Tuesday, September 19, 2023

महिलाओं से अनजाने में कुछ गलतियां

 महिलाओं से अनजाने में कुछ गलतियां हो गई हो तो इस व्रत को अवश्य करे ,पापों से मिलेगी मुक्ति,पूरा लेख अवश्य पढ़ें......



19 September, 2023

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🚩भारत ऋषि-मुनियों का देश है। इस देश में ऋषियों की जीवन-प्रणाली का और ऋषियों के ज्ञान का अभी भी इतना प्रभाव है कि उनके ज्ञान के अनुसार जीवन जीनेवाले लोग शुद्ध, सात्त्विक, पवित्र और व्यवहार में भी सफल हो जाते हैं तथा परमार्थ में भी पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं।

ऋषि तो ऐसे कई हो गये, जिन्होंने अपना जीवन केवल ‘बहुजनहिताय-बहुजनसुखाय’ बिता दिया।

हम उन ऋषियों का आदर करते हैं, पूजन करते हैं। उनमें से भी वशिष्ठ, विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, अत्रि, गौतम और कश्यप आदि ऋषियों को तो सप्तर्षि के रूप में नक्षत्रों के प्रकाशपुंज में निहारते हैं ताकि उनकी चिरस्थायी स्मृति बनी रहे।

ऋषियों को ‘मंत्रद्रष्टा’ भी कहते हैं। ऋषि अपने को कर्ता नहीं मानते। जैसे वे अपने साक्षी-द्रष्टा पद में स्थित होकर संसार को देखते हैं, वैसे ही मंत्र और मंत्र के अर्थ को साक्षी भाव से देखते हैं। इसलिए उन्हें ‘मंत्रद्रष्टा’ कहा जाता है।


🚩ऋषि पंचमी के दिन इन मंत्रद्रष्टा ऋषियों का पूजन किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से महिलाएँ व्रत रखती हैं ।


🚩ऋषि की दृष्टि में तो न कोई स्त्री है न पुरुष, सब अपना ही स्वरूप है। जिसने भी अपने-आपको नहीं जाना है, उन सबके लिए ऋषि पंचमी का पर्व है। जिस अज्ञान के कारण यह जीव कितनी ही माताओं के गर्भों में लटकता आया है, कितनी ही यातनाएँ सहता आया है उस अज्ञान को निवृत्त करने के लिए उन ऋषि-मुनियों को हम हृदयपूर्वक प्रणाम करते हैं, उनका पूजन करते हैं।


🚩उन ऋषि-मुनियों का वास्तविक पूजन है- उनकी आज्ञा शिरोधार्य करना। उन्होंने खून-पसीना एक करके जगत को आसक्ति से छुड़ाने की कोशिश की है। हमारे सामाजिक व्यवहार में, त्यौहारों में, रीत-रिवाजों में उन्होंने कुछ-न-कुछ ऐसे संस्कार डाल दिये कि अनंत काल से चली आ रही मान्यताओं के परदे हटें और सृष्टि को ज्यों-का-त्यों देखते हुए सृष्टिकर्ता परमात्मा को पाया जा सके। उन ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उनका पूजन करना चाहिए, ऋषिऋण से मुक्त होने का प्रयत्न करना चाहिए।


🚩वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि मासिक धर्म के दिनों में स्त्री के शरीर से अशुद्ध परमाणु निकलते हैं, उसके मन-प्राण विशेषकर नीचे के केन्द्रों में होते हैं। इसलिए उन दिनों के लिए शास्त्रों में जो व्यवहार्य नियम बताये गये हैं, उनका पालन करने से हमारी उन्नति होती है।


🚩इस व्रत की कथा के अनुसार जिस किसी महिला ने मासिक धर्म के दिनों में शास्त्र-नियमों का पालन नहीं किया हो या अनजाने में ऋषि के दर्शन कर लिये हों या इन दिनों में उनके आगे चली गयी हो तो उस गलती के कारण जो दोष लगता है, उस दोष के निवारण हेतु, इस अपराध के लिए क्षमा माँगने हेतु यह व्रत रखा जाता है।


🚩ऋषि-मुनियों को आर्षद्रष्टा कहते हैं। उन्होंने कितना अध्ययन करने के बाद सब रहस्य बताये हैं! ऐसे ही नहीं कह दिया है। अभी भी आप अनुभव कर सकते हैं कि जिन दिनों घर की महिलाएँ मासिक धर्म में होती हैं, उन दिनों में प्रायः आपका मन उतना प्रसन्न और उन्नत नहीं रहता जितना और दिनों में रहता है।


🚩जिन घरों में शास्त्रोक्त नियमों का पालन होता है, लोग कुछ संयम से जीते हैं, उन घरों में तेजस्वी संतानें पैदा होती हैं।


🚩व्रत-विधि :


🚩ऋषि पंचमी का दिन त्यौहार का दिन नहीं है, व्रत का दिन है। आज के दिन हो सके तो अधेड़ा का दातुन करना चाहिए। दाँतों में छिपे हुए कीटाणु आदि निकल जायें और पायरिया जैसी बीमारियाँ नहीं हों तथा दाँत मजबूत हों- इस तरह दाँतों की तंदुरुस्ती का ख्याल रखते हुए यह बात बतायी गयी हो, ऐसा हो सकता है।


🚩इस दिन शरीर पर गाय के गोबर का लेप करके नदी में 108 बार गोते मारने होते हैं। गोबर के लेप से शरीर का मर्दन करते हुए स्नान करने के पीछे रोमकूप खुल जायें, चमड़ी पर से कीटाणु आदि का नाश हो जाय और साथ में एक्युप्रेशर व मसाज भी हो जाय- ऐसा उद्देश्य हो सकता है। 108 बार गोते मारने के पीछे ठंडी, गर्मी या वातावरण की प्रतिकूलता झेलने की जो रोगप्रतिकारक शक्ति शरीर में है, उसे जागृत करने का हेतु भी हो सकता है। अब आज के जमाने में नदी में जाकर 108 बार गोते मारना सबके लिए तो संभव नहीं है, इसलिए ऐसा आग्रह भी नही रखना चाहिए, लेकिन स्नान करो तब 108 बार हरिनाम लेकर अपने दिल को तो हरिरस से जरूर नहलाओ।


🚩स्नान के बाद सात कलश स्थापित करके सप्त ऋषियों का आवाहन करते हैं। उन ऋषियों की पत्नियों का स्मरण करके, उनका आवाहन, अर्चन-पूजन करते हैं। जो ब्राह्मण हो, ब्रह्मचिंतन करता हो, उसे सात केले घी-शक्कर मिलाकर देने चाहिए- ऐसा विधान है। अगर कुछ भी देने की शक्ति नहीं है और न दे सकें तो कोई बात नहीं, पर दुबारा ऐसा अपराध नहीं करेंगे यह दृढ़ निश्चय करना चाहिए। ऋषि पंचमी के दिन बहनें मिर्च, मसाला, घी, तेल, गुड़, शक्कर, दूध नहीं लेतीं। उस दिन लाल वस्त्र का दान करने का विधान है।

आज के दिन सप्तर्षियों को प्रणाम करके प्रार्थना करें कि ‘हमसे कायिक, वाचिक एवं मानसिक जो भी भूलें हो गयी हों, उन्हें क्षमा करना। आज के बाद हमारा जीवन ईश्वर के मार्ग पर शीघ्रता से आगे बढ़े, ऐसी कृपा करना।’


🚩खान-पान, स्नानादि तो हम हर रोज करते हैं, पर व्रत के निमित्त उन ब्रह्मर्षियों को याद करके सब क्रियाएँ करें तो हमारी लौकिक चेष्टाओं में भी उन ब्रह्मर्षियों का ज्ञान छलकने लगेगा। उनके अनुभव को अपना अनुभव बनाने की ओर कदम आगे रखें तो ब्रह्मज्ञानरूपी अति अद्भुत फल की प्राप्ति भी हो सकती है।


🚩ऋषि पंचमी का यह व्रत हमें ऋषिऋण से मुक्त होने के अवसर की याद दिलाता है। लौकिक दृष्टि से तो यह अपराध के लिए क्षमा माँगने का और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, पर सूक्ष्म दृष्टि से अपने जीवन को ब्रह्मपरायण बनाने का संदेश देता है। ऋषियों की तरह हमारा जीवन भी संयमी, तेजस्वी, दिव्य, ब्रह्मप्राप्ति के लिए पुरुषार्थ करनेवाला हो- ऐसी मंगल कामना करते हुए ऋषियों और ऋषिपत्नियों को मन-ही-मन आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं।

(साभार- लोक कल्याण सेतु पत्रिका: अगस्त 2003)


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गणोशोत्सव भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी मनाया जाता हैं.....

18 September, 2023


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🚩गणेश चतुर्थी के दिन से पूरे देश में गणेशोत्सव मनाते हैं। लोग बड़े ही भक्ति भाव से गणेश की स्थापना कर रहे हैं । हिन्दुओं के साथ-साथ गैर हिन्दुओं में भी बप्पा के बहुत भक्त हैं। परंतु आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान गणेश के जयकारे जिस तरह भारत में लगते हैं उसी तरह भारत से हजारों मील दूर कई देशों में भी गूंज रहे हैं। यहां गणपति की वैसी ही भक्ति, उतनी ही धूमधाम से पूजा और उतने ही उत्साह के साथ मूर्ति विसर्जन किया जाता है।


🚩अफ्रीकी देश घाना में गणपति बप्पा की पूजा अफ्रीकी लोग करते हैं। यहां हर साल भगवान गणेश की पूजा धूमधाम से की जाती है और भारतीय हिन्दू की तरह ये भी गणेश मूर्ति का विसर्जन करते हैं।


🚩नेपाल में गणेश मंदिर की स्थापना सबसे पहले सम्राट अशोक की पुत्री चारूमित्रा ने की थी। वहां के लोग भगवान गणेश को सिद्धिदाता और संकटमोचन के रूप में मानते हैं। परेशानियों से बचने के लिए वहां गणेश जी की पूजा की जाती है। 


🚩चीन के प्राचीन हिन्दू मंदिरों में चारों दिशाओं के द्वारों पर गणेश जी स्थापित है। 


🚩तिब्बत में गणेश जी को दुष्टात्माओं के दुष्प्रभाव से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है।

 

🚩जापान - जापान में भगवान गणेश को 'कांगितेन' के नाम से जाना जाता हैं, जो जापानी बौद्ध धर्म से सम्बंध रखते हैं। कांगितेन कई रूपों में पूजे जाते हैं, लेकिन इनका दो शरीर वाला स्वरूप सर्वाधिक प्रचलित है। चार भुजाओं वाले गणपति का भी वर्णन यहां मिलता है।

 

🚩श्रीलंका - तमिल बहुल क्षेत्रों में काले पत्थर से निर्मित भगवान पिल्लयार (गणेश) की पूजा की जाती है। श्रीलंका में गणेश के 14 प्राचीन मंदिर स्थित हैं। कोलंबो के पास केलान्या गंगा नदी के तट पर स्थित केलान्या में कई प्रसिद्ध बौद्ध मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित हैं। 

 

🚩इंडोनेशिया - माना जाता है कि इंडोनेशियन द्वीप पर भारतीय धर्म का प्रभाव पहली शताब्दी से है। यहां के भारतीयों के लिए भगवान गणेश की मूर्तियां ख़ासतौर पर भारत से मंगाई जाती हैं। यहां के 20 हज़ार के नोट पर भी गणेशजी की तस्वीर है। यहां उन्हें ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। 

 

🚩थाईलैंड - गणपति 'फ्ररा फिकानेत' के रूप में प्रचलित हैं। यहां इन्हें सभी बाधाओं को हरने वाले और सफलता के देवता माना जाता है। नए व्यवसाय और शादी के मौके पर उनकी पूजा मुख्य रूप से की जाती है। गणेश चतुर्थी के साथ ही वहां गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।


🚩इन देशों के अलावा बर्मा, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, गुयाना, मारीशस, फिजी, सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया, न्यूजीलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो आदि में भी गणेशोत्सव मनाया जाता है।


🚩गणेशोत्सव की शुरूआत-


🚩गणेशोत्सव के इतिहास पर गौर करें तो कहा जाता है है कि पेशवाओं ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था। शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई ने पुणे में कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थापना की थी।


🚩लेकिन सन 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरूआत की। तिलक के इस प्रयास से पहले गणेश पूजा सिर्फ परिवार तक ही सीमित थी। तिलक उस समय एक युवा क्रांतिकारी और गर्म दल के नेता के रूप में जाने जाते थे। वे एक बहुत ही स्पष्ट वक्ता और प्रभावी ढंग से भाषण देने में माहिर थे। तिलक ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे और वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहते थे। इसके लिए उन्हें एक ऐसा सार्वजानिक मंच चाहिए था, जहां से उनके विचार अधिकांश लोगों तक पहुंच सकें।


🚩तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक महोत्सव का रूप देते समय उसे महज धार्मिक कर्मकांड तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि आजादी की लड़ाई, छुआछूत दूर करने, समाज को संगठित करने के साथ ही उसे एक आंदोलन का स्वरूप दिया, जिसका ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा।


🚩तिलक द्वारा सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरूआत करने से दो फायदे हुए; एक तो वह अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचा पाए और दूसरा यह कि इस उत्सव ने आम जनता को भी स्वराज के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी और उन्हें जोश से भर दिया।


🚩इस तरह से हुई गणेशोत्सव की शुरूआत।


🚩बहरहाल आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस गणेशोत्सव को आज भी सभी भारतीय बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।


🚩इसलिए यह जरूरी है कि देशभर में आज भी उल्लास के साथ मनाये जाने वाले गणेशोत्सव में फ़िल्मी व पॉप आदि गाने नहीं बजाने चाहिए और ना ही दारू आदि का नशा करना चाहिए। यह मात्र तड़क-भड़क और गीत-संगीत के खर्चीले आयोजनों के बीच मनुष्यता व सामाजिक दायित्व जगाने की अपनी मूल प्रेरणा को ना खोये- इसका ध्यान रखना चाहिए।


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Sunday, September 17, 2023

भगवान गणेश जी प्रथम पूज्यनीय कैसे बने ? कलंग से बचने व विघ्ननाश के लिए गणेश चतुर्थी को,ये उपाय अवश्य करें....

17 September, 2023

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🚩जिस प्रकार अधिकांश वैदिक मंत्रों के आरम्भ में ‘ॐ’ लगाना आवश्यक माना गया है, वेदपाठ के आरम्भ में ‘हरि ॐ’ का उच्चारण अनिवार्य माना जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक शुभ अवसर पर सर्वप्रथम श्री गणपतिजी का पूजन अनिवार्य है।


🚩उपनयन, विवाह आदि सम्पूर्ण मांगलिक कार्यों के आरम्भ में जो श्री गणपतिजी का पूजन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।


🚩जिस दिन गणेश तरंगें पहली बार पृथ्वी पर आयीं अर्थात जिस दिन गणेशजी अवतरित हुए, वह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन था। उसी दिन से गणपति का चतुर्थी से संबंध स्थापित हुआ।


🚩शिवपुराण के अन्तर्गत रुद्रसंहिता के चतुर्थ (कुमार) खण्ड में यह वर्णन आता है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपनी शक्ति से एक पुतला बनाकर उसमें प्राण भर दिए और उसका नाम ‘गणेश’ रखा।


🚩पार्वतीजी ने उससे कहा- हे पुत्र! तुम एक मुगदल लेकर द्वार पर बैठ जाओ। मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूँ। जब तक मैं स्नान न कर लूँ, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना।


🚩भगवान शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणों ने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका।


🚩अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया। इससे माँ भगवती क्रुद्ध हो उठी और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षि नारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया।


🚩शिवजी के निर्देश अनुसार पर उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया।


🚩माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुख बालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया तथा ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान दिया।


🚩भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तुम्हारा नाम सर्वोपरि होगा। तुम सबके पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों की अध्यक्षता करोगे।


🚩गणेश्वर! आप भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुये हैं। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी।


🚩सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता


🚩"गणेशजी 'सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता' करके शिव-पार्वती की सात प्रदक्षिणा की, दंडवत् प्रणाम किया तो गणेश जी पर शिवजी और माँ पार्वती ने कृपा बरसायी और गणेशजी प्रथम पूजनीय हुए, दुनिया जानती है । इसलिए हिन्दू संत आसाराम बापू ने  'वेलेंटाइन डे' के कुप्रभावों से बचकर माता-पिता का सत्कार करने को कहा और 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस की शुरुवात की ।"


🚩लक्ष्मी पूजन के साथ गणेश पूजन का विधान इसी कारण रखा गया कि धन जीवन में अहंकार, व्यसन जैसी बुराइयां लेकर न आये अर्थात गलत तरीकों से धन न कमाएं। ईमानदारी से कमाया गया धन ही हमारे लिए सुखकारी होगा, अन्यथा धन पाकर भी कितने लोग हैं जो सुखी नहीं रह पाते हैं।


🚩गणेश चतुर्थी के दिन गणेश उपासना का विशेष महत्त्व है। इस दिन गणेशजी की प्रसन्नता के लिए इस ‘गणेश गायत्री’ मंत्र का जप करना चाहिए:

*महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।


🚩श्रीगणेशजी का अन्य मंत्र, जो समस्त कामनापूर्ति करनेवाला एवं सर्व सिद्धिप्रद है: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गणेश्वराय ब्रह्मस्वरूपाय चारवे। सर्वसिद्धिप्रदेशाय विघ्नेशाय नमो नमः।।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, गणपति खंड : 13.34)


🚩गणेशजी बुद्धि के देवता हैं। विद्यार्थियों को प्रतिदिन अपना अध्ययन-कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व भगवान गणपति, माँ सरस्वती एवं सद्गुरुदेव का स्मरण करना चाहिए। इससे बुद्धि शुद्ध और निर्मल होती है।


🚩विघ्न निवारण हेतु


🚩गणेश चतुर्थी के दिन ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्नों का निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढ़ती है।


🚩सावधानी 


🚩गणेश चतुर्थी तिथि को चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए। अगर चंद्रमा को देख लिया तो झूठा कलंक लग जाता है। उसी तरह जिस तरह से श्री कृष्ण को स्यमंतक मणि चुराने का लगा था। लेकिन अगर चंद्रमा को देख ही लिया तो कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या विद्वानजनों से सुनने पर गणेश जी क्षमा कर देते हैं।


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Saturday, September 16, 2023

पेरियार की कुत्सित व घृणित मानसिकता का परिचय देती है,उसकी लिखी किताब सच्ची रामायण...

16 September, 2023

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🚩तमिलनाडु के दिवंगत नेता पेरियार को इस विघटनकारी मानसिकता का जनक कहा जाये, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। पेरियार ने दलित वोट-बैंक को खड़ा करने के लिए ऐसा घृणित कार्य किया था। स्टालिन जैसे लोग भी अपनी राजनीतिक हितों को साधने के लिए उन्हीं का अनुसरण कर रहे है। पेरियार ने अपने आपको सही और श्री राम जी को गलत सिद्ध करने के लिए एक पुस्तक भी लिखी थी जिसका नाम था सच्ची रामायण।


🚩सच्ची रामायण पुस्तक वाल्मीकि रामायण के समान राम जी का कोई जीवन चरित्र नहीं है। बल्कि हम इसे रामायण की आलोचना में लिखी गई एक पुस्तक कह सकते हैं। इस में रामायण के हर पात्र के बारे में अलग अलग लिखा गया है। उनकी यथासंभव आलोचना की गई है। इस में राम ,सीता ,दशरथ हनुमान आदि के बारे में ऐसी ऐसी बाते लिखी गई है। जिनका वर्णन करने में लेखनी भी इंकार कर दे। सब से बड़ी बात सच्ची रामायण में पेरियार ने जबरन कुछ पात्रों को दलित सिद्ध करने का प्रयास किया है। इन ( पेरियार द्वारा घोषित ) दलित पात्रों का पेरियार ने जी भरकर महिमामंडन किया। यहाँ तक की रावण की इस पुस्तक में बहुत प्रशंसा की गई है। यहाँ तक कहा गया है कि राम उसे आसानी से हरा नहीं सकते थे। इसलिए उसे धोखे से मार गया। इसी पुस्तक में लिखा है के सीता अपनी इच्छा से रावण के साथ गयी थीं, क्यों कि उन्हें राम पसंद नहीं थे।


🚩पेरियार श्रीराम के विषय में लिखता है कि तमिलवासियों , भारत के शूद्रों तथा महाशूद्रों के लिये राम का चरित्र शिक्षाप्रद एवं अनुकरणीय नहीं है।


🚩पेरियार के अनुसार...

महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जो चित्रण किया गया है वो राम इस कल्पना के विपरीत हैं । पेरियार की कुत्सित मानसिकता का परिचय देती है उसकी यह दिमागी कचरे के बंडल जैसी किताब सच्ची रामायण, जिसके आगे रामायण शब्द लिखना भी बुरा लगता है।

पेरियार लिखता है कि, राम विश्वासघात, छल, कपट, लालच, कृत्रिमता, हत्या,आमिष-भोज और निर्दोष पर तीर चलाने की साकार मूर्ति थे।


🚩रामायण के प्रमुख पात्र भगवान राम मनुष्यरूप में प्रकट हो कर सभी के लिए आदर्श और मर्यदापुर्षोत्तम हैं। राम के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए वाल्मीकि रामायण पढ़ें । 

 

🚩*एतदिच्छाम्यहं श्रोतु परं कौतूहलं हि मे।महर्षे त्वं समर्थो$सि ज्ञातुमेवं विधं नरम्।।*(बालकांड सर्ग १ श्लोक ५)

आरंभ में वाल्मीकि जी नारदजी से प्रश्न करते है कि “हे महर्षि ! ऐसे सर्वगुणों से युक्त नर रूप में नारायण के संबंध में जानने की मुझे उत्कट इच्छा है,और आप इस प्रकार के मनुष्य को जानने में समर्थ हैं।


🚩महर्षि वाल्मीकि ने श्रीरामचंद्र को *सर्वगुणसंपन्न* कहा है।

*अयोध्याकांड प्रथम सर्ग श्लोक ९-३२ में श्री राम जी के गुणों का वर्णन करते हुए वाल्मीकि जी लिखते है।


*सा हि रूपोपमन्नश्च वीर्यवानसूयकः।भूमावनुपमः सूनुर्गुणैर्दशरथोपमः।९।कदाचिदुपकारेण कृतेतैकेन तुष्यति।न स्मरत्यपकारणा शतमप्यात्यत्तया।११।*

अर्थात्:- श्रीराम बड़े ही रूपवान और पराक्रमी थे।वे किसी में दोष नहीं देखते थे।भूमंडल पर उनके समान कोई न था।वे गुणों में अपने पिता के समान तथा योग्य पुत्र थे।९।।

कभी कोई उपकार करता तो उसे सदा याद रखते तथा उसके अपराधों को याद नहीं करते।।११।।


🚩आगे संक्षेप में इसी सर्ग में वर्णित श्रीराम के गुणों का वर्णन करते हैं।देखिये

*श्लोक १२-३४*।इनमें श्रीराम के निम्नलिखित गुण हैं।

१:-अस्त्र-शस्त्र के ज्ञाता।महापुरुषों से बात कर उनसे शिक्षा लेते।

२:-बुद्धिमान,मधुरभाषी तथा पराक्रमी, पर इन सब गुणों का गर्व न करने वाले।

३:-सत्यवादी,विद्वान, प्रजा के प्रति अनुरक्त , प्रजा भी उनको चाहती थी।

४:-परमदयालु,क्रोध को जीतने वाले,दीनबंधु।

५:-कुलोचित आचार व क्षात्रधर्म के पालक।

६:-शास्त्र विरुद्ध बातें नहीं मानते थे,वाचस्पति के समान तर्कशील।

७:-उनका शरीर निरोग था(आमिष-भोजी का शरीर निरोग नहीं हो सकता), सदैव तरूणावस्था जैसे सुंदर शरीर से सुशोभित थे।

८:-‘सर्वविद्याव्रतस्नातो यथावत् सांगवेदवित’-संपूर्ण विद्याओं में प्रवीण, षडमगवेदपारगामी।बाणविद्या में अपने पिता से भी बढ़कर।

९:-उनको धर्मार्थकाममोक्ष का यथार्थज्ञान था तथा प्रतिभाशाली थे।

१०:-विनयशील,महान गुरुभक्त एवं आलस्य रहित थे।

११:- धनुर्वेद में सब विद्वानों से श्रेष्ठ।

कहां तक वर्णन किया जाये...? वाल्मीकि जी ने तो यहां तक कहा है, कि *लोके पुरुषसारज्ञः साधुरेको विनिर्मितः।*( वही सर्ग श्लोक १८)

अर्थात्:-

*उन्हें देखकर ऐसा जान पड़ता था, कि संसार में विधाता ने समस्त पुरुषों के सारतत्त्व को समझने वाले साधु पुरुष के रूप में एकमात्र श्रीराम को ही प्रकट किया है।*


🚩अब पाठकगण स्वयं निर्णय कर लेंगे कि श्रीराम क्या थे !! लोभी,हत्यारा,मांसभोजी आदि या सदाचारी और श्रेष्ठतमगुणों और मर्यादा की साक्षात् मूर्ति !!!

श्री राम तो रामो विग्रहवान धर्मः अर्थात धर्म के साक्षात् मूर्त रूप हैं।

राम तो राम हैं...हमारा उनके श्रीचरणों में प्रणाम है ।


🚩भारत देश जो आज है उतना ही नहीं है। भारत के कई राजा पूरे पृथ्वी के सम्राट रहे हैं, ऐसा कई हिन्दू धर्म ग्रंथों में वर्णन आता है। लेकिन दुष्ट स्वभाव के ( राक्षस जैसे ) लोग धीरे धीरे विभाजन करते गए और अन्य मत पंथ आते गए और आखिर में भारत एक छोटा देश बन कर रह गया और आज इस भारत  में भी राष्ट्र विरोधी ताकतें लोगों को जात-पात में बांटकर अपनी सत्ता स्थापित करना चाहते है। 


🚩आसानी से समझना है तो यही है , कि जो सनातन विरोधी है... वही राष्ट्र विरोधी है और वे राष्ट्र और संस्कृति को खत्म करके अपनी सत्ता कायम करना चाहते हैं । इसलिए ऐसे दुष्ट स्वभाव के लोगो की पहचान करके देश से उनको उखाड़ फेंकना चाहिए।


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Friday, September 15, 2023

कश्मीर छोड़ कर चले जाओ और अपनी बहू बेटियां हमारे लिए छोड जाओ......

15  September, 2023


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🚩कश्मीर में हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था जिसने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया। मुस्लिम आतंकी संगठन का नारा था- ‘हम सब एक, तुम भागो या मरो !’ इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ दी। करोड़ों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोड़कर शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए। हिंसा के प्रारंभिक दौर में 300 से अधिक हिन्दू महिलाओं और पुरुषों की हत्या हुई थी ।

 

🚩मुस्लिम आतंकवादियों ने 14 सितंबर के दिन कश्मीरी हिन्दूओं को धमकी देकर सर्वप्रथम 14 सितम्बर 1989 को श्रीनगर में हिंदुओं की रक्षा करने वाले भाजपा नेता श्री टिकालाल की हत्या की थी। उसके बाद 19 जनवरी 1990 को लाखों कश्मीरी हिंदुओं को सदा के लिए अपनी धरती, अपना घर छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी होना पड़ा। वे आज भी शरणार्थी हैं। उन्हें वहां से भागने के लिए बाध्य करने वाले भी कहने को भारत के ही नागरिक थे, और आज भी हैं।

कितनी दुःखद बात है कि , उन कश्मीरी इस्लामिक आतंकवादियों को वोट डालने का अधिकार भी है, पर इन हिन्दू शरणार्थियों को वो भी नहीं !

 

🚩वर्ष 1990 के आते आते फारूख अब्दुल्ला की सरकार आत्म-समर्पण कर चुकी थी। हिजबुल मुजाहिद्दीन ने 4 जनवरी 1990 को प्रेस नोट जारी किया, जिसे कश्मीर के उर्दू समाचार पत्रों आफताब’ और अल सफा’ ने छापा । प्रेस नोट में हिंदुओं को कश्मीर छोड़ कर जाने का आदेश दिया गया था । कश्मीरी हिंदुओं की खुले आम हत्याएं आरंभ हो गयी थी । कश्मीर की मस्जिदों के ध्वनि प्रक्षेपक जो अब तक केवल अल्लाह-ओ-अकबर’के स्वर छेड़ते थे, अब भारत की ही धरती पर हिंदुओं को चीख चीख कर कहने लगे कि,

‘कश्मीर छोड़ कर चले जाओ और अपनी बहू बेटियां हमारे लिए छोड जाओ !

कश्मीर में रहना है तो अल्लाह-अकबर कहना है !

असि गाची पाकिस्तान, बताओ रोअस ते बतानेव सन’ (हमें पाकिस्तान चाहिए, हिंदु स्त्रियों के साथ, किंतु पुरुष नहीं’),

...ये नारे मस्जिदों से लगाये जाने वाले कुछ नारों में से थे ।

 

🚩दीवारों पर पोस्टर लगे हुए थे कि कश्मीर में सभी इस्लामी वेशभूषा पहनें, सिनेमा पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया ।  कश्मीरी हिंदुओं की दुकानें, घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान चिह्नित कर दिए गए । यहां तक कि लोगों की घड़ियों का समय भी भारतीय समय से बदल कर पाकिस्तानी समय पर करने के लिए उन्हें बाध्य किया गया ।

24 घंटे में कश्मीर छोड़ दो या फिर मारे जाओ –


🚩कश्मीर में काफिरों का कत्ल करो’ का सन्देश गूंज रहा था । इस्लामिक दमन का एक वीभत्स चेहरा जिसे भारत सदियों तक झेलने के बाद भी मिल-जुल कर रहने के लिए भूल चुका था, वह एक बार पुन: अपने सामने था !

 

🚩आज कश्मीर घाटी में हिन्दू नहीं हैं। जम्मू और दिल्ली में आज भी उनके शरणार्थी शिविर हैं। 33 साल से वे वहां जीने को बाध्य हैं। कश्मीरी पंडितों की संख्या 3 से 7 लाख के लगभग मानी जाती है, जो भागने पर मजबूर किए गए और उनकी एक पूरी पीढ़ी नष्ट हो गयी। कभी धनवान रहे ये हिन्दू, आज सामान्य आवश्यकताओं के लिए भी पराश्रित हो गए हैं।  उनके मन में आज भी उस दिन की प्रतीक्षा है जब वे अपनी धरती पर वापस जा पाएंगे। उन्हें भगाने वाले गिलानी जैसे लोग आज भी जब चाहे दिल्ली आ कर, कश्मीर पर भाषण देकर जाते हैं और उनके साथ अरुंधती रॉय जैसे भारत के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवी शान से बैठते हैं।

 

🚩कश्यप ऋषि की धरती, भगवान शंकर की भूमि कश्मीर जहां कभी पांडवों की 28 पीढ़ियों ने राज्य किया था । वो कश्मीर जिसे आज भी भारत मां का मुकुट कहा जाता है । 500 साल पूर्व तक यही कश्मीर अपनी शिक्षा के लिए जाना जाता था। औरंगजेब के बड़े भाई दारा शिकोह कश्मीर के विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ने गये थे। किंतु कुछ समय पश्चात उन्हें भी औरंगजेब ने इस्लाम से निष्कासित कर भरे दरबार में उनका क़त्ल कर दिया था। भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग और प्रतिनिधि रहे कश्मीर को आज अपना कहने में भी सेना की सहायता लेनी पड़ती है।

"हिंदु घटा तो भारत बंटा" के तर्क की कोई काट उपलब्ध नहीं है। कश्मीर उसी का एक उदाहरण है।


🚩मुस्लिम वोटों की भूखी तथाकथित सेक्युलर पार्टियों और हिंदु संगठनों को पानी पी पी कर कोसने वाले मिशनरी स्कूलों से निकले अंग्रेजी के पत्रकारों और समाचार चैनलों को उनकी याद भी नहीं आती ! गुजरात दंगों में मरे साढ़े सात सौ मुस्लिमों के लिए जीनोसाईड जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले सेक्युलर चिंतकों को अल्लाह के नाम पर कत्ल किए गए दसों सहस्र कश्मीरी हिंदुओं का ध्यान स्वप्न में भी नहीं आता ! सरकार कहती है, कि कश्मीरी हिंदु स्वेच्छा से’ कश्मीर छोड़ कर भागे । इस घटना को जनस्मृति से विस्मृत होने देने का षड्यंत्र भी रचा गया है ।


🚩.....जरा सोचिए आज की पीढ़ी में कितने लोग उन विस्थापितों के दुःख को जानते हैं , जो आज भी विस्थापित हैं !?

भोगने वाले भोग रहे हैं । जो जानते हैं, दुःख से उनकी छाती फटती है और याद करके आंखें आंसुओं के समंदर में डूब जाती हैं और सर लज्जा से झुक जाता है ।

रामायण की देवी सीता को शरण देने वाले भारत की धरती से उसके अपने पुत्रों को भागना पडा ! कवि हरि ओम पवार ने इस दशा का वर्णन करते हुए जो लिखा, वही प्रत्येक जानकार की मनोदशा का प्रतिबिम्ब है –

" मन करता है फूल चढा दूं लोकतंत्र की अर्थी पर, भारत के बेटे शरणार्थी हो गए अपनी ही धरती पर ! "

स्त्रोत : IBTL

 

🚩कश्मीरी हिन्दू विश्वभर के जिहादी आतंकवाद के पहली बलि सिद्ध हुए। वर्ष 1990 के विस्थापन के पश्चात विगत 29 वर्ष से विविध राजनीतिक दलों के शासन सत्ता में रहे; परंतु मुसलमानों के तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कश्मीर की स्थिति में कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ अत: कश्मीरी हिन्दू अपने घर नहीं लौट सके !

 

🚩अब भाजपा की सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 हटाने से कश्मीरी हिन्दुओं के मन में पुनः घाटी में बसने की उम्मीदें जागी हैं । अब शीघ्र ही सरकार कश्मीरी हिन्दुओं के घाटी में पुनर्वसन की व्यवस्था करेगी , ऐसी ही आशा है।


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Thursday, September 14, 2023

हिंदी विश्व भाषा बनने योग्य है !!

 हिंदी विश्व भाषा बनने योग्य है, क्योंकि हिंदी दुनिया की सबसे उन्नत भाषा होने के साथ-साथ विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।



14 September, 2023

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🚩हिंदी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली एवं सबसे उन्नत भाषा है जो राष्ट्र व विश्व भाषा बनने योग्य है

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। सरकारी काम काज हिंदी भाषा में ही होगा।


🚩इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।


🚩हिंदी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है लेकिन अभी तक हम इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बना पाए।


🚩हिंदी दुनिया की सर्वाधिक तीव्रता से प्रसारित हो रही भाषाओं में से एक है। वह सच्चे अर्थों में विश्व भाषा बनने की पूर्ण अधिकारिणी है। हिंदी का शब्दकोष बहुत विशाल है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों शब्द हैं जो अंग्रेजी भाषा में नहीं है।


🚩हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनागरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है। हिन्दी को संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन शब्द-रचना-सामर्थ्य विरासत में मिली है।


🚩आज मैकाले शिक्षा पद्धति की छाप की वजह से ही हमने अपनी मानसिक गुलामी बना ली है कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम चल नहीं सकता। हमें हिंदी भाषा का महत्व समझकर इसे खूब उपयोग करना चाहिए।


🚩मदन मोहन मालवीयजी ने 1898 में सर एंटोनी मैकडोनेल के सम्मुख हिंदी भाषा की प्रमुखता को बताते हुए कचहरियों में हिन्दी भाषा को प्रवेश दिलाया था।


🚩लोकमान्य तिलकजी ने हिन्दी भाषा को खूब प्रोत्साहित किया


🚩वे कहते थे: ‘‘अंग्रेजी शिक्षा लेने के लिए बच्चों को सात-आठ वर्ष तक अंग्रेजी पढ़नी पड़ती है। जीवन के ये आठ वर्ष कम नहीं होते। ऐसी स्थिति विश्व के किसी और देश में नहीं है। ऐसी शिक्षा-प्रणाली किसी भी सभ्य देश में नहीं पायी जाती।’’


🚩जिस प्रकार बूँद-बूँद से घड़ा भरता है, उसी प्रकार समाज में कोई भी बड़ा परिवर्तन लाना हो तो किसी-न-किसी को तो पहला कदम उठाना ही पड़ता है और फिर धीरे-धीरे एक कारवां बन जाता है व उसके पीछे-पीछे पूरा समाज चल पड़ता है।


🚩हमें भी अपनी राष्ट्रभाषा को उसका खोया हुआ सम्मान और गौरव दिलाने के लिए व्यक्तिगत स्तर से पहल करनी चाहिए।


🚩एक-एक मति के मेल से ही बहुमति और फिर सर्वजनमति बनती है। हमें अपने दैनिक जीवन में से अंग्रेजी को तिलांजलि देकर विशुद्ध रूप से मातृभाषा अथवा हिन्दी का प्रयोग करना चाहिए।


🚩राष्ट्रीय अभियानों, राष्ट्रीय नीतियों व अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान हेतु अंग्रेजी नहीं राष्ट्रभाषा हिन्दी ही साधन बननी चाहिए।


🚩जब कमाल पाशा अरब देश में तुर्की भाषा को लागू करने के लिए अधिकारियों द्वारा मांगी कुछ दिन की मोहलत की अपील ठुकराकर रातोंरात परिवर्तन कर सकते हैं तो हमारे लिए क्या यह असम्भव है ?


🚩आज सारे संसार की आशादृष्टि भारत पर टिकी है। हिन्दी की संस्कृति केवल देशीय नहीं सार्वलौकिक है क्योंकि अनेक राष्ट्र ऐसे हैं,जिनकी भाषा हिन्दी के उतनी करीब है जितनी भारत के अनेक राज्यों की भी नहीं है।


🚩स्वभाषा की महत्ता बताते हुए हिन्दू संत आशारामजी बापू कहते हैं : ‘‘मैं तो जापानियों को धन्यवाद दूँगा। वे अमेरिका में जाते हैं तो वहाँ भी अपनी मातृभाषा में ही बातें करते हैं …और हम भारतवासी! भारत में रहते हैं फिर भी अपनी हिन्दी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं में अंग्रेजी के शब्द बोलने लगते हैं। आदत जो पड़ गयी है! आजादी मिले 77 वर्ष से भी अधिक समय हो गया, बाहरी गुलामी की जंजीर तो छूटी लेकिन भीतरी गुलामी, दिमागी गुलामी अभी तक नहीं गयी।’’


🚩अंग्रेजी भाषा के दुष्परिणाम


🚩लॉर्ड मैकाले ने कहा था: ‘मैं यहाँ (भारत) की शिक्षा-पद्धति में ऐसे कुछ संस्कार डाल जाता हूँ कि आनेवाले वर्षों में भारतवासी अपनी ही संस्कृति से घृणा करेंगे, मंदिर में जाना पसंद नहीं करेंगे, माता-पिता को प्रणाम करने में तौहीन महसूस करेंगे; वे शरीर से तो भारतीय होंगे लेकिन दिलोदिमाग से हमारे ही गुलाम होंगे!


🚩विदेशी शासनकाल के अनेकों दोषों से में देश के नौजवानों पर डाला गया विदेशी भाषा के माध्यम का घातक बोझ इतिहास में एक सबसे बड़ा दोष माना जायेगा। इस माध्यम ने राष्ट्र की शक्ति हर ली है, विद्यार्थियों की आयु घटा दी है, उन्हें आम जनता से दूर कर दिया है और शिक्षण को बिना कारण खर्चीला बना दिया है।


🚩अगर यह प्रक्रिया अब भी जारी रही तो वह राष्ट्र की आत्मा को नष्ट कर देगी। इसलिए शिक्षित भारतीय जितनी जल्दी विदेशी माध्यम के भयंकर वशीकरण से बाहर निकल जायें उतना ही उनका और देश का लाभ होगा।


🚩अपनी मातृभाषा की गरिमा को पहचानें। अपने बच्चों को अंग्रेजी (कन्वेंट स्कूलों) में शिक्षा दिलाकर उनके सर्वांगीण विकास के मार्ग को अवरुद्ध न करें। उन्हें मातृभाषा ( खासकर गुरुकुल शिक्षा पद्धि ) में पढ़ने की स्वतंत्रता देकर उनके चहुमुखी विकास में सहभागी बनें।


🚩हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना चाहिए , क्योंकि हिंदी राष्ट्र का गौरव है। इसे अपनाना और इसकी अभिवृद्धि करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। यह राष्ट्र की एकता और अखंडता की नींव है। आओ, इसे सुदृढ़ बनाकर राष्ट्ररूपी भवन की सुरक्षा करें।


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Wednesday, September 13, 2023

अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की होने लगी तैयारियां.....

13 September, 2023


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🚩विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने घोषणा की है कि अयोध्या में भगवान श्री रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने वाले सभी संतो और भक्तों के लिए  भोजन एवं रहने की व्यवस्था करेगी ।


🚩बजरंग दल 30 सितंबर से 15 अक्टूबर तक 2,281 शौर्य यात्राएं निकालेगा और देश के पांच लाख से अधिक गांवों को जोड़ेगा। इन यात्राओं के दौरान यात्रा मार्गों पर धार्मिक सभाओं का भी आयोजन किया जाएगा।


🚩विहिप  के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि युवा शक्ति का यह महान अभियान देश में आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए हिंदू समाज में एकता और सामाजिक समन्वय के रूप में संकल्प पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि प्रतिष्ठा समारोह के दिन देशभर के मठ-मंदिरों में पूजा, यज्ञ, हवन और आरती की जाएगी। साथ ही हर घर में राम भक्त रात में पांच दीपक जरूर जलाएंगे और करोड़ों भक्तों के बीच प्रसाद भी बांटा जाएगा।


🚩उन्होंने कहा कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का कार्यक्रम प्रत्येक राम भक्त का कार्यक्रम बनना चाहिए, ताकि न केवल देश में रहने वाले लोग बल्कि विदेश में रहने वाले लोग भी इस महान महोत्सव  में भाग ले सकें। कुमार ने कहा कि दिवाली पखवाड़े के दौरान देश के संत भी पद यात्रा करेंगे और गांवों और शहरों में हिंदुओं की बैठक करेंगे। उन्होंने कहा, गांव और युवाओं में मंदिर की प्रतिष्ठा से पहले देश में हिंदू एकता की व्यापक जागृति होगी और समाज एकजुट होगा। सामाजिक समन्वय की संस्था के रूप में इसे युगों-युगों तक याद किया जाएगा।


🚩बैठक में मौजूद सभी विहिप नेताओं ने इस आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने का निर्णय लिया है। इससे पहले बैठक में शामिल होने आए प्रतिनिधियों ने राम जन्मभूमि पर चल रहे सघन निर्माण कार्य का अवलोकन किया और रामलला के दर्शन भी किये।


🚩 रामलला की प्राण प्रतिष्‍ठा से पहले सारे काम होंगे पूरे, मंदिर निर्माण समिति की बैठक में हुई बात,

अयोध्या एयरपोर्ट के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में पूरा होगा, साल के अंत तक शुरू होगी उड़ान ।


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