Sunday, April 28, 2024

जन्मदिन पर विषेश : आशाराम बापू कौन है ? उन्होंने क्या क्या किया ?

29 April 2024

https://azaadbharat.org 


🚩हिंदू संत श्री आशारामजी बापू को बचपन से ही प्रगाढ़ भक्ति प्राप्त थी । प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ठाकुरजी की पूजा में लग जाना उनका नित्य नियम था ।


🚩उनके 87वें जन्मदिवस को पिछले 7 दिनों से दुनियाभर में विश्व सेवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 


🚩कही हरिनाम कीर्तन यात्राएं तो कही गीता भागवद सत्संग कार्यक्रमो का आयोजन हो रहा है और गरीबों में फल, मिठाई, राशन, कपड़े, बर्तनों का निशुल्क वितरण किया जा रहा है और पलाश,गुलाब आदि के शर्बत पानी के स्टॉल लगाए जा रहे है।


🚩हिन्दू संत आशाराम बापू का बचपन का नाम आसुमल था । उनका जन्म अखंड भारत के सिंध प्रांत के बेराणी गाँव में चैत्र कृष्ण षष्ठी विक्रम संवत् 1994 (1 मई 1937) के दिन हुआ था । उनकी माता महँगीबा व पिताजी थाऊमल नगरसेठ थे ।


🚩बालक आसुमल को देखते ही उनके कुलगुरु ने भविष्यवाणी की थी कि “आगे चलकर यह बालक एक महान संत बनेगा, लोगों का उद्धार करेगा ।”


🚩बापू आसारामजी का बाल्यकाल संघर्षों की एक लंबी कहानी है। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के कारण अथाह सम्पत्ति को छोड़कर बालक आसुमल परिवार सहित अहमदाबाद आ बसे। उनके पिताजी द्वारा लकड़ी और कोयले का व्यवसाय आरम्भ करने से आर्थिक परिस्थिति में सुधार होने लगा । तत्पश्चात् शक्कर का व्यवसाय भी आरम्भ हो गया ।


🚩माता-पिता के अतिरिक्त बालक आसुमल के परिवार में एक बड़े भाई तथा दो छोटी बहनें थी।

बालक आसुमल को बचपन से ही प्रगाढ़ भक्ति प्राप्त थी । प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ठाकुरजी की पूजा में लग जाना उनका नित्य नियम था ।


🚩दस वर्ष की नन्ही आयु में बालक आसुमल के पिताजी थाऊमलजी देहत्याग कर स्वधाम चले गये ।

पिताजी के देहत्यागोपरांत आसुमल को पढ़ाई (तीसरी कक्षा) छोड़कर छोटी-सी उम्र में ही कुटुम्ब को सहारा देने के लिये सिद्धपुर में एक परिजन के यहाँ नौकरी करनी पड़ी । 3 साल तक नौकरी के साथ-साथ साधना में भी प्रगति करते रहे ।


🚩3 साल बाद वे वापिस अहमदाबाद आ गए और भाई के साथ शक्कर की दुकान पर बैठने लगे ।

लेकिन उनका मन सांसारिक कार्यो में नही लगता था, ज्यादातर जप-ध्यान में ही समय निकालते थे ।


🚩21 साल की उम्र में घर वाले आसुमल जी की शादी करना चाहते थे लेकिन उनका मन संसार से विरक्त और भगवान में तल्लीन रहता था । इसलिए वे घर छोड़कर भरुच के अशोक आश्रम चले गए । पर घरवालो ने उन्हें ढूंढ कर जबरदस्ती उनकी शादी करवा दी ।


🚩लेकिन मोह-ममता का त्याग कर ईश्वर प्राप्ति की लगन मन में लिए शादी के बाद भी तुरंत पुनः घर छोड़ दिया और आत्म पद की प्राप्ति हेतु जंगलों-बीहडों में घूमते और ईश्वर प्राप्ति के लिए तड़पते रहे ।

 

🚩नैनीताल के जंगल में योगी ब्रह्मनिष्ठ संत साईं लीलाशाहजी बापू को उन्होंने सद्गुरु के रूप में स्वीकार किया ।


🚩ईश्वरप्राप्ति की तीव्र तड़प देखकर सद्गुरु लीलाशाहजी बापू का ह्रदय छलक उठा और उन्हें 23 वर्ष की उम्र में सद्गुरु की कृपा से आत्म-साक्षात्कार हो गया । तब सद्गुरु लीलाशाह जी ने उनका नाम आसुमल से आशारामजी रखा ।


🚩अपने गुरु लीलाशाहजी बापू की आज्ञा शिरोधार्य कर संत आसारामजी बापू समाधि-अवस्था का सुख छोड़कर तप्त लोगों के हृदय में शांति का संचार करने हेतु समाज के बीच आ गये।


🚩सन् 1972 में अहमदाबाद साबरमती के तट पर आश्रम स्थापित किया । भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विश्व शांति के लिए हिन्दू संत आसाराम बापू ने राष्ट्र के कल्याणार्थ अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ।


 🚩हिन्दू संत आशाराम बापू के मार्गदर्शन में देश-विदेश में हजारों ‘बाल संस्कार केन्द्र निःशुल्क चलाये जा रहे हैं । इनमें बालकों को माता-पिता का आदर करने के संस्कार, पढ़ाई में अव्वल आने के उपाय और यौगिक प्रयोग आदि सिखाये जाते हैं ।


🚩विद्यालयों में ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थियों को माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर, अनुशासन, यौगिक शिक्षा, आदर्श दिनचर्या, परीक्षा में अच्छे अंक पाने की कुंजियाँ आदि महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर अनुभवी वरिष्ठों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है ।


🚩अब तक देश के 80,000 से अधिक विद्यालय इस अभियान से लाभान्वित हो चुके हैं ।


🚩विद्यार्थियों के बाल, छात्र व कन्या मंडल भी बनाये गए है जो व्यसनमुक्ति अभियान, गौ-रक्षा अभियान, पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रम आदि सेवाकार्य करते हैं ।


🚩वेलेंटाइन डे जैसे त्यौहारों से भी बचने हेतु हर वर्ष 14 फरवरी को देशभर के विभिन्न स्थानों के विभिन्न विद्यालयों के साथ साथ घर-घर में ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाया जा रहा है ।


🚩अब ‘संत श्री आशारामजी गुरुकुलों ‘ की भी श्रृंखला बढ़ने लगी है, जिनमें विद्यार्थियों को लौकिक शिक्षा के साथ-साथ स्मृतिवर्धक यौगिक प्रयोग, योगासन, प्राणायाम, जप, ध्यान आदि के माध्यम से उन्नत जीवन जीने की कला सिखायी जाती है । उनमें सुसंस्कारों का सिंचन किया जाता है तथा उन्हें अपनी महान वैदिक संस्कृति का ज्ञान प्रदान किया जाता है ।

 

🚩‘युवाधन सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है तथा ‘युवा सेवा संघ एवं ‘महिला उत्थान मंडल की स्थापना की गयी है । इन संगठनों द्वारा भारतभर में ‘संस्कार सभाएँ चलायी जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर युवक-युवतियाँ अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं ।


🚩समाज के पिछडे, शोषित, बेरोजगार व बेसहारा लोगों की सहायता के लिए बापू आशारामजी द्वारा ‘भजन करो, भोजन करो, दक्षिणा पाओ’ योजनायें चलायी जा रही है ।

 

🚩इसके अंतर्गत उन्हें कहा जाता है कि वे आश्रम में अथवा आश्रम द्वारा संचालित समितियों के केन्द्रों में आकर दिनभर केवल भजन, कीर्तन और ध्यान करें । उन्हें दिन का भोजन और शाम को घर जाते समय 50 रुपये तक की नकद राशि दी जाती है । इसमें भाग लेनेवालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है । जिससे ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मान्तरण में रोक लग रही है और जहाँ लोगों को भोजन की विकट समस्या से निजात मिलती है, वहीं उनका आध्यात्मिक उत्थान भी हो रहा है । इससे बेरोजगार लोगों में आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने में बहुत मदद मिल रही है ।


🚩कहा जाता है कि हिन्दू संत आसाराम बापू का बहुत बड़ा साधक-समुदाय है । लगभग करीब 8 करोड़ लोग देश-विदेश में है और इतने सालों से बिना सबूत जेल में होते हुए भी उनके अनुयायियों की श्रद्धा टस से मस नहीं हुई है । उन करोड़ो भक्तों का एक ही कहना है कि हमारे गुरुदेव (संत आशारामजी बापू) निर्दोष हैं उन्हें षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है । वे जल्द से जल्द निर्दोष छूटकर हमारे बीच शीघ्र ही आयेगे ।


🚩गौरतलब है संत आशारामजी बापू का जन्म दिवस 29 अप्रैल को है अभी उनका 87 वां साल चल रहा है, पिछले 11+ सालों से जेल में बन्द होने पर भी उनके करोड़ों अनुयायियों द्वारा देश-विदेश में एक अनोखे अंदाज में मनाया जाता है ये दिन..


🚩इस दिन देशभर में जगह-जगह पर निकाली जाती हैं विशाल भगवन्नाम संकीर्तन यात्रायें, वृद्धाश्रमों,अनाथालयों व अस्पतालों में निशुल्क औषधि, फल व मिठाई वितरित की जाती है।


🚩गरीब व अभावग्रस्त क्षेत्रों में होता है विशाल भंडारा जिसमें वस्त्र,अनाज व जीवन उपयोगी वस्तुओं का वितरण किया जाता है।


🚩उस दिन जगह जगह पर छाछ,पलाश व गुलाब के शरबत के प्याऊ लगाये जाते हैं । एवं सत्साहित्य आदि का वितरण किया जाता है।


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Saturday, April 27, 2024

अखण्ड ब्रह्मचारी हनुमान जी पर भी लगा रहे है अनुचित आक्षेप

27 April 2024 https://azaadbharat.org 🚩जहाँ सम्पूर्ण विश्व हनुमान जी से ब्रहमचर्य एवं वीरता की प्रेरणा लेता है। वही हनुमान जी के बारे में ठीक इसके विपरीत बातें थाई, जैन और मलय देश की रामायण में मिलती हैं। जैसे 🚩फिलिप नाम के एक लेखक ने तो यह लिख दिया कि सम्पूर्ण वाल्मीकि रामायण में हनुमान जी के ब्रहमचर्य के विषय में कोई वर्णन नहीं हैं 🚩थाई रामायण में हनुमान जी के बारे में लिखा है कि हनुमान जी की अनेक पत्निया थीं। 🚩जैन लेख में लिखा गया है कि हनुमान ने लंका के रक्षक वज्रमुख की पुत्री लंकासुंदरी से विवाह किया था। 🚩एक अन्य आक्षेप लगा दिया गया कि भरत ने श्री राम की अयोध्या वापिसी पर हनुमान को 16 दासियाँ पुरस्कार के रूप में दी। 🚩कुछ वर्ष पहले 300 रामायण नामक रामानुजम के एक लेख की चर्चा जोरों से उठी थी। जब उसे दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्य क्रम से हटा दिया गया था। इस पुस्तक में रामायण के आदर्श पात्रों के विषय में अनुचित आक्षेप किये गए थे। जैसे प्रभु राम मांसाहारी थे, लक्ष्मण की सीता जी पर आसक्ति थी आदि। इन प्रकार के असत्य तथ्यों का मूल उद्देश्य प्रभु राम के प्रति भारतीय एवं विदेशी दोनों जनमानस के मन में उनके प्रति अश्रद्धा उत्पन्न करना था। 🔺 Follow on 🔺 Facebookhttps://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/ 🔺Instagram: http://instagram.com/AzaadBharatOrg 🔺 Twitter: twitter.com/AzaadBharatOrg 🔺Telegram: https://t.me/ojasvihindustan 🔺http://youtube.com/AzaadBharatOrg Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Friday, April 26, 2024

भारत नही नेपाल में भी हिंदू सुरक्षित नहीं है, पुजारी के सिर को ईंटों से फोड़ा

27 April 2024

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🚩हिंदू समाज केवल भारत में नही नेपाल और अन्य देशों में भी मुस्लिम जिहादियों से प्रताड़ित हो रहा हैं। कभी हिंदूओं पर पत्थर फेकना, गोली चलाना, कभी हिंदू मंदिर तोड़ना तो कभी लव जिहाद तो कभी लैंड जिहाद जैसे अनेक षड़यंत्र किए जा रहे हैं।


🚩हिन्दू मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हमले 


🚩नेपाल के सिरहा जिले में एक हिन्दू मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हमले की खबर है। हमले में पुजारी का सिर फट गया जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हमले का आरोप अताबुल मियाँ पर लगा है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि नेपाली पुलिस ने अताबुल को हिरासत में ले कर थाने से ही छोड़ दिया। इस घटना और पुलिस की कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठन से सदस्यों ने प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी है। घटना गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) की है।


🚩नेपाल में सक्रिय ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के अध्यक्ष राजेश यादव ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि घटना सिरहा जिले के कल्याणपुर इलाके की है। यहाँ के वार्ड नंबर 12 में राम जानकी मंदिर आसपास के हिन्दुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ पुजारी हेबू मुखिया पूजापाठ करते हैं। गुरुवार की रात लगभग 8 बजे पुजारी मंदिर में आरती आदि कर के घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन पर अताबुल मियाँ हमला कर देता है। हमले में ईंट का इस्तेमाल किया जाता है जिस से पुजारी का सिर फट गया।


🚩सिर पर चोट लगने से पुजारी हेबू गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने उनको विराटनगर के अस्पताल में भर्ती करवाया। फ़िलहाल पुजारी हेबू मुखिया इलाज के बाद अपने घर आ चुके हैं। इधर पुलिस ने अताबुल मियाँ को हिरासत में ले लिया। हिन्दू सम्राट सेना का आरोप है कि राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस ने अताबुल को बिना केस दर्ज किए ही थाने से छोड़ दिया। पुलिस की यह हरकत नेपाल के हिन्दू संगठनों को नागवार गुजरी है। उन्होंने इसे अपराध को संरक्षण देने वाली हरकत बताया है।


🚩‘हिन्दू सम्राट सेना’ के सदस्यों ने जल्द से जल्द अताबुल मियाँ की गिरफ्तारी की माँग उठाई है। इस माँग के लिए संगठन ने सिरहा जिले के पुलिस अधीक्षक के ऑफिस पर प्रदर्शन का एलान किया है। पुजारी पर हुए हमले में अताबुल को हत्या के प्रयास की धाराओं में गिरफ्तार किए जाने की माँग की जा रही है।


🚩पुजारी की जमीन पर लैंड जिहाद की साजिश

ऑपइंडिया ने पुजारी हेबू मुखिया के बेटे रामकरन से बात की। उन्होंने बताया कि हमलावर अताबुल की उम्र लगभग 45 साल है। वो बेलहा किराने की दुकान चलाता है। उसके 2 बेटे हैं जो कतर देश में रहते हैं। पुजारी ने स्थानीय हिन्दू से एक जमीन खरीदी थी जिसे अताबुल मियाँ हड़पना चाहता है। वो पुजारी पर जबीन को फ्री में खुद को सौंप देने का दबाव लम्बे समय से बनाता आ रहा है। कुछ समय पहले भी उसने पुजारी को हथियार से मारने का प्रयास किया था। रामकरन ने अपने मामले में नेपाली पुलिस की कार्यशैली को भी असंतोषजनक बताया है।


🚩नेटीजेंस बता रहे घुसपैठ का नतीजा

नेपाल में पुजारी पर हुए इस हमले ने नेपाली सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। नेपाली ‘X’ यूजर इस घटना पर नाराजगी जताते हुए अलग-अलग राय दे रहे हैं। विवेका ने लिखा कि पूरी नेपाल की सीमा पर रोहिंग्या बस चुके हैं। सुरेंद्र ने ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ के सांसद को टैग करते हुए हमलावर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। सुरस्वामी ने लिखा कि नेपाल में विदेशियों की तादाद बढ़ती जा रही है जो कि वहाँ के मूल मधेशी लोगों के लिए एक बड़ा खतरा है।


🚩चित्र- X/@sanatanchautari पर आए कमेंट

एक अन्य ‘X’ यूजर @msapkota00043 ने नेपाल की पुलिस को टैग किया है। इसके साथ उन्होंने लिखा है कि हिन्दू पर दिन दहाड़े हमला नेपाल की शांति और सुरक्षा को खुली चुनौती है। शरद शर्मा ने लिखा, “पाकिस्तानी मुस्लिमों को नागरिकता देने का अंजाम भुगतना शुरू हो चुका है। यह मुस्लिमों को गले लगाने का अंजाम है।” शरद ने आशंका जताई है कि जल्द ही नेपाल के नए मालिक होंगे और तब मधेशी लोगों को तराई से भगा दिया जाएगा।


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Thursday, April 25, 2024

आसाराम बापू के बारे में काफी सुना होगा लेकिन यह बात कभी आपके पास नही आई होगी

26 April 2024

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🚩हिंदू धर्मगुरु आशाराम बापू के बारे में आपने कई बार मिडिया सोशल मीडिया के माध्यम से अनेक कहानियां सुनी होगी लेकिन सच क्या है झूठ क्या है वे जानना अति आवश्यक हैं।


🚩वरिष्ठ अधिवक्ता ने बापू आशारामजी की ओर से कोर्ट में जो बहस किया था उससे पता चलता है की उनको जेल में भेजना एक सुनियोजित षड़यंत्र है साजिस के तहत फंसाए जाने की पुष्टि करने वाले एक से बढ़कर एक ऐसे आश्चर्यकारक तथ्य सामने आये हैं कि जिसका आरोप लगाने वाले पक्ष के पास कोई जवाब नहीं है ।


🚩सबसे बड़ा सनसनीखेज खुलासा जो सामने आया वो ये है कि लड़की कमरे में गई ही नहीं..


🚩अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया था कि लड़की ने रात 10:30 बजे का बापू आशारामजी पर छेड़छाड़ी का आरोप लगाया है, लेकिन न्यायालय में गवाह पेश हुए जिन्होंने बताया कि बापू आशारामजी रात को 9:00 बजे से 11:45 तक नीम के पेड़ के नीचे बैठे थे, उनके सामने 60-70 लोग और भी बैठे थे, वहां सत्संग के बाद पूना व सुमेरपुर के परिवार के बीच हुई सगाई के निमित्त भगवान  झुलेलालजी की झाँकी निकाली गयी थी, जिसमें बापू आसारामजी भी उपस्थित थे और दोनों परिवारवालों को रात को 11:30 बजे आशीर्वाद दे रहे थे । उस सत्संग के समय के कई फोटोज भी हैं जो न्यायालय के सामने सन 2014 से हैं तथा उसमें उपस्थित परिवारवालों की गवाही भी न्यायालय में हो चुकी है । वहाँ पर जो सिक्योरिटी गार्ड था, वो भी इस बात का गवाह है* ।


🚩दूसरी ओर कॉल रिकॉर्ड से पता चला कि रातभर लड़की अपने मित्र (पुरुष) Boy Friend को मैसेज करती रही, न्यायालय में मनीषा नाम की महिला के बयान हुए, उसने बताया कि मैं उसके (लड़की)पास ही सोई थी और उसको बोला भी था कि सो जा लेकिन वो सो नही रही थी और अपने मित्र से मैसेज पर देर रात तक बातें करती रही ।


🚩संदिग्ध तरीके से दर्ज हुई एफ.आई.आर…


🚩अभियोजन पक्ष द्वारा तथाकथित घटना 14 व 15 अगस्त 2013 की दरमियानी रात्रि की बतायी गयी । जोधपुर की इस तथाकथित घटना के संबंध में एफ.आई.आर. न जोधपुर, न शाहजहाँपुर और न ही छिंदवाडा बल्कि 600 कि.मी. दूर कमला नेहरु मार्केट पुलिस थाना, नई दिल्ली में करवाई गई ।


🚩एफ.आई.आर. की विडियो रिकॉर्डिंग गायब की गयी


🚩एफ.आई.आर. लिखते समय की गयी विडियोग्राफी की रिकॉर्डिंग, सी.डी. एवं अन्य संबंधित दस्तावेज न्यायालय में पेश नहीं किये गये तथा संबंधित गवाहों थाना प्रभारी प्रमोद जोशी व कान्स्टेबल पंकज को भी न्यायालय में पेश नहीं किया गया । संदेहास्पद तरीके से उस विडियोग्राफी को गायब कर दिया गया । ए.एस.आई. पुष्पलता ने न्यायालय में इस बात को स्वीकार भी किया है कि एफ.आई.आर. लिखते समय विडियोग्राफी की गयी थी,किंतु उन्होंने उसे न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किया ।


🚩ओरिजिनल एफ.आई.आर. को बदल डाला


🚩अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया था कि ओरिजिनल एफ.आई.आर.को बदल दिया गया, यहाँ तक कि एफ.आई.आर. पर लड़की के दस्तखत भी नहीं करवाये गए जो धारा 154 में अनिवार्य प्रावधान है । रजिस्टर के ऊपर लिखा रहता है कि ‘यह पढ़ लिया है और सही है’ (read over and accepted to be correct) । जब ऐसा कॉलम है तो फिर हस्ताक्षर क्यों नहीं करवाये गए ?


🚩FIR व FIR की कार्बन कॉपी में भी अंतर पाया गया है । जिसका स्पष्टीकरण सम्बन्धित पुलिस कर्मी न्यायालय के सामने हुई अपनी गवाही में नहीं दे पाया है ।


 🚩मेडिकल जाँच में मिली क्लीनचिट


🚩लोकनायक अस्पताल, दिल्ली की डॉ. शैलजा वर्मा एवं डॉ. राजेन्द्र कुमार ने लड़की की मेडिकल जाँच की थी । मेडिकल रिपोर्ट पूर्णतया नॉर्मल है । दोनों ही डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का सेक्सुअल असॉल्ट (यौन-उत्पीड़न) अथवा फिजिकल असॉल्ट (शारीरिक उत्पीड़न) नहीं पाया गया । चोट का कोई निशान भी नहीं था । अनुसंधान अधिकारी चंचल मिश्रा से जिरह के दौरान जब यह पूछा गया कि चोट का निशान नहीं था तो मामला कैसे बना ? तो इसका उसके पास कोई जवाब नहीं था ।


🚩अनुसंधान अधिकारी भी नहीं थी निष्पक्ष


🚩न्यायालय में ऐसे कई तथ्य उजागर हुए थे,जिन्हें पुलिस द्वारा दबाया गया था । अनुसंधान पक्षपातपूर्ण किया गया तथा बापू आसारामजी पर नाजायज धाराएँ लगायी गयी । अनुसंधान के दौरान जिन व्यक्तियों ने सत्य को उजागर किया उनके महत्त्वपूर्ण बयान अनुसंधान अधिकारी चंचल मिश्रा ने चार्जशीट में लगाये ही नहीं । चंचल मिश्रा ने अपनी गवाही में इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने केस से संबंधित कई गवाहों के बयान आरोप-पत्र के साथ पेश नहीं किये हैं ।


🚩पोक्सो एक्ट किस आधार पर


🚩जिस पोक्सो एक्ट के कारण बापू आशारामजी को बेल तक नहीं मिल पाई,उस तथाकथित घटना के समय लड़की नाबालिग नहीं, बालिग थी । अधिवक्ता  ने अपनी दलीलों को कोर्ट के सामने जारी रखते हुए कहा कि LIC policy फॉर्म को लड़की की माँ ने खुद स्वीकार किया है और उसने उसके पैसे भी उठाए हैं | LIC Policy के संबंध में लड़की की माँ ने उक्त दस्तावेजों में भरे गए सभी तथ्यों को सही होने का स्वीकार करते हुए उस पर तीन जगह हस्ताक्षर किये हैं जिसमें लड़की की उम्र 1.7.94 भरी गई है जिसके हिसाब से लड़की कथित घटना के समय 19 साल से अधिक की हो जाती है ।


🚩50 करोड़ की फिरौती के लिए रचा गया षड्यंत्र..


🚩2008 में योग वेदान्त सेवा समिति अहमदाबाद आश्रम को एक फैक्स भेजा गया था जिसमें अमृत प्रजापति व उसके साथियों के द्वारा बापू आशारामजी को ये कहा गया था कि 50 करोड़ रुपये दो वर्ना उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाओ । हम झूठी लड़कियां तैयार करेंगे, प्लांट करेंगे जिसके कारण तुम जिंदगी भर जेल में रहोगे कभी बाहर नहीं आ सकोगे ।


🚩इस बात के लिए conspiracy वडोदरा (गुजरात) में की गई थी । जिसमें दीपक चौरसिया ( पूर्व में इंडिया न्यूज़) भी शामिल था जो मीडिया के ऊपर प्रचार प्रसार कर रहा था, कर्मवीर (परिवादिया का पिता) भी शामिल था । इन सबका जो एक motive था, वो 50 करोड़ की ब्लैकमेलिंग का था । 50 करोड़ नहीं देने के कारण से मणाई गाँव का पूरा घटनाक्रम बनाया गया है ।



🚩उत्तर प्रदेश के पूर्व महानिदेशक सुव्रत त्रिपाठी जी ने ट्वीटर के माध्यम से बताया कि संत आशारामजी बापू केस में…

– FIR की वीडियो रिकॉर्डिंग को गायब कर दिया

– FIR और उसकी कार्बन कॉपी में अंतर पाया गया

– रजिस्टर के कई पन्ने फाड़ें गए

– बर्थ सर्टिफिकेट में लड़की की अलग-अलग उम्र

– मेडिकल में नहीं मिला एक भी खरोंच का निशान

क्या ये उनको फंसाने की साजिश नहीं..??


🚩दूसरी ट्वीट के माध्यम से बताया कि संत आशारामजी बापू ने लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवाई।


🚩करोड़ों लोगों को सनातन धर्म के प्रति आस्थावान बनाया। वैदिक गुरुकुल और बाल संस्कार केंद्र खोलकर बच्चों को दिव्य संस्कार दिए।


🚩कत्लखाने जाती हजारों गायों को बचाकर गौशालाएं खोल दी।


🚩वेलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन शुरू करवाया।


🚩क्रिसमस डे की जगह तुलसी पूजन दिवस प्रारम्भ करवाया।


🚩इन सब बातों से स्पस्ट होता है कि हिंदू संत आशाराम बापू को पूर्णतः षड्यंत्र के तहत फसाया गया हैं, आतंकवादियों को भी जमानत मिल जाती है पर 12 साल से 88 वर्षीय हिंदू संत आशाराम बापू को जमानत नही मिलना क्या ये बड़ी साजिस नही हैं?


🚩जनता की मांग है कि बापू आशारामजी को शीघ्र रिहा करना ही चाहिए।


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Wednesday, April 24, 2024

खालसा फ़ौज के 200 साल पुराने हथियार पर भगवान विष्णु का मंत्र, खालिस्तानी प्रोपेगंडा ध्वस्त

25 April 2024

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🚩सोशल मीडिया पर सिख इतिहास के विशेषज्ञ पुनीत साहनी ने एक तस्वीर शेयर की है। उन्होंने बताया कि ये सिखों की खालसा फ़ौज का हथियार है, जिसे चक्कर कहते हैं। ये लगभग 200 वर्ष पुराना है। साथ ही इस पर सोने से एक मंत्र अंकित है, जो गुरु अर्जुन देव द्वारा रचित है। इसे ‘रक्षा मंत्र’ कहा जाता है, अर्थात रक्षा के लिए इसमें प्रार्थना की गई है। ये सहस्कृति भाषा में रचित है, जो संस्कृत का ही एक रूप है। गुरु नानक देव जी ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था।


🚩पुनीत साहनी ने बताया कि इस मंत्र में भगवान विष्णु से प्रार्थना की गई है। बता दें कि खालिस्तानी अक्सर हिन्दुओं और सिखों को विभाजित करने में लगे रहते हैं। वो सिख धर्म को सनातन का हिस्सा नहीं मानते और इसे हिन्दू विरोधी बता कर प्रचारित करने में लगे रहते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि सिखों के सभी गुरु हिन्दू देवी-देवताओं की उपासना करते थे। गुरु गोविन्द सिंह माँ दुर्गा की पूजा करते थे, उन्होंने रामकथा भी लिखी। उक्त चक्कर पर अंकित मंत्र है:

🚩सिर मस्तक रख्या पारब्रहमं हस्त काया रख्या परमेस्वरह॥

आतम रख्या गोपाल सुआमी धन चरण रख्या जगदीस्वरह॥

सरब रख्या गुर दयालह भै दूख बिनासनह॥

भगति वछल अनाथ नाथे सरणि नानक पुरख अचुतह ॥५२॥


🚩ये मंत्र सिखों की सबसे पवित्र पुस्तक गुरु ग्रन्थ साहिब में लिखा हुआ है। इसका अर्थ है – “सिर, माथा, हाथ, शरीर, जीवात्मा, पैर, धन-पदार्थ -जीवों की हर तरह से रक्षा करने वाला परमब्रह्म परमेश्वर गोपाल, स्वामी, जगदीश्वर, सबसे बड़ा दया का घर परमात्मा ही है। वही सारे दुःखों का नाश करने वाला है। हे नानक! वह प्रभु निआसरों का आसरा है, भक्ति को प्यार करने वाला है। उस अविनाशी सर्व-व्यापक प्रभु का आसरा ले।” बता दें कि गोपाल और जगदीश्वर भगवान श्रीकृष्ण/विष्णु को कहा जाता है।

https://twitter.com/puneet_sahani/status/1781151949821247952?t=NXrdqpo7eDCpiVeSMIZ6sg&s=19


🚩‘विष्णु सहस्रनाम’ में भगवान विष्णु के जो नाम दर्ज हैं, उन्हीं का यहाँ इस्तेमाल किया गया है। इस इतिहास को जानने के बाद लोगों ने लिखा कि खालिस्तानी अपनी जड़ों को नकार तो सकते हैं, उन्हें मिटा नहीं सकते। हालाँकि, पुनीत साहनी का मानना है कि ये सब खालिस्तानी गुरुद्वारों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बिलकुल उन पाकिस्तानियों की तरह है जिन्हें न सिर्फ अपने इतिहास को नकारना, बल्कि मिटाना भी सिखाया जाता है।


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भगवान हनुमानजी किनके अवतार थे ? और उनके पास कितनी सिद्धियां थीं ? जानिए.....

23 April 2024

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🚩हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग में चैत्र पूर्णिमा की पावन तिथि पर हुआ । तब से हनुमान जयंती का उत्सव मनाया जाता है । इस दिन हनुमान जी का तारक एवं मारक तत्त्व अत्याधिक मात्रा में अर्थात अन्य दिनों की तुलना में 1 सहस्र गुना अधिक कार्यरत होता है । इससे वातावरण की सात्त्विकता बढती है एवं रज-तम कणों का विघटन होता है । विघटन का अर्थ है, ‘रज-तम की मात्रा अल्प होना।’ इस दिन हनुमान जी की उपासना करने वाले भक्तों को हनुमान जी के तत्त्व का अधिक लाभ होता है।


🚩ज्योतिषियों की गणना अनुसार हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6:03 बजे हुआ था । हनुमान जी भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान हैं।


🚩हनुमान जी के पिता सुमेरू पर्वत के वानरराज राजा केसरी तथा माता अंजना हैं । हनुमान जी को पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पवन देवता ने हनुमान जी को पालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


🚩हनुमानजी को बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि हनुमान जी का शरीर वज्र की तरह है।


🚩पृथ्वी पर सात मनीषियों को अमरत्व (चिरंजीवी) का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं । हनुमानजी आज भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं।


🚩हनुमानजी को एक दिन अंजनी माता फल लाने के लिये आश्रम में छोड़कर चली गई। जब शिशु हनुमानजी को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने आकाश में उड़ने लगे । उनकी सहायता के लिये पवन भी बहुत तेजी से चला। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने दिया । जिस समय हनुमान जी सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था । हनुमान जी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया । उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की “देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे । आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है।”


🚩राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े । राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई।


🚩हनुमान की यह दशा देखकर वायुदेव को क्रोध आया । उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक दी । जिससे संसार का कोई भी प्राणी साँस न ले सका और सब पीड़ा से तड़पने लगे । तब सारे सुर,असुर, यक्ष, किन्नर आदि ब्रह्मा जी की शरण में गये । ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये । वे मूर्छित हनुमान जी को गोद में लिये उदास बैठे थे । जब ब्रह्माजी ने उन्हें जीवित किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों की पीड़ा दूर की । फिर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान दिया कि कोई भी शस्त्र इनके अंग को हानि नहीं कर सकता । इन्द्र ने भी वरदान दिया कि इनका शरीर वज्र से भी कठोर होगा । सूर्यदेव ने कहा कि वे उसे अपने तेज का शतांश प्रदान करेंगे तथा शास्त्र मर्मज्ञ होने का भी आशीर्वाद दिया। वरुण ने कहा कि मेरे पाश और जल से यह बालक सदा सुरक्षित रहेगा । यमदेव ने अवध्य और निरोग रहने का आशीर्वाद दिया । यक्षराज कुबेर,विश्वकर्मा आदि देवों ने भी अमोघ वरदान दिये।


🚩इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत मे हनु) टूट गई थी । इसलिये उनको “हनुमान” नाम दिया गया। इसके अलावा ये अनेक नामों से प्रसिद्ध है जैसे बजरंग बली, मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, बालाजी महाराज आदि । इस प्रकार हनुमान जी के 108 नाम हैं और हर नाम का मतलब उनके जीवन के अध्यायों का सार बताता है।


🚩एक बार माता सीता ने प्रेम वश हनुमान जी को एक बहुत ही कीमती सोने का हार भेंट में देने की सोची लेकिन हनुमान जी ने इसे लेने से मना कर दिया । इस बात से माता सीता गुस्सा हो गई तब हनुमानजी ने अपनी छाती चीर का उन्हें उसे बसी उनकी प्रभु राम की छव‍ि दिखाई और कहा क‍ि उनके लिए इससे ज्यादा कुछ अनमोल नहीं।


🚩हनुमानजी के पराक्रम अवर्णनीय है । आज के आधुनिक युग में ईसाई मिशनरियां अपने स्कूलों में पढ़ाती है कि हनुमानजी भगवान नही थे एक बंदर थे । बन्दर कहने वाले पहले अपनी बुद्धि का इलाज कराओ। हनुुमान जी शिवजी का अवतार हैं। भगवान श्री राम के कार्य में साथ देने (राक्षसों का नाश और धर्म की स्थापना करने ) के लिए भगवान शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण किया था।


🚩मनोजवं मारुततुल्य वेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।


वातात्मजं वानरयूथ मुख्य, श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये।


🚩‘मन और वायु के समान जिनकी गति है, जो जितेन्द्रिय है, बुद्धिमानों में जो अग्रगण्य हैं, पवनपुत्र हैं, वानरों के नायक हैं, ऐसे श्रीराम भक्त हनुमान की शरण में मैं हूँ।


🚩जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो, वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे..।


🚩बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन – कुमार।


बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।


चौपाई–अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।


अस बर दीन्ह जानकी माता।।


🚩यह हनुमान चालीसा की एक चौपाई जिसमें तुलसीदास जी लिखते हैं कि हनुमानजी अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीता माता ने उन्हें वरदान दिया। यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है जिसकी बदौलत हनुमान जी ने असंभव से लगने वाले काम आसानी से सम्पन किये थे। आइये अब हम आपको इन अष्ट सिद्धियों, नौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताते हैं।


🚩आठ सिद्धयाँ :


हनुमानजी को जिन आठ सिद्धियों का स्वामी तथा दाता बताया गया है वे सिद्धियां इस प्रकार हैं-


🚩1.अणिमा: इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।


🚩इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने तब किया जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।


🚩2. महिमा: इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।


🚩जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था।


इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।


🚩3. गरिमा: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।


🚩गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर रूप धारक करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया। पवनपुत्र हनुमान के भाई थे भीम क्योंक‍ि वह भी पवनपुत्र के बेटे थे ।


🚩4. लघिमा: इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।


🚩जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचे, तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही सीता माता को अपना परिचय दिया था।


🚩5. प्राप्ति: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।


🚩रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।


🚩6. प्राकाम्य: इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ ही, वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को प्राप्त कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।


🚩इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल तक प्राप्त कर लिया है।


🚩7. ईशित्व: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।


ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।


🚩8. वशित्व: इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।


🚩वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।


🚩नौ निधियां :


हनुमान जी प्रसन्न होने पर जो नव निधियां भक्तों को देते है वो इस प्रकार हैं :-


🚩1. पद्म निधि : पद्मनिधि लक्षणों से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है।


🚩2. महापद्म निधि : महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है।


🚩3. नील निधि : नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढ़ी तक रहती है।


🚩4. मुकुंद निधि : मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।


🚩5. नन्द निधि : नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणोंवाला होता है वही कुल का आधार होता है।


🚩6. मकर निधि : मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करनेवाला होता है।


🚩7. कच्छप निधि : कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है।


🚩8. शंख निधि : शंख निधि एक पीढ़ी के लिए होती है।


🚩9. खर्व निधि : खर्व निधिवाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रित फल दिखाई देते हैं ।


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Tuesday, April 23, 2024

अरबपति ने 200 करोड़ की प्रॉपर्टी दान करके पत्नी के साथ लिया संन्यास

24 April 2024

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🚩विश्व में एक तरफ पैसा कमाने की होड़ लगी हुई है और जीवन में पैसा ही सबकुछ है , पैसा नही है तो कुछ नही एक तरफ ऐसी विचारधारा चल रही है दूसरी तरफ अपनी अरबों की संपत्ति दान करके संन्यास ले रहे हैं, जैसे राज कुमार ने राजपाट छोड़कर संन्यास लिया और भगवान बुद्ध बन गए, राजा भृतहारी, राजा गोपीचंद जैसे अनेक उदाहरण है जिन्होंने राजपाट धन संपत्ति भोग विलास छोड़कर संन्यास ले लिया और कठोर तपस्या किया और भगवान की प्राप्ति कर लिया फिर समाज में ज्ञान, सुख, शांति बांटकर लाखो करोड़ो लोगो के दिलों में सुख शांति पहुंचाई। इसलिए जीवन में सबकुछ पैसे ही नही शांति और आनंद की अत्यंत आवश्कता है और वो केवल भगवान की भक्ति, ज्ञान से प्राप्त होती हैं।


🚩200 करोड़ रुपयों दान करके बने संन्यासी 


🚩गुजरात के अरबपति व्यापारी और उनकी पत्नी ने अपनी जीवन भर की सारी कमाई (करीबन 200 करोड़ रुपयों) को दान करके जैन संन्यासी बनने का निर्णय लिया है। इस व्यापारी का नाम भावेश भंडारी है। वह गुजरात के हिम्मतनगर के रहने वाले हैं।


🚩मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भावेश भंडारी का जन्म एक समृद्ध परिवार में हुआ था। जब उन्होंने कारोबार की दुनिया में कदम रखा तो कंस्ट्रक्शन समेत कई क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमाई। धीरे-धीरे वह भारत के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए। मगर, समय के साथ आगे बढ़ने की इच्छा की जगह उनका मन मोह-माया से उजड़ने लगा। नतीजतन उन्होंने खुद को अपने काम धंधे से दूर कर लिया और फिर जैन दीक्षा लेने का निर्णय लिया।


🚩आपको जानकर शायद हैरानी हो कि भावेश भंडारी के साथ न केवल उनकी पत्नी ने संन्यासी होने का जीवन चुना है, बल्कि उनके 2 बच्चे भी उनसे पहले सांसरिक मोह-माया त्यागकर दीक्षा ले चुके हैं। हाल में दोनों पति-पत्नी ने 4 किलोमीटर की शोभा यात्रा भी निकाली थी जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।

https://twitter.com/PTI_News/status/1780055695531938303?t=HgcxIIAapcOeg-7l0VloLg&s=19


🚩बता दें कि पूरे परिवार द्वारा भिक्षु बनने का निर्णय लिए जाने के बाद भावेश भंडारी ने अपनी 200 करोड़ रुपए की संपत्ति को दान कर दिया। हालाँकि अभी उन्होंने औपचारिक रूप से दीक्षा नहीं ली है। 22 अप्रैल को संभवत: वह जैन भिक्षु बनने के लिए दीक्षा लेंगे। उसके बाद उन्हें भिक्षुओं जैसा जीवन ही जीना होगा। जैसे अपनी प्रतिज्ञा लेने के बाद उन्हें पारिवारिक रिश्तों से दूर रहना होगा। किसी सांसरिक वस्तु का भोग करने की अनुमति नहीं होगी। वो सिर्फ नंगे पाँव चलेंगे और भिक्षा माँगेंगे। उन्हें सिर्फ सफेद वस्त्र पहनने होंगे, वस्तु के नाम पर एक कटोरा रखना होगा और राज्यारोहण। इसका प्रयोग वह कहीं बैठने से पहले जगह साफ करने के लिए करेंगे।


🚩पूर्व में भी कई अरबों पति और राजे महाराजे अपना धन वैभव छोड़कर ईश्वर के रास्ते चले है जिसके कारण उन्होंने वास्तविक सुख, आनंद और शांति पाई है।


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Sunday, April 21, 2024

महावीर स्वामी जी को निंदकों ने कितना पीड़ित किया था? जानिए.....

 22 April 2024

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🚩जैन धर्म के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मकल्याणक महोत्सव चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन है,जो सम्पूर्ण विश्व में बहुत धूमधाम से मनाया जाएगा।


🚩भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत बताए, जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं। ये सिद्धांत हैं- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह।


🚩जैसे हर संत के जीवन में देखा जाता है,वैसे महावीर स्वामी के समय भी देखा गया…… जहाँ उनसे लाभान्वित होनेवाले लोग थे, वहीं समाजकंटक निंदक भी थे ।


🚩उनमें से पुरंदर नाम का निंदक बड़े ही क्रूर स्वभाव का था । वह तो महावीर जी के मानो पीछे ही पड़ गया था । उसने कई बार महावीर स्वामी को सताया, उनका अपमान किया पर संत ने माफ कर दिया ।



🚩एक दिन महावीर स्वामी (Mahavir Swami) पेड़ के नीचे ध्यानस्थ बैठे थे । तभी घूमते हुए पुरंदर भी वहाँ पहुँच गया । वह महावीर जी को ध्यानस्थ देख आग-बबूला होकर बड़बड़ाने लगा ,अभी इनका ढोंग उतारता हूँ,अभी मजा चखाता हूँ….।


और आवेश में आकर उसने एक लकड़ी ली और उनके कान में खोंप दी । कान से रक्त की धार बह चली लेकिन महावीर जी के चेहरे पर पीड़ा का कोई चिह्न न देखकर वह और चिढ़ गया और कष्ट देने लगा ।


🚩इतना सब होने पर भी महावीरजी किसी प्रकार की कोई पीड़ा को व्यक्त किये बिना शांत ही बैठे रहे । परंतु कुछ समय बाद अचानक उनका ध्यान टूटा, उन्होंने आँख खोलकर देखा तो सामने पुरंदर खड़ा है । उनकी आँखों से आँसू झरने लगे ।


🚩पुरंदर ने पूछा : क्या पीड़ा के कारण रो रहे हो ?


महावीर स्वामी : नहीं, शरीर की पीड़ा के कारण नहीं,


पुरंदर : तो किस कारण रो रहे हो ?


🚩“मेरे मन में यह व्यथा हो रही है कि मैं निर्दोष हूँ फिर भी तुमने मुझे सताया है तो तुम्हें कितना कष्ट सहना पड़ेगा ! कैसी भयंकर पीड़ा सहनी पड़ेगी ! तुम्हारी उस पीड़ा की कल्पना, करके मुझे दुःख हो रहा है ।”


🚩यह सुन पुरंदर मूक हो गया और पीड़ा की कल्पना से सिहर उठा ।


🚩पुरंदर की नाई गोशालक नामक एक कृतघ्न गद्दार ने भी महावीर स्वामी (Mahavir Swami) को बहुत सताया था ।


🚩महावीर जी के 500 शिष्यों को उनके खिलाफ खड़ा करने का उसका षड्यंत्र भी सफल हो गया था । उस दुष्ट ने महावीर स्वामी जी को जान से मारने तक का प्रयत्न किया लेकिन जो जैसा बोता है उसे वैसा ही मिलता है । धोखेबाज लोगों की जो गति होती है, गोशालक का भी वही हाल हुआ ।


🚩 सच्चे संतों के निंदको व कुप्रचारको ! अब भी समय है, कर्म करने में सावधान हो जाओ । अन्यथा जब प्रकृति तुम्हारे कुकर्मों की तुम्हें सजा देगी उस समय तुम्हारी वेदना पर रोनेवाला भी कोई न मिलेगा ।


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Saturday, April 20, 2024

हिंदू विवाह में रीति-रिवाज और उनका महत्व

21 April 2024

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🚩हिंदू धर्म में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है। यह पति और पत्नी के बीच एक आध्यात्मिक संबंध है जो उन्हें एक साथ जीवन भर रहने के लिए बाध्य करता है। हिंदू विवाह में कई रीति-रिवाज और परंपराएं शामिल हैं जो इस बंधन को और अधिक पवित्र और मजबूत बनाती हैं।


🚩परंपरागत सौंदर्य में गहराई:

हिंदू विवाह के रीति-रिवाजों में सौंदर्य और गहराई होती हैं, जो इसको विशेष बनाती हैं। विवाह समारोहों में पूरे हवाएं भगवान की कृपा और आशीर्वाद की ओर इशारा करती हैं। रंग-बिरंगे वस्त्र, शानदार आभूषण, और परंपरागत संगीत के साथ रीति-रिवाज विवाह को यादगार बना देते हैं।


🚩परिवार समर्थन और एकता का प्रतीक:

रीति-रिवाजों में छुपा होता है एक विशेष आदर्श, जिसमें परिवार का समर्थन और एकता का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक परिवार को एक साथ बाँधने वाला एक महत्वपूर्ण रूप है जो विवाह के माध्यम से स्थापित होता है।


🚩धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व:

रीति-रिवाजें हिंदू धर्म के मौल्यों और आध्यात्मिकता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। विवाह के साक्षात्कार में धार्मिक संबंध स्थापित करना और आध्यात्मिक आदर्शों का पालन करना एक व्यक्ति को अपने जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं में मदद कर सकता है।


🚩समृद्धि की ओर प्रगाधित:

रीति-रिवाजों के पालन से विवाह को एक समृद्धिपूर्ण और सुखमय जीवन की ओर प्रगाधित किया जा सकता है। सांस्कृतिक रूप से शुद्ध और धार्मिक तत्वों का पालन करना व्यक्ति को समृद्धि और शांति की दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है।


🚩हिंदू विवाह के रीति-रिवाज


🚩हिंदू विवाह के रीति-रिवाज को आमतौर पर 3 भागों में बांटा जाता है:


🚩पूर्व-विवाह समारोह

विवाह समारोह

विवाह के बाद के समारोह


🚩पूर्व-विवाह समारोह


🚩पूर्व-विवाह समारोह में वे सभी रीति-रिवाज शामिल होते हैं जो विवाह से पहले होते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:


🚩अंतर्दीक्षा: यह एक अनुष्ठान है जिसमें वर और वधू अपनी भावनाओं और इच्छाओं का मूल्यांकन करते हैं।


🚩परिवार के साथ चर्चा: दोनों परिवारों के बीच विवाह के लिए बातचीत होती है।


🚩शादी की तारीख और समय का निर्धारण: एक पुजारी की मदद से शादी की तारीख और समय का निर्धारण किया जाता है।


🚩शादी की व्यवस्था: शादी के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाओं को किया जाता है, जैसे कि भोजन, सजावट, और संगीत।

विवाह समारोह


🚩विवाह समारोह में वे सभी रीति-रिवाज शामिल होते हैं जो विवाह के दिन होते हैं। 


🚩इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:


🚩हवन: यह एक अनुष्ठान है जिसमें अग्नि के सामने वर और वधू को वरमाला पहनाया जाता है।


🚩पाणिग्रहण: यह एक अनुष्ठान है जिसमें वर और वधू एक दूसरे के हाथों को पकड़ते हैं और एक-दूसरे को जीवन भर का साथ देने का वादा करते हैं।


🚩मंगलासूत्र बंधन: यह एक अनुष्ठान है जिसमें वर वधू के गले में मंगलसूत्र पहनाता है। मंगलसूत्र को विवाहित महिला की पहचान का प्रतीक माना जाता है।


🚩सप्तपदी: यह एक अनुष्ठान है जिसमें वर और वधू सात फेरे लेते हैं। सात फेरे विवाह के सात वचनों का प्रतीक हैं।


🚩अग्नि परिक्रमा: यह एक अनुष्ठान है जिसमें वर और वधू अग्नि के चारों ओर सात बार चक्कर लगाते हैं। यह अनुष्ठान विवाहित जोड़े के बीच विश्वास और प्रेम को मजबूत करने का प्रतीक है।


🚩विवाह के बाद के समारोह


🚩विवाह के बाद के समारोह में वे सभी रीति-रिवाज शामिल होते हैं जो विवाह के बाद होते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:


🚩भात-भोजन: यह एक समारोह है जिसमें वर और वधू को पहली बार घर पर भोजन कराया जाता है।


🚩नंदलाज: यह एक समारोह है जिसमें दूल्हे के घरवालों को वधू के घर से उपहार दिए जाते हैं।


🚩विदाई: यह एक समारोह है जिसमें दुल्हन अपने घर से विदा होती है और अपने नए घर जाती है।


🚩हिंदू विवाह में रीति-रिवाजों का महत्व


🚩हिंदू विवाह में रीति-रिवाजों का बहुत महत्व है। ये रीति-रिवाज विवाह को एक पवित्र बंधन बनाते हैं और इसे और अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला बनाते हैं।

पूर्व-विवाह समारोह में शामिल रीति-रिवाज विवाह के लिए दोनों पक्षों की तैयारी का प्रतीक हैं।


🚩विवाह समारोह में शामिल रीति-रिवाज विवाह के सात वचनों को साकार करते हैं।


🚩विवाह के बाद के समारोह में शामिल रीति-रिवाज विवाहित जोड़े के बीच प्रेम और विश्वास को मजबूत करते हैं। ये रीति-रिवाज नए जोड़े को उनके नए जीवन की शुरुआत में आशीर्वाद और समर्थन प्रदान करते हैं।


🚩हिंदू विवाह की रीति-रिवाज आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। ये रीति-रिवाज विवाह को एक महत्वपूर्ण और यादगार अनुभव बनाते हैं। वे वर और वधू के साथ-साथ उनके परिवारों और दोस्तों के लिए जीवन भर की खुशियों का आधार बनते हैं।


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Friday, April 19, 2024

IIT बॉम्बे में रामायण के नाम पर हिन्दू धर्म का किया बड़ा अपमान

20 April 2024

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🚩राष्ट्र विरोधी के निशाने पर हमेशा हिंदू धर्म रहा है, लगातार हिंदू धर्म का अपमान किया जा रहा है पर अभी तक कोई सरकार ने ठोस कार्रवाई नही की ।

🚩कभी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान तो कभी साधु-संतों का अपमान तो कभी हिंदू संस्कृति का मजाक तो कभी हिन्दू त्यौहार पर खिल्ली उड़ाना आदि अनेक तरीके फिल्मों, सीरियलों, विज्ञापनों , नाटिकाओं आदि द्वारा हिंदुओं की भावनाओ को आहत किया जा रहा है पर अभी तक इसपर कोई रोक नहीं लगा पाया।


🚩IIT बॉम्बे में रामायण पर खेले जा रहे नाटक के दौरान हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने का मामला सामने आया है। इसके कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इससे पहले पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में एक ऐसा ही मामला सामने आया था। दरअसल, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित IIT बॉम्बे में कल्चरल फेस्ट का आयोजन किया गया था। 31 मार्च को ‘परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल’ हुआ। ये रामायण पर आधारित था और इसमें भगवान राम की ही आलोचना की गई।


🚩‘राहोवन’ नाम के इस नाटक में नारीवादी मुद्दों के नाम पर भगवान राम के किरदार से ही छेड़छाड़ की गई। पात्रों के नामों में हल्का बदलाव किया गया था। इसमें सीता कहती है, “स्वामी, ऐसी अवस्था में ये अकेली सुहागन अपना हृदय सँभाल किसके साथ करे?” इस पर सामने से राम का पात्र कहता है, “खोल”। ‘क्या’ का वो जवाब देता है – ‘संकोच’। एक अन्य दृश्य में राम से कहलवाया गया है, “तू किसी दूसरे कबीले में जा किसी दूसरे मर्द के यहाँ रह आई, इसीलिए ये कबीला तेरा स्वीकार वापस नहीं करेगा।”


🚩इस पर सीता कहती है, “दूसरा मर्द, अरे बंदी थी मैं वहाँ?” इस पर राम आरोप लगाते हैं कि सीता ने कबीले की सीमा लाँघी, रेखा का उल्लंघन किया। राम से कहलवाया गया है, “तू कुछ नहीं कहेगी, सिर्फ मेरी सुनेगी।” फिर सीता कहती हैं, “मर्द होने निकला था तू, इंसान बनना भूल गया।” इस पर राम कहते हैं, “अब एक औरत समझाएगी मुझे कि मर्द बनना क्या होता है?” एक दृश्य में सीता कहती है, “एक अलग दुनिया है वहाँ। और अच्छा हुआ, अघोरा (रावण) मुझे वहाँ लेकर गया।”


🚩सीता आगे कहती हैं, “वहाँ की औरतों को अच्छी प्रतिष्ठा मिलती है। उसने मुझसे खुद बोला कि मेरी अनुमति के बिना मुझे छुएगा भी नहीं। उसमें मुझे ऐसा मर्द दिखा जो मुझे इस कबीले में नहीं दिखा। तुमलोग जश्न मना रहे थे न कि दानव को मार दिया। असली दानव तो आपने आज तक मारा ही नहीं है।” रामायण पर नाटक के नाम पर आजकल हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान का एक ट्रेंड सा आया हुआ है। इसमें पौराणिक पात्रों से कुछ भी कहलवा दिया जाता है।


🚩हाल ही में पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में ऐसे ही एक मामले को लेकर न सिर्फ आंतरिक जाँच समिति बनी है, बल्कि FIR भी दर्ज हुई है। HoD को भी जाँच पूरी होने तक हटाया गया है। सीता हरण वाले दृश्य में दिखाया गया कि माँ सीता रावण को गोमांस खाने के लिए दे रही हैं। इसमें सीता वाले किरदार से कहलवाया गया है, “मैं शादीशुदा हूँ, लेकिन हम दोस्त बन सकते हैं।” इसमें हनुमान जी की पूँछ को एंटीना के रूप में दिखाया गया। सीता को रावण के साथ नाचते हुए भी दिखाया गया।


🚩मानवता के विरोधियों के निशाने पर हमेशा हिंदू धर्म रहा है, बॉलीवुड के जरिये हमेशा हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया है।


🚩हिंदुस्तानी इस षड्यंत्र को समझ गए हैं और कुछ हिंदुनिष्ठ लोग खुलकर विरोध भी करने लगे है।


🚩जनता की मांग है कि सरकार को ऐसी फिल्मों , सीरियलों, नाटिकाओं ओर शो पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए।


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Thursday, April 18, 2024

हाल के वर्षों में हिंसा ने रामनवमी उत्सव को कैसे प्रभावित किया है ?

19 April 2024

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🚩भगवान श्री रामजी के अवतरण पर रामनवमी पर हिंदू हर्षोल्लास से मानते है। लेकिन कट्टरपंथी हिंदुओं को अपने त्योहार भी खुशी से मनाने नही देते हैं, कुछ दिन पहले मुस्लिम समुदाय का त्योहार ईद मनाया गया लेकिन किसी भी हिन्दू ने एक पत्थर भी नही मारा जबकि कई जगह पर सड़को पर भी नमाज पढ़ी गई फिर भी कोई हिंसा नही हुई, लेकिन जैसी ही राम नवमी पर हिंदू अपना त्योहार मनाने लगे तो इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा पर उतर आए और कुछ तथाकथित सेकुलर नेता बोलते है की संवेदनसिल इलाके से हिंदुओं को यात्रा नही निकालना चाहिए लेकिन सवाल ये है की संवेदनसिल इलाका कहा से आ गया भारत देश एक ही है, पाकिस्तान नही है जब भारत देश एक ही है फिर संवेदनसिल इलाका कोई नही होता है, वोट बैंक के लिए कुछ स्वार्थी नेताओं ने संवेदनसिल इलाका बना दिया है, पूरा भारत एक ही हैं। सभी धर्मो के लोगों को अपना त्योहार शांतिपूर्ण मनाना देना चाहिए।


🚩हाल के वर्षों में, रामनवमी समारोह के परिणामस्वरूप देश भर में हिंसक झड़पें हुई हैं। जो अनिवार्य रूप से भगवान राम के जन्म का उत्सव है, उसने 2017 के बाद से एक हिंसक मोड़ ले लिया है।


🚩हाल के वर्षों में, रामनवमी समारोह ने हिंसक रूप ले लिया है। झड़पों और दंगों से घिरे, भगवान राम के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए 2017 से जुलूसों पर पत्थरों, चाकुओं और यहां तक कि बंदूकों के साथ हमला किया गया है। जैसे ही हम इस वर्ष के जश्न की ओर बढ़ते हैं, पिछले वर्षों की हिंसा का संकेत मिलता है।


🚩राम नवमी एक हिंदू त्यौहार है जो हिंदू धर्म में सबसे प्रतिष्ठित देवताओं में से एक, भगवान राम के जन्मदिन का जश्न मनाता है। यह त्यौहार चैत्र नवरात्रि उत्सव के अंत का भी प्रतीक है।


🚩रामनवमी से एक दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद और अंजनी पुत्र सेना को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जुलूस निकालने की इजाजत दे दी थी।


🚩2017 से, पश्चिम बंगाल में रामनवमी समारोह के दौरान झड़पें देखी गई हैं और पिछले साल भी कुछ अलग नहीं था। हावड़ा, दालखोला और पूर्वी राज्य के अन्य शहरों में झड़पें हुईं। हालाँकि, बंगाल एकमात्र राज्य नहीं है जहाँ रामनवमी समारोह हिंसा का शिकार हुआ।   


🚩रामनवमी और हिंसा - एक नज़र


🚩राम नवमी उत्सव कम से कम छह राज्यों - पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में हिंसक हो गया।


🚩पश्चिम बंगाल में हावड़ा, हुगली, शिबपुर और दालखोला से हिंसा की खबरें आईं। पूरे शहर में वाहनों को आग लगा दी गई, दुकानों में तोड़फोड़ की गई और पथराव किया गया। बंगाल में भी झड़पों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।


🚩महाराष्ट्र में , औरंगाबाद में एक राम मंदिर के बाहर दो व्यक्तियों के बीच विवाद झड़प में बदल गया और लोगों ने पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी। इन झड़पों में 51 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। औरंगाबाद के साथ-साथ मलाड और जलगांव में भी झड़प हुई.


🚩गुजरात में भी हिंसा भड़क उठी , जहां वडोदरा में दो रामनवमी जुलूसों पर हमला किया गया। विश्व हिंदू परिषद द्वारा निकाले गए जुलूस पर फ़तेहपुर इलाके में हमला किया गया। हालांकि झड़प का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, सोशल मीडिया पर रिपोर्टों और वीडियो में भीड़ को जुलूस के दौरान सांप्रदायिक रूप से आरोपित टिप्पणियां करते हुए दिखाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप तनाव बढ़ गया।


🚩रामनवमी के दौरान कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में भी हिंसक झड़पें हुईं। दोनों राज्यों में, जैसे ही रामनवमी जुलूस मस्जिदों से होकर गुजरा, झड़पें बढ़ गईं।   


🚩इसके अलावा, बिहार में , रामनवमी जुलूस के हजरतगंज मोहल्ला क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश के बाद झड़पें हुईं, जिसकी अनुमति नहीं दी गई थी।


🚩इन छह राज्यों के अलावा, हरियाणा में भी रामनवमी के दौरान सांप्रदायिक तनाव की सूचना मिली, जब एक जुलूस के सदस्यों ने एक मस्जिद पर अपने झंडे फहराए और जुलूस के दौरान सांप्रदायिक नारे लगाए।


🚩रामनवमी के दौरान हिंसा कोई दुर्लभ घटना नहीं है लेकिन तुलनात्मक रूप से सीमित थी। 2012 से 2015 के बीच पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से कुछ झड़पें हुईं।


🚩हालाँकि, 2017 के बाद से त्योहार के दौरान हिंसक झड़पों की घटनाएं बढ़ गईं। 2018 में, देश भर में झड़पों या दंगों की 17 घटनाएं दर्ज की गईं और 2022 में, पांच राज्यों (झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, गुजरात और गोवा) और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी राम नवमी के दौरान हिंसा की सूचना मिली। - आउटलुक


🚩राम नवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की गई, हर जगह निशाने पर थे हिंदू। पत्थरबाजी से एक कदम आगे बढ़ बमबाजी और आगजनी करके हिंदुओं को खौफ में रखने का षड्यंत्र किया गया। दो कदम आगे बढ़ प्रोपेगेंडा फैलाया गया कि हिंसा हिंदुओं ने ही की, वो मुस्लिमों को सता रहे। ‘शांतिप्रिय’ इस्लामी इकोसिस्टम के कट्टर मुस्लिम सिपाहियों ने इस प्रोपेगेंडा की पटकथा लिखी। इसे दूर-दूर तक फैलाने का काम किया वामपंथी इकोसिस्टम ने।


🚩हिंदुओं की मांग है की हम किसी अन्य त्योहार में दखल नहीं करते है फिर हमारे त्योहार हमे शांतिपूर्ण क्यों नही मनाने दिया जा रहा है? इनपर सरकार कड़ी कार्यवाही करें यही मांग हैं।


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Wednesday, April 17, 2024

भगवान श्री राम का जनमानस पर इतना गहरा प्रभाव क्यों हैं? उनमें कितनी कला थी?

18 April 2024

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🚩वर्तमान संदर्भों में भी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों का जनमानस पर गहरा प्रभाव है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम से श्रेष्ठ कोई देवता नहीं, उनसे उत्तम कोई व्रत नहीं, कोई श्रेष्ठ योग नहीं, कोई उत्कृष्ट अनुष्ठान नहीं। उनके महान चरित्र की उच्च वृत्तियाँ जनमानस को शांति और आनंद उपलब्ध कराती हैं।


🚩संपूर्ण भारतीय समाज के जरिए एक समान आदर्श के रूप में भगवान श्रीराम को उत्तर से लेकर दक्षिण तक संपूर्ण जनमानस ने स्वीकार किया है। उनका तेजस्वी एवं पराक्रमी स्वरूप भारत की एकता का प्रत्यक्ष चित्र उपस्थित करता है।


🚩प्रभु श्रीराम को पुरुषों में सबसे उत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। वे एक आदर्श व्यक्तित्व लिए हुए थे। एक धनुष और एक वचन धारण करने वाले थे। उन्होंने एक पत्नी व्रत भी धारण कर रखा था। उनमें इसी तरह के 16 गुण थे। 16 गुणों के अलावा वे 12 कलाओं से युक्त थे।


🚩श्रीराम हैं 12 कलाओं से युक्त 


🚩16 कलाओं से युक्त

व्यक्ति ईश्वरतुल्य होता है या कहें कि स्वयं ईश्वर ही होता है। पत्थर और पेड़ 1 से 2 कला के प्राणी हैं। पशु और पक्षी में 2 से 4 कलाएं होती हैं। साधारण मानव में 5 कला और संस्कृति युक्त समाज वाले मानव में 6 कला होती है।


🚩इसी प्रकार विशिष्ठ पुरुष में 7 और ऋषियों या महापुरुषों में 8 कला होती है। 9 कलाओं से युक्त सप्तर्षिगण, मनु, देवता, प्रजापति, लोकपाल आदि होते हैं। इसके बाद 10 और 10 से अधिक कलाओं की अभिव्यक्ति केवल भगवान के अवतारों में ही अभिव्यक्त होती है। जैसे वराह, नृसिंह, कूर्म, मत्स्य और वामन अवतार। उनको आवेशावतार भी कहते हैं। उनमें प्रायः 10 से 11 कलाओं का आविर्भाव होता है। परशुराम को भी भगवान का आवेशावतार कहा गया है।


🚩भगवान राम 12 कलाओं से तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं से युक्त हैं। यह चेतना का सर्वोच्च स्तर होता है। इसीलिए प्रभु श्रीराम को पुरुषों में उत्तम और भगवान और श्रीकृष्ण को जग के नाथ जगन्नाथ और जग के गुरु जगदगुरु कहते हैं। जग में सुंदर है दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम।


🚩16 गुणों से युक्त :


1. गुणवान (योग्य और कुशल)

2. किसी की निंदा न करने वाला (प्रशंसक, सकारात्मक)

3. धर्मज्ञ (धर्म का ज्ञान रखने वाला)

4. कृतज्ञ (आभारी या आभार जताने वाला विनम्रता)

5. सत्य (सत्य बोलने वाला और सच्चा)

6. दृढ़प्रतिज्ञ (प्रतिज्ञा पर अटल रहने वाला, दृढ़ निश्चयी)

7. सदाचारी (धर्मात्मा, पुण्यात्मा और अच्छे आचरण वाला, आदर्श चरित्र)

8. सभी प्राणियों का रक्षक (सहयोगी)

9. विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)

10. सामर्थशाली (सभी का विश्वास और समर्थन पाने वाला समर्थवान)

11. प्रियदर्शन (सुंदर मुख वाला)

12. मन पर अधिकार रखने वाला (जितेंद्रीय)

13. क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)

14. कांतिमान (चमकदार शरीर वाला और अच्छा व्यक्तित्व)

15. वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)

16. युद्ध में जिसके क्रोधित होने पर देवता भी डरें : (वीर, साहसी, धनुर्धारि, असत्य का विरोधी)



🚩आदिकवि ने उनके संबंध में लिखा है कि वे गाम्भीर्य में उदधि के समान और धैर्य में हिमालय के समान हैं। राम के चरित्र में पग-पग पर मर्यादा, त्याग, प्रेम और लोकव्यवहार के दर्शन होते हैं। राम ने साक्षात परमात्मा होकर भी मानव जाति को मानवता का संदेश दिया। उनका पवित्र चरित्र लोकतंत्र का प्रहरी, उत्प्रेरक और निर्माता भी है। इसीलिए तो भगवान राम के आदर्शों का जनमानस पर इतना गहरा प्रभाव है और युगों-युगों तक रहेगा।


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Tuesday, April 16, 2024

भगवान श्री राम का जन्म क्यों, कहा, कैसे हुआ था? उस समय माहोल कैसा था?

17 April 2024

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🚩श्री राम में अत्यंत विलक्षण प्रतिभा थी जिसके परिणामस्वरूप अल्प काल में ही वे समस्त विषयों में पारंगत हो गए। उन्हें सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों को चलाने तथा हाथी, घोड़े एवं सभी प्रकार के वाहनों की सवारी में उन्हें असाधारण निपुणता प्राप्त हो गई। वे निरंतर माता- पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे। उनका अनुसरण शेष तीन भाई भी करते थे। गुरुजनों के प्रति जितनी श्रद्धा भक्ति इन चारों भाइयों में थी, उतना ही उनमें परस्पर प्रेम और सौहार्द भी था। महाराज दशरथ का हृदय अपने चारों पुत्रों को देखकर गर्व और आनंद से भर उठता था।


🚩कैसे हुआ श्रीराम का जन्म :

रामचरितमानस के बालकांड के अनुसार पुत्र की कामना के चलते राजा दशरथ के कहने पर वशिष्ठजी ने श्रृंगी ऋषि को बुलवाया और उनसे शुभ पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। इस यज्ञ के बाद कौसल्या आदि प्रिय रानियों को यज्ञ का प्रसाद खाने पर पुत्र की प्राप्त हुई।


🚩2. कब हुआ था श्रीराम का जन्म :

पुराणों के अनुसार प्रभु श्रीराम का जन्म त्रेतायुग और द्वापर युग के संधिकाल में हुआ था। कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था। इसका मतलब 3102+2021 = 5123 वर्ष कलियुग के बीत चूके हैं। उपरोक्त मान से अनुमानित रूप से भगवान श्रीराम का जन्म द्वापर के 864000 + कलियुग के 5123 वर्ष = 869123 वर्ष अर्थात 8 लाख 69 हजार 123 वर्ष हो गए हैं प्रभु श्रीराम को हुए। परंतु यह धारणा इतिहासकारों के अनुसार सही नहीं है, जो वाल्मीकि रामायण में लिखा है वही सही माना जा सकता है।


🚩वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे, तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, बृहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8, 9)।... जन्म सर्ग 18वें श्लोक 18- 8-10 में महर्षि वाल्मीकिजी ने उल्लेख किया है कि श्री राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में हुआ था।


🚩मानस के बाल काण्ड के 190वें दोहे के बाद पहली चौपाई में तुलसीदासजी ने भी इसी तिथि और ग्रह-नक्षत्रों का जिक्र किया है।


🚩3. किस समय हुआ था श्रीराम का जन्म :

 दोपहर के 12.05 पर भगवान राम का जन्म हुआ था। उस समय भगवान का प्रिय अभिजित् मुहूर्त था। तब न बहुत सर्दी थी, न धूप थी।


🚩4. जन्म के समय के ग्रह-नक्षत्र की स्थिति : वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, ब्रहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8,9)1


🚩5. कहां हुआ था श्रीराम का जन्म :

 श्री राम का जन्म भारतवर्ष में सरयू नदी के पास स्थित अयोध्या नगरी में एक महल में हुआ था। अयोध्या को सप्त पुरियों में प्रथम माना गया है।


🚩7. जन्म के समय खुशनुमा था माहौलः

वह पवित्र समय सब लोकों को शांति देने वाला था। जन्म होते ही जड़ और चेतन सब हर्ष से भर गए। शीतल, मंद और सुगंधित पवन बह रहा था। देवता हर्षित थे और संतों के मन में चाव था। वन फूले हुए थे, पर्वतों के समूह मणियों से जगमगा रहे थे और सारी नदियां अमृत की धारा बहा रही थीं।


🚩8. देवता उपस्थित हुए :

जन्म लेते ही ब्रह्माजी समेत सारे देवता विमान सजा-सजाकर पहुंचे। निर्मल आकाश देवताओं के समूहों से भर गया। गंधर्वों के दल गुणों का गान करने लगे। सभी देवाता राम लला को देखने पहुंचे।


🚩9. नगर में हुआ हर्ष व्याप्त :

 राजा दशरथ ने नांदीमुख श्राद्ध करके सब जातकर्म-संस्कार आदि किए और द्वीजों को सोना, गो, वस्त्र और मणियों का दान दिया। संपूर्ण नगर में हर्ष व्याप्त हो गया। ध्वजा, पताका और तोरणों से नगर छा गया। जिस प्रकार से वह सजाया गया। चारों और खुशियां ही खुशियां थीं। घर-घर मंगलमय बधावा बजने लगा। नगर के स्त्री-पुरुषों के झुंड के झुंड जहां-तहां आनंदमग्न हो रहे हैं।


🚩धार्मिक ग्रंथों के अनुसार त्रेतायुग में भगवान राम जी का उद्देश्य रावण जैसे रक्षकों के अत्याचारों का खात्मा तथा अधर्म का नाश करके धर्म की स्थापना करना था।


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Monday, April 15, 2024

सभी को भगवान श्री रामलला के जन्मोत्सव की बधाईयां...

16 April 2024

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🚩17 अप्रैल बुधवार को श्रीराम नवमी का पर्व है। 

 त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्री रामजी का जन्म हुआ था।

इसलिए भारत सहित अन्य देशों में भी हिंदू धर्म को मानने वाले इस पर्व को बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं।


🚩हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम चन्द्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में रानी कौशल्या की कोख से, राजा दशरथ के घर में हुआ था।

 

🚩 राम भगवान विष्णु के अवतार हैं और इन्हें श्रीराम और श्रीरामचन्द्र के नामों से भी जाना जाता है। रामायण में वर्णन के अनुसार अयोध्या के सूर्यवंशी चक्रवर्ती सम्राट दशरथ ने पुत्रेश्टी यज्ञ (पुत्र प्राप्ती यज्ञ ) कराया जिसके फलस्वरूप उनके घर पुत्रों का जन्म हुआ।

 

🚩मर्यादा-पुरुषोत्तम राम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र थे। राम की पत्नी का नाम सीता था इनके तीन भाई थे- लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। हनुमान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं और भगवान राम ने गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र की बहुत सेवा की थी ।

 

🚩राम ने लंका के राजा रावण (जिसने अधर्म का पथ अपना लिया था) का वध किया। श्री राम की प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है। श्री राम ने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता, यहाँ तक कि पत्नी का भी साथ छोड़ा। इनका परिवार, आदर्श भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। राम रघुकुल में जन्मे थे, जिसकी परम्परा रघुकुल रीति सदा चलि आई प्राण जाई पर बचन न जाई की थी।

 

🚩 भगवान श्रीराम ने हर परिस्थितियों में अपने चित्त को सम रखा,भगवान राम सबसे मधुर-नम्रता से बात करते थे,वे नित्य सूर्योपासना करते,जप-ध्यान करते थे।

 

🚩बचपन में गुरुकुल में रहकर शिक्षा पायी,युवावस्था में संतो को सताने वाले राक्षको का वध किया और अंत समय में राम-राज्य करते हुए , प्रजा पालन करते हुए अपने लोक को चले गए।

 

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Sunday, April 14, 2024

डॉ. आंबेडकर ने धारा 370, हिंदू और मुस्लिम के लिए क्या बताया था ?

15 April 2024

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🚩भारतीय राजनीति अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जैसे अपने क्रांतिकारियों को जाति के आधार पर विभाजित कर लेती है वैसे ही महान व्यक्तित्वों को भी हमने जाति भेद के आधार पर विभाजित कर लेती है। भीमराव रामजी आम्बेडकर । यह नाम सुनते ही पाठकों के मन में एक दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता उजागर होगी। मगर डॉ अम्बेडकर के जीवन के एक ऐसा पक्ष भी हैं जिसमें राष्ट्रवादी चिंतन के महान नेता के रूप में उनके दर्शन होते हैं। डॉ अम्बेडकर के नाम पर दलित राजनीति करने वाले लोग जिन्हें हम छदम अम्बेडकरवादी कह सकते हैं, विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बनकर डॉ अम्बेडकर के सिद्धांतों की हत्या करने में लगे हुए हैं। अम्बेडकरवाद के नाम पर याकूब मेनन की फांसी की हत्या का विरोध, यूनिवर्सिटी में बीफ फेस्टिवल बनाना, कश्मीर में भारतीय सेना को बलात्कारी बताने, वन्दे मातरम और भारत माता की जय का नारा लगाने का विरोध, दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद, अलगाववादी कश्मीरी नेताओं की प्रशंसा जैसे कार्यों में लिप्त होना डॉ अम्बेडकर की मान्यताओं का स्पष्ट विरोध हैं। अम्बेडकरवादियों के क्रियाकलापों से सामान्य जन कि डॉ अम्बेडकर के विषय में धारणा भी विकृत हो जाति हैं। इस लेख का उद्देश्य यही सिद्ध करना है की अम्बेडकरवादी डॉ अम्बेडकर के सिद्धांतों के हत्यारे हैं।


🚩1. मैं यह स्वीकार करता हूँ कि कुछ बातों को लेकर सवर्ण हिन्दुओं के साथ मेरा विवाद है, परन्तु मैं आपके समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। – (राष्ट्र पुरुष बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर, कृष्ण गोपाल एवं श्री प्रकाश, फरवरी 1940, पृष्ठ 50)


🚩2. शुद्र राजाओं और ब्राह्मणों में बराबर झगड़ा रहा जिसके कारण ब्राह्मणों पर बहुत अत्याचार हुआ। शूद्रों के अत्याचारों के कारण ब्राह्मण लोग उनसे घृणा करने लगे और उनका उपनयन करना बंद कर दिया। उपनयन न होने के कारण उनका पतन हुआ। (डॉ अम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज,खण्ड 13, पृष्ठ 3)


🚩3. आर्यों के मूलस्थान (भारत के बाहर) का सिद्धांत वैदिक सहित्य से मेल नहीं खाता। वेदों में गंगा, यमुना, सरस्वती के प्रति आत्मीय भाव है। कोई विदेशी इस तरह नदियों के प्रति आत्मस्नेह सम्बोधन नहीं कर सकता। (डॉ अम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज,खण्ड 7, पृष्ठ 70 )


🚩4. हिन्दू समाज ने अपने धर्म से बाहर जाने के मार्ग तो खुला रखा है, किन्तु बाहर से अंदर आने का मार्ग बंद किया हुआ है। यह स्थिति पानी की उस टंकी के समान है जिसमें पानी के अंदर आने का मार्ग बंद किया हुआ है। किन्तु निकास की टोटीं सदैव खुली है। अंत: हिन्दू समाज को आने वाले अनर्थ से बचाने के लिए इस व्यवस्था में परिवर्तन होना आवश्यक है। (बाबा साहेब बांची भाषणे- खण्ड 5, पृष्ठ 16)


🚩5. हिन्दू अपनी मानवतावादी भावनाओं के लिए प्रसिद्द हैं और प्राणी जीवन के प्रति तो उनकी आस्था अद्भुत है। कुछ लोग तो विषैले सांपों को भी नहीं मारते। हिन्दू दर्शन सर्वव्यापी आत्मा का सिद्धांत सिखाता है और गीता उपदेश देती है कि ब्राह्मण और चांडाल में भेद न करो। प्रश्न उठता है कि जिन हिन्दुओं में उदारता और मानवतावाद की इतनी अच्छी परम्परा है और जिनका अच्छा दर्शन है वे मनुष्यों के प्रति इतना अनुचित तथा निर्दयता पूर्ण व्यवहार क्यों करते हैं? (Source: Material editor B.G.Kunte Vol 1 page 14-15)


🚩6. डॉ अम्बेडकर का मत था कि प्रत्येक हिन्दू वैदिक रीति से यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार रखता है और इसके लिए अम्बेडकर जी ने बम्बई में “समाज समता संघ” की स्थापना की जिसका मुख्य कार्य अछूतों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना तथा उनको अपने अधिकारों के प्रति सचेत करना था। यह संघ बड़ा सक्रिय था। इसी समाज के तत्वाधान में 500 महारों को जनेउ धारण करवाया गया ताकि सामाजिक समता स्थापित की जा सके। यह सभा बम्बई में मार्च 1928 में संपन्न हुई जिसमें डॉ अम्बेडकर भी मौजूद थे। (डॉ बी आर अम्बेडकर- व्यक्तित्व एवं कृतित्व पृष्ठ 116-117)


🚩7. तरुणों की धर्म विरोधी प्रवृत्ति देखकर मुझे दुःख होता है। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म अफीम की गोली है। परन्तु यह सही नहीं है। मेरे अंदर जो भी अच्छे गुण हैं अथवा मेरी शिक्षा के कारण समाज हित के काम जो मैंने किये हैं वे मुझ में विद्यमान धार्मिक भावना के कारण ही हैं। मुझे धर्म चाहिए लेकिन धर्म के नाम पर चलने वाला पाखण्ड नहीं चाहिए। (हमारे डॉ अम्बेडकर जी, पृष्ठ 9 श्री आश्चर्य लाल नरूला)


🚩8. मुस्लिम भ्रातृभाव केवल मुसलमानों के लिए-”इस्लाम एक बंद निकाय की तरह है, जो मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच जो भेद यह करता है, वह बिल्कुल मूर्त और स्पष्ट है। इस्लाम का भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व नहीं है, मुसलमानों का मुसलमानों से ही भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व नहीं है, मुसलमानों का मुसलमानों से ही भ्रातृत्व है। यह बंधुत्व है, परन्तु इसका लाभ अपने ही निकाय के लोगों तक सीमित है और जो इस निकाय से बाहर हैं, उनके लिए इसमें सिर्फ घृणा ओर शत्रुता ही है। इस्लाम का दूसरा अवगुण यह है कि यह सामाजिक स्वशासन की एक पद्धति है और स्थानीय स्वशासन से मेल नहीं खाता, क्योंकि मुसलमानों की निष्ठा, जिस देश में वे रहते हैं, उसके प्रति नहीं होती, बल्कि वह उस धार्मिक विश्वास पर निर्भर करती है, जिसका कि वे एक हिस्सा है। एक मुसलमान के लिए इसके विपरीत या उल्टे सोचना अत्यन्त दुष्कर है। जहाँ कहीं इस्लाम का शासन हैं, वहीं उसका अपना विश्वास है। दूसरे शब्दों में, इस्लाम एक सच्चे मुसलमानों को भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट सम्बन्धी मानने की इज़ाजत नहीं देता। सम्भवतः यही वजह थी कि मौलाना मुहम्मद अली जैसे एक महान भारतीय, परन्तु सच्चे मुसलमान ने, अपने, शरीर को हिन्दुस्तान की बजाए येरूसलम में दफनाया जाना अधिक पसंद किया।” (बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्‌मय, खंड १५-‘पाकिस्तान और भारत के विभाजन, २०००)


🚩9. Conversion to Islam or Christianity will denationalize the Depressed classes.If they go over to Islam, the number of Muslims would be doubled; and the danger of Muslim domination also become real.If they go over to Christianity, the numerical strength of the Christians becomes five to six crores. It will help to strengthen the political hold of Britain on the country. (Dr Ambedkar Life and Mission. 2nd Edition pp.278-279)


🚩10. You wish India should protect your border, she should build roads on your area, she should supply you food grains, and Kashmir should get equal status as India.But Government of India should have only limited powers and Indian people should have no rights in Kashmir.To give consent to this proposal, would be a treacherous thing against the interests of India and I, as law minister of India will never do it. (Dr B R Ambedkar to Sheikh Abdullah on Article 370)


🚩इस प्रकार से डॉ अम्बेड़कर के वांग्मय में अनेक ऐसे उदहारण मिलते है जिससे यह सिद्ध होता है कि डॉ अम्बेडकर सच्चे राष्ट्रभक्त थे। अपने राजनीतिक हितों साधने के लिए अम्बेडकरवादियों ने डॉ अम्बेडकर के साथ विश्वासघात किया। आइए डॉ अम्बेडकर कि जयन्ती पर उनके राष्ट्रवादी चिंतन से विश्व को अवगत करवायें। लेखक : डॉ. विवेक आर्य


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Saturday, April 13, 2024

फ़्रांस में कुरान के नियमों का पालन नहीं करने वालों को निशाना बना रहे कट्टरपंथी

14 April 2024

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🚩रमज़ान के महीने में फ्रांस में हिंसा का माहौल रहा। हाल ही में हुए घातक हमलों से यूरोपीय देश में बढ़ते कट्टरवाद और उग्रवाद की चिंताजनक प्रवृत्ति का पता चलता है। इस्लामवादियों द्वारा गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। यूरोपीय कंजर्वेटिव की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “रमजान में तनाव बढ़ गया है, जो कुरान के सम्मान को लेकर एक-दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा का कारण बन जाता है।”


🚩फ्रांस के बोर्डो में 10 अप्रैल को एक व्यक्ति द्वारा छुरा घोंपने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। चाकू से हमला स्थानीय समयानुसार शाम 7:50 बजे वॉटर मिरर पूल में हुआ। ‘द टाइम्स’ के मुताबिक, आरोपित की पहचान एक अफगान प्रवासी के रूप में हुई है। वह रमजान के दौरान घटना के पीड़ितों को शराब पीते देखकर गुस्सा हो गया था।


🚩ईद-अल-फितर से एक दिन पहले 9 अप्रैल को अचेनहेम (बास-राइन) में चार नाबालिगों ने एक 13 वर्षीय लड़की पर हमला किया। अपने कॉलेज जाने के लिए बस में यात्रा करते समय उसके स्कूल के आरोपित उसके पास आए और उस पर रमज़ान में रोज़े का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाकर पीटने लगे।


🚩इसी तरह 5 अप्रैल को दक्षिणी पेरिस के उपनगरीय इलाके में बालाक्लाव पहने युवाओं के एक समूह द्वारा पीटे जाने के एक दिन बाद शम्सुद्दीन नाम के एक 15 वर्षीय लड़के की मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जाँच और आरोपितों के बयानों के अनुसार, चार आरोपितों में दो भाई थे। उन्हें अपनी बहन और परिवार की प्रतिष्ठा को लेकर डर सता रहा था।


🚩यूरोपीय चुनावों के लिए लेस रिपब्लिकंस सूची में नंबर दो पर सेलीन इमार्ट ने उल्लेख किया कि उनके क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल में एक छात्र ने अपने शिक्षक को पानी पीने से रोका, क्योंकि रमज़ान चल रहा था। उन्होंने CNews को दिए इंटरव्यू में कहा, “डर से वह टीचर हार मान ली। आइए अपने उन शिक्षकों का समर्थन करें, जो अधिकार और ज्ञान प्रसारित करने से डरते हैं!”


🚩इसी तरह, 3 अप्रैल को मोंटपेलियर के ऑर्थर-रिंबाउड कॉलेज में गैर-इस्लामी व्यवहार के लिए समारा नाम की 14 वर्षीय लड़की पर हिंसक हमला किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए तीन नाबालिगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कथित तौर पर इस मामले ने पूरे देश में राजनीतिक हंगामा मचा दिया है।


🚩हमले के बाद लड़की कोमा में चली गई थी। हालाँकि, अब वह इससे बाहर है। आरोपित लड़की उसी स्कूल की छात्रा है। उन्होंने लड़की को मारने की बात कबूली है। पीड़िता की माँ ने कहा, “मैं वास्तव में समारा पर लगातार हमला करने के इन बच्चों के कारणों को नहीं समझ पा रही हूँ, लेकिन कुछ तो बात है। मुझे लगता है कि समारा शायद कुछ छात्रों की तुलना में थोड़ी अधिक मुक्त है।”


🚩पीड़िता की माँ ने कहा कि समारा कुछ मेकअप करती है, जबकि आरोपित हिजाब/बुर्का पहनती है। पीड़िता की माँ ने कहा, “दिन भर वह उसे काफिर कहती रही, जिसका अरबी में मतलब गैर-मुस्लिम होता है। मेरी बेटी यूरोपीय शैली में कपड़े पहनती है। दिन भर अपमान होता था, उसे कहबा कहा जाता था, जिसका अरबी में मतलब होता है c**t। यह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से असहनीय था।”


🚩पीड़िता की माँ ने यह भी खुलासा किया कि जून 2023 में आरोपित को दो दिनों के लिए स्कूल से निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि उसने सोशल मीडिया नेटवर्क पर उसकी बेटी की तस्वीरें पोस्ट की थी। इतना ही नहीं, उसने उसकी बेटी के साथ बलात्कार करने के लिए लोगों से आह्वान किया था।


🚩इसी साल मार्च में पेरिस स्थित एक स्कूल के प्रिंसिपल ने एक छात्रा को स्कूल परिसर में हिजाब/बुर्का हटाने के लिए कहा था। इसके बाद प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी मिली थी, जिससे डरकर उसने इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि फ्रांस में साल 2004 से हिजाब या धार्मिक संबद्धता दिखाने वाले चिन्ह या पोशाक पहनने पर प्रतिबंध है।


🚩यूरोपियन कंजर्वेटिव के मुताबिक, फ्रांस की मीडिया ऐसे हमलों से इनकार करता रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “बोर्डो में हत्या के बाद प्रेस ने चाकूबाजी में आतंकवादी मकसद की अनुपस्थिति पर जोर दिया।” (साभार: Financial Times)


🚩भारत में भी फिलिस्तीन के समर्थन में नारे 


🚩भारत में गुरुवार ( 11 अप्रैल 2024 ) को रमजान के अंतिम दिन मुस्लिमों द्वारा ईद-उल-फितर मनाया गया। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिदों सहित विभिन्न जगहों पर ईद की नमाज पढ़ी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और पंजाब के लुधियाना जैसी कुछ जगहों पर नमाज के बाद फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाए गए और पोस्टर लहराए गए।


🚩भारत की जनता की कहना है कि अगर भारत देश को कट्टरपंथीयों से बचाना है, देश और देशवासियों को सुरक्षित रखना है, जनता को सुखी जीवन जीने देना है तो भारत को तुरंत हिंदु राष्ट्र घोषित करना चाहिए।


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Thursday, April 11, 2024

हिंदू धर्म में हवन और यज्ञ का महत्व

12 April 2024

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🚩हिंदू धर्म में हवन और यज्ञ को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये दोनों ही धार्मिक कर्मकांड हैं, जिन्हें कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि देवताओं को प्रसन्न करना, शुभकामनाएं प्राप्त करना, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना, और स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ावा देना।


🚩हवन और यज्ञ में अंतर


🚩हवन और यज्ञ दोनों ही अग्नि में आहुति देने की प्रक्रिया हैं, लेकिन इनमें कुछ अंतर हैं। हवन यज्ञ का ही एक छोटा रूप है। हवन में आमतौर पर लकड़ी, घी, और अन्य पदार्थों की आहुति दी जाती है, जबकि यज्ञ में अधिक जटिल प्रक्रिया होती है। यज्ञ में देवताओं, आहुति, वेद मंत्र, ऋत्विक, और दक्षिणा सभी आवश्यक होते हैं।


🚩हवन और यज्ञ का महत्व


🚩हिंदू धर्म में हवन और यज्ञ का महत्व निम्नलिखित है:


🚩देवताओं को प्रसन्न करना: हवन और यज्ञ के माध्यम से लोग देवताओं को प्रसन्न कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवता इन कर्मकांडों से खुश होकर लोगों को आशीर्वाद देते हैं।

शुभकामनाएं प्राप्त करना: हवन और यज्ञ के माध्यम से लोग शुभकामनाएं प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मकांडों से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


🚩नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना: हवन और यज्ञ के माध्यम से लोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मकांडों से वातावरण शुद्ध होता है और लोगों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।


🚩स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ावा देना: हवन और यज्ञ के माध्यम से लोग स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन कर्मकांडों से लोगों का शरीर स्वस्थ और मन समृद्ध होता है।

हवन और यज्ञ की विधि


🚩हवन और यज्ञ की विधि निम्नलिखित है:


🚩हवन कुंड का निर्माण: हवन और यज्ञ के लिए एक हवन कुंड का निर्माण किया जाता है। यह कुंड मिट्टी, पत्थर, या अन्य सामग्री से बनाया जा सकता है।


🚩अग्नि का प्रज्वलन: हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। अग्नि को ईंधन के रूप में लकड़ी, घी, या अन्य सामग्री का उपयोग करके प्रज्वलित किया जा सकता है।


🚩आहुति की तैयारी: हवन और यज्ञ में आहुति के रूप में विभिन्न प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि फल, फूल, शहद, घी, और अनाज।


🚩आहुति का हवन: ऋत्विक (यज्ञ का संचालक) मंत्रों का उच्चारण करते हुए आहुति को अग्नि में डालता है।

हवन और यज्ञ के लाभ


🚩हवन और यज्ञ के निम्नलिखित लाभ हैं:


🚩मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार: हवन और यज्ञ से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इन कर्मकांडों से लोगों को तनाव, चिंता, और अवसाद से राहत मिलती है।


🚩सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: हवन और यज्ञ से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इन कर्मकांडों से वातावरण शुद्ध होता है और लोगों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

भाग्य में वृद्धि: हवन और यज्ञ से भाग्य में वृद्धि होती है। इन कर्मकांडों से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


🚩हवन और यज्ञ हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक कर्मकांड हैं। ये कर्मकांड लोगों को देवताओं को प्रसन्न करने, शुभकामनाएं प्राप्त करने, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, और स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।


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Wednesday, April 10, 2024

आस्था,विश्वास,मान-मन्नत का पर्व गणगौर

10 April 2024

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🚩यह पर्व राजा धनियार व रणुबाई (रथ) के गृहस्थ प्रेम और भगवान शिव-माता पार्वती के पूजन से जुड़ा है।


🚩जवारे बोने के साथ होती है पर्व की शुरुआत


🚩चैत्र कृष्ण एकादशी को माता की बाड़ी में जवारे बोने के साथ गणगौर पर्व की शुरुआत होती हैं।


🚩गणगौरी तीज से पर्व की छटा 11अप्रैल चैत्र शुक्ल सुदी तीज को माता की बाड़ी में जवारों का दर्शन-पूजन करने सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती हैं। माता की मुख्य बाड़ी से ज्वारों को श्रृंगारित काष्ठ प्रतिमाओं में रखकर चल समारोह के साथ घर लाया जाता हैं। इसके बाद गणगौर माता के गीत गूंजने लगते हैं।


🚩रात में डांडिया नृत्य,मटकी नृत्य, भक्ति गीत, लोकगीत के साथ पर्व मनाया जाता हैं।


🚩माँ रणुबाई और धनियार राजा का भव्य नृत्य होता है, जिससे देखने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता हैं।


🚩गणगौर विशेष रूप से राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ के भागों में धूमधाम से मनाया जाता है। कुँवारी लड़कियां अपने भावी पति और विवाहित स्त्रियां अपने पतियों की सम्रद्धि के लिए ये पूजा अर्चना करती हैं।


🚩होलिका दहन के दुसरे दिन से प्रारम्भ होने वाला ये त्यौहार पूरे 16 दिनों तक है। महिलाएं मंगल गीत गाते हुए अपने पीहर और ससुराल के अच्छे भविष्य की कामना करती हैं। अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करते हुए कई गीत गाती हैं जिसमे अपने परिजनों का नाम लिया जाता है।


🚩चैत्र माह की तीज को मनाया जाने वाला यह महापर्व एक महोत्सव रूप में संपूर्ण मध्यप्रदेश निमाड़-मालवांचल में अपनी अनूठी छटा बिखेरता है। इसके साथ ही चैत्र माह में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में महाकाली, महागौरी एवं महासरस्वती अलग-अलग रूपों में नवरात्रि में पूजा की जाती हैं।


🚩पारिवारिक व सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है गणगौर का त्योहार। चैत्र गणगौर पर्व गणगौर दशमी से अथवा एकादशी से प्रारंभ होता है, जहां माता की बाड़ी यानी जवारे बोए जाने वाला स्थान पर नित्य आठ दिनों तक गीत गाए जाते हैं। यह गीत कन्याओं, महिलाओं, पुरुषों, बालकों के लिए शिक्षाप्रद होते हैं।


🚩सर्वप्रथम होलिका दहन के स्थान से होली की जली राख से बिना थापे बने कंडे (खड़े) एवं पांच कंकर की गौरा माता घर लाते हैं। यह तभी निश्चित कर लिया जाता है कि कितने रथ तैयार होंगे।


🚩उसी अनुरूप छोटी-छोटी टोकरियों (कुरकई) में चार देवियों के स्वरूप चार में गेहूं के जवारे एवं बच्चों के स्वरूप छोटे-छोटे दीपकों में सरावले बोए जाते हैं। एक बड़े टोकने में मूलई राजा बोए जाते हैं।


🚩चारों देवियों एवं सरावले व मूलई राजा के जवारों का नित्य अति शुद्धता पूर्व पूजन एवं सिंचन जिस कमरे में किया जाता है उसे माता की कोठरी कहते हैं। इसी माताजी की वाड़ी में प्रतिदिन शाम को कई स्त्रियां धार्मिक भावना से चारों माता के विष्णु राजा की पत्नी लक्ष्मी, ब्रह्माजी की सइतबाई, शंकरजी की गउरबाई एवं चंद्रमाजी की रोयेणबाई के गीत मंगल गान के रूप में गाए जाते हैं।


🚩तंबोल यानी गुड़, चने, जुवार, मक्के की धानी, मूंगफली) बांटी जाती है।


🚩फिर गणगौर का प्रसिद्ध गीत गाते हैं –


🚩पीयर को पेलो जड़ाव की टीकी,


मेण की पाटी पड़ाड़ वो चंदा…


कसी भरी लाऊं यमुना को पाणी…


हारी रणुबाई का अंगणा म ताड़ को झाड़।


ताड़ को झाड़ ओम म्हारी


देवि को र्यवास।


रनूबाई रनू बाई, खोलो किवाड़ी…।


पूजन थाल लई उभी दरवाजा


पूजण वाली काई काई मांग…


🚩अपने परिवार की सुख-समृद्धि हेतु भक्त इस तरह से विनती कर वरदान मांग लेते हैं। माता के विसर्जन से पूर्व जो लोग माता के रथ लाते हैं, अपने घर सुंदर रथ श्रृंगार कर वाड़ी पूजन के पश्चात घर ले जाते हैं।


🚩सायंकाल सभी रथों को खुशी प्रकट करने हेतु झालरिया गीत गाए जाते हैं। नौवें दिन माता की मान-मनौती वाले परिवार रथ बौड़ाकर या पंचायत द्वारा माता को पावणी (अतिथि) लाते हैं।


🚩कुल मिलाकर यह संदेश दिया जाता है कि बहन, बेटी को नवमें दिन ससुराल नहीं भेजना चाहिए। दसवें दिन पुनः सपरिवार भोजन प्रसादी आयोजन होता है।


🚩माता का बुचका यानी जिसमें माताजी की समस्त श्रृंगार सामग्री, प्रसाद, भोग एवं आवश्यक वस्तुएं श्रीफल आदि बांध कर पीली चुनरी ओढ़ाकर हंसी-खुशी विदा किया जाता है। यही परंपरा सतत चली आ रही है।


🚩आप सभी को गणगौर पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं…


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Tuesday, April 9, 2024

सिंधी समाज मरख बादशाह के आतंक से झुके नहीं, ऐसे किया उसका अंत

10 April 2024

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🚩सनातनी हिन्दू आक्रमणकारियों से हमेंशा प्रताड़ित किया गया है पर समय समय पर उनको करारा जवाब भी दिया है, आज भी हिंदुओं के खिलाफ अनेक षडयंत्र रचे जा रहे हैं पर हिंदुओं को जैसे उत्तर देना चाहिए वे सिंधी भाइयों ने युक्ति बताई है, आपदा समय में ये भी युक्ति अपनानी चाहिए।


🚩सिंध समाज पर एक ऐसी विकट आपदा आ पड़ी


🚩आपको बता दें कि सिंध स्थित हिन्दुओं को जबरदस्ती मुसलमान बनाने हेतु वहाँ के नवाब मरखशाह ने फरमान जारी किया । उसका जवाब देने के लिए हिन्दुओं ने आठ दिन की मोहलत माँगी । अपने धर्म की रक्षा हेतु हिन्दुओं ने सृष्टिकर्त्ता भगवान की शरण ग्रहण की तथा ‘कार्यं साधयामि वा देहं पातयामि…’ अर्थात् ‘या तो अपना कार्य सिद्ध करेंगे अथवा मर जायेंगे’ के निश्चय के साथ हिन्दुओं का अपार जनसमूह सागर तट पर उमड़ पड़ा । सब तीन दिन तक भूख-प्यास सहते हुए प्रार्थना करते रहे।


🚩आये हुए सभी लोग किनारे पर एकटक देखते-देखते पुकारते- ‘हे सर्वेश्वर ! तुम अब रक्षा करो। मरख बादशाह तो धर्मांध है और उसका मूर्ख वजीर ‘आहा’, दोनों तुले हैं कि हिन्दू धर्म को नष्ट करना है। लेकिन प्रभु ! हिन्दू धर्म नष्ट हो जायेगा तो अवतार बंद हो जायेंगे। मानवता की महानता उजागर करने वाले रीति रिवाज सब चले जायेंगे। आप ही धर्म की रक्षा के लिए युग-युग में अवतरित होते हो। किसी भी रूप में अवतरित होकर प्रभु हमारी रक्षा करो। रक्षमाम् ! रक्षमाम् !! तब अथाह सागर में से प्रकाशपुंज प्रगट हुआ । उस प्रकाशपुंज में निराकार परमात्मा अपना साकार रूप प्रगट करते हुए बोले : ‘‘हिन्दू भक्तजनों ! तुम सभी अब अपने घर लौट जाओ । तुम्हारा संकट दूर हो इसके लिए मैं शीघ्र ही नसरपुर में अवतरित हो रहा हूँ । फिर मैं सभी को धर्म की सच्ची राह दिखाऊँगा ।’’


🚩सप्ताह भर के अंदर ही संवत् 1117 के चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया को नसरपुर में ठक्कर रत्नराय के यहाँ माता देवकी के गर्भ से भगवान झूलेलाल ने अवतार लिया और हिन्दू जनता को दुष्ट मरख के आतंक से मुक्त किया । उन्हीं भगवान झूलेलाल का अवतरण दिवस ‘चेटीचंड’ के रूप में मनाया जाता है ।


🚩प्रार्थना से सबकुछ संभव है। सिंधी भाइयों की सामुहिक पुकार पर हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए झूलेलाल जी का अवतरण, मद्रास के भीषण अकाल में श्री राजगोपालाचार्य द्वारा करायी गयी सामूहिक प्रार्थना के फलस्वरूप मूसलधार वर्षा होने लगी।


🚩किसी ने सही कहा है…. ” जब और सहारे छिन जाते, न किनारा मिलता है । तूफान में टूटी किश्ती का, भगवान सहारा होता है ।”


🚩झूलेलाल जी का वरुण अवतार यह खबर देता है कि कोई तुम्हारे को धनबल, सत्ताबल अथवा डंडे के बल से अपने धर्म से गिराना चाहता हो तो आप ‘धड़ दीजिये धर्म न छोड़िये।’ सिर देना लेकिन धर्म नहीं छोड़ना।


🚩चेटीचंड महोत्सव मानव – जाति को संदेश देता है कि क्रूर व्यक्तियों से दबो नहीं , डरो नहीं , अपने अंतरात्मा परमात्मा की सत्ता को जागृत करो ।


🚩सिंधी भाई जुल्मी आतताईयों के आगे झुके नहीं वरन धर्म का आश्रय लेकर उन्होंने अपनी अंतर चेतना का भगवान झूलेलालजी के रूप में अवतरण करा दिया । इसलिए यह उत्सव हमें पुरुषार्थी और साहसी बनकर अपने धर्म में अडीग रहने रहने की प्रेरणा देता हैं।


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