Saturday, April 29, 2023

भोजन बनाने के लिए कौनसे बर्तनों का उपयोग करना चाहिए ? जिससे आप रहेंगे स्वस्थ..

29 Apirl 2023

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🚩सभी मनुष्य की चाहत होती है कि वो जीवनभर स्वस्थ रहे। सेहत को बनाए रखने के लिए लोग योग, एक्सरसाइज और कई तरह की फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान देते हैं। इसके अलावा लोग अपने खानपान को भी हेल्दी रखने की कोशिश करते हैं। इसके लिए तरह तरह की हेल्दी चीजें सुबह से रात तक बनाते-खाते हैं। लेकिन एक चीज जिस पर लोगों का ध्यान नहीं जाता है, वो है खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन। जी हां, हेल्दी खाना बनाने के लिए जितना सब्जियों और मसाले का ध्यान रखना जरूरी है, उतना ही सही धातु का बर्तन सेलेक्ट करना भी है। ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि किस धातु के बर्तन में खाना पकाने से भोजन की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।


🚩भोजन को शुद्ध, पौष्टिक, हितकर व सात्त्विक बनाने के लिए हम जितना ध्यान देते हैं उतना ही ध्यान हमें भोजन बनाने के बर्तनों पर देना भी आवश्यक है। भोजन जिन बर्तनों में पकाया जाता है उन बर्तनों के गुण अथवा दोष भी उसमें समाविष्ट हो जाते हैं। अतः भोजन किस प्रकार के बर्तनों में बनाना चाहिए अथवा किस प्रकार के बर्तनों में भोजन करना चाहिए, इसके लिए भी शास्त्रों ने निर्देश दिये हैं।



🚩भोजन करने का पात्र सुवर्ण का हो तो आयुष्य को टिकाये रखता है, आँखों का तेज बढ़ता है। चाँदी के बर्तन में भोजन करने से आँखों की शक्ति बढ़ती है, पित्त, वायु तथा कफ नियंत्रित रहते हैं। काँसे के बर्तन में भोजन करने से बुद्धि बढ़ती है, रक्त शुद्ध होता है। पत्थर या मिट्टी के बर्तनों में भोजन करने से लक्ष्मी का क्षय होता है। लकड़ी के बर्तन में भोजन करने से भोजन के प्रति रूचि बढ़ती है तथा कफ का नाश होता है। पत्तों से बनी पत्तल में किया हुआ भोजन, भोजन में रूचि उत्पन्न करता है, जठराग्नि को प्रज्जवलित करता है, जहर तथा पाप का नाश करता है। पानी पीने के लिए ताम्र पात्र उत्तम है। यह उपलब्ध न हों तो मिट्टी का पात्र भी हितकारी है। पेय पदार्थ चाँदी के बर्तन में लेना हितकारी है लेकिन लस्सी आदि खट्टे पदार्थ न लें।


🚩लोहे के बर्तन में भोजन पकाने से शरीर में सूजन तथा पीलापन नहीं रहता, शक्ति बढ़ती है और पीलिया के रोग में फायदा होता है। लोहे की कढ़ाई में सब्जी बनाना तथा लोहे के तवे पर रोटी सेंकना हितकारी है परंतु लोहे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए इससे बुद्धि का नाश होता है। स्टेनलेस स्टील के बर्तन में बुद्धिनाश का दोष नहीं माना जाता है। सुवर्ण, काँसा, कलई किया हुआ पीतल का बर्तन हितकारी है। एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग कदापि न करें।


🚩केला, पलाश, तथा बड़ के पत्र रूचि उद्दीपक, विषदोषनाशक तथा अग्निप्रदीपक होते हैं। अतः इनका उपयोग भी हितावह है।


🚩पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है।


🚩जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।

पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।

काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।


🚩अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।


🚩 एल्युमिनियम के बने बर्तन में खाना बनाने के नुकसान


🚩कुछ मामलों में शरीर में एल्युमिनियम की मात्रा अधिक होने की वजह से किडनी फेल की समस्या हो सकती है।

एल्युमिनियम के बर्तन में बना खाना खाने से लिवर सिस्टम को भी नुकसान पहुंच सकता है।


🚩अगर हमारे शरीर में ज्यादा मात्रा में एल्युमिनियम जाता है, तो ये मांसपेशियों, किडनी और हड्डियों की कोशिकाओं में जमा हो जाती है, जो दर्द समेत कई बीमारियों का कारण बन सकता है।


🚩इसलिए एल्युमिनियम के बर्तन कभी भी उपयोग नहीं करे।


🚩हमेशा स्टील, लोहे,ताम्बा, पित्तल के बर्तन उपयोग करना स्वस्थ जीवन का आधार हैं।


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Friday, April 28, 2023

रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम

 *रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम*


अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया ? 

1980 के दशक के प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी लोगों को चेतावनी कि यदि वे परिवार में आर्डर देकर बाहर से भोजन मंगवाऐंगे तो देश मे परिवार व्यवस्था धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी। 

साथ ही दूसरी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण घर के सदस्यो के स्थान पर बाहर से पालन पोषण की व्यवस्था की तो यह भी बच्चो के मानसिक विकास व परिवार के लिए घातक होगा।

 लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी सलाह मानी। घर में खाना बनाना लगभग बंद हो गया है, और बाहर से खाना मंगवाने की आदत (यह अब नॉर्मल है), अमेरिकी परिवारों के विलुप्त होने का कारण बनी है जैसा कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी।

घर मे खाना बनाना मतलब परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से जुड़ना।

*पाक कला मात्र अकेले खाना बनाना नहीं है। बल्कि केंद्र बिंदु है, पारिवारिक संस्कृति का।*

घर मे अगर कोई किचन नहीं है , बस एक बेडरूम है, तो यह घर नहीं है, यह एक हॉस्टल है।


*अब उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जाने जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है?*

1-1971 में, लगभग 72% अमेरिकी परिवारों में एक पति और पत्नी थे, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे।

2020 तक, यह आंकडा 22% पर आ गया है।

2-पहले साथ रहने वाले परिवार अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में रहने लगे हैं।

3-अमेरिका में, 15% महिलाएं एकल महिला परिवार के रुप में रहती हैं।

4-12% पुरुष भी एकल परिवार के रूप में रहते हैं।

5-अमेरिका में 19% घर या तो अकेले रहने वाले पिता या माता के स्वामित्व में हैं।

6-अमेरिका में आज पैदा होने वाले सभी बच्चों में से 38% अविवाहित महिलाओं से पैदा होते हैं।उनमें से आधी लड़कियां हैं,  जो बिना परिवारिक संरक्षण के अबोध उम्र मे ही शारीरिक शोषण का शिकार हो जाती है ।

7-संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 52% पहली शादियां  तलाक में परिवर्तित होती हैं।

8- 67% दूसरी शादियां भी  समस्याग्रस्त हैं।


 अगर किचन नहीं है और सिर्फ बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है।

संयुक्त राज्य अमेरिका विवाह की संस्था के टूटने का एक उदाहरण है।

*हमारे आधुनिकतावादी भी अमेरिका की तरह दुकानों से या आनलाईन भोजन ख़रीदने की वकालत कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं। इस कारण भारत में भी परिवार धीरे-धीरे अमेरिकी परिवारों की तरह नष्ट हो रहे हैं।*

जब परिवार नष्ट होते हैं तो मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं। बाहर का खाना खाने से अनावश्यक खर्च के अलावा शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति संवेदनशील और बिमारीयों का घर  हो जाता है।

शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।


*इसलिए हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग, हमें बाहर के खाने से बचने की सलाह देते थे*

लेकिन आज हम अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं...",

Online hotel delivery के माध्यम से अजनबियों द्वारा पकाए गए( विभिन्न कैमिकल युक्त) भोजन को ऑनलाइन ऑर्डर करना और खाना, उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय लोगों के बीच भी फैशन बनता जा रहा है।

दीर्घकालिक आपदा होगी ये आदत...

*आज हमारा खाना हम तय नही कर रहे उलटे ऑनलाइन कंपनियां विज्ञापन के माध्यम से मनोवैज्ञानिक रूप से तय करती हैं कि हमें क्या खाना चाहिए...*

हमारे पूर्वज निरोगी और दिर्घायु इस लिए थे कि वो घर क्या ...यात्रा पर जाने से पहले भी घर का बना ताजा खाना बनाकर ही ले जाते थे ।

*इसलिए घर में ही बनाएं और मिल-जुलकर खाएं । पौष्टिक भोजन के अलावा, इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।*

Thursday, April 27, 2023

ईद पर प्रसारित हुआ लव जिहाद प्रोपेगेंडा फैलाने वाला वीडियो पोस्ट :: हिंदू सगठनों में आक्रोश

 27  Apirl 2023

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🚩स्क्रीन पर हिन्दुओं के प्रति घृणा परोसने और पोसने का काम पहले फिल्मों के जरिए धड़ल्लले से होता था। मगर पिछले कुछ समय से हिंदू जागरूक हुए और उन्होंने सवाल उठाकर फिल्मों का बॉयकॉट शुरू किया तो ज़ाहिर है जिहादियों में चिंता बढ़ गई कि अब कैसे हिन्दुत्व को नीचा दिखाया और मिटाया जाए। ऐसे में इन्होंने ये नया तरीका खोजा - विज्ञापनों का।


🚩केरल में ईद पर सोशल मीडिया में एक विवादित वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में लव जिहाद को बढ़ावा दिया गया है। इसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ये पूरा मामला केरल के कोट्टयम जिले का है।


🚩VIP Luggage का लिखा नाम ::



🚩दरअसल, वी.आई.पी. लगेज कंपनी ने पुलिस में शिकायत की है। क्योंकि वीडियो के नीचे कंपनी का नाम लिखा गया है, ताकि वीडियो देखने वालों को ऐसा लगे , कि ये विज्ञापन वी.आई.पी. लगेज का है।


🚩बता दें कि , इससे पहले भी लव जिहाद को बढ़ावा देने वाले कई विज्ञापन जारी किये जा चुके हैं। जिस पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। सोशल मीडिया में कंपनी को बॉयकट करने की मांग उठी। इसके बाद विज्ञापन को हटाना पड़ा।


🚩क्या है वीडियो...!?


🚩वीडियो में एक मुस्लिम युवक हल्की दाढ़ी और टोपी पहने दिख रहा है। वहीं एक हिन्दू लड़की उस युवक से प्रेम करती है। युवक उसे नए ( मुस्लिम महिलाओं की पोशाक) कपड़े देता है ।अब अगले दृश्य में वह लकड़ी युवक के सामने नई (मुस्लिम महिला के पहनावे में ) ड्रेस में आती है , लेकिन अबतक वह माथे के बिंदी नहीं हटाई थी। इसके बाद युवक उसके बिंदी को निकाल देता है , फिर सिर पर चुनरी ओढ़ाता है।


🚩हिंदूवादी संगठनों ने यह आरोप लगाया है , कि ये वीडियो पूरी तरह से लव जिहाद को प्रोत्साहन देने वाला और साफ तौर पर हिन्दुत्व विरोधी है। सभी ने इस वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताई है।


🚩VIP Luggage कंपनी ने मामले को संज्ञान में लिया...

वी.आई.पी. लगेज के अध्यक्ष 'दिलीप पीरामल' ने कहा , " यह मेरे संज्ञान में आया है, कि एक लव जिहाद वीडियो प्रसारित किया जा रहा है और इस वीडियो के अंत में एक वी.आई.पी. स्लाइड डाली गई है, जो यह दिखाने के लिए है , कि हम इस संदेश के प्रायोजक हैं । यह वी.आई.पी. के साथ धोखाधड़ी है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और कानून के तहत हमारे पास उपलब्ध सबसे सख्त कार्यवाही करेंगे।"


🚩महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण ::

"यह एक नकली विज्ञापन है, जो वी.आई.पी. और स्काईबैग्स नामक ब्रांड्स का अवैध रूप से उपयोग कर रहा है। हमारी छवि को खराब कर रहा है। वी.आई.पी. इंडस्ट्रीज का विडियो निर्माता से कोई संबंध नहीं है और हमने पुलिस शिकायत भी दर्ज करवाई है। हम अखंडता और विविधता के सम्मान के लिए खड़े हैं। आपके समर्थन के लिए धन्यवाद ।"


🚩विज्ञापन का उद्देश्य वैसे तो अपने दर्शकों को अपने उत्पादों का उपभोक्ता बनाना ही होता है, लेकिन उसमें भी हिन्दुत्व विरोधी प्रोपेगेंडा का तड़का मिले तो जिहादियों को और क्या चाहिए, फिर उनके लिए वही सबसे बेस्ट ऐड हो जाता है।


🚩दुखद पर खास गौरतलब है , कि आजकल विज्ञापन बनाते हुए ध्यान रखा जाता है , कि कैसे भी मुस्लिम समुदाय कहीं नेगेटिव शेड में न दिखा दिया जाए और गलती से भी हिन्दू सरल, शांत या महान न नजर आ जाए।


🚩रेड लेबल की हिंदू घृणा ::

नहीं यकीन...!?  तो याद कीजिए रेड लेबल के कुछ पुराने विज्ञापनों को। चायपत्ती की इतनी बड़ी कंपनी ने एक नहीं दो-दो बार अपने विज्ञापनों में हिंदू विरोधी कंटेंट दिखाया था।


🚩एक ऐड में दिखाया गया , कैसे एक हिंदू गणेश मूर्ति लेने आता है, लेकिन दुकानदार मुस्लिम होता है। मुस्लिम जैसे ही अपनी टोपी सिर पर पहनता, हिन्दू उससे भागने लगता है। फिर मुस्लिम व्यक्ति इतना अच्छा होता है , कि उसे बुलाकर चाय पिलाता है और हिन्दू की बुद्धि बदलती है,फिर वो उसी से मूर्ति खरीदता है।


🚩ऐसे ही दूसरे ऐड में , एक हिंदू दंपती नजर आते हैं , जो अपने घर की चाबी भूल गए हैं। उनके पड़ोस में मुस्लिम महिला उन्हें अपने घर बैठकर प्रतीक्षा करने की सलाह देती है। पर हिन्दू अपनी सोच के कारण उसके घर में जाने से मना करते हैं। फिर चाय की खुशबू आती है, जो उन्हें एहसास कराती है कि हिंदू-मुस्लिम कुछ नहीं होता..। हास्यास्पद और कट्टर हिन्दुत्व विरोधी विज्ञापन ।


🚩इतना ही नहीं , आजकल तो विज्ञापनों में आए दिन बच्चों का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हिन्दू रीति-रिवाजों पर हमला करने ,हिन्दू मान्यताओं को ठेस पहुँचाने ,हिन्दू त्योहारों पर सवाल उठाने के लिए किया जा रहा है…! और यह तरीका न सिर्फ असरदार बल्कि बेहद आम होता जा रहा है। अपने प्रोपेगेंडे के लिए, ये लोग बच्चों को भी नहीं बक्शते हैं।

🚩सर्फ एक्सेल के एड में दिखाया जाता है , कि हिन्दू लड़की मुस्लिम लड़के को रंगों से बचाते हुए मस्जिद ले जाती है। वहीं एक दूसरे विज्ञापन में संदेश दिया जाता है कि श्राद्ध में खाना ब्रह्माण को खिलाओ या फिर मौलवी को बात एक ही है।


🚩ऐसे तमाम विज्ञापनों के उदाहरण आज इंटरनेट पर मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य केवल और केवल हिंदू घृणा का प्रचार-प्रसार करना है। बच्चों से बुजुर्गों तक का उपयोग विज्ञापन में करते हुए दिखाया जा रहा है, कि हिन्दू हमेशा गलत ही रहता है और गैर-हिन्दू कितने समझदार , सीधे सच्चे , सज्जन व सरल स्वभाव के होते हैं ।


🚩ऐसा लगता है कि आज के समय में विज्ञापन बनाने का मानक ही यह रह गया हो कि या तो हिन्दू परंपराओं पर सवाल उठाकर उन्हें बदलने का संदेश दो, वरना ये दिखाओ की कैसे देश के हिन्दुओं की सोच मुस्लिमों के प्रति बदली जानी चाहिए।


🚩तमाम हिन्दू संगठनों व प्रत्येक जागरुक नागरिक की मांग है , कि ऐसे घृणा फैलाने वाले विज्ञापनों पर सरकार को प्रतिबंध लगाना ही चाहिए।


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Wednesday, April 26, 2023

गंगा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं.....

26  Apirl 2023

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🚩रहस्य : माँ गंगा पृथ्वी पर क्यों और कैसे आयी ? जानिए:-


🚩गंगा नदी उत्तर भारत की केवल जीवनरेखा नहीं, अपितु हिंदू धर्म का सर्वोत्तम तीर्थ है। ‘आर्य सनातन वैदिक संस्कृति’ गंगा के तट पर विकसित हुई, इसलिए गंगा हिंदुस्तान की राष्ट्ररूपी अस्मिता है एवं भारतीय संस्कृति का मूलाधार है। इस कलियुग में श्रद्धालुओं के पाप-ताप नष्ट हों, इसलिए ईश्वर ने उन्हें इस धरा पर भेजा है। वे प्रकृति का बहता जल नहीं; अपितु सुरसरिता (देवनदी) हैं। उनके प्रति हिंदुओं की आस्था गौरीशंकर की भांति सर्वोच्च है। गंगाजी मोक्षदायिनी हैं इसीलिए उन्हें गौरवान्वित करते हुए पद्मपुराण में (खण्ड ५, अध्याय ६०, श्लोक ३९) कहा गया है, ‘सहज उपलब्ध एवं मोक्षदायिनी गंगाजी के रहते विपुल धनराशि व्यय (खर्च) करनेवाले यज्ञ एवं कठिन तपस्या का क्या लाभ ?’ नारदपुराण में तो कहा गया है, ‘अष्टांग योग, तप एवं यज्ञ, इन सबकी अपेक्षा गंगाजी का निवास उत्तम है । गंगाजी भारत की पवित्रता का सर्वश्रेष्ठ केंद्र बिंदु हैं, उनकी महिमा अवर्णनीय है।’


🚩मां गंगाजी की ब्रह्मांड में उत्पत्ति:-




🚩‘वामनावतार में श्री विष्णु ने दानवीर बलीराजा से भिक्षा के रूप में तीन पग भूमि का दान मांगा। राजा बलि इस बात से अनभिज्ञ थे कि स्वयं भगवान श्री विष्णु ही वामन के रूप में आए हैं, राजा ने उसी क्षण भगवान वामन को तीन पग भूमि दान की। भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी तथा दूसरे पग में अंतरिक्ष व्याप लिया। दूसरा पग उठाते समय वामन के (श्रीविष्णु के) बाएं पैर के अंगूठे के धक्के से ब्रह्मांड का सूक्ष्म-जलीय कवच टूट गया। उस छिद्र से गर्भोदक की भांति ‘ब्रह्मांड के बाहर के सूक्ष्म-जल ने ब्रह्मांड में प्रवेश किया। यह सूक्ष्म-जल ही गंगा है। गंगाजी का यह प्रवाह सर्वप्रथम सत्यलोक में गया।ब्रह्मदेव ने उसे अपने कमंडलु में धारण किया। तदुपरांत सत्यलोक में ब्रह्माजी ने अपने कमंडलु के जल से श्रीविष्णु के चरणकमल धोए। उस जल से गंगाजी की उत्पत्ति हुई। तत्पश्चात गंगाजी की यात्रा सत्यलोक से क्रमशः तपोलोक, जनलोक, महर्लोक, इस मार्ग से स्वर्गलोक तक हुई। जिस दिन गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी है) इन दिनों में गंगाजी में गोता मारने से विशेष सात्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है।


🚩पृथ्वी पर गंगाजी की उत्पत्ति:

सूर्यवंश के राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ आरंभ किया। उन्हों ने दिग्विजय के लिए यज्ञीय अश्व भेजा एवं अपने 60 सहस्त्र (हजार) पुत्रों को भी उस अश्व की रक्षा हेतु भेजा। इस यज्ञ से भयभीत इंद्रदेव ने यज्ञीय अश्व को कपिल मुनि के आश्रम के निकट बांध दिया। जब सगर पुत्रों को वह अश्व कपिल मुनि के आश्रम के निकट प्राप्त हुआ, तब उन्हें लगा, ‘कपिलमुनि ने ही अश्व चुराया है’। इसलिए सगर पुत्रों ने ध्यानस्थ कपिल मुनि पर आक्रमण करने की सोची । कपिलमुनि को अंतर्ज्ञान से यह बात ज्ञात हो गई तथा अपने नेत्र खोले। उसी क्षण उनके नेत्रों से प्रक्षेपित तेज से सभी सगर पुत्र भस्म हो गए। कुछ समय पश्चात सगर के प्रपौत्र राजा अंशुमन ने सगर पुत्रों की मृत्यु का कारण खोजा एवं उनके उद्धार का मार्ग पूछा। कपिल मुनि ने अंशुमन से कहा, “गंगाजी को स्वर्ग से भूतल पर लाना होगा। सगर पुत्रों की अस्थियों पर जब गंगाजल प्रवाहित होगा, तभी उनका उद्धार होगा !’’ मुनिवर के बताए अनुसार गंगा को पृथ्वी पर लाने हेतु अंशुमन ने तप आरंभ किया। अंशुमन की मृत्यु के पश्चात उसके सुपुत्र राजा दिलीप ने भी गंगावतरण के लिए तपस्या की। अंशुमन एवं दिलीप के हजार वर्ष तप करने पर भी गंगावतरण नहीं हुआ, परंतु तपस्या के कारण उन दोनों को स्वर्ग लोक प्राप्त हुआ। (वाल्मीकि रामायण, काण्ड १, अध्याय ४१, २०-२१)


🚩‘राजा दिलीप की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर गंगामाता ने राजा भगीरथ से कहा, ‘‘मेरे इस प्रचंड प्रवाह को सहना पृथ्वी के लिए कठिन होगा। अतः तुम भगवान शंकर को प्रसन्न करो।’’ आगे भगीरथ की घोर तपस्या से शंकर प्रसन्न हुए तथा भगवान शंकर ने गंगाजी के प्रवाह को जटा में धारण कर उसे पृथ्वी पर छोडा। इस प्रकार हिमालय में अवतीर्ण गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे हरिद्वार, प्रयाग आदि स्थानों को पवित्र करते हुए बंगाल के उपसागर में (खाडी में) लुप्त हुईं।’


🚩बता दे कि जिस दिन गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी) हैं और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी ) के नाम से जाना जाता है।


🚩जगद्गुरु आद्य शंकराचार्यजी, जिन्होंने कहा है : एको ब्रह्म द्वितियोनास्ति । द्वितियाद्वैत भयं भवति ।। उन्होंने भी ‘गंगाष्टक’ लिखा है, गंगा की महिमा गायी है। रामानुजाचार्य, रामानंद स्वामी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी रामतीर्थ ने भी गंगाजी की बड़ी महिमा गायी है। कई साधु-संतों, अवधूत-मंडलेश्वरों और जती-जोगियों ने गंगा माता की कृपा का अनुभव किया है, कर रहे हैं तथा बाद में भी करते रहेंगे।


🚩अब तो विश्व के वैज्ञानिक भी गंगाजल का परीक्षण कर दाँतों तले उँगली दबा रहे हैं! उन्होंने दुनिया की तमाम नदियों के जल का परीक्षण किया परंतु गंगाजल में रोगाणुओं को नष्ट करने तथा आनंद और सात्त्विकता देने का जो अद्भुत गुण है, उसे देखकर वे भी आश्चर्यचकित हो उठे।


🚩ऋषिकेश  में स्वास्थ्य-अधिकारियों ने पुछवाया कि यहाँ से हैजे की कोई खबर नहीं आती, क्या कारण है ? उनको बताया गया कि यहाँ यदि किसीको हैजा हो जाता है तो उसको गंगाजल पिलाते हैं। इससे उसे दस्त होने लगते हैं तथा हैजे के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है। वैसे तो हैजे के समय घोषणा कर दी जाती है कि पानी उबालकर ही पियें। किंतु गंगाजल के पान से तो यह रोग मिट जाता है और केवल हैजे का रोग ही मिटता है ऐसी बात नहीं है, अन्य कई रोग भी मिट जाते हैं। तीव्र व दृढ़ श्रद्धा-भक्ति हो तो गंगास्नान व गंगाजल के पान से जन्म-मरण का रोग भी मिट सकता है।


🚩सन् 1947 में जलतत्त्व विशेषज्ञ कोहीमान भारत आया था। उसने वाराणसी से गंगाजल लिया। उस पर अनेक परीक्षण करके उसने विस्तृत लेख लिखा, जिसका सार है – ‘इस जल में कीटाणु-रोगाणुनाशक विलक्षण शक्ति है।’


🚩दुनिया की तमाम नदियों के जल का विश्लेषण करनेवाले बर्लिन के डॉ. जे. ओ. लीवर ने सन् 1924 में ही गंगाजल को विश्व का सर्वाधिक स्वच्छ और कीटाणु-रोगाणुनाशक जल घोषित कर दिया था।


🚩‘आइने अकबरी’ में लिखा है कि ‘अकबर गंगाजल मँगवाकर आदर सहित उसका पान करते थे। वे गंगाजल को अमृत मानते थे।’ औरंगजेब और मुहम्मद तुगलक भी गंगाजल का पान करते थे। शाहनवर के नवाब केवल गंगाजल ही पिया करते थे।


🚩कलकत्ता के हुगली जिले में पहुँचते-पहुँचते तो बहुत सारी नदियाँ, झरने और नाले गंगाजी में मिल चुके होते हैं। अंग्रेज यह देखकर हैरान रह गये कि हुगली जिले से भरा हुआ गंगाजल दरियाई मार्ग से यूरोप ले जाया जाता है तो भी कई-कई दिनों तक वह बिगड़ता नहीं है। जबकि यूरोप की कई बर्फीली नदियों का पानी हिन्दुस्तान लेकर आने तक खराब हो जाता है।


🚩रुड़की विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कहते हैं कि ‘गंगाजल में जीवाणुनाशक और हैजे के कीटाणुनाशक तत्त्व विद्यमान हैं।’


🚩फ्रांसीसी चिकित्सक हेरल ने देखा कि गंगाजल से कई रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। फिर उसने गंगाजल को कीटाणुनाशक औषधि मानकर उसके इंजेक्शन बनाये और जिस रोग में उसे समझ न आता था कि इस रोग का कारण कौन-से कीटाणु हैं, उसमें गंगाजल के वे इंजेक्शन रोगियों को दिये तो उन्हें लाभ होने लगा!


🚩संत तुलसीदासजी कहते हैं : गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला।। (श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2)


🚩सभी सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर स्थित तीर्थों में पाँच तीर्थ विशेष आनंद-उल्लास का अनुभव कराते हैं : गंगोत्री, हर की पौड़ी (हरिद्वार), प्रयागराज त्रिवेणी, काशी और गंगासागर। गंगा दशहरे के दिन गंगा में गोता मारने से सात्त्विकता, प्रसन्नता और विशेष पुण्यलाभ होता है।


🚩गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :

संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते । तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः ।।

‘देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली हैं। आप जीवनरूपा हैं। आप आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं। आपको बार-बार नमस्कार है।’


🚩यमुना नदी में कुछ सालों से इतना गन्दा किया जा रहा है कि उसे अब स्वच्छ करने की अत्यधिक आवश्यकता हैं। ये जवाबदारी सरकार के साथ साथ हम आप सभी की हैं। हमें ध्यान रखना होगा कि हम यमुना नदी में कूड़ा करकट न डाले ओर नही ही किसी को डालने दे।


🚩जनता की मांग है की माँ गंगाजी की सफाई शीघ्रता से होनी चाहिए।


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Tuesday, April 25, 2023

सदियों पहले आद्य शंकराचार्य पर भी किये थे अनेक प्रहार जो आप नही जानते होंगे

25  Apirl 2023

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🚩इस संसार में सज्जनों, सत्पुरुषों और संतों को जितना सहन करना पड़ता है उतना दुष्टों को नहीं। ऐसा मालूम होता है कि इस संसार ने सत्य और सत्त्व को संघर्ष में लाने का मानो ठेका ले रखा है। यदि ऐसा न होता तो मीरा को जहर नही दिया जाता, उड़िया बाबा की हत्या नही की जाती, स्वामी दयानन्द जी को जहर न दिया जाता और लिंकन व कैनेडी की हत्या न होती।

 

🚩आज भी कई सच्चे महापुरुष है जिन्होनें सनातन संस्कृति की रक्षा करके समाज को जगाने का कार्य किया, लेकिन उनके ऊपर षडयंत्र करके जेल भिजवा दिया गया या हत्या करवा दी।

 

🚩इस संसार का यह कोई विचित्र रवैया है कि इसका अज्ञान-अँधकार मिटाने के लिए जो अपने आपको जलाकर प्रकाश देता है, संसार की आँधियाँ उस प्रकाश को बुझाने के लिए दौड़ पड़ती हैं। टीका, टिप्पणी, निन्दा, गलत चर्चाएँ और अन्यायी व्यवहार की आँधी चारों ओर से उस पर टूट पड़ती है।


 

🚩आद्य शंकराचार्यजी के खिलाफ साजिस 

 

🚩श्रीमद आदि गुरू शंकराचार्य का जन्म केरल के कालडी़ नामक ग्राम में हुआ था। वह अपने ब्राह्मण माता-पिता की एकमात्र सन्तान थे। बचपन में ही उनके पिता का देहान्त हो गया। बचपन का नाम शंकर था,  उनकी रुचि आरम्भ से ही संन्यास की तरफ थी।

 

🚩जिस समय इस देश में आद्य शंकराचार्यजी का आविर्भाव हुआ था उस समय असामाजिक तत्त्व अनीति, शोषण, भ्रम तथा अनाचार के द्वारा समाज को गलत दिशा में ले जा रहे थें। समाज में फैली इस अव्यवस्था को देखकर बालक शंकर का हृदय काँप उठा। उसने प्रतिज्ञा की कि ‘मैं राष्ट्र के धर्मोद्धार के लिए अपने सुख की तिलांजलि देता हूँ। अपने श्रम और ज्ञान की शक्ति से राष्ट्र की आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करूँगा। चाहे उसके लिए मुझे सारा जीवन साधना में लगाना पड़े, घर छोड़ना पड़े अथवा घोर-से-घोर कष्ट सहने पड़ें, मैं सदैव तैयार रहूँगा।’

 

🚩बालक शंकर माँ से आज्ञा लेकर चल पड़े अपने संकल्प को साधने। उन्होंने सद्गुरु स्वामी गोविंदपादाचार्यजी से दीक्षा ली। इसके बाद वे साधना एवं वेद-शास्त्रों के गहन अध्ययन से अपने ज्ञान को परिपक्व कर बालक शंकर से जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य बन गये। शंकराचार्यजी अपने गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त कर देश में वेदांत का प्रचार करने चल पड़े। भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण जैसों को भी दुष्टों के उत्पीड़न सहने पड़े तो आचार्य उससे कैसे बच पाते ? शंकराचार्यजी के धर्मकार्य में विधर्मी हर प्रकार से रुकावट डालने का प्रयास करने लगे, कई बार उन पर मर्मांतक प्रहार भी किये गयें।

 

🚩कपटवेशधारी उग्रभैरव नामक एक दुष्ट व्यक्ति ने आचार्य की हत्या के लिए शिष्यत्व ग्रहण किया। आचार्य को मारने की उसकी साजिश विफल हुई और अंततः वह भगवान नृसिंह के प्रवेश अवतार द्वारा मारा गया।

 

🚩कर्नाटक में बसनेवाली कापालिक जाति का मुखिया था क्रकच। वह मांस-शराब आदि अनेक दुराचारों में लिप्त था। कर्नाटक की जनता उसके अत्याचारों से त्रस्त थी। आचार्य शंकर के दर्शन, सत्संग एवं सान्निध्य के प्रभाव से लोग कापालिकों द्वारा प्रसारित दुर्गुणों को छोड़ने लगें और शुद्ध, सात्त्विक जीवन की ओर आकृष्ट होने लगें। सैकड़ों कापालिक भी मांस-शराब को छोड़कर शंकराचार्यजी के शिष्य बन गये। इस पर क्रकच घबराया। उसने शंकराचार्यजी का अपमान किया, गालियाँ दीं और वहाँ से भाग जाने को कहा। शंकराचार्यजी ने उसके विरोध की कोई परवाह नहीं की और अपनी संस्कृति का, अपने धर्म का प्रचार-प्रसार निष्ठापूर्वक करते रहे। इस पर क्रकच ने उन्हें मार डालने की धमकी दी। उसने बहुत-से दुष्ट शिष्यों को शराब पिलाकर शंकराचार्यजी को मारने हेतु भेजा। धर्मनिष्ठ राजा सुधन्वा को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी सेना को भेजा और युद्ध में सारे कापालिकों को मार गिराया।

 

🚩अभिनव गुप्त भी एक ऐसा ही महामूर्ख था जो आचार्य के लोक-जागरण के कार्यों को बंद कराना चाहता था। वह भी अपने शिष्यों सहित आचार्य से पराजित हुआ। वह दुराभिमानी, प्रतिक्रियावादी, ईर्ष्यालु स्वभाव का था। वह आचार्य के प्रति षड्यंत्र करने लगा। दैवयोग से उसे भगंदर का रोग हो गया और कुछ ही दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गयी।

 

🚩आद्य शंकराचार्यजी का इतना कुप्रचार किया गया कि उनकी माँ के अंतिम संस्कार के लिए उन्हें लकड़ियाँ तक नहीं मिल रही थीं।

 

🚩आद्य शंकराचार्य जी ने तत्कालीन भारत में व्याप्त धार्मिक कुरीतियों को दूर कर अद्वैत वेदान्त की ज्योति से देश को आलोकित किया। सनातन धर्म की रक्षा हेतु उन्होंने भारत में चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की तथा शंकराचार्य पद की स्थापना करके उस पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को आसीन किया।

🚩उन्होंने उत्तर में ज्योतिर्मठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन तथा पश्चिम में शारदा मठ नाम से देश में चार धामों की स्थापना की। 32 साल की अल्पायु में पवित्र केदार नाथ धाम में शरीर त्याग दिया। सारे देश में शंकराचा‍र्य को सम्मान सहित आदि गुरु के नाम से जाना जाता है।

 

🚩शंकराचार्य के विषय में कहा गया है-

अष्टवर्षेचतुर्वेदी, द्वादशेसर्वशास्त्रवित् षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्

 

🚩अर्थात् आठ वर्ष की आयु में चारों वेदों में निष्णात हो गए, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, सोलह वर्ष की आयु में शांकरभाष्य लिखा तथा बत्तीस वर्ष की आयु में शरीर त्याग दिया। ब्रह्मसूत्र के ऊपर शांकरभाष्य की रचना कर विश्व को एक सूत्र में बांधने का प्रयास भी शंकराचार्य के द्वारा किया गया है।

 

🚩इस संसार में ईर्ष्या और द्वेषवश जिसने भी महापुरुषों का अनिष्ट करना चाहा, देर-सवेर दैवी विधान से उन्हीं का अनिष्ट हो जाता है। संतों-महापुरुषों की निंदा करना, उनके दैवी कार्य में विघ्न डालना यानी खुद ही अपने अनिष्ट को आमंत्रित करना है। उग्रभैरव, क्रकच व अभिनव गुप्त का जीवन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

 

🚩समाज जब किसी ज्ञानी संतपुरुष की शरण तथा सहारा लेने लगता है तब राष्ट्र, धर्म व संस्कृति को नष्ट करने के कुत्सित कार्यों में संलग्न असामाजिक तत्त्वों को अपने षडयन्त्रों का भंडाफोड़ हो जाने का एवं अपना अस्तित्व खतरे में पड़ने का भय होने लगता है, परिणामस्वरूप अपने कुकर्मों पर पर्दा डालने के लिए वे उस दीये को ही बुझाने के लिए नफरत, निन्दा, कुप्रचार, असत्य, अमर्यादित व अनर्गल आक्षेपों व टीका-टिप्पणियों की आँधियों को अपने हाथों में लेकर दौड़ पड़ते हैं, जो समाज में व्याप्त अज्ञानांधकार को नष्ट करने के लिए महापुरुषों द्वारा प्रज्जवलित हुआ था।

 

🚩ये असामाजिक तत्त्व अपने विभिन्न षडयन्त्रों द्वारा संतों व महापुरुषों के भक्तों व सेवकों को भी गुमराह करने की कुचेष्टा करते हैं। समझदार लोग उनके षडयंत्रजाल में नहीं फँसते, महापुरुषों के दिव्य जीवन के प्रतिपल से परिचित उनके अनुयायी कभी भटकते नहीं, पथ से विचलित होते नहीं अपितु सश्रद्ध होकर उनके निष्काम सेवाकार्यों में अत्यधिक सक्रिय व गतिशील होकर सहभागी हो जाते हैं।


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Monday, April 24, 2023

रामभक्तों को जिंदा जलाने वालों को मिली जमानत, हिंदू संत की याचिका सुनने को किया मना !!

 रामभक्तों को जिंदा जलाने वालों को मिली जमानत, हिंदू संत की याचिका सुनने को किया मना !!


24  Apirl 2023

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🚩कानून सभी के लिए समान है, केवल कहावत बनकर रह गई है, सच पूरा अलग ही दिखता है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की बोगियों में आग लगाकर 59 रामभक्तों  की हत्या करने वाले 8 दोषियों को जमानत दे दी। ये सभी दोषी इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।


🚩इन सभी दोषियों को निचली अदालत और उसके बाद हाईकोर्ट से आजीवन कारावास की सजा मिली है। 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर दोषियों को जमानत दी गई है। 



🚩पिछले दिसम्बर में सर्वोच्च न्यायालय ने गोधरा ट्रेन अग्निकांड के 31 दोषियों में से एक फारूक को जमानत दे दी थी। फारूक इस आधार पर जमानत मिली थी कि वह 17 साल सजा काट चुका था और इस मामले में उसकी भूमिका ट्रेन पर पथराव की थी।  


🚩इससे पहले 13 मई 2022 को कोर्ट ने दोषियों में से एक अब्दुल रहमान धंतिया उर्फ कांकट्टो को 6 महीने के लिए जमानत दे दी थी। 


🚩बताते चलें कि साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की एक बोगी को दंगाइयों ने जला दिया, जिसमें 27 महिला और 10 बच्चे सहित 59 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। 


🚩सुप्रीम कोर्ट एक तरफ रामभक्तों को जलाने वालों को जमानत दे देती है....!

वहीं दूसरी तरफ हिंदू संत श्री आशारामजी बापू के जोधपुर केस मामले में याचिका दर्ज की थी, कि आरोपकर्ता लड़की कुटिया में गई ही नही थी।FIR में स्थान के विवरण में कुछ नहीं बोली । पुलिस अधिकारी अजय पाल लांबा ने कुटिया की वीडियो बनाई थी, उसके आधार पर FIR के कई दिनों बाद वह बोल रही थी, क्योंकि अजय पाल लांबा ने खुद एक बुक में यह बात लिखी हैं। यह अहम मुद्दा था, जिसका राज खुलने पर आशाराम बापू निर्दोष बरी हो सकते थे। इस याचिका पर सुनवाई होती तो बापू आशारामजी को षड्यंत्र के तहत फंसाया गया यह राज खुल जाता इसलिए इस याचिका पर सुनवाई ही नहीं की गई ?


🚩बता दे की देशभर में कोरोना फैलानेवाले मौलाना साद को जमानत मिल गई, देश के ‘टुकड़े’ करने का नारा लगाने वाले कन्हैया कुमार को जमानत मिल गई, बलात्कार आरोपी बिशप फ्रेंको व तरुण तेजपाल को जमानत मिल गई, 65 गैर जमानती वारंट होने के बाद भी दिल्ली के इमाम बुखारी को आज तक अरेस्ट नहीं कर पाए, सोये हुए गरीबों को कुचलनेवाले सलमान खान को 1 घंटे में जमानत मिल गई, लेकिन भारतीय संस्कृति के उत्थान का कार्य करनेवाले 87 वर्षीय निर्दोष हिंदू संत आशारामजी बापू को पिछले 10 सालों से आज तक 1 दिन की भी न्यायालय जमानत नहीं दे पाया ... क्यों !?


🚩आपको बता दें कि जिस केस में हिंदू संत आशारामजी बापू को सेशन कोर्ट ने सजा सुनाई है, जब उनके केस को पढ़ते हैं तो उसमें साफ है कि जिस समय की तथाकथित घटना आरोप लगाने वाली लड़की ने बताई है वह उस समय अपने मित्र से फोन पर बात कर थी, जिसकी कॉल डिटेल भी है और आशारामजी बापू एक भक्त के यहां  कार्यक्रम में थे, जहां पर 50-60 लोग भी मौजूद थे, जिन्होंने गवाही भी दी है; मेडिकल रिपोर्ट में भी लड़की को एक खरोंच तक नहीं आने का प्रमाण है और एफआईआर में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं है, केवल छेड़छाड़ का आरोप है।


🚩आपको ये भी बता दें कि बापू आशारामजी आश्रम में एक फैक्स भी आया था, जिसमें भेजनेवाले ने साफ लिखा था कि 50 करोड़ दो, नहीं तो लड़की के केस में जेल जाने के लिए तैयार रहो।


🚩बता दें कि स्वामी विवेकानंदजी के 100 साल बाद शिकागो में विश्व धर्मपरिषद में भारत का नेतृत्व हिंदू संत आसाराम बापू ने किया था। बच्चों को भारतीय संस्कृति के दिव्य संस्कार देने के लिए देश में 17000 बाल संस्कार खोल दिये थे, वेलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन शुरू करवाया, क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन शुरू करवाया, वैदिक गुरुकुल खोले, करोड़ों लोगों को व्यसनमुक्त किया, ऐसे अनेक भारतीय संस्कृति के उत्थान के कार्य किये हैं जो विस्तार से नहीं बता पा रहे हैं। इसके कारण आज वे जेल में हैं और उन्हें पिछले 10 सालों से 1 बार भी जमानत तक नहीं मिल पा रही है।


🚩बड़ा सवाल... आख़िर हिन्दू धर्म व संस्कृति की रक्षा करने वाले संत के साथ ही यह अन्यायपूर्ण व्यवहार क्यों...!?


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Sunday, April 23, 2023

इतना जान लेंगे तो कभी नही पियेंगे सॉफ्ट ड्रिंक्स, इतना नुकसान होता है की भरपाई नही कर पाएंगे

23 Apirl 2023

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🚩गर्मियों में ज्यादातर लोग सॉफ्ट ड्रिंक या कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं। हालांकि, इसे पीने से आप कुछ समय के लिए ताजगी महसूस करते हैं लेकिन लंबे समय के लिए यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। जी हां, ये हम नहीं बल्कि डॉ. अमिताभ पार्टी (Dr. Amitabh Parti), डायरेक्टर, इंटर्नल मेडिसिन, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम का भी कहना है। डॉ. अमिताभ पार्टी की मानें तो, गर्मियां आ गई हैं तो, तापमान बढ़ने के साथ लोगों में ठंडे ड्रिंक्स का सेवन भी तेजी से बढ़ता है। लेकिन कोल्ड ड्रिंक्स जैसे हाई कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में शुगर और कैलोरीज की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए इसका सेवन करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। कोल्ड ड्रिंक जैसे ड्रिंक्स शरीर में कैल्शियम डिफिशिएंसी पैदा करते हैं जिससे हड्डियों का भी नुकसान होता है। 

🚩बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल


🚩बाजार में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स में बहुत अधिक मात्रा में चीनी घुली होती है, जिसके कारण इसे पीते ही आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ये शुगर तुरंत तो आपके सेहत पर बुरा असर डालता ही है, साथ ही लंबे समय में आपको कई गंभीर बीमारियों की तरफ धकेलता है। 



🚩पेट में बनने वाला एसिड प्रभावित होता है


🚩ज्यादातर कोल्ड ड्रिंक्स में कार्बन डाई ऑक्साइड घुली हुई होती है। कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद जब ये पेट में जाता है तो पेट की गर्मी के कारण ये गैस में बदलने लगता है, यही कारण है कि कुछ लोगों को इसे पीने पर तुरंत डकार आती है। ये कार्बन डाई ऑक्साइड पेट के लिए ब्लीचिंग एजेंट की तरह काम करता है जिससे आपके पेट में बनने वाले डाइजेस्टिव एंजाइम प्रभावित होते हैं। इसी वजह से कई बार ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स पीने से या रात के समय कोल्ड ड्रिंक्स पीने से सीने में जलन होने लगती है। 


🚩दांतों को पहुंचाता है नुकसान


🚩कोल्ड ड्रिंक्स या सोडा ड्रिंक्स में फॉस्फोरिक एसिड और कार्बोनिक एसिड होता है, जो आपके दांतों के सुरक्षा पर्त यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। इससे दांतों में सेंसटिविटी और कैविटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों को कोल्ड ड्रिंक्स पिलाने से कई नुकसान होते हैं, जिसमें से दांतों में सड़न प्रमुख है।



🚩किडनी पर पड़ता है बुरा असर


🚩एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा में शुगर जाने से शरीर की मसल्स सारे शुगर का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं इसलिए किडनी इस शुगर को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते से शरीर से बाहर निकालने का प्रयास करने लगती है। इससे आपको पेशाब ज्यादा लगती है और आपके शरीर में पानी का लेवल घटने लगता है। यही नहीं, इस पूरी प्रक्रिया में आपकी किडनी को सामान्य से कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिसके कारण कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन किडनी को नुकसान पहुंचाता है।


🚩दिमाग पर पड़ता है बुरा असर


🚩कोल्ड ड्रिंक्स में कैफीन भी होता है, जो एक तरह का एडिक्टिव (नशीला) कंपाउंड है। रिसर्च में पाया गया है कि कोल्ड ड्रिंक्स पीने के 5-10 मिनट के अंदर ही आपके शरीर में डोपामाइन का लेवल बढ़ जाता है। इस हार्मोन के कारण आपको थोड़ी देर खुशी महसूस होती है, जिसके कारण आप इसे और ज्यादा पीना चाहते हैं। मेडिकल न्यूज टुडे पर छपे एक लेख में इस नशीलेपन की तुलना हेरोइन के नशे से की गई है। इसलिए इसका असर आपके ब्रेन फंक्शन पर भी पड़ता है।


🚩हावर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक कोल्ड ड्रिंक (पेप्सी, कोकाकोला) या डिब्बाबंद जूस और हेल्थ ड्रिंक पीने से न सिर्फ ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है बल्कि इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होने लगती है। इससे व्यक्ति धीरे-धीरे डायबिटीज और हृदयरोगों (हार्टअटैक) की चपेट में आने लगता है।

 

🚩ये तो आप समझ ही गए होंगे कि सॉफ्ट ड्रिंक पीने से आपकी बॉडी पर क्या असर पड़ता है तो उसकी जगह नारियल पानी, ताजे फलों का जूस, गुलाब शरबत, नींबू शरबत, पलाश शरबत पियें और पिलाइये जिससे आप और मेहमान भी स्वस्थ रहें और आपका पैसा भी कम खर्च होगा तथा पैसा विदेश में न जाकर देश में ही रहेगा।

भारतवासियों ! घर के बनाये पेय पदार्थों का सेवन कर खुद भी स्वस्थ रहें और अपनी मेहनत से कमाए पैसे का भी सही और उचित जगह उपयोग करके देश को समृद्ध बनायें।


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Saturday, April 22, 2023

आज भारत को भगवान परशुरामजी की आवश्यकता क्यों है ???

22  Apirl 2023

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🚩भगवान परशुरामजी का जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी क्षत्राणी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। वे भगवान विष्णु के छठे अंशावतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम, जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुरामजी कहलाये।


🚩शक्तिधर परशुरामजी का चरित्र एक ओर जहाँ शक्ति के केन्द्र सत्ताधीशों को त्यागपूर्ण आचरण की शिक्षा देता है वहीं दूसरी ओर वह शोषित, पीड़ित, क्षुब्ध जनमानस को भी उसके शक्ति और सामर्थ्य का एहसास दिलाता है। शासकीय दमन के विरूद्ध वह क्रान्ति का शंखनाद है। उनका जीवन सर्वहारा वर्ग के लिए अपने न्यायोचित अधिकार प्राप्त करने की मूर्तिमंत प्रेरणा भी देता है। वह राजशक्ति पर लोकशक्ति का विजयघोष है।



🚩आज स्वतंत्र भारत में सैकड़ों-हजारों सहस्रबाहु देश के कोने-कोने में विविध स्तरों पर सक्रिय हैं। ये लोग कहीं साधु-संतों की हत्या करते हैं, अपमानित करते हैं या कहीं न कहीं न्याय का आडम्बर करते हुए भोली जनता को छल रहे हैं; कहीं उसका श्रम हड़पकर अबाध विलास में ही राजपद की सार्थकता मान रहे हैं, तो कहीं अपराधी माफिया गिरोह खुलेआम आतंक फैला रहे हैं। तब असुरक्षित जन-सामान्य की रक्षा के लिए आत्म-स्फुरित ऊर्जा से भरपूर व्यक्तियों के निर्माण की बहुत आवश्यकता है। इसकी आदर्श पूर्ति के निमित्त परशुरामजी जैसे प्रखर व्यक्तित्व विश्व इतिहास में विरले ही हैं। इस प्रकार परशुरामजी का चरित्र शासक और शासित दोनों स्तरों पर प्रासंगिक है।


🚩शस्त्र शक्ति का विरोध करते हुए अहिंसा का ढोल चाहे कितना ही क्यों न पीटा जाये, उसकी आवाज सदा ढोल के पोलेपन के समान खोखली और सारहीन ही सिद्ध हुई है। उसमें ठोस यथार्थ की सारगर्भितता कभी नहीं आ सकी।

🚩सत्य,हिंसा और अहिंसा के संतुलन बिंदु पर ही केन्द्रित है। कोरी अहिंसा और विवेकहीन पाशविक हिंसा- दोनों ही मानवता के लिए समान रूप से घातक हैं। आज जब हमारे साधु-संत और राष्ट्र की सीमाएं असुरक्षित हैं; कभी कारगिल, कभी कश्मीर, कभी बांग्लादेश तो कभी देश के अन्दर नक्सलवादी शक्तियों के कारण हमारी अस्मिता का चीरहरण हो रहा है, तब परशुरामजी जैसे वीर और विवेकशील व्यक्तित्व के नेतृत्व की देश को आवश्यकता है।


🚩गत शताब्दी में कोरी अहिंसा की उपासना करने वाले हमारे नेतृत्व के प्रभाव से हम जरुरत के समय सही कदम उठाने में हिचकते रहे हैं। यदि सही और सार्थक प्रयत्न किया जाए तो देश के अन्दर से ही प्रश्न खड़े होने लगते हैं।

🚩परिणाम यह है,कि हमारे तथाकथित बुद्धिजीवियों और व्यवस्थापकों की धमनियों का रक्त इतना ठंडा हो गया,कि देश की जवानी को व्यर्थ में ही कटवाकर भी वे आत्मसंतोष और आत्मश्लाघा का ही अनुभव होता है।अपने नौनिहालों की कुर्बानी पर वे गर्व अनुभव करते हैं।उनकी वीरता के गीत तो गाते हैं,किन्तु उनके हत्यारों से बदला लेने के लिए उनका खून नहीं खौलता! प्रतिशोध की ज्वाला अपनी चमक खो बैठी है। शौर्य के अंगार तथाकथित संयम की राख से ढंके हैं। शत्रु-शक्तियां सफलता के उन्माद में सहस्रबाहु की तरह उन्मादित हैं !

...लेकिन आज परशुरामजी अनुशासन और संयम के बोझ तले मौन हैं।


🚩राष्ट्रकवि दिनकर ने सन् 1962 ई. में चीनी आक्रमण के समय देश को ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शीर्षक से ओजस्वी काव्यकृति देकर सही रास्ता चुनने की प्रेरणा दी थी। युग चारण ने अपने दायित्व का सही-सही निर्वाह किया। किन्तु राजसत्ता की कुटिल और अंधी स्वार्थपूर्ण लालसा ने हमारे तत्कालीन नेतृत्व के बहरे कानों तक उसकी पुकार ही नहीं आने दी। पांच दशक बीत गये। इस बीच एक ओर साहित्य में परशुराम के प्रतीकार्थ को लेकर समय पर प्रेरणाप्रद रचनाएं प्रकाश में आती रहीं और दूसरी ओर सहस्रबाहु की तरह विलासिता में डूबा हमारा नेतृत्व राष्ट्र-विरोधी षड़यंत्रों को देश के भीतर और बाहर दोनों ओर पनपने का अवसर देता रहा।


🚩परशुरामजी पर केन्द्रित साहित्यिक रचनाओं के संदेश को व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार करके हम साधारण जनजीवन और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा कर सकते हैं।


🚩महापुरूष किसी एक देश, एक युग, एक जाति या एक धर्म के नहीं होते। वे तो समूचे राष्ट्र की, सम्पूर्ण मानवता की, समस्त विश्व की, विभूति होते हैं। उन्हें किसी भी सीमा में बाँधना ठीक नहीं। दुर्भाग्य से हमारे यहां स्वतंत्रता में महापुरूषों को स्थान, धर्म और जाति की बेड़ियों में जकड़ा गया है। विशेष महापुरूष , वर्ग-विशेष के द्वारा ही सत्कृत हो रहे हैं। एक समाज विशेष ही विशिष्ट व्यक्तित्व की जयंती मनाता है। अन्य जन उसमें रूचि नहीं दर्शाते, अक्सर ऐसा ही देखा जा रहा है। यह स्थिति दुभाग्यपूर्ण है। महापुरूष चाहे किसी भीदेश, जाति, वर्ग, धर्म आदि से संबंधित हो, वो सबके लिए समान रूप से पूज्य व उनके आदर्श सभी के लिए अनुकरणीय होने ही चाहिए ।


🚩इस संदर्भ में भगवान परशुरामजी को, जो उपर्युक्त विडंबनापूर्ण स्थिति के चलते केवल ब्राह्मण वर्ग तक सीमित हो गए हैं, समस्त शोषित वर्ग के लिए प्रेरणा स्रोत क्रान्तिदूत के रूप में स्वीकार किया जाना समय की माँग है । भगवान परशुराम सभी शक्तिधरों के लिए संयम के अनुकरणीय आदर्श हैं ।


🚩भा माने -अध्यात्म

रत माने – उसमें रत रहने वाले

“जिस देश के लोग अध्यात्म में रत रहते हैं उसका नाम है भारत।”


🚩भारत की गरिमा सदा उसकी संस्कृति व साधु-संतों से ही रही है। भगवान भी बार-बार जिस धरा पर अवतरित होते आये हैं, वो भूमि भारत की भूमि है। किसी भी देश को माँ कहकर संबोधित नहीं किया जाता पर भारत को “भारत माता” कहकर संबोधित किया जाता है, क्योंकि यह देश आध्यात्मिकता का शिरोमणी देश है, संतों महापुरुषों का देश है। भौतिकता के साथ-साथ यहाँ आध्यात्मिकता को उससे कहीं अधिक बढ़कर ही महत्व दिया गया है। पर आज की पीढ़ी के पाश्चात्य कल्चर की ओर बढ़ते कदम इसकी गरिमा को भूलते चले जा रहे हैं; संतों महापुरुषों का महत्व, उनके आध्यात्मिक स्पन्दन भूलते जा रहे हैं।


🚩संत और समाज के बीच खाई खोदने में एक बड़ा वर्ग सक्रिय है। ईसाई मिशनरियां सक्रिय हैं, मीडिया सक्रिय है, विदेशी कम्पनियाँ सक्रिय हैं, विदेशी फण्ड से चलने वाले NGOs सक्रिय हैं, जिहादी सक्रिय हैं, कई राजनैतिक दल व नेता सक्रिय हैं; क्योंकि इनका उद्देश्य है- भारतीय संस्कृति को मिटाकर पश्चिमी सभ्यता लाने का जिससे विदेशी कंपनियों की प्रोडक्ट की बिक्री भारी मात्रा में होगी और धर्मान्तरण भी जोरों शोरों से होगा, फिर उनका वोटबैंक बढ़ जायेगा और देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ लेंगे।


🚩इतने सब वर्ग जब एक साथ सक्रिय होंगे तो किसी के भी प्रति गलत धारणाएं समाज के मन में उत्पन्न करना बहुत ही आसान हो जाता है और यही हो रहा है हमारे संत समाज के साथ।


🚩पिछले कुछ सालों से एक दौर ही चल पड़ा है हिन्दू संतों को लेकर। किसी संत की हत्या कर दी जाती है या किसी संत को झूठे केस में सालों जेल में रखा जाता है फिर विदेशी फण्ड से चलने वाली मीडिया उनको अच्छे से बदनाम करके उनकी छवि समाज के सामने इतनी धूमिल कर देती है कि समाज उन झूठे आरोपों के पीछे की सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास ही नहीं करता।


🚩अब समय है कि समाज को जागना होगा- भारतीय संस्कृति व साधु-संतों के साथ हो रहे अन्याय को समझने के लिए। अगर अब भी हिन्दू मूक - दर्शक बनकर देखता रहा तो हिंदुओं का भविष्य खतरे में है। इसलिए आज के समय में भगवान परशुराम की आवश्कता है।


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Friday, April 21, 2023

जानिये क्यों ट्विटर ने वेरिफाइड अकाउंट से हटाए ब्लू टिक !!

 🚩जानिये क्यों ट्विटर ने वेरिफाइड अकाउंट से हटाए ब्लू टिक !!

21-April-2023 

🚩माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने 20 अप्रैल को रात 12 बजे अपने प्लेटफॉर्म पर वेरिफाइड अकाउंट्स से ब्लू टिक हटा दिए हैं। ...


🚩कंपनी ने उन खातों से ब्लू टिक हटाए हैं, जिन्होंने ट्विटर ब्लू टिक के लिए भुगतान नहीं किया था। जिन लोगों के ट्विटर अकाउंट...से ब्लू टिक हटा है, उनमें विराट कोहली, रोहित शर्मा, अभिनेता अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, सलमान खान, शाहरुख खान समेत कई नाम शामिल हैं।......



🚩 दरअसल, ट्विटर ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क ने 12 अप्रैल को वेरिफाइड अकाउंट से ब्लू टिक हटाने की डेडलाइन का एलान कर दिया था। मस्क ने ट्वीट किया था कि ब्लू टिक हटाने की आखिरी तारीख 4/20 है। ऐसे में तभी से माना जा रहा था कि 20 अप्रैल से सिर्फ सब्सक्रिप्शन लेने वालों के पास ही ट्विटर ब्लू टिक रहेगा। बाकी जिन लोगों ने ब्लू टिक सर्विस नहीं लिया है, उनके खाते से हट जाएगा और हुआ भी ऐसा ही है।


🚩 ट्विटर से ब्लू टिक हटाने की इस पहल ने आम आदमी के विश्वास को जीतने की कोशिश की है ।


🚩 सोशल मीडिया को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है जिसमें बड़े से बड़े आदमी से लेकर आम आदमी एक समान है सबकी आवाज को महत्व दिया जाएगा ।


🚩 दरहसल ट्विट्टर द्वारा वेरिफिकेशन दिए जाने पर वारीफिएड एकाउंट का महत्व इतना बढ़ जाता है कि उनकी ट्वीट सही हो या पब्लिक को नुकसान पहुचने वाली पर जनता उनकी बात को सच मान बैठती थी । छोटे आदमी की आवाज़ में चाहे कितनी भी सच्चाई को उसे अनसुना किया जाता था पर अब सब  जनता एक समान हुई ।


🚩 ट्विट्टर की इस पहल से आम जनता बहुत खुश है बड़े छोटे का भेद मिटाकर सबको एक समान आवाज़ उठाने का अधिकार मिला ।

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Thursday, April 20, 2023

यदि आप अपने बच्चों को संस्कारवान और ओजस्वी-तेजस्वी बनाना चाहते हैं, तो इतना अवश्य करें...

20 Apirl 2023

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🚩कुछ माता-पिता अपने बच्चे को खूब लाड़-लड़ाते हैं। वे सोचते हैं , कि बेटे को बढ़िया स्कूल में पढ़ाएंगे,डॉक्टर, इंजीनियर,पायलट आदि बनाएंगे। इसके लिए बच्चे को छात्रावास में भी रखते हैं। किंतु कई बार विपरीत परिणाम होते हैं। बच्चा ऐसा हो जाता है कि,न अपने परिवार का रह जाता है, न छात्रावास में ठीक तरह अध्ययन ही करता है और न ही उसका भविष्य उज्ज्वल बन पाता है, वरन् वह फुटपाथी(आवारा) होकर रह जाता है।


🚩कुछ माँ-बाप बच्चों को खूब रोकते टोकते हैं। क्योंकि माँ-बाप जैसा चाहते हैं,अक्सर बच्चे वैसा नहीं कर पाते। अभिभावक यह भूल ही जाते हैं कि,बच्चों में अपनी ही उमंगे हैं,उनकी अपनी भी तो कुछ ख्वाहिशें होती हैं। ज्यादा टोका-टाकी से बच्चा बेचारा भीतर ही भीतर सिकुड़ता रहता है। फिर वह छुपकर गलती करता है और उसमें बेईमानी करने की आदत पनपती है।



🚩कभी माता-पिता की टोका-टाकी हितकारक होती है, तो कभी गड़बड़ी भी कर देती है। माता-पिता या कुटुम्बी के लिए उचित है, कि वे बच्चे को इतना विश्वास में लें, कि बच्चे से कोई गलती हो जाए, तो अपने कुटुम्बी को बता दे। फिर अभिभावक को चाहिए कि गलती का पता चलने पर भी उसको ज्यादा टोकें नहीं, गलती का मूल खोजें तथा उस मूल को ही हटा दें। बच्चा फिर गलती नहीं करेगा।


🚩बालक पैदा होता है तब से लेकर 7 साल तक उसका मूलाधार केन्द्र विकसित होता है। इन 7 सालों तक बालक बीमार न हो, इसकी सावधानी बरतें। 2-3 साल का होने पर साल में एक - दो बार 3-4 दिन पपीता और उसके बीज खिलाएं, ताकि उसका पेट ठीक रहे।


🚩बालक इधर-उधर की चीजें खाता है, भोजन के समय ठीक से नहीं खाता तो आगे चलकर उसका पाचनतंत्र खराब हो जाएगा। माता-पिता को चाहिए कि खान-पान में ज्यादा लाड़ न लड़ाएं व खान-पान की सलाह किसी वैद्य या जानकार से लें।


🚩7 से 14 वर्ष की उम्र में स्वाधिष्ठान केन्द्र विकसित होता है। अगर इस उम्र में ध्यान न दिया गया तो उसमें गंदी भावनाओं और गंदी आदतों वाले बच्चों के संस्कार पड़ेंगे। इस समय वह जैसा देखेगा और जैसी भावनाएँ उसके चित्त में आ गयीं वे सब उसे जीवन भर नचाती रहेंगी। माता-पिता के लिए उचित है , कि उसकी अच्छी भावनाओं का पोषण करें तथा धैर्यपूर्वक बुरी भावनाओं को निकालने के लिए उसे प्रोत्साहित करें... लेकिन दबाव न डालें !!


🚩14 से 21 साल तक मणिपुर केन्द्र विकसित होता है। इस समय में वासनाओं, भावनाओं के आवेग और भय-चिंता आदि के कारण बच्चों से जो गलतियाँ होती हैं,संयम-पालन व सूर्यनमस्कार आदि करने से उनपर वे स्वयं नियंत्रण पाने में सफल हो जाते हैं और बुद्धिपूर्वक अच्छे इरादे से कर्म करके ऊँचे उठ सकते हैं।


🚩भ्रूमध्य को अनामिका से हलका-सा रगड़ते हुए ʹૐ गं गणपतये नम: ' ʹૐ श्री गुरुभ्यो नमःʹ जपकर तिलक की भवना करें फिर वज्रासन में बैठकर दोनों हाथ ऊपर करते हुए धीरे-धीरे झुकते हुए प्रणाम की मुद्रा में सिर जमीन पर लगाकर 2-3 मिनट रखें। इससे निर्णयशक्ति, बौद्धिक शक्ति में जादुई लाभ होता है।साथ ही क्रोध, आवेश तथा वैरभाव आदि पर नियंत्रण पाने वाले रसों का भीतर विकास होता है।


🚩शवासन में आत्मिक शक्तियाँ खींचकर पाँचों शरीरों में लाने की व्यवस्था है। बाह्य शरीर का मोटा हो जाना, वांछनीय नहीं है, मजबूत हो जाना वांछनीय है। बाह्य शरीर के साथ प्राणमय शरीर भी विकसित होना चाहिए। प्राणबल कमजोर है, मनोबल कमजोर है तो दूसरे के प्राणबल व मनोबल के आगे आपका मन सिकुड़ जायेगा। आपकी विचारशक्ति कमजोर है तो दूसरा आपको पटा लेगा। अतः बालक के पाँचों शरीर विकसित हों इसपर ध्यान दें।


🚩"बापू जी ! बच्चे बहुत परेशान करते हैं। क्या करें ?"


🚩ज्याद टोकें नहीं किंतु उस उछलकूद को वे सुव्यवस्थित कर सकें-ऐसा उपाय करें। ज्यादा टोकेंगे तो वह छुपकर करेगा अथवा उसका मन दब जायेगा या विरोधी हो जायेगा। इस तरह उसका हित चाहते हुए भी आप अनजाने में अहित कर बैठते हैं।


🚩बच्चे चंचल हैं, तो उन्हें ज्यादा न रोकें-टोकें। उनकी यह अवस्था है ही उछलकूद करने की। माता-पिता ज्यादा रोकेंगे-टोकेंगे तो उनके मन में माता-पिता के लिए जो आदर, मान और स्नेह होना चाहिए वह नहीं होगा। 12 साल के दिमागवाले को बलात् 60 साल वाले जैसा रहने-करने के लिए कहें तो उसके लिए वैसा कर पाना सम्भव नहीं है।


🚩क्या बच्चा जैसा करना चाहे, उसे करने दिया जाए...!?


🚩हाँ, कुछ तो करने दिया जाय और कुछ मोड़ दिया जाय। अगर अत्यन्त अऩुचित करता है तो दबाव से अनुचित छोड़े इसकी अपेक्षा सुझाव से छोड़े... ऐसा प्रयत्न करना चाहिए ।


🚩ʹचाय न पियो..... कॉफी न पियो....ʹ ऐसा कहने की जगह उससे कहो , ʹकेवल दूध पियो।ʹ इनकार की अपेक्षा बच्चे को मोड़ने की कला माता-पिता को सीखनी चाहिए।


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Wednesday, April 19, 2023

अपने ही देश में हिंदू दूसरा दर्जा का : याचिका सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

19  Apirl 2023

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अपने ही देश में हिन्दू दूसरे दर्जे का नागरिक बन कर रह गया...

क्या खूब प्रगति पर है हिन्दू-राष्ट्र का निर्माण...जहाँ हिन्दू को अपनी सुरक्षा की माँग करने का भी अधिकार नहीं...!!


🚩सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा की माँग हेतु दाखिल याचिका को किया खारिज !!


🚩भारत हिन्दू बाहुल्य देश है, लेकीन अपने ही देश में हिन्दू दूसरे दर्जे का नागरिक हो गया है, हिन्दू टैक्स देता है फिर भी उसको सरकारी योजनाओं में इतना लाभ नही मिलता है, जितना अल्पसंख्यक समुदाय को मिलता है। हिन्दू अपनी धर्मिक पुस्तक स्कूल में नहीं पढ़ सकता। उसे तो अपने मंदिरों के दान पर भी टैक्स देना पड़ता है। अपने त्योहार मनाता है, तो पत्थर सहने पड़ते है और जब हिन्दू पर अत्याचार होता है , तब मिडिया, सेक्युलर और अन्य बुद्धिजीवीवर्ग को सांप सूघ जाता है।

🚩आज देश के हालात ऐसे बन गए हैं ,कि अगर हिन्दू अत्याचार के विरुद्ध या सुरक्षा पाने की आस में न्यायालय का दरवाजा खट- खटाता है, तब भी उसको न्याय नहीं मिलता । आखिर हिंदु जाए तो कहा जाए ?


🚩और उस पर भी विडंबना यह , कि राष्ट्र उत्थान, संस्कृति रक्षा और हिन्दू जागृति और सनातन धर्म के रक्षार्थ कार्य करने वाले पवित्र साधु संतों की भी हत्या कर दी जाती है या सालों तक उनको जेल में रख कर प्रताड़ित किया जाता है ।

🚩प्रश्न गंभीर है , कि क्या अपने ही देश में हिन्दुओं की पुकार सुनने वाला कोई नही है !?


🚩सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा की माँग हेतु दाखिल याचिका को खारिज किया !!


🚩सुप्रीम कोर्ट ने रामनवमी पर देशभर में श्रद्धालुओं के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों की जाँच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। ये याचिका ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक ट्रस्ट द्वारा दायर की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को ख़ारिज कर दिया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस याचिका में कहा था , कि कट्टरपंथी ग़ैर-हिन्दू समुदाय के लोगों ने देशभर में हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया और हिन्दू श्रद्धालु इसका शिकार बने।


🚩याचिका में जानकारी दी गई थी कि हर साल रामनवमी के दौरान इस तरह की हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता से कहा , कि वो पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना में स्थित हाईकोर्ट्स में याचिका दायर करें।

🚩ग़ौरतलब है , कि महाराष्ट्र से भी इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल में इसका सबसे ज़्यादा असर देखने को मिला। और शर्मसार करने वाली बात यह कि , वहाँ की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान से भी कट्टरपंथी गुंडों और दंगाइयों को सहयोग मिला।


🚩इस याचिका में हिन्दू संस्था ने माँग की थी , कि

हिन्दुओं की शोभा यात्राओं और हिन्दू पर्वों व त्योहारों पर गैर-हिन्दू समुदाय के कट्टरपंथियों द्वारा किए जाने वाले हिंसक हमलों से हिन्दुओं के जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ।

🚩इस याचिका की गम्भीरता पर प्रकाश डालते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष की ओर से बताया गया , कि ये हिंसक घटनाएं कोई अचानक नहीं होती बल्कि पूरी साजिश के तहत इस तरह के हमले किए जाते हैं। याचिका में माँग की गई कि जिन-जिन राज्यों में ऐसी हिंसा हुई है, वहाँ के मुख्य सचिवों से रिपोर्ट तलब की जाए। ऐसी हिंसक वारदातों की निष्पक्ष और त्वरित जाँच की जाए 

🚩साथ ही राज्य सरकारों को ये आदेश जारी करने का निवेदन भी किया गया था कि हिंसा की इन वारदातों के कारण हुए घायलों और पीड़ितों के नुकसान की भरपाई की जाए ।

🚩पश्चिम बंगाल के हावड़ा, बिहार के नालंदा, तेलंगाना के हैदराबाद, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, गुजरात के वरोदड़ा और झारखंड के जमशेदपुर में इस साल हुई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया।

🚩पश्चिम बंगाल में तो माननीय मुख्य मंत्री द्वारा किसी इलाके को मुस्लिम बहुल क्षेत्र कह कर शोभा यात्रा न निकालने के आदेश तक दिए जाते हैं ।इसके विरोध में सरकारों को निर्देश देने की माँग भी याचिका में की गई थी।


🚩हिन्दू अपने ही देश में अपना त्यौहार भी खुलकर नही मना सकते...!! क्यों...!?

क्योंकि अन्य धर्मावलंबी ( तथाकथित डरे हुए अल्पसंख्यक ) पथराव करते हैं ।

अब ऐसे में यदि सर्वोच्च न्यायालय से भी न्याय नहीं मिलेगा , तो आख़िर आम आदमी कहां गुहार लगाए !?


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Tuesday, April 18, 2023

ब्रेनवॉश करने के लिए मिडिया द्वारा ऐसे रचा जाता है प्रपंच

18  Apirl 2023

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🚩ओसामा बिन लादेन एक अच्छा पिता, बुरहान वानी गरीब हेडमास्टर का बेटा, पुलवामा का विस्फोट करने वाला सताया हुआ मासूम । विस्फोटक बनाने वाले आत्मरक्षा हेतु बम बनाने वाले भटके हुए नौजवान । अतीक अहमद जी तो सच्चे महात्मा हैं । 38 साल पहले पंजाब में हिन्दुओ का कत्लेआम करने वाला आतंकवादी आज भी संत है। दाऊद इब्राहीम ने भी बहुत से अच्छे काम किए हैं। युवाओं को एसिड से नहलाने वाला बिहार का डॉन शहाबुद्दीन भी महान था । सर तन से जुदा करने की धमकी तो एक शान्ति गीत है।


🚩अनेक पत्रकार एक विशेष समूह को उत्पीड़क और दूसरे को उत्पीड़ित बताने का अघोषित लक्ष्य रखते रहे हैं । खबरों को आधे-अधूरे प्रस्तुत करना, तोड़ना-मरोड़ना, कभी उत्पीड़क तो कभी उत्पीड़ित की पहचान छुपाना अथवा खूब प्रमुखता देकर छापना आदि इनका मुख्य उद्देश्य रहा है।


🚩पालघर में हिन्दू साधुओं की भीड़ द्वारा नृशंस हत्या पर रविश कुमार 33 सेकंड बोलता है तो चोर तबरेज की पिटाई और पुलिस कस्टडी में मृत्यु को 33 घंटे कवर करता है। पत्रकार दानिश सिद्दकी की हत्या की जिम्मेदारी तालिबान नहीं गोली को बताता है। 2 मई 2021 के बाद पश्चिमी बंगाल में हुए हिन्दुओं के नरसंहार, सामूहिक बलात्कार और पलायन को अधिकाँश मिडिया छुपा गया। शाहीन बाग़ धरने में कुछ चुने हुए पत्रकारों को ही आने दिया जाता था।



🚩एक बड़े अंग्रेजी अखबार में समाचार छपा, ‘सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने के लिए युवक की गिरफ्तारी।’ लेकिन उस में यह छिपा लिया गया कि वह फोटो कैसी थी। उस युवक ने एक मंदिर में शिवलिंग पर जूते सहित अपना पैर रखकर सेल्फी ली थी, जिसे सोशल मीडिया में डालने पर किसी ने पुलिस में शिकायत की और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।


🚩बुरी खबर और खासकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाली खबरों के प्रति हमारे अंग्रेजी संपादकों में ऐसा आकर्षण है कि वे उसकी किसी भी प्रमाणिकता की जाँच की जरूरत नहीं समझते। अब सोचें, कि मनगढंत, जाली, मिलावटी, शरारतपूर्ण, राजनीति-प्रेरित ख़बरों पर भरोसा करना कितना उचित है और विदेशियों की सेवा करने वाली मीडिया से ज्यादा  घातक और क्या हो सकता है?


🚩‘मित्रोखिन आर्काइव्स, खण्ड एक (1999) तथा खण्ड दो (2005) के  दूसरे खण्ड में दो अध्याय (पृ. 312-340) भारत में के.जी.बी. के अनेक कामों के बारे में हैं। नेहरू काल से लेकर इस में लगभग 1989 तक के कुछ छिट-पुट विवरण हैं। अर्थात जो दस्तावेज के.जी.बी. कर्मचारी वसीली मित्रोखिन को मिले थे और जिसे वे नोट कर बाहर ले जा सके थे। उस पुस्तक के पृ. 324 पर भारतीय मीडिया के एक हिस्से का यह रूप भी मिलता है – ‘‘के.जी.बी. की फाइलों के अनुसार इस ने सन 1973 तक भारत के दस अखबारों और एक न्यूज एजेंसी को (कानूनी कारणों से उन के नाम नहीं बताए जा सकते) नियमित रूप से पैसे देकर नियंत्रण में कर लिया था। वर्ष 1972 के दौरान के.जी.बी. ने भारतीय अखबारों में अपनी ओर से प्रायोजित 3789 सामग्री छपाने का दावा किया।


🚩संभवतः किसी गैर-कम्युनिस्ट देश में यह सब से बड़ी संख्या थी। फाइलों के अनुसार, यह संख्या 1973 में गिर कर 2760 हो गई, जो 1974 में बढ़कर 4486 और 1975 में 5510 हो गई। कुछ मुख्य देशों में के.जी.बी. ऐसे सक्रिय उपाय अभियानों के बावजूद तुलना में बमुश्किल एक प्रतिशत से कुछ अधिक चीजें प्रकाशित करा पाया था पर उसने भारतीय प्रेस में सफलतापूर्वक करवाया।’’


🚩साथ ही साथ यह भी एक कड़वा सच है कि हमारे ही कुछ भारतीय पत्रकार कैसे हमारा ब्रेनवॉस करके देश की जनता को गुमराह करते हैं। ऐसे दोगले पत्रकारों से हम सभी को सावधान रहना चाहिए ।

जय हिंद जय भारत माता


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Monday, April 17, 2023

यह है आधुनिक भारत की वर्तमान स्थितियों का कड़वा सच‼️लेकिन इस पर चर्चा कभी नही होती

17 Apirl 2023

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*🚩लगभग 4 साल पहले केरल की 2 ननों को ट्रेन से उतार कर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने सामान्य सी पूछताछ की तो केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, राहुल गांधी और मायावती तक ने इतना शोर मचाया , कि गृह मंत्री अमित शाह को स्पष्टीकरण देना पड़ा।*


*🚩लगभग 3 साल पहले पालघर मे 2 हिन्दू सन्यासियों की निर्मम हत्या हुई । यह हत्याकाण्ड जिस स्थान पर हुआ वह ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।*


*🚩स्वामी असीमानंद को झूठे सम्झौता एक्स्प्रेस ब्लास्ट मामले मे 10 सालों तक जेल मे प्रताड़ित किया गया, क्योंकि उन्होने गुजरात के डांग मे आदिवासियों को ईसाई बनने से रोका।*



*🚩23 अगस्त 2008 को उड़ीसा के कंधमाल मे स्वामी लक्ष्मणानन्द की दर्दनाक और नृशंस हत्या कर दी गई...क्यों कि वो उस स्थान पर आदिवासियों के ईसाईकरण में बाधक बन रहे थे।*


*🚩27 अगस्त 2000 को त्रिपुरा मे शान्ति काली जी महाराज को गोलियों से भून दिया गया, क्योंकि वे त्रिपुरा में इसाईकरण के आड़े आ रहे थे।*


*🚩31 अगस्त 2013 को संत श्री आशारामजी बापू को जेल भेजा गया क्योंकि बापू आशारामजी ने करोड़ो लोगों में सनातन धर्म की लौ जगा दी और लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवाई, हजारों मिशनरी एनजीओज़ की दुकानें बंद करवा दी । बौखलाए मिशनरियों ने ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज करके मिडिया ट्रायल करवाकर जेल भिजवा दिया। आज 9+ सालों से उन्हें 1 दिन की राहत नहीं मिली।*


*🚩केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने मलयालम मे अपनी आत्मकथा लिखी है। इसका नाम है‘Karthavinte Namathil (in the name of the Lord)’।  इसमें सिस्टर ने बताया है , कि साइरो-मालाबार चर्च में उनका कैसा अनुभव रहा ।

ग़ौरतलब है कि , इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी , जिसमें उन्हें आजतक न्याय नहीं मिला । ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूलों में पादरियों द्वारा क्या गुल खिलाए जाते हैं, सिस्टर लूसी की पुस्तक में इसके कई उदाहरण मिलेंगे। पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती कर यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।*


*🚩सिस्टर लूसी ने लिखा कि कॉन्वेंट्स में जवान ननों को पादरियों के पास उनके ‘यौन सुख’ के लिए भेजा जाता था। वहाँ वो सभी ननें घंटों नंगी खड़ी रखी जाती थीं। वो लगातार गिड़गिड़ाती रहती थीं लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया जाता था।*


*🚩केरल नन रेप केस में फंसे बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ बयान देने वाले फादर कुरियाकोसे कट्टूथारा का 22 अक्तूबर 2018 की सुबह शव बरामद हुआ । 60 वर्षीय कुरियाकोसे की मृत्यु आज भी संदिग्ध है।*


*🚩जब भारत मे चर्च का कोई बड़ा पदवीधारी (बिशप/ कार्डिनल) आदि फँसता है तो चर्च उसे क्लीनचिट देने मे बहुत जल्दी करता है परंतु पुलिस की सामान्य पूछताछ को भी अत्याचार बताया जाता है।*


*🚩फादर पी बी लोमियो की पुस्तक " उंटेश्वरी माता का महंत " भारत में चर्च के साम्राज्यवाद के कड़वे सच की दास्तान बताती है। मीडिया में उसकी चर्चा भी नही होती। इसी तरह " बुधिया एक सत्यकथा " भी चर्च के भीतर हो रहे कालेकारनामों और रोंगटे खड़े करने वाले सच से पर्दाफ़ाश करती है।*


*🚩विश्व मे चर्च --*

*सन् 2009 में आयरलैंड में, विशेष सरकारी आयोगों द्वारा वर्षों के कार्यों के बाद, डबलिन महाधर्मप्रांत में स्कूल प्रणाली में रयान रिर्पोट एवं बाल दुराचार पर मर्फी रिपोर्ट प्रकाशित किया गया था। मई में पहली रिपोर्ट के अनुसार 1930 से 1990 के दशक तक कैथोलिक गिरजे के कर्मचारियों द्वारा हज़ारों बच्चों को पीटा गया, सर मुंडवाया गया, आग या पानी से यातना दी गई और बलात्कार किया गया। उन मासूमों को नाम के बदले नम्बर दिया गया था। कभी कभी तो वे इतने भूखे होते थे , कि कूड़ा खाने पर मजबूर थे। नवम्बर में आई दूसरी मर्फ़ी रिपोर्ट में सामने आया कि , किस तरह चर्च ने दशकों तक अपने काले कारनामों को व्यवस्थित रूप से दबाए रखा। चर्च नेतृत्व बदनामी के डर से चुप रहा तो सरकारी दफ़्तरों ने नज़रें फेर लीं। जनमत के भारी दबाव के कारण चार बिशपों को इस्तीफ़ा देना पड़ा। तीन इस्तीफ़ो पर पोप को अभी फ़ैसला लेना है। रिपोर्ट के अनुसार आर्कडियोसेज़ डब्लिन में 1975 से 2004 के बीच 300 बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इस बीच कम से कम 170 इसाई धर्माधिकारी संदेह के घेरे में हैं ।*


*🚩5 फरवरी 2014 को ज़ारी अपनी रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार समिति (सीआरसी) ने कहा कि वैटिकन को उन पादरियों की फ़ाइलें फिर से खोलनी चाहिए , जिन्होंने बाल शोषण के अपराधों को छुपाया है,ताकि उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा सके । वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार -- " वैटिकन ने अपराधों की गंभीरता को स्वीकार नहीं किया और इसेलेकर समिति बहुत चिंतित है ।"*


*🚩सितम्बर 2018 में जर्मनी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कैथोलिक चर्च में 1946 से 2014 के बीच 3,677 बच्चों का यौन शोषण हुआ। जर्मन बिशप कॉन्फ्रेंस के प्रमुख कार्डिनल मार्क्स ने पीड़ितों से माफी मांगी ।*


*🚩जर्मन बिशप कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट पेश करते हुए कार्डिनल मार्क्स ने पीड़ितों से माफी मांगते हुए कहा, "लंबे समय तक चर्च ने यौन शोषण के मामलों को झुठलाया, नजरअंदाज किया और दबाया। इस विफलता और उसकी वजह से पहुंची तकलीफ के लिए मैं माफी मांगता हूं।" रिपोर्ट में कैथोलिक चर्च के पादरियों द्वारा बच्चों और किशोरों के यौन शोषण के मामले दर्ज किए गए हैं। मार्क्स ने कहा, "मैं नष्ट हुए भरोसे और चर्च के अधिकारियों द्वारा किए गए अपराधों के लिए शर्मसार हूं।"*


*🚩रिपोर्ट के अनुसार 1946 से 2014 के बीच कैथोलिक चर्च के 1,670 अधिकारियों ने 3,677 नाबालिगों का यौन शोषण किया। रिपोर्ट के लेखकों ने जर्मनी के 27 डियोसेजे में 38,156 फाइलों का विश्लेषण किया जिसमें 1,670 अधिकारियों के ऊपर नाबालिगों का यौन शोषण किए जाने के आरोपों का पता चला। इस अध्ययन का आदेश जर्मन बिशप कॉन्फ्रेंस ने ही दिया था। टीम का नेतृत्व मनहाइम के मनोचिकित्सक हाराल्ड द्राइसिंग की टीम कर रही थी।*


*🚩रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों में 1429 डियोसेजे के पादरी थे, 159 धार्मिक पादरी थे और 24 डियाकोन अधिकारी थे। 54 फीसदी लोगों के मामले में सिर्फ एक का यौन शोषण का आरोप था जबकि 42 प्रतिशत कई मामलों के आरोपी थे। यौन शोषण के पीड़ितों में 63 फीसदी लड़के थे और 35 फीसदी लड़कियां। पीड़ितों में तीन चौथाई का चर्च और आरोपियों के साथ धार्मिक रिश्ता था। वे या तो प्रार्थना सभाओं में सेवा देने वाले थे या धार्मिक कक्षाओं के छात्र।*


*🚩पुरी दुनिया में पादरी यौन शोषण के लिए बदनाम हैं परन्तु भारतीय मिडिया चुप है...! क्यों...?*


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Sunday, April 16, 2023

जन्मदिन इस तरीके से मनाएंगे तो जीवन महक उठेगा...

16 Apirl 2023

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🚩हम पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर प्रकाश, आनंद व ज्ञान की ओर ले जाने वाली अपनी सनातन संस्कृति का अनादर करके अपना जन्मदिवस अंधकार व अज्ञान की छाया में मना रहे हैं। केक पर मोमबत्तियाँ जलाकर उन्हें फूँककर बुझा देते हैं, प्रकाश के स्थान पर अंधेरा कर देते हैं।


🚩पानी का गिलास होठों से लगाने मात्र से उस पानी में लाखों किटाणु प्रवेश कर जाते हैं तो फिर मोमबत्तियों को बार बार फूँकने पर थूक के माध्यम से केक में कितने कीटाणु प्रवेश करते होंगे ? अतः हमें पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण का त्याग कर भारतीय संस्कृति के अनुसार ही जन्मदिवस मनाना चाहिए।


🚩तमसो मा ज्योतिर्गमय।

हे प्रभु ! तू हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चल ! सनातन संस्कृति के इस दिव्य संदेश को जीवन में अपना कर अपना जीवन प्रकाशमय बनाने का सुअवसर है जन्मदिवस।



🚩यह शरीर, जिसका जन्मदिवस मनाना है, पंचभूतों से बना है जिनके अलग-अलग रंग हैं। पृथ्वी का पीला, जल का सफेद, अग्नि का लाल, वायु का हरा व आकाश का नीला।


🚩थोड़े से चावल, हल्दी, कुंकुम आदि उपरोक्त पाँच रंग के द्रव्यों से रँग लें। फिर उनसे स्वास्तिक बनायें और जितने वर्ष पूरे हुए हों, मान लो 11, उतने छोटे दीये स्वास्तिक पर रख दें तथा 12वें वर्ष की शुरूआत के प्रतीक के रूप में एक बड़ा दीया स्वास्तिक के मध्य में रखें।


🚩फिर घर के सदस्यों से सब दीये जलवायें तथा बड़ा दीया कुटुम्ब के श्रेष्ठ, ऊँची समझवाले, भक्तिभाव वाले व्यक्ति से जलवायें। इसके बाद जिसका जन्मदिवस है, उसे सभी उपस्थित लोग शुभकामनाएँ दें। फिर आरती व प्रार्थना करें। 


🚩आप अपने बच्चों का जन्मदिवस भारतीय संस्कृति के अनुसार ही मनायें ताकि आगे चलकर ये मासूम नौनिहाल पाश्चात्य संस्कृति के गुलाम न बनकर भारत के सम्माननीय नागरिक बन सकें।


🚩ध्यान दें- जन्मदिवस के अवसर पर पार्टियों का आयोजन कर व्यर्थ में पैसा उड़ाना कहाँ तक उचित है ? इससे देश के ये भावी कर्णधार कौन सा आदर्श लेंगे ? आप आज से ही जन्मदिवस भारतीय संस्कृति के अनुसार मनाने का दृढ़ निश्चय कर लें। इस दिन बच्चे के हाथों से गरीब बस्तियों, अनाथालयों में भोजन, वस्त्र इत्यादि का वितरण करवाकर बच्चे में अपने धन को सत्कर्म में लगाने के सुसंस्कार डालें। लोगों से चीज-वस्तुएँ (गिफ्टस) लेने के बजाये अपने बच्चे को दान करना सिखायें, ताकि उसमें लेने की नहीं अपितु देने की सवृत्ति विकसित हो। बच्चे में भगवदभाव एवं देशभक्ति के विकास हेतु उस दिन उसे बालभक्तों की कहानियाँ सुनायें, गीता-पाठ करायें, बड़े बुजुर्गों को प्रणाम करवाकर उनसे आशीर्वाद दिलवायें। वृक्षारोपण जैसे पर्यावरण के प्रति प्रेम उत्पन्न करने वाले एवं समाज हित के कार्य करवायें।


🚩बच्चा उस दिन अपने गत वर्ष का हिसाब करे कि उसने वर्ष भर में क्या-क्या अच्छे और बुरे काम किये ? जो अच्छे कार्य किये हों उन्हें भगवान के चरणों में अर्पण कर दे और जो बुरे कार्य हुए उनको आगे भूलकर भी न दोहराने और सन्मार्ग पर चलने का शुभ संकल्प करे।


🚩उस दिन बालक से कोई भी एक संकल्प करवायें जैसे - ʹआज से स्वस्तिक या सदगुरुदेव के श्रीचित्र पर नियमित रूप से त्राटक करूँगा इत्यादि। बच्चे से यह भी संकल्प करवायें कि वह नये वर्ष में सदगुण सदाचारों के पालन में पूरी लगन से लगकर अपने माता पिता व देश के गौरव को बढ़ायेगा।


🚩ये बच्चे ऐसे महकते फूल बन सकते हैं कि अपनी निष्काम कर्मरूपी सुवास से वे केवल अपना घर, पड़ोस, शहर, राज्य व देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को सुवासित कर सकते हैं।


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Saturday, April 15, 2023

उइगर मुस्लिमों को चीन में रोजा रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध

15 Apirl 2023

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🚩उइगर मुस्लिमों पर चीन का कहर जारी है। रजमान के महीने में रोजा रखने की भी उन्हें इजाजत नहीं है। कोई मुस्लिम रोजा ना रख सके, इसके लिए चीन जासूसों की मदद ले रहा है। चीन ने जासूस के रूप में आम लोगों को ही रखा है। चीनी अधिकारी इन्हें ‘Ears’ कहते हैं। बता दें कि साल 2017 से ही चीन ने मुस्लिमों को रोजा रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है।


🚩इसके बाद साल 2021 और 2022 में प्रतिबंध में आंशिक रूप से ढील दी गई थी। इसके बाद 65 से अधिक मुस्लिमों को रोजा रखने की अनुमति मिली थी। इस दौरान पुलिस ने घरों की तलाशी और सड़क पर गश्ती जैसी गतिविधियों को कम कर दिया था।


🚩हालाँकि, इस साल चीन सरकार ने रोजा पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने उम्र, लिंग या पेशे की परवाह किए बिना सभी को रोजा रखने से रोक दिया। बता दें कि इस साल 22 मार्च से 20 अप्रैल तक रमजान का महीना है। इस दौरान मुस्लिम रोजा रखते हैं। रोजा इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है।



🚩शिनजियांग प्रांत के तुरपुन सिटी पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार, इस बार पूर्ण प्रतिबंध के बाद चीन के अधिकारियों ने रमजान के पहले सप्ताह में 56 उइगर निवासियों और पूर्व बंदियों को उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ करने के लिए बुलाया। इस दौरान पाया कि उनमें से 54 ने रोजा रखकर कानून का उल्लंघन किया।


🚩कानून का उल्लंघन करने वाले मुस्लिमों को क्या सजा दी गई या उनका क्या हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारियों ने भी इस संबंध में जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, हर गाँव तीन जासूसों को रखा गया है, जो रोजा रखने वालों या हाल ही में जेल से निकलकर आए लोगों पर नजर रखते हैं। ये जासूस आम नागरिक, पुलिसकर्मी और ग्राम समिति के सदस्य होते हैं।


🚩दरअसल, चीनियों के उइगर भाषा भी एक बड़ा बाधक है। इसलिए वे उइगर समुदाय के लोगों एवं वहाँ के स्थानीय लोगों को ही जासूस के रूप में नियुक्त कर किए हैं। पुलिस थाने में 70-80 उइगर पुलिसकर्मी हैं, जो इसमें मदद करते हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार और बढ़ गए हैं।


🚩दरअसल, मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में उइगर विद्रोहियों को लगभग खात्मा कर चुका चीन इस्लामी कट्टरपंथ पर नकेल कसने के लिए मजहब को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है। इस्लाम को दबाने का काम साल 2018 के बाद से शुरू हुआ, जब चीनी कैबिनेट ने एक गुप्त निर्देश पास किया कि मस्जिदों और मदरसों में अरब के बढ़ते प्रभाव को रोका जाए।


🚩इसके बाद उनकी धार्मिक पहचान मिटाने के लिए वेश-भूषा, खानपान, भाषा से लेकर संस्कृति और इतिहास तक मिटाया जा रहा है। मस्जिदों को ढहा दिया गया, अरबी पढ़ने पर रोक लगा दी, बुर्का और नमाजी टोपी पहनने पर रोक लगा दी गई।


🚩चीन में उइगर मुस्लिमों की आबादी घटना के लिए चीन योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है। चीन सिर्फ एक निकाह करने की इजाजत दे रहा है। इसके साथ ही मुस्लिम पुरुषों की जबरदस्ती नसबंदी की जा रही है। यहाँ तक उइगर महिलाओं को नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है और उनका जबरन गर्भपात करा दिया जाता है। उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर गर्भधारण की जानकारी जुटाई जाती है।


🚩ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थित अख़बार ‘द हेराल्ड सन’ ने साल 2021 में खुलासा किया था कि चीन उइगर मुस्लिम के अंगों की तस्करी भी कर रहा है और उससे धन कमा रहा है। उइगर मुस्लिमों के स्वस्थ लिवर को चीन 1,60,000 डॉलर्स (1.20 करोड़ रुपए) में बेचा जा रहा है।


🚩अख़बार ने दावा किया था कि इस तरह के धंधों से चीन को 1 बिलियन डॉलर (7492 करोड़ रुपयों) की कमाई हो रही है। इसका अर्थ है कि चीन के जिन प्रताड़ना कैंपों (Detention Centres) में इन उइगर मुस्लिमों को रखा जा रहा है, वहाँ जबरदस्ती उनके अंग निकाल लिए जाते हैं।


🚩भारत में इतनी छूट मिलने पर भी हिंदुओं के खिलाफ़ षडयंत्र किया जा रहा है, हिंदुओं को ही मिटाने का प्रयास किया जा रहा हैं। भारत में कब तक ऐसा चलता रहेगा?



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डॉ. आंबेडकर जयंती पर विशेष : हिंदू-मुस्लिम के लिए उन्होंने क्या बताया था?

14  Apirl 2023

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🚩भारतीय राजनीति अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जैसे अपने क्रांतिकारियों को जाति के आधार पर विभाजित कर लेती है वैसे ही महान व्यक्तित्वों को भी हमने जाति भेद के आधार पर विभाजित कर लेती है। भीमराव रामजी आम्बेडकर । यह नाम सुनते ही पाठकों के मन में एक दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता उजागर होगी। मगर डॉ अम्बेडकर के जीवन के एक ऐसा पक्ष भी हैं जिसमें राष्ट्रवादी चिंतन के महान नेता के रूप में उनके दर्शन होते हैं। डॉ अम्बेडकर के नाम पर दलित राजनीति करने वाले लोग जिन्हें हम छदम अम्बेडकरवादी कह सकते हैं, विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बनकर डॉ अम्बेडकर के सिद्धांतों की हत्या करने में लगे हुए हैं। अम्बेडकरवाद के नाम पर याकूब मेनन की फांसी की हत्या का विरोध, यूनिवर्सिटी में बीफ फेस्टिवल बनाना, कश्मीर में भारतीय सेना को बलात्कारी बताने, वन्दे मातरम और भारत माता की जय का नारा लगाने का विरोध, दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद, अलगाववादी कश्मीरी नेताओं की प्रशंसा जैसे कार्यों में लिप्त होना डॉ अम्बेडकर की मान्यताओं का स्पष्ट विरोध हैं। अम्बेडकरवादियों के क्रियाकलापों से सामान्य जन कि डॉ अम्बेडकर के विषय में धारणा भी विकृत हो जाति हैं। इस लेख का उद्देश्य यही सिद्ध करना है की अम्बेडकरवादी डॉ अम्बेडकर के सिद्धांतों के हत्यारे हैं।



🚩1. मैं यह स्वीकार करता हूँ कि कुछ बातों को लेकर सवर्ण हिन्दुओं के साथ मेरा विवाद है, परन्तु मैं आपके समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। – (राष्ट्र पुरुष बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर, कृष्ण गोपाल एवं श्री प्रकाश, फरवरी 1940, पृष्ठ 50)



🚩2. शुद्र राजाओं और ब्राह्मणों में बराबर झगड़ा रहा जिसके कारण ब्राह्मणों पर बहुत अत्याचार हुआ। शूद्रों के अत्याचारों के कारण ब्राह्मण लोग उनसे घृणा करने लगे और उनका उपनयन करना बंद कर दिया। उपनयन न होने के कारण उनका पतन हुआ। (डॉ अम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज,खण्ड 13, पृष्ठ 3)



🚩3. आर्यों के मूलस्थान (भारत के बाहर) का सिद्धांत वैदिक सहित्य से मेल नहीं खाता। वेदों में गंगा, यमुना, सरस्वती के प्रति आत्मीय भाव है। कोई विदेशी इस तरह नदियों के प्रति आत्मस्नेह सम्बोधन नहीं कर सकता। (डॉ अम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज,खण्ड 7, पृष्ठ 70 )


🚩4. हिन्दू समाज ने अपने धर्म से बाहर जाने के मार्ग तो खुला रखा है, किन्तु बाहर से अंदर आने का मार्ग बंद किया हुआ है। यह स्थिति पानी की उस टंकी के समान है जिसमें पानी के अंदर आने का मार्ग बंद किया हुआ है। किन्तु निकास की टोटीं सदैव खुली है। अंत: हिन्दू समाज को आने वाले अनर्थ से बचाने के लिए इस व्यवस्था में परिवर्तन होना आवश्यक है। (बाबा साहेब बांची भाषणे- खण्ड 5, पृष्ठ 16)


🚩5. हिन्दू अपनी मानवतावादी भावनाओं के लिए प्रसिद्द हैं और प्राणी जीवन के प्रति तो उनकी आस्था अद्भुत है। कुछ लोग तो विषैले सांपों को भी नहीं मारते। हिन्दू दर्शन सर्वव्यापी आत्मा का सिद्धांत सिखाता है और गीता उपदेश देती है कि ब्राह्मण और चांडाल में भेद न करो। प्रश्न उठता है कि जिन हिन्दुओं में उदारता और मानवतावाद की इतनी अच्छी परम्परा है और जिनका अच्छा दर्शन है वे मनुष्यों के प्रति इतना अनुचित तथा निर्दयता पूर्ण व्यवहार क्यों करते हैं? (Source: Material editor B.G.Kunte Vol 1 page 14-15)


🚩6. डॉ अम्बेडकर का मत था कि प्रत्येक हिन्दू वैदिक रीति से यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार रखता है और इसके लिए अम्बेडकर जी ने बम्बई में “समाज समता संघ” की स्थापना की जिसका मुख्य कार्य अछूतों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना तथा उनको अपने अधिकारों के प्रति सचेत करना था। यह संघ बड़ा सक्रिय था। इसी समाज के तत्वाधान में 500 महारों को जनेउ धारण करवाया गया ताकि सामाजिक समता स्थापित की जा सके। यह सभा बम्बई में मार्च 1928 में संपन्न हुई जिसमें डॉ अम्बेडकर भी मौजूद थे। (डॉ बी आर अम्बेडकर- व्यक्तित्व एवं कृतित्व पृष्ठ 116-117)


🚩7. तरुणों की धर्म विरोधी प्रवृत्ति देखकर मुझे दुःख होता है। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म अफीम की गोली है। परन्तु यह सही नहीं है। मेरे अंदर जो भी अच्छे गुण हैं अथवा मेरी शिक्षा के कारण समाज हित के काम जो मैंने किये हैं वे मुझ में विद्यमान धार्मिक भावना के कारण ही हैं। मुझे धर्म चाहिए लेकिन धर्म के नाम पर चलने वाला पाखण्ड नहीं चाहिए। (हमारे डॉ अम्बेडकर जी, पृष्ठ 9 श्री आश्चर्य लाल नरूला)

🚩8. मुस्लिम भ्रातृभाव केवल मुसलमानों के लिए-”इस्लाम एक बंद निकाय की तरह है, जो मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच जो भेद यह करता है, वह बिल्कुल मूर्त और स्पष्ट है। इस्लाम का भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व नहीं है, मुसलमानों का मुसलमानों से ही भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व नहीं है, मुसलमानों का मुसलमानों से ही भ्रातृत्व है। यह बंधुत्व है, परन्तु इसका लाभ अपने ही निकाय के लोगों तक सीमित है और जो इस निकाय से बाहर हैं, उनके लिए इसमें सिर्फ घृणा ओर शत्रुता ही है। इस्लाम का दूसरा अवगुण यह है कि यह सामाजिक स्वशासन की एक पद्धति है और स्थानीय स्वशासन से मेल नहीं खाता, क्योंकि मुसलमानों की निष्ठा, जिस देश में वे रहते हैं, उसके प्रति नहीं होती, बल्कि वह उस धार्मिक विश्वास पर निर्भर करती है, जिसका कि वे एक हिस्सा है। एक मुसलमान के लिए इसके विपरीत या उल्टे सोचना अत्यन्त दुष्कर है। जहाँ कहीं इस्लाम का शासन हैं, वहीं उसका अपना विश्वास है। दूसरे शब्दों में, इस्लाम एक सच्चे मुसलमानों को भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट सम्बन्धी मानने की इज़ाजत नहीं देता। सम्भवतः यही वजह थी कि मौलाना मुहम्मद अली जैसे एक महान भारतीय, परन्तु सच्चे मुसलमान ने, अपने, शरीर को हिन्दुस्तान की बजाए येरूसलम में दफनाया जाना अधिक पसंद किया।” (बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्‌मय, खंड १५-‘पाकिस्तान और भारत के विभाजन, २०००)


🚩9. Conversion to Islam or Christianity will denationalize the Depressed classes.If they go over to Islam, the number of Muslims would be doubled; and the danger of Muslim domination also become real.If they go over to Christianity, the numerical strength of the Christians becomes five to six crores. It will help to strengthen the political hold of Britain on the country. (Dr Ambedkar Life and Mission. 2nd Edition pp.278-279)


🚩10. You wish India should protect your border, she should build roads on your area, she should supply you food grains, and Kashmir should get equal status as India.But Government of India should have only limited powers and Indian people should have no rights in Kashmir.To give consent to this proposal, would be a treacherous thing against the interests of India and I, as law minister of India will never do it. (Dr B R Ambedkar to Sheikh Abdullah on Article 370)

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🚩इस प्रकार से डॉ अम्बेड़कर के वांग्मय में अनेक ऐसे उदहारण मिलते है जिससे यह सिद्ध होता है कि डॉ अम्बेडकर सच्चे राष्ट्रभक्त थे। अपने राजनीतिक हितों साधने के लिए अम्बेडकरवादियों ने डॉ अम्बेडकर के साथ विश्वासघात किया। आइए डॉ अम्बेडकर कि जयन्ती पर उनके राष्ट्रवादी चिंतन से विश्व को अवगत करवायें।

– डॉ. विवेक आर्य


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Thursday, April 13, 2023

रिपोर्ट में खुलासा : अमेरिकी चर्च में 600 बच्चों का यौन शोषण

13Apirl 2023

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🚩पश्चिम में चर्च के अंदर लड़के-लड़कियों, पुरुष-महिलाओं के यौन-शोषण के आरोपों की बाढ़ आ गयी लगती है । हजारों मामले बाहर आ रहे हैं । मामला इतना संगीन बन गया कि आयरलैंड की अपनी यात्रा (जिस दौरान उनके खिलाफ प्रदर्शन भी हुए) से पहले वर्तमान पोप फ्रांसिस ने एक खुला पत्र लिखा कि ‘शर्म और प्रायश्चित के साथ हम स्वीकार करते हैं… कि इसके चलते कितनी सारी जिंदगियों को नुकसान पहुँचा ।’ लेकिन पोप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस बात की ‘शर्म’ और किस बात का ‘प्रायश्चित’ और न ही बताया कि चर्च के पदाधिकारी, जिन पर आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गयी ? जिन पर आरोप लगे हैं वे केवल पादरी या बिशप ही नहीं बल्कि कार्डिनल (कैथोलिक चर्च का विशिष्ट पदाधिकारी) भी हैं । कई तो विभिन्न पोप के नजदीकी रहे हैं ।।


🚩चर्च में यौन शौषण


🚩चर्च में बच्चों के यौन शोषण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसके मुताबिक अमेरिकी राज्य मैरीलैंड के कैथोलिक चर्च में 600 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया गया। इसमें शामिल लोगों में करीब 150 पादरी थे। यौन शोषण की ये घटनाएँ 80 साल में अंजाम दिए गए हैं। 463 पन्नों की एक रिपोर्ट से ये खुलासे हुए हैं।



🚩चार साल की जाँच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। मैरीलैंड अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में उन कैथोलिक पादरियों की पहचान की गई है, जो 1940 के बाद से यौन शोषण में संलिप्त थे। ब्रायन फ्रॉश के अटॉर्नी जनरल रहते इस मामले की जाँच 2019 में शुरू की थी। सैकड़ों पीड़ितों और गवाहों से बातचीत तथा एक लाख पन्नों के अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।


🚩यह रिपोर्ट पिछले साल नवंबर में ही तैयार हो गई थी। लेकिन अदालती अनुमति मिलने के बाद अब जारी की गई है। जिन बच्चों का शोषण हुआ उनमें ज्यादातर कमजोर परिवारों से थे और चर्च से जुड़े थे। इस दौरान इन्हें चुप रहने के लिए धमकी भी दी गई थी। यह बात भी सामने आई है कि 80 साल तक चले इस यौन शोषण को चर्च की तरफ से दशकों तक छुपाने की कोशिश भी की गई।


🚩इस रिपोर्ट को लेकर बाल्टीमोर के आर्कबिशप विलियम लोरी ने जीवित बचे पीड़ितों से माफी माँगी है। उन्होंने कहा, “कैथोलिक चर्च के इतिहास में हुई यह अब तक की सबसे दुखद घटना है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता और न ही भुलाया जा सकता है। चर्च के उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुँचाया गया और हम पीड़ितों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहे। साथ ही दुर्व्यवहार करने वालों को उनके किए की सजा भी नहीं दिलवा पाए। इसका हमें खेद है।”


🚩इससे पहले अमेरिका के इलिनोइस प्रांत में करीब 700 पादरियों पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था। इलिनोइस के अटॉर्नी जनरल ने भी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था कि चर्च इन मामलों से निपटने में अक्षम रहा थे। चर्च ने यौन शोषण के आरोपित पादरियों की संख्या 185 बताई थी, लेकिन अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ऐसे पादरियों की संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादा है।


🚩धार्मिकता के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों के साथ बलात्कार करना, दारू पीना, मांस खाना, धर्म का पैसा शेयर बाजार में लगाना, लोगों का शोषण करना, कानून का पालन नही करना, समाज उत्थान कार्य के नाम पर भोले-भाले हिन्दुओं का धर्मांतरण करवाना और बोलते हैं कि ईसाई धर्म सबसे बड़ा धर्म है ।


🚩तथाकथित सेक्युलर और मीडिया हिन्दू धर्म के पवित्र मंदिर, आश्रमों व साधु-संतों को बदनाम करते हैं, परंतु ईसाई पादरीयों के कुकर्म पर चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें 

वेटिकन सिटी से फंडिंग होता है ।


🚩कन्नूर (कैरल) के कैथोलिक चर्च की एक नन सिस्टर मैरी चांडी ने पादरियों और ननों का चर्च और उनके शिक्षण संस्थानों में व्याप्त व्यभिचार का जिक्र अपनी आत्मकथा ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ में किया है कि ‘चर्च के भीतर की जिन्दगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी । 


🚩हिंदुस्तानी ऐसे ईसाई पादरियों और उनका बचाव करने वाली मीडिया और सेक्युलर लोगो से सावधान रहें  ।



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Wednesday, April 12, 2023

क्या है, पृथ्वी पर भूकंप आने का कारण ?

12- April-2023

  🚩हमारे हिन्दू धर्म में पृथ्वी को माता की उपाधि दी गई है तथा उनको धरती माता के रूप में पूजा जाता है। पुराणों में पृथ्वी को मंगल ग्रह माता बतलाया गया है जिसके संबंध में एक कथा दी गई है. जब हिरण्याकश्यप ने पृथ्वी को उसके स्थान से हटाकर समुद्र के गहरे तल में पहुंचा दिया था, तब भगवान विष्णु ने पृथ्वी को मुक्त करने के लिए वराह अवतार लिया। 

 🚩 समुद्र में जाकर वराह रूपी भगवान विष्णु ने दुष्ट हिरण्याकश्यप का वध किया तथा माता पृथ्वी को उस असुर के कैद से मुक्त किया। इसके बाद वराह भगवान ने पृथ्वी को ऐसे स्थान पर स्थापित किया, जहा पर पृथ्वी में जीवन का विकास हो सके। पृथ्वी के अनुरोध पर वराह भगवान ने कुछ वर्षो तक पृथ्वी के साथ समय बिताया तथा पृथ्वी को वराह भगवान से एक पुत्र की प्राप्ति हुई जो आगे चलकर मंगल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध हुए। 

🚩मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र और अन्य धार्मिक गर्थो में बहुत ही क्रोधी तथा विनाशकारी ग्रह बताया गया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मंगल ग्रह का क्रोधी स्वभाव ही पृथ्वी में भूकम्प और अन्य आपदाओं का कारण है यानि जब वे गुस्से में होते है तो भूकम्प, सुनामी व भूस्खलन आदि जैसी आपदाओं का पृथ्वी को सामना करना पड़ता है।


🚩वही पुराणों में बताई गई एक अन्य कथा के अनुसार पृथ्वी में भूकम्प आने का कारण मंगल ग्रह नहीं बल्कि शेषनाग है । 

🚩शेषनाग समस्त नागो के राजा है तथा भगवान विष्णु उनको अपनी शैया बनाकर उनके ऊपर आराम करते है। धार्मिक कथाओ के अनुसार शेषनाग ने पूरी पृथ्वी का भार अपने ऊपर उठाया हुआ है यानि पृथ्वी शेषनाग के सर पर टिकी हुई है। जब कभी भी शेष नाग करवट लेने के लिए हिलते है तो उनके हिलने के कारण ही पृथ्वी में भूकम्प आता है। 

🚩जब पृथ्वी पर अत्यधिक पाप होने लगता है तो पृथ्वी में से पाप का बोझ कम करने के लिए व लोगो को चेतावनी देने के लिए शेषनाग को करवट लेना पड़ता है ताकि लोग अधर्म का मार्ग छोड़ कर धर्म का मार्ग चुने। 

🚩शास्त्रों की मानें तो निरीह पशुओं पर होने वाले अत्याचार के कारण भी भूकंप आते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार गायों,भैंसों के कत्ल के समय उनकी आहें निकलती हैं। जो विशेष फ्रीक्वेंसी की होती हैं जिनके द्वारा जमीन के अंदर के टैक्टोनिक प्लेट्स पर प्रभाव पड़ता है और भूकम आते हैं।

🚩उदाहरण : नेपाल में 5000 मवशियों की बलि दिगयी गई और उस साल नेपाल दी गई। जवाब में नेपाल को भूकंप की त्रासदी झलनी पड़ी।

🚩वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी का भार शेषनाग और भगवान विष्णु के कश्यप अवतार (कछुआ रूप) के ऊपर टिका हुआ है। यही कारण है की जब नए घर का निर्माण किया जाता है तो उसके नीव रखने के समय कछुआ या शेषनाग चांदी की आकृति जमीन में रखी जाती है ताकि घर लम्बे समय तक अडिग रह सके। चीन में भी भूकम्प को लेकर एक अलग ही मान्यता है परन्तु ये भी हिन्दू धर्म से कुछ मिलती-जुलती है।

🚩चीन में भूकम्प को लेकर यह मान्यता है की पृथ्वी को एक बहुत ही विशाल मकड़े ने अपने पीठ के ऊपर उठाया हुआ है। जब यह मकड़ा हिलता है तो पृथ्वी में भूकम्प आ जाता है. इसी प्रकार जपान में भूकम्प को लेकर यह मान्यता है की धरती में जमीन के नीचे एक नामुज नाम की मछली रहती है. जब कभी नामुज कशिमा नाम के देवता पर हमला करती तो पृथ्वी में भूकम्प आता हैं।

🚩चीन में भूकंप की मान्यता हिन्दू धर्म की मान्यताओं से अलग है लेकिन काफी मायनों में यह मिलता जुलता है। चीन के लोग यह मानते हैं कि पृथ्वी को एक बड़े से मकड़े ने अपनी पीठ पर संभलकर रखा हुआ है।

🚩जब यह मकड़ा अपनी पीठ हिलाता है तो पृथ्वी हिल जाती है और भूकंप आ जाता है। जापान में भी भूकंप को लेकर अजब सी मान्यता है। यहां ऐसी धारण है कि जमीन के नीचे नामजू नाम की एक मछली रहती है। जब कभी नामजू काशिमा नाम के देवता पर हमला करती है तो भूकंप आ जाता है।

🚩यूनान में भूकंप की मान्यता कुछ कुछ काशी विश्वनाथ से मिलती जुलती है। जिस प्रकार हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि काशी शिव जी के त्रिशूल पर टिका हुआ है उसी प्रकार यूनान में यह माना जाता है कि पोजेडन नाम के देवता हैं जो समुद्र के स्वामी हैं। इनके हाथों में त्रिशूल है यह जब क्रोधित होते हैं तब अपना त्रिशूल जमीन पर मारते हैं इसकी चोट से धरती हिलने लगती है।

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