Sunday, September 2, 2018

अनेक देशों मनाई जाती है जन्माष्टमी,मुस्लिम देश में होता है नेशनल हॉलीडे

02 September 2018


🚩श्रीमद् भगवदगीता के चौथे अध्याय के सातवें एवं आठवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने श्रीमुख से कहते हैं-

*यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।*
*अभ्युत्थानधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।*

*परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।*
*धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।*

🚩'हे भरतवंशी अर्जुन ! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ। साधुजनों (भक्तों) की रक्षा करने के लिए, पापकर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की भली भाँति स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ।'
Many countries are celebrated Janmashtami,
 Muslim country has National Holiday

🚩श्रीमद् भागवत में भी आता है कि दुष्ट राक्षस जब राजाओं के रूप में पैदा होने लगे, प्रजा का शोषण करने लगे, भोगवासना-विषयवासना से ग्रस्त होकर दूसरों का शोषण करके भी इन्द्रिय-सुख और अहंकार के पोषण में जब उन राक्षसों का चित्त रम गया, तब उन आसुरी प्रकृति के अमानुषों को हटाने के लिए तथा सात्त्विक भक्तों को आनंद देने के लिए भगवान का अवतार हुआ।

🚩जन्माष्टमी पर्व को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। 

🚩भारत समेत विश्व के कई कोनों में कृष्ण भक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन मनाते हैं। हालांकि आपको बता दें कि एक ऐसा भी मुस्लिम बहुल देश है जहां जन्माष्टमी के दिन देश में अधिकारिक छुट्टी होती है। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में जन्माष्टमी के दिन नेशनल हॉलीडे होता है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पुराने ढाका शहर के ढाकेश्वरी मंदिर में जन्माष्टमी बड़े धूम धाम से मनायी जाती है। 

🚩ढाका में इस उत्सव की शुरुआत साल 1902 में हुई थी, लेकिन 1948 में ढाका पाकिस्तान का हिस्सा बनने के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि जब बांग्लादेश पाकिस्तान से आजाद हुआ तो साल 1989 से एक बार फिर यह उत्सव मनाया जाने लगा। 

🚩आपको जानकर ये हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में ही 400 से अधिक भगवान कृष्ण के मंदिर हैं। वहीं भगवान कृष्ण को 108 अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। 

🚩कैरेबियाई देशों में भी रहती है धूम । भारत के बाद जन्माष्टमी का सबसे बड़ा उत्सव कैरेबियाई राष्ट्रों में होता है। कैरेबियाई देश गुयाना, त्रिनानद एंड टोबागो, जमैका और सुरीनाम में जन्माष्टमी का बड़े पैमाने पर जश्न होता है।।। 

🚩ऑस्ट्रेलिया में भी धूम-धाम से जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है ।

🚩निर्गुण, निराकार,  माया को वश करनेवाले, जीवमात्र के परम सुहृद प्रकट हुए, वह पावन दिन ‘जन्माष्टमी है । 

🚩भगवान श्री कृष्ण का साधु पुरुषों का उद्धार तथा दुष्कृत करनेवालों का विनाश करने के लिए अवतार होता है । तमाम परेशानियों के बीच रहकर भी श्रीकृष्ण जैसी मधुरता और चित्त की समता को  बनाये रखने का संदेश जन्माष्टमी देती है ।

🚩श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव तब पूर्ण माना जायेगा जब हम उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारेगें ।

🚩आज संकल्प करें कि ‘गीता के संदेश आत्मज्ञान के अमृत को हम जीवन मे लायेंगे और जगत में भी इस का प्रचार करेंगे ।


🚩जन्माष्टमी का व्रत करने से 1000 एकादशी व्रत करने का फल मिलता है और 100 जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है ।

🚩जन्माष्टमी की रात्रि को जप करने से मंत्र सिद्धि मिलती है ।

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Saturday, September 1, 2018

जन्माष्टमी : भगवान विष्णु को पृथ्वी पर श्रीकृष्ण के रूप में अवतार क्यों लेना पड़ा ?

01 September 2018

🚩भगवान श्रीकृष्ण का प्रागट्य:- 

#पृथ्वी आक्रान्त होकर श्रीहरि से अपने त्राण के लिए #प्रार्थना करती है । जो पृथ्वी इन आँखों से दिखती है वह पृथ्वी का #आधिभौतिक स्वरूप है, किंतु कभी-कभी #पृथ्वी नारी या #गाय का रूप लेकर आती है वह पृथ्वी का #आधिदैविक स्वरूप है ।

🚩पृथ्वी से कहा गयाः "इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें तुम पर बन गयी हैं, इससे तुम पर कितना सारा बोझ बढ़ गया ।"तब पृथ्वी ने कहाः "इन इमारतों का कोई बोझा नहीं लगता किंतु जब साधु-संतों और भगवान को भूलकर, सत्कर्मों को भूलकर, सज्जनों को तंग करने वाले विषय-विलासी लोग बढ़ जाते हैं, तब मुझ पर बोझ बढ़ जाता है।"
Janmashtami: Why did Lord Vishnu have to
 incarnate as Lord Krishna in the form of Lord Krishna?

🚩जब-जब पृथ्वी पर इस प्रकार का बोझ बढ़ जाता है, तब-तब पृथ्वी अपना बोझ उतारने के लिए भगवान की शरण में जाती है । कंस आदि दुष्टों के पापकर्म बढ़ जाने पर भी, पापकर्मों के भार से बोझिल पृथ्वी देवताओं के साथ भगवान के पास गई और उसने श्रीहरि से प्रार्थना की, तब भगवान ने कहाः "हे देवताओं ! पृथ्वी के साथ तुम भी आये हो, धरती के भार को हल्का करने की तुम्हारी भी इच्छा है, अतः जाओ, तुम भी वृन्दावन में जाकर गोप-ग्वालों के रूप में अवतरित हो मेरी लीला में सहयोगी बनो । मैं भी समय पाकर #वसुदेव-देवकी के यहाँ अवतार लूँगा ।"

🚩वसुदेव-देवकी कोई साधारण मनुष्य नहीं थे । स्वायम्भुव मन्वंतर में वसुदे 'सुतपा' नाम के #प्रजापति और देवकी उनकी पत्नी 'पृश्नि' थीं । सृष्टि के विस्तार के लिए ब्रह्माजी की आज्ञा मिलने पर उन्होंने भगवान को पाने के लिये बड़ा तप किया था ।

🚩#समाज में जब शोषक लोग बढ़ गए, दीन-दुखियों को सताने वाले व चाणूर और मुष्टिक जैसे पहलवानों और दुर्जनों का पोषण करने वाले क्रूर राजा बढ़ गए, समाज त्राहिमाम पुकार उठा, सर्वत्र भय व आशंका का घोर अंधकार छा गया तब भाद्रपद मास (गुजरात-महाराष्ट्र में श्रावण मास) में कृष्ण पक्ष की उस अंधकारमयी अष्टमी, #रोहिणी_नक्षत्र को #कृष्णावतार हुआ । जिस दिन वह निर्गुण, निराकार, अच्युत, माया को वश करने वाले जीवमात्र के परम सुहृद प्रकट हुए वह आज का पावन दिन जन्माष्टमी कहलाता है। 

🚩#श्रीमद्_भागवत में भी आता है कि दुष्ट राक्षस जब राजाओं के रूप में पैदा होने लगे, प्रजा का शोषण करने लगे, भोगवासना-विषयवासना से ग्रस्त होकर दूसरों का शोषण करके भी इन्द्रिय-सुख और अहंकार के पोषण में जब उन राक्षसों का चित्त रम गया, तब उन आसुरी प्रकृति के अमानुषों को हटाने के लिए तथा सात्त्विक भक्तों को आनंद देने के लिए भगवान का अवतार हुआ ।

🚩जब समाज में अव्यवस्था फैलने लगती है, सज्जन लोग पेट भरने में भी कठिनाइयों का सामना करते हैं और दुष्ट लोग शराब-कबाब उड़ाते हैं, कंस, चाणूर, मुष्टिक जैसे दुष्ट बढ़ जाते है और निर्दोष गोप-बाल जैसे लोग अधिक सताए जाते हैं, तब उन सताए जाने वालों की संकल्प शक्ति और भावना शक्ति उत्कट होती है और सताने वालों के दुष्कर्मों का फल देने के लिए भगवान का अवतार होता है ।

🚩भगवान अवतरित हुए तब जेल के दरवाजे खुल गए । पहरेदारों को नींद आ गयी । रोकने-टोकने और विघ्न डालने वाले सब निद्राधीन हो गए । जन्म हुआ है जेल में, एकान्त में, वसुदेव-देवकी के यहाँ और लालन-पालन होता है नंद-यशोदा के यहाँ ।  श्रीकृष्ण का प्राकट्य देवकी के यहाँ हुआ है, परंतु पोषण यशोदा माँ के वहाँ होता है । 

🚩#श्रीकृष्ण के जीवन में एक महत्त्वपूर्ण बात झलकती है कि बुझे दीयों को प्रकाश देने का कार्य और उलझे हुए दिलों को सुलझाने का काम तो वे करते ही हैं, साथ ही साथ इन कार्यों में आने वाले विघ्नों को, फिर चाहे वह मामा कंस हो या पूतना या शकटासुर-धेनकासुर-अघासुर-बकासुर हो फिर केशि हो, सबको श्रीकृष्ण किनारे लगा देते हैं ।


🚩श्रीमद् भगवदगीता के चौथे अध्याय के सातवें एवं आठवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने श्रीमुख से कहते हैं-

🚩यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।

🚩परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।

1.परित्राणय साधुनाः साधु स्वभाव के लोगों का, सज्जन स्वभाववाले लोगों का रक्षण करना ।

2. विनाशाय च दुष्कृताम् जब समाज में बहुत स्वार्थी, तामसी, आसुरी प्रकृति के कुकर्मी लोग बढ़ जाते हैं तब उनकी लगाम खींचना।

3.धर्मसंस्थापनार्थायः धर्म की स्थापना करने के लिए अर्थात् अपने स्वजनों को, अपने भक्तों को तथा अपनी ओर आने वालों को अपने स्वरूप का साक्षात्कार हो सके इसका मार्गदर्शन करना।

🚩भगवान के अवतार के समय तो लोग लाभान्वित होते ही हैं किंतु भगवान का दिव्य विग्रह जब अन्तर्धान हो जाता है, उसके बाद भी भगवान के गुण, कर्म और लीलाओं का स्मरण करते-करते हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी मानव समाज लाभ उठाता रहता है ।

🚩व्रत से लाभ:-

जन्माष्टमी का व्रत करने से 1000 एकादशी व्रत करने का पुण्य प्राप्त होता है और उसके रोग, शोक, दूर हो जाते हैं।” धर्मराज सावित्री देवी को कहते हैं किः “जन्माष्टमी का व्रत सौ जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला है ।” 
(ब्रह्मवैवर्त पुराण)

🚩अकाल मृत्यु व गर्भपात से करे रक्षा:-

ʹभविष्य पुराणʹ में लिखा है कि ʹजन्माष्टमी का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है । जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके घर में गर्भपात नहीं होता । बच्चा ठीक से पेट में रह सकता है और ठीक समय पर बालक का जन्म होता है।ʹ ( स्त्रोत : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा साहित्य से )
🌹अधिक जानकारी के लिए देखे👇

🚩विशेष : इस साल 2 सितम्बर शाम 8:48 से अष्टमी शुरू हो जाएगी इसलिए व्रत उपवास व जागरण 3 सितम्बर को ही किया जाएगा ।

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Friday, August 31, 2018

जानिए आज करोड़ों लोगों ने क्यों मनाया ब्लैक डे, प्रधानमंत्री के नाम पर दिए ज्ञापन

31 August 2018

🚩सोशल मीडिया पर चारों तरफ आज ब्लैक डे के नाम से पोस्टर गुम रहे थे, जिससे हर कोई उत्सुक थे कि आज ब्लैक डे मनाने कारण क्या है ? कौन कर रहा है ?

🚩आपको बता दें कि हिन्दू संत आसाराम बापू को 31 अगस्त 2013 को मध्यरात्री को बीमार अवस्था मे इंदौर से गिरफ्तार किया था ।
🚩डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का कहना था कि बापू आसारामजी ने धर्मान्तरण का डटकर मुकाबला किया और लाखों हिंदुओं की घरवासपी करवाई, जिससे वेटिकन सिटी नाराज हुई और सोनिया गांधी को बोलकर झूठे केस दर्ज करवाकर गिरफ्तार करवाया ।

🚩एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत लगातार चल रहे मीडिया ट्रायल तथा बलात्कार निरोधक कानूनों के दुरुपयोग के कारण बापू आसारामजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है ।

🚩एक 82 वर्षीय बुजुर्ग संत को लड़खड़ाते स्वास्थ्य के बावजूद जेल में रखा गया है । इससे देश-विदेश के करोड़ों लोग व्यथित हैं । 31 अगस्त को बापू आसारामजी को गिरफ्तार किये 5 वर्ष पूरे होने पर, बापू के साथ हो रहे अन्याय को रोकने एवं उनकी शीघ्र रिहाई की माँग करते हुए देश के विभिन्न शहरों में रैलियाँ निकाली गयीं, धरना-प्रदर्शन हुए । 

🚩देशभर में अनेक जगह पर बापू आसारामजी की शीघ्र रिहाई के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, कानून मंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग आदि को ज्ञापन सौंपे गए । 

🚩ज्ञापन में बताया कि भारतीय संस्कृति के आधारस्तम्भ हमारे संतों पर पिछले काफी समय से झूठे, अनर्गल और मनगढ़ंत आरोप लगा के उन्हें जेल में डालकर उन पर अत्याचार किए जा रहे हैं । शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी, स्वामी केशवानंदजी, कृपालुजी महाराज, साध्वी प्रज्ञा के बाद संत आशारामजी बापू को निशाना बनाया गया है । 

🚩बापू आसरामजी पिछले 50 वर्षों से सत्संग व सेवाकार्यों के माध्यम से विश्वमानव को सुखी, स्वस्थ व सम्मानित जीवन की राह पर अग्रसर करने हेतु अथक प्रयास करते रहे हैं । बापू आसारामजी के ओजस्वी जीवन एवं उपदेशों से प्रेरणा पाकर असंख्य लोगों ने व्यसन, मांस आदि बड़ी सहजता से छोड़कर संयम-सदाचार का रास्ता अपनाया है । समाज, संस्कृति और विश्वसेवा के दैवीकार्य में हिन्दू संत आसारामजी बापू का योगदान अद्वितीय है । 

🚩करोड़ों लोगों के द्वारा यह माँग की गयी कि उन्हें शीघ्रातिशीघ्र ससम्मान रिहा किया जाए, उनके खिलाफ किए गये बोगस केसों को रद्द किया जाय, उन्हें फँसानेवाले षड्यंत्रकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो और बलात्कार निरोधक कानून में भी उचित संशोधन किया जाए, जिससे कोई अन्य निर्दोष व्यक्ति इसकी चपेट में न आए । 

🚩रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं व पुरुषों ने भाग लिया तथा बापू आसारामजी को निर्दोष बताते हुए उनकी रिहाई की माँग की । रैली में बैनरों आदि के माध्यम से भी बापू पर हो रहे अन्याय को दर्शाया गया था ।

🚩ज्ञापन में बापू आसारामजी द्वारा किए गए सेवाकार्य का विवरण लिखा था, जो इस प्रकार है                                                                                            

* संयम-सदाचार, नैतिकता को समाज में सुदृढ़ करनेवाले सत्साहित्य का करोड़ों लोगों में वितरण 
* नारी सशक्तीकरण एवं महिला जागृति का शंखनाद - महिला उत्थान मंडल
* अनैतिक कुप्रथाओं का निर्मूलन - गर्भपातरोधी अभियान
* नारियों में आत्मशक्ति व तेजस्विता को निखारता हुआ - तेजस्विनी अभियान
* विद्यालयों-महाविद्यालयों में - योग व उच्च संस्कार शिक्षा कार्यक्रम
* स्वस्थ, सुदृढ़ जीवन की नींव तैयार करता - व्यसनमुक्ति अभियान
* देश के लाखों बालकों के जीवन में सच्चरित्रता की गंगा का प्रवाह - बाल संस्कार केन्द्र
* बापू आसारामजी के सान्निध्य में होनेवाले ध्यानयोग साधना शिविर एवं विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविर
* प्रतिवर्ष लाखों विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों व आध्यात्मिक ज्ञान को विकसित करती - दिव्य प्रेरणा-प्रकाश प्रतियोगिता
* करोड़ों युवक-युवतियों को संयमी-सदाचारी बनानेवाला - युवाधन सुरक्षा अभियान
* माता-पिता व संतानों में परस्पर ईश्वरीय भाव जगाता - मातृ-पितृ पूजन दिवस
* आधुनिक शिक्षा और वैदिक ज्ञान का सुंदर समन्वय - संत श्री आशारामजी गुरुकुल
* युवाओं में देशभक्ति, नैतिकता व आध्यात्मिकता का विकास करने में तत्पर - युवा सेवा संघ
* गौ, गीता, गंगा की सुरक्षा एवं लाभ लोगों को दिलाना

🚩बापू आसारामजी द्वारा प्रतिवर्ष करीब 200 से अधिक स्थानों पर सत्संग-समारोहों के माध्यम से विभिन्न लोक-मांगल्यकारी सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार हो रहा था, जैसे : 
* संयम-सदाचार, सच्चरित्रता व ब्रह्मचर्य-पालन
* प्राणिमात्र में ईश्वरीय भाव 
* सबका मंगल, सबका भला
* नारी ! तू नारायणी... 
आत्मज्ञानप्राप्ति के बाद अपने पूज्य गुरुदेव भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज की आज्ञा शिरोधार्य कर बापू आसारामजी गत 50 वर्षों से संयम-सदाचार के प्रचार-प्रसार, संस्कृति रक्षा तथा प्राणीमात्र के हित के सेवाकार्यों में अथक रूप से लगे हुए हैं । समाज, संस्कृति और विश्वसेवा के दैवी कार्य में बापू आसारामजी का योगदान अद्वितीय है । 

🚩बापू आसारामजी के ओजस्वी जीवन एवं उपदेशों से असंख्य लोगों ने व्यसन, मांस आदि बड़ी सहजता से छोड़कर संयम-सदाचार का रास्ता अपनाया है । एक 82 वर्षीय बुजुर्ग संत, जिन्हें करोड़ों लोगों के जीवन में संयम-सदाचार जागृत करने व उन्हें भगवान के रास्ते चलाने तथा करोड़ों दुःखियों के चेहरों पर मुस्कान लाने का श्रेय जाता है ।

🚩ज्ञापन देते समय बताया गया कि आपसे सविनय निवेदन है कि विश्व में भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहरानेवाले, आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता, संयममूर्ति संत आशारामजी बापू की समाज को अत्यंत आवश्यकता है । बापू आसारामजी पर किए जा रहे अत्याचार से समाज को अपूर्णीय क्षति हो रही है । अतः श्री योग वेदान्त सेवा समिति एवं सभी साधक परिवार आपके माध्यम से यह माँग करते हैं कि उन्हें शीघ्रातिशीघ्र ससम्मान रिहा किया जाए, उनके खिलाफ किए गए बोगस केसों को रद्द किया जाए तथा उन्हें फँसानेवाले षड्यंत्रकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो और बलात्कार निरोधक कानून में भी उचित संशोधन किया जाए, जिससे कोई अन्य निर्दोष व्यक्ति इसकी चपेट में न आए ।

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