Thursday, January 10, 2019

स्वामी विवेकानंदजी ने विदेशों में लहरा दिया था हिन्दू संस्कृति का परचम

10 जनवरी  2019
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🚩 स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म 12 जनवरी सन 1863  (विद्वानों के अनुसार #मकर संक्रान्ति संवत 1920) को #कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम #नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे।
  🚩दुर्गाचरण दत्ता, (नरेंद्र के दादा) संस्कृत और फारसी के विद्वान थे उन्होंने अपने #परिवार को 25 वर्ष की उम्र में छोड़ दिया और साधु बन गए।
🚩उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थी। उनका अधिकांश समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेंद्र के पिता और उनकी माँ के धार्मिक, #प्रगतिशील व तर्कसंगत रवैये ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को आकार देने में मदद की ।
Swami Vivekanandji had waved
 overseas in the field of Hindu culture

🚩बचपन से ही #नरेन्द्र अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के तो थे ही नटखट भी थे। अपने साथी बच्चों के साथ वे खूब शरारत करते और मौका मिलने पर अपने अध्यापकों के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे। उनके घर में नियमपूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था धार्मिक प्रवृत्ति की होने के कारण माता भुवनेश्वरी देवी को पुराण, रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने का बहुत शौक था। संत इनके घर आते रहते थे। नियमित रूप से #भजन-कीर्तन भी होता रहता था। #परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से #बालक नरेन्द्र के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये। माता-पिता के संस्कारों और धार्मिक वातावरण के कारण बालक के मन में बचपन से ही #ईश्वर को जानने और उसे प्राप्त करने की लालसा दिखायी देने लगी थी। ईश्वर के बारे में जानने की उत्सुकता में कभी-कभी वे ऐसे प्रश्न पूछ बैठते थे कि इनके माता-पिता और कथावाचक पण्डितजी तक चक्कर में पड़ जाते थे।
🚩स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन की महत्त्वपूर्ण तारीखें!!
🚩12 जनवरी 1863 -- कलकत्ता में जन्म
🚩1879 -- प्रेसीडेंसी कॉलेज कलकत्ता में प्रवेश
🚩1880 -- जनरल असेम्बली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश
🚩नवंबर 1881 -- रामकृष्ण परमहंस से प्रथम भेंट
🚩1882-86 -- रामकृष्ण परमहंस से सम्बद्ध
🚩1884 -- स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण; पिता का स्वर्गवास
🚩1885 -- रामकृष्ण परमहंस की अन्तिम बीमारी
🚩16 अगस्त 1886 -- रामकृष्ण परमहंस का निधन
🚩1886 -- वराहनगर मठ की स्थापना
🚩जनवरी 1887 -- वराह नगर मठ में संन्यास की औपचारिक प्रतिज्ञा
🚩1890-93 -- परिव्राजक के रूप में भारत-भ्रमण
🚩25 दिसम्बर 1892 -- कन्याकुमारी में
🚩13 फ़रवरी 1893 -- प्रथम सार्वजनिक व्याख्यान सिकन्दराबाद में
🚩31 मई 1893 -- मुम्बई से अमरीका रवाना
🚩25 जुलाई 1893 -- वैंकूवर, कनाडा पहुँचे
🚩30 जुलाई 1893 -- शिकागो आगमन
🚩अगस्त 1893 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो॰ जॉन राइट से भेंट
🚩11 सितम्बर 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में प्रथम व्याख्यान
🚩27 सितम्बर 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में अन्तिम व्याख्यान
🚩16 मई 1894 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में संभाषण
🚩नवंबर 1894 -- न्यूयॉर्क में वेदान्त समिति की स्थापना
🚩जनवरी 1895 -- न्यूयॉर्क में धार्मिक कक्षाओं का संचालन आरम्भ
🚩अगस्त 1895 -- पेरिस में
🚩अक्टूबर 1895 -- लन्दन में व्याख्यान
🚩6 दिसम्बर 1895 -- वापस न्यूयॉर्क
🚩22-25 मार्च 1896 -- फिर लन्दन
🚩मई-जुलाई 1896 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान
🚩15 अप्रैल 1896 -- वापस लन्दन
🚩मई-जुलाई 1896 -- लंदन में धार्मिक कक्षाएँ
🚩28 मई 1896 -- ऑक्सफोर्ड में मैक्समूलर से भेंट
🚩30 दिसम्बर 1896 -- नेपाल से भारत की ओर रवाना
🚩15 जनवरी 1897 -- कोलम्बो, श्रीलंका आगमन
🚩जनवरी, 1897 -- रामनाथपुरम् (रामेश्वरम) में जोरदार स्वागत एवं भाषण
🚩6-15 फ़रवरी 1897 -- मद्रास में
🚩19 फ़रवरी 1897 -- कलकत्ता आगमन
🚩1 मई 1897 -- रामकृष्ण मिशन की स्थापना
🚩मई-दिसम्बर 1897 -- उत्तर भारत की यात्रा
🚩जनवरी 1898 -- कलकत्ता वापसी
🚩19 मार्च 1899 -- मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना
🚩20 जून 1899 -- पश्चिमी देशों की दूसरी यात्रा
🚩31 जुलाई 1899 -- न्यूयॉर्क आगमन
🚩22 फरवरी 1900 -- सैन फ्रांसिस्को में वेदान्त समिति की स्थापना
🚩जून 1900 -- न्यूयॉर्क में अन्तिम कक्षा
🚩26 जुलाई 1900 -- यूरोप रवाना
🚩24 अक्टूबर 1900 -- विएना, हंगरी, कुस्तुनतुनिया, ग्रीस, मिस्र आदि देशों की यात्रा
🚩26 नवम्बर 1900 -- भारत रवाना
🚩9 दिसम्बर 1900 -- बेलूर मठ आगमन
🚩10 जनवरी 1901 -- मायावती की यात्रा
🚩मार्च-मई 1901 -- पूर्वी बंगाल और असम की तीर्थयात्रा
🚩जनवरी-फरवरी 1902 -- बोध गया और वाराणसी की यात्रा
🚩मार्च 1902 -- बेलूर मठ में वापसी
🚩4 जुलाई 1902 -- महासमाधि!!
🚩स्वामी विवेकानन्द जी की शिक्षा..!!
🚩सन् 1871 में, आठ साल की उम्र में नरेंद्रनाथ ने #ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखिला लिया जहाँ वे स्कूल गए। 1877 में उनका परिवार रायपुर चला गया। 1879 में कलकत्ता में अपने परिवार की वापसी के बाद, वह एकमात्र छात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीजन अंक प्राप्त किये ।
🚩वे दर्शन, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य सहित विषयों के एक #उत्साही पाठक थे। इनकी वेद, उपनिषद, भगवद् गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अतिरिक्त अनेक हिन्दू शास्त्रों में गहन रूचि थी। नरेंद्र को #भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित किया गया था और ये नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम में व खेलों में भाग लिया करते थे। नरेंद्र ने पश्चिमी तर्क, पश्चिमी दर्शन और यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जनरल असेंबली इंस्टिटूशन (अब स्कॉटिश चर्च कॉलेज) में किया। 1881 में इन्होंने ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की, और 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी कर ली।
🚩नरेंद्र ने डेविड ह्यूम, इमैनुएल कांट, जोहान गोटलिब फिच, बारूक स्पिनोजा, जोर्ज डब्लू एच हेजेल, आर्थर स्कूपइन्हार , ऑगस्ट कॉम्टे, जॉन स्टुअर्ट मिल और चार्ल्स डार्विन के कामों का अध्यन किया। उन्होंने स्पेंसर की किताब एजुकेशन (1861) का बंगाली में अनुवाद किया।  ये हर्बर्ट स्पेंसर के विकासवाद से काफी मोहित थे।  #पश्चिम दार्शनिकों के अध्यन के साथ ही इन्होंने संस्कृत ग्रंथों और बंगाली साहित्य को भी सीखा।विलियम हेस्टी (महासभा संस्था के प्रिंसिपल) ने लिखा, "नरेंद्र वास्तव में एक जीनियस है। मैंने काफी विस्तृत और बड़े इलाकों में यात्रा की है लेकिन उनकी जैसी प्रतिभा वाला एक भी बालक कहीं नहीं देखा यहाँ तक कि जर्मन #विश्वविद्यालयों के दार्शनिक छात्रों में भी नहीं।" अनेक बार इन्हें श्रुतिधर( विलक्षण स्मृति वाला एक व्यक्ति) भी कहा गया है।
🚩स्वामी विवेकानन्द जी की आध्यात्मिक शिक्षुता - ब्रह्म समाज का प्रभाव!!
🚩1880 में नरेंद्र ईसाई से हिन्दू धर्म में रामकृष्ण के प्रभाव से परिवर्तित केशव चंद्र सेन की नव विधान में शामिल हुए, नरेंद्र 1884 से पहले कुछ बिंदु पर, एक फ्री मसोनरी लॉज और साधारण #ब्रह्म समाज जो ब्रह्म समाज का ही एक अलग गुट था और जो केशव चंद्र सेन और देवेंद्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में था। 1881-1884 के दौरान ये सेन्स बैंड ऑफ़ होप में भी सक्रीय रहे जो धूम्रपान और शराब पीने से युवाओं को हतोत्साहित करता था।
🚩यह नरेंद्र के परिवेश के कारण पश्चिमी आध्यात्मिकता के साथ परिचित हो गया था। उनके प्रारंभिक विश्वासों को ब्रह्म समाज ने (जो एक निराकार ईश्वर में विश्वास और मूर्ति पूजा का प्रतिवाद करते थे) ने प्रभावित किया और सुव्यवस्थित, युक्तिसंगत, अद्वैतवादी अवधारणाओं , धर्मशास्त्र ,वेदांत और उपनिषदों के एक चयनात्मक और आधुनिक ढंग से अध्ययन पर प्रोत्साहित किया।
🚩स्वामी विवेकानन्द जी की निष्ठा..!!
🚩एक बार किसी #शिष्य ने #गुरुदेव की #सेवा में घृणा और निष्क्रियता दिखाते हुए नाक-भौं सिकोड़ीं। यह देखकर विवेकानन्द को क्रोध आ गया। वे अपने उस गुरु भाई को सेवा का पाठ पढ़ाते और गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर पी गये । #गुरु के प्रति ऐसी अनन्य भक्ति और निष्ठा के प्रताप से ही वे अपने गुरु के शरीर और उनके दिव्यतम आदर्शों की उत्तम सेवा कर सके। गुरुदेव को समझ सके और स्वयं के अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरूप में विलीन कर सके। और आगे चलकर समग्र विश्व में #भारत के अमूल्य आध्यात्मिक भण्डार की महक फैला सके।
🚩ऐसी थी उनके इस #महान व्यक्तित्व की नींव में गुरुभक्ति, गुरुसेवा और गुरु के प्रति अनन्य निष्ठा जिसका परिणाम सारे संसार ने देखा।
🚩स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने #गुरुदेव #रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे। उनके गुरुदेव का शरीर अत्यन्त रुग्ण हो गया था। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और #कुटुम्ब की नाजुक हालत व स्वयं के भोजन की चिन्ता किये बिना वे गुरु की सेवा में सतत संलग्न रहे।
🚩विवेकानन्द बड़े स्‍वप्न‍दृष्‍टा थे। #उन्‍होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की थी जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्‍य-मनुष्‍य में कोई भेद न रहे। उन्‍होंने वेदान्त के सिद्धान्तों को इसी रूप में रखा। अध्‍यात्‍मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकता है कि समता के सिद्धान्त का जो आधार विवेकानन्‍द ने दिया उससे सबल बौद्धिक आधार शायद ही ढूँढा जा सके। #विवेकानन्‍द को युवकों से बड़ी आशाएँ थी।
आज के युवकों के लिये इस ओजस्‍वी सन्‍यासी का जीवन एक आदर्श है।
🚩स्वामी विवेकानन्द जी यात्राएँ!!
🚩25 वर्ष की अवस्था में नरेन्द्र ने गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया था । तत्पश्चात उन्होंने पैदल ही पूरे #भारतवर्ष की यात्रा की। सन्‌ 1893 में शिकागो (अमरीका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानन्द उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में पहुँचे। यूरोप-अमरीका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे।
🚩वहाँ लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानन्द को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। परन्तु एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला। उस परिषद् में उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गये। फिर तो अमरीका में उनका अत्यधिक स्वागत हुआ। वहाँ उनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय बन गया। तीन वर्ष वे #अमरीका में रहे और वहाँ के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान की। उनकी वक्तृत्व-शैली तथा ज्ञान को देखते हुए वहाँ के मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू का नाम दिया।
🚩"अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जायेगा" यह स्वामी विवेकानन्द का दृढ़ विश्वास था। अमरीका में उन्होंने #रामकृष्ण मिशन की अनेक #शाखाएँ स्थापित कीं। अनेक अमरीकी विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। वे सदा अपने को 'गरीबों का सेवक' कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशान्तरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया।
🚩स्वामी विवेकानन्दजी का योगदान !!
🚩39 वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी #विवेकानन्द जो काम कर गये वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
🚩तीस वर्ष की आयु में स्वामी #विवेकानन्द ने #शिकागो, अमेरिका के #विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवायी।
🚩 गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने एक बार कहा था-"यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानन्द को पढ़िये। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पायेंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं।"
🚩रोमारोला ने उनके बारे में कहा था-"उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असम्भव है, वे जहाँ भी गये, सर्वप्रथम ही रहे। हर कोई उनमें अपने नेता का दिग्दर्शन करता था। वे ईश्वर के प्रतिनिधि थे और सब पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेना ही उनकी विशिष्टता थी।
🚩हिमालय प्रदेश में एक बार एक अनजान यात्री उन्हें देख ठिठक कर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा-‘शिव!’ यह ऐसा हुआ मानो उस व्यक्ति के #आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो।"
🚩वे केवल सन्त ही नहीं, एक #महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। अमेरिका से लौटकर उन्होंने #देशवासियों को आह्वान करते हुए कहा था-"नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूँजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से; निकल पडे झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से।" और जनता ने स्वामीजी की पुकार का उत्तर दिया। वह गर्व के साथ निकल पड़ी। #गान्धीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानन्द के आह्वान का ही फल था।
🚩इस प्रकार वे #भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा-स्रोत बने। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं व ऋषियों का जन्म हुआ, यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं-केवल यहीं-आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिये जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है।
🚩उनके कथन-"‘उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।"
🚩उन्नीसवीं सदी के आखिरी वर्षोँ में विवेकानन्द लगभग सशस्त्र या हिंसक क्रान्ति के जरिये भी देश को आजाद करना चाहते थे। परन्तु उन्हें जल्द ही यह विश्वास हो गया था कि परिस्थितियाँ उन इरादों के लिये अभी परिपक्व नहीं हैं। इसके बाद ही विवेकानन्द जी ने ‘एकला चलो‘ की नीति का पालन करते हुए एक परिव्राजक के रूप में भारत और दुनिया को खंगाल डाला।
🚩उन्होंने कहा था कि #मुझे बहुत से युवा संन्यासी चाहिये जो भारत के ग्रामों में फैलकर देशवासियों की सेवा में खप जायें।  विवेकानन्दजी पुरोहितवाद, धार्मिक आडम्बरों, कठमुल्लापन और रूढ़ियों के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने धर्म को मनुष्य की सेवा के केन्द्र में रखकर ही आध्यात्मिक चिंतन किया था। उनका हिन्दू धर्म अटपटा, लिजलिजा और वायवीय नहीं था।
🚩विवेकानन्द जी इस बात से आश्वस्त थे कि #धरती की गोद में यदि ऐसा कोई देश है जिसने मनुष्य की हर तरह की बेहतरी के लिए ईमानदार कोशिशें की हैं, तो वह भारत ही है।
🚩उन्होंने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड और रूढ़ियों की खिल्ली भी उड़ायी और लगभग आक्रमणकारी भाषा में ऐसी विसंगतियों के खिलाफ युद्ध भी किया। उनकी दृष्टि में हिन्दू धर्म के #सर्वश्रेष्ठ चिन्तकों के विचारों का निचोड़ पूरी दुनिया के लिए अब भी ईर्ष्या का विषय है। #स्वामीजी ने संकेत दिया था कि विदेशों में भौतिक समृद्धि तो है और उसकी भारत को जरूरत भी है लेकिन हमें याचक नहीं बनना चाहिये। हमारे पास उससे ज्यादा बहुत कुछ है जो हम पश्चिम को दे सकते हैं और पश्चिम को उसकी बेसाख्ता जरूरत है।
🚩यह स्वामी विवेकानन्द का अपने देश की धरोहर के लिये दम्भ या बड़बोलापन नहीं था। यह एक वेदान्ती #साधु की भारतीय सभ्यता और संस्कृति की तटस्थ, वस्तुपरक और मूल्यगत आलोचना थी। बीसवीं सदी के इतिहास ने बाद में उसी पर मुहर लगायी।
🚩स्वामी विवेकानन्द जी की महासमाधि!!
🚩विवेकानंद #ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों की प्रसिद्धि #विश्व भर में है। जीवन के अन्तिम दिन उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा-"एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस #विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है।" उनके शिष्यों के अनुसार जीवन के अन्तिम दिन 4 जुलाई 1902 को भी उन्होंने अपनी ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला और प्रात: दो तीन घण्टे ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेदकर #महासमाधि ले ली। बेलूर में #गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनकी अंत्येष्टि की गयी। #इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का सोलह वर्ष पूर्व अन्तिम संस्कार हुआ था।
🚩उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक #मन्दिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानन्द तथा उनके गुरु #रामकृष्ण के सन्देशों के प्रचार के लिये 130 से अधिक केन्द्रों की स्थापना की।
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Wednesday, January 9, 2019

महिलाएं बिना अंडरगारमेंट्स के ही चर्च आएं, नहीं तो यीशु प्रवेश नही करेंगे

9 जनवरी  2019

🚩हिन्दू धर्म में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया है, नारी तू नारायणी कहा गया है। लेकिन ईसाई धर्म में महिलाओं की स्वतंत्रता के नाम पर पादरी महिलाओं को भोग्या बना दिया है, चर्च में कन्फेशन के नाम पर महिलाओं के बलात्कार कर रहे है, अब पादरी ने अपनी वासना पूरी करने के लिए एक और फरमान जारी कर दिया ईश्वर की आड़ में दुष्कर्म पर बढ़ावा देने वाला फतवा जारी कर रहे है।

🚩ईसाई चर्च के एक पादरी ने कहा कि अगर औरतें अपने अंतर्वस्‍त्र पहनेंगी, तो यह ईश्वर के खिलाफ होगा और ईसा मसीह औरतों के शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाएंगे।

🚩पिछले दिनों एक सभा को संबोधित करते हुए पादरी ने कहा कि पैंटी और ब्रा पहनकर आने वाली औरतों को चर्च में प्रवेश नहीं देना चाहिए। यह पादरी केन्या का रहने वाला है और इसका नाम है रेव नोही। रेव लॉर्ड्स प्रोफेलर रिडेंपशन चर्च का प्रतिनिधित्व करता है। इस शख्स ने पुरुषों के अंडरगारमेंट्स के बारे में कुछ नहीं कहा। 

🚩धार्मिक सभा के दौरान पादरी रेव ने महिला श्रद्धालुओं से कहा कि उन्हें बिल्कुल मुक्त होकर चर्च आना चाहिए। कोई भी अंडरगारमेंट्स नहीं पहनने चाहिए। क्राइस्ट को अपने शरीर में पूरी तरह से प्रवेश करने देना चाहिए।

🚩रेव ने तर्क दिया कि चर्च जाते समय लोगों को मन और शरीर से पूरी तरह फ्री होना चाहिए। उनके मुताबिक इस काम में अंडरगारमेंट्स बाधा पहुंचाते हैं।

🚩पादरी की धमकी
रेव अपने खयालों से साथ यहीं नहीं रुका। उसने कमोबेश धमकी देते हुए ये दावा किया कि अगर चर्च का कोई सदस्य गुपचुप ढंग से अंडरगारमेंट्स पहनकर आया, तो उसके साथ बहुत बुरा होगा। पादरी ने महिलाओं से कहा कि चर्च में आने से पहले उन्हें अपनी बेटियों को चेक करना होगा, ताकि वह अंदरूनी कपड़े पहनकर न आ सकें। स्त्रोत : आजतक

🚩ईसाई पादरी अपनी वासनाये पूरी करने के लिए ईश्वर को भी नही छोड़ते, ईश्वर सर्वत्र और सर्वसमर्थ है जब ईश्वर सर्वत्र है तो फिर अंदर भी है फिर प्रवेश करने करने की क्या जरूरत है और सर्वसमर्थ है तो वे कहि भी आ जा सकता है, अन्तर्यामी भी है जो सबके मन की जानते है फिर ये पादरी ईश्वर के नाम पर अपनी वासनाये पूरी करते है वे कैसे धर्मगुरु है? जो ईश्वर की शक्ति को नही जानते है और महिलाओं के प्रति आसक्त है तो कैसे लोगो का भला करेगें? ऐसे पादरियों का बहिष्कार करना चाहिए।

🚩हजारो ईसाई पादरी बच्चों व् महिलाओं के साथ दुष्कर्म करते पकड़े गए है इससे तो साफ होता है कि चर्च को भी ये लोग ने वासनापूर्ति का स्थान बना दिया है, जनता को इससे बचना चाहिए ऐसे लोगो के बहकावे में आकार धर्मपरिवर्तन नही करना चाहिये।

🚩वकील गेल के मुताबिक 1980 से 2015 के बीच ऑस्ट्रेलिया के 1000 कैथोलिक इंस्टीट्यूशनों में 4,444 बच्चों का यौन उत्पीड़न हुआ ।

🚩सन् 1950 से 2002 के काल में #पादरियों के द्वारा किये गये यौन-शोषण के 10,667अपराध दर्ज किये गये 

🚩सन् 2002 में आयरलैंड के पादरियों के यौन-शोषण के अपराधों के कारण 12 करोड़ 80 लाख डॉलर का दंड चुकाना पड़ा । 

🚩मई 2009 में प्रकाशित रायन रिपोर्ट के अनुसार 30,000 बच्चों को चर्च में पादरियों द्वारा प्रताड़ित और शोषित किया जाता रहा ।

🚩अब आप ही तय करे की हमारी भारतीय संस्कृति के संत महान है कि हजारों बच्चो और महिलाओं के यौन शोषण करने वाले पादरी? फिर भी मीडिया और सेकुलर भारत के पवित्र हिन्दू साधु-संतों को ही टारगेट करते है उनपर झूठे आरोप लगाकर जेल भिजवाया जाता है और दुष्कर्मी पादरी खुलेआम बाहर गुमते है अतः बिकाऊ मीडिया से और ईसाई पादरियों से हिंदुस्तानी सावधान रहें।

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Tuesday, January 8, 2019

14 फरवरी का बदल गया पर्व, अब वैलेंटाइन डे नहीं मातृ-पितृ पूजन मनाना है

8 जनवरी  2019

🚩भारत में वैलेंटाइन डे की गंदगी अपने व्यापार का स्तर बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कम्पनियां लेकर आई हैं और वो ही कम्पनियां  मीडिया में पैसा देकर वैलेंटाइन डे का खूब प्रचार प्रसार करवाती हैं । जिसके कारण उनका व्यापार लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, अरबों नहीं लेकिन खरबों में हो जाता है, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया जनवरी से ही वैलेंटाइन डे यानि पश्चिमी संस्कृति का प्रचार करने लगता है, जिसके कारण विदेशी कम्पनियों के गिफ्ट, कंडोम, नशीले पदार्थ आदि 10 गुना बिकते हैं और उन्हें खरबों रुपये का फायदा होता है ।

🚩वैलेंटाइन डे से युवाओं का अत्यधिक पतन हो रहा है इसलिए अब तो ऐसा समय आ गया है कि वैलेंटाइन डे किसी को याद भी नहीं आ रहा होगा और लोगों ने अभी से 14 फरवरी के दिन मातृ-पितृ पूजन दिवस निमित्त मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम और सोशल मीडिया पर कैम्पियन शुरू कर दिया गया है ।

🚩आज सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे ही ट्वीट किए जा रहे थे, जो आपको जानना बेहद जरूरी है...

🚩ब्रज मोहन ने लिखा है कि सब धर्मों में माता पिता का आदर करना चाहिए यही सिखाया जाता है।'मातृ-पितृ पूजन दिवस' यह पर्व सिर्फ हिन्दुओं के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए वरदान स्वरूप है आओ मनाएं 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' 14 फरवरी को
#विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व

🚩गार्गी पटेल लिखती हैं कि युवक 14 फरवरी को फूल लेकर अपनी प्रेयसी के पास जाता है तो अपने माता-पिता का अपमान करता है। 14 फरवरी को फूल ले के नहीं दिल लेकर, पूजा की सामग्री ले के माँ के चरणों में, पिता के चरणों में आओ जिससे तुम्हारा नजरिया शुद्ध हो जाय:-Sant Shri Asaram Bapu Ji
#विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व

🚩गाज़ियाबाद आश्रम द्वारा ट्वीट करके लिखा गया कि #संस्कृति_रक्षक_संत द्वारा शुरू किया गया #MPPD है देश की एक नई सोच, एक नई पहल व #विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व !!

परम पूज्य संत श्री #आशाराम #बापूजी की कृपा से #गाजियाबाद के बीएम कंपाउंड निकट घंटाघर में #मातृ_पितृ_पूजन_दिवस का कार्यक्रम संपन्न हुआ...! https://t.co/iqBAsZA4i6

🚩निशांत कुमार ने लिखा है कि 
गर्व है माताओं-पिताओं के दिलों में..
प्रसन्नता है बच्चे-बच्चियों के मनों में..
ख़ुशी है पड़ोसियों के चेहरों पे..
एक नया अहसास है समाज व देश में..
मातृ-पितृ पूजन दिवस के मनाने से !!
Sant Shri Asaram Bapu Ji द्वारा प्रेरित #विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व !

🚩अजय कुमार शुक्ला ने लिखा कि भारत को विश्वगुरु की ओर अग्रसर करने के लिए वैलेंटाइन्स जैसे पाश्यात्य विदेशी गन्दगी को हटाकर,
मातृ पितृ पूजन दिवस प्रारंभ किया Sant Shri Asaram Bapu Ji ने
#विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व

🚩दिल्ली Yss के द्वारा ट्वीट द्वारा बताया गया कि वैलेंटाइन डे मनाकर कई युवक-युवतियाँ लड़े-झगड़े, कई घर छोड़ के भागे, किसीने आत्महत्या की तो लाखों-लाखों परिवार तबाह हो रहे थे।उनकी तबाही और लाखों-करोड़ों माता-पिताओं का बुढ़ापा नारकीय हो रहा है  इसलिए Asaram Bapu Ji ने शुरू किया ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’।#विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व https://t.co/kZxp5ExS9Y

🚩शिला लिखती हैं कि पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण करके भारत के युवान-युवतियाँ शादी से पहले प्रेमदिवस के बहाने अपने ओज-तेज-वीर्य का नाश करके सर्वनाश न करें इसलिये Sant Asaram Bapu Ji ने #विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व मातृ-पितृ पूजन शुरू करवाया जिसके कारण यौवन-धन, स्वास्थ्य और बुद्धि की सुरक्षा बनी रहे ।

🚩देवांग ने लिखा है कि इस धरती पर यदि कोई परमात्मा का रुप हैं तो वो माता-पिता और गुरु हैं।  माता -पिता की कदर करो और 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस मनाओ।#विश्व_पटल_पर_उभरता_अनोखा_पर्व  https://t.co/ikyGotcIRq

🚩इस प्रकार हजारों ट्वीट करके बताया जा रहा रहा था कि 14 फरवरी को कोई भी वैलेंटाईन डे न मनायें उसदिन माता-पिता का पूजन करके आशीर्वाद प्राप्त करें ।

🚩गौरतलब है कि पिछले 50 वर्षों से सनातन संस्कृति के सेवाकार्यों में रत रहने वाले तथा सनातन संस्कृति की महिमा से विश्व के जन-मानस को परिचित करवाने वाले हिन्दू संत बापू आसारामजी ने  जब अपने देश के युवावर्ग को पाश्चत्य अंधानुकरण से चरित्रहीन होते देखा तो उनका ह्रदय व्यथित हो उठा और उन्होंने पिछले 13 वर्षों से एक नयी दिशा की ओर युवावर्ग को अग्रसर करते हुए एक विश्वव्यापी अभियान चलाया । #14फरवरी_मातृ_पितृ_पूजन_दिवस
जो आज विश्वव्यापी बन चुका है और करोड़ों लोगों के द्वारा मनाया जा रहा है ।

🚩आओ एक नयी दिशा की ओर कदम बढ़ाएं।
आओ एक सच्ची दिशा की ओर कदम बढ़ाएं।
14 फरवरी को वैलेंटाइन डे नहीं माता-पिता की पूजा करके उनका शुभ आशीष पाएं ।

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Monday, January 7, 2019

महाभारत काल में भारत का ज्ञान-विज्ञान आज से अत्यधिक उन्नत और बेहतर था

7 जनवरी  2019

🚩भारत देश का ऐसा गौरवशाली अतीत है जो अब प्रोफेसरों और अध्यापकों के मुँह से भी निकल रहा है । इस इतिहास को बहुत छिपा कर और साजिशों की परतों के नीचे दबा कर रखा गया था । आख़िरकार वो सच देर से ही सहीं पर भारत के तमाम स्तम्भों के मुँह से निकलने लगा है जिसे भारत की शिक्षा की रीढ़ कहा जाता है ।


🚩कुछ समय पहले जब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने ऐसे ही गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया था तो उनके खिलाफ एक वर्ग ने हल्ला बोल दिया था । लेकिन अब उसी गौरवशाली अतीत का बखान किया है आंध्र प्रदेश यूनिवर्सिटी के कुलपति जी. नागेश्वर राव जी ने ।

🚩"भारतीय विज्ञान कांग्रेस"  कार्य्रकम में नागेश्वर जी ने संबोधन में साफ़-साफ़ कहा है कि महाभारत काल में भारत का ज्ञान विज्ञान आज से समय से कहीं उन्नत और बेहतर था। उस समय चिकित्सा आदि की विधियाँ कई गुना उच्च तकनीकी की थी । उन्होंने कौरव और पांडवों को न सिर्फ प्रबल बलशाली योद्धा बताया बल्कि बड़े अनुसन्धानी भी कहा ।

🚩समाचार एजेंसी द हिन्दू के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत के पास हज़ारों साल पहले से ही लक्ष्य केंद्रित मिसाइल तकनीक का ज्ञान था । भगवान राम के पास अस्त्र-शस्त्र थे, जबकि भगवान विष्णु के पास ऐसा सुदर्शन चक्र था जो अपने लक्ष्य को भेदने के बाद  वापस लौट आता था । - सुदर्शन न्यूज

🚩प्राचीन भारत की तकनीकें इतनी विकसित थी कि आज के वैज्ञानिकों की सोच वहाँ तक पहुँच भी नहीं सकती, लेकिन भारतवासी विलासी होते गये और आपस में लड़ने लगे इसका फायदा उठाकर विदेशी आक्रमणकारियों ने देश की संस्कृति को खत्म करने का अनेक षड्यंत्र किये लेकिन अभी भी संपूर्ण रूप से नष्ट नहीं कर पाएं यही सनातन भारतीय संस्कृति की महिमा है ।

🚩एक और बड़ी अच्छी खबर आई है कि अब वेद की पढ़ाई भी कर सकते है ।

*अब वेद से भी कर सकेंगे दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई, शुुरु हुआ नया पाठ्यक्रम*

🚩भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा को लोकप्रिय बनाने को लेकर सरकार ने एक बड़ी पहल की है । इसके अंतर्गत कोई भी छात्र अब दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय (स्ट्रीम) की तर्ज पर ‘वेद’ संकाय में भी कर सकेगा । फिलहाल इस कोर्स को शुरू कर दिया गया है । इसके सभी विषय संस्कृत भाषा और वेद से जुड़े हैं । हालांकि इस माध्यम में अभी सिर्फ दसवीं में ही प्रवेश दिया जा रहा है, किंतु जल्द ही बारहवीं का भी कोर्स शुरु करने की तैयारी है ।

🚩वैदिक ज्ञान को बढ़ावा देने की यह पहल मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ऑनलाइन पढ़ाई करने वाली संस्था राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एन.आई.ओ.एस.) ने की है । एन.आई.ओ.एस. ने वेदों से जुड़े इस खास संकाय को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ नाम दिया है, इसके लिए खासतौर पर पांच विषय तैयार किए गए है । इनमें भाषा के रुप में संस्कृत को रखा गया है, जबकि अन्य चार विषयों में भारतीय दर्शन, वेद अध्ययन, संस्कृत व्याकरण और संस्कृत साहित्य होंगे । जिसमें छात्रों के लिए अष्टाध्यायी से लेकर वेद मंत्रों को भी शामिल किया गया है । यह पूरा कोर्स आनलाइन होगा।

🚩मॉरीशस और फिजी जैसे देशों ने दिखाई रुचि-

वेद को बढ़ावा देने को लेकर शुरू किए गए 10 वीं और 12 वीं के इन आनलाइन कोर्सेस को लेकर भारतीय संस्कृति से नजदीकी जुड़ाव रखने वाले कई देशों ने रुचि दिखाई है । इनमें मारीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैको जैसे देश शामिल है । फिलहाल इन देशों ने एनआईओएस से अपने यहां भी इन कोर्सो को संचालित करने और केंद्र खोलने का मांग की है ।

🚩देश में पहले नगर-नगर गुरुकुल थे और उसमें वेद अनुसार पढ़ाई करवाई जाती थी जिसको पढ़ने के बाद हर मनुष्य स्वथ्य, सुखी सम्मानित जीवन जीता था आज की पढ़ाई सिर्फ पेट भरने के लिए ही है जो मनुष्य को पशुता की ओर ले जा रही है, अब एन.आई.ओ.एस. ने वेद की शिक्षा शुरू की है वे अत्यंत सरहानीय है । देश भर में सभी स्कूलों, कॉलेजो में वेद अनुसार शिक्षा शुरू कर देनी चाहिए जिससे हर व्यक्ति स्वथ्य, सुखी , सम्मानित जीवन जिए और देश को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन कर सके ।

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Sunday, January 6, 2019

जनता बोली न्यायायल हो चुका है निष्क्रिय, खुद ही लेना पड़ेगा फैसला


6 जनवरी  2019
 
🚩देश की अदालतों से फैसले के देरी के कारण और तारीख पर तारीख मिलने पर जनता में भारी रोष व्याप्त रहा है। 

🚩हाल ही में 4 जनवरी को राम मंदिर की सुनवाई थी जो 30 सेकंड से भी कम समय चली और फिर क्या ? फिर से मिली एक नई तारीख । पिछले 26 सालों से न्यायालय में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद चल रहा है और अब जब समय आ रहा है कि हिंदुओं को उनका राम मंदिर मिल जाए तो मंदिर मिलना तो दूर न्यायालय से एक के बाद एक नई तारीख मिल रही है । 

🚩एक कवि ने लिखा है कि :-

थे राम अयोध्‍या के राजा ये सारा विश्‍व जानता है।
पर आज उन्‍हें अपने ही घर तम्‍बू में रहना पड़ता है।।

अल्‍लामा इकबाल ने उनको पैगम्‍बर बतलाया है।
उनसा मर्यादा पुरुषोत्तम न पृथ्‍वी पर फिर आया है।।

फिर भी इस सेकुलर भारत में राम नाम अभिशाप हुआ।
मंदिर बनवाना बहुत दूर पूजा करना भी पाप हुआ।।

90 करोड़ हिंदू समाज इससे कुंठित रहते हैं।
उनकी पीड़ा को समझे जो उसे राष्‍ट्रविरोधी कहते हैं।।

हिंदू उदारता का मतलब कमजोरी समझी जाती है।
हिंद में ही हिंदू दुर्गति पर भारत माता रोती है।।

हे लोकतंत्र के हत्‍यारों सेकुलर का मतलब पहचानो।
मंदिर कहना यदि बुरी बात तो राम का घर ही बनने दो।

गृह निर्माण योजना तो सरकार ने ही चलवाई है।
तो राम का घर बनवाने में आखिर कैसी कठिनाई है।।

🚩सच में आखिर ये बात आजतक समझ ही नहीं आयी कि जब देश हिंदुओं का है और ये सबको पता ही है कि अयोध्या रामजी की जन्म भूमि है, ये बात सिर्फ आस्था के आधार पर नहीं कही जा रही है खुदाई के द्वारा मिले अवशेषों से भी पता चल चुका है, फिर भी वहां मंदिर अब तक नहीं बन पाया । पाकिस्तान जैसे देश में भी गुरुद्वारे और मंदिर बन रहे हैं, लेकिन भारत जो अपनी आध्यत्मिकता के लिए प्रसिद्ध है, उसी देश में हिंदुओं के आराध्य श्री राम को टेंट में रहना पड़ रहा है । 

🚩26 वर्षों का समय कोई छोटी अवधि नहीं है किसी मुद्दे को सुलझाने के लिए, लेकिन न्यायालय से सहीं फैसला अब तक नहीं आया, ये न्यायालय की निष्क्रियता नहीं तो और क्या है ?

🚩आज सुबह सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग अपने ट्वीट्स के माध्यम से हिंदुओं के प्रति न्यायालय की निष्क्रियता को बता रहे थे ।

🚩आइये जानते है क्या कह रही है जनता:-

🚩(1) अंजली लिखती हैं कि
किसी भी देश की पहचान उसके धर्म और संस्कृति से होती है । न्यायालय और कानून उनकी रक्षा के लिए बने होते हैं, लेकिन जब वही समाज के हित में त्वरित निर्णय न दें तो लोग कहाँ जाएं?
#न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya

🚩(2) नितेश लिखते हैं कि आज के समय में भारत जैसे देश में जहां हिन्दू कहनेभर को बहुसंख्यक हैं पर उनकी भावनाओं को कभी समझने की न तो देश की सरकार को समय है न ही न्यायपालिका को। #न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya

🚩(3) शिव लिखते हैं कि देश की जनता का यह कहना है कि 👇
क्या हमारे देश की #न्यायालय_की_निष्क्रियता की वजह से #Ayodhya में श्रीराममंदिर बनने का सपना कभी पूरा भी होगा?

#Sabarimala मंदिर में न्याय देने को आतुर अदालत #श्रीराममंदिर के मामले में फेल होती हुई दिखाई दे रही है।

🚩(4) करण ने कहा है कि तारीख पे तारीख!!
आतंकी और देशद्रोही, गद्दारों के लिये आधी रात में खुलनेवाली अदालत के पास #Ayodhya राममंदिर पर फैसला सुनाने के लिये समय नहीं है।
हिंदुओं को #न्यायालय_की_निष्क्रियता के कारण अदालत के भरोसे बैठने के बजाय अब खुद ही फैसला लेने का वक्त आ गया है।

🚩(5) ब्रज मोहन जी ने कहा है कि 1 ईसाई ने सबरीमाला पर याचिका लगाई 
और  
SC ने पूछा भी नही तेरा हिन्दू मन्दिर से क्या मतलब? और  फैसला सुना दिया ??🤔
राम लला के मंदिर के  8 भाषाओं में करीब 9000 पन्नों में 22 याचिका लगाई गई है उनपे तारीख पर तारीख 😡
#न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya

🚩ऐसे तो एक दो नही हजारों ट्वीट हो रहे थे जिसमें न्यायालय के प्रति जनता नाराज दिख रही थी ।

🚩क्या ऐसे ही भारत का सपना देखा था हमारे देश के वीरों ने, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी देश को आज़ाद कराने में । एक ओर जहां एक सुखद राज्य की कल्पना करते ही रामराज्य की तस्वीर सामने आ जाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े ही शर्म की बात है कि भारत में ही रामजी की जन्मस्थली में उनका एक मंदिर तक नहीं है । 

🚩ये वही देश है जहां न्यायालय याकूब मेनन जैसों की सुनवाई के लिए रात को 2 बजे भी खुलते हैं ।

ये वही देश हैं जहाँ कसाब जैसे आतंकियों को ऐशो आराम की ज़िंदगी दी जाती है । बिरियानी खिलाई जाती है ।

🚩ये वही देश है जहाँ मां कही जाने वाली गाय की दिन दहाड़े, धड़ल्ले से हत्या कर दी जाती है।

ये वही देश है जहाँ के लोगों में पश्चिमी गंदगी फैलाने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियों के जन्मदिन तो याद रहते हैं, लेकिन सच्ची सीख देने वाले देश भक्तों का नाम तक नहीं पता होता ।

🚩और ये वही देश है जहाँ देश को बर्बाद करने वालों को तो इनाम दिए जाते हैं, लेकिन देश की सच्ची शान, सच्चे मायनों में रक्षक संतों को अपमानित किया जाता है ।

🚩फिर भी हम कहेंगे कि हमारा देश महान है पता है क्यों ? क्योंकि इस हमारी संस्कृति और संस्कृति के रक्षक संत इस देश में विराजमान हैं ।

🚩सबरीमाला, जलीकट्टू, दही हांडी, दीपावली पर फटाके नहीं फोड़ने आदि हिन्दू विरोधी फैसले न्यायालय जल्दी देती है । पक्ष वाले फैसले पर तारीख पर तारीख मिलती है ।
इससे 90 करोड़ हिंदूओ में रोष व्याप्त है ।

🚩खैर बदले हुए कैलेंडर के साथ यही उम्मीद है कि जल्द ही न्यायालय हिंदुओं के प्रति अपनी निष्क्रियता को दूर करे और हिंदुओं के हक में भी फैसले दे ।

Saturday, January 5, 2019

जानिए आसाराम बापू ने देश में ऐसा क्या किया जिसके कारण जाना पड़ा जेल?

5 जनवरी  2019

🚩"भारत" नाम सुनते ही दो चीजें आंखों के सामने आती हैं एक तो भारत की सभ्यता और दूसरी भारत की सभ्यता बचाने वाले साधु-संत ।

🚩बात भी सहीं ही है भारत कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए अपने मूल से ही जाना जाएगा । पर क्या भारत पर हुए कई शासकीय अत्याचारों को भुलाया जा सकता है ? नहीं ना ! विभिन्न धर्मों के लोगों ने भारत को अपने रंग में, अपने मजहब में ढालने का पूरा प्रयत्न किया परंतु भारत के सनातन धर्म को आहत ना कर पाए, कितने-कितने देश-भक्त, धर्म-प्रेमी विधर्मियों के अत्याचार की बली चढ़ गए, पर भारत और भारत की वैदिक संस्कृति के परचम को हानि नहीं पहुंचाने दी बल्कि और भी बुलंद कर दिया ।
Know what Asaram Bapu did in the country due to which jail had to go?

🚩आज भी आधुनिकता की अंधी दौड़ में भारत में अगर स्थिरता बनी हुई है तो उसका सिर्फ एकमात्र कारण हैं वंदनीय साधु-संतों की उपस्थिति, इनके लोक-मांगल्य कार्यों और सांस्कृतिक आयोजनों की वजह से ही भारत में भारत की नींव "सनातन-संस्कृति और परोपकार" जीवित है । https://youtu.be/3r4Qn7NJwHY

🚩21वीं सदी के हिन्दू संत आसारामजी बापू, इनका नाम सुनते ही करोड़ों लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता और आंखों में नमी आ जाती है । प्यार से देश-विदेश के वासी इन्हें बापू कहते हैं । भारत के अस्तित्व को बचाने के लिए जितना कार्य  इन्होंने किया है उतना शायद कोई सोच भी नहीं सकता । देश-विदेश के लोगों को हिन्दू धर्म से न सिर्फ अवगत कराया बल्कि इसकी महानता से भी ओत-प्रोत किया और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा किया ।  https://youtu.be/wmswegtRqus

🚩प्राणिमात्र के हितैषी नाम से जाने जानेवाले बापू आसारामजी का ह्रदय विशाल होने के साथ-साथ देश के कल्याण और मंगल के लिए द्रवीभूत भी रहता है । जब बापू आसारामजी ने देखा कि कई अत्याचारों से जूझ रहा भारत देश धीरे-धीरे अप्रत्यक्ष रूप से फिर से गुलाम बनाया जा रहा है और देशवासियों को भ्रष्ट कर अपनी संस्कृति से, अपनी प्रगति से दूर किया जा रहा है तब बापूजी ने ठाना कि देश से पतन-कारक विदेशी सभ्यता को निकाल फेंकना होगा और फिर भारत-वासियों को मिली सहीं राह ।

🚩बापू आसारामजी ने 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन दिवस, 25 दिसंबर को क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन दिवस और 31 दिसंबर और 1 जनवरी को अंग्रेजी न्यू-ईयर की जगह भारत-विश्व-गुरु अभियान आयोजित किया । कई आदिवासी क्षेत्र, जिन तक सरकार भी नहीं पहुंच पाती है उन्हें समय-समय पर सहारा दिया और धर्म परिवर्तन से बचाया । हिंदुओं के पर्व पर विदेशी असर न हो इसलिए होली में केमिकल्स के कलर नहीं, नैसर्गिक रंग, पलाश के रंग से वैदिक होली और दीवाली पर प्रदूषण न हो इसीलिए अपने घर के साथ सभी स्थानों पर दीप-दान के महत्व को बताया ।https://youtu.be/xo1H7M3mkq8

🚩संत का अर्थ ही है परम हितैषी और बापू आसारामजी ने न सिर्फ खुद का जीवन सेवा में लगाया है बल्कि सभी देशवासियों को प्रेरित किया है सेवा के लिए लोक-हित के लिए, अपने मूल मंत्र "सबका मंगल सबका भला" के साथ ।

🚩14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे मनाकर जहां देश की युवा पीढ़ी अपना संयम और सदाचार खो रही थी और दुर्बल बन रही थी, अब वही युवा मना रहे हैं सच्चा और पवित्र-प्रेम दिवस अपने माता-पिता के साथ "मातृ-पितृ पूजन दिवस" के रूप में । जिससे युवानों को मिला उनके बड़े-बुजुर्गों के स्नेह के साथ-साथ संयम और सदाचार पालन करने का आशीष । साथ ही आधुनकिता की आड़ में बिखर रहे परिवार के लोगों को मिला एक दूसरे का साथ । कई परिवारों ने अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम के हवाले कर दिया था उन्होंने भी इस आयोजन से प्रभावित हो अपनी गलतीं सुधारी । युवानो का संयम और परिवार का साथ देश के लिए बहुत जरूरी है ये बात सिर्फ बापू आसारामजी ने आगे लाई । https://youtu.be/LrMcg10aWuk

🚩25 दिसंबर को जो लोग क्रिसमस मनाते हुए शराब पीकर रात्रि को हानिकारक धुनों पर थिरकते थे और न खाने जैसे पदार्थों सेवन कर पतन-कारक वातावरण में अपनी हानि करते थे ऐसे लोगों को जब बापू आसारामजी के सत्संगों से जागरूकता मिली तो सभी क्रिसमस की जगह "तुलसी पूजन दिवस" मनाने लगे । अगर कोई पौधा सबसे ज्यादा पूज्यनीय है इस धारा पर तो वो हैं हमारी तुलसी माँ, तो क्यों न इस दिन तुलसी माँ का ही श्रृंगार कर उनका पूजन करें । आखिर तुलसी जी को माँ यूँ ही नहीं कहा जाता, उनमें रोगप्रतिकारक शक्ति है । जैसे एक माँ अपने बच्चों को सभी हानियों से बचाती है वैसे ही माँ तुलसी हमारी रक्षक और पोषक हैं ये बात वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध हो चुकी है । इस दिन बापू आसारामजी के कारण विश्व को मिला एक और उन्नति-कारक पर्व ! https://youtu.be/fLyjdDWm7E0

🚩31 दिसंबर और 1 जनवरी को विदेशी अंधानुकरण करते लोग जब अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे थे तब लोक-हितैषी बापू आसारामजी ने "भारत विश्वगुरु अभियान" को फैलाया ताकि देशवासियों की रक्षा हो सके और सभी को पतन से बचाया जा सके । 25 दिसंबर से 1 जनवरी विदेशी सभ्यता का अनुकरण करने से से बहुत हानि हुई है भारतीयों की, पर यही 8 दिन अगर वैदिक संस्कृति से मनाएं जाएं तो अवश्य न केवल पतन से बचाव होगा अपितु सर्वांगीण उन्नति और मंगल होगा ।

🚩इन 8 दिनों में :

तुलसी पूजन दिवस
गौ-गंगा-गायत्री जागृति यात्रा
सहज स्वस्थ व योग प्रशिक्षण
गीता-पाठ हवन कार्यक्रम
मंत्र-अनुष्ठान
सामूहिक सेवा
सत्संग आयोजन

आदि आयोजन होते हैं ताकि मानव, प्रकृति, प्राणी सभी का मंगल हो ! तन तंदरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रसाद प्रगट हो ! और न आत्महत्या हो न गौ-हत्या हो और न ही यौवन-हत्या हो बल्कि आत्मविकास हो ! तुलसी, गौ, गंगा, देश की वैदिक संस्कृति, और सच्चे संतों को पूजा जाए और इनकी रक्षा की जाए, सेवा की जाए ! लोग ओजस्वी-तेजस्वी बनें और गीता-ज्ञान से मुक्तात्मा, महानात्मा बन अपने स्वरूप को जानें !https://www.facebook.com/SantShriAsharamJiBapu/videos/10153460984402669/

🚩आज बापू आसारामजी कारागृह में हैं तो सिर्फ इसी वजह से क्योंकि उन्होंने 50 वर्षों से भी अधिक समय देश और समाज के उत्थान और रक्षा में लगा दिए । बापू आसारामजी की वजह से भारत बार-बार विदेशी षड्यंत्रों से बचा और कई देशवासियों की धर्म-परिवर्तन से रक्षा हुई, कई विदेशी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की दाल नहीं गली और भटकते हुए देशवासियों को सहीं दिशा मिली । बापूजी के द्वारा किये जाने वाले ये सारे देश मांगल्य के कार्य देश को फिर से गुलाम बनने से रोक रहे हैं इसलिए राष्ट्र-विरोधी ताकतों के इशारे पर कुछ स्वार्थी नेताओं ने बापू आसारामजी के खिलाफ षड्यंत्र रच झूठे केस के जरिए देश और समाज से दूर किया । https://youtu.be/j1cCIdlT50c

🚩लेकिन वे स्वार्थी नेता समझते हैं कि बापू आसारामजी केवल एक शरीर हैं अब उन्हें कौन बताए कि जो करोड़ों हृदयों में वास करते हैं और जो सत्य के प्रतीक हैं वे सर्वव्याप्त हैं । जब इतने कुप्रचार के बाद भी सेवाएं और मंगल कार्य आदि आयोजन रुकने के बजाय और भी व्यापक हुए तब इन षड्यंत्रकारियों को मुंह की खानी पड़ी और इनके दलाल मीडिया की भी कई गलत और विरोधी खबरों के बावजूद, बापू आसारामजी के द्वारा हो रहे सेवाकार्यों पर आंच भी नहीं आयी । आखिर साँच को आंच नहीं और झूठ को पैर नहीं ! बापू आसारामजी का निर्मल पवित्र हृदय पहले भी सभी को लोकहित सेवा और आत्मज्ञान के प्रति प्रेरित कर रहा था और आज भी कर रहा है और वर्षों-वर्ष आगे भी प्रेरित करता रहेगा । 

🚩भारत का स्वर्णीम इतिहास था उसका "विश्वगुरु" होना । हम सभी ने भारत देश का इतिहास पढ़ा है और भारत माता की महिमा की गाथाएं सुनी हुई हैं । इतिहास के पन्नो में भारत को विश्व गुरु यानी की विश्व को पढ़ाने वाला अथवा पूरी दुनिया का शिक्षक कहा जाता था क्योंकि भारत देश के ऋषि-मुनि संत आदि ज्ञानीजन और उनका विज्ञान और अर्थव्यवस्था, राजनीति और यहाँ के लोगों का ज्ञान इतना समृद्ध था कि पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी देश भारत के कायल थे । अब बापू आसारामजी की दूरदृष्टि के कारण और उनके अद्भुत अद्वैत अभियान के कारण भारत वास्तव में भीतर से बाहर तक विश्वगुरु बन कर रहेगा । 

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Friday, January 4, 2019

खुलासा : पादरी चर्च में कन्फेशन परंपरा के चलते कर हैं यौनशोषण

4 जनवरी  2019
www.azaadbharat.org
🚩कैथलिक चर्च की दया, शांति और कल्याण की असलियत दुनिया के सामने उजागर हो ही गयी है । मानवता और कल्याण के नाम पर क्रूरता की पोल खुल चुकी है । चर्च  कुकर्मों की  पाठशाला व सेक्स स्कैंडल का अड्डा बन गया है । पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने पादरियों द्वारा किये गए इस कुकृत्य के लिए माफी माँगी थी ।
🚩कन्फेशन यानी अपनी गलतियों को खुलकर किसी से कहना । जिससे मन से बोझ तो उतरता है, साथ ही कन्फेस ये भी बताता है कि वो गलती दोबारा नहीं होगी । कैथोलिक और ऑर्थोडॉक्स चर्च में कन्फेशन आम है । लोग अक्सर पादरी के सामने अपने सिन यानी पापों को कन्फेस करते हैं, लेकिन ये यौन उत्पीड़न का जरिया बनने लगा है । केरल के कोट्टायम में एक महिला ने एक के बाद एक चार पादरियों पर उसे ब्लैकमेल करके यौन शोषण का आरोप लगाया ।
🚩इसी से मिलता-जुलता मामला पंजाब के जालंधर से आया, जहां पीड़िता का आरोप था कि कन्फ़ेशन के दौरान अपने राज बांटने पर पहले एक पादरी ने उसका यौन शोषण किया । इसके बाद से कन्फेशन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है । यहां तक कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने चर्च में कन्फेशन पर रोक लगाने की सिफारिश भी की । अपनी सिफारिश में आयोग ने लिखा कि ये महिलाओं की सुरक्षा में रोड़ा हैं ।
Disclosure: In the Pastor Church, due to the Confession tradition, sexually exploited

🚩जानिए, क्या है ये कन्फेशन और कैसे बन गया यौन शौषण का जरिया :-
चर्च में कन्फेशन की प्रक्रिया का बाइबिल में जिक्र मिलता है । इसे ऑग्सबर्ग कन्फेशन कहा जाता है, जिसके दो स्टेप हैं । पहला पाप की समझ से पैदा होने वाला डर और दूसरा चरण है जिसमें किसी को अपनी गलती का अहसास हो जाए और साथ ही ये यकीन भी हो जाए कि ईश्वर ने उसे पाप की माफी दे दी है । बाइबिल के दूसरे चैप्टर में माना गया है कि रोजमर्रा के कामों के दौरान सबसे कोई न कोई गलती हो जाती है, जिनका प्रायश्चित्त होना जरूरी है तभी मन शुद्ध होता है । चर्च के पादरी को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते हुए उसके सामने पापों का कन्फेशन किया जाता है ।
🚩ये है प्रक्रिया :-
चर्च में कन्फेशन के लिए एक जगह तय होती है । वहां कन्फेस करने वाले व्यक्ति और पादरी के सामने आमतौर पर एक परदा होता है । इन दोनों के अलावा और कोई भी वहां मौजूद नहीं होता है । पादरी के सामने कन्फेशन बॉक्स में खड़ा होकर कोई भी अपनी गलतीं बता सकता है और यकीन करता है कि पादरी उस राज को अपने और ईश्वर तक ही सीमित रखेगा ।
🚩कौन नहीं कर सकता है कन्फेस :-
10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कन्फेशन की प्रक्रिया नहीं है क्योंकि माना जाता है कि उन्हें सहीं-गलत का कोई अहसास नहीं होता है और वे जो भी करते हैं, भूल हो सकती है लेकिन अपराध नहीं । इसी तरह से मानसिक रूप से अपेक्षाकृत कमजोर लोगों के लिए इस प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं है, यानी उन्हें भी इसकी इजाजत नहीं ।
🚩पूरी दुनिया में यौन शोषण :-
कन्फेशन बॉक्स को आजकल डार्क बॉक्स कहा जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही महिलाओं के यौन शोषण का लंबा सिलसिला सुनाई पड़ रहा है । भारत के अलावा यूरोप, अमेरिका और दूसरे देशों में भी कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा यौन शोषण की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं । अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में पादरियों द्वारा हजार से भी ज्यादा बच्चों के यौन शोषण की एक खबर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया । यहां तक कि रोमन कैथोलिक चर्च के पोप को दुनियाभर के पादरियों के इन अपराधों के लिए माफी मांगनी पड़ी है । पादरियों द्वारा यौन शोषण की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए वैटिकन सिटी ने कई सख्त फैसले लिए, जिसमें पादरियों का निलंबन भी शामिल रहा ।
🚩महिलाओं के साथ यौन शोषण के अधिकतर मामलों की वजह कन्फेशन रहा, जिसके बूते पादरी उन्हें ब्लैकमेल करने लगे । इसी को देखते हुए महिला आयोग ने कन्फेशन की प्रक्रिया बंद करने की सिफारिश की । आयोग ने कहा कि चर्च में यौन शोषण की पारदर्शी जांच केंद्रीय एजेंसी के जरिए होनी चाहिए ।
स्त्रोत : न्यूज 18
🚩कन्नूर (केरल) के कैथोलिक चर्च की एक  नन सिस्टर मैरी चांडी  ने पादरियों और ननों का चर्च और उनके शिक्षण संस्थानों में व्याप्त व्यभिचार का जिक्र अपनी आत्मकथा ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ में किया है कि ‘चर्च के भीतर की जिन्दगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी । एक पादरी ने मेरे साथ बलात्कार की कोशिश की थी । मैंने उस पर स्टूल चलाकर इज्जत बचायी थी । ’ यहाँ गर्भ में ही बच्चों को मार देने की प्रवृत्ति होती है । सान डियेगो चर्च के अधिकारियों ने पादरियों के द्वारा किये गये बलात्कार, यौन-शोषण आदि के 140 से अधिक अपराधों के मामलों को निपटाने के लिए 9.5 करोड़ डॉलर चुकाने का ऑफर किया था ।
🚩देश-विदेशों में इतनी बड़ी-बड़ी घटनाएं घटित हो रही हैं लेकिन मीडिया को इसपर चर्चा करने की या न्यूज दिखाने की फुर्सत नहीं है, उसे तो केवल हिन्दू संस्कृति मिटानी है इसलिए पवित्र हिन्दू साधु-संतों को ही बदनाम करना है ।
🚩गांधी जी ने बताया था कि धर्म परिवर्तन वह जहर है जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है । हमें गौमांस भक्षण और शराब पीने की छूट देनेवाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए ।
🚩फिलॉसफर नित्शे लिखते हैं कि मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमें आंतरिक विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है । इस भयंकर विष का कोई मारण नहीं । ईसाईत गुलाम, क्षुद्र और चांडाल का पंथ है ।
🚩हिंदुस्तानी ऐसे धर्म, पादरी और चर्च से बचके रहें । धर्मपरिवर्तन करके अपना जीवन बर्बाद न करें । याद रहे श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने भी कहा है कि "स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः" अर्थात स्वधर्ममें मरना भी कल्याणकारक है, पर परधर्म तो भय उपजानेवाला है । अतः धर्मान्तरण की आंधी से बचकर रहें ।
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