Tuesday, June 27, 2017

देश पर अंग्रेजों द्वारा लादा गया झूठा लोकतंत्र हटाना ही पड़ेगा : श्री. रमेश शिंदे

देश पर अंग्रेजों द्वारा लादा गया झूठा लोकतंत्र हटाना ही पड़ेगा : श्री. रमेश शिंदे

जून 27, 2017 

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में हिन्दू #जनजागृति समिति के #राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदेजी ने हिन्दू राष्ट्र स्थापना पर बोलते समय कहा कि लोकतंत्र की गत 70 वर्षों की #कालावधि में वाम विचारधारा के लोग यह भूल गए हैं कि, ब्रिटिश और मुगलों के भारत में आने से पहले भारत एक समर्थ हिन्दू राष्ट्र ही था ।
ramesh shindhe
 

उस समय विश्‍व के निराश्रित #पारसी, ज्यू, इराणी लोगों को #आश्रय देनेवाला केवल #भारत ही था ।

अब हमारा विकास दर 6 प्रतिशत से 9 प्रतिशत पर गया, तो भी आनंद व्यक्त किया जाता है; परंतु विदेशी अभ्यासक एंगर्स #मेडिसन ने लिखा है कि, उस समय भारत का #विकासदर 34 प्रतिशत था ।

🚩हमें हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए अलग ब्लू प्रिंट बनाने की क्या आवश्यकता है ? 
भारत में #मुसलमान #आक्रमणकारी एवं #अंग्रेज आने से पूर्व भारत एक समर्थ #हिन्दू #राष्ट्र था । हमारे पास कौटिल्य का अर्थशास्त्र था, स्थापत्यशास्त्र, नृत्यशास्त्र आदि सबकुछ समृद्ध था । हम तो इस देश पर अंग्रेजों द्वारा लादा गया झूठा #लोकतंत्र हटाने की ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे हैं ।

रमेश जी ने बताया कि जिस प्रकार रामायण होने से पहले ही ऋषि वाल्मीकि ने उसे लिखकर रखा था, उसी प्रकार द्रष्टा संत परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने वर्ष 1998 में ही भारत में 2023 में #हिन्दूराष्ट्र आएगा, ऐसा लिखा है । उसके लिए अभी जनमानस तैयार हो रहे हैं । यह देश की विविध घटनाआें से सुस्पष्ट हुआ है । अब इस अधिवेशन में आए हिन्दू धर्माभिमानी यह विषय जनमानस पर अंकित करेंगे ।

हिन्दू राष्ट्र में किसी का #तुष्टिकरण नहीं होगा । सबको समान अधिकार होंगे ।


आतंकवाद रोकने हेतु ‘पनून #कश्मीर’ का निर्माण आवश्यक..

हिन्दू अधिवेशन में ‘यूथ फॉर पनून काश्मीर’ के उपाध्यक्ष श्री. राहुल #राजदान ने कहा कि कट्टरपंथियों ने अफगानिस्तान लिया, पाक लिया अब वे कश्मीर से हिंदुओं को निकालना चाहते हैं तथा देहली में आना चाहते हैं । यह जिहादी #आतंकवाद रोकने के लिए केंद्रशासित प्रदेश के रूप में ‘पनून कश्मीर’ का निर्माण आवश्यक है ।

🚩उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर घाटी से वर्ष 1990 में साढे-चार लाख कश्मीरी #हिन्दुआें को निकाल दिया गया । कश्मीर के उस समय के और वर्तमान के कट्टरपंथियों की मनःस्थिति में बहुत अंतर दिखाई देता है ।

'कश्मीरी #हिन्दुआें को देश के हिन्दू साथ देंगे’, ऐसा डर उस समय के कट्टरपंथियों कोे था । अब यह डर नहीं रहा ।

ऐसा बताया जाता था कि पहले के #कट्टरपंथियों के नेता राजनीतिक अन्याय के कारण हाथ में पिस्तुल लेतेे थे; परंतु अभी के नेता ‘कश्मीर की लड़ाई’ यह ‘इस्लाम की लड़ाई है’ ऐसा खुलकर बताते हैं । इतना ही नहीं कश्मीर की समस्या को ‘#राजनीतिक समस्या’ समझनेवाले अलगाववादियों को भी मारने की धमकियां दी जाती हैं ।

🚩कश्मीर में केवल सेना के नियंत्रण में जो मंदिर हैं, वहीं शेष हैं । वहां #कट्टरपंथियों की कट्टरता बढ़ी है । वहां की कश्मीरी भाषा नष्ट कर ‘उर्दू’ भाषा की जड़ें जमाई जा रही हैं ।

🚩 #कश्मीर में यदि किसी चीज में परिवर्तन नहीं हुआ है, तो वह है सरकार का दृष्टिकोण !

🚩वहां की सरकार पहले के समान कट्टरपंथियों के साथ है । इस स्थिति को बदलने के लिए ‘पनून कश्मीर’के निर्माण की आवश्यकता है ।

आपको बता दें कि सनातन संस्था के अथाह प्रयास से अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में देश-भर के 150 #हिन्दू #संगठन इकट्ठे हुए थर जो हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं ।

अब देखते हैं कि हिन्दुत्वादी कहलाने वाली #सरकार द्वारा उनको कितना समर्थन मिलता है..???

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Monday, June 26, 2017

देववाणी संस्कृत से आई है मुसलमानों की 'नमाज

देववाणी संस्कृत से आई है मुसलमानों की 'नमाज 

जून 26,2017

संसार की समस्त प्राचीनतम भाषाओं में संस्कृत का सर्वोच्च स्थान है। विश्व-साहित्य की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद संस्कृत में ही रची गई है। संपूर्ण भारतीय संस्कृति, परंपरा और महत्वपूर्ण राज इसमें निहित हैं । अमरभाषा या देववाणी संस्कृत को जाने बिना भारतीय संस्कृति की महत्ता को जाना नहीं जा सकता। 
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संस्कृत भाषा से ही सभी भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। दूसरे शब्दों में इसे भाषाओं की माँ माना गया है। 

प्राचीन काल से ही जनमानस से लेकर साहित्य की भाषा रही संस्कृत, कालांतर में करीब-करीब सुस्ता कर बैठ गई, जिसका एक मुख्य कारण है कि इसका समाज में महत्व न समझकर केवल पूजाघर में ही स्थापित कर दिया गया।

देववाणी संस्कृत भाषा तो जिस संस्कृति और परिवेश में जाती है, उसे अपना कुछ न कुछ देकर ही आती है।

वैदिक संस्कृत जिस बेलागपन से समाज के क्रिया-कलापों को परिभाषित करती थी उतने ही अपनेपन के साथ दूरदराज के समाजों में भी उसका उठना बैठना था। जिस जगह विचरती उस स्थान का नामकरण कर देती।
दजला और फरात के भूभाग से गुजरी तो उस स्थान का नामकरण ही कर दिया । हरे भरे खुशहाल शहर को 'भगवान प्रदत्त' कह डाला। संस्कृत का भगः शब्द फारसी अवेस्ता में "बग" हो गया और दत्त हो गया "दाद" और बन गया बगदाद।

अफगान का अश्वक से नाता

इसी प्रकार संस्कृत का "अश्वक" प्राकृत में बदला "आवगन" और फारसी में पल्टी मारकर "अफगान" हो गया और साथ में स्थान का प्रत्यय "स्तान" में बदलकर मिला दिया और बना दिया हिंद का पड़ोसी अफगानिस्तान -यानी निपुण घुड़सवारों की निवास-स्थली।

स्थान ही नहीं, संस्कृत तो किसी के भी पूजाघरों में जाने से नहीं कतराती क्योंकि वह तो यह मानती है कि ईश्वर का एक नाम अक्षर भी तो है। अ-क्षर यानी जिसका क्षरण न होता हो।

इस्लाम की पूजा पद्धति का नाम यूँ तो कुरान में सलात है लेकिन मुसलमान इसे नमाज के नाम से जानते और अदा भी करते हैं। नमाज शब्द संस्कृत धातु नमस् से बना है।

इसका पहला उपयोग ऋगवेद में हुआ है और अर्थ होता है- आदर और भक्ति में झुक जाना। श्रीमद्भगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय के इस श्लोक को देखें - नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते।

इस संस्कृत शब्द नमस् की यात्रा भारत से होती हुई ईरान पहुंची जहाँ प्राचीन फारसी अवेस्ता उसे नमाज पुकारने लगी और आखिरकार तुर्की, आजरबैजान, तुर्केमानिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, बर्मा, इंडोनेशिया और मलेशिया के मुसलामानों के दिलों में घर कर गई।

देववाणी संस्कृत ने पछुवा हवा बनकर पश्चिम का ही रुख नहीं किया बल्कि यह पुरवाई बनकर भी बही ।  चीनियों को "मौन" शब्द देकर उनके अंतस को भी "छू" गई।

चीनी भाषा में ध्यानमग्न खामोशी को मौन कहा जाता है और स्पर्श को छू कहकर पुकारा जाता है।
 
देश-विदेश के कई बड़े विद्वान संस्कृत के अनुपम और विपुल साहित्य को देखकर चकित रह गए हैं। कई विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक रीति से इसका अध्ययन किया और गहरी गवेषणा की है। समस्त भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी यदि कोई भाषा है तो वह संस्कृत ही है।

स्वामी #विवेकानंदजी के शब्द हैं : ‘#संस्कृत शब्दों की ध्वनिमात्र से इस जाति को शक्ति, बल और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।'

#संस्कृत-ज्ञान से प्रभावित #विलियम_थियॉडोर का कहना है कि ‘#भारत तथा संसार का उद्धार और सुरक्षा #संस्कृत-ज्ञान के द्वारा ही संभव है ।'


संस्कृत की भाषा विशिष्टता को समझकर Saint James Independent school नामक लन्दन के बीच बनी एक पाठशाला ने अपने जूनियर डिविजन में इसकी शिक्षा को अनिवार्य बना दिया है। 


#Oxford_University के डॉक्टर जोसफ अनुसार संस्कृत विश्व की सर्वाधिक पूर्ण, परिमार्जित एवं तर्कसंगत भाषा है। यह एकमात्र ऐसी भाषा है जिसका नाम उसे बोलने वालों के नाम पर आधारित नहीं है। वरन संस्कृत शब्द का अर्थ ही है "पूर्ण भाषा"। 

न्यूजीलैंड के शहर #अॉकलैंड के माउंट इडेन क्षेत्र में स्थित इस पाठशाला में संस्कृत भाषा ही पढ़ाई जाती है वहाँ के प्रिंसिपल पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि, दुनियाँ की कोई भी भाषा सीखने के लिए #संस्कृत भाषा आधार का काम करती है। 

संस्कृत का अध्ययन मनुष्य को सूक्ष्म विचारशक्ति प्रदान करता है । मन स्वाभाविक ही अंतर्मुख होने लगता है । इसका अध्ययन मौलिक चिंतन को जन्म देता है । #संस्कृत भाषा के पहले की कोई अन्य भाषा, संस्कृत वर्णमाला के पहले की कोई अन्य वर्णमाला देखने-सुनने में नहीं आती । इसका व्याकरण भी अद्भुत है । ऐसा सर्वांगपूर्ण व्याकरण जगत की किसी भी अन्य भाषा में देखने में नहीं आता । यह संसार भर की भाषाओं में #प्राचीनतम और समृद्धतम है ।

आज #आवश्यकता है संस्कृत के विभिन्न आयामों पर फिर से नवीन ढंग से अनुसन्धान करने की, इसके प्रति जनमानस में जागृति लाने की; क्योंकि संस्कृत हमारी संस्कृति का प्रतीक है। संस्कृति की रक्षा एवं विकास के लिए संस्कृत को महत्त्व प्रदान करना आवश्यक है। इस विरासत को हमें पुनः शिरोधार्य करना होगा तभी इसका विकास एवं उत्थान संभव है।

भारतीय संस्कृति की सुरक्षा, चरित्रवान नागरिकों के निर्माण, प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति एवं विश्वशांति हेतु संस्कृत का अध्ययन अवश्य होना चाहिए ।

अमेरिका के  नेता राजन झेद ने कहा है कि, संस्कृत को सही स्थान दिलाने की आवश्यकता है। एक ओर तो सम्पूर्ण विश्व में संस्कृत भाषा का महत्व बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत में संस्कृत भाषा के विस्तार हेतु ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं जिसके कारण भारत में ही संस्कृत का #विस्तार नहीं हो पा रहा है और संस्कृत भाषा के महत्व से लोग #अज्ञात हैं ।

अब केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को सभी स्कूलों, कॉलेजों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य करना चाहिए जिससे बच्चों की बुद्धिशक्ति के विकास के साथ साथ बच्चे सुसंस्कारी बने और सर्वागीण विकास हो ।


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Sunday, June 25, 2017

हिंदी पर करें गर्व, अंग्रेजी के पीछे दौड़ना दुर्भाग्यपूर्ण: वेंकैया नायडू

हिंदी पर करें गर्व, अंग्रेजी के पीछे दौड़ना दुर्भाग्यपूर्ण: वेंकैया नायडू

जून,25, 2017

शनिवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू अहमदाबाद के साबरमती गांधी आश्रम में गांधीजी के जीवन के 100 अलग-अलग प्रसंगों पर बनी पुस्तक का लोकार्पण करने पहुंचे थे । यह किताब #गांधी के जीवन पर लिखी गई । किताब अंग्रेजी में होने के बाद, उन्होंने कहा कि हमारी देश में जिस तरह से लोग अंग्रेजी भाषा के पीछे दौड़ रहे हैं, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारी मातृभाषा हमारी पहचान है,  हमें इस पर गर्व होना चाहिए।

🚩 #वेंकैया_नायडू ने आज की शिक्षा प्रणाली और उसमें इस्तेमाल होती अंग्रेजी भाषा पर भी कई सवाल खड़े किए । उन्होंने कहा कि हमारे देश में #शिक्षा में #मातृभाषा और #राष्ट्रभाषा पर महत्व देना चाहिए। जिस तरह से अभिभावक अग्रेंजी भाषा को लेकर बच्चों पर जोर डालते हैं वो ठीक नहीं है।
hindi national language

🚩 उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष के बारे में बात करते हुए कहा कि, वो नेल्लूर में #हिंदी विरोधी अभियान में जुड़ें थे और मातृभाषा के लिये हिंदी भाषा के बोर्ड पर कालिक पोती थी। हांलाकि जब वो 1993 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय #महामंत्री बने तब पता चला कि कालिक हिन्दी पर नहीं बल्कि उन्होंने अपने सर पर लगाई थी ।


🚩अंग्रेजी भाषा के #मूल शब्द लगभग 10,000 हैं, जबकि हिन्दी के मूल# शब्दों की संख्या 2,50,000 से भी अधिक है। #संसार की #उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित #भाषा है। 

🚩#हिंदी दुनिया की सबसे #अधिक# बोली जाने वाली भाषा है । लेकिन अभी तक हम इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बना पाए।

🚩हिंदी दुनिया की #सर्वाधिक तीव्रता से प्रसारित हो रही भाषाओं में से #एक है । वह सच्चे अर्थों में #विश्व भाषा बनने की #पूर्ण अधिकारी है । हिंदी का #शब्दकोष बहुत विशाल #है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों #शब्द हैं जो अंग्रेजी भाषा में नही है । 

🚩हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त #देवनागरी लिपि #अत्यन्त वैज्ञानिक है । हिन्दी को #संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन #शब्द-रचना-सामर्थ्य विरासत में मिली है। 

🚩आज उन# मैकाले की वजह से ही हमने अपनी मानसिक गुलामी बना ली है कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम चल नहीं सकता । हमें हिंदी भाषा का महत्व समझकर उपयोग करना चाहिए ।

🚩#मदन मोहन मालवीयजी ने 1898 में सर एंटोनी #मैकडोनेल के सम्मुख हिंदी भाषा की प्रमुखता को बताते हुए, कचहरियों में हिन्दी भाषा को प्रवेश दिलाया ।

🚩#लोकमान्य तिलकजी #ने हिन्दी भाषा को खूब प्रोत्साहित किया । 

वे कहते थे : ‘‘ अंग्रेजी शिक्षा देने के लिए बच्चों को सात-आठ वर्ष तक अंग्रेजी पढ़नी पड़ती है । जीवन के ये आठ वर्ष कम नहीं होते । ऐसी स्थिति विश्व के किसी और देश में नहीं है । ऐसी #शिक्षा-प्रणाली किसी भी #सभ्य देश में नहीं पायी जाती ।’’ जिस प्रकार बूँद-बूँद से घड़ा भरता है, उसी प्रकार #समाज में कोई भी बड़ा परिवर्तन लाना हो #तो किसी-न-किसी को तो पहला कदम उठाना ही पड़ता है और फिर धीरे-धीरे एक कारवा बन जाता है व उसके पीछे-पीछे पूरा #समाज चल पड़ता है । 

🚩हमें भी अपनी राष्ट्रभाषा को उसका खोया हुआ# सम्मान और गौरव# दिलाने के लिए व्यक्तिगत स्तर से पहल चालू करनी चाहिए ।

 🚩एक-एक मति के मेल से ही बहुमति और फिर सर्वजनमति बनती है । हमें अपने #दैनिक जीवन# में से अंग्रेजी को तिलांजलि देकर विशुद्ध रूप से मातृभाषा अथवा #हिन्दी का प्रयोग# करना चाहिए । 

🚩#राष्ट्रीय अभियानों, राष्ट्रीय नीतियों व अंतराष्ट्रीय आदान-प्रदान हेतु अंग्रेजी नहीं #राष्ट्रभाषा हिन्दी ही साधन# बननी चाहिए ।

🚩 जब कमाल पाशा #अरब देश में तुर्की भाषा को लागू करने के लिए अधिकारियों की कुछ दिन की मोहलत  ठुकराकर रातों रात परिवर्तन कर सकते हैं तो हमारे लिए क्या यह असम्भव है  ?  

🚩आज सारे संसार की आशादृष्टि भारत पर टिकी है । हिन्दी की संस्कृति केवल देशीय नहीं सार्वलौकिक है क्योंकि #अनेक राष्ट्र ऐसे हैं जिनकी भाषा हिन्दी के उतनी करीब है जितनी भारत के अनेक राज्यों की भी नहीं है । इसलिए हिन्दी की संस्कृति को #विश्व को अपना #अंशदान करना है ।

🚩#राष्ट्रभाषा राष्ट्र का गौरव है# । इसे अपनाना और इसकी अभिवृद्धि करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है । यह राष्ट्र की एकता और अखंडता की नींव है । आओ, इसे सुदृढ़ बनाकर राष्ट्ररूपी भवन की सुरक्षा करें । 


🚩स्वभाषा की महत्ता बताते हुए #हिन्दू संत  आसारामजी बापू कहते हैं : ‘‘मैं तो जापानियों को #धन्यवाद दूँगा । वे अमेरिका में जाते हैं तो वहाँ भी अपनी मातृभाषा में ही बातें करते हैं । ...और हम भारतवासी!
#भारत में रहते हैं फिर भी अपनी हिन्दी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं में अंग्रेजी के शब्द बोलने लगते हैं । आदत जो पड़ गयी है ! आजादी मिले 70 वर्ष से भी अधिक समय हो गया, बाहरी गुलामी की जंजीर तो छूटी लेकिन भीतरी गुलामी, दिमागी गुलामी अभी तक नहीं गयी ।’’ 

🚩#अंग्रेजी भाषा के #दुष्परिणाम

🚩#विदेशी शासन #के अनेक दोषों में देश के नौजवानों पर डाला गया #विदेशी भाषा के #माध्यम का घातक बोझ इतिहास में एक सबसे बड़ा दोष माना जायेगा। इस माध्यम ने राष्ट्र की शक्ति हर ली है, विद्यार्थियों की आयु घटा दी है, उन्हें आम जनता से दूर कर दिया है और शिक्षण को बिना कारण खर्चीला बना दिया है। अगर यह प्रक्रिया अब भी जारी रही तो वह राष्ट्र की आत्मा को नष्ट कर देगी। इसलिए शिक्षित भारतीय जितनी जल्दी विदेशी माध्यम के भयंकर वशीकरण से बाहर निकल जायें उतना ही उनको और #जनता को लाभ होगा।


🚩अपनी मातृभाषा की गरिमा को पहचानें । अपने बच्चों को अंग्रेजी#(कन्वेंट स्कूलो) में शिक्षा दिलाकर उनके विकास को# अवरुद्ध न करें । उन्हें मातृभाषा(गुरुकुलों) में पढ़ने की स्वतंत्रता देकर उनके चहुमुखी #विकास में सहभागी बनें ।

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Saturday, June 24, 2017

चौरसिया पर लटकी तलवार, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी !!

चौरसिया पर लटकी तलवार, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

जून 24,2017

इंडिया न्यूज के चीफ एडिटर दीपक चौरसिया के खिलाफ पटना न्यायालय ने 2-2 बार गैर जमानती वारंट निकाले हैं, लेकिन नोयडा (उत्तर प्रदेश) पुलिस आखिर क्यों कानून की अवेहलना कर उसे गिरफ्तार नही कर रही ? इस विषय को लेकर जनता भारी रोष में !!
deepak chaurasia

दीपक चौरसिया को गिरफ्तार करवाने के लिए कई बार जंतर-मंतर (दिल्ली) में धरने हुए और नोयडा पुलिस के मुख्यालय के सामने भी धरने हुए, नोयडा पुलिस प्रशासन की तरफ से आश्वासन भी दिया गया लेकिन अभी तक गिरफ्तार नही किया गया ।

शुक्रवार (23 मार्च 2017) को भारत में #JailCHORasia हैश-टैग टॉप पर ट्रेंड कर रहा था जिसमें हजारों लोग दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे ।

आईये जाने क्या है आम जनता का वक्तव्य दीपक चौरसिया के लिए..


1.प्रीति का कहना है कि आखिर क्यों दीपक चौरसिया नहीं हो रहा है हाजिर ! क्या ये कोर्ट का माखौल नहीं ?? #JailCHORasia 


2. मानव बुद्धदेव लिखते हैं कि सत्य से नहीं तेरी खबराें का मेल चाेरसिया,
कब तक खिलाएगा झूठी खबराें की भेल चाेरसिया,
अब खतम हुआ तेरा खेल चाेरसिया,
जल्द हाेगी तुझे #JailCHORasia


3. राहुल लिखते हैं कि #JailCHORasia बिकाऊ No.1 पत्रकार । 
इसकी जांच होनी चाहिए 5000 रूपए की नौकरी करने वाले की सम्पति आज करोडो मैं कैसे ?



4. उत्सव कहते हैं कि भ्रष्ट देश की ये पहचान,भ्रष्ट चौरसिया व उसकी भ्रष्ट टीम अब तक जेल से बाहर #JailCHORasia https://t.co/0cYDQMs9fb


5. वेषु कहती हैं कि दिल्ली पुलिस को हर हाल में दीपक चौरसिया को गिरफ्तार करना होगा क्योंकि वो अब समाज का कैंसर बन चूका है #JailCHORasia https://t.co/hZRvQwxYKJ


6. नलिनी का पूछना है कि दीपक चौरसिया हमें जवाब दो, अगर निर्दोष हो तो पटना सिटी कोर्ट के सम्मन पे आते क्यों नहीं ? #JailCHORasia 



7.समीर कहते हैं कि ये वही शख्स है जिसने एक छोटी बच्ची का फर्जी वीडियो बनाया ! ऐसी नीच हरकत पर भी महिला आयोग चुप क्यों ? #JailCHORasia 


8. मकरंद कहते हैं कि भारत सरकार को ज्ञात हो कि इंडिया न्यूज का दीपक चौरसिया कानून व्यवस्था को खुलेआम चकमा दे रहा है ! #JailCHORasia https://t.co/w1RLqpfpVj



9.सतीश जागड़ा लिखते हैं कि इंडिया न्यूज के मालिक व साथियों पे गैर-जमानती वारंट ! प्रशासन कब करेगी कार्यवाही? #JailCHORasia


10. ओमराज कहते हैं कि गैर जमानती वारंट जारी है दीपक चौरसिया का,फिर भी खुले आम कैसे घूम रहा? #JailCHORasia https://t.co/oOvBWd4kBD



आपको बता दें कि ये तो आपको कुछ ही नमूने दिखाए गए हैं ऐसे तो करीब 58000 हजार से भी अधिक ट्वीट्स हुई हैं । जिसमें सबका एक ही कहना था कि भ्रष्ट चौरसिया को जल्दी जेल भेजो ।

ये पहली बार नही है, इससे पहले भी ट्वीटर पर काफी ट्रेंड बन चुके हैं जो भारत में टॉप पर रहे थे उसमें भी जनता यही मांग कर रही थी कि कानून की अवहेलना क्यों की जा रही है..???

 आखिर क्यों दीपक चौरसिया को गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं..???

 क्या पुलिस प्रशासन दीपक चौरसिया से डरता है..???

हम अपने पाठकों को बताते हैं कि इण्डिया #न्यूज चैनल के दीपक चौरसिया के खिलाफ तीन-तीन बार #पटना #कोर्ट ने #summons जारी किये हैं, पर हर बार  न्यायालय की अवहेलना करने के कारण पटना कोर्ट द्वारा चौरसिया को गिरफ्तार करने के लिए "गैर जमानती वारंट" जारी किया गया है।

गौरतलब है कि इंडिया न्यूज चैनल के दीपक चौरसिया ने हिन्दू संत आशारामजी बापू को बदनाम करने के उद्देश्य से कई झूठे एवं मनगढ़ंत न्यूज बनाये और जनता को गुमराह किया जबकि #पुलिस द्वारा उन आरोपों की पुष्टि अभी तक नही हुई । 

इसी कारण पटना में रहने वाले श्री दिलीप कुमार ने, जिनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुँची थी, उन्होंने #पटना शहर के कोर्ट में दीपक चौरसिया एवं अन्य आरोपी जिनमें इंडिया न्यूज चैनल के मालिक एवं निर्देशक भी सम्मलित हैं,  उनके खिलाफ 15 मई 2014 को शिकायत दर्ज कराई थी ।

पटना कोर्ट ने इसकी गंभीरता को देखते हुए "#Non-bailable Warrant" जारी किया है ।

अब देखना ये है कि बिना सबूत हिन्दू संतों को आधी रात को गिरफ्तार करने वाला ये #पुलिस प्रशासन हजारों-लाखों लोगों की मांग को देखकर कितना #सक्रिय होता है दीपक चौरसिया की #गिरफ्तारी को लेकर....!!!

Friday, June 23, 2017

ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं

ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं

जून 23, 2017

विश्रामपुर (झारखंड) : भूत प्रेत से शांति दिलाने के नाम पर ईसाई मिशनरियां दलित पिछड़े वर्ग एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का जोरशोर से काम कर रही हैं । पिछले दिनों राज्यस्तरीय पार्टी कार्यकर्ता की बैठक में धर्मांतरण पर सक्त कानून बनाने की बात मुख्यमंत्री #रघुवर दास की ओर से कही गई थी। परंतु इसका कोई प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ा । धर्मांतरण का खेल चरम सीमा पर है। कुछ बिचौलिये भोले भाले गरीब परिवार को लालच देकर अपने लक्ष्य में सफल हो रहे हैं। इसमें विश्रामपुर व नावा बाजार थाना क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं है।
conversion

थाना क्षेत्र के #उमेश चौधरी, #सुगेंद्र उरांव, #विजय राम व तोलरा गांव से #गणेश उरांव, #चतुगुण उरांव जैसे दर्जनों लोगों ने बातचीत के क्रम में स्वीकार किया है कि धर्मांतरण के बाद उन्हें भूत प्रेत से शांति मिली है। नावाबाजार थाना क्षेत्र के तुकबेरा गांव निवासी बिशुनदेव भुइयां ने बताया कि, उनकी पत्नी का दो बार गर्भपात हो गया था। पुत्र प्राप्ति के मोह में ईसाई धर्म स्वीकार करने को कहा गया है और वे धर्मांतरित भी हो गए ।

#धर्मांतरण करने वाले कुछ लोग शहर में किराए के मकान में रहते हैं। साथ हीं अपने आप को ऊंची जाति का हवाला देकर कहते हैं कि, हमने ईसाई धर्म अपना लिया है तो तुम दलित पिछड़े लोग अपनाने से क्यों परहेज कर रहे हो..??
                 इसमें कोई पाप नहीं। लोगों को बताया जाता है कि प्रभु यीशु से तुम्हारा सम्पर्क होगा । घर में सुख शांति आएगी। सभी प्रकार के दर्द पीड़ाएँ दूर होंगी । इसके साथ साथ लोगों को कहा जाता है कि ईसाई धर्म ही बड़ा धर्म है।

तुकबेरा गांव के एक भुईयां परिवार ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक विडियो में स्वीकार किया है कि ईसाई धर्म अपनाने से दर्द पीड़ाएं भूत- प्रेतो से शांति मिलती है। चर्च में गरीबों को मुर्गा भात खिलाकर उन्हे धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। राजहारा कोठी निवासी सुमंत साव के पूरा परिवार ने इसलिए हिन्दू धर्म त्याग कर दिया कि भूत प्रेत से शांति चाहिए थी। जो ईसाई धर्म अपनाने से मिली। जब ईसाई धर्मांतरण से दर्द पीड़ा व भूत-प्रेत से शांति मिलती है तो सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर किया जा रहा करोडो़ का खर्चा बेमानी है।

इस क्षेत्र में #धर्मांतरण कर ईसाई बनाने का खेल वर्षों से चल रहा है। परंतु तीन वर्षों से क्षेत्रों में धर्मांतरण का कार्य हावी है। इससे पूर्व ईसाई बने लोग मेदिनीनगर जाकर रविवार को प्रार्थना करते थे। बढ़ती संख्या को देखते हुए धर्म के दलाल स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित किए। जिसने लालच में आकर प्रत्येक रविवार को सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थना की अनुमति दे दी। पिछले साल 2015 में गांव में एक विशाल गिरजाघर बना दिया गया। जहां प्रत्येक रविवार को प्रार्थना कराई जाती है। साथ ही बाहर से आने वाले फादर या पास्टर अंधविश्वास से जकडे़ लोगों को धर्म अपनाने के बाद मुक्त होने की बात कहते हैं। जिसके बहकावे में लोग आ रहे हैं।

#धर्मांतरण के विरुद्ध #कार्रवाई की मांग

प्रखंड के #अनुसूचित जाति, जन जाति व पिछड़ी जाति के लगभग तीन सौ लोगों ने धर्मातरण कर लिया है। इसके विरुद्ध कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने की है। इनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों ने आदिम जनजाति,अनुसूचित जाति-जनजाति और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को विदेशी धन के बल पर प्रलोभन देकर धर्मांतरित करने का अभियान चलाया है। नावाबाजार थाना क्षेत्र के राजहारा कोठी, तुकबेरा, छतवा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में एक रणनीति के तहत भोले-भाले लोगों को #शिक्षा एवं #स्वास्थ्य सेवा की आड़ में चंगाई करिश्मा दिखाकर #धर्मातरित किया जा रहा है। इसके कारण गांवों का समीकरण बदल गया है। राजहारा जैसे हिन्दू बहुल गांव में चर्च बन गए। प्रशासन अनभिज्ञ बना हुआ है। धर्मातरण से संबंधित संस्था या व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।

नावा बाजार के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक चौपडा ने कहा कि, भूत प्रेत जैसे अंधविश्वास के नाम पर झूठे भ्रम फैलानेवाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में धर्मांतरण की जानकारी नहीं मिली है। संज्ञान में आने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। स्थानीय लोगों से इसकी समुचित जानकारी ली जा रही है।

 स्त्रोत : जागरण

विदेश के फिलॉसफर #नित्शे ने बताया कि मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमें आंतरिक #विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है । इस भयंकर विष का कोई मारण नहीं । #ईसाईत गुलाम, क्षुद्र और #चांडाल का पंथ है । 

 #एच.जी.वेल्स ने भी लिखा था कि दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है रोमन #कैथोलिक चर्च ।  

#डॉ. एनी बेसेन्ट लिखते हैं कि मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मो का अध्ययन करके पाया कि हिन्दू धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म कोई नहीं है ।

2017 साल पुराना, गौ मांस खाने वाला, शराब पीने वाला, छोटे-छोटे बच्चों के साथ कुकर्म करने वाला ईसाई धर्म बड़ा है या सबको सुखी स्वस्थ और सम्मानित जीवन जीने देने वाला सनातन धर्म बड़ा???

आपको बता दें कि अक्टूबर 2016 को #झारखंड के मुख्यमंत्री #रघुवर दास ने कहा था कि कुछ लोग हमारी हिन्दू संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं । लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध है ।

मुख्यमंत्री ने लोगों को कहा कि हिन्दू धर्म और #सनातन #संस्कृति पर चोट या आंच पहुंचाने की कोशिश करने वालों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करो ।

पूरी दुनिया मानती है कि #हिन्दू #धर्म सबसे श्रेष्ठ है और जो उनको ही लालच देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं उनकी तो जेल में ही जगह होनी चाहिये ।
ये मुख्यमंत्री जी ने बिलकुल सही कहा है ।

जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि रोमन #केथोलिक चर्च का एक छोटा राज्य है जिसे वेटिकन सिटी बोलते हैं । अपने धर्म (ईसाई) के प्रचार के लिए वे हर साल करीब​ 17 हजार करोड़ डॉलर खर्च करते हैं । 

वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते हैं ।

रोम शहर में 33% #इलेक्ट्रॉनिक , प्लास्टिक, #एयर लाइन, #केमिकल और इंजीनियरिंग बिजनेस वेटिकन के हाथ में हैं ।

दुनिया में सबसे बड़े #Shares​ वेटिकन के पास हैं ।

इटालियन #बैंकिंग में उनकी बड़ी संपत्ति है और अमेरिका एवं स्विस बैंकों में उनकी बड़ी भारी deposit है । 

ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक #VATICANEMPIRE पढ़े !!

आपको बता दें कि ईसाई पादरी छोटे #बच्चे- बच्चियों के साथ #दुष्कर्म करते हैं लेकिन उनके खिलाफ #मीडिया कुछ नही बोलती बल्कि उनका पक्ष लेती है क्योंकि 90% मीडिया ईसाई मिशनरियों के फंड से चलती है ।

लेकिन जब कोई हिन्दू साधु-संत या हिन्दू संगठन या सरकार भोले-भाले #हिन्दुओं को #पैसा, #दवाई, कपड़े आदि देकर धर्मान्तरण के खिलाफ मुहिम चलाते हैं तो देशद्रोही और बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ देश में एक माहौल बनाकर उनकी छवि को धूमिल कर देते हैं ।

ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगाने और हिंदुओं की घरवापसी कराने वाले #जयेन्द्र सरस्वती, संत #आसारामजी बापू, स्वामी असीमानन्द जैसे अनेक हिन्दू संतों को जेल भेज दिया गया और स्वामी #लक्ष्मणानन्द जी की तो हत्या करवा दी गई । ऐसे जो भी धर्मान्तरण के खिलाफ आवाज उठाता है उनको जेल भेज दिया जाता है या तो हत्या करवा दी जाती है ।
ये देश में बहुत बड़ा #षडयंत्र चल रहा है । हिन्दुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।

#केंद्र_सरकार को आगे आना चाहिये और #धर्मान्तरण के खिलाफ कानून पारित कर देना चाहिए और जो भी धर्मान्तरण करता हुआ पाया जाये उसको आजीवन जेल भेज देना चाहिए जिससे #धर्म #सुरक्षित हो, देश सुरक्षित हो ।

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