Thursday, May 25, 2017

गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून

मां गंगा की महिमा

गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून

गंगा नदी उत्तर भारतकी केवल जीवनरेखा नहीं, अपितु हिंदू धर्मका सर्वोत्तम तीर्थ है । ‘आर्य सनातन वैदिक संस्कृति’ गंगाके तटपर विकसित हुई, इसलिए गंगा हिंदुस्थानकी राष्ट्ररूपी अस्मिता है एवं भारतीय संस्कृतिका मूलाधार है । इस कलियुगमें श्रद्धालुओंके पाप-ताप नष्ट हों, इसलिए ईश्वरने उन्हें इस धरापर भेजा है । वे प्रकृतिका बहता जल नहीं; अपितु सुरसरिता (देवनदी) हैं । उनके प्रति हिंदुओंकी आस्था गौरीशंकरकी भांति सर्वोच्च है । गंगाजी मोक्षदायिनी हैं; इसीलिए उन्हें गौरवान्वित करते हुए पद्मपुराणमें (खण्ड ५, अध्याय ६०, श्लोक ३९) कहा गया है, ‘सहज उपलब्ध एवं मोक्षदायिनी गंगाजीके रहते विपुल धनराशि व्यय (खर्च) करनेवाले यज्ञ एवं कठिन तपस्याका क्या लाभ ?’ नारदपुराणमें तो कहा गया है, ‘अष्टांग योग, तप एवं यज्ञ, इन सबकी अपेक्षा गंगाजीका निवास उत्तम है । गंगाजी भारतकी पवित्रताकी सर्वश्रेष्ठ केंद्रबिंदु हैं, उनकी महिमा अवर्णनीय है ।’
ganga dashahara

मां गंगा का #ब्रह्मांड में उत्पत्ति

‘वामनावतारमें श्रीविष्णुने दानवीर बलीराजासे भिक्षाके रूपमें तीन पग भूमिका दान मांगा । राजा इस बातसे अनभिज्ञ था कि श्रीविष्णु ही वामनके रूपमें आए हैं, उसने उसी क्षण वामनको तीन पग भूमि दान की । वामनने विराट रूप धारण कर पहले पगमें संपूर्ण पृथ्वी तथा दूसरे पगमें अंतरिक्ष व्याप लिया । दूसरा पग उठाते समय वामनके ( #श्रीविष्णुके) बाएं पैरके अंगूठेके धक्केसे ब्रह्मांडका सूक्ष्म-जलीय कवच (टिप्पणी १) टूट गया । उस छिद्रसे गर्भोदककी भांति ‘ब्रह्मांडके बाहरके सूक्ष्म-जलनेब्रह्मांडमें प्रवेश किया । यह सूक्ष्म-जल ही गंगा है ! गंगाजीका यह प्रवाह सर्वप्रथम सत्यलोकमें गया ।ब्रह्मदेवने उसे अपने कमंडलु में धारण किया । तदुपरांत सत्यलोकमें ब्रह्माजीने अपने कमंडलुके जलसे श्रीविष्णुके चरणकमल धोए । उस जलसे गंगाजीकी उत्पत्ति हुई । तत्पश्चात गंगाजी की यात्रा सत्यलोकसे क्रमशः #तपोलोक, #जनलोक, #महर्लोक, इस मार्गसे #स्वर्गलोक तक हुई ।

पृथ्वी पर उत्पत्ति

 #सूर्यवंशके राजा सगरने #अश्वमेध यज्ञ आरंभ किया । उन्होंने दिग्विजयके लिए यज्ञीय अश्व भेजा एवं अपने ६० सहस्त्र पुत्रोंको भी उस अश्वकी रक्षा हेतु भेजा । इस यज्ञसे भयभीत इंद्रदेवने यज्ञीय अश्वको कपिलमुनिके आश्रमके निकट बांध दिया । जब सगरपुत्रोंको वह अश्व कपिलमुनिके आश्रमके निकट प्राप्त हुआ, तब उन्हें लगा, ‘कपिलमुनिने ही अश्व चुराया है ।’ इसलिए सगरपुत्रोंने ध्यानस्थ कपिलमुनिपर आक्रमण करनेकी सोची । कपिलमुनिको अंतर्ज्ञानसे यह बात ज्ञात हो गई तथा अपने नेत्र खोले । उसी क्षण उनके नेत्रोंसे प्रक्षेपित तेजसे सभी सगरपुत्र भस्म हो गए । कुछ समय पश्चात सगरके प्रपौत्र राजा अंशुमनने सगरपुत्रोंकी मृत्युका कारण खोजा एवं उनके उद्धारका मार्ग पूछा । कपिलमुनिने अंशुमनसे कहा, ‘`गंगाजीको स्वर्गसे भूतलपर लाना होगा । सगरपुत्रोंकी अस्थियोंपर जब गंगाजल प्रवाहित होगा, तभी उनका उद्धार होगा !’’ मुनिवरके बताए अनुसार गंगाको पृथ्वीपर लाने हेतु अंशुमनने तप आरंभ किया ।’  ‘अंशुमनकी मृत्युके पश्चात उसके सुपुत्र राजा दिलीपने भी गंगावतरणके लिए तपस्या की । #अंशुमन एवं दिलीपके सहस्त्र वर्ष तप करनेपर भी गंगावतरण नहीं हुआ; परंतु तपस्याके कारण उन दोनोंको स्वर्गलोक प्राप्त हुआ ।’ (वाल्मीकिरामायण, काण्ड १, अध्याय ४१, २०-२१)

‘राजा दिलीपकी #मृत्युके पश्चात उनके पुत्र राजा भगीरथने कठोर तपस्या की । उनकी इस तपस्यासे प्रसन्न होकर गंगामाताने भगीरथसे कहा, ‘‘मेरे इस प्रचंड प्रवाहको सहना पृथ्वीके लिए कठिन होगा । अतः तुम भगवान शंकरको प्रसन्न करो ।’’ आगे भगीरथकी घोर तपस्यासे भगवान शंकर प्रसन्न हुए तथा भगवान शंकरने गंगाजीके प्रवाहको जटामें धारण कर उसे पृथ्वीपर छोडा । इस प्रकार हिमालयमें अवतीर्ण गंगाजी भगीरथके पीछे-पीछे #हरद्वार, प्रयाग आदि स्थानोंको पवित्र करते हुए बंगालके उपसागरमें (खाडीमें) लुप्त हुईं ।’

ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, भौमवार (मंगलवार) एवं हस्त नक्षत्रके शुभ योगपर #गंगाजी स्वर्गसे धरतीपर अवतरित हुईं ।  जिस दिन #गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ के नाम से जाना जाता है । 

जगद्गुरु आद्य शंकराचार्यजी, जिन्होंने कहा है : एको ब्रह्म द्वितियोनास्ति । द्वितियाद्वैत भयं भवति ।। उन्होंने भी ‘गंगाष्टक’ लिखा है, गंगा की महिमा गायी है । रामानुजाचार्य, रामानंद स्वामी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी रामतीर्थ ने भी गंगाजी की बड़ी महिमा गायी है । कई साधु-संतों, अवधूत-मंडलेश्वरों और जती-जोगियों ने गंगा माता की कृपा का अनुभव किया है, कर रहे हैं तथा बाद में भी करते रहेंगे ।

अब तो विश्व के #वैज्ञानिक भी गंगाजल का परीक्षण कर दाँतों तले उँगली दबा रहे हैं ! उन्होंने दुनिया की तमाम नदियों के जल का परीक्षण किया परंतु गंगाजल में रोगाणुओं को नष्ट करने तथा आनंद और सात्त्विकता देने का जो अद्भुत गुण है, उसे देखकर वे भी आश्चर्यचकित हो उठे । 

 #हृषिकेश में स्वास्थ्य-अधिकारियों ने पुछवाया कि यहाँ से हैजे की कोई खबर नहीं आती, क्या कारण है ? उनको बताया गया कि यहाँ यदि किसीको हैजा हो जाता है तो उसको गंगाजल पिलाते हैं । इससे उसे दस्त होने लगते हैं तथा हैजे के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है । वैसे तो हैजे के समय घोषणा कर दी जाती है कि पानी उबालकर ही पियें । किंतु गंगाजल के पान से तो यह रोग मिट जाता है और केवल हैजे का रोग ही मिटता है ऐसी बात नहीं है, अन्य कई रोग भी मिट जाते हैं । तीव्र व दृढ़ श्रद्धा-भक्ति हो तो गंगास्नान व गंगाजल के पान से जन्म-मरण का रोग भी मिट सकता है । 

सन् 1947 में जलतत्त्व विशेषज्ञ कोहीमान भारत आया था । उसने वाराणसी से #गंगाजल लिया । उस पर अनेक परीक्षण करके उसने विस्तृत लेख लिखा, जिसका सार है - ‘इस जल में कीटाणु-रोगाणुनाशक विलक्षण शक्ति है ।’ 

दुनिया की तमाम #नदियों के जल का विश्लेषण करनेवाले बर्लिन के डॉ. जे. ओ. लीवर ने सन् 1924 में ही गंगाजल को विश्व का सर्वाधिक स्वच्छ और #कीटाणु-रोगाणुनाशक जल घोषित कर दिया था । 

‘आइने अकबरी’ में लिखा है कि ‘अकबर गंगाजल मँगवाकर आदरसहित उसका पान करते थे । वे गंगाजल को अमृत मानते थे ।’ औरंगजेब और मुहम्मद तुगलक भी गंगाजल का पान करते थे । शाहनवर के नवाब केवल गंगाजल ही पिया करते थे ।

कलकत्ता के हुगली जिले में पहुँचते-पहुँचते तो बहुत सारी नदियाँ, झरने और नाले गंगाजी में मिल चुके होते हैं । अंग्रेज यह देखकर हैरान रह गये कि हुगली जिले से भरा हुआ गंगाजल दरियाई मार्ग से यूरोप ले जाया जाता है तो भी कई-कई दिनों तक वह बिगड़ता नहीं है । जबकि यूरोप की कई बर्फीली नदियों का पानी हिन्दुस्तान लेकर आने तक खराब हो जाता है । 

अभी रुड़की विश्वविद्यालय के #वैज्ञानिक कहते हैं कि ‘गंगाजल में जीवाणुनाशक और हैजे के कीटाणुनाशक तत्त्व विद्यमान हैं ।’ 

फ्रांसीसी चिकित्सक हेरल ने देखा कि गंगाजल से कई रोगाणु नष्ट हो जाते हैं । फिर उसने गंगाजल को कीटाणुनाशक औषधि मानकर उसके इंजेक्शन बनाये और जिस रोग में उसे समझ न आता था कि इस रोग का कारण कौन-से कीटाणु हैं, उसमें गंगाजल के वे इंजेक्शन रोगियों को दिये तो उन्हें लाभ होने लगा !
संत #तुलसीदासजी कहते हैं :
गंग सकल मुद मंगल मूला । सब सुख करनि हरनि सब सूला ।।
(श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2)

सभी सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर स्थित तीर्थों में पाँच तीर्थ विशेष आनंद-उल्लास का अनुभव कराते हैं : गंगोत्री, हर की पौड़ी (हरिद्वार),  #प्रयागराज त्रिवेणी, काशी और #गंगासागर । #गंगादशहरे के दिन गंगा में गोता मारने से सात्त्विकता, प्रसन्नता और विशेष पुण्यलाभ होता है ।

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Wednesday, May 24, 2017

वटसावित्री व्रत - अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून

वटसावित्री-व्रत
 
वटसावित्री व्रत - अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून 
वट पूर्णिमा : 8 जून

24 मई 2017


यह व्रत ‘स्कंद’ और ‘भविष्योत्तर’ पुराणाेंके अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमापर और ‘निर्णयामृत’ इत्यादि ग्रंथोंके अनुसार अमावस्यापर किया जाता है । उत्तरभारतमें प्रायः अमावस्याको यह व्रत किया जाता है । अतः महाराष्ट्रमें इसे ‘वटपूर्णिमा’ एवं उत्तरभारतमें इसे ‘वटसावित्री’के नामसे जाना जाता है ।
वटसावित्री-व्रत


🚩पतिके सुख-दुःखमें सहभागी होना, उसे संकटसे बचानेके लिए प्रत्यक्ष ‘काल’को भी चुनौती देनेकी सिद्धता रखना, उसका साथ न छोडना एवं दोनोंका जीवन सफल बनाना, ये स्त्रीके महत्त्वपूर्ण गुण हैं । 

🚩सावित्रीमें ये सभी गुण थे । सावित्री अत्यंत तेजस्वी तथा दृढनिश्चयी थीं । आत्मविश्वास एवं उचित निर्णयक्षमता भी उनमें थी । राजकन्या होते हुए भी सावित्रीने दरिद्र एवं अल्पायु सत्यवानको पतिके रूपमें अपनाया था; तथा उनकी मृत्यु होनेपर यमराजसे शास्त्रचर्चा कर उन्होंने अपने पतिके लिए जीवनदान प्राप्त किया था । जीवनमें यशस्वी होनेके लिए सावित्रीके समान सभी सद्गुणोंको आत्मसात करना ही वास्तविक अर्थोंमें वटसावित्री व्रतका पालन करना है ।

🚩वृक्षों में भी भगवदीय चेतना का वास है, ऐसा दिव्य ज्ञान #वृक्षोपासना का आधार है । इस उपासना ने स्वास्थ्य, प्रसन्नता, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं पर्यावरण संरक्षण में बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।

🚩वातावरण में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करने में वटवृक्ष का विशेष महत्त्व है । वटवृक्ष के नीचे का छायादार स्थल एकाग्र मन से जप, ध्यान व उपासना के लिए प्राचीन काल से साधकों एवं #महापुरुषों का प्रिय स्थल रहा है । यह दीर्घ काल तक अक्षय भी बना रहता है । इसी कारण दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, जीवन में स्थिरता तथा निरन्तर अभ्युदय की प्राप्ति के लिए इसकी आराधना की जाती है ।

🚩वटवृक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा सेवा से पाप दूर होते हैं; दुःख, समस्याएँ तथा रोग जाते रहते हैं । अतः इस वृक्ष को रोपने से अक्षय पुण्य-संचय होता है । वैशाख आदि पुण्यमासों में इस वृक्ष की जड़ में जल देने से पापों का नाश होता है एवं नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त होती है । 

🚩इसी वटवृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने पातिव्रत्य के बल से यमराज से अपने मृत पति को पुनः जीवित करवा लिया था । तबसे ‘#वट-सावित्री’ नामक #व्रत मनाया जाने लगा । इस दिन महिलाएँ अपने #अखण्ड #सौभाग्य एवं कल्याण के लिए व्रत करती हैं । 


🚩व्रत-कथा : सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी । द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान से उसका विवाह हुआ था । विवाह से पहले देवर्षि नारदजी ने कहा था कि सत्यवान केवल वर्ष भर जीयेगा । किंतु सत्यवान को एक बार मन से पति स्वीकार कर लेने के बाद दृढ़व्रता सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और एक वर्ष तक पातिव्रत्य धर्म में पूर्णतया तत्पर रहकर अंधेे सास-ससुर और अल्पायु पति की प्रेम के साथ सेवा की । वर्ष-समाप्ति  के  दिन  सत्यवान  और  सावित्री समिधा लेने के लिए वन में गये थे । वहाँ एक विषधर सर्प ने सत्यवान को डँस लिया । वह बेहोश  होकर  गिर  गया । यमराज आये और सत्यवान के सूक्ष्म शरीर को ले जाने लगे । तब सावित्री भी अपने पातिव्रत के बल से उनके पीछे-पीछे जाने लगी । 

🚩यमराज द्वारा उसे वापस जाने के लिए कहने पर सावित्री बोली :
‘‘जहाँ जो मेरे पति को ले जाय या जहाँ मेरा पति स्वयं जाय, मैं भी वहाँ जाऊँ यह सनातन धर्म है । तप, गुरुभक्ति, पतिप्रेम और आपकी कृपा से मैं कहीं रुक नहीं सकती । #तत्त्व को जाननेवाले विद्वानों ने सात स्थानों पर मित्रता कही है । मैं उस मैत्री को दृष्टि में रखकर कुछ कहती हूँ, सुनिये । लोलुप व्यक्ति वन में रहकर धर्म का आचरण नहीं कर सकते और न ब्रह्मचारी या संन्यासी ही हो सकते हैं । 

🚩विज्ञान (आत्मज्ञान के अनुभव) के लिए धर्म को कारण कहा करते हैं, इस कारण संतजन धर्म को ही प्रधान मानते हैं । संतजनों के माने हुए एक ही धर्म से हम दोनों श्रेय मार्ग को पा गये हैं ।’’

🚩सावित्री के वचनों से प्रसन्न हुए #यमराज से सावित्री ने अपने ससुर के अंधत्व-निवारण व बल-तेज की प्राप्ति का वर पाया । 

🚩सावित्री बोली : ‘‘#संतजनों के सान्निध्य की सभी इच्छा किया करते हैं । संतजनों का साथ निष्फल नहीं होता, इस कारण सदैव संतजनों का संग करना चाहिए ।’’

🚩यमराज : ‘‘तुम्हारा वचन मेरे मन के अनुकूल, बुद्धि और बल वर्धक तथा हितकारी है । पति के जीवन के सिवा कोई वर माँग ले ।’’

🚩सावित्री ने श्वशुर के छीने हुए राज्य को वापस पाने का वर पा लिया ।

🚩सावित्री : ‘‘आपने प्रजा को नियम में बाँध रखा है, इस कारण आपको यम कहते हैं । आप मेरी बात सुनें । मन-वाणी-अन्तःकरण से किसीके साथ वैर न करना, दान देना, आग्रह का त्याग करना - यह संतजनों का सनातन धर्म है । संतजन वैरियों पर भी दया करते देखे जाते हैं ।’’

🚩यमराज बोले : ‘‘जैसे प्यासे को पानी, उसी तरह तुम्हारे वचन मुझे लगते हैं । पति के जीवन के सिवाय दूसरा कुछ माँग ले ।’’

🚩सावित्री ने अपने निपूत पिता के सौ औरस कुलवर्धक पुत्र हों ऐसा वर पा लिया ।

🚩सावित्री बोली : ‘‘चलते-चलते मुझे कुछ बात याद आ गयी है, उसे भी सुन लीजिये । आप आदित्य के प्रतापी पुत्र हैं, इस कारण आपको विद्वान पुरुष ‘वैवस्वत’ कहते हैं । आपका बर्ताव प्रजा के साथ समान भाव से है, इस कारण आपको ‘धर्मराज’ कहते हैं । मनुष्य को अपने पर भी उतना विश्वास नहीं होता जितना संतजनों में हुआ करता है । इस कारण संतजनों पर सबका प्रेम होता है ।’’ 

🚩यमराज बोले : ‘‘जो तुमने सुनाया है ऐसा मैंने कभी नहीं सुना ।’’

🚩प्रसन्न यमराज से सावित्री ने वर के रूप में सत्यवान से ही बल-वीर्यशाली सौ औरस पुत्रों की प्राप्ति का वर प्राप्त किया । फिर बोली : ‘‘संतजनों की वृत्ति सदा धर्म में ही रहती है । #संत ही सत्य से सूर्य को चला रहे हैं, तप से पृथ्वी को धारण कर रहे हैं । संत ही भूत-भविष्य की गति हैं । संतजन दूसरे पर उपकार करते हुए प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं रखते । उनकी कृपा कभी व्यर्थ नहीं जाती, न उनके साथ में धन ही नष्ट होता है, न मान ही जाता है । ये बातें संतजनों में सदा रहती हैं, इस कारण वे रक्षक होते हैं ।’’

🚩यमराज बोले : ‘‘ज्यों-ज्यों तू मेरे मन को अच्छे लगनेवाले अर्थयुक्त सुन्दर धर्मानुकूल वचन बोलती है, त्यों-त्यों मेरी तुझमें अधिकाधिक भक्ति होती जाती है । अतः हे पतिव्रते और वर माँग ।’’ 

🚩सावित्री बोली : ‘‘मैंने आपसे पुत्र दाम्पत्य योग के बिना नहीं माँगे हैं, न मैंने यही माँगा है कि किसी दूसरी रीति से पुत्र हो जायें । इस कारण आप मुझे यही वरदान दें कि मेरा पति जीवित हो जाय क्योंकि पति के बिना मैं मरी हुई हूँ । पति के बिना मैं सुख, स्वर्ग, श्री और जीवन कुछ भी नहीं चाहती । आपने मुझे सौ पुत्रों का वर दिया है व आप ही मेरे पति का हरण कर रहे हैं, तब आपके वचन कैसे सत्य होंगे ? मैं वर माँगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जायें । इनके जीवित होने पर आपके ही वचन सत्य होंगे ।’’

🚩यमराज ने परम प्रसन्न होकर ‘ऐसा ही हो’ यह  कह  के  सत्यवान  को  मृत्युपाश  से  मुक्त कर दिया ।

🚩व्रत-विधि : इसमें #वटवृक्ष की पूजा की जाती है । विशेषकर सौभाग्यवती महिलाएँ श्रद्धा के साथ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक अथवा कृष्ण त्रयोदशी से अमावास्या तक तीनों दिन अथवा मात्र अंतिम दिन व्रत-उपवास रखती हैं । यह कल्याणकारक  व्रत  विधवा,  सधवा,  बालिका, वृद्धा, सपुत्रा, अपुत्रा सभी स्त्रियों को करना चाहिए ऐसा ‘स्कंद पुराण’ में आता है । 
🚩प्रथम दिन संकल्प करें कि ‘मैं मेरे पति और पुत्रों की आयु, आरोग्य व सम्पत्ति की प्राप्ति के लिए एवं जन्म-जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट-सावित्री व्रत करती हूँ ।’

🚩वट  के  समीप  भगवान #ब्रह्माजी,  उनकी अर्धांगिनी सावित्री देवी तथा सत्यवान व सती सावित्री के साथ #यमराज का पूजन कर ‘नमो वैवस्वताय’ इस मंत्र को जपते हुए वट की परिक्रमा करें । इस समय वट को 108 बार या यथाशक्ति सूत का धागा लपेटें । फिर निम्न मंत्र से #सावित्री को अर्घ्य दें ।
🚩अवैधव्यं च  सौभाग्यं देहि  त्वं मम  सुव्रते । पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते ।।
🚩निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना कर गंध, फूल, अक्षत से उसका पूजन करें । 
वट  सिंचामि  ते  मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ।। 

🚩#भारतीय #संस्कृति #वृक्षों  में  भी  छुपी  हुई भगवद्सत्ता  का  ज्ञान  करानेवाली,  ईश्वर  की सर्वश्रेष्ठ कृति- मानव के जीवन में आनन्द, उल्लास एवं चैतन्यता भरनेवाली है ।

🚩(स्त्रोत्र : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसाद, जून 2007)

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Tuesday, May 23, 2017

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :"हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है"

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :"हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है"
23 मई 2017

#जोधपुर जेल में हिन्दू संत बापू आसारामजी बिना सबूत 4 साल से बंद हैं । जबसे बापू आसारामजी अंदर गए हैं तबसे लेकर कट्टर हिन्दू संगठन हिन्दू महासभा, हिन्दू जन जागृति समिति आदि आदि ने खूब समर्थन किया लेकिन बड़े-बड़े हिन्दू संगठनों ने चुप्पी साध ली है ।
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जब बापू #आसारामजी बाहर थे तब अटल बिहारी से लेकर प्रधान मंत्री #नरेंद्र_मोदी तक आशीर्वाद लेने आते रहे हैं लेकिन जैसे ही वे #अंतर्राष्ट्रीय #षड्यंत्र के शिकार हुए तो सबने चुप्पी साध ली ।

लेकिन अब बड़े-बड़े #मुस्लिम #धर्मगुरु उनकी रिहाई के लिए आगे आ रहे हैं ।

 #हिंदू_मुस्लिम_एकता_मंच के द्वारा हिन्दू संत बापू आसारामजी की शीघ्र रिहाई और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए 8 मई को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह किया गया और 20 मई 2017 को  प्रेस क्लब नई दिल्ली में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया l
 
उसमें उन्होंने कहा कि #भारतीय #संस्कृति को समाप्त करने के षड्यंत्रों को हमें समझना होगा और  जयचंद एवं मीर जाफर जैसे लोगों से सावधान रहना होगा l पिछले कई वर्षों से #प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल में डाला जा रहा है । 

#शंकराचार्य #जयेंद्र सरस्वती ,स्वामी #नित्यानंद, जगतगुरु #कृपालुजी महाराज, राघेश्वर भारती, आदि अनेक धर्मगुरुओं को साजिश का शिकार बनाया गया है । भारतीय संस्कृति की रक्षा कर , राष्ट्र में अमन शांति भाईचारा बनाए रखने  वाले , कुछ संत और फकीर अनेक कष्टों को सहते हुए सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में लगा रहे हैं l इसी तरह विश्व प्रसिद्ध संत #आसाराम जी बापू का मसला #इंसानियत का आज सबसे बड़ा मसला बन गया है। 

#कार्यक्रम के मुख्य अतिथि #सलीम_कासमी जी ने  कहा," संत आसाराम जी  बापू के मामले में न्यायिक समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है  । आज के दौर में यह #अन्याय का सबसे बड़ा मिसाल बन गया है ।  संत आसाराम जी बापू के मामले में मेरी कई बड़े मुस्लिम संगठनों , बड़े-बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात हुई हैं ।   संत आसाराम जी बापू का अपमान समस्त इंसानियत  पर कहर हैं । हमें अपने #मुल्क की फिक्र है, इसलिए हमने 8 मई को दिल्ली में #सत्याग्रह करके सरकार से संत आसाराम जी बापू की रिहाई की मांग उठाई थी । संत आसाराम जी बापू की रिहाई के लिए हम राष्ट्र जागृति #कार्यक्रम जारी रखेंगे ।

#अलीगढ़ से आए हुए #मुफ्ती डॉक्टर जाहिद #अली खान साहब ने कहा-  हिंदू मुस्लिम धर्मगुरुओं के खिलाफ साजिश को अंजाम देने वाली ताकतों का विरोध करते हैं,और हिंदू मुस्लिम भाईचारे को कायम रखने के लिए हम अपनी जान की बाजी लगा देंगे । संत आसाराम जी बापू का मामला करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है । इसके लिए इंसानियत का सम्मान करने वाली सभी ताकतों को हम एकजुट करेंगे। 

रायपुर से आए हुए गौ कथा वाचक #मोहम्मद फैज खान ने कहा कि हिंदुस्तान की आन बान और शान हमारे संत और फकीर हैं। पूरी दुनिया में पूरी मानवता के कल्याण के लिए संत आसाराम जी बापू ने, अतुलनीय कार्य किये हैं।

नारी रक्षा संगठन की सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व #लेफ्टिनेंट इंडियन नेवी #रुपाली दुबे ने कहा ,"भारत की राजधानी दिल्ली में पूज्य संत आसाराम जी बापू की गिरफ्तारी के बाद बापू जी के  सत्संग के अभाव के कारण दिल्ली में #बलात्कार के मामलें 3 गुना बढ़ गए हैं छेड़खानी  की घटनाएं 6 गुना बढ़ गई हैं । जब देश की राजधानी का यह हाल है तो पूरे देश का क्या हाल होगा?

ऐसे संतों की रिहाई के लिए मानव अधिकार आयोग और वैश्विक नेतृत्व को सामने आना होगा ।

हिन्दू #मुस्लिम एकता मंच के राष्ट्रीय  #महासचिव #एडवोकेट शीराज #कुरेशी जी ने कहा",
संत आसाराम जी बापू वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं I उनके #सत्संग से मत, पंथ , जाति ,संप्रदाय की संकीर्णता को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को ऊंचा उठाने का ज्ञान मिलता है I 

तनावपूर्ण माहौल यहां तक कि गुजरात दंगों के कर्फ्यू में भी बापूजी का सत्संग सफलतापूर्वक आयोजित होते रहे है I पूज्य बापू जी अपने सत्संग में  हिन्दू  मुस्लिम सभी लोगों को भाईचारे से रहना सिखाया है। 

 #स्वामी #विवेकानंद के #वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट के संबोधन के ठीक  100 वर्षों बाद संत आसाराम जी बापू ने वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया I भारत #पाकिस्तान के तनाव के माहौल में भी बापूजी का पाकिस्तान में  सफलतापूर्वक सत्संग आयोजन हुआI 

इस समय राष्ट्र को  संत आसारामजी बापू जैसे संतों के सत्संग की अत्यंत आवश्यकता है, हम सब उनके ऋणी हैं I इसीलिए हमारा राष्ट्रीय दायित्व एवं हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम संत आसाराम जी बापू के सत्संग आयोजन की बाधाओं को शीघ्र अति शीघ्र दूर करें I 

इस बाबत हम अपनी वेदना  सरकार और जनता के सामने प्रकट कर रहे हैं I 
गौरतलब है कि शिकायतकर्ता लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में उसका कौमार्य सुरक्षित पाया गया है और उसके शरीर पर छेड़खानी के कोई निशान नहीं पाए गए हैं I पहले भी कई संत वर्षो बाद निर्दोष साबित हुए है I  

एडवोकेट #विजय साहनी जी ने बताया कि संत आसाराम जी बापू की गिरफ्तारी के दस -बारह  दिन पहले से हम आज तक दिल्ली जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं । संत आशारामजी बापू की रिहाई के लिए हमने सरकार को लाखों लोगों के हस्ताक्षर सहित  ज्ञापन  दिया है I

अब देखते हैं कि #हिन्दूवादी कहलाने वाली #सरकार इन मुस्लिम धर्मगुरुओं की बात पर कितना ध्यान देती है और बिना सबूत 4 साल से जेल में बंद बापू आसारामजी को कब रिहा करती है ???

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Monday, May 22, 2017

पूर्व सचिव समेत 3 अफसरों को कोयला घोटाले में 2 साल की जेल, मिली तुरंत जमानत

पूर्व सचिव समेत 3 अफसरों को कोयला घोटाले में 2 साल की जेल, मिली तुरंत जमानत

🚩22 अप्रैल 2017

🚩आज भी देश की जेलों में करीब 2.78 लाख विचाराधीन कैदी हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो उस अपराध के लिए मुकर्रर सजा से ज्यादा समय जेलों में बिता चुके हैं ।


🚩जो धनी लोग हैं और सत्ता के साथ अपना ताल मेल रखते हैं वो तो पैसे के बल पर तुरन्त जमानत पा लेते हैं लेकिन जो गरीब हैं, झूठे #केस में फंसे हैं उनके लिये न्याय पाना मुश्किल ही नही असंभव जैसा हो गया है ।

🚩ऐसे ही करीब 11 लाख करोड़ रुपये कोयला खदान आवंटन घोटाले का मामला सामने आया है ।

🚩दिल्ली की पटियाला हाउस #कोर्ट स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को कोयला घोटाले में दोषी पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, #कोयला #मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और तत्कालीन निदेशक के सी समारिया को दो साल जेल की सजा सुनायी। हालांकि तीनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर तत्काल #जमानत भी मिल गयी।

🚩 #यूपीए #सरकार के समय #मध्यप्रदेश के थेसगोड़ा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक के आवंटन घोटाले में गुप्ता, क्रोफा, समारिया और कंपनी केएसएसपीएल और उसके प्रबंध निदेशक पवन कुमार आहलूवालिया को #दोषी करार दिया गया था। दो साल जेल की सजा पाए आहलूवालिया को भी कोर्ट से जमानत मिल गयी।
इस कोयला घोटाले से जुड़े ये चार किरदार कौन हैं, इस पर एक रिपोर्ट-

🚩1.एच सी गुप्ता- यह 31 दिसंबर 2005 से नवंबर 2GYह008 तक कोयला सचिव थे। इन्होंने तत्कालीन #पीएम #मनमोहन सिंह के समक्ष कमल स्पॉंज स्टील एंड पावर लिमिटेड (केएसएसपीएल) कंपनी को मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी, जो उस समय आवंटन के नियमों को पूरा नहीं करती थी। सीबीआई ने विशेष अदालत से गुप्ता को धोखाधड़ी और आपराधिक #षडयंत्र के जुर्म में अधिकतम सात साल जेल की मांग की थी। गुप्ता के खिलाफ कोयला घोटाले से जुडे 10 और मामले लंबित हैं, जिन पर अलग से कार्रवाई चल रही है। 

🚩2. के एस क्रोफा- यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव थे। इन्हें भी विशेष कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन में #अनियमितता का दोषी माना है। क्रोफा असम मेघालय कैडर के 1982 बैच के आईएएस अ​धिकारी हैं। फिलहाल यह मेघालय के मुख्य सचिव हैं।  इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 8 मामलों में शामिल होने का आरोप है।

🚩3. के सी समारिया- यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन निदेशक थे। कोयला ब्लॉक आवंटन में य​ह भी दोषी माने गए हैं। इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 6 मामलों में संलिप्त होने का आरोप है।

🚩4. पवन कुमार आहलूवालिया- यह कोयला घोटाले में शामिल कंपनी केएसएसपीएल के प्रबंध निदेशक हैं। इनकी कंपनी के सतना और जयपुर में कार्यालय हैं।

🚩केवल कोयला घोटाले के अपराधियों को ही जमानत मिल गई ऐसा नही है घोटाले - #बोफोर्स_घोटाला - 64 करोड़ रुपये, #यूरिया_घोटाला - 133 करोड़ रुपये, #चारा_घोटाला - 950 करोड़ रुपये, #शेयर_बाजार_घोटाला - 4000 करोड़ रुपये, #सत्यम_घोटाला - 7000 करोड़ रुपये, #स्टैंप_पेपर_घोटाला - 43 हजार करोड़ रुपये, #कॉमनवेल्थ_गेम्स_घोटाला - 70 हजार करोड़ रुपये, #2जी_स्पेक्ट्रम_घोटाला - 1 लाख 67 हजार करोड़ रुपये, अनाज_घोटाला - 2 लाख करोड़ रुपए (#अनुमानित), विजय माल्या 9000 करोड़ घोटाला आदि के सभी आरोपी बाहर स्वतंत्र घूम रहे हैं ।

🚩लेकिन दूसरी ओर  हिन्दू संस्कृति की रक्षा करने वाले, शंकराचार्य अमृतानन्द, कर्नल पुरोहित, संत आसारामजी बापू, श्री नारायण साई, श्री धनंजय देसाई आज भी बिना सबूत सालों से जेल में बंद हैं ।

🚩इसे तो यही पता चल रहा है कि पूर्व जजों ने जो सवाल उठाये थे कि न्यायप्रणाली में भ्रष्टाचार व्याप्त है वे सही हैं ।

🚩सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस खरे ने कहा है कि आपके पास पैसे नही हैं तो कोर्ट के तरफ भूलकर भी नही देखना।

🚩सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश काटजू ने कहा था कि भारतीय #न्याय_प्रणाली में 50% जज भ्रष्ट हैं ।

🚩सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष_हेगड़े भी सवाल उठा चुके हैं कि ‘धनी और प्रभावशाली’ तुरंत जमानत हासिल कर सकते हैं ।

🚩कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस के एल मंजूनाथ ने कहा कि यहाँ सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए कोई स्थान नहीं है और इस देश में न्याय के लिए कोई जगह नहीं ।

🚩भारत की जेलों में कई सालों से बिना सबूत बहुत सारे निर्दोष लोग बन्द हैं, उनकी कोर्ट में कोई सुनवाई नही हो रही है और न ही उनको जमानत मिल पा रही है, लेकिन किसी भी नेता, अभिनेता, पत्रकारों और अमीरों को सजा होने का बाद तुरंत जमानत हासिल हो जाती है ।

🚩इसलिये आज न्याय प्रणाली से जनता का भरोसा उठ गया है ।

🚩आरोप साबित होने पर भी कई बड़ी हस्तियाँ बाहर घूम रही हैं और अभी तक जिन पर आरोप साबित नही हुआ है वो जेल में हैं । पूर्ण रूप से अब ये समझा जाता है कि मीडिया और #पॉलिटिक्स की आपस में मिलीभगत के कारण न्यायप्रणाली में भी भ्रष्टाचार व्याप्त हो चुका है ।

🚩जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि निर्दोषों के लिए न्याय प्रणाली #भ्रष्ट मुक्त होकर शीघ्र निर्णय कब लेगी ???

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