Saturday, December 29, 2018

भारतीय और अंग्रेजी नववर्ष का अंतर जानकर आप भी रह जायेंगे हैरान

29 दिसंबर 2018
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🚩भारत में कुछ लोग अपना नूतन वर्ष भूल गए हैं और अंग्रेजो का नववर्ष मनाने लगे हैं, उसमें किसी भारतीय की गलती नही है लेकिन भारत में अंग्रेजो ने 190 साल राज किया है और अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति खत्म करके अपनी #पश्चिमी #संस्कृति थोपनी चाही उसके कारण आज भी कई भारतवासी मानसिकरूप से गुलाम हो गये जिसके कारण वे भारतीय नववर्ष भूल गये और ईसाई #अंग्रेजों का #नया #साल मना रहे हैं ।
Knowing the difference between Indian and
 English New Year, you will also be surprised

🚩1 जनवरी आने से पहले ही कुछ नादान भारतवासी नववर्ष की बधाई देने लगते हैं,
🚩भारत देश त्यौहारों का देश है, #सनातन (हिन्दू) धर्म में लगभग #40 त्यौहार आते हैं यह #त्यौहार करीब हर महीने या उससे भी अधिक आते है जिससे  जीवन में हमेशा #खुशियां #बनी रहती हैं और बड़ी बात है कि हिन्दू त्यौहारों में एक भी ऐसा त्यौहार नही है जिसमें दारू पीना, पशु हत्या करना, मास खाना, पार्टी करने आदि  के नाम पर दुष्कर्म को बढ़ावा मिलता हो । ये सनातन हिन्दू धर्म की महिमा है। भारतीय हर त्यौहार के पीछे कुछ न कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी छुपे होते हैं जो जीवन का सर्वांगीण विकास करते हैं ।
🚩ईसाई धर्म में 1 जनवरी को जो नया वर्ष मनाते है उसमें कुछ तो नयी अनुभूति होनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ भी नही होता है ।
🚩रोमन देश के अनुसार ईसाई धर्म का नववर्ष 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।
आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर क्या है?
🚩1. प्रकृति:-
एक जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी
🚩चैत्र मास में चारों तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ #हरियाली मानो #प्रकृति नया साल मना रही हो I
🚩2. मौसम:-
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर।
🚩चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I
🚩3. शिक्षा :-
विद्यालयों का नया सत्र-दिसंबर जनवरी में वही कक्षा, कुछ नया नहीं ।
🚩मार्च अप्रैल में स्कूलों का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यार्थियों का नया साल I
🚩4. वित्तीय वर्ष:-
दिसम्बर-जनवरी में खातों की क्लोजिंग नही होती
🚩31 मार्च को बैंको की (audit) क्लोजिंग होती है नए बहीखाते खोले जाते हैं I #सरकार का भी #नया #सत्र #शुरू होता है।
🚩5. कलैण्डर:-
जनवरी में सिर्फ नया कलैण्डर आता है।
🚩चैत्र में ग्रह नक्षत्र के हिसाब से नया पंचांग आता है I उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I
🚩6. किसान:-
दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है।
🚩मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उत्साह I
🚩7. पर्व मनाने की विधि:-
🚩31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है, हंगामा करते हैं, रात को पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश।
🚩भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला #नवरात्र होता है घर घर मे #माता #रानी की #पूजा होती है, गरीबों में मिठाई, जीवनपयोगी सामग्री बांटी जाती है, पूजा पाठ से #शुद्ध #सात्विक #वातावरण बनता है I
🚩8. ऐतिहासिक महत्त्व:-
🚩1 जनवरी का कोई ऐतिहासिक महत्व नही है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन
🚩1-  ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से नया संवत्सर शुंरू होता है।
🚩2- पुरूषोत्‍तम श्रीराम का राज्‍याभिषेक
🚩3- माँ दुर्गा की उपासना की नवरात्र व्रत का प्रारंभ
🚩4- प्रारम्‍भयुगाब्‍द (युधिष्‍ठिर संवत्) का आरम्‍भ
🚩5-उज्‍जयिनी सम्राट- विक्रामादित्‍य द्वारा विक्रमी संवत्प्रारम्‍भ
🚩6- शालिवाहन शक संवत् (भारत सरकार का राष्‍ट्रीय पंचांग)महर्षि दयानन्द द्वारा आर्य समाज की स्‍थापना
🚩7- भगवान झुलेलाल का अवतरण दिन।
🚩8 - मत्स्यावतार दिन
🚩9- गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीना और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग ‘ की रचना की ।
🚩आप इन तथ्यों से समझ गए होंगे कि सनातन (हिन्दू) धर्म की #भारतीय #संस्कृति कितनी #महान है । अतः आप गुलाम बनाने वाले अंग्रेजो का 1 जनवरी वाला वर्ष न मनाकर महान #हिन्दू #धर्म वाला #चैत्री #शुक्ल पक्ष #प्रतिपदा को ही #नववर्ष #मनायें ।
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Friday, December 28, 2018

आप भी 1 जनवरी को नववर्ष मनाने जा रहे हैं तो पहले यह भयानक रिपोर्ट देख लें

If you are going to celebrate New Year on 1st
January then first see this horrible report
28 दिसंबर 2018

🚩भारत की इतनी दिव्य और महान संस्कृति है कि बिना किसी वस्तु, व्यक्ति के यहां तक कि विपरीत परिस्थितियों में भी इसका अनुसरण करने वाला सुखी रह सकता है, इसके विपरीत विदेशों में भोग सामग्री होते हुए भी वहां के लोग इतने दुःखी व चिंतित हैं कि वहां के आकंड़े देखकर दंग रह जाएंगे आप लोग !! 

🚩फिर भी भारत का एक बड़ा वर्ग उनका अंधानुकरण कर, उनका नववर्ष मनाने लगा  और भूल गया अपनी संस्कृति को ।

🚩एक सर्वे के अनुसार...
ईसाई नववर्ष पर तीन गुनी हुई एल्कोहल की खपत:-

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के #क्रिसमस और ईसाई नववर्ष पर #एल्कोहल पर खपत किये गये सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है कि इन अवसरों पर 14 से 19 वर्ष के किशोर भी शराब व मादक पदार्थों का जमकर सेवन करते हैं और यही कारण है कि इस दौरान शराब की खपत तीन गुनी बढ़ जाती है । 

🚩इन दिनों में दूसरे मादक पेय पदार्थों की भी खपत बढ़ जाती है । बड़ों के अलावा छोटी उम्रवाले भी बड़ी संख्या में इनका सेवन करते हैं । इससे किशोर-किशोरियों, कोमल वय के लड़के-लड़कियों को शारीरिक नुकसान तो होता ही है, उनका व्यवहार भी बदल जाता है और हरकतें भी जोखिमपूर्ण हो जाती हैं । उसका परिणाम कई बार एचआईवी संक्रमण (एड्स रोग) के तौर पर सामने आता है तो कइयों को टी.बी., लीवर की बीमारी, अल्सर और गले का कैंसर जैसे कई असाध्य रोग भी पैदा हो जाते हैं । करीब 70 प्रतिशत किशोर फेयरवेल पार्टी, क्रिसमस एवं ईसाई नूतन वर्ष पार्टी, वेलेंटाइन डे और बर्थ डे जैसे अवसरों पर शराब का सेवन करते हैं । एक अन्य सर्वेक्षण के अनुसार भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 40 प्रतिशत शराब के कारण होती हैं ।

🚩समझदारों एवं सूत्रों का कहना है कि क्रिसमस (25 दिसम्बर से 1 जनवरी ) के दिनों में शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, #युवाधन की #तबाही व #आत्महत्याएँ #खूब होती हैं । 

🚩भारत से 10 गुणा ज्यादा दवाईयां खर्च होती हैं ।

🚩यूरोप, अमेरिका आदि देशों में मानसिक रोग इतने बढ़ गए हैं कि हर दस व्यक्ति में से एक को मानसिक रोग होता है । दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी हैं कि हर छः सेकंड में एक बलात्कार होता है और हर वर्ष लगभग #20 लाख से अधिक कन्याएँ #विवाह के पूर्व ही #गर्भवती हो जाती हैं । वहाँ पर 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं । #AIDS की बीमारी दिन #दुगनी रात चौगुनी फैलती जा रही है | वहाँ के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में #क्रोध, #कलह, #असंतोष,संताप, उच्छृंखता, उद्यंडता और शत्रुता का महा #भयानक #वातावरण छाया रहता है ।

🚩विश्व की लगभग 4% जनसंख्या अमेरिका में है । उसके उपभोग के लिये विश्व की लगभग 40% साधन-सामग्री (जैसे कि कार, टी वी, वातानुकूलित मकान आदि) मौजूद हैं फिर भी वहाँ अपराधवृति इतनी बढ़ी है कि हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी होती है, 1 लाख व्यक्तियों में से 425 व्यक्ति कारागार में सजा भोग रहे हैं । इन सबका मुख्य कारण दिव्य संस्कारों की कमी है ।

🚩31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर दारू पीते हैं । हंगामा करते हैं, महिलाओं से छेड़खानी करते हैं, रात को दारू पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस व प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता है और 1 जनवरी से आरंभ हुई ये घटनाएं सालभर में बढ़ती ही रहती हैं ।

🚩जबकि #भारतीय #नववर्ष नवरात्रों के व्रत से शुरू होता है घर-घर में माता रानी की पूजा होती है । #शुद्ध #सात्विक #वातावरण बनता है । चैत्र प्रतिपदा के दिन से महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म,
नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध है । 

🚩भोगी देश का अन्धानुकरण न करके युवा पीढ़ी भारत देश की महान संस्कृति को पहचाने ।

🚩1 जनवरी में सिर्फ नया कलैण्डर आता है, लेकिन चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व ,विवाह और अन्य मुहूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग । 

🚩स्वयं सोचे कि क्यों मनाये एक जनवरी को नया वर्ष..???

🚩केवल कैलेंडर बदलें अपनी संस्कृति नहीं...!!!
 
🚩रावण रूपी पाश्‍चात्य संस्कृति के आक्रमणों को नष्ट कर  #चैत्र #प्रतिपदा के दिन #नववर्ष का #विजयध्वज अपने घरों व मंदिरों पर #फहराएं ।

🚩अंग्रेजी गुलामी तजकर ,अमर स्वाभिमान भर लें भारतवासी ।
हिन्दू नववर्ष मनाकर खुद में आत्मसम्मान भर लें भारतवासी ।।

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Thursday, December 27, 2018

सत्य से ऊपर है धर्म, न्यायालय अपनी सीमा-रेखा का अतिक्रमण न करें : कृष्ण गोपाल

27 दिसंबर 2018

🚩वर्तमान में जिस तरह से न्यायालय में भ्रष्टाचार व्याप्त है और हिन्दू धर्म  विरोधी फैसले दिए जा रहे हैं इससे जनता में काफी रोष व्याप्त है और वो बाहर प्रकट भी होने लगा है । 

🚩मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि न्यायालय को अपनी सीमा-रेखा का ख्याल रखना चाहिए । न्यायालय ने सबरीमाला और जलीकट्टू मामले में तो त्वरित निर्णय दिया, जबकि रामजन्मभूमि मामले को 70 साल से लटकाए हुए है । न्यायालय को अपनी सीमा-रेखा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए । 

🚩कृष्ण गोपाल ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 15वें अधिवेशन में कहा कि धर्म सत्य से ऊपर है, इस बात का सभी को ख्याल रखना चाहिए । उन्होंने कहा कि आज के न्यायधीशों का आचरण आदर्श न्याय के अनुसार है या नहीं, इस पर विचार करना चाहिए, क्योंकि भ्रष्ट न्यायाधीश अपने भले के लिए समाज के सामने समस्या खड़ी कर देते हैं, जिससे आम जन का न्याय से भरोसा उठने लगता है ।
Religion above the truth, the court should not encroach
on its boundary line: Krishna Gopal

🚩उन्होंने कहा, "न्याय और समाज दोनों भिन्न नहीं हैं । हमारी न्याय व्यवस्था का मौलिक तत्व, दायित्व, कर्तव्य बोध में निहित है । जब समाज में कर्तव्य बोध होता है तो समाज में अन्याय कम हो जाता है ।" कृष्ण गोपाल ने कहा कि अधिवक्ताओं का कर्तव्य बनता है कि वह जनता को न्याय दिलाएं व मौलिक, समाजिक, सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करें । उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को इस पर विचार करना है कि ऐसा समाज बनाएं जो अपने मौलिक दायित्वों का निर्वाहन कर सके ।

🚩आरएसएस नेता ने कहा कि भारतीय समाज में हर एक व्यक्ति अपने अधिकार की बात करता है, वो चाहे समाज का कोई भी व्यक्ति हो । आज बच्चों के अधिकारों के लिए भी आयोग बनने लगे हैं । न्याय व्यवस्था में आज देश के सामने एक मौलिक प्रश्न खड़ा है कि जजों की कितनी संख्या बढ़ाई जाए, कितने न्यायालय बढ़ाए जाएं जिससे कि सभी पीड़ितों को न्याय मिल सके, जबकि प्राचीन न्यायिक व्यवस्था कर्तव्यों पर आधारित थी और उस समय ऐसी स्थिति बहुत ही कम देखने को मिलती है ।

🚩डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था कर्तव्यों पर आधारित है एवं अधिकार कर्तव्यों में अंतर निहित है, जबकि पश्चिमी न्याय व्यवस्था अधिकार पर आधारित है, जिसका अनुपालन किसी तीसरी संस्था की अवश्यकता होती है , जबकि भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी तीसरी संस्था की अवश्यकता नहीं पड़ती है । भारतीय न्याय व्यवस्था में पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना राज्य की जिम्मेदारी थी, जबकि अंग्रेजों के आने के बाद न्याय व्यवस्था में शुल्क लगने लगा । उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि पटेल अपनी पत्नी के निधन का समाचार सुनने के बाद भी न्यायालय में बहस करते रहे । उनसे जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो पटेल ने कहा था कि "एक तो मर ही चुका है, अब हमारा कर्तव्य दूसरे को बचाना था ।"

🚩डॉ. गोपाल ने कहा कि अधिवक्ताओं के साथ-साथ देश के न्यायाधीशों का भी न्यायपालिका के प्रति यह दायित्व है कि वह अपने आचरण से देश के सामने एक आदर्श स्थापित करें, जिससे नैतिक सामाजिक, संस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हो सके । उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था के अंर्तगत चाहे न्यायमूर्ति हो या वकील उन्हें संविधान के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम समाज, परमात्मा व मुवक्किल के लिए जवाबदेह हैं । समाज सुधार के लिए भी हमारा उत्तरदायित्व है । 

🚩उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय का उदाहरण देते हुए बताया कि चौरी चौरा कांड में मृत्यदंड पाए 177 भारतीय स्वंतत्रता संग्राम सेनानियों का मुकदमा बिना कोई फीस लेकर लड़ा, जिसमें उन्होंने 155 लोगों को मृत्युदंड से मुक्त कराया, जबकि यह मुकदमा मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू ने लेने से मना कर दिया था । ऐसे उदाहरण न्याय व्यवस्था के लिए नजीर बन सकते हैं । - आईएएनएस

🚩देश में जो भ्रष्टाचार व्याप्त है इसके कारण आम जनता व हिंदुनिष्ठ व्यक्तियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है दूसरी ओर ईसाई पादरी या मौलवी होते हैं तो तुरंत जमानत हासिल हो जाती है जैसे कि जालंधर के पादरी फ्रैंको को 21 दिन में जमानत मिल गई । जबकि दूसरी ओर कोई हिन्दू कार्यकर्ता हो या हिन्दू साधू-संत हो तो सालों तक जमानत मिल नहीं पाती है जैसे कि 5 साल से झूठे आरोप में जेल में बंद हिन्दू संत आसाराम बापू को पहले तो जमानत नहीं मिली  बाद में आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी गयी । जलीकट्टू हो या दही हांडी की ऊंचाई, मिलार्ड सुनवाई के लिए तत्पर रहते हैं, लेकिन राममंदिर मामले में 'डे टू डे' हियरिंग की याचिका मिलार्ड समय का अभाव बताकर खारिज कर देते हैं ।

🚩आतंकवादी याकूब मेनन की फाँसी रोकने के लिए रात को 12 बजे कोर्ट खुल सकती है, लेकिन कोई हिंदुनिष्ठ हो तो सालों तक तारीख पर तारीख मिलती रहती है ।

🚩कश्मीरी पंडितों के केस को 27 साल पुराना केस बताकर खारिज कर दिया जाता है, लेकिन बाबरी मस्जिद का ढांचा तोड़े 25 साल हो गये फिर भी उसका केस चल रहा है । राम मंदिर बनाने की परमिशन नहीं दी जा रही है ।

🚩न्यायपालिका के दोहरे रवैए के कारण आज जनता में काफी आक्रोश है इसके कारण आज हिंदुनिष्ठ खुलकर बोलने भी लगे हैं, डॉ. कृष्ण गोपाल का इस बयान की काफी प्रशंसा की जा रही है ।

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