Saturday, December 31, 2016

क्या आप 1 जनवरी के नववर्ष का इतिहास जानते हो...???

क्या आप 1 जनवरी के नववर्ष का इतिहास जानते हो...???

नव वर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष ) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष मनाना पसन्द नही आ रहा था इसलिए उसने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व 46 इस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था ।
Do You Know Real History of New Year Celebration

उसके बाद ईसाई समुदाय उनके देशों में 1 जनवरी से नववर्ष मनाने लगे ।

हमारे महान भारत में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की 1757 में  स्थापना की । उसके बाद भारत को 190 साल तक गुलाम बनाकर रखा गया। इसमें वो लोग लगे हुए थे जो हमारे ऋषि मुनियों की प्राचीन संस्कृति को मिटाने में कार्यरत थे। लॉड मैकाले ने सबसे पहले भारत का इतिहास बदलने का प्रयास किया जिसमें गुरुकुलों में हमारी वैदिक शिक्षण पद्धति को बदला गया ।

हमारा प्राचीन इतिहास बदला गया जिसमें हम अपने मूल इतिहास को भूल गये  और हमें अंग्रेजों के गुलाम बनाने वाले इतिहास याद रह गया और आज कई भोले-भाले भारतवासी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष नही मनाकर 1 जनवरी को ही नववर्ष मनाने लगे ।

हद तो तब हो जाती है कि एक दूसरे को नववर्ष की बधाई देने लग जाते हैं ।

क्या ईसाई देशों में हिन्दुओं को हिन्दू नववर्ष की बधाई दी जाती है..???

किसी भी ईसाई देश में हिन्दू नववर्ष नहीं मनाया जाता है फिर हमारे भोले भारतवासी उनका नववर्ष क्यों मनाते हैं?

यह आने वाला नया वर्ष 2017 अंग्रेजों अर्थात ईसाई धर्म का नया साल है।

मुस्लिम का नया साल होता है और वो हिजरी कहलाता है इस समय 1437 हिजरी चल रही है।

हिन्दू धर्म का इस समय विक्रम संवत 2073 चल रहा है।

इससे सिद्ध हो गया कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना धर्म है । 

इस विक्रम संवत से 5000 साल पहले इस धरती पर भगवान विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए । उनसे पहले भगवान राम, और अन्य अवतार हुए यानि कहाँ करोडों वर्ष पुराना हमारा सनातन धर्म और कहाँ हम 2000 साल पुराना नव वर्ष मना रहे हैं!

जरा सोचिए....!!!

सीधे-सीधे शब्दों में हिन्दू धर्म ही सब धर्मों की जननी है। 

यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं है परन्तु  सभी भारतवासियों को बताना चाहते हैं कि इस इंग्लिश कैलेंडर के बदलने से हिन्दू वर्ष नहीं बदलता!

 जब बच्चा पैदा होता है तो पंडित जी उसका नामकरण हिन्दू कैलेंडर से नहीं करते, हिन्दू पंचांग से किया जाता है । ग्रहदोष भी हिन्दू पंचाग से देखे जाते हैं और विवाह,जन्मकुंडली आदि का मिलान भी हिन्दू पंचाग से ही होता है । सारे व्रत त्यौहार हिन्दू पंचाग से आते हैं। मरने के बाद तेरहवाँ भी हिन्दू पंचाग से ही देखा जाता है।

मकान का उद्घाटन, जन्मपत्री, स्वास्थ्य रोग और अन्य सभी समस्याओं का निराकरण भी हिन्दू कैलेंडर {पंचाग} से ही होता है।

आप जानते हैं कि रामनवमी, जन्माष्टमी, होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ, एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा सभी विक्रमी संवत कैलेंडर से ही निर्धारित होते हैं  |
 इंग्लिश कैलेंडर में इनका कोई स्थान नहीं होता।

सोचिये! फिर आपके इस सनातन धर्म के जीवन में इंग्लिश नववर्ष या कैलेंडर का स्थान है कहाँ ? 

अतः हिन्दू अपने सनातन धर्म के नव वर्ष को ही मनायें ।


एक देशभक्त ने लिखा है कि..

अपने मन को समझाऊँ कैसे..?
आज मंगलगीत मैं गाऊँ कैसे..?
भगत सिंह को फाँसी पर चढ़ा दिया जिन्होंने,
मैं उनका नववर्ष मनाऊँ कैसे..?

एक कवि ने क्या खूब कहा है कि...

 हवा लगी पश्चिम की , सारे कुप्पा बनकर फूल गए ।
ईस्वी सन तो याद रहा , पर अपना संवत्सर भूल गए ।।
चारों तरफ नए साल का , ऐसा मचा है हो-हल्ला ।
बेगानी शादी में नाचे , जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।
धरती ठिठुर रही सर्दी से , घना कुहासा छाया है ।
कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है ।।
सूनी है पेड़ों की डालें , फूल नहीं हैं उपवन में ।
पर्वत ढके बर्फ से सारे , रंग कहां है जीवन में ।।
बाट जोह रही सारी प्रकृति , आतुरता से फागुन का ।
जैसे रस्ता देख रही हो , सजनी अपने साजन का ।।
लिए बहारें आँचल में , जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।
फूलों का श्रृंगार करके , धरती दुल्हन बन जाएगी ।।
मौसम बड़ा सुहाना होगा , दिल सबके खिल जाएँगे ।
झूमेंगी फसलें खेतों में , हम गीत खुशी के गाएँगे ।।
उठो खुद को पहचानो , यूँ कबतक सोते रहोगे तुम ।
चिन्ह गुलामी के कंधों पर , कबतक ढोते रहोगे तुम ।।
अपनी समृद्ध परंपराओं का , आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।
आर्यवृत के वासी हैं हम , अब अपना नववर्ष मनाएंगे ।।

Friday, December 30, 2016

यह अंग्रेजी नववर्ष, हमारे दिव्य संस्कारों को खा गया !!

यह अंग्रेजी नववर्ष, हमारे दिव्य संस्कारों को खा गया!!


क्या विडम्भना है भारत की,देख चित घबराता है!
हिन्दू ही भूल गये, नया साल कब आता है!!
शराब, माँस का भोग लगाता, एक त्यौहार आ गया!
यह अंग्रेजी नववर्ष,हमारे संस्कारों को खा गया!!
Add caption

अपनी संस्कृति से अपरिचित भ्रमित हिंदुओं द्वारा ही 31 दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को "हैपी न्यू ईयर" कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दी जाती हैं।

वास्तविकता में भारतीय संस्कृति के अनुसार चैत्र-प्रतिपदा ही हिंदुओं के नववर्ष का दिन है । लेकिन भारतीय वर्षारंभ के दिन चैत्र प्रतिपदा पर एक-दूसरे को शुभकामनायें देने वाले हिंदुओं के दर्शन अब दुर्लभ हो गए हैं ।

ऋषि मुनियों के देश भारत में 31 दिसम्बर को त्यौहार के नाम पर शराब और कबाब उड़ाना, डांस पार्टी आयोजित करके बेशर्मी का प्रदर्शन करना क्या हम हिंदुओं को शोभा देता है..???

भारतवासी जरा सोचे!

जिन अंग्रेजो ने हमें 200 साल तक गुलाम बनाये रखा, हमारे पूर्वजों पर अत्याचार किया, सोने की चिड़िया कहलाने वाले हमारे भारत को लूटकर ले गए, हमारी वैदिक शिक्षा पद्धति को खत्म कर दिया उनका नया वर्ष मनाना कहाँ तक उचित है..???

जो अंग्रेज हमारे भारत पर 200 साल राज करने के बाद भी,हमारा एक भी त्यौहार नहीं मनाते तो हम उनका त्यौहार क्यों मना रहे हैं..??? 

S.O Chem की रिपोर्ट के अनुसार
14 से 19 वर्ष के बच्चें इन दिनों में शराब का जमकर सेवन करते हैं। जिससे शराब की खपत तीन गुना बढ़ जाती है |

आँकड़े बताते हैं कि अमेरिका व यूरोप में भारत से 10 गुणा ज्यादा दवाईयां खर्च होती हैं ।

वहाँ मानसिक रोग इतने बढ़ गए हैं कि हर दस अमेरिकन में से एक को मानसिक रोग होता है । दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी हैं कि हर छः सेकंड में एक बलात्कार होता है और हर वर्ष लगभग 20 लाख से अधिक कन्याएँ विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाती हैं । वहाँ पर 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं । AIDS की बीमारी दिन दुगनी रात चौगुनी फैलती जा रही है | वहाँ के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में क्रोध, कलह, असंतोष,संताप, उच्छृंखता, उद्यंडता और शत्रुता का महा भयानक वातावरण छाया रहता है ।

विश्व की लगभग 4% जनसंख्या अमेरिका में है । उसके उपभोग के लिये विश्व की लगभग 40% साधन-सामग्री (जैसे कि कार, टी वी, वातानुकूलित मकान आदि) मौजूद हैं फिर भी वहाँ अपराधवृति इतनी बढ़ी है कि हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी होती है, 1 लाख व्यक्तियों में से 425 व्यक्ति कारागार में सजा भोग रहे हैं। 


31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर दारू पीते हैं। हंगामा करते हैं ,रात को दारू पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस व प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता है और 1 जनवरी से आरंभ हुई ये घटनाएं सालभर में बढ़ती ही रहती हैं ।

जबकि भारतीय नववर्ष नवरात्रों के व्रत से शुरू होता है घर-घर में माता रानी की पूजा होती है।शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है। 
चैत्र प्रतिपदा के दिन से महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुवात, भगवान झूलेलाल का जन्म,
नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध है। 

⛳
ऐसे भोगी देश का अन्धानुकरण न करके युवा पीढ़ी अपने देश की महान संस्कृति को पहचाने।

1जनवरी में नया कलैण्डर आता है। लेकिन
चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व ,विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग। 

स्वयं सोचे कि क्यों मनाये हम एक जनवरी को नया वर्ष..???

केवल कैलेंडर बदलें अपनी संस्कृति नही...!!!

रावण रूपी पाश्‍चात्य संस्कृति के आक्रमणों को नष्ट कर, चैत्र प्रतिपदा के दिन नववर्ष का विजयध्वज अपने घरों व मंदिरों पर फहराएं।

अंग्रेजी गुलामी तजकर ,अमर स्वाभिमान भर ले हम!
हिन्दू नववर्ष मनाकर खुद में आत्मसम्मान भर ले हम!!

 


Thursday, December 29, 2016

धुलागढ़ दंगा के समय पुलिस ने हिन्दुओं से कहा, दो मिनट में घर से भाग जाओ !

धुलागढ़ दंगा के समय पुलिस ने हिन्दुओं से कहा, दो मिनट में घर से भाग जाओ!

पश्च‍िम बंगाल के हावड़ा के पास स्थित धुलागढ़ में दंगा हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन लोगों में भय अब भी बना हुआ है। हिंसक भीड़ के हमलों से तमाम लोग बेघर हो गए हैं और अब भी अपने घरों में लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं । 
धुलागढ़ दंगा के समय पुलिस ने हिन्दुओं से कहा, दो मिनट में घर से भाग जाओ ! 

राज्य सरकार के सचिवालय से महज 20 कि.मी की दूरी पर स्थित इस छोटा-से कस्बे में आज हर तरफ जले और टूटे हुए घर दिख रहे हैं । तमाम लोग यह इलाका छोड़कर भाग चुके हैं । धुलागढ़ दंगों पर जमकर राजनीति हो रही है, लेकिन इस उन्मादी हिंसा में सबकुछ गंवा देने वालों की मदद के बारे में कोई नहीं सोच रहा ।

रामपद मन्ना और उनकी पत्नी सीमा उन कुछ लोगों में से हैं, जो किसी तरह हिम्मत जुटाकर अपने घर वापस आ गए हैं । सीमा बेसब्री से यह देखने में लगी हैं कि उनके घर में कुछ बचा भी है या नहीं । रामपद बताते हैं, 'अब हम यहां नहीं रह सकते, इसलिए हमने अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है । उस दिन पुलिस आई तो थी, लेकिन जब हमारे ऊपर हमला हुआ, तो पुलिस भी भाग खड़ी हुई । तीन सदस्यों के परिवार का पेट पालने वाले मन्ना नाई हैं । दंगे के दिन हिंसक भीड़ ने उनके गेट को तोड़ दिया और घर को तहस-नहस कर दिया । सीमा ने कहा, 'हम बहुत गरीब हैं । हमने अपने बेटे की पढ़ाई के लिए बड़ी मुश्किल से एक लैपटॉप खरीदा था, जिसे दंगाई उठा ले गए। यही नही, उन्होंने हमारे 65,000 रुपये भी लूट लिए जो हमने एलआईसी में जमा करने के लिए रखे थे ।'

पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे !!

बनर्जी पाड़ा में स्थित मन्ना के घर के बगल में ही मंडल परिवार रहता है । दो बच्चों की मां मैत्री मंडल कहती हैं कि 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाते हुए हिंसक भीड़ उनके बेडरूम में आ गई और उनका मकान जला दिया । उन्होंने रोते हुए कहा, ' मेरा बेटे को इस फरवरी में बोर्ड का एग्जाम देना है, लेकिन उन्होंने सब कुछ तबाह कर दिया । उसकी सभी किताबें जलकर नष्ट हो गई हैं । मेरा बेटा तबसे सदमे में है ।'

देर से पहुंची पुलिस!!

मैत्री ने बताया, 'पांच घंटे तक वे (दंगाई) उपद्रव करते रहे और पुलिस तब आई जब हमारा सबकुछ नष्ट हो चुका था । एक भी मंत्री हमारा हाल जानने नहीं आया ।' राजनीति तो सभी कर रहे हैं, लेकिन दंगापीड़‍ितों की मदद के लिए कोई सामने नहीं आ रहा। राज्य सरकार ने पीड़ितों के लिए महज 35,000 रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह बेहद कम है । दंग के बाद से धुलागढ़ में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात हैं और लोगों की आवाजाही पर अंकुश लगाया गया है । अभी कोई नहीं बता पा रहा है कि 12 दिसंबर को मुस्लिमों का त्यौहार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाए जाने के बाद आख‍िर दंगों की शुरुआत कैसे हुई, लेकिन दंगा रोकने में पुलिस की नाकामी को लेकर हर तरफ आक्रोश है ।

तमाशबीन बनी पुलिस ने घर छोड़ने को कहा!!

दिलीप खन्ना को जब यह पता चला कि दंगाई गांव के करीब पहुंच गए हैं तो उन्होंने खुद को एक कमरे के अंदर बंद कर लिया । उन्होंने बताया, 'जब पुलिस आई, तो उसने हम सबसे कहा कि दो मिनट में घर छोड़कर निकल जाओ ! वे तो दंगाइयों को हमारे घर तहस-नहस करने से भी नहीं रोक पाए । दंगाई मकान लूटते और जलाते रहे, जबकि पुलिस खड़े होकर तमाशा देखती रही ।' उनकी 32 वर्षीय पड़ोसी शुभ्रा भी अपनी जान बचाने के लिए घर से भाग गई थी । दंगाइयों ने उनके घर का एक हिस्सा जला दिया है, जिससे उन्हें एक मंदिर में शरण लेनी पड़ी है । उन्होंने बताया, 'उनके हाथ में पेट्रोल और केरोसीन के ड्रम थे और वे पूरी तरह से तैयार होकर आए थे 
 हमारे जेवरात और पैसे लूटने के बाद उन्होंने सबकुछ जलाकर खाक कर दिया । अब हम कहां जाएं ।'

धूलागढ़ से लौटकर वहां के हालात स्थानीय पत्रकार कल्पना प्रधान की ज़ुबानी: मैं जब धूलागढ़ गांव पहुंची तो मैंने देखा कि वहां लोग बहुत डरे हुए हैं । काफी जोर देकर बुलाने के बाद ही कोई चेहरा दिखाने के लिए तैयार हुआ । गांवों में ज्यादातर महिलाएं ही दिखी।

पहले जो गांव मिलता है, वह हिंदुओं का है । वहां जितने भी लोग थे, मैंने उनसे बात की । वहां कई घरों और दुकानों को जलाया गया था । रास्ते में कांच के टुकड़े बिखरे हुए थे ।

वहां बम से हमला किया गया था और बम के टुकड़े अब भी इसकी गवाही दे रहे थे जिसपर रस्सियां बंधी हुई थी।

एक गांव है जहां हिंदुओं की आबादी है । लेकिन गांव हिन्दू और मुसलमानों के बीच बंटा हुआ है । गांव के पिछले हिस्से में हिन्दू परिवार रहते हैं ।

ताजा हाल ये है कि लोग अपने घरों में लौटने से डर रहे हैं ।  दोपहर में मैंने पुलिस से बात की तो उनका कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है ।

लेकिन जब मैंने गांव के लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि उनके घर जला दिए गए हैं और टूट गए हैं तो वे वहां कैसे रह पाएंगे ।

दिन के समय में वे अपने घरों को देखने के लिए लौटे हैं । लेकिन रात का वक्त वहां नहीं गुजार सकते क्योंकि वे काफी खौफजदा हैं ।

पुलिस जवान ने कहा कि लोग लौट कर आ रहे हैं लेकिन समस्या हो रही है । लोग डरे हुए हैं । उनके पास घर नहीं हैं । उनके घर जल गए हैं ।

एक महिला ने अपना नाम नहीं बताया लेकिन उन्होंने उस दिन अपने ऊपर हुए जुल्म को बयां किया । उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनका और उनके बच्चे का गला दबाया, उनके पति के गले पर चाकू लगाकर धमकाया और ईंट और बम फेंककर हमला किया । 

तनाव अब भी बरकरार है !!

पुलिस तो तब से चुप ही है । राज्य सरकार ने इस इलाके में विपक्षी दलों के नेताओं और मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी है 
 कांग्रेस, बीजेपी और माकपा के प्रतिनिधिमंडल को कई किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया । 

जो सेक्युलर नेता अल्पसंख्यक मुस्लिमों और ईसाई समुदाय के लिए छाती पीटते है वो क्या अभी हिन्दुओं को अपना घर, सामान, पैसा और न्याय दिलवाने के लिए आगे आयेगे...???

Wednesday, December 28, 2016

सनबर्न फेस्टिवल को स्थगित करने के लिए अनेक हिन्दू संगठनों ने मांग उठाई है !!

हिन्दू संस्कृति को नष्ट करने वाल सनबर्न यदि रद्द नहीं किया गया, तो तीव्र आंदोलन करेंगे – शिवसेना

पिंपरी (पुणे) : नशीले पदार्थों का दुरुपयोग तथा अनैतिक कृत्यों वाला, भारतीय संस्कृति भ्रष्ट बनानेवाला तथा युवा पीढ़ी को दूषित करनेवाला सनबर्न फेस्टिवल  28 से 31 दिसंबर 2016 तक पुणे में होनेवाले सनबर्न फेस्टिवल को स्थगित करने के लिए अनेक हिन्दू संगठनों ने मांग उठाई है ।


पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका शिक्षा मंडल के सदस्य एवं शिवसेना के श्री. गजानन चिंचवडे ने बताया कि हिन्दू संस्कृति का दर्शन करानेवाले पुणे नगर में ‘सनबर्न फेस्टिवल’ समान कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है । पुणे की संस्कृति को बिगाड़नेवाला कार्यक्रम नहीं होने देंगे । यदि शासन द्वारा ‘सनबर्न फेस्टिवल’ रद्द नहीं किया गया, तो केसनंद गांव में एवं अन्यत्र भी हम तीव्र आंदोलन करेंगे । यदि भविष्य में भी संंस्कृति विनाशक कोई कार्यक्रम होंगे, तो वह भी नहीं होने देंगे । 
Azaad BHarat For the Sake of indian Culture Demand to Ban Sunburn Festival in pune

केसनंद (जिला पुणे) में आयोजित ‘सनबर्न फेस्टिवल’ कार्यक्रम तत्काल रद्द करने तथा मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार मस्जिदों पर लगाए गए अवैध भोंगे बंद करने की मांगों के लिए विविध हिन्दुत्वनिष्ठ एवं सामाजिक संगठनों ने यहां के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले के पास राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया गया । 

इस आंदोलन में शिववंदना उपक्रम के श्री. उमेश पवार, शिवप्रतिष्ठान के श्री. गणेश भुजबळ, अधिवक्ता श्री. पडवळेमामा, देहूरोड के धर्माभिमानी श्री. गाडगीळ, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. अभिजीत देशमुख एवं सनातन संस्था के श्री. चंद्रशेखर तांदळे के साथ 100 से अधिक धर्माभिमानी सम्मिलित हुए थे ।

अधिवक्ता श्री. पडवळेमामा ने कहा कि ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को गोवा से हटाया गया है । इस फेस्टिवल में युवकों को नशीली पदार्थ देकर व्यसनाधीनता की ओर ढकेला जाता है । इस प्रकार का पाश्‍चात्त्य संस्कृति का अंधानुकरण पुणे में नहीं चलेगा । एक ओर श्री गणेशचतुर्थी को रात्रि 10 बजे ध्वनिक्षेपक बंद करवाए जाते हैं; परंतु सनबर्नसमान कार्यक्रम को रात्रि 12 बजे आरंभ होता है, यह कहां तक उचित है ? कानून सभी के लिए समान होना चाहिए । यदि इस कार्यक्रम को नहीं रोका गया, तो हमें अलग विचार करना पड़ेगा ।

मस्जिदों से ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंगों पर कार्यवाही करनी चाहिए ! 

श्री. अभिजीत देशमुख ने कहा कि शासन द्वारा अथवा हिन्दुओं के त्यौहार के अवसर पर आवाज का बंधन लगाया जाता है; परंतु अन्य धर्मियों को समय एवं आवाज पर बंधन नहीं लगाया जाता । यह त्रूटिपूर्ण है । इसलिए मस्जिद से ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंगों पर कार्यवाही करनी चाहिए तथा विद्या का मायका कहलानेवाले पुणे नगर से सनबर्न समान कार्यक्रम हटाए जाने चाहिए ।

भारत भोंगामुक्त करना चाहिए एवं ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को भारत से हटा देना चाहिए ! 

नागरिकों कोे अपने क्षेत्र के मस्जिदों पर के अवैध भोंगों के विरुद्ध वैधानिक रूप से परिवाद प्रविष्ट करना चाहिए । इन भोंगों द्वारा दी जानेवाली अजान हमें सहन करने की आवश्यकता नहीं है । हम इस आंदोलन के माध्यम से पूरे देश को भोंगामुक्त भारत का संदेश देंगे । ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के माध्यम से किए जानेवाले व्यसनों से युवक-युवतियों को रोकना चाहिए । ‘सनबर्न फेस्टिवल’ पुणे से ही नहीं, अपितु भारत से हटा देना चाहिए । इस के माध्यम से किए जानेवाले अनाचारों पर ध्यान देकर शासन को उचित कार्यवाही करनी चाहिए ।

इस अवसर पर सनातन संस्था के श्री. चंद्रशेखर तांदळे ने प्रतिपादित किया कि सनबर्न पाश्‍चात्त्य कार्यक्रम हिन्दुओं का तेजोभंग करनेवाला है । उसे रद्द करें ।

स्वतंत्रतावीर सावरकर प्रतिष्ठान की श्रीमती वर्षा देशपांडे ने कहा कि, देश को स्वतंत्रता तो मिल गई; परंतु क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ? अभी भी हम अनेक पश्‍चिमी परंपराआें के मानसिक परतंत्र हैं । भारतीय संस्कृति महान है तथा हमें प्राचीन परंपरा प्राप्त है। अतः हिन्दू संस्कृति की महान धरोहर को ध्यान में रखते हुए हमें नया वर्ष 1 जनवरी को मनाने के बजाय उसे गुढी पाडवा के दिन ही मनाना चाहिए ।

पूर्व प्रधानाध्यापिका श्रीमती लता कोल्हटकर ने कहा कि, पश्चमियों के तथा हम भारतीयों के वातावरण में बहुत बड़ा अंतर है । भारतीय संस्कृति में गुढीपाडवा की अवधि में वातावरण में अनेक अच्छे परिवर्तन होते हैं । इस अवधि में वृक्षों को बहार आती है । इसकी अपेक्षा पश्‍चिमी संस्कृति में ऐसा कुछ नहीं होता । होली, रंगपंचमी, दीपावली जैसे हमारे प्रत्येक त्यौहार का धर्मशास्त्रीय आधार है । हिन्दुआें को गुढीपाडवा के दिन ही नववर्ष की शुभकामनाएं देनी चाहिए।

अभिनेता शरद पोंक्षे ने कहा कि,सनबर्न फेस्टिवल में गुटखा, साथ ही नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है । पुणे जैसी पुण्यनगरी में इस प्रकार का फेस्टिवल होना अत्यंत अयोग्य है । महाराष्ट्र में इस प्रकार के फेस्टिवल होने से युवा पीढ़ी की हानि होगी । भारतीय संस्कृति इस प्रकार के फेस्टिवल से कभी भी सहमत नहीं होगी । अतः इस प्रकार के फेस्टिवल के लिए अनुमति देने की आवश्यकता ही नहीं है । इसका सभी स्तरों द्वारा विरोध किया जाना आवश्यक है ।

सनबर्न कार्यक्रम में भारी मात्रा में नशीली पदार्थों का सेवन किया जाता है । इससे पूर्व गोवा में संपन्न सनबर्न कार्यक्रमों में नशीली पदार्थ विरोधी दल द्वारा छापा मारने के पश्चात वहां अनेक स्थान पर युवक-युवतियां सार्वजनिक रूप से हुक्का तथा चिलिम का एवं अस्थाई प्रसाधनगृहों में नशीली पदार्थों का सेवन करते हुए दिखाई दिए थे ।

‘सनबर्न’ कार्यक्रम को भारी मात्रा में संस्कृतिप्रेमियों का विरोध हो रहा है । इसलिए संस्कृतिप्रेमी एवं हिन्दुत्वनिष्ठों ने सुसंस्कृति को कलंकित करनेवाले इस कार्यक्रम को ही रद् करने की मांग की है ।

भाजपा सरकार द्वारा जनता संस्कृतिहीन बनेगी, ऐसा कार्यक्रम रखना अपेक्षित नहीं है ! ऐसे कार्यक्रमों से राजस्व मिलने से भौतिक विकास होगा; परंतु जनता की अवनति होगी । ऐसा विश्वास क्यों नही है कि यदि संस्कृति की रक्षा की गई, तो ईश्‍वर विकास के लिए राजस्व की कमी नहीं होने देगा ?

Tuesday, December 27, 2016

रेप के झूठे केस में फंसाता था ये गिरोह, महिला वकील भी थी गैंग में शामिल..!!

रेप के झूठे केस में फंसाता था ये गिरोह, महिला वकील भी थी गैंग में शामिल..!!

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसाकर पैसे ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है ।

 एसओजी ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है । गिरोह के तार गैंगस्टर आनंदपाल और उसके वकील से जुड़े हुए हैं । गैंग में कथित तौर पर एक महिला वकील भी शामिल है ।
Azaad-Bharat-false-rape-cases-by-gang-female-lawyer-was-involved-in-the-gang

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्त में आए आरोपियों के नाम अक्षत शर्मा और विजय शर्मा हैं । इस गिरोह ने महज ढाई साल के अंदर 25 लोगों को अपना शिकार बनाकर उनसे 15 करोड़ रुपये ऐंठे हैं । यह गिरोह कॉल गर्ल के जरिए अमीर लोगों को अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करता था । पुलिस की माने तो इनके गैंग में एक एनआरआई युवती भी शामिल है ।

गिरोह में शामिल कॉल गर्ल पहले अमीर लोगों से दोस्ती करती और नजदीकियों का फायदा उठाकर यह लोग उनके अश्लील वीडियो बना लेते थे । जिसके बाद शुरु होता था ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल । गिरोह का सरगना एडवोकेट नवीन देवानी है, जो गैंगस्टर आनंदपाल और अनुराधा चौधरी का वकील है ।

एसओजी के एडिशनल एसपी करण शर्मा ने बताया कि गिरोह में एनआरआई युवती के साथ कुछ वकील, बिजनेसमैन और आपराधिक गिरोह से जुड़े लोग भी शामिल हैं । एसओजी ने यह पूरा खुलासा जयपुर के एक नामी डॉक्टर सुनीत सोनी की शिकायत पर किया है । सोनी भी इस गिरोह की कारगुजारियों का शिकार हो चुके हैं और झूठे रेप केस की शिकायत पर 75 दिनों के लिए जेल भी जा चुके हैं ।

गिरोह के सदस्य डॉक्टर सोनी से बयान बदलने के नाम पर एक करोड़ रुपये भी वसूल कर चुके हैं । जिसके बाद हिम्मत दिखाते हुए डॉक्टर सोनी ने एसओजी से मामले की शिकायत की थी । एसपी करण शर्मा ने कहा कि गिरोह के सदस्य खुद को मीडिया से जुड़ा भी बता रहे हैं । फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में पता लगा रही है ।

निर्भया कांड के बाद नारियों की सुरक्षा हेतु बलात्कार-निरोधक नये कानून बनाये गये । परंतु दहेजरोधी कानून की तरह इनका भी भयंकर दुरुपयोग हो रहा है ।

आज निर्दोष प्रतिष्ठित व्यक्तियों से लेकर आम जनता तक सभी रेप कानूनों के दुरुपयोग के शिकार हो रहे हैं । 

महिला-सुरक्षा के लिए बनाये गये कानून महिलाओं के लिए ही घातक बन रहे हैं । झूठे रेप केसों के बढ़ते आँकड़ों को देखकर सभ्य परिवारों के पुरुष एवं महिलाएँ डरने लगी हैं । कोई भी निर्दोष पुरुष झूठे मामले में फँसाया जाता है तो उसके परिवार की सभी महिलाओं (माँ, बहनें, पत्नी,मामी, मौसी आदि आदि) को अनेक प्रकार की यातनाएँ सहनी पड़ती हैं ।

दिल्ली महिला आयोग की जाँच के अनुसार अप्रैल 2013 से जुलाई 2014 तक बलात्कार की कुल 2,753 शिकायतों में से 1,466 शिकायतें झूठी पायी गयी। विभिन्न कानूनविदों, न्यायधीशों व बुद्धिजीवियों ने भी इस कानून के बड़े स्तर पर दुरुपयोग के संदर्भ में चिंता जतायी है ।

वर्तमान में बलात्कार निरोधक कानून के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष उदाहरण है संत आशारामजी बापू पर किया गया फर्जी केस । जिसमें न कोई ठोस सबूत है और न ही कोई मेडिकल आधार बल्कि उन्हें षड़यंत्र में फँसाये जाने के अनेकों प्रमाण सामने आये हैं –

1) आरोप लगानेवाली लड़की की मेडिकल जाँच करनेवाली डॉ. शैलजा वर्मा ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि “लड़की के शरीर पर रत्तीभर भी खरोंच के निशान नहीं थे और न ही प्रतिरोध के कोई निशान थे ।” 
2) प्रसिद्ध न्यायविद् डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने केस अध्ययन कर बताया कि ‘‘लड़की के फोन रिकॉर्ड्स से पता लगा कि जिस समय पर वह कहती है कि वह कुटिया में थी, उस समय वह वहाँ थी ही नहीं ! बापू आसारामजी पर ‘पॉक्सो एक्ट’ लगवाने हेतु एक झूठा सर्टिफिकेट निकाल के दिखा दिया गया है कि वह 18 साल से कम उम्र की है । यह केस तो तुरंत रद्द होना चाहिए ।’’

3) पुलिस द्वारा दर्ज आरोप-पत्र में मुख्य गवाह सुधा पटेल ने उसके नाम पर लिखे गये बयान को झूठा एवं मनगढ़ंत बताते हुए न्यायालय में कहा कि आज से पहले न मैं कभी जोधपुर आयी और न कभी कहीं बयान दिये थे । मुझे पता नहीं है कि पुलिसवालों ने मेरे हस्ताक्षर किस बात के करवाये थे ।

4) बापूजी के खिलाफ पूरा प्रकरण तैयार किया, जम्मू पुलिस ने उनमें से कइयों को गम्भीर अपराध में आरोपी पाया है । साजिश रचनेवाले गिरोह के शातिर षड्यंत्रकारी, तथाकथित पत्रकार सतीश वाधवानी को जम्मू पुलिस ने इंदौर से गिरफ्तार किया था । वाधवानी व अन्य आरोपियों पर बापूजी के खिलाफ आरोप लगाने हेतु लड़कियाँ तैयार करके यौन-शोषण के झूठे मामले बनाने, उनके आश्रम में मुस्लिम कब्रिस्तान से निकाले हुए बच्चों के कंकाल गाड़ के बापूजी के ऊपर हत्या के झूठे केस लगवाने तथा हिन्दू-मुस्लिम दंगा करवा के आश्रम को सदा के लिए बंद करवाने की साजिश रचने आदि के लिए अनेक संगीन आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था ।

गौरतलब है कि बापू आसारामजी पिछले 40 महीनों से जोधपुर कारागृह में हैं फिर भी बड़ी संख्या में माताएँ-बहनें उनकी सेवाओं में जुड़ती जा रही हैं, असंख्य महिलाएँ उनकी रिहाई की माँग के लिए सड़कों पर उतर आती हैं ।

Monday, December 26, 2016

विदेशों में 'अजान' पर पाबंदी लग रही है, भारत में कब लगेगी..???

इजारायल देश में 'अजान' पर पाबंदी लग रही है, भारत में कब लगेगी..???

इजरायल में कानून-निर्माता एक ऐसा कानून पेश करने जा रहे हैं जिससे मस्जिदों के लाउडस्‍पीकर द्वारा अजान पर पाबंदी लग जाएगी। इस बिल के जरिए इजरायल और पूर्वी येरूशलम की सभी मस्जिदों में लाउडस्‍पीकर के प्रयोग पर रोक लगेगी। 

 'अजान' पर पाबंदी लग रही है

द टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम समुदाय दिन में पांच बार नमाज पढ़ता है, इस पर यहूदी नागरिकों ने शिकायत की है कि इससे शोर होता है और सुबह-सुबह उनकी नींद खराब हो जाती है।  इस बिल को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयहू का भी समर्थन मिला हुआ है, जिन्‍होंने यूरोप और मध्‍य-पूर्व के देशों में कई विधेयकों का हवाला दिया है, जो प्रार्थना के घंटों या आवाज पर नियंत्रण रखते हैं। वाशिंगटन पोस्‍ट की रिपोर्ट के अनुसार उन्‍होंने कहा, ”इजरायल धार्मिक स्‍वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है, मगर उसे शोर से अपने नागरिकों को जरूर बचाना चाहिए।”

 दिन मे पांच बार की अजान से परेशान हैं लोग..!!!

इजरायल ऐसा देश है जो मुस्लिम देशों से घिरा है। यहां मुसलमानों में तनातनी रहती है। कानून बनाने वाले इजरायल में एक ऐसा कानून पेश करने जा रहे हैं जिससे वहां मस्जिदों के लाउडस्‍पीकर पर पाबंदी लग जाएगी। लोगों का कहना है कि अजान से लोगों की नींद में खलल पड़ता है और बहुत शोर होता है। इसलिए लाउडस्पीकर पर बैन होना चाहिए। इस बिल के पास होने पर इजरायल और ईस्ट येरूशलम की सभी मस्जिदों से लाउडस्‍पीकर उतर जाएंगे।

लेकिन महाराष्ट्र में न्यायालय के आदेश देने के बाद भी मस्जिदों पर अभी भी लगे हैं लाऊड स्पीकर!!

कार्यवाही करने में सरकार असफल !!

न्यायालय के आदेश पर हिंदुओं के धार्मिक कार्यक्रम पर कार्यवाही को तुरन्त अमल में लाने वाली राज्य सरकार मस्जिदों पर लगे अवैध लाउडस्पीकर के मामलें में पिछले चार माह में सिर्फ एक ही मस्जिद पर कार्यवाही कर पाई ।

कौन सी मस्जिद पर उक्त कार्यवाही की गई है इसका लेखा जोखा भी राज्य सरकार के पास नहीं है । अपने आवेदन के जरिये अवैध लाउडस्पीकर की कार्यवाही के लिए उच्च न्यायालय से और समय की माँग करने वाली राज्य सरकार को न्यायालय ने जमकर फटकार लगाई है ।

आपको बता दें कि विभिन्न उत्सव के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण,नई मुम्बई परिसर के करीब 45 मस्जिदों और मस्जिदों पर लगे अवैध लाउडस्पीकर के संदर्भ में करीब 18 याचिका उच्च न्यायालय में दायर हैं ।

न्यायालय ने चार माह पहले सभी प्रार्थनास्थलों को ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन करने का दम देते हुए मस्जिदों पर लगे अवैध लाउडस्पीकर पर कार्यवाही करने का आदेश दिया था लेकिन राज्य सरकार उक्त कार्यवाही करने में असफल रही ।इसलिए कार्यवाही करने के लिए और आठ सप्ताह की मोहलत दिए जाने का निवेदन राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दायर किया था । इस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को फटकार लगायी और सरकार को समय देने से इंकार कर दिया ।

आदेश दिए जाने के बाद पिछले चार महीनों में क्या कार्यवाही की गई ?
 पहले यह बताओ और बिना कार्यवाही किये ही और समय क्यों माँग रहे हो ?

इन शब्दों में न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई । आदेश के बाद तुरन्त कार्यवाही करो अन्यथा आदेश का उल्लघंन करने वाले अफसरों पर अवमानना की कार्यवाही करनी पड़ेगी ।

ऐसी कड़ी चेतावनी भी न्यायालय ने सरकार को दी । 

जहाँ मुस्लिम बाहुल देश इसरायल में लाऊड स्पीकर पर बेन लग रही है वहीं यहाँ न्यायालय के आदेश होने के बाद भी सरकार रोक नही लगा रही है?

हिंदुओं के लिये तुरन्त कार्यवाही करने वाली सरकार मुसलमानों द्वारा रास्ते में नमाज पढ़ने पर कई इलाकों में ट्रैफिक जाम होने की समस्या से आम जनता की परेशानी को देखते हुए भी उस पर रोक नही लगा रही, बड़ा आश्चर्य है ।

Sunday, December 25, 2016

आज 25 दिसंबर दुनिया भर में क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन ने मचाई धूम...!!

आज 25 दिसंबर दुनिया भर में क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन ने मचाई धूम...!!

दुनिया के आज सबसे ज्यादा देशों में 25 दिसंबर निमित्त क्रिसमस डे की जगह तुलसी पूजन दिवस मनाया गया ।

आपको बता दें कि केवल हिन्दू ही नही मुस्लिम, ईसाई, फारसी लोगों ने भी 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया ।
Today-Tulsi-pujan-diwas-took-place-of-christmas-on-twitter

2014 से 25 दिसंबर को तुलसी पूजन संत आसारामजी बापू की प्रेरणा से उनके करोड़ो अनुयायियों द्वारा जगह-जगह पर मनाना प्रारंभ किया गया । उसके बाद तो 2015 से इस अभियान ने विश्वव्यापी रूप धारण कर लिया और अब 2016 में तो देश-विदेश में अनेक जगहों पर हिन्दू मुस्लिम और अन्य धर्मों की जनता भी मना रही है ।

आज संत आसारामजी आश्रम द्वारा बताया गया कि उनके अनुयायियों द्वारा विश्वभर में विद्यालयों, महाविद्यालयों और जाहिर जगहों पर एवं घर-घर तुलसी पूजन मना रहे हैं ।

नीचे दी गई लिंक पर आप देख सकते हैं कि किस प्रकार देश-विदेश के अनगिणत लोग तुलसी पूजन द्वारा लाभान्वित हो रहे हैं ।

केवल जमीनी स्तर पर ही नही सोशल मीडिया पर भी कल से तुलसी पूजन की धूम मची है ।

आज क्रिसमस डे था लेकिन Twitter पर भी टॉप ट्रेंड में चल रहा था #25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस

 आज बापू आसारामजी के अनुयायियों द्वारा देश भर में तुलसी पूजन किया गया। 

उनकी ट्वीट्स द्वारा देखने को मिला कि तुलसी पूजन दिवस निमित्त देशभर के स्कूल, कॉलेज, गाँवो, शहरों में तुलसी पूजन करवाया गया तथा कीर्तन यात्राओं के साथ तुलसी जी का वितरण भी किया गया ।


आज ही नही कल भी ट्वीटर पर टॉप में ट्रेंड चल रहा था #25Dec_TulsiPujanDiwas

और आज भी यही हुआ ट्वीटर पर टॉप 3 में ट्रेंड दिख रहा रहा था । 
#25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस



आइये कुछ ट्वीट्स द्वारा जाने लोगों के मनोभाव...

1. नारायण सोनी लिखते हैं कि सुख, समृद्धि व आरोग्य प्रदायिनी तुलसी का स्थान भारतीय संस्कृति में पवित्र व महत्वपूर्ण है। #25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस


2.सुमित जी लिखते हैं कि सुखी, स्वस्थ व सम्मानित जीवन जीने के कई प्रयासों में Asaram Bapu Ji का एक ये भी प्रयास : #25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस । https://twitter.com/SSAMANIYA/status/812949476688195584


3.सत्यशील रॉय का कहना है कि किसी भी रोग से पीड़ित व्यक्ति के कक्ष में तुलसी का पौधा रखने से वह शीघ्र रोग मुक्त होता है #25Dec_TulsiPujanDiwas https://twitter.com/SatyashilRai/status/812955025471401984

4. राज जी लिखते हैं कि मृतक के मस्तक, छाती पर तुलसी जी की सुखी लकड़ी अगर रख दी जाये तो उसकी सद्गति होती है। #25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस

5. पी.सूर्यवंशी जी लिखते हैं कि
संत Asaram Bapu Ji की समाज के हित की अनोखी एवम् दिव्य पहल #25Dec_तुलसी_पूजन_दिवस

इस तरीके से अनेकों ट्वीट आज हमें देखने को मिली जिसके जरिये लोग बता रहे थे कि अब हम 25 दिसंबर को क्रिसमस नही बल्कि तुलसी पूजन दिवस मनाएंगे ।

बापू आसारामजी के अनुयायियों के साथ-साथ अनेक हिन्दू संगठन और देश-विदेश के लोग भी मना रहे थे तुलसी पूजन का त्यौहार!!

आपको बता दें कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी, स्वर्गीय श्री अशोक सिंघल जी और सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाणके और भी कई बड़ी हस्तियां आसारामजी बापू को जेल में मिलकर आये थे और उन्होंने बताया कि बापूजी ने देश हित के अनेक कार्य किये है और ईसाई धर्मांतरण को रोक लगाई इसलिए उनको षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है।

बापू आसारामजी के अनुयायियों ने अपने गुरुदेव से प्रेरणा पाकर हमेशा विदेशी अंधानुकरण का विरोध किया है और हिन्दू संस्कृति का समर्थन किया है । 

आज भले बापू आसारामजी अंतर्राष्ट्रीय षड़यंत्र के तहत जेल में हों लेकिन आज भी उनके द्वारा प्रेरित किये गए सेवाकार्यों की सुवास समाज में देखने को मिलती है।
 जैसे 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन, गौ-पूजन, दीपावली पर गरीबों में भंडारा, गीता जयंती निमित्त रैलियां, हरिनाम संकीर्तन यात्रायें आदि आदि ।

उनके अनुयायी हमेशा इन सभी दैविकार्यों में आगे ही रहते हैं पर मीडिया में आज तक हमें बापू आसारामजी के समर्थन में कुछ देखने सुनने को नहीं मिला।

आखिर क्यों मीडिया हमेशा हमारे हिन्दू संतों के लिए गलत और अनर्गल खबरें समाज में प्रसारित करती है ?


आखिर क्यों मीडिया की नजर में सिर्फ हिन्दू संत ही दोषित हैं कोई मौलवी और पादरी नहीं ?

 क्या इन संतों का यही कसूर है कि इन्होंने हिन्दू संस्कृति के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया..???

स्वयं विचारें !!!

Saturday, December 24, 2016

क्रिसमस डे की जगह मनाया जा रहा है तुलसी पूजन दिवस



दुनिया में क्रिसमस डे की धूम मची है जिसमें शराब पीना, मांस खाना, दुष्कर्म करना ऐसे त्यौहार को अधिकतर भारतवासी मनाने को तैयार नही है इसलिए भारत में ज्यादातर लोग 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस के रूप में मना रहे हैं। भारत ही नही बल्कि कई अन्य देशों में भी इस दिन को तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ।
क्रिसमस डे की जगह मनाया जा रहा है तुलसी पूजन दिवस


अब ईसाई जगत के कई लोगों के मन में ये सवाल होंगे कि कैसे 25 दिसंबर को क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन किया जा रहा है।

 ये हम नही कह रहे हैं आज सुबह से ही ट्वीटर पर ट्रेंड चल रहा था उसमें नंबर एक पर ट्रेंड था। #25Dec_TulsiPujanDiwas 

आइये जानते हैं कि क्या कहना चाह रही है जनता ट्वीटर के माध्यम से...

1. भाविशा वर्मा लिखती हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार ‘जिस घर में प्रतिदिन तुलसी-पूजा होती है उसमें यमदूत प्रवेश नहीं करते' #25Dec_TulsiPujanDiwas 

2. प्रकाश जी ने लिखा कि तुलसी पौधे के निकट किया गया माला जप,पूजा आदि कई गुना पुण्यशाली हो जाते हैं-Bapu Ji #25Dec_TulsiPujanDiwas 

3. आशु कुमार लिखते हैं कि तुलसी का पूजन, रोपण व धारण पाप को जलाता है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदायक है | #25Dec_TulsiPujanDiwas

4. निशा शर्मा लिखती है कि #25Dec_TulsiPujanDiwas भगवान श्री कृष्ण की लीला भूमि वृंदा यानी तुलसी जी का वन ही  वृंदावन है । 

5. दिशा जोशी ने लिखा कि 25 दिसम्बर को तुलसी का पूजन करें....आओ भारतीय संस्कृति का पूजन करे। #25Dec_TulsiPujanDiwas 

6. सौरभ जी ने पीएम मोदी जी को टैग करते हुए लिखा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए #25Dec_TulsiPujanDiwas AsaramBapuJi  द्वारा शुरू की गई बहुत अच्छी पहल है ।

7. गगन कप्लीश लिखते हैं कि तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है । #25Dec_TulsiPujanDiwas

8. केवल अरोड़ा ने तुलसी पूजन पर बनी फिल्म के लिए लिखा कि हम सबको ऐसी फिल्मों की सराहना करनी चाहिए! समाज को इसकी जरूरत है ! Salute to @Balsanskarsewa #25Dec_TulsiPujanDiwas 

9. अमरनाथ ने लिखा कि
#25Dec_TulsiPujanDiwas की शुरुआत करके AsaramBapuJi ने तुलसी के महान लाभों से विश्वमानव को लाभान्वित कराया है।

10 . सुदेश शर्मा लिखते हैं कि कैन्सर जैसी खतरनाक बीमारी में भी तुलसी रस अति लाभदायक है ।
 #25Dec_TulsiPujanDiwas

इसी प्रकार से आज हजारों ट्वीटस हमें देखने को मिली । जिसमें सभी लोग क्रिसमस नही बल्कि तुलसी पूजन दिवस मनाने की बात कहने के साथ-साथ खुद की तुलसी पूजन करके फोटोज अपलोड कर रहे थे ।

केवल भारत के ही लोग नही बल्कि कैलिफोर्निया, दुबई आदि से भी लोग तुलसी पूजन करके ट्वीटस कर रहे थे ।

आपको बता दें कि 25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, युवाधन की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं इसलिए देश में सुख, सौहार्द, स्वास्थ्य, शांति से जन-समाज का जीवन मंगलमय हो इस उद्देश्य से संत आसारामजी बापू की प्रेरणा से वर्ष 2014 से 25 दिसम्बर को ‘तुलसी पूजन दिवस मनाना प्रारम्भ हुआ । इस पर्व की लोकप्रियता विश्वस्तर पर देखी गयी । 

तुलसी पूजन से बुद्धिबल, मनोबल, चारित्र्यबल व आरोग्यबल बढता है । मानसिक अवसाद, दुव्र्यसन, आत्महत्या आदि से लोगों की रक्षा होती है और लोगों को भारतीय संस्कृति के इस सूक्ष्म ऋषि-विज्ञान का लाभ मिलता है ।

तुलसी पूजन की शास्त्रों में महिमा
अनेक व्रतकथाओं, धर्मकथाओं, पुराणों में तुलसी महिमा के अनेकों आख्यान हैं ।

वैज्ञानिक तथ्य!!

* डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अनुसंधानों से यह सिद्ध हुआ है कि ‘तुलसी में एंटी ऑक्सीडंट गुणधर्म है और वह आण्विक विकिरणों से क्षतिग्रस्त कोशों को स्वस्थ बना देती है । कुछ रोगों एवं जहरीले द्रव्यों, विकिरणों तथा धूम्रपान के कारण जो कोशों को हानि पहुँचानेवाले रसायन शरीर में उत्पन्न होते हैं, उनको तुलसी नष्ट कर देती है ।

* तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय में किये गये एक अध्ययन के अनुसार ‘तुलसी का पौधा उच्छ्वास में ओजोन वायु छोड़ता है, जो विशेष स्फूर्तिप्रद है ।


तुलसी नामाष्टक
वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम् ।  
पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम् ।।
एतन्नामाष्टकं चैतत्स्तोत्रं नामार्थसंयुतम् ।  
यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत् ।।
भगवान नारायण देवर्षि नारदजी से कहते हैं : ‘वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी - ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं । यह सार्थक नामावली स्तोत्र के रूप में परिणत है । जो पुरुष तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है । 
(ब्रह्मवैवर्त पुराण )


अतः विष्णुप्रिया तुलसी हर घर में होनी चाहिए । सभी लोग संकल्प लें कि 25 दिसम्बर को तुलसी जी की पूजा करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेंगे ।

Friday, December 23, 2016

इतिहास रंगा है तैमूर के जुल्म की कहानियों से !!

इतिहास रंगा है तैमूर के जुल्म की कहानियों से !!

करीना कपूर ने हाल ही में एक बेटे को जन्म दिया है, करीना और सैफ की इस पहली संतान का नाम 'तैमूर' है, जिसे लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा हुआ है।

कहा जा रहा है कि एक जालिम आक्रमणकारी के नाम पर बेटे का नाम रखना गलत है ।

आखिर तैमूर ने भारत में ऐसा क्या किया था..???

इतिहास रंगा है तैमूर के जुल्म की कहानियों से !!

तैमूर का जन्म सन्‌ 1336 में ट्रांस-आक्सियाना (Transoxiana), ट्रांस आमू और सर नदियों के बीच का प्रदेश, मावराउन्नहर में केश या शहर-ए-सब्ज नामक स्थान में हुआ था। 

उसके पिता ने इस्लाम कबूल कर लिया था। अत: तैमूर भी इस्लाम का कट्टर अनुयायी हुआ। 

वह बहुत ही प्रतिभावान और महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। महान मंगोल विजेता चंगेज खाँ की तरह वह भी समस्त संसार को अपनी शक्ति से रौंद डालना चाहता था और सिकंदर की तरह विश्वविजय की कामना रखता था। 

सन्‌ 1369 में समरकंद के मंगोल शासक के मर जाने पर उसने समरकंद की गद्दी पर कब्जा कर लिया और इसके बाद उसने पूरी शक्ति के साथ दिग्विजय का कार्य प्रारंभ कर दिया। चंगेज खाँ की पद्धति पर ही उसने अपनी सैनिक व्यवस्था कायम की और चंगेज की तरह ही उसने क्रूरता और निष्ठुरता के साथ दूर-दूर के देशों पर आक्रमण कर उन्हें तहस नहस किया। 

1380 और 1387 के बीच उसने खुरासान, सीस्तान, अफगानिस्तान, फारस, अजरबैजान और कुर्दीस्तान आदि पर आक्रमण कर उन्हें अधीन किया। 1393 में उसने बगदाद को लेकर मेसोपोटामिया पर आधिपत्य स्थापित किया। इन विजयों से उत्साहित होकर अब उसने भारत पर आक्रमण करने का निश्चय किया। उसके अमीर और सरदार प्रारंभ में भारत जैसे दूरस्थ देश पर आक्रमण के लिये तैयार नहीं थे, लेकिन जब उसने इस्लाम धर्म के प्रचार के हेतु भारत में प्रचलित मूर्तिपूजा का विध्वंस करना अपना पवित्र ध्येय घोषित किया, तो उसके अमीर और सरदार भारत पर आक्रमण के लिये राजी हो गए।

वह भारत के स्वर्ण से आकृष्ट हुआ। भारत की महान समृद्धि और वैभव के बारे में उसने बहुत कुछ बातें सुन रखी थी। अत: भारत की दौलत लूटने के लिये ही उसने आक्रमण की योजना बनाई थी। उसे आक्रमण का बहाना ढूँढ़ने की आवश्यकता भी नहीं महसूस हुई। उस समय दिल्ली की तुगलुक सल्तनत फिरोजशाह के निर्बल उत्तराधिकारियों के कारण शोचनीय अवस्था में थी। भारत की इस राजनीतिक दुर्बलता ने तैमूर को भारत पर आक्रमण करने का स्वयं सुअवसर प्रदान दिया।

1398 के प्रारंभ में तैमूर ने पहले अपने एक पोते पीर मोहम्मद को भारत पर आक्रमण के लिये रवाना किया। उसने मुलतान पर घेरा डाला और छ: महीने बाद उसपर अधिकार कर लिया।

अप्रैल 1398 में तैमूर स्वयं एक भारी सेना लेकर समरकंद से भारत के लिये रवाना हुआ और सितंबर में उसने सिंधु, झेलम तथा रावी को पार किया। 13 अक्टूबर को वह मुलतान से 70 मील उत्तर-पूरब में स्थित तुलुंबा नगर पहुँचा। उसने इस नगर को लूटा और वहाँ के बहुत से हिन्दुओं को कत्ल किया तथा बहुतों को गुलाम बनाया। फिर मुलतान और भटनेर पर कब्जा किया। वहाँ हिंदुओं के अनेक मंदिर नष्ट कर डाले। भटनेर से वह आगे बढ़ा और मार्ग के अनेक स्थानों को लूटता-खसोटता और निवासियों को कत्ल तथा कैद करता हुआ दिसंबर के प्रथम सप्ताह के अंत में दिल्ली के निकट पहुँच गया। यहाँ पर उसने एक लाख हिंदू कैदियों को कत्ल करवाया। पानीपत के पास निर्बल तुगलक सुल्तान महमूद ने 17 दिसम्बर को 40,000 पैदल 10,000 अश्वारोही और 120 हाथियों की एक विशाल सेना लेकर तैमूर का मुकाबिला किया लेकिन बुरी तरह पराजित हुआ। भयभीत होकर तुगलक सुल्तान महमूद गुजरात की तरफ चला गया और उसका वजीर मल्लू इकबाल भागकर बारन में जा छिपा।

दूसरे दिन तैमूर ने दिल्ली नगर में प्रवेश किया। पाँच दिनों तक सारा शहर बुरी तरह से लूटा-खसोटा गया और उसके अभागे निवासियों को बेभाव कत्ल किया गया या बंदी बनाया गया। पीढ़ियों से संचित दिल्ली की दौलत तैमूर लूटकर समरकंद ले गया। अनेक बंदी बनाई गई औरतों और शिल्पियों को भी तैमूर अपने साथ ले गया। भारत से जो कारीगर वह अपने साथ ले गया उनसे उसने समरकंद में अनेक इमारतें बनवाईं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध उसकी स्वनियोजित जामा मस्जिद है।

तैमूर भारत में केवल लूट के लिये आया था। उसकी इच्छा भारत में रहकर राज्य करने की नहीं थी। अत: 15 दिन दिल्ली में रुकने के बाद वह स्वदेश के लिये रवाना हो गया। 9 जनवरी 1399 को उसने मेरठ पर चढ़ाई की और नगर को लूटा तथा निवासियों को कत्ल किया। इसके बाद वह हरिद्वार पहुँचा जहाँ उसने आस पास की हिंदुओं की दो सेनाओं को हराया। शिवालिक पहाड़ियों से होकर वह 16 जनवरी को कांगड़ा पहुँचा और उसपर कब्जा किया। इसके बाद उसने जम्मू पर चढ़ाई की। इन स्थानों को भी लूटा खसोटा गया और वहाँ के असंख्य निवासियों को कत्ल किया गया। इस प्रकार भारत के जीवन, धन और संपत्ति को अपार क्षति पहुँचाने के बाद 19 मार्च 1399 को पुन: सिंधु नदी को पार कर वह भारतभूमि से अपने देश को लौट गया।

भारत से लौटने के बाद तैमूर ने सन्‌ 1400 में अनातोलिया पर आक्रमण किया और 1402 में अंगोरा के युद्ध में ऑटोमन तुर्कों को बुरी तरह से पराजित किया। सन्‌ 1405 में जब वह चीन की विजय की योजना बनाने में लगा था, उसकी मृत्यु हो गई।



तैमूर ने भारत पर क्यों किया था आक्रमण
तैमूर ने लिखी जीवनी

1399 ई. में तैमूर का भारत पर भयानक आक्रमण हुआ। अपनी जीवनी 'तुजुके तैमुरी' में वह कुरान की इस आयत से ही प्रारंभ करता है 'ऐ पैगम्बर काफिरों और विश्वास न लाने वालों से युद्ध करो और उन पर सख्ती बरतो।' वह आगे भारत पर अपने आक्रमण का कारण बताते हुए लिखता है-

हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने का मेरा ध्येय काफिर हिन्दुओं के विरुद्ध धार्मिक युद्ध करना है (जिससे) इस्लाम की सेना को भी हिन्दुओं की दौलत और मूल्यवान वस्तुएँ मिल जायें।

कश्मीर की सीमा पर कटोर नामी दुर्ग पर आक्रमण हुआ। उसने तमाम पुरुषों को कत्ल और स्त्रियों और बच्चों को कैद करने का आदेश दिया। फिर उन हठी काफिरों के सिरों के मीनार खड़े करने के आदेश दिये। फिर भटनेर के दुर्ग पर घेरा डाला गया। वहाँ के राजपूतों ने कुछ युद्ध के बाद हार मान ली और उन्हें क्षमादान दे दिया गया। किन्तु उनके असवाधान होते ही उन पर आक्रमण कर दिया गया। तैमूर अपनी जीवनी में लिखता है कि 'थोड़े ही समय में दुर्ग के तमाम लोग तलवार के घाट उतार दिये गये। घंटे भर में 10,000 (दस हजार) लोगों के सिर काटे गये। इस्लाम की तलवार ने काफिरों के रक्त में स्नान किया। उनके सरोसामान, खजाने और अनाज को भी, जो वर्षों से दुर्ग में इकट्‌ठा किया गया था, मेरे सिपाहियों ने लूट लिया। मकानों में आग लगा कर राख कर दिया। इमारतों और दुर्ग को भूमिसात कर दिया गया।

दूसरा नगर सरसुती था जिस पर आक्रमण हुआ। 'सभी काफिर हिन्दू कत्ल कर दिये गये। उनके स्त्री और बच्चे और संपत्ति हमारी हो गई। तैमूर ने जब जाटों के प्रदेश में प्रवेश किया। उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि 'जो भी मिल जाये, कत्ल कर दिया जाये।' और फिर सेना के सामने जो भी ग्राम या नगर आया, उसे लूटा गया। पुरुषों को कत्ल कर दिया गया और कुछ लोगों, स्त्रियों और बच्चों को बंदी बना लिया गया।'

दिल्ली के पास लोनी हिन्दू नगर था। किन्तु कुछ मुसलमान भी बंदियों में थे। तैमूर ने आदेश दिया कि मुसलमानों को छोड़कर शेष सभी हिन्दू बंदी इस्लाम की तलवार के घाट उतार दिये जायें। इस समय तक उसके पास हिन्दू बंदियों की संख्या एक लाख हो गयी थी। जब यमुना पार कर दिल्ली पर आक्रमण की तैयारी हो रही थी उसके साथ के अमीरों ने उससे कहा कि इन बंदियों को कैम्प में नहीं छोड़ा जा सकता और इन इस्लाम के शत्रुओं को स्वतंत्र कर देना भी युद्ध के नियमों के विरुद्ध होगा। तैमूर लिखता है-

इसलिये उन लोगों को सिवाय तलवार का भोजन बनाने के कोई मार्ग नहीं था। मैंने कैम्प में घोषणा करवा दी कि तमाम बंदी कत्ल कर दिये जायें और इस आदेश के पालन में जो भी लापरवाही करे उसे भी कत्ल कर दिया जाये और उसकी सम्पत्ति सूचना देने वाले को दे दी जाये। जब इस्लाम के गाजियों (काफिरों का कत्ल करने वालों को आदर सूचक नाम) को यह आदेश मिला तो उन्होंने तलवारें सूत ली और अपने बंदियों को कत्ल कर दिया। उस दिन एक लाख अपवित्र मूर्ति-पूजक काफिर कत्ल कर दिये गये।

तुगलक बादशाह को हराकर तैमूर ने दिल्ली में प्रवेश किया। उसे पता लगा कि आस-पास के देहातों से भागकर हिन्दुओं ने बड़ी संख्या में अपने स्त्री-बच्चों तथा मूल्यवान वस्तुओं के साथ दिल्ली में शरण ली हुई है। उसने अपने सिपाहियों को इन हिन्दुओं को उनकी संपत्ति समेत पकड़ लेने के आदेश दिये।

ऐसे खरनाक क्रूर आक्रमककारी भारत का लुटेरा लाखों भारतवासियों नर-नारियों और बच्चों का कत्ल करने वाल, अनेक महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने वाला 'तैमूर" का नाम करीना और सैफ  ने अपने बच्चे का नाम रखने पर समस्त भारत में विरोध होना स्वाभविक ही है ।

मुस्लिम धर्म से परेशान होकर मुस्लिम परिवारों ने अपनाया हिन्दू धर्म

मुस्लिम धर्म से परेशान होकर #मुस्लिम परिवारों ने अपनाया #हिन्दू धर्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में अपने ही #धर्म के लोगों से परेशान ह...