Thursday, September 6, 2018

समलैंगिक संबंध अपराध नहीं ? जानिए इससे कितना भयंकर होता है नुकसान.

06 September 2018

🚩 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया था । आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया था । इसमें जुर्माने का भी प्रावधान था और इसे ग़ैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में रखा गया था ।

🚩देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है । इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा ।

🚩वर्तमान कानून से अब कोई भी महिला, महिला के साथ और कोई भी पुरूष, पुरुष के साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बना सकता है, इसे कोई अपराध नहीं माना जाएगा ।
Gay sex is not crime? Know how terrible it is to harm.
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🚩यह प्रथा विदेशो में चलती है भारत एक आध्यत्मिक देश है यहाँ अप्राकृतिक संबध बनाना पाप माना जाता है, ये भगवान, शास्त्र विरुद्ध कार्य है जो मनुष्य को भयंकर नुकसान पहुँचाता है ।

🚩'द चिल्ड्रंस सोसायटी' ने साल 2015 में 14 साल के करीब 19 हजार किशोरों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया । संस्था की रिपोर्ट बताती है कि समान लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाले किशोरों और बाकी किशोरों के बीच खुशी के मामले में काफी अंतर था । एक चौथाई से ज्यादा समलैंगिक किशोर अपने जीवन से कम संतुष्ट थे । वहीं सर्वे में शामिल सभी लोगों के बीच यह आंकड़ा महज 10 फीसदी तक था ।

🚩करीब 40 फीसदी किशोरों में अत्यधिक डिप्रेशन के लक्षण पाए गए. रिपोर्ट कहती है कि कि सभी किशोरों में से करीब 15 फीसदी ने पिछले साल खुद को नुकसान पहुंचाया. वहीं समलैंगिक किशोरों में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 50 फीसदी के बराबर थी ।

🚩हिन्दू धर्म में समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध है इसे नैतिक पतन का लक्षण माना जाता है । इसलिए यहाँ पकड़े जाने पर समलैंगिकों को हमेशा कठोर सजा दी जाती थी ।

🚩आज धीरे-धीरे कर देश इस तरह के एक ही शारीरिक सम्बन्ध की शादियों को स्वीकार करने लगा है । समलैंगिकता को अब कानूनी दर्जा मिल रहा है । एक ही सेक्स के दो लोग अब शादी रचाकर एक साथ रहने के लिए आजाद है, लेकिन ये शादी ना केवल समाज के नियमों को तोड़ती है बल्कि प्रकृति के नियमों का भी उल्लघंन करती है ।

🚩यह प्राकृतिक कानून का उल्लंघन है :- 

शादी दो इंसानों के बीच का संबंध है, जिसे समाज द्वारा जोड़ा जाता है और उसे प्रकृति के नियमों के साथ आगे चलाया जाता है । समाज में शादी का उद्देश्य शारीरिक संबंध बनाकर मानव श्रृखंला को चलाना है । यहीं नेचर का नियम है । जो सदियों से चलता आ रहा है, लेकिन समलैंगिक शादियां मानव श्रृंखला के इस नियम को बाधित करती है ।

🚩अधर में बच्चे का भविष्य:- 

सामान्यतः बच्चों का भविष्य मां-बाप के संरक्षण में पलता है । समलैगिंक विवाह की स्थिति में बच्चों का विकास प्रभावित होता है । वो या तो मां का प्यार पाते हैं या पिता का सहारा । मां-बाप का प्यार उन्हें एक -साथ नहीं मिल पाता जो उनके विकास को प्रभावित करता है । संडे टेलिग्राफ' अखबार के मुताबिक समलैंगिक शादी उस मूलभूत विचार को बिल्कुल खत्म कर देगा कि हर बच्चे को मां और बाप दोनों चाहिए ।

🚩समलैंगिक जीवन शैली को बढ़ावा देता है:-

एक ही सेक्स में विवाह की कानूनी मान्यता जरूरी है । ये शादियां समाज के नियम के साथ-साथ पारंपरिक शादियों को नुकसान पहुंचाती है । लोगों के सोचने के नजरिए को प्रभावित करती है । बुनियादी नैतिक मूल्यों , पारंपरिक शादी के अवमूल्यन, और सार्वजनिक नैतिकता को कमजोर करता है ।

🚩नागरिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल:-

समलैंगिक कार्यकर्ताओं को एक ही सेक्स में शादी करने का मुद्दा 1960 के दशक में नस्लीय समानता के लिए संघर्ष का मुद्दा बन गया था । एक औरत और एक मर्द के बीच उनके रुप-रंग, लंबाई-चौड़ाई को बिना ध्यान में रखे संबंध बनाया जा सकता है, लेकिन एक ही सेक्स में शादी प्रकृति का विरोध करता है । एक ही लिंग के दो व्यक्तियों, चाहे उनकी जाति का, धन, कद अलग हो संभव नहीं होता ।

🚩बांझपन को बढ़ावा देता है:- 

प्रकृतिक शादियों में महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं, लेकिन समलैंगिक शादियों में दंपत्ति प्रकृतिक तौर पर बांझपन का शिकार होता है ।

🚩सेरोगेसी के बाजार को मिलता है बढ़ावा:-

एक ही लिंग की शादियों में दंपत्ति बच्चा पैदा करने में प्रकृतिक तौर पर असमर्थ होता है । ऐसे में वो सेरोगेसी या किराए की कोख का इस्तेमाल कर अपनी मुराद को पूरा करना का प्रयास करता है । समलैंगिक विवाह के कारण सेरोगेसी के बाजार को बढ़ावा मिलता है ।

🚩भगवान भी होते हैं नाराज

यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है । यह शादी भगवान द्वारा स्थापित प्राकृतिक नैतिक आदेश का उल्लंघन करती है और भगवान नाराज होते हैं ।

🚩समाज पर दबाव:-

समलैंगिक शादियां समाज पर अपनी स्वीकृति के लिए दबाव डालती है । कानूनी मान्यता के कारण समाज को जबरन इन शादियों को मंजूर करना ही होता है । जिन देशों में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, उन देशों में समलैंगिक शादियों से पैदा हुए बच्चों को शिक्षा देनी ही होती है । अगर कोई व्यक्ति या अधिकारी इसका विरोध करता है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है ।

🚩मनुष्य को इतने भयंकर नुकसान के कारण ही समलैंगिक संबध बनाना गैरकानूनी था, पर अभी पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के कारण आज देशवासी भी पशुता की ओर जाने लगे है इससे सावधान रहना जरूरी है ।

🚩न्यायालय के पास आम जनता, श्री राम मंदिर, धारा 370, कश्मीर पंडितों के लिए समय नहीं है, पर अप्राकृतिक संबध बनाने वाले फैसला सुनाने के लिए समय मिल जाता है ।

🚩भारत मे गौमाता की रक्षा के लिए कानून नहीं बना पा रहे हैं और समलैंगिक संबध के लिए कानून बना रहे हैं, कितने दुर्भाग्य की बात है ।

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Wednesday, September 5, 2018

जनता में भारी रोष, Sc/St एक्ट में बदलाव नही किया तो कल होगा भारत बंद

05 September 2018
http://azaadbharat.org
🚩देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें व स्वार्थी लोगों द्वारा दहेज, बलात्कार के कानून की तरह Sc/St एक्ट का भी भयंकर दुरुपयोग हो रहा है ।
🚩झूठे मुकदमें दर्ज होने के कारण जो लोग वास्तव में पीड़ित हैं, उनको न्याय नही मिल पा रहा है । आज न्यायालय में करोड़ों मुकदमों पर सुनवाई चल रही है, लाखों कैदी विचारधीन है, जिनको जमानत भी नही मिल पाती है ।
If there is no change in the public anger,
 Sc / St Act, then India will stop tomorrow.
🚩सज्जन व्यक्ति कभी झूठा आरोप नहीं लगाते हैं, पर आजकल कुछ लोग पैसों के लालच व बदला लेने की भावना से दहेज, बलात्कार के कानुन की तरह SC/ST एक्ट का भी काफी दुरुपयोग कर रहे हैं, अधिक झूठे मामले  सामने आने के कारण, अदालतें भी परेशान हो गई थी, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और सुप्रीम ने यहाँ तक कह दिया था कि डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी के जांच के बाद ही एफ.आई.आर. दर्ज होगी एवं उसके बाद गिरफ्तारी होगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बात को मान्य नहीं रखकर मोदी सरकार ने पुराने और मूल स्वरूप में उसी कानून को फिर से लागू कर दिया ।
🚩मात्र एक शिकायत पर किसी भी व्यक्ति को दोषी मान कर गिरफ्तार कर लेना और उसकी जमानत तक नहीं होने देना और 70 वर्षों से चली आ रही जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग को लेकर जनता ने 6 सितंबर 2018 को प्रातः 10:00 बजे से 4:30 बजे तक भारत बंद का आवाहन किया है ।
🚩एस.सी./एस.टी. संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18 A जोड़ी जाएगी । इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा । इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाया प्रावधान रद्द हो जाएगा और अब ये प्रावधान होगा-
-एस.सी./एस.टी. एक्ट में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है ।
-आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी, हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी ।
-एस.सी./एस.टी. मामले में जांच, इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर जांच करेंगे ।
-जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा ।
-एस.सी./एस.टी. मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी ।
-सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले, जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी पड़ेगी ।
🚩जनता का कहना है कि इस दलित उत्पीड़न एक्ट में यदि मोदी जी तीन चार प्रावधान जोड़ देते, तब यह बहुत अच्छा कानून होता और सभी के लिए फायदेमंद है ।
🚩पहला यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो शिकायतकर्ता को जेल हो और पीड़ित को मुआवजा मिले ।
🚩दूसरी चीज दलित उत्पीड़न एक्ट से मुआवजा खत्म कर दिया जाए क्योंकि 80% शिकायतें सिर्फ मुआवजे के लालच में की जाती हैं ।
🚩आपको बता दें कि दो दिन पहले नोएडा में एक दलित लड़की का उसके सगे ममेरे भाई ने बलात्कार किया, लेकिन उस लड़की के घरवालों ने मुआवजा पाने की लालच में पड़ोसी सवर्णों के ऊपर केस दर्ज करवा दिया, लेकिन पुलिस ने ईमानदारी से जांच की तो मामला सामने आ गया ।
🚩चौथी चीज पहले एक DSP रैंक का अधिकारी मामले की जांच करें और यदि शिकायत सच हो तभी जेल भेजा जाए ।
🚩आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह सभी प्रावधान जब मायावती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थी तो उन्होंने जोड़े थे ।
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2269363209962905&id=1441254326107135
🚩Sc/St एक्ट में बदलाव करना अत्यंत जरूरी है क्योंकि सभी हिन्दू ही हैं, सज्जन लोग तो इसका दुरुपयोग नहीं करेंगे, लेकिन स्वार्थी लोगों द्वारा इसका भयंकर दुरुपयोग किया जाएगा और हिन्दुओं को ही नुकसान होगा क्योंकि फिर हिंदुओं में आपस में ही मतभेद होगा और वे जाति-पाति में बंट जाएंगे, आपस में ही लड़ने लगेंगे, एक दूसरे को सहयोग नहीं करेंगे, जिससे हिन्दूओं को ही घाटा होगा और देशविरोधी ताकतें इसका भरपूर फायदा उठाएंगी ।
🚩आपको बता दें कि आज़ाद भारत किसी भी जाति को नहीं मनाता है । केवल हिन्दू चाहे वे कोई भी जाति का क्यों न हो ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, शुद्र वे अपने कर्म के अनुसार वर्ण है, लेकिन हमारी नजर में सब हिन्दू ही हैं और हमें एक होकर रहना चाहिए, लेकिन किसी भी गलत कानून का विरोध करना हर हिन्दुस्तानी का कर्तव्य है, चाहे वो दहेज, बलात्कार या Sc/St एक्ट हो उन सभी कानूनों का भयंकर दुरपयोग हो रहा है, उसमें भी संशोधन होना अत्यंत जरूरी है ।
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Tuesday, September 4, 2018

ईसाई मिशनरियों का गोरखधंधा : बच्चों की कर रहे है तस्करी

04 September 2018

🚩हिंदुस्तान में हिंदुओं को तो संविधान और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाया जाता रहा है, लेकिन मुसलमानों और ईसाईयों के कुकर्मों पर हमेशा पर्दा डाल दिया जाता है । 

🚩देश मे हाल में ही कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिससे ये बात साफ हो गई है कि ईसाई मिशनरियां मानव तस्करी के साथ दुष्कर्म को बढ़ावा देने वाली बन गई हैं । मदर टेरेसा की संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के रांची सेंटर में बच्चे बेचे जाने का मामला सामने आने के बाद पहली बार लोगों को पता चला है कि मानवता और समाज में सेवा के नाम पर दरअसल क्या हो रहा था । जाहिर है देश के लिए इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता कि धर्म की आड़ में बच्चे बेचने का रैकेट चले ।

🚩अभी हाल ही में दूसरा मामला बच्चों की तस्करी का आया है ।
Christian missionaries' gravity: children are being smuggled


झारखंड के चाईबासा जिले से मानव तस्करी कर अवैध तरीके से लुधियाना ले जाए गए 34 बच्चों में 30 बच्चे लापता हैं । सभी बच्चों को लुधियाना स्थित पैकियम मर्सी क्रास बाल गृह में रखा गया था । वहाँ ईसाई मिशनरियों द्वारा उनका धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था और उनसे बाल मजदूरी करवाई जा रही थी । इस पूरे प्रकरण में चाईबासा के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (ए.एच.टी.यू.) थाने में F.I.R. दर्ज कराई गई है । यह प्राथमिकी सी.डब्ल्यू.सी. चाईबासा की सदस्य ज्योत्सना तिर्की ने दर्ज कराई है । 

🚩कौन कर रहा है बाल तस्करी?

जुनूल लोगा नाम के व्यक्ति ने लुधियाना में मर्सी होम क्रिश्चियन में पढ़ाई कर मैट्रिक पास किया था । जुनूल लोगा बाहर के बच्चों को वहां पढ़ाई व रोजगार का प्रलोभन देकर उनके माता-पिता को धोखे में रख कर ले गया था। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार "जुनूल लोगा" ने झारखंड के विभिन्न जिलों में कार्यरत मिशनरी संस्थाओं व चर्च के पादरियों की मिलीभगत से मानव तस्करी कर के बच्चों को अवैध रूप से चाईबासा (झारखंड) से लुधियाना ले जाकर अवैध रूप से कार्यरत पैकियम मर्सी क्रास बालगृह में अमानवीय ढंग से रखा । वहां सी.डब्ल्यू.सी. को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।

🚩सीडब्ल्यूसी मेंबर ज्योत्सना ने की थी शिकायत 

एसपी गणदेशी के मुताबिक चाईबासा में बाल कल्याण समिति सदस्य ज्योत्सना तिर्की की शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू की गई है । शिकायत मिली थी कि चाईबासा और बिहार से ले जाकर लुधियाना में एक मिशनरी ने चाइल्ड शेल्टर होम में 34 बच्चों को अवैध तरीके से रखा है । तत्काल टीम लुधियाना भेजी गई और पंजाब पुलिस के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया । जिसे ट्रांजिट रिमांड पर चाईबासा लाने से पहले उसे वहां कोर्ट में लाया गया था । पुलिस  सभी बच्चों की जानकारी हासिल कर रही है । कथित धर्मांतरण पर कहा, प्रथम दृष्टया रिपोर्ट में पता चलता है कि कुछ बच्चों का धर्मांतरण हुआ है । 

🚩पुलिस ने रिकॉर्ड के मुताबिक कहा कि साल 2006 से झारखंड से करीब 300 बच्चों को पंजाब के लुधियाना लाया गया है । 

सी.डब्ल्यू.सी. मेंबर ज्योत्सना की शिकायत के अनुसार, यह ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण और बाल मजदूरी का मामला है ।

🚩देश में धर्मांतरण का एक बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा है । इस कारण देश में हिंदू आबादी लगातार घट रही है । हिंदुओं के देश में ही आठ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं । इसमें सबसे बड़ी भूमिका ईसाई मिशनरियों की सामने आती रही है ।

देशवासियों को ईसाई मिशनरियों के स्कूलों में भी बच्चों को नही भेजना चाहिए, वहाँ पर भी हिंदु त्योहारों और हिन्दू रीति रिवाजों का विरोध होता है, साथ ही साथ हिन्दू देवी-देवताओं का भी अपमान किया जाता है और यीशु को महान बताकर बच्चों का ब्रेनवॉश किया जाता है ।

🚩ईसाई मिशनरियों के काले चिट्ठे सामने आ गए है लेकिन एक भी सेक्युलर नेता या मीडिया बोलने को तैयार नही है क्योंकि इन्हें भी वेटिकन सिटी से फंडिग मिलती है ।
मीडिया को पवित्र हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने और ईसाई पादरियों के दुष्कर्म छुपाने के लिए भारी फंडिग मिलती है इसलिए बिकाऊ मीडिया की खबरों से भी सावधान रहें ।

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Monday, September 3, 2018

शोधकर्ता : श्रीमद्भगवदगीता पाठ से ठीक हो सकती हैं भयंकर बीमारियां

03 September 2018

🚩जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए श्रीमद्भगवदगीता ग्रंथ अद्भुत है । विश्व की 578 भाषाओं में भगवद्गीता का अनुवाद हो चुका है । हर भाषा में कई चिन्तकों, विद्वानों और भक्तों ने मीमांसाएँ की हैं और अभी भी हो रही हैं, और आगे भी होती रहेंगी । क्योंकि इस ग्रन्थ में सब देशों, जातियों, पंथों के तमाम मनुष्यों के कल्याण की अलौकिक सामग्री भरी हुई है । अतः हम सबको गीताज्ञान में अवगाहन करना चाहिए । भोग, मोक्ष, निर्लेपता, निर्भयता आदि तमाम दिव्य गुणों का विकास करने वाला यह गीता ग्रन्थ, विश्व में अद्वितिय है । यह बात स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज ने बताई थी ।
Researcher: Srimadbhavadgita lessons
can be cured by terrible diseases

🚩अमेरिकन महात्मा थॉरो ने बताया था कि
प्राचीन युग की सर्व रमणीय वस्तुओं में गीता से श्रेष्ठ कोई वस्तु नहीं है । गीता में ऐसा उत्तम और सर्वव्यापी ज्ञान है कि उसके रचयिता देवता को असंख्य वर्ष हो गये फिर भी ऐसा दूसरा एक भी ग्रन्थ नहीं लिखा गया है ।

🚩श्रीमद्भगवदगीता की कितनी ही महिमा गाओ कम है । आज के शोधार्थियों ने सिद्ध कर दिया कि श्रीमद्भगवदगीता से डायबिटीज जैसी अनेक बीमारियां भी ठीक हो सकती हैं ।
भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के शोधार्थियों के एक दल ने डायबिटीज को ठीक करने का आध्यात्मिक तरीका खोज निकाला है । इसकी खोज श्रीमद्भगवत गीता से की गई है । शोधार्थियों का कहना है कि, भगवद्गीता में अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के बीच जो संवाद हुआ है, उसका उपयोग विशेष रूप से पुरानी बीमारियां जैसे डायबिटीज को दूर करने के लिए किया जा सकता है । वे भगवद्गीता के उन श्लोकों के बारे में बता रहे हैं, जो जिंदगी की विभिन्न स्थितियों का वर्णन करता है । 

🚩टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शोधार्थियों ने कहा कि,"गीता नकारात्मक अवस्था को चिन्हित करता है और भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा इस अवस्था से निपटने के लिए सकारात्मक सलाह इस ग्रंथ में दिए गए हैं । अर्जुन उन्हें लागू करते हैं । डायबिटीज भी खराब जीवन शैली की वजह से होने वाली बीमारी है, जो पूरी तरह खाना और व्यायाम जैसी बुनियादी आदतों में बदलाव की वजह से हाेता है । भगवद्गीता में बताई गई बातों का उपयोग कर इससे निपटा जा सकता है।”

🚩इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म में प्रकाशित रिसर्च को डॉक्टरों व शोधकर्ताओं ने देश के भीतर और बाहर कई अस्पतालों और शोध संस्थानों में अध्ययन कर तैयार किया था । इसमें विदेशी विशेषज्ञ "ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और मिटफोर्ड अस्पताल, ढाका, बांग्लादेश" और "आगा खान विश्वविद्यालय अस्पताल, कराची, पाकिस्तान" से थे ।

🚩शोधकर्ताओं ने कहा कि “भगवद्गीता एक धार्मिक या दार्शनिक पाठ से कहीं अधिक है । इसके 700 से अधिक छंद जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालते हैं । ये व्यक्ति को नाकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर ले जाते हैं । ये श्लोक व्यक्ति के जीवन में पूरी तरह से बदलाव ला सकते हैं । 

🚩मधुमेह के शिकार व्यक्ति को, अपनी कई चीजों में बदलाव करना पड़ता है, जो पहले उन्हें काफी पसंद होता है । गीता के अध्ययन से उन्हें संयम का प्रयोग करने, जीवनशैली बदलने और चिकित्सा सलाह का पालन करने के लिए प्रेरणा मिलती। इसे पढकर और उसमें बताई गई बातों को अपने जीवन में लागू कर मरीज डायबिटीज जैसी बीमारियों से निदान पा सकते हैं। साथ ही कई बीमारियों और परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।” स्त्रोत : जनसत्ता

🚩इंग्लैन्ड के एफ.एच.मोलेम लिखते हैं कि
"बाईबल का मैंने यथार्थ अभ्यास किया है, उसमें जो दिव्यज्ञान लिखा है वह केवल गीता के उद्धरण के रूप में है । मैं ईसाई होते हुए भी गीता के प्रति इतना सारा आदरभाव इसलिए रखता हूँ क्योंकि जिन गूढ़ प्रश्नों का समाधान पाश्चात्य लोग अभी तक नहीं खोज पाए हैं, उनका समाधान गीता ग्रंथ ने शुद्ध और सरल रीति से दिया है । उसमें कई सूत्र अलौकिक उपदेशों से भरपूर लगे इसीलिए गीता जी मेरे लिए साक्षात् योगेश्वरी माता बन रही हैं । वह तो विश्व के तमाम धन से भी नहीं खरीदा जा सके, ऐसा भारतवर्ष का अमूल्य खजाना है ।"

🚩श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों की बहुउपयोगिता के कारण ही विदेश के कई स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, प्रबंधन #संस्थानों ने इस ग्रंथ की सीख व उपदेश को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है ।

🚩अमेरिका के #न्यूजर्सी में स्थापित कैथोलिक सेटन #हॉ यूनिवर्सिटी में, गीता को #अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया है ।

रोमानिया देश में कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तकों में रामायण और महाभारत के अंश हैं ।

🚩कई विशेषज्ञों का मानना है कि गीता में दिया गया ज्ञान, आधुनिक मैनेजमेंट के लिए भी एकदम सटीक है और उससे काफी कुछ सीखा जा सकता है । 

🚩श्रीमद्भगवद्गीता की महिमा विदेशी लोग जानकर उसका फायदा उठा रहे हैं, फिर भारतवासीयों को उससे वंचित नहीं रहना चाहिए ।

🚩भारत के मदरसों में कुरान पढ़ाई जाती है, #मिशनरी के स्कूलों में बाइबल, तो सभी स्कूलों-कॉलेजों श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ानी चाहिए ।

🚩अब समय आ गया है कि पश्चिमी #संस्कृति के #नकारात्मक प्रभाव को दूर किया जाए और अपनी भारतीय #संस्कृति को अपनाया जाए । #हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाना "भगवाकरण" नहीं है, अपितु उसमें मानवमात्र का कल्याण और उन्नति छुपी है ।

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