Friday, June 26, 2020

राष्ट्रद्रोहीयों को आसानी से जमानत, राष्ट्रहित करने वाले आज भी जेल में, कमी राष्ट्रवादीयों की है!

26 जून 2020

🚩इतना तो पक्का हो गया कि अगर आप राष्ट्र और संस्कृति के लिये कार्य करेंगे तो आपकी गिरफ्तारी भी होगी, जमानत भी नही होगी, मीडिया न्यायालय पर प्रेशर भी बनायेगा और बाद में आपको आजीवन तक की सजा भी दी जा सकती है और राष्ट्रवादी लोग आपके लिए कोई आवाज नही उठाएंगे और आपने राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति विरोधी कार्य किये होंगे तो जमानत भी मिलेगी, मीडिया भी वाहवाही करेगी और राष्ट्रविरोधी गुट आपके लिए समर्थन भी करेंगे।

🚩आइए कुछ उदाहरणों से जानते है-

🚩दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी की सदस्य सफूरा जरगर को जमानत दे दी है। बता दें कि दिल्ली दंगा भड़काने में सफूरा जरगर मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। जफूरा के कई वीडियो उपलब्ध हैं, जिसमें वो कश्मीर को आजादी, केरल को आजादी, बिहार को आजादी और इंकलाब की बातें करती है।

🚩इसके अलावा जफूरा के खिलाफ सबूत हैं कि ये जाफराबाद से महिलाओं की टोली को शाहीनबाग लाती थी और दंगे से पहले जाफराबाद में जो जाम लगा था, वहाँ भी ये सक्रिय रूप से उपस्थित थी और लोगों को उकसा रही थी।

🚩ऐसे लोग जब हार जाएँगे तो सबूत के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बावजूद इसे बैल दी गई। दिल्ली पुलिस की तरफ से सरकार का पक्ष रख रहे सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्वयं कहा कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है, इसे बैल दे दी जाए। बताया गया गर्भवती होने के कारण जमानत दी गई लेकिन आपको बता दें कि इससे पहले कई गर्भवती महिलाओं को गिरफ्तार किया था और उसी जेल में 39 बच्चों को जन्म भी दिया गया है और इन पर तो राष्ट्रद्रोह जैसा गंभीर आरोप भी हैं फिर भी जमानत दी गई हैं।

🚩इससे पहले संजय दत्त, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, वाड्रा, लालू यादव, तरुण तेजपाल, माल्या, सलमान खान, कन्हैया कुमार, उमर खालिद, इमाम बुखारी, मुक़व्वल फ्रेंको आदि नेता-अभिनेता, पत्रकार, धनी, अन्य पंथ के धर्मगुरु और राष्ट्रद्रोह आदि अपराधों में जमानत मिलती रही हैं।

🚩लेकिन वहीं साध्वी प्रज्ञाजी को 9 साल, डीजी वंजाराजी को 8 साल, स्वामी असीमानन्दजी को 8 साल, कर्नल पुरोहित 7 साल, केशवानन्दजी महाराज, शंकराचार्य आदि को सालों तक जेल में रखा गया, अमानवीय यातनाएं दी गई लेकिन जमानत नही दी गई।

🚩ओडीशा में धर्मान्तरण का विरोध करने वाले दारा सिंह को सालो से जेल में रखा गया है, अपनी मां की अंतेष्टि करने के लिए भी पेरोल नही दी गई।

🚩जोधपुर जेल में 7 साल से बंद 85 वर्षीय हिंदू संत आशारामजी को एक दिन भी जमानत अथवा पेरोल नही दी गई इसके पीछे के कारण नीचे जानिए।

1). लाखों धर्मांतरित ईसाईयों को पुनः हिंदू बनाया व करोड़ों हिन्दुओं को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया व आदिवासी इलाकों में जाकर जीवनोपयोगी सामग्री, मकान, पैसे, दवाइयां आदि दी जिससे धर्मान्तरण करने वालों का धंधा चौपट हो गया।

2). कत्लखानों में जाती हज़ारों गौ-माताओं को बचाकर, उनके लिए विशाल गौशालाओं का निर्माण करवाया।

3). शिकागो विश्व धर्मपरिषद में स्वामी विवेकानंदजी के 100 साल बाद जाकर हिन्दू संस्कृति का परचम लहराया।

4). विदेशी कंपनियों द्वारा देश को लूटने से बचाकर आयुर्वेद/होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार द्वारा एलोपैथिक दवाईयों के कुप्रभाव से असंख्य लोगों का स्वास्थ्य और पैसा बचाया।

5). लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों को सारस्वत्य मंत्र देकर और योग व उच्च संस्कार का प्रशिक्षण देकर ओजस्वी- तेजस्वी बनाया।

6). लंदन, पाकिस्तान, चाईना, अमेरिका और बहुत सारे देशों में जाकर सनातन हिंदू धर्म का ध्वज फहराया, पाकिस्तान में तो कराची में गाजी दरगाह में दोपहर की अजान के समय भी वे हरि कथा करते रहे।

7). वैलेंटाइन डे का विरोध करके "मातृ-पितृ पूजन दिवस" का प्रारम्भ करवाया।

8). क्रिसमस डे के दिन प्लास्टिक के क्रिसमस ट्री को सजाने के बजाय, तुलसी पूजन दिवस मनाना शुरू करवाया।

9). करोड़ों लोगों को अधर्म से धर्म की ओर मोड़ दिया।

10). नशा मुक्ति अभियान के द्वारा करोड़ों लोगों को व्यसन-मुक्त कराया।

11). वैदिक शिक्षा पर आधारित अनेकों गुरुकुल खुलवाएं।

12). मुश्किल हालातों में कांची कामकोटि पीठ के "शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीजी", बाबा रामदेव, मोरारी बापूजी, साध्वी प्रज्ञा एवं अन्य संतों का साथ दिया।

🚩ऐसे अनेक भारतीय संस्कृति के उत्थान के कार्य किये हैं जो विस्तार से नहीं बता पा रहे हैं।

🚩डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने तो यह भी बताया कि हिन्दू संत आशारामजी बापू ने लाखों हिंदुओं की घर वापसी की और करोड़ो लोगों को सनातन धर्म की तरफ ले आये इसके कारण वेटिकन सिटी ने सोनिया गाँधी को कहकर झूठे केस में फँसाया गया। उनके आश्रम में फेक्स भी आया था कि 50 करोड़ दो नहीं तो जेल जाने को तैयार रहो इससे साफ होता है कि उन पर अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र हुआ है।

🚩इससे साफ पता चलता है कि सफूरा जरगर जैसे जो देश को तोड़ने की बात करते है वे किसी भयंकर अपराध में गिरफ्तार हो भी जाये तो उनको तुरंत जमानत मिल जाती है क्योंकि उनके लिए आवाज उठाने के लिए राष्ट्रविरोधी लोग तुरंत इकट्ठे हो जाते है, मीडिया उनके पक्ष में बोलने लगती है जबकि कोई राष्ट्रवादी षडयंत्र तहत जेल जाता है तो राष्ट्रवादी लोग आवाज नही उठाते है सोचते है कि हमारे पडोश में आग लगी है न हमारे घर मे तो नही आई है न लेकिन पडोस में लगी है तो आपके वहाँ भी आयेगी इसलिए सभी राष्ट्रवादी, हिन्दूनिष्ठ इक्कट्ठे होकर आवाज उठानी चाहिए तभी सभी बच पायेंगे नही तो एक के बाद एक कि बारी तय है।

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Thursday, June 25, 2020

आसाराम बापू अभी भी जेल में क्यों हैं? सवाल आपका - जवाब हमारा...

25 जून 2020

🚩हिंदुस्तान में अधिकतर लोगों में एक धारणा बनी रहती है कि कोई व्यक्ति जेल में है तो समझो की वे अपराधी होगा लेकिन ये बात सभी जगह लागू नही होती कुछ व्यक्ति जेल में होते है तो उसके पीछे ओर भी बहुत कारण होते हैं। कई बार राष्ट्र और संस्कृति का कार्य करने पर जेल भेजा हैं।

1.) स्वदेशी अभियान आंदोलन 
🚩इसके अंतर्गत बापू आसारामजी आयुर्वेद विज्ञान को लोगों की जीवनशैली में वापस लाए और गरीबों को उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाई।

2.) 50 से भी ज्यादा सनातन धर्म शैली के गुरुकुलों की शुरूआत की जिससे छोटी उम्र में ही बच्चे वैदिक संस्कृति से जुड़ने लगें । इनके गुरुकुल इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि सभी स्थानीय कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश में गिरावट आने लगी।

3.) 10,000 से ज्यादा गायों को कत्लखाने जाने से बचाकर, स्व-निर्भर गौशालाओं की शुरुआत की, जो बिना किसी बाहरी दान के चलायी जाती हैं । जहाँ गौ सेवा अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर की जा रही है। इनके गौमूत्र से बने अर्क, गौवटी और गोधूप इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि अन्य बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ी और इससे 100 से ज्यादा अलग-अलग जगहों पर आदिवासी परिवारों को रोजगार मिलने लगा।

4.) जो लोग उनके सत्संग को सुनते और उनके संपर्क में आने लगे, वे गर्व से कहने लगे कि हिंदू होने पर वे अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानते हैं।

5.)  बापू आसारामजी ने कई संस्थाओं के मार्गदर्शक बनकर उन्हें भी प्रेरित किया और खुद भी जनजातीय क्षेत्र में बहुत से सेवा और रोजगार के अवसरों का नेतृत्व किया और सनातन धर्म के मार्ग को खोने वाले लाखों धर्मान्तरित हिंदुओं की घरवापसी करवाई। 

6.) बापू आशारामजी के प्रत्येक आश्रम (450 आश्रम) को एक आत्मनिर्भर इकाई के रूप में बनाया गया ताकि उन्हें किसीके सामने धनराशि के लिए प्रार्थना न करनी पड़े और वे आसानी से व्यसन मुक्ति अभियान, मातृपितृ पूजन दिवस, संस्कार सिंचन अभियान, वैदिक मंत्र विज्ञान प्रचार, संस्कृति रक्षक सम्मेलन, संकीर्तन यात्राएं और सत्संग जैसे सेवाकार्यों द्वारा समाज में जागृति लाये।

7.) किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी युवा होते हैं। हिंदू संत आशारामजी बापू ने युवाधन सुरक्षा अभियान (दिव्य प्रेरणा प्रकाश) द्वारा युवाओं को संयमित जीवन का महत्व समझाया। आज बापू आसारामजी के कारण आधुनिक अश्लीलता भरे वातावरण में भी करोड़ों युवा ब्रह्मचर्यं का महत्व समझ रहे हैं और अपनी प्राचीन विरासत पर गर्व करने लगे हैं।

8.) बापू आसारामजी ने देश विदेश में 17,000 से भी अधिक बाल संस्कार केंद्र शुरू करवाये जहां बच्चों को अपने माता-पिता का आदर करना, स्मृति क्षमता में वृद्धि और अपने जीवन को कैसे ऊर्जावान बनाया जाये, ये शिक्षा दी जाने लगी। उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम जैसे सद्गुणों से बच्चे विद्यार्थी जीवन से ही उन्नत, विचारवान और संस्कृति प्रेमी बनने लगे।

9.) हमारी खोई हुई गरिमा और संस्कृति की महिमा को जनमानस के हृदय में पुनः स्थापित करने के लिए समाज में वैश्विक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया 14 फरवरी वेलेंटाइन डे को "मातृपितृ पूजन दिवस" और  25 दिसंबर क्रिसमस डे को "तुलसी पूजन दिवस" और करोड़ो लोग इस दिन 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस और 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाने लगें।

🚩इन सभी गतिविधियों को आम व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा शुरू नहीं किया जा सकता है। यह केवल किसी महापुरुष द्वारा किया जा सकता है जो आत्मनिर्भर और दिव्य हैं। ऐसे संतों से लाभान्वित होना न होना ये समाज पर निर्भर करता है। विकल्प हमारा है क्योंकि आत्मरामी संतों को हमसे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है और न ही उनको कोई घाटा है पर उनकी उपेक्षा करने से समाज को आने वाले समय में बहुत बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

🚩तो अब सवाल यह है पिछले पचास साल से देश और संस्कृति की सेवा करनेवाले बापू आसाराम जी को जेल क्यों भेजा गया ?

🚩सब जानते हैं कि भारत को 1947 में आजादी मिली पर पर्दे के पीछे का सत्य कोई नहीं जानता। केजीबी जासूस के मुताबिक़ अंतर्राष्ट्रीय मिशनरियों के पास भारत की संस्कृति को ध्वस्त करने का लक्ष्य है। असल में वे दुनिया पर शासन करना चाहते हैं पर किसी भी देश को नष्ट करने के लिए सबसे पहले उस देश की संस्कृति को नष्ट करना होता है और इसलिए वे उस देश की संस्कृति को नष्ट करने के लिए देश के प्रति वफादार नेताओं और संतों पर हमला करते हैं।

🚩जैसे सुभाष चन्द्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, राजीव दीक्षित और संत लक्ष्मणानंदजी आदि आदि की कैसे मृत्यु हुई आज तक पता नही चला।

🚩कुछ साल पहले यूरी बेज़मेनोव, जो पूर्व केजीबी जासूस है, उनके इन्टरव्यू के अंश एक अद्भुत अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

"किसी भी देश की पूरी आबादी की सोच और व्यवहार को बदलने के लिए चार कदम हैं।

1. अनैतिकता

2. अस्थिरता

3. संकट

4. सामान्यीकरण

हम युवाओं को शिक्षण के द्वारा गुमराह करके अनैतिक बना देते हैं। भारत में अनैतिकता प्रक्रिया मूल रूप से पहले ही पूरी हो चुकी है।"

🚩अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि आशाराम बापू अभी भी जेल में क्यों हैं?
कुछ लोग कहते हैं, कांग्रेस (विशेष रूप से सोनिया गांधी का षड्यंत्र) आशाराम बापू पर बनाये गये मामले के पीछे छिपी हुई है लेकिन अब जब मोदी सत्ता में हैं, तब भी आशाराम बापू जेल में हैं।

🚩वास्तविक सत्य यह है: यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश है। बड़े शक्तिशाली लोग जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और मिशनरियों से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने भारतीय मीडिया कई समूहों को खरीद रखा है, यहां भारतीय मीडिया पूरी तरह से दूषित है और खरीदने में मुश्किल नहीं है, वे भ्रष्ट अधिकारी और राजनेता को खरीदते हैं। वे हमेशा किसी भी चेहरे के पीछे काम करते हैं, जैसे उन्होंने सोनिया गांधी के चेहरे के पीछे किया था। भारतीय लोगों को मीडिया द्वारा आसानी से बेवकूफ़ बना दिया जाता है और बाकि भ्रष्ट राजनेता और अधिकारी केस को लंबा बनाते हैं।

🚩जब हम आसाराम बापू पर की गई FIR पढ़ते हैं तो सबकुछ स्पष्ट होता है। FIR में कोई बलात्कार का जिक्र नहीं है, लेकिन मीडिया ब्रेकिंग न्यूज 24X7 में "रेप" शब्द बोलता है और लड़की की कॉल डिटेल के अनुसार लड़कीं ने जिस समय पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है उस समय वहाँ थी ही नही और आशारामजी बापू किसी कार्यक्रम में व्यस्त थे वहां 60 लोग भी मौजूद थे इससे स्पष्ट होता है कि सोची समझी साजिश के तहत जेल भिजवाया हैं।

🚩बापू आशारामजी के आश्रम में फैक्स भी किया था उसमे लिखा था कि 50 करोड़ दे दीजिए नही तो लड़की के केस में जेल जाने को तैयार रहिये लेकिन बापू आशारामजी ने इसपर ध्यान ही नही दिया वे देश व संस्कृति की सेवा में लगे रहे पैसे गरीबों और गायों की सेवा में लगाते रहे जिसके कारण वे आज भी जेल में है और अगर उनको बाहर निकालेंगे तो फिर से धर्मान्तरण वालो और मल्टीनेशनल कंपनियों की दुकानें बंद हो जायेगी।

🚩अगर देश को बचाना चाहते हैं तो भारतीयों को एकजुट होना चाहिए। लेकिन केजीबी के जासूसी प्रभावित लोगों का मीडिया द्वारा ब्रेनवोश किया गया है, इसलिए वे कभी भी सच नहीं पढ़ते और ना बोलते हैं।

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Wednesday, June 24, 2020

चीन भूल गया क्या ? केवल 120 भारतीय जवानों ने 1300 चीनी सैनिकों को उतारा था मौत के घाट !

24 जून 2020

🚩चीन हमेशा भारत पर धोखे से वार करता आया है और गीदड़ धमकी देता रहता है जबकि अंदर से तो वो भी जानता है कि भारतीय सैनिकों के पराक्रम के आगे चीनी सैनिक टिक नही सकते इसलिए वे हमेशा पीठ पीछे वार करते हैं फिर भी हमारे सैनिकों ने ऐसा करारा जवाब दिया है कि सालों तक मुड़कर नही देखते हैं। 

🚩भारत से इतिहास के पन्ने पलटने की वकालत करने वाला चीन जब इन्हीं पन्नों में खुद को देखता है तो उसको घिन आने लगती है। साल 1962 नवंबर महीने का 18वां दिन, देश में दिवाली की धूम थी वहीं लद्दाख की बर्फ से ढकी चुशुल घाटी एक इतिहास रचने जा रही थी और इस बात की भनक किसी को लगी नहीं थी। तड़के साढ़े तीन बजे शांत घाटी में गोलियों की गंध घुलनी शुरू हो गई थी।

🚩पांच से छह हजार की संख्या में चीनी जवानों ने लद्दाख पर हमला कर दिया था। इस दौरान सीमा पर मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व वाली टुकड़ी देश की सीमा की सुरक्षा कर रही थी। इस टुकड़ी में केवल 120 जवान थे। लेकिन मुट्ठीभर जवान चीन को ऐसा सबक सिखाएंगे इस बात की कल्पना तो दुनिया ने नहीं की थी।

🚩अचानक हुए इस हमले में देखते ही देखते भारत माता के वीर सपूत चीनियों के लिए काल बन गए थे। भारतीय सेना के जवानों ने किस अंदाज में यह जंग लड़ी थी उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 120 सैनिकों ने चीन के करीब 1300 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। 

🚩इस टुकड़ी के पास न तो आधुनिक हथियार थे और न ही तकनीक। हथियार के नाम पर इनके पास थी सिर्फ वीरता। जिसका लोहा बाद में पूरी दुनिया ने माना। 120 जवानों की इस टुकड़ी का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे। कहा जाता है कि गिन पाना मुश्किल था कि शैतान सिंह ने अकेले ही कितने चीनी सैनिकों को मार डाला था। इतना ही नहीं वो अपने साथियों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे थे। इसी बीच उन्हें कई गोलियां लगीं।

🚩दो सैनिक उन्हें उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे तभी एक चीनी सैनिक ने आकर मशीनगन से उन पर हमला कर दिया। जब शैतान सिंह पर हमला हुआ तो उन्होंने अपने साथी सैनिकों को पीछे हटने का आदेश दिया और खुद मशीनगन के सामने आ गए।

🚩इसके बाद सैनिकों ने शैतान सिंह को एक बड़े पत्थर के पीछे छुपा दिया। जब युद्ध खत्म हुआ तो उसी पत्थर के पीछे शैतान सिंह का शव मिला। उन्होंने अपने हाथों से मजबूत तरीके से बंदूक पकड़ रखी थी। टुकड़ी में 120 जवान और सामने दुश्मनों की फौज, बावजूद इसके मेजर के कुशल नेतृत्व के बूते 18 नवंबर 1962 का दिन इतिहास के अमर पन्नों में दर्ज हो गया। 

🚩इस लड़ाई में 114 भारतीय वीर सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी थी। जबकि जीवित बचे छह जवानों को बंदी बना लिया। लेकिन वीर सपूतों ने चीन को यहां भी मात दी। चीनी सेना समझ ही नहीं पाई और सभी जवान बचकर निकल आए। इस सैन्य टुकड़ी को पांच वीर चक्र और चार सेना पदक से सम्मानित किया गया था। वहीं मेजर को उनके शौर्य के चलते परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

🚩भारतीय सैनिकों के इस साहस को देखकर चीनी लोगों ने अपने घुटने टेक दिए और 21 नवंबर को उसने सीजफायर की घोषणा कर दी थी। यह तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है। जब भी भारतीय सैनिकों की वीरता और साहस की बात होती है तो ऐसा नहीं होता कि शैतान सिंह को याद न किया जाए।

🚩भारतीय सेना ने इतना अद्भुत पराक्रम केवल एक बार ही नही अनेकों बार दिखाया है।11 सितंबर 1967 में चीन ने धोखे से अटेक किया था तभी उनके 400 सैनिको को मौत के घाट उतार दिया था। जबकि भारत के केवल 70 जवान शहीद हुए थे। अभी हाल में चीन ने धोखे से वार किया उसका जवाब में उनके 40 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। 

🚩गीदड़ धमकी देने से पहले चीन को यह सब याद रखना चाहिए और अभी तो 2020 का भारत है, ड्रैगन बचेगा भी नही इसलिए चीन अपनी जुबान संभालकर खोले।

🚩सबसे अधिक हिन्दू सैनिक क्यों बचे ?

🚩द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अफ्रीका के सहारा मरूस्थल में खाद्य आपूर्ति बंद हो जाने के कारण मित्र राष्ट्रों की सेनाओं को तीन दिन तक अन्न जल कुछ भी प्राप्त नहीं हो सका। चारों ओर सुनसान रेगिस्तान तथा धूल-कंकड़ों के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई नहीं देता था। रेगिस्तान पार करते करते कुल सात सौ सैनिकों की उस टुकड़ी में से मात्र 210 व्यक्ति ही जीवित बच पाये। बाकी सभी भूख-प्यास के कारण रास्ते में ही मर गये।

🚩आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन जीवित सैनिकों में से 80 प्रतिशत अर्थात् 186 सैनिक हिन्दू थे। इस आश्चर्यजनक घटना का जब विश्लेषण किया गया तो विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला किः 'वे निश्चय ही ऐसे पूर्वजों की संतानें थीं जिनके रक्त में तप, तितिक्षा, उपवास, सहिष्णुता एवं संयम का प्रभाव रहा होगा। वे अवश्य ही श्रद्धापूर्वक कठिन व्रतों का पालन करते रहे होंगे।'

🚩हिन्दू संस्कृति के वे सपूत रेगिस्तान में अन्न जल के बिना भी इसलिए बच गये क्योंकि उन्होंने, उनके माता-पिता ने अथवा उनके दादा-दादी ने इस प्रकार की तपस्या की होगी। सात पीढ़ियों तक की संतति में अपने संस्कारों का अंश जाता है।

🚩भारतीय संस्कृति इतनी महान है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता दिलवा देती है और हमारे जवान हमेंशा उसका अनुसरण करते आये हैं इसलिए वे हमेंशा जीत हासिल कर लेते हैं। हमारी दिव्य सनातन हिंदू संस्कृति और वीर जवानों को नमन।

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