Tuesday, July 30, 2024

ये है वे सात ऋषि जिन्होंने इतना कुछ दे डाला कि वर्णन करना भी मुश्किल हो गया....

 

31  July 2024

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🚩ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त है, याने लगभग दस हजार मन्त्र है। चारों वेदों में करीब बीस हजार से ज्यादा मंत्र है और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते है। 


🚩बाकी तीन वेदों के मन्त्रों की तरह ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में भी अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे है जिनके कुलों में मन्त्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परम्परा रही। ये कुल परंपरा ऋग्वेद के सूक्त दस मंडलों में संग्रहित है और इनमें दो से सात यानी छह मंडल ऐसे है जिन्हें हम परम्परा से वंशमंडल कहते है क्योंकि इन में छह ऋषिकुलों के ऋषियों के मन्त्र इकट्ठा कर दिए गए है।


🚩आकाश में सात तारों का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के नाम पर ही रखे गए है। वेदों में 🕉उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है। प्रत्येक मनवंतर में अगल अगल सप्त‍ऋषि हुए है। यहां प्रस्तुत है वैवस्वत मनु के काल के सप्तऋषियों का परिचय।


🚩1. सप्तऋषि के पहले ऋषि जिनके पास थी कामधेनु गाय। 


🚩वशिष्ठ :- राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था।

कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था। वशिष्ठ ने राजसत्ता पर अंकुश का विचार दिया तो उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।


🚩2. दूसरे महान ऋषि मंत्र शक्ति के ज्ञाता और स्वर्ग निर्माता, 


🚩विश्वामित्र:- ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था बनाने की विद्या दी और गायत्री मन्त्र की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है।


🚩3. तीसरे महान ऋषि ने बताया ज्ञान विज्ञान तथा अनिष्ट निवारण का मार्ग, 


🚩कण्व:- माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।


🚩103 सूक्तवाले ऋग्वेद के आठवें मण्डल के अधिकांश मन्त्र महर्षि कण्व तथा उनके वंशजों तथा गोत्रजों द्वारा दृष्ट है। कुछ सूक्तों के अन्य भी द्रष्ट ऋषि है, किंतु 'प्राधान्येन व्यपदेशा भवन्ति' के अनुसार महर्षि कण्व अष्टम मण्डल के द्रष्टा ऋषि कहे गए है। इनमें लौकिक ज्ञान विज्ञान तथा अनिष्ट निवारण सम्बन्धी उपयोगी मन्त्र है।


🚩सोनभद्र में जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी पर कैमूर श्रृंखला के शीर्ष स्थल पर स्थित कण्व ऋषि की तपस्थली है जो कंडाकोट नाम से जानी जाती है।


🚩4. चौथे महान ऋषि जिन्होंने दुनियां को बताया विमान उड़ाना, 


🚩भारद्वाज:- वैदिक ऋषियों में भारद्वाज ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थी। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।


🚩ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में 10 ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा है और एक पुत्री जिसका नाम 'रात्रि' था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई है। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि है। इस मण्डल में भारद्वाज के 765 मन्त्र है। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के 23 मन्त्र मिलते है। 'भारद्वाज स्मृति' एवं 'भारद्वाज संहिता' के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे।


🚩ऋषि भारद्वाज ने 'यन्त्र-सर्वस्व' नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने 'विमान शास्त्र' के नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है।


🚩5. पांचवें महान ऋषि पारसी धर्म संस्थापक कुलके और जिन्होंने बताया खेती करना, 


🚩अत्रि:- ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा माँगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।


🚩अत्रि ऋषि ने इस देश में  (आज का ईरान) चले गए थे, जहाँ उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ।


🚩अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि दम्पति की तपस्या और उसके त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी।


🚩6. छठवें ऋषि शास्त्रीय संगीत के रचनाकार 


🚩वामदेव:- वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते है। भरत मुनि द्वारा रचित भरत नाट्य शास्त्र सामवेद से ही प्रेरित है। हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए सामवेद में संगीत और वाद्य यंत्रों की संपूर्ण जानकारी मिलती है।


🚩वामदेव जब मां के गर्भ में थे तभी से उन्हें अपने पूर्वजन्म आदि का ज्ञान हो गया था। उन्होंने सोचा, मां की योनि से तो सभी जन्म लेते है और यह कष्टकर है, अत: मां का पेट फाड़ कर बाहर निकलना चाहिए। वामदेव की मां को इसका आभास हो गया। 

अत: उसने अपने जीवन को संकट में पड़ा जानकर देवी अदिति से रक्षा की कामना की। तब वामदेव ने इंद्र को अपने समस्त ज्ञान का परिचय देकर योग से श्येन पक्षी का रूप धारण किया तथा अपनी माता के उदर से बिना कष्ट दिए बाहर निकल आए।


🚩7. सातवें ऋषि गुरुकुल परंपरा के अग्रज 


🚩शौनक:- शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे।


🚩फिर से बताएं तो वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक; ये है वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश के तारामंडलों पर टिक जाती है।


🚩इसके अलावा मान्यता हैं कि अगस्त्य, कष्यप, अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य, कात्यायन, ऐतरेय, कपिल, जेमिनी, गौतम आदि सभी ऋषि उक्त सात ऋषियों के कुल के होने के कारण इन्हें भी वही दर्जा प्राप्त है।


🚩अंत में पढ़ें कुछ खास तथ्य की बातें...


🚩वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- 

1. वशिष्ठ, 

2. विश्वामित्र, 

3. कण्व, 

4. भारद्वाज, 

5. अत्रि, 

6. वामदेव और 

7. शौनक।


🚩पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न भिन्न नामावली मिलती है। विष्णु पुराण अनुसार इस मन्वन्तर के सप्तऋषि इस प्रकार है:-


🚩वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत। 

विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।।


🚩अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार है:- 

वशिष्ठ, 

कश्यप, 

अत्रि, 

जमदग्नि, 

गौतम, 

विश्वामित्र और भारद्वाज।


🚩इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः 

केतु, 

पुलह, 

पुलस्त्य, 

अत्रि, 

अंगिरा, 

वशिष्ट तथा मारीचि है।


🚩महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती है। 


🚩एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते है तो 


🚩दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते है। कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते है पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते है। 


🚩कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है। यहां प्रस्तुत है वैदिक नामावली अनुसार सप्तऋषियों का परिचय।


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Monday, July 29, 2024

कांग्रेस सरकार ने गोविंद देवजी मंदिर के चढ़ावे में से 9 करोड़ 82 लाख दिए ईदगाह को

 

30  July 2024

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🚩राजस्थान विधानसभा में बुधवार को देवस्थान विभाग की अनुदान मांगों पर बोलते हुए सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि तत्कालीन राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने गोविंददेवजी मंदिर के 9 करोड़ 82 लाख रुपए बिना किसी परियोजना व रिपोर्ट के ईदगाह के लिए दे दिए गए। कांग्रेस, देवस्थान का पैसा ईदगाह को कैसे दे सकती है?


🚩मंदिरों से लिए गए दो करोड 45 लाख 50 हजार रुपए ईदगाह के लिए दिए। एक करोड़ 90 लाख रुपए खर्च भी हो गए। गोविंददेवजी मंदिर के लिए होल्ड और ईदगाह को समर्पण यह कौन सा न्याय है? दरगाह चार दरवाजा को मंदिरों का 95 लाख, दरगाह सांभर को 70 लाख रुपए, जामा मस्जिद जौहरी बाजार को 1 करोड़ 62 लाख रुपए दिए। जब मस्जिदों से पैसा आता नहीं तो मंदिरों में भक्ति भाव से किया गया चढ़ावा मस्जिदों के लिए खर्च करना कहां का न्याय है?


🚩उन्होंने कहा कि रफीक जी आपका

आखिरी कार्यकाल है। मुझे पता था तकलीफ 

होगी। मुझे दुःख इस बात का है कि पैसा खर्च करते समय पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कोई सर्वेक्षण भी नहीं करवाया। इधर से आओ और उधर से ले जाओ। मंदिर माफी की जिन जमीनों को कांग्रेस राज में बेचा नहीं जा सका उनको गैर कानूनी तरीके से समर्पित करवाया गया। जलमहल के पास मंदिर माफी की जमीन पर होटल बनवाया। सरकार ने जमीन अलॉट कर दी। आज भी विधानसभा के पास मंदिर माफी की जमीन थी उनको आज तक मुआवजा नहीं मिला। 

https://youtu.be/zCBm6gNSE9w?si=Pd_JWEWbrjYeYqE5


🚩विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि आज हालात ये हैं कि पुजारियों के पास भगवान को भोग लगाने के लिए भी पैसे नहीं है। मेरी सरकार से मांग है कि एक कमेटी बनाकर पुजारियों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।


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Sunday, July 28, 2024

कौनसे षडयंत्र के कारण भारत ही नहीं दुनियां को हुआ बड़ा नुकसान ?

 


29  July 2024

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🚩मनुष्य के लिए सबसे मूल्यवान चीज है, उसके संस्कार। क्योंकि,किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके संस्कार से ही होती है और संस्कार से ही विचारधार बनती है।उसी विचारधारा से ही व्यक्ति की पहचान बनती है और उसके आसपास उसकी विचारधारा से मिलते जुलते मित्र मंडल बनते है।


🚩व्यक्ति के अंदर सुसंस्कार निर्माण हो पाए तो, उसकी विचारधारा से स्वयं व्यक्ति, समाज और देश उन्नत होंगे , उदाहरण ले तो वीर शिवाजी,  गुरु गोविंद सिंह , स्वामी विवेकानंद , बप्पा रावल जैसे अनेक महपुरुष हुए उनके कारण समाज, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा हुई और लोग सुखी,स्वस्थ और सम्मानित जीवन जी पाए।


🚩वही अगर व्यक्ति के अंदर कुसंस्कार पनप गए फिर उसकी विचार धारा से स्वयं व्यक्ति, समाज और देश को नुकसान पहुंचता है। जैसे की राजा धनानंद, दुर्योधन,मानसिंह जैसे लोग समाज, राष्ट्र और संस्कृति के लिए नुकसान दायक साबित हुए।


🚩इनसे सार बात यहीं निकलती है की व्यक्ति पर सुसंस्कार करना बहुत जरूरी है और सुसंस्कार करने का दैवी कार्य माता-पिता और गुरुजन ही कर सकते है।


🚩भारत देश में आज सुसंस्कार का निर्माण करनेवालों  की संख्या कम हो रही है और कुसंस्कार का निर्माण करनेवालों की संख्या बढ़ती जा रही है जिसके कारण समाज और राष्ट्र को नुकसान हो रहा है। 


🚩भारत में 21वी सदी में अगर सबसे ज्यादा लोगों में सुसंस्कार निर्माण करने का कार्य किया हो तो वह है हिंदू संत,आशाराम बापू।कांग्रेस की सरकार के समय जब कोई सनातन संस्कृति के बारे में बोलता नहीं था उस समय संत आशाराम बापू ने करोड़ों लोगों में सनातन संस्कृति के संस्कार निर्माण करने का कार्य किया था।


🚩प्राणिमात्र के हितैषी नाम से जाने जानेवाले बापू आसारामजी का ह्रदय विशाल होने के साथ-साथ देश के कल्याण और मंगल के लिए द्रवीभूत भी रहता है । जब बापू आसारामजी ने देखा कि कई अत्याचारों से जूंझ रहा भारत देश धीरे-धीरे अप्रत्यक्ष रूप से फिर से गुलाम बनाया जा रहा है और देशवासियों को भ्रष्ट कर अपनी संस्कृति से, अपनी प्रगति से दूर किया जा रहा है तब बापूजी ने ठाना कि देश से पतन-कारक विदेशीसभ्यता को निकाल फेंकना होगा और फिर भारतवासियों को मिली सहीं राह।

🚩बापू आसारामजी ने 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन दिवस, 25 दिसंबर को क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन दिवस और 31 दिसंबर और 1 जनवरी को अंग्रेजी न्यू-ईयर की जगह भारत-विश्व-गुरु अभियान मनाना प्रारंभ किया । कई आदिवासी क्षेत्र, जिन तक सरकार भी नहीं पहुंच पाती है उन्हें समय-समय पर सहारा दिया और धर्म परिवर्तन से बचाया । हिंदुओं के पर्व पर विदेशी असर न हो इसलिए होली में केमिकल्स के कलर नहीं, नैसर्गिक रंग, पलाश के रंग से वैदिक होली और दीवाली पर प्रदूषण न हो इसीलिए अपने घर के साथ सभी स्थानों पर दीप-दान के महत्व को बताया ।


🚩संत का अर्थ ही है परम हितैषी और बापू आसारामजी ने न सिर्फ खुद का जीवन सेवा में लगाया है बल्कि सभी देशवासियों को प्रेरित किया है सेवा के लिए लोक-हित के लिए,अपने मूल मंत्र “सबका मंगल सबका भला”के साथ।


🚩आज बापू आसारामजी कारागृह में है तो सिर्फ इसी वजह से क्योंकि उन्होंने 50 वर्षों से भी अधिक समय देश और समाज के उत्थान और रक्षा में लगा दिए । बापू आसारामजी की वजह से भारत बार-बार विदेशी षड्यंत्रों से बचा और कई देशवासियों की धर्म-परिवर्तन से रक्षा हुई, कई विदेशी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की दाल नहीं गली और भटकते हुए देशवासियों को सहीं दिशा मिली । बापू के द्वारा किये जाने वाले ये सारे देश सेवा और मांगल्य के कार्य देश को फिर से गुलाम बनने से रोक रहे हैं इसलिए राष्ट्र-विरोधी ताकतों के इशारे पर कुछ स्वार्थी नेताओं ने बापू आसारामजी के खिलाफ षड्यंत्र रच झूठे केस के जरिए, उन्हें देश और समाज से दूर कर दिया। 


🚩लेकिन वे स्वार्थी नेता समझते है कि बापू आसारामजी केवल एक शरीर है। अब उन्हें कौन बताए कि जो करोड़ों हृदयों में वास करते है और जो सत्य के प्रतीक है वे सर्वव्याप्त है । जब इतने कुप्रचार के बाद भी सेवाएं और मंगल कार्य आदि के आयोजन रुकने के बजाए और भी व्यापक हुए तब इन षड्यंत्रकारियों को मुंह की खानी पड़ी।इनके दलाल मीडिया की भी कई गलत और विरोधी खबरों के बावजूद, बापू आसारामजी के द्वारा हो रहे सेवाकार्यों पर आंच तक नहीं आई । आखिर साँच को आंच नहीं और झूठ को पैर नहीं ! बापू आसारामजी का निर्मल पवित्र हृदय पहले भी सभी को लोकहित सेवा और आत्मज्ञान के लिए प्रति प्रेरित कर रहा था और आज भी कर रहा है और वर्षों-वर्ष आगे भी प्रेरित करता रहेगा ।


🚩भारत का स्वर्णीम इतिहास था उसका “विश्वगुरु” होना । हम सभी ने भारत देश का इतिहास पढ़ा है और भारत माता की महिमा की गाथाएं सुनी हुई है । इतिहास के पन्नो में भारत को विश्व गुरु यानी की विश्व को पढ़ाने वाला अथवा पूरी दुनियां का शिक्षक कहा जाता था क्योंकि भारत देश के ऋषि-मुनि संत आदि ज्ञानीजन और उनका विज्ञान और अर्थव्यवस्था, राजनीति और यहाँ के लोगों का ज्ञान इतना समृद्ध था कि पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी देश भारत के कायल थे । अब बापू आसारामजी की दूरदृष्टि के कारण और उनके अद्भुत अद्वैत अभियान के कारण भारत वास्तव में भीतर से बाहर तक विश्वगुरु बन कर रहेगा । 


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Saturday, July 27, 2024

सुप्रीम कोर्ट के नेम प्लेट के आदेश के बाद कांवड़िए बोले – हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया

28  July 2024

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🚩उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि काँवड़ यात्रा मार्ग पर लगने वाली सभी दुकानों, ठेलों, होटलों, रेहड़ियों पर दुकानकार अपना और अपने कर्मचारियों के नाम साफ शब्दों में लिखे। इसका असर ये हुआ कि संगम शुद्ध शाकाहारी होटल का नाम अब सलीम शुद्ध शाकाहारी होटल हो गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दिया। इस आदेश के बाद काँवड़ियों की भी प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें लोगों ने मुजफ्फरनगर प्रशासन के फैसले की तारीफ की है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है।


🚩यूपी तक से बातचीत में कई काँवड़ियों ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की। एक कावँड़िए ने कहा कि अगर नेम-प्लेट होता तो कम से कम ये तो साफ हो जाता कि जो भोजन वो कर रहे है, वो शाकाहारी है या मांसाहारी। काँवड़ यात्रा पर निकले एक व्यक्ति ने अपना दु:ख कुछ इस तरह से जाहिर किया, “जो भोलेनाथ के लिए जल लेकर जाते है, वो नॉनवेज छुएँगे तो अनर्थ हो जाएगा। लेकिन ऐसे होटलों में जिन बर्तनों में मांसाहारी भोजन बनाया गया, उसमें पलटकर हमें शाकाहारी भोजन दे दिया। हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया न…।”


🚩सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बोलते हुए एक काँवड़िया ने कहा, “योगी जी ने तो बहुत अच्छा किया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हम क्या ही कहें।”


🚩एक काँवड़िए ने कहा, “अगर मुस्लिम ढाबा चला रहा है, तो वेज खाना देगा या नॉन-वेज, इसका कैसे पता चलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान शिव के लिए हम पवित्र जल लेकर जा रहे है,अगर हम किसी ऐसे होटल में खाना खा रहे है, जहाँ नॉनवेज भी मिलता हो, तो हमारा तो पूरा व्रत ही खराब हो गया। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सही फैसला लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाकर गलत किया है।”


🚩एक कावँडिए ने कहा कि अब हम कहीं भी खाना खाते समय पूरी तरह से परेशान रहेंगे कि हम सही शुद्ध शाकाहारी खाना खा रहे है, साफ सुथरे बर्तन में या नहीं, ये तो धर्म संकट वाली बात हो गई।

https://x.com/UPTakOfficial/status/1815375535142224155?t=EbWJtmwEoMWawc4ZunAwQA&s=19


🚩बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने जब नेम-प्लेट का आदेश जारी किया, तो राजनीतिक रूप से बहुत हल्ला मचाया गया। ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। हालाँकि इस मामले में अभी आखिरी फैसला नहीं आया है। लेकिन पुलिस के आदेश के बाद कई सारी चौंकाने वाली बातें सामने आई। मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।


🚩इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।


🚩अब जनता की मांग है कि जैसा योगी जी ने कावँडिए के यात्रा पर नेमप्लेट लगाने का आदेश जारी किया था वैसा आदेश देशभर में लागू होना चाहिए जिससे शाकाहारी को शुद्ध भोजन मिल सके। 


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Friday, July 26, 2024

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने कहा ‘कागज़ पर नहीं, UCC को जमीन पर उतारिए’

26 July 2024 
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🚩मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) को कागजों की जगह अब जमीन पर उतारने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा है कि इससे ही रूढ़िवादी प्रथाओं पर लगाम लग सकती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी तीन तलाक के एक मामले को सुनते हुए की है।

🚩मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल वर्मा ने कहा, “समाज में कई निंदनीय, कट्टरपंथी, अंधविश्वासी और अति-रूढ़िवादी प्रथाएँ प्रचलित है, जिन्हें आस्था और विश्वास के नाम पर दबाया जाता रहा है। हालाँकि, भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता का समर्थन किया गया है, लेकिन इसे केवल कागज़ों पर नहीं बल्कि असलियत में बदलने की जरूरत है। एक सही तरह से ड्राफ्ट की गई संहिता ऐसी अंधविश्वासी और बुरी प्रथाओं पर लगाम लगा सकती है।” 

 🚩कोर्ट ने कहा कि 2019 में तीन तलाक को अवैध घोषित करते हुए 2019 में भारत की संसद ने कानून पास किया था जो अच्छा कदम था लेकिन फिर भी हमारे जनप्रतिनिधियों को इतने वर्ष यह जानने में लग गए कि तीन तलाक असंवैधानिक और समाज के लिए बुरा है।” 

 🚩कोर्ट ने कहा कि हमें बहुत जल्द ही देश में UCC की आवश्यकता समझने की जरूरत है। कोर्ट ने यह सारी टिप्पणियाँ तीन तलाक के एक मामले को सुनते हुए की। कोर्ट में दो महिलाओं ने राहत की माँग करते हुए अपील लगाई थी। इन महिलाओं पर घर की बहू ने दहेज़ माँगने, मारपीट और प्रताड़ना देने का आरोप लगाया था। 

 🚩मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी नंनद और सास ने उसे निकाह के बाद प्रताड़ित किया और दहेज़ को लेकर मारपीट की। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके शौहर ने भी उसको प्रताड़नाएँ दी। जब महिला ने प्रताडनाओं का विरोध किया था तो उसके शौहर ने उसे तीन बार तलाक बोल कर घर से बाहर भगा दिया। 

 🚩मुस्लिम महिला ने इस मामले में शौहर के साथ ही उसके घरवालों पर तीन तलाक क़ानून के तहत मामला चलाने की अपील की थी। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि यह कानून शौहर के तीन तलाक देने पर ही बनता है, कोर्ट ने इस मामले में उसकी सास और नंनद को राहत दे दी। 

 🚩गौरतलब है कि बीते कुछ समय से देश भर में UCC का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। कई भाजपा शासित राज्य इसे लागू करने की तैयारी में है। उत्तराखंड में धामी सरकार इसे लागू भी कर चुकी है और इसके क्रियान्वन पर काम चल रहा है। भाजपा ने भी लगातार UCC को व्यापक तरीके से लागू किए जाने की वकालत की है। 

 🚩क्या है समान नागरिक संहिता  ?
🚩समान नागरिक संहिता में सभी धर्मों के लिए एक कानून की व्यवस्था होगी। हर धर्म का पर्सनल लॉ है, जिस में शादी, तलाक और संपत्तियों के लिए अपने-अपने कानून है। UCC के लागू होने से सभी धर्मों में रहनेवालें लोगों के मामले सिविल नियमों से ही निपटाए जाएंगे। UCC का अर्थ शादी, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति का अधिकार से जुड़े कानूनों को सुव्यवस्थित करना होगा। 

 🚩इस्लामिक देशों में भी लागू है UCC -
 🚩मुस्लिम देशों में पारंपरिक रूप से शरिया कानून लागू है, जो धार्मिक शिक्षाओं, प्रथाओं और परंपराओं से लिया गया है। न्यायविदों द्वारा आस्था के आधार पर इन कानून की व्याख्या की गई है। हालांकि, आधुनिक समय में इस तरह के कानून में यूरोपीय मॉडल के मुताबिक कुछ संशोधन किया जा रहा है। दुनियां के इस्लामिक देशों में आमतौर पर पारंपरिक शरिया कानून पर आधारित नागरिक कानून लागू है। इन देशों में सऊदी अरब, तुर्की, सऊदी अगर, तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र, मलेशिया, नाइजीरिया आदि देश शामिल है। इन सभी देशों में सभी धर्मों के लिए समान कानून है। किसी विशेष धर्म या समुदाय के लिए अलग-अलग कानून नहीं है। 

 🚩इनके अलावा इस्राइल, जापान, फ्रांस और रूस में समान नागरिक संहिता या कुछ मामलों के लिए समान दीवानी या आपराधिक कानून है। यूरोपीय देशों और अमेरिका के पास एक धर्मनिरपेक्ष कानून है, जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है फिर चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। रोम में सबसे पहले नागरिक कानून के सिद्धांत बनाए गए थे। रोम के लोगों ने एक कोड विकसित करने के लिए सिद्धांतों का इस्तेमाल किया, जो निर्धारित करता था कि कानूनी मुद्दों का फैसला कैसे किया जाएगा। फ्रांस में दुनियां में सबसे प्रसिद्ध नागरिक संहिताएं है। अमेरिका में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है, जबकि भारत की तरह यहां भी बहुत विविधता है। यहां कानून की कई लेयर्स है, जो देश, राज्य और काऊंटी, एजेंसियों और शहरों में अलग-अलग लागू होती है। इन सबके बाद भी ये सामान्य सिद्धांत नागरिक कानूनों को राज्यों में इस तरह से नियंत्रित करते है जो पूरे देश में लागू होते है। 

 🚩भारत में जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता को लागू करना चाहिए ऐसी जनता की मांग है।  

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Thursday, July 25, 2024

जिन गौरक्षक से अंग्रेज़ भी थर थर कांपते थे आज हम भूल गए हैं


26  July 2024
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                                                                                🚩टोहाना में मुस्लिम राँघड़ो का एक गाय काटने का एक कसाईखाना था। वहां की 52 गांवों की नैन खाप ने इसका कई बार विरोध किया। कई बार हमला भी किया जिसमें नैन खाप के कई नौजवान शहीद हुए व कुछ कसाइ भी मारे गए।लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई।क्योंकि ब्रिटिश सरकार मुस्लिमों के साथ थी और खाप के पास हथियार भी नहीं थे। 

🚩तब नैन खाप ने वीर हरफूल को बुलाया व अपनी समस्या सुनाई। हिन्दू वीर हरफूल भी गौहत्या की बात सुनकर लाल पीले हो गए और फिर नैन खाप के लिए हथियारों का प्रबंध किया। हरफूल ने युक्ति बनाकर दिमाग से काम लिया। उन्होंने एक औरत का रूप धरकर कसाईखाने के मुस्लिम सैनिको और कसाइयों का ध्यान बांट दिया। फिर नौजवान अंदर घुस गए उसके बाद हरफूल ने ऐसी तबाही मचाई के बड़े बड़े कसाई उनके नाम से ही कांपने लगे।उन्होंने कसाइयों पर कोई रहम नहीं खाया। अनेकों को मौत के घाट उतार दिया और गऊओ को मुक्त करवाया। अंग्रेजों के समय बूचड़खाने तोड़ने की यह प्रथम घटना थी। यह घटना 23 जुलाई 1930 को हुई थी ।


🚩इस महान साहसिक कार्य के लिए नैन खाप ने उन्हें सवा शेर की उपाधि दी व पगड़ी भेंट की।


🚩उसके बाद तो हरफूल ने ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहां उन्हें पता चला कि कसाईखाना है वहीं जाकर धावा बोल देते थे।

उन्होंने जींद, नरवाना, गौहाना, रोहतक आदि में 17 गौहत्थे तोड़े। ऊनका नाम पूरे उत्तर भारत में फैल गया। कसाई उनके नाम से ही थर्राने लगे ।उनके आने की खबर सुनकर ही कसाई सब छोड़कर भाग जाते थे। मुसलमान और अंग्रेजों का कसाइवाड़े का धंधा चौपट हो गया।

इसलिए अंग्रेज पुलिस उनके पीछे लग गयी। मगर हरफूल कभी हाथ न आये। कोई अग्रेजो को उनका पता बताने को तैयार नहीं हुआ।


🚩गरीबों का मसीहा-

वीर हरफूल उस समय चलती फिरती कोर्ट के नाम से भी मशहूर थे। जहाँ भी गरीब या औरत के साथ अन्याय होता था वे वहीं उसे न्याय दिलाने पहुंच जाते थे। उनके न्याय के भी बहुत से किस्से प्रचलित हैं।


🚩हरफूल की गिरफ्तारी व बलिदान


🚩अंग्रेजों ने हरफूल के ऊपर इनाम रख दिया और उन्हें पकड़ने की कवायद शुरू कर दी।  हरफूल अपनी एक ब्राह्मण धर्म बहन के पास झुंझनु (रजस्थान) के पंचेरी कलां पहुंच गए। इस ब्राह्मण बहन की शादी भी हरफूल ने ही करवाई थी। यहां का एक ठाकुर भी उनका दोस्त था। वह इनाम के लालच में आ गया व उसने अंग्रेजों के हाथों अपना जमीर बेचकर दोस्त व धर्म से गद्दारी की।


🚩अंग्रेजों ने हरफूल को सोते हुए गिरफ्तार कर लिया ।कुछ दिन जींद जेल में रखा लेकिन उन्हें छुड़वाने के लिये  जेल में सुरंग बनाकर सेंध लगाने की कोशिश की और विद्रोह कर दिया। इसलिये अंग्रेजों ने उन्हें चुपके से फिरोजपुर जेल में  ट्रांसफर कर दिया।

बाद में 27 जुलाई 1936 को चुपके से पंजाब की फिरोजपुर जेल में अंग्रेजों ने उन्हें रात को फांसी दे दी। उन्होंने विद्रोह के डर से इस बात को लोगो के सामने स्पष्ट नहीं किया। उनके पार्थिव शरीर को भी हिन्दुओ को नहीं दिया गया। उनके शरीर को सतलुज नदी में बहा दिया गया।


🚩इस तरह देश के सबसे बड़े गौरक्षक, गरीबो के मसीहा, उत्तर भारत के रॉबिनहुड कहे जाने वाले वीर हरफूल सिंह ने अपना सर्वस्व गौमाता की सेवा में कुर्बान कर दिया।


🚩वीर हरफूल का जन्म 1892 ई० में भिवानी जिले के लोहारू तहसील के गांव बारवास में एक जाट क्षत्रिय परिवार में हुआ था।उनके पिता एक किसान थे।

बारवास गांव के इन्द्रायण पाने में उनके पिता चौधरी चतरू राम सिंह रहते थे।उनके दादा का नाम चौधरी किताराम सिंह था। 1899 में हरफूल के पिताजी की प्लेग के कारण मृत्यु हो गयी। इसी बीच ऊनका परिवार जुलानी(जींद) गांव में आ गया।यहीं के नाम से उन्हें वीर हरफूल जाट जुलानी वाला कहा जाता है।


🚩सेना में 10 साल

उसके बाद हरफूल सेना में भर्ती हो गए।उन्होंने 10 साल सेना में काम किया।उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में भी भाग लिया। उस दौरान ब्रिटिश आर्मी के किसी अफसर के बच्चों व औरत को दुश्मन ने घेर लिया। तब हरफूल ने बड़ी वीरता दिखलाई व बच्चों की रक्षा की। अकेले ही दुश्मनों को मार भगाया। फिर हरफूल ने सेना छोड़ दी। जब सेना छोड़ी तो उस अफसर ने उन्हें गिफ्ट मांगने को कहा गया तो उन्होंने फोल्डिंग गन मांगी। फिर वह बंदूक अफसर ने उन्हें दी।

उसने अपना बाद का जीवन गौरक्षा व गरीबों की सहायता में बिताया। मगर कितने शर्म की बात है कि बहुत कम लोग आज उनके बारे में जानते हैं।

https://youtu.be/rZAdKBmTyCc?si=ks0kXy9n8B6_ag5C


🚩ऐसे महान गौरक्षक को मैं नमन । आज कुछ ऐसे गौरक्षक भारत में हो जाए तो सरकार को गौ हत्या बंद करनी पड़ेगी।


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Wednesday, July 24, 2024

कांवड़ियों के रास्ते पर नेमप्लेट लगना क्यों जरूरी है? इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी......

 25 July 2024

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🚩हम कई बार इस बात को देख चुके है कि काँवड़ यात्रा के दौरान मजहबी भीड़ काँवड़ियों के ऊपर हमले भी करते है, उनके रास्ते में मांस भी फेंकते है और यही नहीं, भगवान शिव और उनके पूरे परिवार का मजाक भी बनाते है। इन्हीं सबके मद्देनज़र इस प्रकार के सांप्रदायिक दंगों और झगड़ों से निपटने के लिए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने एक नियम बनाया कि रास्ते में जितने भी ठेले और ढाबे आदि होंगे वो सब अपने सही और असली नाम के साथ ही दुकान लगाएँगे ताकि किसी भी प्रकार से भक्तों को असुविधा ना हो।


🚩और, यह नियम किसी एक मजहब के लिए नहीं बल्कि प्रत्येक दुकानदार के लिए है। क्योंकि, कई बार इस बात को देखा गया है कि तीर्थयात्री काँवड़िए वहाँ पर जाकर भोजन तो कर लेते है लेकिन बाद में पता लगता है कि यह तो कोई ‘थूक नान’ स्पेशलिस्ट वालों का ढाबा था। मुजफ्फरनगर प्रशासन के इसी नियम पर बहुत सारे ऐसे सवाल उठ रहे है जिनका जवाब देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मुस्लिम लोगों द्वारा अपने ढाबों पर बनाए जाने वाले खानों में थूकने के कई वीडियो सामने आए है।


🚩हमने रोटियों पर थूकते हुए कई वीडियो देखे है। आम पर पेशाब करते हुए मुहम्मदिनों को कौन नहीं जानता है? खीरों को थूक में लपेटकर पॉलिथीन में भरने वाली वीडियो अभी हमारी आँखों के सामने आ जाती है तो मन में घृणा पैदा हो जाती है। बर्तनों को चाटने वाले वीडियो, सब्जियों को नाली में धोने वाले वीडियो, हिंदू बहुल क्षेत्र में गौमांस के समोसे खिलाने वाले दीनी व्यक्ति के वीडियो। दूध में थूकने वाले दीन के पक्के दूधिए का वीडियो। होटल में काम करने वाले मुस्लिम लड़कों द्वारा भोजन पर थूकने वाले वीडियो। दिल्ली का वह वीडियो जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति पानी की बोतलों में थूक रहा है।


🚩एक बूढ़े बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति द्वारा सेबों पर थूकने वाला वीडियो या फिर इसी प्रकार कपड़ों पर इस्त्री करने वाले बुजुर्ग का वह वीडियो जिसमें वह मुँह में पानी भरकर कपड़ों पर थूक रहा है। या फिर ड्राई फ्रूट्स के ऊपर ऐसे ही मुँह में पानी भरकर छिड़काव करता अधेड़ नमाजी हो। या वह छोटे बच्चों का वीडियो जिसमें वह लोग उज्जैन महाकाल की यात्रा के ऊपर थूक रहे है। ऐसे तमाम वीडियो हमें बताते ह कि किस प्रकार हिंदुओं को अपना जूठा खिलाने की सड़ी हुई घिनौनी मानसिकता इस रेगिस्तानी कैंसर रूपी कल्ट के दिमाग में पनपती रहती है।


🚩इसके अलावा काँवड़ियों पर हमला करना, उनके ऊपर थूकना, भगवान शिव के पूरे परिवार पर आपत्तिजनक फब्तियाँ कसना, काँवड़ियों के रास्ते में मांस के लोथडे फेंकना – यह सब घटनाएँ बहुत आम है। हम अभी रियासी की घटना भूले नहीं जिस में 6000 रुपए के लिए 9 देवी भक्तों की जान लेने वाला इसी कैंसर रूपी मजहब का व्यक्ति था। गद्दार पुलिस अधिकारी DSP शेख आदिल मुस्ताक जो भारत की सुरक्षा की शपथ लेकर आतंकवादियों को हमारी सेना की सभी जानकारियां देता रहता था और किस प्रकार कानून के हाथों से बचना चाहिए वह सब हथकंडे भी आतंकवादियों को बताता था।


🚩आज उसी के कारण हमारे सेना के अधिकारी और जवान बलिदान हुए। और यह लोग सोचते है कि हम फिर भी इन्हें अपना भाई माने और उनके थूक नान खाएँ, गौंमांस मिश्रित समोसे खाएँ और जब यह हमारी बहन बेटियों को छेड़े, हमारे भाइयों पर हमला करें तो हम चुपचाप अपने घर के ऊपर यह लिखकर भाग जाएँ कि यह मकान बिकाऊ है। अब थोड़ी विवेचना उन ढाबों पर भी करते हैं जहाँ यह लोग हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट करने का पूरा षड्यंत्र चलाते होंगे अन्यथा अगर किसी को उनके ढाबे या होटल में खाना है तो वह वैसे भी चला जाएगा लेकिन नाम बदलकर ठीक उसी प्रकार से धोखा दिया जाता है जिस प्रकार ‘लव जिहाद’ करने वाला अब्दुल हिंदू बहन बेटियों को धोखे में रखकर उनका मजहब परिवर्तित करता है।


🚩अभी कुछ दिन पहले ही लखनऊ के एक व्यापारी के साथ घटी दुर्घटना सामने आई थी जिस में हिंदू व्यापारी ने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने यहाँ नौकर रखा था और इस नौकर ने व्यापारी की इकलौती बेटी के बाथरूम में कैमरा लगाकर उसके वीडियो बनाए और फिर उसे काफी लंबे समय तक ब्लैकमेल करता रहा था। अभी उसे घटना को बीते ज्यादा समय नहीं हुआ एक और घटना हमारे सामने है बिहार के VIP पार्टी के संस्थापक व पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी का केस नया ताजा ही है।


🚩जीतन ने ताउम्र हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की, उन्होंने हिंदुओं को भले ही पीछे धकेल दिया लेकिन मुस्लिमों को हमेशा प्रायोरिटी पर रखा, इसी के चलते जीतन ने एक नौकर रखा हुआ था जिसका नाम था काजिम अंसारी। पिछले दिनों काजिम ने जतन से डेढ़ लाख रूपए उधार लिए थे समय से न लौटाने पर जीतन ने उसे बीच-बीच में कई बार पैसे वापस करने के लिए टोका जिससे काजिम को गुस्सा आ गया और वह अपने साथियों को लेकर एक रात जीतन के घर में घुस गया और उसके साथ वही हश्र किया जैसा काजिम हर बकरा ईद पर एक बकरे के साथ किया करता है।


🚩अर्थात, तुम लोग उन्हें भाई मानकर गरीब मानकर मजलूम मानकर नौकरी पर तो रखते हो लेकिन उनकी नजर या तो तुम्हारी बेटियों पर होती है या फिर तुम्हारे धन ऐश्वर्य और पैसे पर होती है। फिर ऐसे में सामान्य लोग जो यह खबरें सुनते और पढ़ते है या अपने आस पड़ोस में ऐसी घटनाओं को होते हुए देखते है क्या वह उनके हाथ का पानी भी पीना मंजूर करेंगे ऐसे में इन लोगों ने कैसे सोच लिया कि शिव भक्त और भोजन में पवित्रता रखने वाले लोग उनके हाथ का थूका हुआ खाना खाएँगे या फिर मांस मिश्रित पकवान ग्रहण करेंगे?


🚩उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ‘जनता वैष्णो ढाबा’ चलता है। लोग सोचते है कि यह कोई शाकाहारी ढाबा है जिसका मालिक कोई हिंदू होगा। लेकिन 15 साल से चल रहे इस ढाबे का मालिक मोहम्मद अनस सिद्की है। आगरा मथुरा रोड पर ‘श्री खाटू श्याम ढाबा’ वर्षों से चल रहा है। लोग धोखे में यहां पर शुद्ध शाकाहारी भोजन खोजते हुए पहुँच जाते है जबकि इसके मालिक का नाम मोहम्मद इरशाद है। बरेली में ‘चौधरी स्वीट्स’ के मालिक का नाम अहमदमियाँ है।


🚩अब तो ‘अग्रवाल स्वीट्स’ के मालिक भी मुस्लिम बने बैठे है, जहाँ से हिंदू बड़े चाव से अपने मनपसंद व्यंजन खरीदते है जबकि उन्हें पता ही नहीं की इस में कितने मोमिनो का थूक मिला हुआ है। बिहार में चलने वाली एक दुकान जिसका नाम ‘अर्जुन सिंह’ था यहाँ पर इसका मालिक मोहम्मद उजियार आलम निकला जो हिंदू बनकर अपनी दुकान पर हिंदू लड़कियों से छेड़छाड़ किया करता था। हरिद्वार रोड पर ‘न्यू गणपति टूरिस्ट ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद वसीम है।


🚩मुजफ्फरनगर के हाईवे NH 58 पर स्थित ‘ओम शिव वैष्णव ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद आदिल है। खुलासा होने के बाद आजकल इसने अपने ढाबे का नाम बदलकर ‘वेलकम टू पिकनिक पॉइंट टूरिस्ट ढाबा’ कर दिया है। हर की पैड़ी पर बहुत सारे भोजनालय चलते है जबकि उनके मालिक भी मुस्लिम है। इसी प्रकार एक आरोपी को जब पकड़ा गया तो उसने अपना नाम चुन्नू बताया लेकिन आधार कार्ड पर देखने के बाद पता लगता है कि इसके अब्बा का नाम मोहम्मद मुनीर था, जबकि नगर निगम के उपनियमों के अनुसार हर की पैड़ी क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।


🚩खतौली में ‘शिव पंजाबी ढाबा’ चलता है जिसका मालिक भी मुस्लिम ही निकला। दिल्ली के किशनगंज बाजार में एक मुस्लिम युवक द्वारा राम मीट शॉप खोली गई बाद में खुलासा होने पर यह भी विक्टिम कार्ड खेलने लगा। उत्तर प्रदेश में ही राज मेहंदी स्टोर के नाम से बहुत सी दुकान चलती हैं जो हिंदू बहुलक क्षेत्र में जानबूझकर खोली जाती हैं और हिंदू लड़कियों को मेहंदी लगाने के नाम पर खुल्लम-खुल्ला ‘लव जिहाद’ को प्रमोट करते है।


🚩मथुरा में ताजमहल नाम से एक होटल चलता है जिसका मालिक जमील अहमद है जबकि मथुरा के मंदिर एरिया में नॉनवेज की बिक्री प्रतिबंधित है। लेकिन नाम बदलकर यह लोग नॉनवेज का धंधा भी चलाते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ‘श्री लक्ष्मी शुद्ध फैमिली ढाबा’ दिखाई दे रहा था जबकि इसका मालिक मोहम्मद शमशेर था। धार मध्य प्रदेश में हिंदू देवता साँवड़िया के नाम से मोहम्मद इलियास दुकान चलता था।


🚩अब एक बात सोचिए कि जब एक मुस्लिम झटके का मीट नहीं खा सकता, जब एक मौलाना अपनी भीड़ को यह कह रहा है कि तुम हिंदुओं की पूजा पाठ का प्रसाद मत खाओ यह हमारे दीन में हराम है पाप है। जब वह लोग टूथपेस्ट से लेकर चड्डी-बनियान, भोजन और साबुन-शैंपू व कपड़े, यहाँ तक की टूरिज्म भी हलाल सर्टिफाइड ही इस्तेमाल करते है ताकि इनकी इस्लामी अर्थव्यवस्था मजबूत हो और ये लोग यहाँ पर पूरी तरह कब्जा कर सके।


🚩ये लोग जो भी हमसे कमाते है उससे ही तो इनकी आर्थिक व्यवस्था और स्थिति मजबूत होती है, उसी का इस्तेमाल ये हमारे खिलाफ करते है तो फिर हिंदू क्यों मजबूर हो कि वह उनके हाथ का खाए। ईद के दौरान मुस्लिम घूम-घूमकर अपनी कम्युनिटी में कहते है कि वो सिर्फ मुस्लिमों की दुकानों से ही सामान खरीदे, हिंदुओं की दुकान से सामान ना खरीदे। जब उस पर किसी को कोई एतराज नहीं है तो फिर इन चीजों पर क्यों ऐतराज़ है? जिनके कारण अब तक काँवड़ यात्रा के दौरान काफी सारे सांप्रदायिक झगड़े पनप चुके हैं क्योंकि काँवड़िया यह सोचकर किसी भोजनालय में प्रवेश करता है कि यह किसी हिंदू का होगा लेकिन जैसे कि मैंने वीडियो की शुरुआत में ही बताया कि हमारे पास कई ऐसे उदाहरण है कि यह लोग हमारे धर्म के खिलाफ काम करते है, हमारे लोगों को जूठा खिलाते है, हमारे लोगों को पूज्य गाय माता का मांस खिलाते है हमारी बहन-बेटियों को झूठा नाम बताकर ‘लव जिहाद’ करते है, और उनको इस्लाम में कन्वर्ट करते है।


🚩यही लोग हिंदुओं के घरों में पहले नौकरी करते है और फिर उनकी बहन बेटियों के बाथरूम में कैमरा लगाकर वीडियो बनाते है उन्हें ब्लैकमेल करते है तो फिर जब एक शिव भक्त को पता लगेगा कि इसका असली मालिक एक मुस्लिम है तो क्या वह प्रतिक्रिया नहीं देगा। झूठ बोलकर व्यापार क्यों करना है हिंदुओं के साथ? इस बात पर कोई बात नहीं कर रहा है। इसी कारण फिर झगड़ा होते है और फिर यही अब्दुल जो वैष्णो देवी के नाम से ढाबा खोल कर बैठा है यही फिर विलाप करता है। किसी ने सोशल मीडिया पर मुजफ्फरनगर पुलिस के इस आदेश की मुखालफत करते हुए कहा कि हमारे मुस्लिम देशों में भी हिंदू जाते है वहाँ पर वह लोग व्यापार करते है लेकिन उनके साथ तो ऐसा नहीं होता लेकिन सवाल यह है कि क्या हिंदू लोग मक्का-मदीना या हिजरत के रास्ते में ढाबे खोलकर बैठे हुए है क्या उन्होंने हाजियों को कभी धोखा हुआ खिलाया क्या उन्होंने कभी हजरत करने वालों को थूक कर पानी पिलाया?


🚩अरे यह सब तो छोड़िए, हिंदू जिनको कि मुस्लिम की किताबों में काफिर प्रजाति बताया गया है वह लोग तो उसे रास्ते पर भी कम नहीं रख सकते, मक्का मदीना की तो बात ही छोड़ दो और यही नहीं भारत के मुस्लिम भी इस बात का पक्ष लेते है कि जब हिंदू इस्लाम को मानते नहीं या फिर उनकी आस्था हमारे मजहब में नहीं है तो फिर वह उसे स्थान पर जाएँ ही क्यों? वही भारतीय मुस्लिम आज दोगलेपन की सीमाएं पार करके हल्ला मचा रहे है?


🚩क्या यह लोग कभी खुद को आईने में नहीं देखते? क्या जो हिंदू मुस्लिम देशों में अपने होटल या ढाबे चला रहे है वो वहाँ के मुस्लिमों को झटके का मीट चोरी छिपे खिलाते है? क्या उनके भोजन में थूकते है? या फिर इस्लाम में अभक्ष्य जानवर के गोश्त के समोसे उनको खिलाते है? इन बातों का जवाब किसी के पास नहीं होता। ये लोग सिर्फ विरोध करने के लिए पैदा हुए है। ये लोग सिर्फ हिंदुओं के देवी-देवताओं को गाली देने के लिए पैदा हुए है।


🚩और अगर कोई इनको इन्हीं की दवाई चखा दे तो फिर इनका रोना स्टार्ट हो जाता है। संविधान से पहले कुरान बताने वाले देश से पहले इस्लाम बताने वाले आज सही सुनता और भाईचारा पर बड़े-बड़े भाषण दे रहे है तो ऐसा लगता है जैसे इनकी फूफी मियाँ खलीफा ब्रह्मचर्य पर तकरीर कर रही हो। मेरा तो बस इसे इतना ही कहना है कि तुमको हिन्दू नामों से, भगवानों से इतना ही प्यार है तो क्यों नहीं तुम हिन्दू ही बन जाते हो घर-वापसी करके? सारा झगड़ा ही खतम हो जाएगा।


🚩हर साल ‘शिव ढाबे’ वाला सलमान भी काँवड़ लेकर जाए, ‘शिव शक्ति ढाबे’ वाला शाहरूख घर में जगराता करवाए और वैष्णो ढाबे वाला जफरूल अपने घर हवन करवाए। जगह-जगह पर काँवड़ियों के लिए जल के प्याऊ लगवाए जैसे हिंदू उनके लिए निशुल्क भंडारे और छोटे-छोटे चिकित्सालय खुलवाते है। उससे भी अधिक पवित्रता के साथ भोजन परोसने का इंतजाम करवाए तो कितना अच्छा भाईचारे का माहौल बने और हिंदू चाहकर भी इनके ढाबों का विरोध ना कर पाए।


🚩या फिर यह भाईचारा केवल तभी बनता है जब कोई पुजारी अपने मंदिर में इफ्तारी पार्टी करवाता है या फिर हिंदू जालीदार टोपी पहनकर ईद की मुबारक बात देता घूमता है या फिर एंबुलेंस और स्कूल बसें एक साइड रोककर इनकी नमाज के लिए सड़क पर जगह देता है। हिंदू समाज आज उसे दोगलेपन को जानना चाहता है जिसके तहत हमारी आस्था का मजाक बनाना और फिर हमसे ही पैसा कमाना… सिर्फ यही उन्हें अच्छा लगता है। और या फिर तब तुमको किताब की आयतें याद आ जाती हैं? “काफिरों को अपना दोस्त ना बनाओ..”- (5:51), तुम कीचड़ में डूब क्यों नहीं मरते?


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