पर चढ़ जाऊंगा लेकिन हिन्दू धर्म की हानि नहीं होने दूंगा।”


🚩आपको बता दें कि उनके खिलाफ षडयंत्र तो 2004 से शुरू हो गया था क्योंकि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी की गिरफ्तारी के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था । 2008 में साजिस ने जोर पकड़ा। उसमें उनके गुरुकुल के दो बच्चों की संदिग्ध रीति से मौत हो गई और तांत्रिक विद्या बताकर मीडिया ने उनके विरुद्ध इतना कुप्रचार किया कि आम जनता में भी रोष व्याप्त होने लगा; बाद में सुप्रीम कोर्ट ने और उसके बाद गुजरात सरकार ने क्लीनचिट दी लेकिन मीडिया ने क्लीनचिट की खबर छुपा दिया। 2008 में उनको जेल भेजने की तैयारी थी, लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए लेकिन विदेशी फंड से चलने वाली मीडिया उनके वैदिक होली का कुप्रचार करने लगी अर्थात उनके हर सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार कार्य की आलोचना करने लगी, उनको बदनाम करना जारी रखा।


🚩साल 2013 में उनके खिलाफ एक FIR दर्ज हुई लेकिन आपको बता दें कि आरोप लगाने वाली लड़की रहने वाली थी शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) की थी, पढ़ती थी छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) में, घटना जोधपुर (राजस्थान) की बता रही है और FIR करवाती है तथाकथित घटना के 5 दिन बाद दिल्ली में वो भी रात के 02:45 बजे; दिलचस्प बात तो ये है कि FIR में उस लड़की ने लिखवाया है कि मैं कमरे के अंदर थी और मुझ पर आशाराम बापू ने डेढ़ घण्टे तक हाथ घुमाया और मेरी माँ कमरे के बाहर गेट पर बैठी थी। तो क्या लड़की चिल्ला नहीं सकती थी? चिल्लाती तो तुरन्त ही उसकी मां को पता चल जाता। दूसरी बात कि वो घटना रात को 10:30 के आसपास की बता रही थी जबकि वो जिसके घर में रुकी थी वे लोग बता रहे थे कि 10:30 बजे तो हमारे घर में थी और हमने दरवाजा को लॉक कर दिया था और कॉल डिटेल के अनुसार तथाकथित घटना के समय लड़की अपने एक फ्रेंड से बात कर रही थी। जिनके घर पर वो रुकी थी,उन्होंने भी बताया कि सुबह हमारे साथ लड़की हंस खेल रही थी, हम उनको स्टेशन पर भी छोड़कर आये फिर उनको अचानक क्या हुआ कि FIR कर दिया। FIR करने के बाद आरोप लगाने वाली लड़की को उसकी सहेली ने पूछा कि ऐसे झूठे आरोप क्यों लगा रही है ?? तो उसने जवाब दिया कि मेरे को मेरे माता-पिता जैसे बोल रहे हैं वैसा कर रही हूं। फिर लड़की जो तथाकथित घटना बता रही है तो उस समय तो आशाराम बापू किसी कार्यक्रम में थे, उनके साथ 50-60 लोग भी थे जिन्होंने कोर्ट में गवाही भी दी है।


🚩आपको बता दें कि जब लड़की का मेडिकल करवाया गया लेकिन रिपोर्ट में एक खरोंच का निशान तक भी नहीं आया अर्थात लड़की को टच भी नही किया गया था और FIR में भी लिखा है कि रेप हुआ ही नहीं सिर्फ हाथ घुमाया। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में वो भी बात खारिज हो गई लेकिन मीडिया ने दुष्प्रचार किया कि लड़की के साथ रेप हुआ है, जबकि खुद जांच ऑफिसर अजय पाल लाम्बा ने बताया कि रेप का आरोप है ही नहीं, तथाकथित छेड़छाड़ का आरोप है, फिर भी विदेशी फंडेड बिकाऊ मीडिया उनको बदनाम करती रही।


🚩आपको ये भी बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जन राज सुराणा ने न्यायालय में साजिश का खुलासा करते हुए बताया था कि Prosecution Witness PW-06 मणई फार्म हाउस के मालिक रामकिशोर ने ये कहीं नहीं कहा कि 15/08/2013 को लड़की या उसके माता-पिता रात्रि को 10 बजे कुटिया या कुटिया के आस-पास गए तो फिर जो रेप कमिट हुआ क्या वो हवा में कमिट हुआ ? इन्होंने उसके existence को ही नकार दिया।


🚩अब प्रश्न ये पैदा होता है कि ये लड़की आखिर आरोप क्यों लगा रही है? इसके लिए हमने जिज्ञासा भावसार का स्टेटमेंट रीड किया। इसमें अमृत प्रजापति, कर्मवीर, राहुल सचान, महेंद्र चावला आदि जो बहुत से गवाह थे उन्होंने मिलकर conspiracy (षड्यंत्र) की- ऐसा कहा गया है। उनके अहमदाबाद स्थित आश्रम को एक फैक्स भेजा था जिसमें अमृत प्रजापति व उनके साथियों के द्वारा ये कहा गया था कि 50 करोड़ रुपये दो वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाओ। हम झूठी लड़कियां तैयार करेंगे, प्लांट करेंगे जिसके कारण बापूजी जिंदगी भर तक जेल में रहेंगे, कभी बाहर नहीं आ सकेंगे।


🚩इस बात के लिए साजिस वडोदरा (गुजरात) में की गई थी। जिसमें इंडिया न्यूज के दीपक चौरसिया (वर्तमान में जी न्यूज़) भी शामिल था जो मीडिया के ऊपर प्रचार प्रसार कर रहा था, कर्मवीर (परिवादिता का पिता) भी शामिल था। सबने मिलकर जो conspiracy की थी वो जिज्ञासा भावसार के सामने की थी। इन सबका जो एक motive था, वो 50 करोड़ की ब्लैकमेलिंग का था। 50 करोड़ नहीं देने के कारण से मणई गाँव का पूरा घटनाक्रम बनाया गया है।


🚩इस तरीके से सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया और उनको 76 उम्र में आधी रात में गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में चल रहे ट्रायल जिसमें अपराध सिद्ध नहीं हुआ और जो 5 साल तक केस चला लेकिन उनको जमानत नहीं दी गई जबकि उनके केस की पैरवी दिग्गज नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी पैरवी कर चुके हैं और उनको लड़की के बयान को सही मानते हुए POCSO एक्ट लगाकर सेशन कोर्ट ने उम्रकैद सजा सुना दी,जबकि लड़की बालिग थी, उसके अलग अलग बर्थ सर्टिफिकेट से साबित भी हुआ था और बापू आशारामजी के पास निर्दोष होने के अनेकों प्रमाण हैं, फिर भी उन्हें उम्र कैद की सजा सुना दी गई । वो भी केवल एक लड़की के बयान पर। आपको बता दें कि निचली अदालत के कई फैसले हाईकोर्ट ओर सुप्रीम कोर्ट बदल देती है क्योंकि कई बार जल्दीबाजी में गलत निर्णय ले लिया जाता है। खैर जब वे ऊपरी कोर्ट में जायेंगे निर्दोष बरी होंगे लेकिन उनका देश व धर्म के लिए कार्य करने का इतना कीमती समय कौन लौटा पायेगा?


🚩सलमान खान को निचली अदालत से सजा होने के बाद 1 घंटे में ही ऊपरी कोर्ट तुरंत जमानत दे देती है और आतंकवादियों के हथियार रखने वाले संजय दत्त को बार बार पेरोल देती रही वो ही न्यायालय हिंदू संत आसाराम बापू को 10 साल में एक दिन भी जमानत अथवा पेरोल नहीं दे पाई।


🚩जो कानून पूरे भारत में कोरोना फैलाने वाले मौलाना साद को और दिल्ली के इमाम बुखारी पर सैंकड़ों गैर जमानती वारंट होने के बाद भी आजतक गिरफ्तार नहीं कर पाया वही कानून हिंदू संत आशाराम बापू को 10 साल से जेल में रखे है और मीडिया भी सिर्फ हिंदू धर्म के साधु-संतों के खिलाफ झूठी कहानियां बनाकर बदनाम करती है वही मीडिया इन सबपर चुप है और सेक्युलर हिंदू तो वामपंथी मीडिया की बात को मानकर अपने ही धर्मगुरुओं के खिलाफ बोलना चालू कर देते हैं।


🚩इसलिए हिंदू अब समझ जाओ कि सनातन धर्म की रक्षा करने वालों को कैसे फंसाया जाता है, अभी समय है अपने धर्मगुरुओं के खिलाफ हो रहे षड्यंत्र पर आवाज उठाओ, उनकी रिहाई करवाओ नहीं तो आने वाले समय पर देश अफगानिस्तान जैसा न बन जाए।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Wednesday, August 30, 2023

रक्षा बंधन कब और कैसे शुरू हुआ

कौन सी राखी बांधने से साल भर रक्षा बनी रहती है भाई की जानिए...... 


30 August 2023


http://azaadbharat.org



🚩भारतीय संस्कृति में श्रावणी पूर्णिमा को मनाया जानेवाला रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के पवित्र स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व मात्र रक्षासूत्र के रूप में राखी बाँधकर रक्षा का वचन देने का ही नहीं, वरन् प्रेम, स्नेह, समर्पण, संस्कृति की रक्षा, निष्ठा के संकल्प के जरिये हृदयों को बाँधने का वचन देने का भी पर्व है। हमारी भारतीय संस्कृति त्याग और सेवा की नींव पर खड़ी होकर पर्वरूपी पुष्पों की माला से सुसज्जित है। इस माला का एक पुष्प रक्षाबन्धन का पर्व भी है। इस साल 30 अगस्त को रक्षाबंधन है।


🚩वैदिक रक्षासूत्र बाँधने की परम्परा तो वैदिक काल से रही है, जिसमें यज्ञ, युद्ध, आखेट, नये संकल्प और धार्मिक अनुष्ठान के आरम्भ में कलाई पर सूत का धागा (मौली) बाँधा जाता है।


🚩कैसे शुरू हुआ रक्षाबंधन


🚩सब कुछ देकर त्रिभुवनपति को अपना द्वारपाल बनानेवाले बलि को लक्ष्मीजी ने राखी बाँधी थी। राखी बाँधनेवाली बहन अथवा हितैषी व्यक्ति के आगे कृतज्ञता का भाव व्यक्त होता है। राजा बलि ने पूछा : ‘‘तुम क्या चाहती हो?” लक्ष्मीजी ने कहा : ‘‘वे जो तुम्हारे नन्हे-मुन्ने द्वारपाल हैं, उनको आप छोड़ दो।” भक्त के प्रेम से वश होकर जो द्वारपाल की सेवा करते हैं, ऐसे भगवान नारायण को द्वारपाल के पद से छुड़ाने के लिए लक्ष्मीजी ने भी रक्षाबंधन-महोत्सव का उपयोग किया।


🚩शचि ने इन्द्र को राखी बाँधी तो इन्द्र में प्राणबल का विकास हुआ और इन्द्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की। धागा तो छोटा सा होता है लेकिन बाँधने वाले का शुभ संकल्प और बँधवाने वाले का विश्वास काम कर जाता है।


🚩कुंती ने अभिमन्यु को राखी बाँधी और जब तक राखी का धागा अभिमन्यु की कलाई पर बँधा रहा तब तक वह युद्ध में जूझता रहा। पहले धागा टूटा, बाद में अभिमन्यु मरा। उस धागे के पीछे भी तो कोई बड़ा संकल्प ही काम कर रहा था कि जब तक वह बँधा रहा, अभिमन्यु विजेता बना रहा।


🚩लोकमान्य तिलक जी कहते थे कि मनुष्यमात्र को निराशा की खाई से बचाकर प्रेम, उल्लास और आनंद के महासागर में स्नान कराने वाले जो विविध प्रसंग हैं, वे ही हमारी भारतीय संस्कृति में हमारे हिन्दू पर्व हैं। हे भारतवासियों ! हमारे ऋषियों ने हमारी संस्कृति के अनुरूप जीवन में उल्लास, आनंद, प्रेम, पवित्रता, साहस जैसे सदगुण बढ़ें ऐसे पर्वों का आयोजन किया है।


🚩तिलक जी ने यह ठीक ही कहा कि अपने राष्ट्र की नींव धर्म और संस्कृति पर यदि न टिकेगी तो देश में सुख, शांति और अमन-चैन होना संभव नहीं है।

रक्षाबंधन के पर्व पर एक-दूसरे को आयु, आरोग्य और पुष्टि की वृद्धि की भावना से राखी बाँधते हैं।


🚩रक्षाबंधन का उत्सव श्रावणी पूनम को ही क्यों रखा गया ?


🚩भारतीय संस्कृति में संकल्पशक्ति के सदुपयोग की सुंदर व्यवस्था है। ब्राह्मण कोई शुभ कार्य कराते हैं तो कलावा (रक्षासूत्र) बाँधते हैं ताकि आपके शरीर में छुपे दोष या कोई रोग, जो आपके शरीर को अस्वस्थ कर रहे हों, उनके कारण आपका मन और बुद्धि भी निर्णय लेने में थोड़े अस्वस्थ न रह जायें। सावन के महीने में सूर्य की किरणें धरती पर कम पड़ती हैं, किस्म-किस्म के जीवाणु बढ़ जाते हैं, जिससे किसीको दस्त, किसीको उलटियाँ, किसीको अजीर्ण, किसीको बुखार हो जाता है तो किसीका शरीर टूटने लगता है । इसलिए रक्षाबंधन के दिन एक-दूसरे को वैदिक रक्षासूत्र बाँधकर तन-मन-मति की स्वास्थ्य-रक्षा का संकल्प किया जाता है । रक्षासूत्र में कितना मनोविज्ञान है, कितना रहस्य है!


🚩अपना शुभ संकल्प और शरीर के ढाँचे की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह श्रावणी पूनम का रक्षाबंधन महोत्सव है।


🚩‘रक्षाबंधन के दिन वैदिक रक्षासूत्र बाँधने से वर्ष भर रोगों से हमारी रक्षा रहे, बुरे भावों से रक्षा रहे, बुरे कर्मों से रक्षा रहे’- ऐसा एक-दूसरे के प्रति सत्संकल्प करते हैं।


🚩कैसे बनायें वैदिक रक्षासूत्र ?


🚩दुर्वा, चावल, केसर, चंदन, सरसों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर एक पीले रंग के रेशमी कपड़े में बांध लें, यदि इसकी सिलाई कर दें तो यह और भी अच्छा रहेगा। इन पांच पदार्थों के अलावा कुछ राखियों में हल्दी, कौड़ी व गोमती चक्र भी रखा जाता है। रेशमी कपड़े में लपेटकर बांधने या सिलाई करने के पश्चात इसे कलावे (मौली) में पिरो दें। आपकी राखी तैयार हो जाएगी।


🚩वैदिक राखी का महत्व :


🚩वैदिक राखी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सावन के मौसम में यदि रक्षासूत्र को कलाई पर बांधा जाये तो इससे संक्रामक रोगों से लड़ने की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। साथ ही यह रक्षासूत्र हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचरण भी करता है।


🚩रक्षाबंधन के दिन बहन भैया के ललाट पर तिलक-अक्षत लगाकर संकल्प करती है कि ‘जैसे शिवजी त्रिलोचन हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, वैसे ही मेरे भाई में भी विवेक-वैराग्य बढ़े, मोक्ष का ज्ञान, मोक्षमय प्रेमस्वरूप ईश्वर का प्रकाश आये’। ‘मेरे भैया की सूझबूझ, यश, कीर्ति और ओज-तेज अक्षुण्ण रहें।’


🚩बहनें रक्षाबंधन के दिन ऐसा संकल्प करके रक्षासूत्र बाँधें कि ‘हमारे भाई भगवत्प्रेमी, चरित्रवान बनें ।’ और भाई सोचें कि ‘हमारी बहन भी चरित्रप्रेमी, भगवत्प्रेमी बने।’ अपनी सगी बहन व पड़ोस की बहन के लिए अथवा अपने सगे भाई व पड़ोसी भाई के प्रति ऐसा सोचें। आप दूसरे के लिए भला सोचते हो तो आपका भी भला हो जाता है। संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। अतः आप ऐसा संकल्प करें कि हमारा आत्मस्वभाव प्रकटे।


🚩सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम्। सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।

‘इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है।’ (भविष्य पुराण)


🚩येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

जिस पतले रक्षासूत्र ने महाशक्तिशाली असुरराज बलि को बाँध दिया, उसीसे मैं आपको बाँधती हूँ। आपकी रक्षा हो। यह धागा टूटे नहीं और आपकी रक्षा सुरक्षित रहे। – यही संकल्प बहन भाई को राखी बाँधते समय करे। शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय ‘अभिबध्नामि’ के स्थान पर ‘रक्षबध्नामि’ कहें।


🚩रक्षाबंधन पर्व समाज के टूटे हुए मनों को जोड़ने का सुंदर अवसर है। इसके आगमन से कुटुम्ब में आपसी कलह समाप्त होने लगते हैं, दूरी मिटने लगती है, सामूहिक संकल्पशक्ति साकार होने लगती है।


🚩उपाकर्म संस्कार: इस दिन गृहस्थ ब्राह्मण व ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गौ-मूत्र को मिलाकर पंचगव्य बनाते हैं और उसे शरीर पर छिड़कते, मर्दन करते व पान करते हैं, फिर जनेऊ बदलकर शास्त्रोक्त विधि से हवन करते हैं। इसे उपाकर्म कहा जाता है। इस दिन ऋषि उपाकर्म कराकर शिष्य को विद्याध्ययन कराना आरम्भ करते थे।


🚩उत्सर्जन क्रिया: श्रावणी पूर्णिमा को सूर्य को जल चढाकर सूर्य की स्तुति तथा अरुंधती सहित सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है और दही-सत्तू की आहुतियाँ दी जाती हैं। इस क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। ( स्रोत: संत आसारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित साहित्य ऋषि प्रसाद एवं लोक कल्याण सेतु से संकलित )


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Tuesday, August 29, 2023

अपने घर में ही इस तरीक़े से वैदिक राखी बनाए.....

 पूरी वैदिक रीति और विधि से रक्षा-सूत्र बांधने से होंगे कई फायदे....

राखी बांधने के मुर्हूत का भी अवश्य ध्यान रखें.....


29 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩रक्षाबंधन पर्व समाज के टूटे हुए मनों को जोड़ने का सुंदर अवसर है। इसके आगमन से कुटुम्ब में आपसी कलह समाप्त होने लगते हैं, दूरी मिटने लगती है, सामूहिक संकल्पशक्ति साकार होने लगती है।


🚩वैदिक राखी का महत्व :


🚩वैदिक राखी का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में वर्णित है , कि सावन की पूर्णिमा पर यदि रक्षा-सूत्र को संकल्प सहित कलाई पर बांधा जाये तो इससे संक्रामक रोगों से लड़ने की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। साथ ही यह रक्षा-सूत्र हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।


 🚩कैसे बनायें वैदिक रक्षासूत्र :


🚩दुर्वा, चावल, केसर ( कुमकुम) , चंदन (हल्दी ) और सरसों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर एक पीले रेशमी कपड़े में बांध लें यदि इसकी सिलाई कर दें तो यह और भी अच्छा रहेगा। इन पांच पदार्थों के अलावा कुछ राखियों में कौड़ी व गोमती चक्र भी रखा जाता है। रेशमी कपड़े में लपेट कर बांधने या सिलाई करने के पश्चात इसे कलावे (मौली) में पिरो दें। आपकी राखी तैयार हो जाएगी।


🚩नोट: यह वैदिक राखी आप ऑनलाइन इस निम्नलिखित वेबसाइट से भी ख़रीद सकते हैैं।

https://www.ashramestore.com/Vedic_Rakshasutra_(Pack_of_12)-2261


🚩‘रक्षाबंधन के दिन वैदिक रक्षासूत्र बाँधने से वर्ष भर रोगों से हमारी रक्षा रहे, बुरे भावों से रक्षा रहे, बुरे कर्मों से रक्षा रहे’- ऐसा एक-दूसरे के प्रति सत्संकल्प करना चाहिए। 


🚩रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भईया के ललाट पर तिलक-अक्षत लगाकर संकल्प करें कि , ‘जैसे शिवजी त्रिलोचन हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, वैसे ही मेरे भाई में भी विवेक-वैराग्य बढ़े, मोक्षमय , प्रेमस्वरूप ईश्वर का प्रकाश आए , ज्ञान आए । मेरे भईया की सूझबूझ, यश, कीर्ति और ओज-तेज अक्षुण्ण रहे ।’


🚩बहनें रक्षाबंधन के दिन ऐसा संकल्प करके रक्षासूत्र बाँधें कि ‘हमारे भाई धर्म प्रेमी, भगवत्प्रेमी बनें।’ और भाई सोचें कि ‘हमारी बहन भी चरित्रप्रेमी, धर्मप्रेमी, भगवत्प्रेमी बने।’ अपनी सगी बहन व पड़ोस की बहन के लिए अथवा अपने सगे भाई व पड़ोसी भाई के प्रति ऐसा संकल्प दृढ़ करें । आप दूसरे के लिए भला सोचते हो , तो निःसंदेह आपका भी भला प्रकृति द्वारा हो ही जाता है। संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। अतः इस दिन विशेषकर आप ऐसा संकल्प करें , कि हमारा आत्मस्वभाव प्रकटे ।


🚩भविष्य पुराण में एक श्लोक है...


सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम् ।

सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत् ।।

अर्थात्

‘इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षा-सूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है।’


🚩रक्षा-सूत्र बांधते हुए निम्नलिखित मंत्र बोलें...


येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।

तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ।।

अर्थात्

"जिस पतले रक्षा-सूत्र ने महाशक्तिशाली असुरराज बलि को बाँध दिया, उसी से मैं आपको बाँधती हूँ। आपकी रक्षा हो। यह धागा टूटे नहीं और आप सुरक्षित रहें।"

यही संकल्प बहन भाई को राखी बाँधते समय करे। शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय ‘अभिबध्नामि’ के स्थान पर ‘रक्षबध्नामि’ कहें ।


🚩उपाकर्म संस्कार : इस दिन गृहस्थ ब्राह्मण व ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गौ-मूत्र को मिलाकर पंचगव्य बनाते हैं और उसे शरीर पर छिड़कते, मर्दन करते व पान करते हैं, फिर जनेऊ बदलकर शास्त्रोक्त विधि से हवन करते हैं। इसे उपाकर्म कहा जाता है। पूर्वकाल में गुरुकुलों में इसी दिन ऋषि उपाकर्म कराकर शिष्य को विद्याध्ययन कराना आरम्भ करते थे।


🚩उत्सर्जन क्रिया : श्रावणी पूर्णिमा को सूर्य को जल अर्पित कर सूर्य की स्तुति तथा अरुंधती सहित सप्तर्षियों की पूजा की जाती है और दही-सत्तू की आहुतियाँ दी जाती हैं। इस क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

( स्रॊत: संत आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित साहित्य ऋषि प्रसाद एवं लोक कल्याण सेतु से संकलित )


🚩30 अगस्त को सुबह से रात्रि के 09:02 तक भद्रा काल है, इस समय राखी नहीं बाधें।


🚩रक्षा सूत्र बाँधने का शुभ मुहूर्त -


🚩30 अगस्त रात्रि 9:02 से 11:13 बजे तक - शुभ अमृत चौघड़िया


🚩31 अगस्त प्रातः 3:32 से 4:54 - ब्रह्म मुहूर्त लाभ चौघड़िया


🚩31 अगस्त सुबह 6:21 से 7:06 तक - शुभ चौघड़िया


🚩इस समय के बीच अपने अनुकूल समयानुसार आप राखी बांध सकते हैं।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Monday, August 28, 2023

पत्रकार अमाना बेगम अंसारी ने पश्चिमी मीडिया को लिया आड़े हाथ

28 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩पत्रकार अमाना बेगम अंसारी, बीबीसी इंटरव्यू भारत

बीबीसी के साथ इंटरव्यू में मुस्लिम पत्रकार अमाना बेगम अंसारी ने कहा पश्चिमी मीडिया भारत की गलत तस्वीर पेश कर रहा है।


🚩भारतीय शोधकर्ता एवं पत्रकार अमाना बेगम अंसारी ने पश्चिमी मीडिया को देश में मुस्लिमों के साथ भेदभाव पर नसीहत देने पर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने बीबीसी को भी इस बात पर खरी-खरी सुनाई। दरअसल, बीबीसी ने भारत की खराब तस्वीर पेश करने के अपने रवैये के चलते हाल ही में मणिपुर हिंसा पर चर्चा के लिए एक इंटरव्यू की मेजबानी की थी।


🚩बीबीसी में इंटरव्यू लेने वाले शख्स ने मणिपुर प्रकरण का इस्तेमाल इस तरह की हिंसक घटनाओं पर भारत की छवि और कड़े कदम उठाने की उसकी काबिलियत पर सवाल खड़े करने के उद्देश्य से किया था। बीबीसी पत्रकार ने हिंसा की कुछ छिटपुट घटनाओं का इस्तेमाल करके इस बात को बारीकी से आगे बढ़ाने का भी कोशिश की कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत एक बहुसंख्यकवादी देश है, जो नियमित तौर से अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिमों पर जुल्म ढाता है।


🚩शोधकर्ता और नीति विश्लेषक अमाना बेगम अंसारी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा थीं। इस दौरान उन्होंने भारत विरोधी प्रचार और दावों का भंडाफोड़ करते हुए बीबीसी को करारा जवाब दिया। बीबीसी के साथ इंटरव्यू वाली 2 घंटे 53 मिनट की क्लिप में अंसारी भारत के बारे में पक्षपाती धारणा के लिए पश्चिमी मीडिया पर निशाना साधती नजर आ रही हैं।


🚩अंसारी ने कहा कि हिंसा की कुछ अलग घटनाओं के आधार पर भारत के बारे में पश्चिमी मीडिया गलत धारणा बना रहा है। अंसारी ने तर्क दिया कि पश्चिमी देशों को कोई भी फैसला लेने से पहले भारत की जटिलताओं को समझना चाहिए। इसमें वह यूपी का उदाहरण देते हुए कहती हैं कि पिछले 10 साल में वहाँ अपराध दर में 60 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।


🚩इंटरव्यू के दौरान अमाना अंसारी ने कहा, “पश्चिमी मीडिया में अधिकार की एक अजीब भावना है, जो उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर उपदेश देने और उसमें दखलअंदाजी करने का पूरा हक है।”


🚩उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया, भारत में कई प्रचार आउटलेटों और कॉन्ग्रेसी जैसे विपक्षी दलों के अटूट समर्थन के साथ भारत के मुस्लिमों के खिलाफ ‘भेदभावपूर्ण’ और ‘पूर्वाग्रह से युक्त’ होने की तस्वीर दिखाने की लगातार कोशिश करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह काम बीते 10 साल से अधिक हो रहा है, जब से भाजपा सत्ता में आई हैं।


🚩उन्होंने आगे कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय आउटलेट ‘डरा हुआ मुस्लिम’ की झूठी एवं मनगढ़ंत कहानी को बढ़ावा देते हुए अपने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी पूर्वाग्रहों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा उतावले रहते हैं। हाल ही में मणिपुर में हुई हिंसा में अपने इस काम को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें चारा मिल गया है।


🚩मणिपुर हिंसा के बारे में पूछे गए सवालों का दृढ़ता से जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “जब पश्चिमी दुनिया भारत की ओर देखती है तो उन्हें यह समझना चाहिए कि हम छह प्रमुख वैश्विक आस्थाओं (धर्मों) को समाहित करते हैं। पश्चिम यह समझ पाता कि विविधता क्या है, तब से हम विविधता में रहते आ रहे हैं।”


🚩अंसारी ने इस गलत धारणा की निंदा की कि भारतीय मुस्लिमों पर हमला हो रहा है या देश में मुस्लिम नरसंहार हो रहा है। दरअसल इस धारणा का इस्तेमाल पश्चिमी मीडिया लगातार भारत को बदनाम करने के लिए बढ़ावा देते आ रहा है। इस दौरान बीबीसी पत्रकार ने भाजपा सरकार के हिंदू राष्ट्रवाद के विचार पर सवाल उठाया।


🚩इस पर भाजपा सरकार का जोरदार बचाव करते हुए अंसारी ने कहा, “यह बहुआयामी नजरिया है। जब हम हिंदुओं के बारे में बात करते हैं तो हम हिंदू संस्कृति के बारे में भी बात करते हैं। भारत हिंदू संस्कृति का प्रतीक है। मेरे जैसे कई भारतीय मुसलमान, कभी हिंदू थे और बाद में परिवर्तित हो गए थे। हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए।”

https://twitter.com/Amana_Ansari/status/1689658502233374720?t=rQwd4r9KlnlnO_s65PSXYw&s=19


🚩उन्होंने गैर-धर्मनिरपेक्ष इस्लामी देशों के मुकाबले भारत में मिलने वाली आजादी का हवाला देते हुए कहा कि वह अपनी भारतीय मुस्लिम पहचान को अहमियत देती हैं। पत्रकार अंसारी ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा, “मैं भारत में जन्म लेकर धन्य महसूस कर रही हूँ। मैं एक मुस्लिम-बहुल देश में पैदा होने की कल्पना करूँ तो मैं भारत में जो आजादी को महसूस कर रही हूँ वह वहाँ संभव नहीं हो पाएगी।”


🚩साल 2022 में कर्नाटक में छिड़ी बुर्का बहस के दौरान अमाना अंसारी उन बहुत कम महिलाओं में से एक थीं, जिन्होंने इस प्रथा के खिलाफ जोरदार ढंग से अपनी बात रखी थी। इस घटना का सेक्युलरों और इस्लामवादियों ने पूरे दिल से बचाव और समर्थन किया और इसे निजी आजादी का मुद्दा बना डाला था।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Saturday, August 26, 2023

मदर टेरेसा का सच जानकर कांप जाएगी आपकी रूह

26 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩1910 में 26 अगस्त को अल्बेनिया के स्काप्जे में एक लड़की पैदा हुई। नाम रखा गया- गोंझा बोयाजिजू। दुनिया ने जाना ‘मदर टेरेसा’ के नाम से। उसे करुणा और सेवाभाव की मूर्ति के तौर पर वैसे ही प्रचारित किया गया, जैसे संत वेलेंटाइन को प्रेम का मसीहा बताया जाता है।


🚩इसकी आड़ में मदर टेरेसा का ‘चावल के बोरों’ वाला परिचय छिपा लिया गया। यह नहीं बताया गया कि टेरेसा ‘मदर’ नहीं, कलकत्ता की ‘पिशाच’ थी। भोपाल गैस त्रासदी का समर्थन किया था। करोड़ों रुपयों की हेराफेरी की थी। उसकी मिशनरी में बच्चे बाँध कर रखे जाते थे। नन खुद को कोड़े मारती थीं। वह एक ऐसे पादरी की ‘रक्षक’ थी, जिस पर एक बच्ची के यौन शोषण का आरोप था।


🚩मदर टेरेसा की दिल का दौरा पड़ने के कारण 5 सितंबर 1997 को मौत हो गई थी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उसकी मौत के बाद यह सिलसिला बंद हो गया। उसकी ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ पर बच्चों के खरीद-फरोख्त का आरोप है। ‘मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट’ के शेल्टर होम में बच्चियों के यौन शोषण की खबर तो पिछले साल ही सामने आई थी। दिसंबर 2021 में गुजरात में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के बाल गृह पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगा था। आरोप था कि यहाँ पर लड़कियों को गले में क्रॉस बाँध जबरन बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें ईसाई धर्म अपनाने का लालच दिया जाता है। हिंदू लड़कियों को मांसाहारी भोजन दिया जाता है।


🚩‘The Turning: The Sisters Who Left’ नामक पॉडकास्ट में मदर टेरेसा के ऐसे ही डार्क साइड को दिखाया गया है। इसमें एक महिला की कहानी है, जो अपने समाज की मजहबी व्यवस्था से बाहर निकलना चाहती है और मदर टेरेसा की मिशनरी में फँस जाती है।


🚩सबसे ज्यादा अत्याचार तो मिशनरी में ननों के साथ होता था। इस पॉडकास्ट में दिखाया गया है कि ननों को मरीजों और बच्चों को छूने तक की मनाही थी और न ही वो किसी से दोस्ती कर सकती थीं। जिन बच्चों की वो देखभाल करती थीं, उन्हें ही छूने की इजाजत नहीं थी। इन ननों को खुद पर ही कोड़े बरसाने का निर्देश दिया जाता था और 10 साल में 1 बार ही वो अपने परिवार से मिलने घर जा सकती थीं। ननों को काँटों वाली चेन से खुद को बाँध कर मात्र एक मग पानी से स्नान करना होता था। ननों की भर्ती के बाद उनके बाल शेव कर के जला डाला जाता था।


🚩टेरेसा पर आम जनता का ध्यान शायद 1969 में आई बीबीसी ( BBC )की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म (समथिंग वंडरफुल फॉर गॉड) से शुरू हुआ था। उनका कोलकाता स्थित संस्थान पीड़ितों का इलाज नहीं करता था, बल्कि उन्हें बताता था कि उन्हें पापों के लिए ईश्वरीय दंड मिला है, जिसे उन्हें बिना शिकायत झेलना चाहिए। नॉबेल पुरस्कार लेते वक्त टेरेसा ने 1979 में कहा था कि आज के दौर में शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात है।



🚩‘टेरेसा शोषित और वंचित वर्ग की हितैषी थीं’ – ऐसी तमाम कहानियों के विपरीत तानाशाहों के साथ भी उसके बहुत अच्छे संबंध थे। अपने जीवन के दौरान, उसने अक्सर क्रूर तानाशाहों का समर्थन किया और इस तरह अपने अत्याचार को वैधता का लिबास देने का प्रयास किया। 1971-86 के बीच पुलिस राज्य के रूप में हैती पर शासन करने वाले दुवैलियर के साथ टेरेसा के अच्छे संबंध थे। 1981 में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने शासन को ‘गरीबों का दोस्त’ बताया, वही शासन जिसके शासकों ने 1986 के विद्रोह के बाद लाखों डॉलर के लिए हैतियों को लूट लिया था। स्त्रोत : ऑपइंडिया


🚩जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर मदर टेरेसा का आध्यात्मिक सलाहकार था। उसने 11 साल के एक बच्चे का यौन शोषण किया – एक बार नहीं, हजारों बार। उसके खिलाफ यौन संबंधों के बारे में जब रिपोर्ट आई थी, तब मदर टेरेसा ने सभी आरोपों को असत्य बताया था। इसलिए आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि जब इंदिरा गाँधी सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी, तब मदर टेरेसा ने कहा था, “लोग इससे खुश हैं। उनके पास ज्यादा रोजगार है और हड़तालें भी कम हो रही हैं।


🚩भारत के वास्तविक पवित्र सच्चे साधु संतों को छोड़कर अपराधी नकली बनाये हुए संत को मानना ये बुद्धि का दिवालापन है। भारत के सच्चे हिन्दू संतों की ही पूजा करना चाहिए।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Friday, August 25, 2023

बॉलीवुड का स्लो पॉइजन..

 स्लो पॉइजन दे रहा है बॉलीवुड.....


25 August 2023

http://azaadbharat.org



🚩पिछले कुछ दशकों से चारों तरफ से सनातन हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के लिए अनेकों प्रकार की साजिशें रची जा रही हैं। विधर्मियों का उद्देश्य है, कि येन केन प्रकारेण, कैसे भी करके सनातन हिन्दू धर्म को खत्म कर दिया जाए।

.......और ऐसा करने लिए सबसे पहले सनातनधर्म के आधार स्तंभ , सनातनधर्म के रक्षक और पोषक हिन्दू साधु संतों को खत्म करने ,उनके प्रभाव को खत्म करने के प्लान बनाये जाते हैं।


🚩हिन्दूधर्म का अपमान, हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान, हिन्दू साधु संतों एवं हिन्दूधर्म के प्रति नफरत फैलाने तथा हिन्दूधर्म को नीचा दिखानें में अगर सबसे बड़ा किसी का रोल है तो वो बॉलीवुड का रहा है।

ये लोग ऐसी फिल्में बनाते हैं जिससे हिन्दू देवी देवताओं, साधु-संतों, ब्राह्मणों, पर्व-त्योहारों , मंदिरों, मठों और आश्रमों आदि पर सीधे कुठाराघात होता है। ये लोग ऐसी फिल्में बनाकर जनता को गुमराह करते हैं, और कुछ इस प्रकार की काल्पनिक कहानियां बनाते हैं , कि जैसे सारी बुराइयाँ सनातन हिन्दू धर्म में ही हैं

चर्चों में पादरी क्या काण्ड करते हैं, मस्जिदों में मौलाना क्या क्या दुष्कर्म करते हैं इस पर कभी कोई फिल्म बनाने की सोच भी नहीं सकता ! क्योंकि इनको पता है , कि ऐसा करने पर कमलेश तिवारी की तरह इनकी हत्या भी हो सकती है !!

जबकि हिंदू समाज तो सहिष्णु है , तो सोशल मीडिया पर थोड़ा हल्ला करके चुप हो जाएगा.....


🚩अभी कुछ हिन्दुओं में तो जागरूकता आई है, पर सभी को जागना होगा और बॉलीवुड के इस हिन्दू विरोधी रवैये को उखाड़कर फेंकना ही होगा ! नहीं तो ये लोग दीमक की तरह भारतीय संस्कृति को खोखला कर देंगे !!


🚩अगर बात साधु-संतों की करें तो सभी सनातन धर्म को मानने वाले जानते ही हैं कि उन महापुरुषों ने घोर तपस्याएं करके जो कुछ पाया होता है, उसे वो मानवमात्र की भलाई के लिए लगाते हैं। समाज में आकर सभी को सही मार्ग दिखाते हैं, समाज को व्यसनमुक्त बनाने का प्रयास करते हैं। संयमी और सदाचारी समाज बनाते हैं, गरीबों-आदिवासियों और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। गौशालाएं बनाकर गौ माता की रक्षा करते हैं। बच्चों, युवाओं व महिलाओं के उत्थान के लिए केंद्र खोलते हैं। धर्मान्तरण पर रोक लगाते हैं। चिंता, तनाव, अवसाद ( Depression/ Tension ) में रह रहे लोगों को शांति देते हैं। स्वदेशी का प्रचार करते हैं, सभी को स्वस्थ, सुखी और सम्मानित जीवन जीने की कला सिखाते हैं। राष्ट्र व धर्म की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं।


🚩पर बॉलीवुड वाले इस वास्तविकता पर फ़िल्म कभी भी नहीं बनायेंगे। बल्कि इसके उलट ये हिन्दू धर्म के विरोधी प्रकाश झा , मनोज बाजपेई जैसे लोग हिन्दूधर्म को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां बनाकर जनता में परोसते हैं । और विवेकहीन , भोले-भाले लोग इन झूठी कहानियों पर विश्वास कर लेते हैं और अपने ही धर्म व धर्मगुरुओं पर शंका करने लगते हैं।


🚩विचार कीजिए....... बॉलीवुड ने समाज को क्या दिया है !?


🚩शादी करती हुई लड़की को मंडप से उठा लेना, बलात्कार, चोरी, डकैती करना , छोटे कपड़े पहनना, मां-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ देना, लव जिहाद को बढ़ावा देना, भारतीय संस्कृति को हीन बताना, हिन्दू साधु-संतों, देवी देवताओं, मदिरों और पंडितों का मजाक उड़ाना तथा पाश्चात्य संस्कृति को महान बताना !!

यही तो अधिकांश फिल्म निर्देशक करते आये हैं ।


🚩साधु संतों , मंदिरों और भगवान को अपमानित करने वाली फिल्में और वेब सीरीज बनाने के पीछे कहीं न कहीं हिन्दूधर्म व भारतीय संस्कृति को तोड़ने वाली ताकतें लगी हुई हैं। क्योंकि साधु, संतों , भगवान और मंदिरों पर करोड़ों लोग श्रद्धा करते हैं, वहाँ पर जाकर शांति पाते हैं। इसके कारण धर्मांतरण कराने वाली मिशनरीज और विदेशी प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हो रहे हैं।

अब क्योंकि साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखने वाले आश्रम में जाते हैं और वहाँ उनको भारतीय संस्कृति के अनुसार जीने का सही तरीका मिलता है, फिर वे हिन्दू धर्म के प्रति आस्थावान हो जाते हैं, जिसके कारण वे ईसाई मिशनरियों के चंगुल में नहीं आते हैं औऱ वे विदेशी प्रोडक्ट भी नहीं खरीदते।


🚩इस कारण ईसाई मिशनरियों का लक्ष्य है - भारत में धर्मांतरण करके अपना वोटबैंक बढ़ाकर सत्ता हासिल करना । अब संतों के कारण उसमें भी बाधा उत्पन्न होती है और विदेशी कंपनियों के सामान नहीं बिकने पर उनको अरबों-खरबों रूपयों का घाटा भी होता है।

इन सभी बातों से बौखलाए और झल्लाए सनातन विरोधी अनेक प्रकार के षड्यंत्र रचकर हिन्दुओं की मठ- मन्दिरों , आश्रमों और साधु-संतों के प्रति आस्था को नष्ट करने लगे रहते हैं ।

.......और प्रकाश झा, मनोज बाजपेई जैसे जयचंद गद्दारी करके अपने ही धर्म के खिलाफ फिल्में बनाते हैं।


🚩सर्वे किया जाय तो चर्चों से बलात्कार के हजारों किस्से आ चुके हैं । मदरसों में भी यौन शोषण के हजारों किस्से सामने आते रहते हैं पर अभी तक इस विषय पर तो कोई फिल्म नहीं बनी और न ही कोई हिम्मत करेगा । क्योंकि उसके लिए अलग से फंडिंग तो मिलेगी नहीं और ऊपर से सर तन से जुदा की न सिर्फ धमकियां मिलेंगी बल्कि सर तन से जुदा हो भी जाएं... क्या पता !!!

इसलिए वास्तव में जहाँ पर गड़बड़ियां हो रही हैं, उधर से ये बॉलीवुड वाले उदासीन ही रहते हैं।


🚩हिन्दू सहिष्णु हैं और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए भारी फंडिंग भी मिलती रहती है, इस कारण विधर्मियों के टुकड़ों पर पलने वाले जयचंद हिन्दू विरोधी फिल्में बनाते हैं...

और बड़े अफसोस और शर्म की बात है कि हम हिन्दू ही ऐसी फिल्मों , सीरीजों को न सिर्फ देखते हैं साथ ही सहमत भी होते हैं । हम ही तो हैं , जो इन आधुनिक जयचंदों की हौसलाअफजाई करते हैं और उन्हें फाइनेंशियली भी मजबूत बनाते हैं ।

विश्वास कीजिए अगर हमसब मिलकर इनका बहिष्कार करें तो , बेशक इनकी कमर टूट जाएगी , क्योंकि हम विधर्मियों के धर्मांतरण और जिहाद के बावजूद भी अभी तक तो बहुसंख्यक हैं । तो हमें जरूरत है सिर्फ एकजुट और एकमत होने की ।


🚩उपाय सिर्फ एक... " सभी सनातनी हिन्दू ऐसी फिल्मों का पुरजोर बहिष्कार करें और अपने अपने स्तर पर कानूनी कार्यवाही भी करें। "


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Thursday, August 24, 2023

अकबर ने संत तुलसीदास जी को माफी मांगकर क्यों रिहा करना पड़ा ?

 अकबर ने संत तुलसीदास जी को भेज दिया था जेल, दूसरे दिन डर से माफी मांगकर किया रिहा....


24 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩बात 1600 ईस्वी की है, यह काल अकबर और तुलसीदासजी के समय का काल था। एक बार तुलसीदासजी मथुरा जा रहे थे, रात होने से पहले उन्होंने अपना पड़ाव आगरा में डाला, लोगों को पता लगा कि तुलसीदासजी आगरा में पधारे हैं। यह सुनकर उनके दर्शनों के लिए लोगों का ताँता लग गया। जब यह बात बादशाह अकबर को पता चली तो उसने बीरबल से पूछा कि यह तुलसीदास कौन हैं।


🚩तब बीरबल ने बताया- इन्होंने ही रामचरित मानस की रचना की है, यह रामभक्त तुलसीदासजी हैं, मैं भी इनके दर्शन करके आया हूँ। अकबर ने भी उनके दर्शन की इच्छा व्यक्त की और कहा- मैं भी उनके दर्शन करना चाहता हूँ।


🚩बादशाह अकबर ने अपने सिपाहियों की एक टुकड़ी तुलसीदासजी के पास भेजा जिसने तुलसीदासजी को बादशाह का पैगाम सुनाया कि आप लालकिले में हाजिर हों। यह पैगाम सुनकर तुलसीदासजी ने कहा कि मैं भगवान श्रीराम का भक्त हूँ, बादशाह और लालकिले से मुझे क्या लेना-देना और लालकिले जाने से साफ मना कर दिया। जब यह बात बादशाह अकबर तक पहुँची तो उसे बहुत बुरी लगी और बादशाह अकबर गुस्से में लालताल हो गया और उसने तुलसीदासजी को जंज़ीरों से जकड़वा कर लालकिला लाने का आदेश दिया। जब तुलसीदासजी जंजीरों से जकड़े लालकिला पहुंचे तो अकबर ने कहा कि आप कोई करिश्माई व्यक्ति लगते हो, कोई करिश्मा करके दिखाओ। तुलसीदास ने कहा- मैं तो सिर्फ भगवान श्रीरामजी का भक्त हूँ, कोई जादूगर नही हूँ जो आपको कोई करिश्मा दिखा सकूँ। अकबर यह सुन कर आगबबूला हो गया और आदेश दिया की इनको जंजीरों से जकड़ कर काल कोठरी में डाल दिया जाये।


🚩पूरी पोस्ट पढ़े👇🏻


http://azaadbharat.org



🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Wednesday, August 23, 2023

औरंगजेब को मंदिर के गर्भगृह से भागना पड़ा

एक मंदिर जिसे ध्वस्त करने आए औरंगजेब को गर्भगृह से भागना पड़ा था......पूरा लेख अवश्य पढ़ें:-



23 August 2023

http://azaadbharat.org



🚩माँ नर्मदा की गोद में बसे मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके इतिहास की गणना करना बहुत कठिन है। इनमें से कई मंदिर दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं। ऐसा ही एक मंदिर नर्मदा से थोड़ी दूर पर लगभग 70 फुट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट के नजदीक स्थित चौसठ योगिनी मंदिर सभवतः भारत का इकलौता मंदिर है, जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के लिए नर्मदा ने भी अपनी दिशा बदल दी थी। हालाँकि देश के कई अन्य मंदिरों की तरह यह भी औरंगजेब के इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ा, लेकिन वह मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा का कोई नुकसान नहीं कर पाया।


🚩इतिहास


🚩कई मान्यताओं के अनुसार जब एक बार भगवान शिव और माता पार्वती भ्रमण के लिए निकले तो उन्होंने भेड़ाघाट के निकट एक ऊँची पहाड़ी पर विश्राम करने का निर्णय किया। इस स्थान पर सुवर्ण नाम के ऋषि तपस्या कर रहे थे जो भगवान शिव को देखकर प्रसन्न हो गए और उनसे प्रार्थना की कि जब तक वो नर्मदा पूजन कर वापस न लौटें तब तक भगवान शिव उसी पहाड़ी पर विराजमान रहें। नर्मदा पूजन करते समय ऋषि सुवर्ण ने विचार किया कि यदि भगवान हमेशा के लिए यहाँ विराजमान हो जाएँ तो इस स्थान का कल्याण हो और इसी के चलते ऋषि सुवर्ण ने नर्मदा में समाधि ले ली।


🚩इसके बाद से कहा जाता है कि आज भी उस पहाड़ी पर भगवान शिव की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। माना जाता है कि नर्मदा को भगवान शिव ने अपना मार्ग बदलने का आदेश दिया था ताकि मंदिर पहुँचने के लिए भक्तों को कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके बाद संगमरमर की कठोरतम चट्टानें मक्खन की तरह मुलायम हो गई थीं जिससे नर्मदा को अपना मार्ग बदलने में किसी भी तरह की कठिनाई नहीं हुई।


🚩चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी के दौरान कल्चुरी शासक युवराजदेव प्रथम के द्वारा कराया गया। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती समेत योगिनियों का आशीर्वाद लेने के उद्देश्य से इस मंदिर का निर्माण कराया था। युवराजदेव के बाद 12वीं शताब्दी के दौरान शैव परंपरा में पारंगत गुजरात की रानी गोसलदेवी ने चौसठ योगिनी मंदिर में गौरी-शंकर मंदिर का निर्माण कराया।


🚩मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर की तरह यह मंदिर भी तंत्र साधना का एक महान स्थान हुआ करता था। यह मंदिर काल गणना और पंचांग निर्माण का सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता था जहाँ ज्योतिष, गणित, संस्कृत साहित्य और तंत्र विज्ञान का अध्ययन करने के लिए देश और विदेश से छात्र आया करते थे। 10वीं शताब्दी का यह मंदिर उस समय का आयुर्वेद कॉलेज हुआ करता था। खुले आसमान के नीचे ग्रह और नक्षत्रों की गणना के साथ आयुर्वेद की शिक्षा भी दी जाती थी।


🚩संरचना और इस्लामिक आक्रमण

पत्थरों से निर्मित चबूतरे पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। त्रिभुजाकार कोणों पर योगिनियों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। मंदिर परिसर की गोलाकार संरचना के केंद्र में गर्भगृह में गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित है। नंदी पर विराजमान भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह प्रतिमा संभवतः पूरे भारत में कहीं नहीं है। मुख्य मंदिर के सामने नंदी प्रतिमा है और एक छोटे चबूतरे पर शिवलिंग स्थापित है, जहाँ श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न तरह के अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।


🚩हालाँकि मंदिर में योगिनियों की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया गया है और यह कार्य किसी और ने नहीं बल्कि इस्लामी आक्रांता औरंगजेब ने किया, जिसने अपने शासनकाल में हजारों हिन्दू मंदिरों को अपना निशाना बनाया। कहा जाता है कि औरंगजेब ने अपनी तलवार से एक-एक योगिनी की प्रतिमा को खंडित किया, लेकिन जब वह गर्भगृह में स्थापित गौरीशंकर की प्रतिमा को खंडित करने गया तो दैवीय चमत्कार के कारण उसे भयभीत होकर वहाँ से भागना पड़ा था। - ओम द्विवेदी


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Tuesday, August 22, 2023

CJI चंद्रचूड़ :हमें न्याय देने की कोर्ट की क्षमता में विश्वास पैदा करना होगा

 चीफ जस्टिस बोले : सभी को मिलना चाहिए न्याय, 'मनमाने ढंग से गिरफ्तारियों' का भी किया जिक्र...


22 August 2023


http://azaadbharat.org


🚩DY Chandrachud , भारत के चीफ जस्टिस (CJI) ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के मौके पर न्यायपालिका से जुड़ी कई बातें लोगों के सामने रखीं।


🚩उन्होंने मंगलवार (15 अगस्त) को अपने भाषण के दौरान 'मनमाने ढंग से गिरफ्तारियों और संपत्तियों के विध्वंस' मुद्दे का भी जिक्र किया और साथ ही यह भी कहा , कि लाइन में खड़े हर एक व्यक्ति तक न्याय पहुंचना जरूरी है। साथ ही उन्होंने देश में न्यायिक बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव की जरूरत पर भी जोर डाला।


🚩चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "न्याय प्रणाली की ताकत न्याय प्रदान करना है। किसी व्यक्ति की मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, विध्वंस की धमकी, संपत्तियों को अवैध रूप से कुर्क किया गया है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जजों से सांत्वना मिलनी चाहिए।'' 


🚩क्या कुछ बोले चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ?


🚩डीवाई चंद्रचूड़ ने नई दिल्ली में "स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम" के अवसर पर वकीलों और अन्य अतिथियों/आगंतुकों के मध्य अपनी ये बातें रखीं। गौरतलब है कि , इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे। CJI ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार, देश के अग्रणी बार के रूप में कानून के शासन की सुरक्षा के लिए खड़ा है।


🚩" अदालती बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की जरूरत "


🚩CJI ने कहा, "हमारा संविधान यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका की परिकल्पना करता है कि शासन की संस्थाएं परिभाषित संवैधानिक सीमाओं के अंदर काम करें। न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंचने में बाधाओं को खत्म करना है । इसके लिए अदालती बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की जरूरत है।"


🚩" ...हर एक व्यक्ति को इंसाफ मिले "


🚩CJI चंद्रचूड़ ने कहा, "हमें न्याय देने की कोर्ट की क्षमता में विश्वास पैदा करना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर एक व्यक्ति को इंसाफ मिले। हमें अदालत के बुनियादी ढांचे में सुधार करने की जरूरत है। सभी तीन अंग, न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका राष्ट्रीय निर्माण के लिए सामान्य कार्य में जुड़े हुए हैं। "


🚩गुस्ताख़ी माफ़ हो... पर एक बात तो तय है कि , न्यायपालिका के इस बेढंगे तौर के चलते कितने ही बेगुनाह सालों तक कैद में ही भगवान की दी हुई अपनी अनमोल जिंदगी के दिन गँवाने को मजबूर हैं ।

हजारों बेगुनाह तो सालो तक चलते केस के बीच ही , बिना अपराध सिद्ध हुए, जेल मे ही आख़िरी सांसे गिन लेते हैं...


🚩उस पर विडंबना ये कि हमारी न्यायपालिका का मुख्य सूत्र है कि चाहे सौ मुजरिम छूट जाएं ... पर एक बेकसूर को सजा कभी नही होनी चाहिए !

बावजूद इसके , आए दिन तो हम देखते/सुनते ही हैं , कि फलां हाई प्रोफाइल व्यक्ति पर बड़ी ही संगीन धाराओं के तहत वारंट जारी हुआ है...

अब क्या होता है कि पहले तो उसको अरेस्ट ही नहीं किया जाता ( बेशक किसी न किसी दबाव या स्वार्थवश) और अगर गिरफ़्तार हो भी गया तो , कुछ न कुछ ऊटपटांग कारणों/परिस्थितियों ( किसी को BP बढ़ जाता है तो किसी के परिजनों की शादी पार्टी में जाना अत्यावश्यक होता है तो किसी को अधूरी बनी फिल्म पूरी करने के लिए) को सामने रखकर जमानत और या पैरोल मिल जाती है। कभी कभी तो एक दो दिन में ही , या कभी हफ्ते - दस दिन में वह घोर अपराधी बाहर खुली हवा में न सिर्फ सांस ले रहा होता है बल्कि अपनी आपराधिक गतिविधियों को निर्बाध रूप से अंजाम दे रहा होता है।


🚩वहीं दूसरी ओर किसी बेकसूर मासूम इन्सान जो कि मध्यमवर्गीय हो , उस पर एक छोटा-सा आरोप लगने भर की देर है , उसे अरेस्ट से लेकर जेल मे सड़ाने तक की प्रक्रिया बड़ी शीघ्रता से अंजाम दी जाती है।


🚩उससे भी अधिक आश्चर्यजनक और दुखपूर्ण परिस्थितियों का सामना उन्हें करना पड़ता है, जो देश समाज और संस्कृति की रक्षा और सेवा में जीवन समर्पित किए रहते हैं।फिर चाहे वो हाई-प्रोफाइल व्यक्तित्व हों या सर्वसाधारण नागरिक। उन पर एक झूठा आरोप ही काफी होता है कि , गहरी नींद मे सोई हमारी पुलिस, मीडिया और न्यायपालिका...सभी अचानक से अटेंशन मोड में आ जाते हैं।


🚩बात तब और खास हो जाती है यदि वह आरोपी हिन्दू समुदाय से हुआ तो.... तब तो उसे किसी भी कीमत पर बेल और या पैरोल मिलना नामुमकिन हो जाता है। आइए आज ऐसे ही चंद उदाहरण देखते हैं...


🚩शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी पर आरोप लगे , तो उन्हे दिवाली की रात ही अर्जेंटली अरेस्ट किया गया और कोरोना फैलाने वाला मौलाना साद आराम से आजाद घूमता रहा।


🚩साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी पर बम विस्फोट और हिंसा के आरोप लगे तो उन्हे 9 साल तक कैद मे रखकर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और अंततः वो भी बाइज्जत बरी हुईं। पर उन्होंने करावास में जो कष्ट सहे और जीवन के 9 साल उनसे छीने गए, उसकी भरपाई कौन करेगा।


🚩नित्यानंद जी पर झूठे आरोप लगे ,उनके विरुद्ध षड्यंत्रों की आंधी चली ,तो उन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा , इस केस की निष्पक्ष जांच में विलंब का खामियाजा स्वामी जी ने ही भुगता । और बाद में निर्दोष साबित हुए। 


🚩संत आशाराम जी बापू पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें आज 10 साल से कैद में रखा गया है। कई बार गंभीर अस्वस्थ होने पर भी उन्हें अच्छे इलाज तक के लिए परोल नहीं मिली । इसी बीच उनकी पत्नी बुरी तरह बीमार हुईं पर 1 दिन की भी बेल नहीं मिली।

बावजूद इसके कि आरोपो के विरुद्ध सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए, जिससे षड़यंत्र का खुलासा भी हो गया ।आज देश विदेश में तकरीबन हर व्यक्ति इस सच्चाई को जान/समझ चुका है...फिर भी उन्हें आज तक मिल रही हैं तो सिर्फ तारीख पर तारीख।


🚩हिन्दू धर्म और संस्कृति के प्रबल समर्थक और रक्षक दारासिंह जी को हिंसक प्रवृत्तियों के झूठे आरोप लगे और आज वो 25+ साल से जेल में हैं।उन्हें भी 1 दिन की बेल नहीं दी गई। यहां तक कि उनकी मां की अन्त्येष्टी तक के लिए उन्हे जमानत नहीं मिली...जैसे कि वो कोई खूंखार आतंकी हो।


🚩वहीं एक अभिनेत्री का बिजनेसमैन पति पॉर्न फिल्में बनाकर देश के युवाधन को खोखला करने के घृणित अपराध करता है और आराम से पैरोल मिल जाती है उसे। आखिर क्यों !?


🚩आखिर क्यों , क्यों ऐसी पक्षपातपूर्ण और संभ्रम है हमारी न्यायिक प्रणाली !?


🚩ये तो कुछेक ही उदाहरण दिए हैं अजीबोगरीब फैसलों के... ऐसे तो हजारों -लाखों सुने-अनसुने केसेज दफन होंगे हमारे देश के न्यायालयों की इमारतों में ।

.....और हजारों बेगुनाहों के साथ उनके परिजन भी घुट-घुट कर जीते/मरते होंगे !!


🚩मानना ही होगा कि , हमारी न्यायिक व्यवस्था में अंदर तक घुन लग चुका है।इस दिशा में शीघ्रातिशीघ्र ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि अब और निर्दोषों की जिंदगियां बली न चढ़ें और देश में अमन-चैन का महौल बने।


🚩जय हिन्द ! जय भारत !!🚩


🔺 Follow on


🔺 Facebook


https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:


http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:


twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:


https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Monday, August 21, 2023

गुलाम नबी आजाद के भीतर अपने अपमानित पुरखों का कोई अंश ही होगा, जो सच सबके सामने कह गए....


21 August 2023

http://azaadbharat.org

🚩पश्चिम की दुनिया ने तो इस सदी में 9/11 का स्वाद चखा और इस्लामी आतंक की शक्ल ठीक से देखी। मगर भारत का चप्पा-चप्पा ऐसे अनगिनत 9/11 से भरा हुआ है। एक ही शहर में कई-कई 9/11 हैं। ये हजार साल में इतनी-इतनी बार हुए हैं कि इंसानी याददाश्त ही चकरा जाए।

🚩जिस समय यह अंधड़ चल रहे थे उसी समय 50 से ज्यादा लेखकों के लिखे दस्तावेजों में इनकी भयावहता दर्ज है और इन लेखकों में सारे ही मुस्लिम थे। ये दस्तावेज अनेक बार पढ़े-पलटे हैं और इन घटनाओं को रेखांकित किया है।

🚩धर्मांतरण के ब्यौरे ऐसे अपमानजनक हैं कि आज कोई भी आत्मसम्मान वाला व्यक्ति अपने अतीत में झाँकने भर से खुदकुशी कर ले। इसलिए कश्मीर में गुलाम नबी आजाद ने जो कहा है, उसे इतिहास की रोशनी में देखिए, किंतु राजनीति की आँख से नहीं।

🚩 9 अगस्त 2023 को डोडा के चिरल्ला गाँव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि “मैं संसद में भी यह बात कह चुका हूँ। लेकिन बहुत सारी चीजें आप तक नहीं पहुँचती है… हमारे हिंदुस्तान में इस्लाम तो वैसे भी 15 सौ साल पहले ही आया है। हिंदू धर्म बहुत पुराना है। जो लोग (मुस्लिम) बाहर से आए होंगे, वो केवल 10-20 होंगे और वो भी उस वक्त मुगलों की फौज में थे। बाकी तो सब यहाँ (भारत) हिंदू से कन्वर्ट हुए मुसलमान हैं।600 साल पहले कश्मीर में कोई मुस्लिम नहीं था। सब कश्मीरी पंडित थे। सब इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बने हैं।”

🚩आप सच से भाग नहीं सकते। सच को दबा नहीं सकते। सच ज्ञानवापी की दीवारों से झाँक-झाँककर अपना पता देगा और तहखानों में चीख-चीखकर पुकारेगा। गुलाम नबी आजाद के भीतर अपने अपमानित पुरखों का कोई अंश ही होगा, जो वे साहसपूर्वक एक सच सबके सामने कह गए! सच को स्वीकार करना चाहिए, किंतु तथ्यों की रोशनी में और तथ्य अब किसी से छिपे हुए नहीं हैं!

🚩वैसे एक प्यारे जंतु के रूप में हम शुतुरमुर्गों का भी सम्मान करते हैं! - विजय मनोहर तिवारी

🔺 Follow on

🔺 Facebook
https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/

🔺Instagram:
http://instagram.com/AzaadBharatOrg

🔺 Twitter:
twitter.com/AzaadBharatOrg

🔺 Telegram:
https://t.me/ojasvihindustan

🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg

🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Sunday, August 20, 2023

भारत के हिन्दू-राष्ट्र घोषित होने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा क्या है !??

20-Aug-2023


 हिन्दू-राष्ट्र की आवश्यकता क्यों...!??

भारत के हिन्दू-राष्ट्र घोषित होने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा क्या है !??



🚩हमारी हिन्दू संस्कृति... अद्भुत, अद्वितीय और सनातन ( जिसका न आदि , न अंत ... अर्थात् जो शाश्वत है ) संस्कृति है । सनातन धर्म में समग्र चराचर जगत के हित का भाव है । हमारी प्राचीनकाल के ऋषियों द्वारा निर्मित / प्रणीत परंपराएं विश्व मानव को और छोटे से छोटे जीवों के साथ-साथ जड़ प्रकृति को भी पोषित करने के दृष्टिकोण से बनाई गई हैं ।


🚩आज ऐसी महान संस्कृति की जड़े नष्ट-भ्रष्ट कर डालने के लिए हर ओर से विधर्मियों के द्वारा निरंतर कुचक्र चलाए जा रहे हैं।हमारे भोले-भाले सहिष्णु सनातनधर्मावलंबी भाई बहन इस पराई आग की चपेट में अपना सर्वस्व नष्ट होते देख , खून के आंसू बहाने को मजबूर हैं।



🚩पूरे विश्व में एकमात्र भारत ही ऐसा देश है , जहाँ हिन्दुओं बहुसंख्यक है,फिर भी अपने देश में ही हर प्रकार से शोषित भी हैं।इसे ध्यान में रखा जाए तो भारत को तुरंत हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए। यदि इसका दूसरा पक्ष देखें तो अब से 77 साल पहले 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तो साथ ही उसका विभाजन भी किया गया था और एक नया देश पाकिस्तान बनाया गया। "भारत के विभाजन की शर्त पर ही तो स्वतंत्रता मिली थी हमें… और यह विभाजन धर्म के आधार पर ही हुआ था ।"


🚩अब क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिमों की मांग के कारण बनाया गया था, इसलिए इसे तुरंत ही इस्लामिक देश घोषित कर दिया गया, लेकिन भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित न कर उसे धर्म निरपेक्ष ही बना रहने दिया गया।



🚩जिसका खामियाजा आज तक हिन्दू उठा रहा है। कभी अपने अधिकारों का हनन होते सहन करके ,तो कभी अपनी संस्कृति पर कुठाराघात होते बर्दाश्त करके ,तो कभी अपनी अस्मिता,सम्मान और प्राणों को भी गंवा कर...

आज हालात ऐसे हो गए कि भारत की धर्म निरपेक्षता ही हम हिन्दुओं के गले की फांस बन गई है !!!


🚩दुनिया में इसाइयों के 157 देश हैं और मुसलमानों के 52 देश हैं,परन्तु हिन्दुओं का 1 देश भी नहीं । जबकि सच्चाई यह है कि हिन्दू धर्म ही सनातन धर्म है , जबसे सृष्टि का उद्गम हुआ प्रत्येक जन्मने वाला मनुष्य पहले तो वह सनातन का अंश है और बाद में ये थोपे हुए जाति , मत , पंथ व मजहब…जैसे इसाई, मुस्लिम, पारसी, यहूदी आदि-आदि ।


🚩आज भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान के नाम पर मुसलमानों,इसाइयों आदि को तो हर प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं और अपने ही देश में हिन्दू बेगाना हो गया है । आज हिन्दू बाहुल्य राष्ट्र में हिन्दू ही सबसे अधिक शोषित है…!

इसका भी एकमात्र निराकरण है कि यथाशीघ्र भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाए ।


🚩भारत के हिन्दू-राष्ट्र घोषित होने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा क्या है!?

हमारा हमारे ही हितैषी महापुरुषों के प्रति द्वेषभाव होना , आदर ,सम्मान भाव की कमी होना और उनके मार्गदर्शन की अवहेलना करना!


🚩भारत की नींव इतनी मजबूत है तो क्यों और कैसे , कभी सोचा है...!??

150 देश ईसाई बनाने वाले, 56 देश मुसलमान बनाने वाले सारे असुर भारत पर टूट पड़े । मगर सारी दुनिया को ईसाई और इस्लाम में बांटनेवाले भारत में आकर हार गए , क्यों !?


🚩पहले इस बात को सिर्फ हिन्दू संगठन ही कहा करते थे । आज बड़े-बड़े पदों पर आसीन बुद्धिजीवी भी इसका समर्थन करते हैं। मेघालय उच्च न्यायलय के न्यायधीश श्री एस.आर. सेन ने हिन्दुओं तथा गैर मुस्लिम समुदाय की गंभीर हालत को देखते हुए भारत को हिन्दू-राष्ट्र घोषित करने की अपील केंद्र सरकार से की थी ।


🚩आज हमारे हाथ ऐसे बांध दिए गए, कि हम अपने भाइयों को आश्रय और आश्वासन तक नहीं दे सकते ! दुखद है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आने वाले हिन्दू, पारसी, सिख आदि समुदायों को भारत की नागरिकता पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है ।


🚩भारत एक ऐसा देश है जहाँ गैर हिन्दू या हिंदुस्तान को गालियां देने वाले और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले लोग तो काफी ऐशो आराम की ज़िन्दगी जीते हैं । लेकिन बहुसंख्यक समुदाय यानि की हिन्दुओं ( सिख तथा अन्य गैर मुस्लिम समेत सभी हिन्दू ) को अपने ही देश में रहने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।


🚩प्रधानमंत्री जी से मेघालय हाइकोर्ट की शीघ्र कानून बनाने की अपील


🚩मेघालय हाईकोर्ट ने देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व संसद से ऐसा कानून लाने की सिफारिश की थी, जिससे पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आने वाले हिंदुओं , जैनो , सिखों व बौद्धों आदि को किसी बेवजह के सवालों के बिना सिर्फ़ आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर भारत की नागरिकता मिल सके ।

गौरतलब है…कोर्ट ने फैसले में यह भी लिखा है कि ” विभाजन के समय भारत को हिन्दू-राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन हम धर्मनिरपेक्ष देश बने रहे ।


🚩दरअसल हुआ ये कि , अमन राणा नामक एक व्यक्ति ने एक याचिका दायर की थी । जिसमें उन्होंने बताया कि , उन्हें निवास प्रमाण-पत्र देने से मना कर दिया गया है । इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया । कोर्ट के फैसले में जस्टिस एस.आर. सेन ने कहा कि , ” उक्त तीनों पड़ोसी देशों में उपरोक्त लोग आज भी प्रताड़ित हो रहे हैं और उन्हें सामाजिक सम्मान भी प्राप्त नहीं हो रहा है । कोर्ट ने कहा कि इन लोगों को कभी भी देश में आने की अनुमति दी जाए । सरकार इन्हें पुनर्वासित कर सकती है और भारत का नागरिक घोषित कर सकती है । ”


🚩भारतीय इतिहास का किया उल्लेख :-   

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय इतिहास को उल्लेखित करते हुए कहा , कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश था । पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान का कोई वजूद नहीं था । ये सब भारत में शामिल थे और इन पर हिन्दू साम्राज्य का शासन था । कोर्ट ने कहा कि मुगल जब यहां आए तो उन्होंने भारत के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया । इसी दौरान बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन हुए । इसके बाद अंग्रेज यहां आए और शासन करने लगे ।


🚩हिन्दू-राष्ट्र की आवश्यकता क्यों...!??

क्यों कि , हिन्दुस्थान में हिंदुत्व के लिए लड़ना आसान नहीं है...


🚩कोई व्यक्ति देशभक्ति, भारतीय संस्कृति या सनातन धर्म की बात करते हैं और राष्ट्र विरोधी लोगों का विरोध करते हैं, तो उनको बहुत कुछ सहन करना पड़ता है, यहाँ तक की उनकी हत्या भी हो सकती है अथवा जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है, ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं।

आवश्यकता है हिन्दू मिलकर हिन्दू-राष्ट्र विरोधी ताकतों को उखाड़कर फेंक सकें ।


🚩भारत में आज जिस तरह CAA का विरोध हुआ है और भारतवासी जाति-पाति में बंट रहे हैं उससे हमारे देश को खतरा है। क्योंकि हमारे देश पर राष्ट्र विरोधी ताकतों की बुरी नजरे हैं और वे हमें आपस में लड़ा रहे हैं। इनसे सावधन रहना होगा नहीं तो बाद में हमें पछतावा होगा।

इसलिए भी हिन्दू-राष्ट्र आवश्यक है।


🚩अखंड भारत के हो चुके हैं इतने टुकड़े....अभी भी नहीं चेते तो पछताना पड़ेगा !!

अफगानिस्तान , पाकिस्तान , बांग्लादेश , नेपाल , भूटान , तिब्बत , म्यांमार , श्रीलंका , मलेशिया , सिंगापुर , थाईलैंड , इंडोनेशिया , कंबोडिया , वियतनाम और अब भारत सिकुड कर बिल्कुल छोटा रह गया है ।


🚩कभी जम्बूद्वीप, भारतवर्ष और आर्यावर्त के नाम से पहचाने जाने वाले हमारे देश का नाम आज इंडिया है। लेकिन आज का जो भारत हमारे पास है वो भारतवर्ष का महज एक छोटा टुकड़ा मात्र है। क्योंकि अभी जितनी भूमि भारत देश में है, उससे कई गुना ज्यादा भूमि पर अलग देश बन चुके हैं। हम आपको बता रहे हैं कैसे प्राचीन काल में विश्वगुरू रहा भारत खंड-खंड होता गया और आज सिकुड़ कर छोटा सा रह गया।

इसलिए भी है हिन्दू-राष्ट्र आवश्यक।


🚩विश्व में ईसाइयों के 157, मुसलमानों के 52, बौद्धों के 12 जबकि यहूदियों का 1 राष्ट्र है । भारत को ही हिन्दूओं का राष्ट्र इस सृष्टि पर कहा है ? पर यहां आज भी हिन्दू शोषित हैं । भारत मे आज जितनी भी समस्याएं हैं उसके निराकरण के लिए हिन्दू-राष्ट्र की अत्यंत आवश्यकता है।



🚩और हमारी सहिष्णुता भी कहीं न कहीं हमारे शोषित होते जाने का बहुत बड़ा कारण है ।

सहिष्णुता और उदारता हिन्दू धर्म के खून में है तभी तो पिछले सैकड़ों वर्षों से उनका खून बहाया जाता रहा है। तभी तो हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जाता रहा है। हिन्दू धर्म में उदारता और सहिष्णुता का कारण यह है कि इस धर्म में परहित को पुण्य माना गया है। न्याय और मानवता (इंसाफ और इंसानियत) को धर्म से भी ऊंचा माना गया है। न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सबकुछ दांव पर लगा देने के लिए हिन्दुओं को प्रेरित किया जाता रहा है।


🚩यही कारण है कि इस धर्म में प्राचीनकाल से ही कभी कट्टरता नहीं रही और इस उदारता, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता की भावना के चलते ही हिन्दुओं ने कभी भी किसी दूसरे धर्म या देश पर किसी भी प्रकार का कोई आक्रमण नहीं किया। इसका परिणाम यह रहा कि आक्रांताओं ने समय-समय पर गुलाम बनाकर हिन्दुओं को धर्म, जाति और पंथों में बांट दिया, उनका कत्लेआम किया गया और उन्हें उनकी ही भूमि से बेदखल कर दिया गया।


🚩हिन्दुओं ने कभी किसी राष्ट्र पर आगे रहकर आक्रमण नहीं किया और न ही किसी राज्य या राष्ट्र को अपने अधीन किया जबकि इसके विपरीत यहां पर आक्रमणकारी आए और उन्होंने रक्त की नदियां बहाकर इस देश की संस्कृति को खंडित कर दिया। भारत की कभी भी अपने राज्य विस्तार की इच्छा नहीं रही तथा सभी धर्मों को अपने यहां फलते-फूलने की जगह दी।

....... और बदले में हमारे ही सर तन से जुदा करने की धमकियां आए दिन मिलती रहती हैं। इसलिए भी हिन्दू-राष्ट्र आवश्यक है।


🚩भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था । पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था । ऐसे में भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था लेकिन, इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया । जिसका दण्ड हमें अभी तक भुगतना पड़ रहा है।


            - मेधालय हाइकोर्ट


🚩देश, धर्म और संस्कृति रक्षार्थ भारत को शीघ्र हिन्दू-राष्ट्र घोषित करना ही सभी  समस्याओं का हल है ।


🚩भारत-पाक विभाजन के इतिहास के बारे में कोर्ट ने फैसले में लिखा… ” यह एक अविवादित तथ्य है , कि विभाजन के वक्त लाखों की संख्या में हिन्दू व सिख मारे गए थे । उन्हें प्रताड़ित किया गया था , उनकी सम्पत्ति पर जबरन कब्जे किए गए और महिलाओं का बलात्कार किया गया था ।


🚩कोर्ट ने लिखा कि , भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था । विभाजन के साथ ही पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था । ऐसे में भारत को भी हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था , लेकिन इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया । जिसका दण्ड हमें अभी तक भुगतना पड़ रहा है ।


🚩पीएम मोदी पर जताया भरोसा :-


🚩इतना कहने के पश्चात जज सेन ने मोदी सरकार को संबोधित करते हुए कहा , कि हमें विश्वास है , वो ( प्रधानमंत्री जी ) भारत को मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने देंगे । उन्होंने लिखा कि किसी भी व्यक्ति को भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए । जज ने उच्च न्यायालय में केंद्र की सहायक सॉलिसीटर जनरल ए. पॉल को फैसले की प्रति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री व विधि मंत्री को शीघ्रता से अवलोकन करने के लिए सौंपने व समुदायों के हितों की रक्षा का कानून लाने को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही है ।


🚩न्यायाधीश एस.आर. सेन की बात से यह तो साफ़ हो ही गया कि भारत को हिन्दू-राष्ट्र घोषित करना कितना आवश्यक है।


🚩भारत एक हिन्दू बाहुल्य देश है । एक हिन्दू कभी किसी अन्य धर्म के लोगों के लिए खतरे का विषय नहीं बन सकता है और ना ही हिन्दुओं से किसी अन्य धर्म के लोगों को कोई खतरा ही हो सकता है । किन्तु यदि भारत को हिन्दू राष्ट्र न घोषित किया गया , तो इससे हिन्दुओं को जरुर खतरा हो सकता है ।


🚩 न्यायमूर्ति एस.आर. सेन जी की बात विचारणीय है । यदि हिन्दू बाहुल्य देश में हिन्दुओं का भरोसा जीतना हो तो मोदी सरकार को शीघ्र ही भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए ।


🚩आज भारत का हिन्दू राष्ट्र घोषित होना ही अनेकों सामाजिक समस्याओं का एकमात्र हल है ।

…जिन्हें इस देश में हिन्दू राष्ट्र नहीं चाहिए, वे स्वेच्छा से पाकिस्तान जा सकते हैं ।


🚩हिन्दुस्तान का अर्थ ही है , ऐसा स्थान जहाँ हिन्दुओं का निवास हो… तो कायदे से देखा जाए तो हिन्दुस्तान में रहने वाला हर शख्स हिन्दू ही है । फिर इस देश को हिन्दू-राष्ट्र घोषित करने में इतनी देर क्यों ?

हम माननीय श्री नरेद्र मोदी जी से अपील करते हैं कि , ” अल्पसंख्यकों के हक में तो बहुत फैसले ले लिए… अब कुछ फैसले हिन्दुओं के हक में भी ले लीजिए । ताकि 2024 में आपको वापस हम सब प्रधानमंत्री के पद पर देख पाएं ।


🚩देश, धर्म और संस्कृति बचाने के लिए हिन्दू-राष्ट्र की ही आवश्यकता है ।🚩कोर्ट ने लिखा कि , भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था । विभाजन के साथ ही पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था । ऐसे में भारत को भी हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था , लेकिन इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया । जिसका दण्ड हमें अभी तक भुगतना पड़ रहा है ।


🚩पीएम मोदी पर जताया भरोसा :-


🚩इतना कहने के पश्चात जज सेन ने मोदी सरकार को संबोधित करते हुए कहा , कि हमें विश्वास है , वो ( प्रधानमंत्री जी ) भारत को मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने देंगे । उन्होंने लिखा कि किसी भी व्यक्ति को भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए । जज ने उच्च न्यायालय में केंद्र की सहायक सॉलिसीटर जनरल ए. पॉल को फैसले की प्रति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री व विधि मंत्री को शीघ्रता से अवलोकन करने के लिए सौंपने व समुदायों के हितों की रक्षा का कानून लाने को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही है ।


🚩न्यायाधीश एस.आर. सेन की बात से यह तो साफ़ हो ही गया कि भारत को हिन्दू-राष्ट्र घोषित करना कितना आवश्यक है।


🚩भारत एक हिन्दू बाहुल्य देश है । एक हिन्दू कभी किसी अन्य धर्म के लोगों के लिए खतरे का विषय नहीं बन सकता है और ना ही हिन्दुओं से किसी अन्य धर्म के लोगों को कोई खतरा ही हो सकता है । किन्तु यदि भारत को हिन्दू राष्ट्र न घोषित किया गया , तो इससे हिन्दुओं को जरुर खतरा हो सकता है ।


🚩 न्यायमूर्ति एस.आर. सेन जी की बात विचारणीय है । यदि हिन्दू बाहुल्य देश में हिन्दुओं का भरोसा जीतना हो तो मोदी सरकार को शीघ्र ही भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए ।


🚩आज भारत का हिन्दू राष्ट्र घोषित होना ही अनेकों सामाजिक समस्याओं का एकमात्र हल है ।

…जिन्हें इस देश में हिन्दू राष्ट्र नहीं चाहिए, वे स्वेच्छा से पाकिस्तान जा सकते हैं ।


🚩हिन्दुस्तान का अर्थ ही है , ऐसा स्थान जहाँ हिन्दुओं का निवास हो… तो कायदे से देखा जाए तो हिन्दुस्तान में रहने वाला हर शख्स हिन्दू ही है । फिर इस देश को हिन्दू-राष्ट्र घोषित करने में इतनी देर क्यों ?

हम माननीय श्री नरेद्र मोदी जी से अपील करते हैं कि , ” अल्पसंख्यकों के हक में तो बहुत फैसले ले लिए… अब कुछ फैसले हिन्दुओं के हक में भी ले लीजिए । ताकि 2024 में आपको वापस हम सब प्रधानमंत्री के पद पर देख पाएं ।




🚩भारत ऋषि-मुनियों का देश रहा है। विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में आकर दिव्य भारतीय संस्कृति को खत्म करने के लिये अपनी पश्चिमी संस्कृति थोपनी चाही, लेकिन भारत के साधु-संतों और हिंदूनिष्ठों ने अपनी हिंदू संस्कृति को बचाए रखा। 

भारत में आज भी कई साधु-संत एवं हिन्दूनिष्ठ हैं जो भारत में राष्ट्रविरोधी विदेशी ताकतों से टक्कर लेकर भी समाज उत्थान के लिये हिन्दू संस्कृति को बचाने का दिव्य कार्य कर रहे हैं


🚩संत श्री आशाराम जी बापू कर संकल्प है भारत को विश्वगुरु पद पर आसीन करना और इसी संकल्प को साकार करने के लिए अपने विविध सेवा कार्यो के साथ पूज्यश्री रात दिन सनातनधर्म की रक्षा और हिन्दू राष्ट्र निर्माण में लगे हुए हैं।



🚩देखिये ऐसे तो बहुत से क्रांतिकारियों को कारावास भोगना पडा इसी भारत में, अपनी भारत की रक्षा के लिए, आपने और हमने सबने देखा है तो जो-जो समाज की जागृति करना चाहते हैं, समाज विरोधी शक्तियाँ उन्हें दबाना चाहती हैं।

और इस बात को पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत , चीन समेत दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है । तो सारी विदेशियों शक्तियाँ यही चाहतीं हैं न कि भारतवासी शरीर से तो भारतीय भले रहें , मगर अन्तर-बह्य रूप से ( मन और बुद्धि से , कर्मों और रहन सहन से ) और आध्यात्मिक रूप से लॉस हो जाए ( विदेशियों के गुलाम ही रहें ) ।और ऐसा तभी संभव है जब भारतीयों का स्पिरिचुअल लॉस हो जाए । मतलब अपने ही धर्म, संस्कृति , संस्कारों और साधु-संतों , महापुरुषों से नफरत हो जाए ।

हिन्दू-राष्ट्र की ओर जब हम बढ़ रहे हैं... तो बिन संतों का हिन्दू-राष्ट्र असंभव है।


                -- श्री धनंजय देसाई जी


🚩 बापूजी बाहर होते तो भारत का नक्शा कुछ और ही होता !


संत आशारामजी बापू ने समाजोद्धार के लिए इतना महत् कार्य, विशाल कार्य किया है कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ पर बापूजी का योगदान न रहा हो । बच्चों, युवाओं, वृद्धों, गरीबों, जनसामान्य - सभीके लिए बापूजी ने सेवा-प्रकल्प चलाये । वे हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सतत प्रयत्नशील रहे और ऐसा हिन्दू राष्ट्र जो केवल जाति हिन्दू होने से हिन्दू राष्ट्र न हो बल्कि जिसमें अपने हिन्दू वैदिक धर्म के, अपनी संस्कृति के सत्य, तप, करुणा, दया, ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांत जन-जन के जीवन में हों । उन्होंने भारतीय संस्कृति का परचम पूरे विश्व में लहराने के लिए बहुत सारे प्रयास किये । बापूजी के प्रयासों का बहुत बडा परिणाम हुआ है और केवल भारत में नहीं, पूरे विश्व में इसका परिणाम देखने को मिला ।

जिन्होंने अपना सारा जीवन इस राष्ट्र के लिए, भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए समर्पित कर दिया, आज वे ८६ वर्ष की उम्र में जेल में हैं । यह सम्पूर्ण हिन्दू जाति के लिए लज्जा की बात है, शर्म की बात है ! आज यदि बापूजी बाहर होते तो भारत का एक अलग नक्शा होता, अलग छवि होती ।


      - श्री सियावल्लभदासजी महाराज, अयोध्या


🚩 "एकजुट होकर धर्म-रक्षा के लिए आगे आना चाहिए"


इतिहास पर दृष्टि डालें तो जिन संतों ने हिन्दू धर्म का प्रचार किया, सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन की आहुति दी उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, उनको सताया गया ।  ऐसा क्यों ? क्योंकि संतों के धर्म-प्रचार के कार्यों से समाज में जागृति आती है और अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लगे असामाजिक तत्त्वों के कार्यों में बाधा पडती है । इसलिए वे उन संतों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं ।

जिन्होंने विश्वभर में सनातन धर्म की ध्वजा लहरायी और अपना जीवन लोकोत्थान के लिए समर्पित किया है, सत्संग के माध्यम से लोगों को उन्नत किया ऐसे महान संत आशाराम बापूजी पर झूठे आरोप लगवाकर उन्हें जेल में रखा जा रहा है । संत आशारामजी बापू का धर्मांतरण रोकने पर तो पूरा ध्यान था ही, साथ ही उन्होंने छोटे बच्चों से ले के बडों तक सबकी उन्नति के लिए कार्य किये, ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस की शुरुआत की ।

आज बापूजी के साथ जो हो रहा है उसे देख के बडी पीडा होती है । मैं संत-समाज से, सनातन धर्मावलम्बी लोगों से अपील करता हूँ कि सब एकजुट होकर धर्म की रक्षा के लिए आगे आयें ।              

बापूजी जल्द-से-जल्द रिहा हों तभी हिन्दू राष्ट्र का सपना साकार होगा...


- स्वामी रामकृष्ण आचार्य, भागवत कथाकार, उज्जैन (म.प्र.)


🚩 भारत विश्वगुरु बनकर रहेगा, मेरे इस संकल्प को कोई रोक नही सकता, तोड़ नही सकता हैं।


        -  संत आशाराम जी बापू


🚩संत आशारामजी बापू ने वर्ष 2014 से 25 दिसम्बर को ‘तुलसी पूजन दिवस' मनाना प्रारम्भ करवाया । आज इस पर्व की लोकप्रियता विश्वस्तर पर देखी जा रही है।


🚩आशाराम जी ने "न्यू ईयर सेलिब्रेशन " के नाम पर होते अंधेर को बंद करने के लिए दिया विश्वगुरु भारत अभियान का तोहफा ।


🚩सभी जानते हैं कि 25 दि. से 1जनवरी के बीच Festival के नाम पर शराब और कबाब का जश्न मनाना, डांस पार्टी आयोजित करके बेशर्मी का प्रदर्शन करना, पशुओं की हत्या करके उनका मांस खाना, सिगरेट, चरस आदि पीना- यह सब किया जाता है जो कि भारतीय परंपराओं के विरुद्ध है। ऐसा करना ऋषि-मुनियों की संतानों को शोभा नहीं देता ।


🚩रिपोर्ट के अनुसार- 25 दिसम्बर से 1 जनवरी तक

★14 से 19 वर्ष के बच्चे शराब का जमकर सेवन करते हैं।

★शराब की खपत तीन गुना बढ़ जाती है।

★70% तक किशोर इन पार्टियों में शराब का जमकर सेवन करते हैं।

★आत्महत्याएँ काफी बढ़ जाती हैं।


🚩उन्होंने 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे के बदले "मातृ-पितृ पूजन दिवस " शुरू करवाया।जो आज विश्व व्यापी रूप ले चुका है।


🚩संस्कृति रक्षा के कार्य संस्कृति के दुश्मनों को रास न आए और उन्हें झूठे आरोप में जेल मे कैद किया गया है।


https://youtu.be/U-kryE2VPc4


🚩आइए देखते हैं आज कुछ twitter users ने हिन्दू-राष्ट्र की परिकल्पना विषय पर क्या प्रतिक्रिया दी...


1) Yes Right,To make India a united #हिंदू_राष्ट्र , we all should make united efforts to realize this great objective, it is our religion to protect the honor of saints and great men, the heritage of the great Sanatan Dharma.

https://twitter.com/ThadhaniManish_/status/1693089027250155812?t=xbmyh_EPfGOBaQdYR69Pcw&s=19


2)भारत की जनता चाहती है कि भारत विश्वगुरु बने इसलिए वो Towards The Goal आगे बढ़ रहे है।

भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए 

Public Opinion है कि भारत हिन्दू राष्ट्र बनना ही चाहिए। भारत मे संत महापुरुष का आदर होना ही चाहिए।

#हिंदू_राष्ट्र

https://twitter.com/AmrockstarI/status/1693092033723003041?t=SKhYoYypSd-Cn5vtcntF4g&s=19


3) अटल जी के उदगार सौ प्रतिशत सत्य है , हमे हिन्दू राष्ट्र Towards The Goal बढ़ना चाहिए नही तो विश्व से मानवता ही खत्म हो जायेगी ।

Public Opinion यही है कि विश्व मे शान्ति के लिए हिन्दुस्तान को 

#हिंदू_राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए ।

https://twitter.com/Anubhut38524976/status/1693099129826861556?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


4) सनातन संस्कृति पर विधर्मियों की कुदृष्टि और इसको नष्ट करने की कुत्सित मानसिकता को जड़ से उखाड़ फ़ेकने के लिए भारत हिंदू राष्ट्र की घोषणा वर्तमान समय की मांग है

https://twitter.com/PUSHPAKUMARIRA5/status/1693093449925640330?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19



5) आजादी के वक्त जो हमारे साथ हुआ पक्षाघात जिसका परिणाम आज हम देख सकते है लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे कार्य बढ़ रहे है, Towards The Goal अपने लक्ष तक

What You Say की भारत शोषित होता रहे 

क्या Public Opinion है आपका

#हिंदू_राष्ट्र

https://twitter.com/MahavirV1969/status/1693090818972684445?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


6) हिंदू बाहुल्य देश में हिंदुओं को जातियों में बांटा जा रहा है धर्मांतरण कराया जा रहा है हिंदू धर्म गुरु को झूठे केस में जेल भिजवाया जा रहा है 

Public Opinion देश धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए भारत को #हिंदू_राष्ट्र घोषित करना चाहिए।

https://twitter.com/sushilsharmasrs/status/1693115731091869751?t=s_l3vOBIWezuKEtF7FG2ow&s=19


7) निसंदेह बड़ी दयनीय स्थिति है !

और जहां बहुसंख्यक हैं हिन्दू वहां भी कोई अच्छे हालात नहीं हैं...


इसलिए भारत को शीघ्रता से #हिंदू_राष्ट्र घोषित करने की अत्यंत आवश्यकता है।


8) जहां भी हिन्दू कम हुए हैं वहां हिंदूओं का नरसंहार और पलायन देखने को मिला है। सामाजिक समरसता और सौहार्द के लिए भारत को #हिंदू_राष्ट्र घोषित करना एकमात्र विकल्प है।

Public Opinion is that politics of appeasement is a big hurdle

https://twitter.com/KdEhYNu8iJDsLFx/status/1693101049232408619?t=KEn29N0Dy7xrVR5TZbsUuQ&s=19


9) 80% हिंदू बाहुल देश में हिंदुओं पर अत्यचार हो रहा है, धर्मांतरण करवाया जा रहा है,निर्दोष हिंदू संतों को झूठे केस में जेल में डाला जा रहा है।

देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए भारत का #हिंदू_राष्ट्र घोषित होना अत्यंत आवश्यक है।

https://twitter.com/chatursahu_/status/1693091856559804806?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


10) https://twitter.com/PriyaSi75173393/status/1693090828213002591?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


11) https://twitter.com/Jignesh15728/status/1693090418504958222?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


12) https://twitter.com/HindusthaniSher/status/1693096080760795646?t=KAvScdhkqmkAT-hR-wOkrA&s=19


🚩तो निसंदेह देश, धर्म और संस्कृति बचाने के लिए हिन्दू-राष्ट्र की अनिवार्य आवश्यकता है ।

🔺 Follow on




🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Saturday, August 19, 2023

रक्षाबंधन शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पवित्र पर्व

 रक्षाबंधन शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पवित्र पर्व है।

राखी खरीदते हुए इतनी सावधानी अवश्य रखें.....



19 August 2023

http://azaadbharat.org



🚩भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन पर्व की बड़ी भारी महिमा है । इतिहास साक्षी है, कि इसके द्वारा अनगिनत पुण्यात्मा लाभान्वित हुए हैं, फिर चाहे वो वीर योद्धा अभिमन्यु हों या स्वयं देवराज इंद्र । हर युग में इस पर्व ने अपना एक क्रांतिकारी इतिहास रचा है ।


🚩राखी मात्र एक सुंदर,सजीला धागा नहीं अपितु शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का ऐसा सुरक्षा कवच है, जिसे हम सनातनी अपने स्नेहीजनों को धारण करवाते हैं और संकल्प करते हैं कि हमारे अपने स्वस्थ्य, सुखी, प्रसन्न और सर्व प्रकार से सम्पन्न रहें । वो यशस्वी , तेजस्वी हो, त्रिलोचन हो , दीर्घायु हो और परम लक्ष्य को साधने में सफल हो जाएं।


🚩रक्षाबंधन के पर्व पर सभी हिन्दू बहनें राखियां खरीदती हैं। पर वो इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देती हैं कि कहा से और किससे खरीदी कर रही हैं। राखी खरीदते हुए इतना अवश्य ध्यान दें , कि इस त्योहार में शुद्धता , पवित्रता और शुभ संकल्पों का बड़ा ही विशेष महत्व है, इसलिए...


🚩इस परम् पवित्र त्यौहार पर हम कहीं ऐसे विधर्मियों के यहां से तो रक्षासूत्र नहीं खरीद रहे हैं , जो कि आए दिन अपने अलावा अन्य मजहब वालों पर ( खासकर हिन्दुओं पर ) हिंसा करने वाले , मांस खाने वाले , खाद्यपदार्थों में थूककर अन्य लोगों का धर्म भ्रष्ट करने वाले हैं ।

क्योंकि ऐसे तो कई वीडियोज वायरल होते रहते हैं।

......ध्यान देने वाली बात यह है कि अशुभ , दूषित संकल्पों और अशुद्ध स्पर्श से वह रक्षासूत्र भी अपवित्र हो जाता है।


🚩 तो रक्षासूत्र सदैव हिन्दुओं की दुकान से ही खरीदें।


🚩हम यह भी जानते हैं, कि ये विधर्मी कभी स्वप्न में भी हिन्दुओं का हित करना तो दूर की बात, सोच भी नहीं सकते।बल्कि हिन्दुओ को नष्ट कर देना ही उनकी मंशा रही है।


🚩 जरा सोचिए...उनकी आमदनी बढ़ेगी तो वे कश्मीर और मेवात में हिंदुओं का जो हाल किया, वैसा ही हाल हमारे आपके शहरों में भी क्या नहीं कर देंगे।

इसलिए सभी बहनें इस बात का अवश्य ध्यान रखें और संकल्प लें ,कि मै॔ हिन्दुओं की दुकानों से ही पवित्र रक्षासूत्र खरीदूंगी।


🚩आप घर पर भी वैदिक रक्षा सूत्र बना सकते हैं।


🚩रक्षा सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य व प्रभाव असीम हो जाता है ।

 

🚩वैदिक राखी का महत्व :

 

🚩वैदिक राखी का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में वर्णित है, कि सावन के महीने में यदि रक्षासूत्र को कलाई पर बांधा जाये तो इससे संक्रामक रोगों से लड़ने की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है । साथ ही यह रक्षासूत्र हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचरण भी करता है ।

 

🚩कैसे बनायें वैदिक रक्षासूत्र :

 

🚩दुर्वा, चावल, केसर ( या हल्दी पाउडर ), चंदन ( कुमकुम/रोली ) और सरसों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर एक पीले रेशमी कपड़े में बांध लें यदि इसकी सिलाई कर दें तो यह और भी अच्छा रहेगा । इन पांच पदार्थों के अलावा कुछ राखियों में हल्दी, गोमती चक्र आदि भी रखा जाता है । रेशमी कपड़े में लपेट कर बांधने या सिलाई करने के पश्चात इसे कलावे (मौली) में पिरो दें ।

और लीजिए... आपकी " वैदिक राखी " तैयार हो गई ।


🚩‘रक्षाबंधन के दिन वैदिक रक्षासूत्र बाँधते समय वर्षभर हमारे अपनों की रोगों से , बुरे भावों से , बुरे कर्मों से रक्षा रहे’ , शुभता बढ़े , आनंद, उत्साह औदार्य ,दया , क्षमा जैसे सद्गुण बढ़ें और ईश्वर प्राप्ति की रुचि जग कर आत्मसाक्षात्कार की मंज़िल प्राप्त हो... ऐसे एक-दूसरे के प्रति सत्संकल्प करते हैं ।


🚩राखी महंगी है या सस्ती, यह महत्त्वपूर्ण नहीं होता, वरन् इस धागे के पीछे जितना निर्दोष प्रेम होता है, जितनी अधिक शुद्ध भावना होती है, जितना पवित्र संकल्प होता है, उतनी ही रक्षा होती है तथा उतना ही लाभ होता है। जो रक्षा की भावनाएँ धागे के साथ जुड़ी होती हैं, वे अवश्य फलदायी होती हैं, और रक्षा करती ही हैं। इसलिए भी तो इस पर्व को रक्षाबंधन कहते हैं।


🚩राखी का धागा तो 25-50 पैसे का भी हो सकता है, किंतु धागे के साथ जो संकल्प किये जाते हैं, वे अंतःकरण को तेजस्वी व पावन बनाते हैं। जैसे इन्द्र जब तेजहीन हो गये थे, तो शचि ने उनमें प्राणबल , मनोबल के भाव का रोपण कर दिया कि , ʹʹजब तक मेरे द्वारा बँधा हुआ धागा आपके हाथ पर रहेगा, आपकी ही विजय होगी, आपकी रक्षा होगी तथा भगवान की कृपा से आपका बाल तक बाँका नहीं होगा।”


🚩शचि ने इन्द्र को राखी बाँधी तो इन्द्र में प्राणबल का विकास हुआ और इन्द्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की। धागा तो छोटा सा होता है लेकिन बाँधने वाले का शुभ संकल्प और बँधवाने वाले का विश्वास काम कर जाता है।


🚩आखिर में यही कहेगें की रक्षासूत्र हिन्दू भाई से ही खरीदें.....।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Friday, August 18, 2023

स्वामी करपात्रीजी महाराज कौन थे ? गांधी परिवार को श्राप क्यों दिया था ? जानिए....


18 August 2023

http://azaadbharat.org


🚩सत्य के शोध के लिए स्वयं कृति कर समाज को दिशा देनेवाले करपात्री स्वामीजी हम सभी के लिए अत्यंत पूज्यनीय है। उनके नेतृत्व में वर्ष 1966 में हुआ गोरक्षा आंदोलन भारतीय इतिहास का सबसे बडा आंदोलन कहा जा सकता है। ‘धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो।’ यह उनका घोष आज भी हिन्दूओं को प्रेरणा देता है।


🚩स्वामीजी का परिचय ही धर्मसम्राट, प्रकाण्ड विद्वान, गोवंश रक्षक ऐसे किया जाता है। स्वामी करपात्री जी महाराज का जन्म 1907 में उत्तरप्रदेश राज्य के प्रतापगढ जिले के भटनी गांव में रामनिधि ओझाजी के परिवार में हुआ।


🚩स्वामी जी को 8-9 वर्ष की आयु में ही सत्य का ज्ञान हो गया। उनको सांसारिक जीवन का मोह नही था, इसलिए विवाहित होते हुए भी वे तपस्या के लिए घर से निकल गए थे। स्वामीजी महाराज ने...

‘धर्म की जय हो...

अधर्म का नाश हो...

प्राणियों में सद्भाव हो...

विश्‍व का कल्याण हो...

यह जयघोष लोगों तक पहुंचाया। देश विदेश सभी जगहों पर उन्होंने सनातन धर्म के ज्ञान का प्रचार- प्रसार किया।


🚩स्वामी जी को करपात्री महाराज क्यों कहा जाता है ? इसका भी एक कारण है। स्वामी करपात्री जी महाराज ने तपस्या काल में ही पात्र का त्याग कर दिया था। दिन में केवल एक बार ही हाथ की

अंजली में जितना समाये, उतना ही भोजन लेकर वे ग्रहण करते थे । ‘कर’ अर्थात हाथ में भोजन करने के कारण ही इनका नाम " स्वामी करपात्री जी महाराज " प्रसिद्ध हुआ ।


🚩धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज नैष्ठिक ब्रह्मचर्यव्रत धारण कर हरिनारायण से हरिहर चैतन्य बने। 24 वर्ष की आयु में विद्यागुरु स्वामी श्री विश्‍वेश्‍वराश्रमजी के आग्रह के अनुसार ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य परम् तपस्वी 1008 स्वामी श्री ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज से विधिवत अनुग्रह तथा दण्ड धारण कर ‘हरिहरानंद सरस्वती’ नामग्रहण किया।


🚩संन्यास धारण करने के उपरांत ढाई गज कपड़ा तथा दो लंगोटी इतने ही उनके वस्त्र रह गए। इन्ही वस्त्रों में वर्षाकाल, ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल इन तीनों ऋतुओं को सहन करना उनका स्वभाव बन गया था। गंगातट पर एकाकी झोपडी में निवास, घरों से भिक्षाग्रहण करना, 24 घंटे में एक बार भोजन करना तथा भूमिशयन करना, पदयात्रा करना और एक टांग पर खड़े होकर तपस्या की कठोर साधना करना, यह उनकी दिनचर्या बन गई थी। सारे संकटों का सामना करते हुए उन्होंने अपने धर्मनिष्ठ विचारों को हिन्दी तथा संस्कृत भाषा में प्रकट किया।


🚩धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज धर्म के ज्ञाता होने के साथ-साथ प्रकाण्ड पंडित भी थे। वेदार्थ पारिजात, रामायण मीमांसा, विचार पीयूष, मार्क्सवाद और रामराज्य आदि उनके ग्रंथ प्रचलित हैं।


🚩"वर्ष 1966 में स्वामी करपात्रीजी महाराज के नेतृत्व में हुआ गोरक्षा आंदोलन"

🚩महाराज जी द्वारा किए गए गौरक्षा आंदोलन को समझने से पहले उसकी पृष्ठभूमि समझेंगे। भारत की स्वतंत्रता के बाद विनोबा भावेजी ने पूर्ण गोवध बंदी की मांग रखी थी। उसके लिए कानून बनाने का आग्रह उन्होंने नेहरू से किया था। वो अपनी पदयात्रा में यह प्रश्‍न उठाते रहे। कुछ राज्यों ने गोवध बंदी के कानून बनाए। इसी बीच हिन्दू महासभा के अध्यक्ष निर्मलचन्द्र चटर्जी ने एक विधेयक वर्ष 1955 में प्रस्तुत किया। उस पर जवाहरलाल नेहरू ने लोकसभा में कहां कि...

‘‘मैं गोवधबंदी के विरुद्ध हूँ। सदन इस विधेयक को रद्द कर दे। राज्य सरकारों से मेरा अनुरोध है कि ऐसे विधेयक पर न तो विचार करे और न कोई कार्यवाही।’’


🚩इसके पश्‍चात वर्ष 1955-66 में प्रभुदत्त ब्रह्मचारी, स्वामी करपात्रीजी महाराज और देश के तमाम संतों ने इसे आंदोलन का रूप दे दिया। गोरक्षा का अभियान शुरू हुआ, जिसमें देशभर के संतों के साथ लाखों लोग सडकों पर आ गए।


🚩आंदोलन की गंभीरता को समझते हुए सबसे पहले जयप्रकाश नारायण ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र में ‘हिन्दु बहुल भारतदेश में गोहत्या प्रतिबंध कानून क्यों नही लाया जा सकता ?’ यह प्रश्‍न पूछा।


🚩इंदिरा गांधी ने जयप्रकाश नारायण का यह परार्मश नहीं माना। परिणामस्वरूप सर्वदलीय गोरक्षा महाभियान ने दिल्ली में विराट प्रदर्शन किया। दिल्ली के इतिहास का वह सबसे बडा प्रदर्शन था।


🚩भारत के इतिहास में गोवंश की रक्षा के लिए उठा आंदोलन इंदिरा गांधी द्वारा कुचला गया।


🚩इंदिरा गांधी स्वामी करपात्रीजी और विनोबाजी को बहुत मानती थी, ऐसा कहा जाता है।

चुनाव सामने थे,

...कहते हैं कि इंदिरा गांधी ने करपात्रीजी महाराज से आशीर्वाद लेकर वचन दिया था, कि चुनाव जीतने के बाद अंग्रेजों के समय से चल रहे गायों के सारे कत्लखाने बंद हो जाएंगे।

इंदिरा गांधी चुनाव जीत भी गई, परंतु कई दिनों तक इंदिरा गांधी स्वामीजी की बात टालती रही। ऐसे में स्वामी करपात्रीजी को आंदोलन का रास्ता अपनाना पडा।


🚩उस समय करपात्रीजी महाराज शंकराचार्य के समकक्ष देश के मान्य संत थे। लाखों साधु-संतों ने उनका साथ देकर कहां की यदि सरकार गोरक्षा का कानून पारित करने का कोई ठोस आश्‍वासन नहीं देती है, तो हम संसद को चारों ओर से घेर लेंगे। फिर न तो कोई अंदर जा पाएगा और न बाहर आ पाएगा।


🚩संतों ने 7 नवंबर 1966 को संसद भवन के सामने धरना शुरू कर दिया। जिसमें शंकराचार्य निरंजन देव तीर्थ, स्वामी करपात्रीजी महाराज और रामचन्द्र वीर आगे थे। करपात्रीजी महाराज के नेतृत्व में जगन्नाथपुरी, ज्योतिष पीठ व द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वल्लभ संप्रदाय के सातों पीठों के पीठाधिपति, रामानुज संप्रदाय, माधव संप्रदाय, रामानंदाचार्य, आर्य समाज, नाथ संप्रदाय, जैन, बौद्ध व सिख समाज के प्रतिनिधि व सहस्रों की संख्या में मौजूद नागा साधुओं सहित संतजन इस आंदोलन में सहभागी हुए थे, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही थीं। लाल किला मैदान से आरंभ हुई पदयात्रा संसद भवन तक निकली। इस आंदोलन के प्रति लोगों के मन में इतना श्रद्धा थी , कि रास्तों पर अपने घरों से लोग फूलों की वर्षा कर रहे थे।


🚩कहते हैं , कि पदयात्रा संसद भवन पर पहुंच गयी और संत समाज के संबोधन में आर्य समाज के स्वामी रामेश्‍वरानंद भाषण देने के लिए खडे हुए। उन्होंने कहा कि यह सरकार बहरी है। यह गोहत्या को रोकने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाएगी। इसे झकझोरना होगा.....


🚩संत रामचन्द्र वीर ने आमरण अनशन चालू कर दिया। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण पद्धति से आंदोलन कर रहे थे। उनमें भारी संख्या में महिलाएं बच्चों के साथ सम्मिलित थीं। अचानक कुछ शरारती तत्त्वों ने ट्रांसपोर्ट भवन के पास कुछ वाहनों को आग लगा दी। यह घटना देखते ही संसद के दरवाजे तुरंत बंद कर दिए गए और चारों तरफ धुआं उठने लगा।


🚩जब इंदिरा गांधी को यह सूचना मिली, तो उन्होंने निहत्थे करपात्री महाराज और संतों पर गोली चलाने के आदेश दे दिए। पुलिस ने लाठी और अश्रुगैस चलाना शुरू कर दिया। इससे चीढ़कर भीड आक्रामक हो गई। इतने में अंदर से गोली चलाने का आदेश हुआ और पुलिस ने संतों और गोरक्षकों की भीड पर अंधाधुंध गोलियां बरसायीं। उस गोलीकांड में सैकडों साधु और गोरक्षक शहीद हुए ।


🚩दिल्ली में कर्फ्यू लगा दिया गया। संचार माध्यमों को सेंसर कर दिया गया और हजारों संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। इस हत्याकांड से क्षुब्ध होकर तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारीलाल नंदा ने अपना त्यागपत्र दे दिया और इस कांड के लिए खुद एवं सरकार को जिम्मेदार बताया।


🚩इधर संत रामचन्द्र वीर अनशन पर डटे रहे, जो 166 दिनों के बाद उनकी मृत्यु के बाद ही समाप्त हुआ था। देश के इतने बडे घटनाक्रम को किसी भी राष्ट्रीय अखबार ने छापने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह वार्ता केवल मासिक पत्रिका ‘आर्यावर्त’ और ‘केसरी’ में छपी थी। कुछ दिन बाद मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ ने अपने गौ अंक विशेषांक में विस्तारपूर्वक इस घटना का वर्णन किया था।


🚩गौहत्या बंद करने के प्रबल समर्थक स्वामी करपात्री जी महाराज ने इंदिरा गांधी को श्राप दिया, जो सच हो गया। वर्ष 1966 में इंदिरा गांधी ने संतों के ऊपर गोलियां चलवा दी, जिसमें 250 संत मारे गए। वह गोपाष्टमी का दिन था। जो गौ-पूजा का सबसे बड़ा दिन होता है। इस घटना के बाद स्वामी करपात्रीजी के शिष्य बताते हैं कि करपात्रीजी ने इंदिरा गांधी को श्राप दे दिया कि जिस तरह से इंदिरा गांधी ने निहत्थे साधु-संतों और गोरक्षकों पर अंधाधुंध गोलीबारी करवाकर मारवाया है, उसका भी हश्र यही होगा।


🚩कहते हैं, कि संसद के सामने साधुओं की लाशें उठाते हुए करपात्री महाराज ने अश्रुपात करते हुए ये श्राप दिया था। जो बात आगे चलकर सही साबित हुई ।


🚩स्वामी करपात्री जी महाराज का महानिर्वाण माघ शुक्ल चतुर्दशी ( 7 फरवरी, 1982 ) को हुआ। केदार घाट, वाराणसी में स्वेच्छा से उनके पंचप्राण महाप्राण में विलीन हो गए। उनके आदेशानुसार उनके परम् पावन नश्‍वर शरीर को केदार घाट स्थित , श्री गंगा महारानी की पवित्र गोद में जल समाधी दी गई। आज उनके द्वारा आरंभ किए गौरक्षा आंदोलन को पूर्णत्व देने के लिए हिन्दू राष्ट्र के सिवा और कोई पर्याय है ही नहीं ।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Thursday, August 17, 2023

ऋषि मुनियों के देश में साधुओं की हो रही है भयंकर तरीके से हत्याएं

  


17 August 2023

http://azaadbharat.org



🚩राष्ट्र विरोधी ताकतों ने देखा कि अगर भारतीय संस्कृति को खत्म करना है तो सबसे पहले उनके रक्षक साधु-संतों के प्रति लोगों की श्रद्धा खत्म करो जिसके लिए मीडिया द्वारा बदनाम करो या झूठे केस द्वारा जेल भिजवा दो अथवा हत्या कर दो जिससे आसानी से हिन्दू संस्कृति को खत्म करके धर्मान्तरण कर सकें एवं जिहाद फैला सकें और मंदिर की जगा चर्च या मस्जिद बनाकर उनका धर्म आसानी से फैला सकें ।

 

🚩बर्बरता से की साधू की हत्या 


🚩राजस्थान के नागौर में 70 साल के संत मोहन दास की चाकू मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। उनका शव आश्रम के फर्श पर पड़ा था। खून बिखरे हुए थे। हाथ-पैर रस्सी से बँधे थे। मुँह और आँखों पर पट्टी थी। यह आश्रम कुचामन थाना क्षेत्र के रसाल गाँव में स्थित है। हरिराम बाबा की बगीची नामक इस आश्रम के भैरो बाबा मंदिर में संत मोहन दास 14 साल से सेवा कर रहे थे।


🚩संत की हत्या की खबर लोगों को सोमवार (14 अगस्त, 2023) की सुबह पता चली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की सुबह करीब 8 बजे नर सिंह नाम का एक श्रद्धालु आश्रम गए। उन्हों संत मोहन दास को आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब वे मंदिर के पीछे बरामदे की तरफ गए तो वहाँ संत का शव बिस्तर के पास फर्श पर पड़ा मिला। शव के पास ही खून बिखरा हुआ था। उन्होंने तुरंत गाँव वालों को सूचना दी। इसके बाद करीब 8.30 बजे सुबह पुलिस मौके पर पहुँची।


🚩चाकू घोंपकर संत की हत्या


🚩पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद बताया हो कि हत्या रविवार (13 अगस्त, 2023) रात को हुई। उनके शरीर पर धारदार हथियार के कई निशान पाए गए हैं। मोहन दास के परिजनों ने हत्या के इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। मोहन दास के भतीजे त्रिलोक राम और बाकी परिजनों ने आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ने की माँग की। उनका कहना है कि जब तक पुलिस दोषियों को गिरफ्तार नहीं करती है, तब तक वे शव नहीं लेंगे।


🚩भतीजे त्रिलोक राम ने पुलिस को बताया कि रविवार रात 8 बजे तक मोहन दास गाँव वालों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसके बाद वह सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। गाँव वाले भी बगीची से अपने घर की ओर चले गए। आश्रम में रात में उनके अलावा कोई नहीं था। सुबह नर सिंह से पता चला कि उनकी डेड बॉडी मिली है।


🚩जाँच में जुटी पुलिस...


🚩जिला एसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि शुरुआती जाँच में चोरी के मकसद से हत्या का मामला लग रहा है। संत के परिजनों ने शिकायत दी है। फिलहाल आरोपितों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। जाँच की जा रही है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।


🚩गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में साधु, संतों और पुजारियों पर हमले की घटनाओं में अचानक वृद्धि देखने को मिली है। अप्रैल में सबसे पहले पालघर में दो साधुओं की लिंचिंग का मामला सामने आया था। इसके बाद महाराष्ट्र के नांदेड़ में लिंगायत समाज के साधु की हत्या हुई थी। कुछ दिनों बाद वृंदावन में साधु तमालदास के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। बिहार में भी कजरा थाना क्षेत्र के श्रृंगी ऋषि धाम के पुजारी नीरज झा की हत्या कर उनके शव को जंगल स्थि‍त हनुमान थान के समीप फेंक दिया गया था। इनके अलावा यूपी के सुल्तानपुर, संभल में भी इसी तरह के हमले देखने को मिले थे।

 

🚩भारतीय संस्कृति महान एवं प्राचीन है लेकिन राक्षसी स्वभाव के लोगों को सनातन संस्कृति कांटे की नाई चुभ रही है इसलिए इसे नष्ट करने के लिए अनेक कुठाराघात किये पर अभी भी सनातन संस्कृति अडिग है क्योंकि इस संस्कृति के रक्षक स्वयं भगवान एवं साधु-संत हैं, जिसकी वजह से ऐसे घोर कलिकाल में भी करोड़ों लोगों की आस्था साधु-संतो के प्रति है और वे सनातन संस्कृति को लोगों के दिल मे प्रगटाते रहते हैं जिसके कारण दुष्ट स्वभाव के लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं इसलिए साधु-संतों की हत्या कर देते है अथवा झूठे केस में जेल भेजवा देते हैं। जैसे की हिंदू संत आशाराम बापू राष्ट्र , संस्कृति और समाज की सेवा तन मन धन से करते थे इसलिए उन्हें झूठे केस में फंसाकर मीडिया में बदनाम करके जेल पहुंचा दिया ।


🚩हिन्दुओं को संगठित होकर अपने साधु-संतों पर हो रहे षड्यंत्र का विरोध करना चाहिए, तभी हिन्दू संत और संस्कृति सुरक्षित रह पाएंगे ।


🔺 Follow on


🔺 Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/


🔺Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg


🔺 Twitter:

 twitter.com/AzaadBharatOrg


🔺 Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan


🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg


🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ