Monday, February 17, 2020

इन दो अंतराष्ट्रीय खबरों से जान सकते हैं कि हिंदु संस्कृति कितनी महान है

17 फरवरी 2020

*🚩विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता भारत में ही मिली है। संसार का सबसे पुराना इतिहास भी यहीं पर उपलब्ध है। हमारे ऋषियों ने उच्छृंखल यूरोपियों के जंगली पूर्वजों को मनुष्यत्व एवं सामाजिक परिवेश प्रदान किया, इस बात के लाखों ऐतिहासिक प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं।*

*🚩यूनान के प्राचीन इतिहास का दावा है कि भारतवासी वहाँ जाकर बसे तथा वहाँ उन्होंने विद्या का खूब प्रचार किया। यूनान के विश्वप्रसिद्ध दर्शनशास्त्र का मूल भारतीय वेदान्त दर्शन ही है।*

*🚩यूनान के प्रसिद्ध विद्वान एरियन ने लिखा हैः 'जो लोग भारत से आकर यहाँ बसे थे, वे कैसे थे ? वे देवताओं के वंशज थे, उनके पास विपुल सोना था। वे रेशम के दुशाले ओढ़ते थे और बहुमूल्य रत्नों के हार पहनते थे।'*

*🚩एरियन भारतीयों के ज्ञान, चरित्र एवं उज्ज्वल-तेजस्वी जीवन के कारण उन्हें देवताओं के वंशज कहता है। यहाँ पर उसने भारतीयों के आध्यात्मिक एवं भौतिक विकास को स्पष्ट किया है।*

*🚩इन दो खबरों से जान सकते हैं कि सनातन हिंदू संस्कृति कितनी महान है और उससे विदेशी लोग कैसे लाभ उठा रहे हैं?*

*🚩शाकाहार, योग और ध्यान ने मुझे शिखर पर पहुंचाया : नोवाक*

*🚩आठवां ऑस्ट्रेलियाई ओपन खिताब जीतकर महानतम टेनिस खिलाड़ियों की जमात में शामिल होने वाले नोवाक जोकोविच ने इस शानदार फॉर्म का श्रेय शाकाहार, योग और ध्यान को दिया है। युद्ध की विभीषिका झेलने वाले बेलग्राद में पैदा हुए सर्बिया के इस टेनिस स्टार ने सूखे स्वीमिंग पूल में अभ्यास करके टेनिस का ककहरा सीखा। अब रिकॉर्ड 15 करोड डॉलर ईनामी राशि के साथ मोंटे कार्लो में महल सरीखे घर में रहते हैं।*

*🚩कुछ ऐसा है जोकोविच की दिनचर्या*

*🚩जोकोविच की दिनचर्या अनूठी और अनुकरणीय है। वह सूर्योदय से पहले अपने परिवार के साथ उठ जाते हैं, सूर्योदय देखते हैं और उसके बाद परिवार को गले लगाते हैं। साथ में गाते हैं और योग करते हैं।*

*🚩साथ ही 2 बच्चों के पिता जोकोविच पूरी तरह से शाकाहारी हैं। नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ‘द गेम चेंजर्स में उन्होंने कहा, ”उम्मीद है कि मैं दूसरे खिलाड़ियों को शाकाहार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकूंगा।”*

*इंडोनेशिया में ‘सुग्रीव’ के नाम पर पहला हिंदू विश्‍वविद्यालय*

*🚩इंडोनेशिया में रामचरित मानस के एक पात्र सुग्रीव के नाम पर पहली हिंदू विश्‍वविद्यालय खोली गई है। इंडोनेशिया ने बाली में एक इंस्टीट्यूट को देश की पहली हिंदू विश्‍वविद्यालय में बदल दिया है। प्रेजिडेंशियल रेगुलेशन के तहत बाली के देनपासर के हिंदू धर्म स्टेट इंस्टीट्यूट को देश की पहली हिंदू स्टेट यूनिवर्सिटी बना दिया गया है। इसके अनुसार इस विश्‍वविद्यालय का नाम आई गुस्ती बागस सुग्रीव स्टेट हिंदू यूनिवर्सिटी रखा गया है।*

*🚩बता दें इंडोनेशिया में पहली हिंदू विश्‍वविद्यालय खोला गया है। इस विश्‍वविद्यालय का नाम आई गुस्ती बागस सुग्रीव स्टेट हिंदू यूनिवर्सिटी रखा गया है। पहले इस विश्‍वविद्यालय का नाम हिंदू धर्म स्टेट इंस्टीट्यूट था। अब इसे राष्ट्रपति जोको विदोदो ने एक प्रेजिडेंशियल रेगुलेशन के तहत पहली हिंदू विश्‍वविद्यालय बना दिया है। इस रेगुलेशन के बाद इसका नाम आई गुस्ती बागस सुग्रीव स्टेट हिंदू विश्‍वविद्यालय रखा गया है। यह रेगुलेशन पिछले हफ्ते ही लागू किया गया है।*

*🚩आपको बता दें कि अखंड भारत में इंडोनेशिया भी था।*

*🚩गौरतलब है कि इंडोनेशिया सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है। लेकिन, इसकी संस्कृति में रामायण रची-बसी है। यहां की रामलीला विश्‍वभर में प्रसिद्ध है। ताजा रेगुलेशन का मकसद हिंदू उच्च शिक्षा को समर्थन और बढ़ावा देना है। बता दें इस विश्‍वविद्यालय में ‘एडमिनिस्टर हिंदू हायर ऐजुकेशन प्रोग्राम’के साथ-साथ ‘हिंदू हायर ऐजुकेशन प्रोग्राम को सपोर्ट करने वाले’दूसरे हायर ऐजुकेशन प्रोग्राम भी होंगे। बताया जा रहा है कि यहांं  के  सभी  मौजूदा छात्रों और कर्मचारियों का इसमेंं ट्रांसफर कर दिया गया है। इसके साथ ही हिंदू धर्म स्टेट इंस्टीट्यूट की सभी प्रॉपर्टी भी अब UHN को हैंडओवर कर दिया गया है। स्त्रोत : जागरण*

*🚩सैमुअल जानसन के अनुसारः 'हिन्दू लोग धार्मिक, प्रसन्नचित्त, न्यायप्रिय, सत्यभाषी, दयालु, कृतज्ञ, ईश्वरभक्त तथा भावनाशील होते हैं। ये विशेषताएँ उन्हें सांस्कृतिक विरासत के रूप में मिली हैं।'*

*🚩यही तो है वह आदर्श जीवनशैली जिसने समस्त संसार को सभ्य बनाया और आज भी विलक्षण आत्ममहिमा की ओर दृष्टि, जीते जी जीवनमुक्ति, शरीर बदलने व जीवन बदलने पर भी अबदल आत्मा की प्राप्ति तथा ऊँचे शाश्वत मूल्यों को बनाये रखने की व्यवस्था इसमें विराजमान है। यदि हिन्दू समाज में कहीं पर इन गुणों का अभाव भी है तो उसका एकमात्र कारण है धर्मनिरपेक्षता के भूत का कुप्रभाव। जब इस आदर्श सभ्यता को साम्प्रदायिकता का नाम दिया जाने लगा तथा कमजोर मन-बुद्धिवाले लोग इससे सहमत होने लगे तभी इन आदर्शों की हिन्दू समाज में कमी होने लगी और पश्चिमी पशुता ने अपने पैर जमा लिये। यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि अन्य किसी भी मत-पंथ के अस्त होने से विश्वमानव की इतनी दुर्गति नहीं हुई जितनी हिन्दू धर्म की आदर्श जीवन-पद्धति को छोड़ देने से हुई।*

*🚩अब भारतीयों को अपनी संस्कृति की महिमा समझनी चाहिए और अपनी संस्कृति की तरफ लौट आना चाहिए उसमे ही हमारा और विश्व का कल्याण है।*

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