Tuesday, April 7, 2020

जानिए हनुमान जी किसके अवतार थे और कितनी सिद्धियां थीं ?

07 अप्रैल 2020

*🚩 हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग में चैत्र पूर्णिमा की पावन तिथि पर हुआ । तब से हनुमान जयंती का उत्सव मनाया जाता है । इस दिन हनुमान जी का तारक एवं मारक तत्त्व अत्याधिक मात्रा में अर्थात अन्य दिनों की तुलना में 1 सहस्र गुना अधिक कार्यरत होता है । इससे वातावरण की सात्त्विकता बढती है एवं रज-तम कणों का विघटन होता है । विघटन का अर्थ है, 'रज-तम की मात्रा अल्प होना।' इस दिन हनुमान जी की उपासना करने वाले भक्तों को हनुमान जी के तत्त्व का अधिक लाभ होता है ।*

*🚩 ज्योतिषियों की गणना अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 115 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6:03 बजे हुआ था ।*
*हनुमान जी भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान हैं ।*

*🚩हनुमान जी के पिता सुमेरू पर्वत के वानरराज राजा केसरी तथा माता अंजना हैं । हनुमान जी को पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पवन देवता ने हनुमान जी को पालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।*

*🚩हनुमानजी को बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि हनुमान जी का शरीर वज्र की तरह है।*

*🚩पृथ्वी पर सात मनीषियों को अमरत्व (चिरंजीवी) का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं । हनुमानजी आज भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं।*

*🚩हनुमानजी को एक दिन अंजनी माता फल लाने के लिये आश्रम में छोड़कर चली गई। जब शिशु हनुमानजी को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने आकाश में उड़ने लगे । उनकी सहायता के लिये पवन भी बहुत तेजी से चला। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने दिया । जिस समय हनुमान जी सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था । हनुमान जी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया । उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे । आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है ।"*

*🚩राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े । राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई ।*

*🚩हनुमान की यह दशा देखकर वायुदेव को क्रोध आया । उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक दी । जिससे संसार का कोई भी प्राणी साँस न ले सका और सब पीड़ा से तड़पने लगे । तब सारे सुर,असुर, यक्ष,  किन्नर आदि ब्रह्मा जी की शरण में गये । ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये । वे मूर्छित हनुमान जी को गोद में लिये उदास बैठे थे । जब ब्रह्माजी ने उन्हें जीवित किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों की पीड़ा दूर की । फिर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान दिया कि कोई भी शस्त्र इनके अंग को हानि नहीं कर सकता । इन्द्र ने भी वरदान दिया कि इनका  शरीर वज्र से भी कठोर होगा । सूर्यदेव ने कहा कि वे उसे अपने तेज का शतांश प्रदान करेंगे तथा शास्त्र मर्मज्ञ होने का भी आशीर्वाद दिया। वरुण ने कहा कि मेरे पाश और जल से यह बालक सदा सुरक्षित रहेगा । यमदेव ने अवध्य और  निरोग रहने का आशीर्वाद दिया । यक्षराज कुबेर,विश्वकर्मा आदि देवों ने भी अमोघ वरदान दिये ।*

*🚩इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत मे हनु) टूट गई थी । इसलिये उनको "हनुमान" नाम दिया गया । इसके अलावा ये अनेक नामों से प्रसिद्ध है जैसे बजरंग बली, मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, बालाजी महाराज आदि । इस प्रकार हनुमान जी के 108 नाम हैं और हर नाम का मतलब उनके जीवन के अध्यायों का सार बताता है ।*

*🚩एक बार माता सीता ने प्रेम वश हनुमान जी को एक बहुत ही कीमती सोने का हार भेंट में देने की सोची लेकिन हनुमान जी ने इसे लेने से मना कर दिया । इस बात से माता सीता गुस्सा हो गई तब हनुमानजी ने अपनी छाती चीर का उन्हें उसे बसी उनकी प्रभु राम की छव‍ि दिखाई और कहा क‍ि उनके लिए इससे ज्यादा कुछ अनमोल नहीं ।*

*🚩हनुमानजी के पराक्रम अवर्णनीय है । आज के आधुनिक युग में ईसाई मिशनरियां अपने स्कूलों में पढ़ाती है कि हनुमानजी भगवान नही थे एक बंदर थे । बन्दर कहने वाले पहले अपनी बुद्धि का इलाज कराओ। हनुुमान जी शिवजी का अवतार हैं। भगवान श्री राम के कार्य में साथ देने (राक्षसों का नाश और धर्म की स्थापना करने ) के लिए भगवान शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण किया था ।*

*🚩मनोजवं मारुततुल्य वेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।*
*वातात्मजं वानरयूथ मुख्य, श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।*

*‘मन और वायु के समान जिनकी गति है, जो जितेन्द्रिय है, बुद्धिमानों में जो अग्रगण्य हैं, पवनपुत्र हैं, वानरों के नायक हैं, ऐसे श्रीराम भक्त हनुमान की शरण में मैं हूँ ।*

*🚩जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो, वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे..*
 
*🚩बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन - कुमार |*
*बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||*


*🚩चौपाई - अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।* *अस बर दीन्ह जानकी माता ।।  (31)*

*🚩यह हनुमान चालीसा की एक चौपाई  जिसमें तुलसीदास जी लिखते हैं कि हनुमानजी अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीता माता ने उन्हें वरदान दिया ।  यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है जिसकी बदौलत हनुमान जी ने असंभव से लगने वाले काम आसानी से सम्पन किये थे। आइये अब हम आपको इन अष्ट सिद्धियों, नौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताते हैं ।*

*🚩आठ सिद्धयाँ :*
*हनुमानजी को  जिन आठ सिद्धियों का स्वामी तथा दाता बताया गया है वे सिद्धियां इस प्रकार हैं-*

*🚩1.अणिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।*

*इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने तब किया जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।*

*🚩2. महिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।*

*जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था।*

*इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।*

*🚩3. गरिमा:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।*

*गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर रूप धारक करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया। पवनपुत्र हनुमान के भाई थे भीम क्योंक‍ि वह भी पवनपुत्र के बेटे थे ।*

*🚩4. लघिमा:  इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।*

*जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचे, तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही सीता माता को अपना परिचय दिया था।*

*🚩5. प्राप्ति:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।*

*रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।*

*🚩6. प्राकाम्य:  इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ ही, वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को प्राप्त कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।*

*इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल तक प्राप्त कर लिया है।*

*🚩7. ईशित्व:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।*

*ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।*

*🚩8. वशित्व:  इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।*

*🚩वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।*

*🚩नौ निधियां  :
हनुमान जी प्रसन्न होने पर जो नव निधियां भक्तों को देते है वो इस प्रकार हैं :-*

*🚩1. पद्म निधि : पद्मनिधि लक्षणों से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है ।*

*🚩2. महापद्म निधि : महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है ।*

*🚩3. नील निधि : नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढ़ी तक रहती है।*

*🚩4. मुकुंद निधि : मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।*

*🚩5. नन्द निधि : नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणोंवाला होता है वही कुल का आधार होता है ।*

*🚩6. मकर निधि : मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करनेवाला होता है ।*

*🚩7. कच्छप निधि : कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है ।*

*🚩8. शंख निधि : शंख निधि एक पीढ़ी के लिए होती है।*

*🚩9. खर्व निधि : खर्व निधिवाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रित फल दिखाई देते हैं ।*

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Saturday, April 4, 2020

जानिए दीपक जलाने के फायदे और 5 अप्रैल को क्या विशेष है?

03 अप्रैल 2020

*🚩सनातन धर्म में दीपक की रोशनी को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ये अपने तेज प्रकाश से जीवन में रोशनी भर देता है। दीपक का प्रकाश जीवन में सुख समृद्धि भी प्रदान करता है।*

*🚩दीपक जलाने का मतलब होता है कि अपने जीवन में अंधकार हटाकर प्रकाश फैलाना। ऐसा करने से अग्नि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली कई तरह की परेशानियों से बचाते हैं।*

*🚩कोरोना वायरस (Coronavirus) के कहर के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया। इसमें देशवासियों से अपील करते हुए कहा, इस रविवार 5 अप्रैल को कोरोना के अंधकार को चुनौती देनी है । पीएम मोदी ने 5 अप्रैल को देशवासियों से 9 मिनट मांगे हैं। उन्होंने रविवार रात नौ बजे, नौ मिनट तक घर की बत्तियां बुझाकर कैंडल, दीपक या मोबाइल फ्लैशलाइट जलाने की अपील की । चर्चा होने लगी कि आखिर इसका क्या फायदा होगा?*

*🚩आइए बताते है इसका क्या फायदा होगा?*

*एक फायदा तो यह होगा कि जब पूरे देश में नौ मिनट के लिए लाइटें बंद होंगी तो लाखों मेगावाट बिजली की बचत होगी। साथ ही पर्यावरण को भी थोड़ी राहत मिलेगा।*

*🚩दीपक जलाने के फायदे:*

*★ अगर आप अपने घर में देशी गाय के शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं तो इसके धुएं से घर में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके साथ ही घर में सात्विकता आती है। घर में मौजूद बैक्टीरिया भी समाप्त हो जाते हैं।*

*🚩★दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होने के साथ ही घर का वातावरण संतुलित रहता है।*

*★ दीपक जलाने का मतलब होता है कि अपने जीवन में अंधकार हटाकर प्रकाश फैलाना। ऐसा करने से अग्नि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली कई तरह की परेशानियों से बचाते हैं।*

*🚩★ दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होने के साथ ही घर का वातावरण संतुलित रहता है।*

*★ इससे आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। नकारात्मक शक्तियां खत्म होती है और इंसान रोगों से दूर रहता है।*

*🚩★ दीपक जलाने से घर के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं और दीप ज्योति आरोग्य बनाने में मदद करती है ।*

*★ ऐसा कहा जाता है कि दीपक जलाने से वातावरण में सकारात्मकता आती है। इसके अलावा दीपक की जलती लौ व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देती है।*

*🚩★ हर रोज पीने के पानी के बर्तन के पास घी का दीपक जलाकर रखने से धन की वृद्धि होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।*

*★ भगवान शिव के तीन नेत्र है पहला सूर्य दाहिना नेत्र, चंद्रमा वाम नेत्र एवं तीसरा नेत्र अग्नि है। दीपक अग्नि का प्रतीक है।*

*🚩★ जिस घर में सुबह और शाम दीपक जलाया जाता है। उस घर के सदस्य अंधकार से उजाले की तरफ बढ़ने लगते हैं। आसपास में उपस्थित शुभ शक्तियां दीपक जलाने से खिंची चली आती हैं।*

*🚩दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए-*
*_शुभम् करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्।_*
*_शत्रुबुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।_*

*5 अप्रैल को क्या है खास?*

*🚩इस दिन प्रदोष व्रत और वामन द्वादशी है। द्वादशी तिथि शाम 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इस दिन भगवान वामन की पूजा अराधना की जाती है। भगवान वामन विष्णु जी के 5वें अवतार माने जाते हैं। इसी दिन प्रदोष व्रत भी है। ये व्रत दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। ये तिथि शाम 7 बजकर 24 मिनट के बाद से लग जायेगी। माना जाता है कि इस व्रत को करने से इंसान की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।*

*🚩सामूहिक कार्यक्रम से एक देश को एकजुट करने का प्रयास:*

*दीपक जलाने का मकसद भी ये है कि देश एकजुट हो। तय समय पर जब पूरा देश एक साथ दीये जलाएगा तो एक सामूहिक चेतना जागृत होगी। लॉकडाउन में अपने परिवार के साथ घरों में बंद लोग नौ मिनट के लिए ही सहीं एक जगह पर होंगे। अपने घर से दूसरे घरों के बाहर खड़े लोगों को देख सकेंगे। दूर से ही कुछ बात कर सकते हैं। एकत्व का अनुभव होगा।*

*🚩द्वादशी (5 अप्रैल) को आप भी अपने घरों में देशी गाय के शुद्ध घी या सरसों तेल से दीपक जलाकर इन फायदों के लाभ उठायें।*

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योग और ध्यान करेंगे तो कोरोना की पीड़ा हो जाएगी दूर - अमेरिकी विद्यालय

04 अप्रैल 2020

*🚩भारत के महापुरुषों के ज्ञान का महत्त्व न जानने वालों ने स्वास्थ्य और सुविधा के लिए बड़ी-बड़ी महँगी-महँगी दवाइयाँ व मशीनें खोजीं लेकिन समस्याएँ कम न हुईं बल्कि और भी बढ़ीं । आखिर थक-हारकर आज पुनः स्वास्थ्य व शांति के लिए विश्ववासियों को भारत की ऋषिप्रणीत प्रणालियों की शरण स्वीकारनी पड़ रही है ।*

*🚩हमारे योग-ध्यान,गौ-चिकित्सा की ओर ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ सहित सारा विश्व आज आशा भरी दृष्टि से टकटकी लगाये देख रहा है ।*

*🚩आपको बता दें कि अमेरिका के अलबामा में विद्यालयों में योग पढाए जाने पर 27 सालों से लगा प्रतिबंध हटने के अगले ही दिन हार्वर्ड वैद्यकीय विद्यालय ने कोरोना वायरस से निपटने में भी योग और ध्यान को मददगार बताया है। अमेरिका ने प्रमुख वैद्यकीय इंस्टीट्यूट में से एक हार्वर्ड ने एक बयान जारी का कहा है कि, कोरोना वायरस से जुड़ी व्यग्रता और बेचैनी से निपटने के लिए योग और ध्यान करने के साथ-साथ सांस पर नियंत्रण रखना चाहिए।*

*🚩हार्वर्ड वैद्यकीय विद्यालय ने अमेरिका में कोरोना के बढते मामलों के बाद रविवार को एक नई हेल्थ गाइडलाइन जारी की जिसमें कोरोना पीड़ितों को बेचैनी होने पर योग और ध्यान की सलाह दी गई है। इसके अनुसार ये सभी शांत होने के सही एवं आजमाए हुए तरीके हैं और बेचैनी होने पर इन्हें अमल में लाया जाना चाहिए। इस संबंध में हार्वर्ड वैद्यकीय विद्यालय ने जर्नल में भी एक एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसमें योग और ध्यान का ज़िक्र किया गया है।*

*● नियमित ध्यान करने की सलाह*

*🚩हार्वर्ड वैद्यकीय विद्यालय के फैकल्टी एवं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डेविड गेफेन विद्यालय ऑफ मेडिसिन के बोर्ड प्रमाणित मनोरोग चिकित्सक जॉन शार्प के अनुसार नियमित ध्यान बहुत राहत देने वाला है। अगर आप योग नहीं करते हैं? जब तक मन करें तब तक कोशिश न करें। कई बार कुछ नयी चीजें करना और नयी गतिविधियों का पता लगा कर आप लाभ ले सकते हैं। योग स्टूडियो और पॉकेट योग जैसे ऐप पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वायरस को लेकर बुरी ही खबरें आएंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बात सुनें जो उन्हें सही रास्ता दिखा सकते हैं।*
*स्त्रोत : न्यूज १८*

*🚩कोरोना वायरस रोग की भीषण महामारी से त्रस्त होकर आज विश्व  को भारत के महापुरुषों के सिद्धान्तों की ओर तो आखिर में मुड़ना ही पड़ रहा है । लेकिन कितना अच्छा होता कि पहले से ही भारत कर महापुरुषों की उत्तम सीख को मानते।*

*🚩विश्व को उपरोक्त जैसी विभिन्न तबाहियों से बचना हो तो भारत के ऋषि-मुनियों और ब्रह्मवेत्ता सत्पुरुषों के ज्ञान की ओर ही मुड़ना होगा… स्नेहपूर्वक न मुड़े तो ठोकरें खाकर भी मुड़ना होगा…. इसके सिवा कोई चारा ही नहीं है ।*

*🚩विदेशी लोग तो चलो, हमारी संस्कृति की महानता से अपरिचित हैं इसलिए वे ठोकर खाकर सँभल रहे हैं पर हमारा जन्म तो भारतभूमि में हुआ है । ब्रह्मवेत्ता महापुरुषों के सुसंस्कारों की सरिताएँ आज भी हमारे देश में बह रही हैं ।*

*🚩जब से भारतवासी ऋषि-मुनियों की बतायी हुई दिव्य प्रणालियाँ भूल गये, ध्यान-योग करना भूल गये, अध्यात्मज्ञान को भूल गये , तभी से भारत का पतन प्रारम्भ हो गया । अब भी समय है । यदि भारतवासी शास्त्रों में बतायी गयी , संतों महापुरुषों द्वारा बतायी गयी युक्तियों का अनुसरण करें तो वह दिन दूर नहीं कि भारत अपनी खोयी हुई आध्यात्मिक गरिमा को पुनः प्राप्त करके विश्वगुरु पद पर आसीन हो जाय । "*

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