Tuesday, April 11, 2017

टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल

टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल..

हिंदुस्तानियों को एक बात गौर करने जैसी है कि जब भी देश के हित के लिए,कोई भी #हिंदुत्व का कार्य करने आगे बढ़ते हैं तब मीडिया उनके पीछे पड़ जाती है और उनको किसी भी तरह गिराने का काम करती है ।

आपने देखा होगा कि जब से #उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने वाली थी तब से लेकर आज तक कुछ मीडिया और खासकर #बीबीसी न्यूज कैसी मंगढ़तन बातें योगी जी के खिलाफ लिख रही है।
T Raja Singh - Media Hindu

क्या भारत में शान्ति लाना नही चाहती बीबीसी..? क्यों इतना घबरा गई है #हिंदुत्वनिष्ठों से ???

अगर आप बीबीसी न्यूज को थोड़ा ध्यान देकर देखेंगे और पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि ये पूरा #मुस्लिम समुदाय के पक्ष में है और हिंदुत्वनिष्ठों के खिलाफ खड़ा हैं ।

जब-जब मुस्लिम समुदाय के कुछ असामाजिक लोगों द्वारा आतंक फैलाया गया तब तब बीबीसी न्यूज मौन रहा पर जैसे ही देश की शांति के लिए हिंदुत्वनिष्ठ उनको जवाब देते हैं तब वो उनके खिलाफ बोलना शुरू कर देता है ।

भारत में अल्पसंख्यक #मुस्लिमों की चिंता करने वाले बीबीसी न्यूज ने पाकिस्तान और बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार पर क्यों चुप्पी साध ली है !!

जिस भारत ने विश्व को शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाया, वहां #अशान्ति का वातावरण बनाने में मीडिया का बड़ा हाथ है ।

क्यों योगी जी सत्ता पर आते ही मीडिया की आँख की किकरी बन गए ?

तेलंगाना, भारतीय जनता पार्टी विधायक टी राजा सिंह ने भी (भारत लुटेरे #बाबर ने रामजी का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया था ) जब फिर से #राम मंदिर बनाने के लिए आवाज उठायी तो मीडिया को परेशानी क्यों हुई ? 

टी. राजा सिंह ने #बीबीसी न्यूज के सवांदाता को करारा जवाब देते हुए कहा कि, "राम मंदिर बनाना हर हिंदू का संकल्प है और मेरा भी संकल्प है । #हिंदू हो या मुस्लिम सिख हो या ईसाई अगर कोई भी राम मंदिर के बीच में आता है तो हम हमारे #प्राण दे भी सकते हैं और हम अगले के प्राण ले भी सकते हैं" ।

उन्होंने आगे कहा कि "अगर कोई बात से नहीं मानता है तो हम हर प्रकार से तैयार हैं । बस हमारा लक्ष्य #अयोध्या में राम मंदिर बनाना है । उसके लिए हम हर तरह से तैयार हैं । "विधायक से पहले मैं एक #हिंदू हूँ । मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ ।"

टी राजा सिंह ने 1999 में #श्रीराम युवा सेना व गोरक्षा दल का निर्माण किया और तभी से गौहत्या का विरोध शुरु किया ।

गोरक्षा के मुद्दे पर टी राजा $सिंह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हॉल में कहते हैं कि "मैं मोहन #भागवत के उस बयान का समर्थन करता हूँ कि जो गोरक्षा के लिए है। 
वो किसी के ऊपर हमला न करें । लेकिन जब हम गोरक्षा को जाते हैं । #ट्रक पकड़ते हैं, तब अगर उनकी ओर से हमला होता है तो सेल्फ डिफेंस तो करना होगा । नहीं तो हम मारे जाएंगे ।"

गाय का महत्व अगर कोई व्यक्ति जान लेता है तो गाय की हत्या पर वो आपा खो बैठता है । उन्होंने कहा कि," #गाय से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है"

#गौमाता को चराने स्वयं भगवान श्री कृष्ण जाते थे उनको बचाने के लिए अगर गौ रक्षक कुछ भी करें तो कोई गलत नही हो सकता ।

अब तो उत्तरप्रदेश में शिया समुदाय के मुस्लिमों ने गोहत्या रोकने के लिए  ‘शिया गो-रक्षा दल’ भी बना लिया है ।

गुजरात के #मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी कहा है कि “गाय हमारी मां है और यह हमारे लिए विश्वास की बात है, हमारी सरकार को ऐसे लोगों से कोई सहानुभूति नहीं है जिनको गायों के प्रति कोई दया नहीं है।”

विजय रूपानी ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने गाय और उसकी संतान को मारने से रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं। गाय में प्रजनन के माध्यम से #गांवों में कमाई का एक तरीका भी है। हम चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर घी और दूध की नदियों बहें।

गौमाता हमारे लिए कितनी उपयोगी है जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें ।


गाय आर्थिक रूप से तो समृद्धि देने वाली है ही साथ-साथ में गाय का होना भी वातावरण में शुद्धि लाता है एवं गाय माता का #दूध, #दही, #छाछ, #मक्खन, #घी, #मूत्र एवं #गोबर मनुष्य के लिए वरदानस्वरूप है इसके उपयोग से मनुष्य स्वस्थ्य और सुखी जीवन जी सकता है ।

अतः गौ माता की रक्षा करना हितकारी है और गौ हत्या करना विनाश का संकेत है।

Monday, April 10, 2017

भगवान शिवजी के अवतार अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता श्री हनुमानजी

🚩 भगवान शिवजी के अवतार अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता श्री हनुमानजी 

🚩हनुमानजी जयंती (उत्सव) 11 अप्रैल 2017
Hanuman Jayanti

🚩#हनुमानजी भगवान #शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान हैं ।

🚩 हनुमानजीका जन्म त्रेतायुगमें चैत्र पूर्णिमाकी पावन तिथिपर हुआ । तबसे हनुमान जयंतीका उत्सव मनाया जाता है । इस दिन हनुमानजीका तारक एवं मारक तत्त्व अत्यधिक मात्रामें अर्थात अन्य दिनोंकी तुलनामें 1 सहस्र गुना अधिक कार्यरत होता है । इससे वातावरणकी सात्त्विकता बढती है एवं रज-तम कणोंका विघटन होता है । विघटनका अर्थ है, रज-तमकी मात्रा अल्प होना । इस दिन हनुमानजीकी उपासना करनेवाले भक्तोंको हनुमानजीके तत्त्वका अधिक लाभ होता है ।

🚩#ज्योतिषियों की #गणना अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 #करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6:03 बजे हुआ था ।

🚩#हनुमानजी के पिता सुमेरू पर्वत के #वानरराज राजा #केसरी तथा माता #अंजना हैं । हनुमान जी को #पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पवन देवता ने हनुमानजी को पालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।

🚩हनुमानजी को #बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि हनुमानजी का शरीर वज्र की तरह है।

🚩पृथ्वी पर सात मनीषियों को अमरत्व (चिरंजीवी) का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं । हनुमानजी आज भी #पृथ्वी पर विचरण करते हैं।

🚩हनुमानजी को एक दिन अंजनी माता फल लाने के लिये आश्रम में छोड़कर चली गई। जब शिशु हनुमानजी को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने आकाश में उड़ने लगे । उनकी सहायता के लिये पवन भी बहुत तेजी से चला। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने दिया । जिस समय हनुमान जी सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु #सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था । हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया । उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे । आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है ।"

🚩राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े । राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई ।

🚩हनुमान की यह दशा देखकर  #वायुदेव को क्रोध आया । उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक दी । जिससे संसार का कोई भी #प्राणी साँस न ले सका और सब पीड़ा से तड़पने लगे । तब सारे  #सुर,  #असुर, यक्ष,  किन्नर आदि #ब्रह्मा जी की शरण में गये । #ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये । वे मूर्छित हनुमान जी को गोद में लिये उदास बैठे थे । जब ब्रह्माजी ने उन्हें जीवित किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों की पीड़ा दूर की । फिर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान दिया कि कोई भी #शस्त्र इनके अंग को हानि नहीं कर सकता । #इन्द्र ने भी वरदान दिया कि इनका  शरीर #वज्र से भी कठोर होगा । सूर्यदेव ने कहा कि वे उसे अपने तेज का शतांश प्रदान करेंगे तथा शास्त्र मर्मज्ञ होने का भी आशीर्वाद दिया। वरुण ने कहा कि मेरे पाश और जल से यह #बालक सदा सुरक्षित रहेगा । यमदेव ने अवध्य और  निरोग रहने का आशीर्वाद दिया । #यक्षराज कुबेर,  #विश्वकर्मा  आदि देवों ने भी अमोघ वरदान दिये ।

🚩इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत मे हनु) टूट गई थी । इसलिये उनको "हनुमान"नाम दिया गया । इसके अलावा ये अनेक नामों से प्रसिद्ध है जैसे #बजरंग बली, #मारुति, #अंजनि सुत, #पवनपुत्र, #संकटमोचन, #केसरीनन्दन, #महावीर, #कपीश, #बालाजी महाराज आदि । इस प्रकार हनुमान जी के 108 नाम हैं और हर नाम का मतलब उनके जीवन के अध्यायों का सार बताता है ।

🚩एक बार माता सीता ने प्रेम वश हनुमान जी को एक बहुत ही कीमती सोने का हार भेंट में देने की सोची लेकिन हनुमान जी ने इसे लेने से मना कर दिया । इस बात से माता सीता गुस्सा हो गई तब हनुमानजी ने अपनी छाती चीर का उन्हें उसे बसी उनकी प्रभु राम की छव‍ि दिखाई और कहा क‍ि उनके लिए इससे ज्यादा कुछ अनमोल नहीं ।

🚩हनुमानजी के #पराक्रम अवर्णनीय है । आज के आधुनिक युग में ईसाई मिशनरियां अपने स्कूलों में पढ़ाती है कि हनुमानजी भगवान नही थे एक बंदर थे । बन्दर कहने वाले पहले अपनी बुद्धि का इलाज कराओ। हमुमान जी शिवजी का अवतार हैं। भगवान श्री राम के कार्य में साथ देने (राक्षसों का नाश और धर्म की स्थापना करने )के लिए भगवान शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण किया था ।

🚩मनोजवं मारुततुल्य वेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथ मुख्य, श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।

‘मन और वायु के समान जिनकी गति है, जो जितेन्द्रिय है, बुद्धिमानों में जो अग्रगण्य हैं, पवनपुत्र हैं, वानरों के नायक हैं, ऐसे श्रीराम भक्त हनुमान की शरण में मैं हूँ ।

🚩जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो, वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे..
🚩बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन - कुमार |
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||


🚩चौपाई - अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता ।।  (31)

🚩यह हनुमान चालीसा की एक चौपाई  जिसमें तुलसीदास जी लिखते है कि हनुमानजी अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीता माता ने उन्हें वरदान दिया ।  यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है जिसकी बदौलत हनुमान जी ने असंभव से लगने वाले काम आसानी से सम्पन किये थे। आइये अब हम आपको इन अष्ट सिद्धियों, नौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताते है।

🚩आठ सिद्धयाँ :
हनुमानजी को  जिन आठ सिद्धियों का स्वामी तथा दाता बताया गया है वे सिद्धियां इस प्रकार हैं-

🚩1.अणिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।

इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने तब किया जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।

🚩2. महिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।

जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था।

इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।

🚩3. गरिमा:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।

गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर रूप धारक करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया। पवनपुत्र हनुमान के भाई थे भीम क्योंक‍ि वह भी पवनपुत्र के बेटे थे ।

🚩4. लघिमा:  इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।

जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचे, तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही सीता माता को अपना परिचय दिया था।

🚩5. प्राप्ति:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।

रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।

🚩6. प्राकाम्य:  इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ ही, वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को प्राप्त कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।

इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल तक प्राप्त कर लिया है।

🚩7. ईशित्व:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।

ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।

🚩8. वशित्व:  इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।

वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।

🚩नौ निधियां  :
हनुमान जी प्रसन्न होने पर जो नव निधियां भक्तों को देते है वो इस प्रकार है

🚩1. पद्म निधि : पद्मनिधि लक्षणो से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है ।

🚩2. महापद्म निधि : महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है ।

🚩3. नील निधि : नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढ़ी तक रहती है।

🚩4. मुकुंद निधि : मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।

🚩5. नन्द निधि : नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणोंवाला होता है वही कुल का आधार होता है ।

🚩6. मकर निधि : मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करनेवाला होता है ।

🚩7. कच्छप निधि : कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है ।

🚩8. शंख निधि : शंख निधि एक पीढ़ी के लिए होती है।

🚩9. खर्व निधि : खर्व निधिवाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रित फल दिखाई देते हैं ।


Sunday, April 9, 2017

जोधपुर जेल में बापू आसारामजी से मिलने पहुंचे डीजी वंजारा

जोधपुर जेल में बापू आसारामजी से मिलने पहुंचे डीजी वंजारा

9 अप्रैल 2017

जोधपुर में गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डी. जी वंजारा जी का शनिवार को स्वागत समारोह था उसमें उनका भव्य स्वागत किया गया और विशाल बाइक रैली निकाली गई ।
DG Vanzara Met Asaram Bapu

वे शनिवार स्वागत समारोह खत्म होने के बाद भी एक दिन रुके। वे वहां इसलिए रुके क्योंकि उनको 43 महीनों से जेल में बंद बापू आसारामजी से मिलना था ।

वे रविवार शाम को हिन्दू संत आसारामजी बापू से  मिले और उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कल मैं जोधपुर में सूर्यनगरी हार्दिक अभिनंदन समिति की ओर से जो जाहिर सन्मान का कार्यक्रम रखा गया था उस कार्यक्रम के संदर्भ में मैं जोधपुर आया था । कल बाइक रैली थी और टाउन हॉल में सन्मान समारम्भ हुआ । जोधपुर के लोगों ने बहुत उमंग और उत्साह दिखाया । मैं जोधपुर के लोगों को,मित्रो को,साथियों को दिल से धन्यवाद देता हूँ ।

आज मैं स्पेशली इसलिए रुका था कि संत श्री आसारामजी बापू जोधपुर जेल में हैं । आज मैं उनके दर्शन करने के लिए गया था । उनके दर्शन हुए, उनसे  बातचीत हुई । मैंने उनके स्वास्थ्य के विषय में पूछताछ की । उनकी उम्र 81 साल की है इस कारण से स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है, ये एक चिंता का विषय है । इस विषय पर चर्चा हुई है और ये जो केस है इस केस के विषय में भी चर्चा हुई है । 

बापूजी के खिलाफ जो केस दर्ज हुए हैं । यहाँ का, जो जोधपुर का केस है वो केस झूठा है वो मैं पहले से ही कह चुका हूँ । इसका investigation भी झूठा है और इसका जो evidence कलेक्शन हुआ है चार्जशीट कलेक्शन हुआ है वो भी झूठा है ।
  

गुजरात गांधीनगर में जो दूसरा केस दर्ज है वो भी 12 साल के बाद,वो केस दर्ज हुआ था वो केस भी झूठा था । एक साजिश एक conspiracy संत आसारामजी बापू के खिलाफ चल रही है । उस साजिश के अंतर्गत दूसरे केस दर्ज किये गए हैं और एक बहुत बड़ा अन्याय और अत्याचार हिंदुस्तान के महान स्तंभ संत के ऊपर हो रहे हैं । इस बात की मुझे बहुत पीड़ा है ।

वंजारा जी ने ये भी कहा कि हम संत आसारामजी बापू का केस लोक अदालत में ले जाएंगे और निर्दोष महान संत आसारामजी बापू को न्याय दिलाकर ही रहेंगे ।

मीडिया द्वारा राजनीति में आने को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मैं लोगों के संपर्क में हूँ और जरूरत पड़ी तो राजनीति में भी आऊंगा ।

गौरतलब है कि इससे पहले भी श्री अशोक सिंघल जी से मिलने पर उन्होंने कहा था कि ये विदेशी फंड से चलने वाली भारतीय मीडिया संत आसारामजी बापू का दुष्प्रचार कर रही है और संत आसारामजी बापू ने विदेशी कंपनियों और धर्मान्तरण पर रोक लगाई जिसके कारण उनको जेल भेजा गया है ।


सुदर्शन न्यूज चैनल के चैयरमेन श्री सुरेश चव्हानके भी संत आसारामजी बापू को मिलने जेल में गए थे उनका भी कहना था कि बापूजी ने हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार विश्वभर में किया है इसलिए उनको जेल भेजा गया है ।

भाजपा नेता ड़ॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भी कई बार बापू आसारामजी से मिलकर आये हैं । उन्होंने भी कहा कि मैंने पूरा केस पढ़ा है,पूरा केस ही बोगस है , जिस समय लड़की बोल रही है कि मेरे साथ छेड़खानी की गई उस समय तो वो अपने दोस्त से फोन पर बात कर रही थी और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भी संत आसारामजी बापू को क्लीनचिट मिल चुकी है। स्वामी जी का कहना है कि आसारामजी बापू ने धर्मान्तरण पर रोक लगाई है इसलिए वेटिंकन सिटी में नाराजगी आई और उन्होंने सोनिया गांधी को बोला और सोनिया गांधी के इशारे पर ये केस हुआ और बापू को जेल भिजवाया गया।

अब हिंदूवादी सरकार आने पर भारत की जनता की निगाहें टिकी है कि कब हिन्दू धर्म के आधार स्तम्भ निर्दोष बापू आसारामजी को कब मिलेगा न्याय...???

Saturday, April 8, 2017

भगवान महावीर स्वामी जी का दिव्य जीवन चरित्र

*भगवान महावीर स्वामी जी का दिव्य जीवन चरित्र*

जयंती 9 अप्रैल 2017

Azaad Bharat - Mahavir Jayanti
महावीर स्वामी का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले हुआ था । ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के क्षत्रिय कुण्डलपुर में पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ चैत्र शुक्ल तेरस को वर्धमान का जन्म हुआ । यही #वर्धमान बाद में इस काल के अंतिम #तीर्थंकर #महावीर_स्वामी बने ।

जैन ग्रंथों के अनुसार, 23वें #तीर्थंकर #पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हो जाने के 278 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था । महावीर को 'वीर', '#अतिवीर' और '#सन्मति' भी कहा जाता है।

तीर्थंकर महावीर स्वामी #अहिंसा के #मूर्तिमान प्रतीक थे । उनका #जीवन #त्याग और #तपस्या से ओतप्रोत था । उन्होंने एक #लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा । हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ । उन्होंने दुनिया को #सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया ।

महावीर जी ने अपने उपदेशों और प्रवचनों के माध्यम से दुनिया को सही राह दिखाकर मार्गदर्शन किया ।

भगवान महावीर, #ऋषभदेव से प्रारंभ हुई वर्तमान चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे।
प्रभु महावीर प्रारंभिक तीस वर्ष राजसी वैभव एवं विलास के दलदल में 'कमल' के समान रहे ।

मध्य के बारह वर्ष घनघोर जंगल में मंगल साधना और आत्म जागृति की आराधना की जिसमें दुष्टों ने इन्हें कई यातनाएं दी । कान में खीले ठोके फिर भी महावीर #साधना में लगे रहे । बाद के तीस वर्ष उन्होंने न केवल जैन जगत या मानव समुदाय के लिए अपितु प्राणी मात्र के कल्याण एवं मुक्ति मार्ग की प्रशस्ति में व्यतीत किये ।

जनकल्याण हेतु उन्होंने चार तीर्थों #साधु-साध्वी-श्रावक-श्राविका की रचना की। इन सर्वोदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएँ नहीं थी । भगवान महावीर का आत्मधर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं के लिए पसंद हो। यही महावीर का '#जियो और जीने दो' का सिद्धांत है।

इतने वर्षों के बाद आज भी भगवान महावीर का नाम स्मरण बड़ी #श्रद्धा और #भक्ति से लिया जाता है, इसका मूल कारण यह है कि महावीर जी ने इस जगत को न केवल #मुक्ति का संदेश दिया, अपितु मुक्ति की सरल और सच्ची राह भी बताई। भगवान महावीर ने #आत्मिक और शाश्वत सुख की प्राप्ति हेतु पाँच सिद्धांत हमें बताए : सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य।

वर्तमान में अशांत, आतंकी, भ्रष्ट और हिंसक वातावरण में महावीर जी की अहिंसा ही शांति प्रदान कर सकती है । महावीर जी की अहिंसा केवल सीधे वध को ही हिंसा नहीं मानती है, अपितु मन में किसी के प्रति बुरा विचार भी हिंसा है । जब मानव का मन ही साफ नहीं होगा तो अहिंसा को स्थान ही कहाँ...???

वर्तमान युग में प्रचलित नारा 'समाजवाद' तब तक सार्थक नहीं होगा जब तक आर्थिक विषमता रहेगी । एक ओर अथाह पैसा, दूसरी ओर अभाव ।

इस असमानता की खाई को केवल भगवान महावीर का 'अपरिग्रह' का सिद्धांत ही भर सकता है । अपरिग्रह का सिद्धांत कम साधनों में अधिक संतुष्टि पर बल देता है । यह आवश्यकता से ज्यादा रखने की सहमति नहीं देता है । इसलिए सबको मिलेगा और भरपूर मिलेगा ।

जब अचौर्य की भावना का प्रचार-प्रसार और पालन होगा तो चोरी, लूटमार का भय ही नहीं होगा । सारे जगत में मानसिक और आर्थिक शांति स्थापित होगी । चरित्र और संस्कार के अभाव में सरल, सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जीवन जीना दूभर होगा। भगवान महावीर ने हमें अमृत कलश ही नहीं, उसके रसपान का मार्ग भी बताया है ।

सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं...

हे पुरुष ! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ । जो #बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।

अहिंसा - इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रिय वाले जीव) आदि है उनकी हिंसा मत करों , उनको उनके पथ पर जाने से न रोको । उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो । उनकी रक्षा करो । यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं ।

अपरिग्रह - परिग्रह पर भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी खुद सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, दूसरों से ऐसा संग्रह कराता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सम्मति देता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सका । यही संदेश अपरिग्रह के माध्यम से भगवान महावीर दुनिया को देना चाहते हैं ।

ब्रह्मचर्य - महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चरित्र, संयम और विनय की जड़ है । तपस्या में #ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है । जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं ।

क्षमा - क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- 'मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ । जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है । मेरा किसी से वैर नहीं है । मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ । सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ । सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ ।'

वे यह भी कहते हैं 'मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों
। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।'

धर्म - #धर्म सबसे उत्तम मंगल है । अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है । महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं ।

भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया । त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था । भगवान महावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना की । देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया ।

जैसे हर संत के जीवन में देखा जाता है, वैसे महावीर स्वामी के समय भी जहाँ उनसे लाभान्वित होनेवाले लोग थे, वहीं समाजकंटक निंदक भी थे ।

उनमें से पुरंदर नाम का निंदक बड़े ही क्रूर स्वभाव का था । वह तो महावीरजी के मानो पीछे ही पड़ गया था । उसने कई बार महावीर स्वामी को सताया, उनका अपमान किया पर संत ने उसे माफ कर दिया । एक दिन महावीर स्वामी पेड़ के नीचे ध्यानस्थ बैठे थे । तभी घूमते हुए पुरंदर भी वहाँ पहुँच गया । वह महावीरजी को ध्यानस्थ देख आग-बबूला होकर बड़बड़ाने लगा : ‘‘अभी इनका ढोंग उतारता हूँ ।

अभी मजा चखाता हूँ...’’ और आवेश में आकर उसने एक लकड़ी ली और उनके कान में खोंप दी । कान से रक्त की धार बह चली लेकिन महावीरजी के चेहरे पर पीड़ा का कोई चिह्न न देखकर वह और चिढ़ गया, और कष्ट देने लगा । इतना सब होने पर भी महावीरजी किसी प्रकार की कोई पीड़ा को व्यक्त किये बिना शांत ही बैठे रहे । परंतु कुछ समय बाद अचानक उनका ध्यान टूटा, उन्होंने आँख खोलकर देखा तो सामने पुरंदर खड़ा है । उनकी आँखों से आँसू झरने लगे । पुरंदर ने पूछा : ‘‘क्या पीड़ा के कारण रो रहे हो ?’’
महावीर स्वामी : ‘‘नहीं, शरीर की पीड़ा के कारण नहीं ।’’

पुरंदर : ‘‘तो किस कारण रो रहे हो ?’’
‘‘मेरे मन में यह व्यथा हो रही है कि मैं निर्दोष हूँ फिर भी तुमने मुझे सताया है तो तुम्हें कितना कष्ट सहना पड़ेगा ! कैसी भयंकर पीड़ा सहनी पड़ेगी ! तुम्हारी उस पीड़ा की कल्पना करके मुझे दुःख हो रहा है ।’’
यह सुन पुरंदर मूक हो गया और पीड़ा की कल्पना से सिहर उठा ।

पुरंदर की नाईं गौशालक नामक एक कृतघ्न गद्दार ने भी महावीर स्वामी को बहुत सताया था । महावीरजी के 500 शिष्यों को उनके खिलाफ खड़ा करने का उसका षड्यंत्र भी सफल हो गया था । उस दुष्ट ने महावीर स्वामीजी को जान से मारने तक का प्रयत्न किया लेकिन जो जैसा बोता है उसे वैसा ही मिलता है । धोखेबाज लोगों की जो गति होती है, गौशालक का भी वही हाल हुआ ।

गौशालक के साथ पाँच सौ निंदक मिल गये  । वे कौन-से नरक में सड़ते होंगे पता नहीं है लेकिन महावीर को तो लाखों-करोड़ो लोग आज भी मानते हैं  ।

भगवान महावीर ने ईसापूर्व 527, 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी (राजगीर) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया ।

समाज का दुर्भाग्य रहा है कि जब महापुरुष हयात होते हैं तब उन पर आरोप - प्रत्यारोप लगाते हैं ।उनका आदर नही करते,उनके जाने के बाद अनेकों मंदिर बनवाकर उनकी पूजा करते हैं ।

संत निंदको व कुप्रचारको ! अब भी समय है, कर्म करने में सावधान हो जाओ । अन्यथा जब प्रकृति तुम्हारे कुकर्मों की तुम्हें सजा देगी उस समय तुम्हारी वेदना पर रोनेवाला भी कोई न मिलेगा ।

Friday, April 7, 2017

सच्चा इतिहास : ताजमहल नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ..

 सच्चा इतिहास : ताजमहल  नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ।

'ताजमहल' वास्तु मुसलमानों की नहीं, अपितु वह मूलतः #हिंदुओं की है । वहां इससे पूर्व #भगवान #शिवजी का मंदिर था, यह इतिहास सूर्यप्रकाश के जितना ही स्पष्ट है । मुसलमानों ने इस वास्तु को ताजमहल बनाया । #ताजमहल इससे पूर्व #शिवालय होने का प्रमाण पुरातत्व विभाग के अधिकारी, अन्य पुरातत्वतज्ञ, इतिहास के अभ्यासक तथा देश-विदेश के तज्ञ बताते हैं ।
Reality Taj Mahal

 मुसलमान आक्रमणकारियों की दैनिकी में (डायरी) भी उन्होंने कहा है कि #ताजमहल #हिंदुओं की वास्तु है । तब भी मुसलमान इस वास्तु पर अपना अधिकार जताते हैं । #शिवालय के विषय में #सरकार के पास सैकडों प्रमाण धूल खाते पड़े हैं । #सरकार इस पर कुछ नहीं करेगी । इसलिए अब अपनी हथियाई गई वास्तु वापस प्राप्त करने हेतु यथाशक्ति प्रयास करना ही #हिंदुओं का धर्म व कर्तव्य है । ऐसी वास्तुएं वापस प्राप्त करने हेतु एवं हिंदुओं की वास्तुओं की रक्षा के लिए ‘हिंदु राष्ट्र’ अनिवार्य है ।

मुसलमान आक्रमणकारियों ने #भारत के केवल गांव एवं नगरों के ही नामों में परिवर्तन नहीं किया, अपितु वहां की विशाल वास्तुओं को नियंत्रण में लेकर एवं उसमें मनचाहा परिवर्तन कर निःसंकोच मुसलमानों के नाम दिए । मूलतः मुसलमानों को इतनी विशाल एवं सुंदर वास्तु बनाने का ज्ञान ही नहीं था । परंतु हिंदुओं ने इस्लाम पंथ की स्थापना से पूर्व ही अजिंटा तथा वेरूल के साथ अनेक विशाल मंदिरों का निर्माण कार्य किया था । मुसलमान आक्रमणकारियों को केवल भारत की वास्तुकला के सुंदर नमूने उद्ध्वस्त करना इतना ही ज्ञात था । #गजनी द्वारा अनेक बार उद्ध्वस्त श्री #सोमनाथ मंदिर से लेकर अफगानिस्तान तक उद्ध्वस्त बामयान की विशाल बुद्धमूर्ति तक का इतिहास मुसलमान आक्रमणकारियों की विध्वंसक मानसिकता का प्रमाण है ।

अंग्रेज सरकार द्वारा भी निश्चित रूप से विध्वंस  !!

मुसलमान आक्रमणकर्ताओें के पश्चात आए #अंग्रेज सरकार को भारतीय संस्कृति के विषय में तनिक भी प्रेम न रहने के कारण उन्होंने मुसलमान आक्रमणकर्ताओं का ही अनुकरण किया ।

आक्रमणकर्ताओं की दैनिकी में ताजमहल के विषय में सत्य !

आग्राकी ताजमहल वास्तु की भी कहानी इसी प्रकार की है । #डॉ. राधेश्याम ब्रह्मचारी ने ताजमहल का तथाकथित निर्माता शाहजहाँ के ही कार्यकाल में लिखे गए दस्तावेजों का संदर्भ लेकर ताजमहल का #इतिहास तपास कर देखा है । अकबर के समान शाहजहाँ ने भी बादशहानामा ऐतिहासिक अभिलेख में अपना चरित्र एवं कार्यकाल का इतिहास लिखकर रखा था । अब्दुल हमीद लाहोरी ने अरेबिक भाषा में बादशहानामा लिखा था, जो एशियाटिक सोसायटी ऑफ बेंगाल ग्रंथालय में आज भी  उपलब्ध है । इस बादशहानामा के पृष्ठ क्रमांक 402 एवं 403 के भाग में ताजमहल वास्तु का इतिहास छिपा हुआ है । इस भाग का स्वच्छंद भाषांतर आगे दिया है ।

'शुक्रवार दिनांक 15 माह जमदिउलवलको शाहजहाँ की पत्नी मुमताजुल जामानिका पार्थिव बुरहानपुर से आग्रामें (उस समयका अकबराबाद) लाया गया । यहां के राजा मानसिंह के महल के रूप में पहचाने जाने वाले अट्टालिका में गाड़ा गया । यह अट्टालिका राजा मानसिंह के नाती राजा जयसिंह के मालिक की थी । उन्होंने यह अट्टालिका शाहजहाँ को देना स्वीकार किया । इसके स्थान पर राजा जयसिंह को शरीफाबाद की जागीर दी गई । महारानी का विश्व को दर्शन न होने हेतु इस भवन का रूपांतर दर्गा में किया गया ।

मुमताजुुल की मृत्यु !

#शाहजहाँ की पत्नी का मूल नाम था #अर्जुमंद बानू । वह 18 वर्षों तक शाहजहाँ की रानी थी । इस कालावधि में उसे 14 अपत्य हुए । बरहानपुर में अंतिम जजगी में उसकी मृत्यु हो गई । उसका शव वहीं पर अस्थायी रूप से गाड़ा गया ।

ताजमहल शिवालय होने का सरकारी प्रमाण !!

ताजमहल से 4 कि.मी. दूरी पर #आग्रा नगर में बटेश्वर नामक बस्ती थी । वर्ष 1900 में पुरातन सर्वेक्षण विभाग के संचालक जनरल कनिंघम द्वारा किए गए उत्खनन में वहां संस्कृत में 34 श्लोक में मुंज बटेश्वर आदेश नामक पोथा पाया गया, जो लक्ष्मणपुरी के संग्रहालय में संरक्षित है । इसमें श्लोक क्रमांक 25,26 एवं 36 महत्त्वपूर्ण हैं । इनका स्वच्छंद भाषांतर आगे दिया है ।

🚩'राजा ने एक संगमरवरी #मंदिर का निर्माण कार्य किया । यह #भगवान #विष्णु का है । राजा ने दूसरा #शिव भगवान  का संगमरवरी #मंदिर का #निर्माण कार्य किया । ' #यह अभिलेख विक्रम संवत 1212 माह आश्विन शुद्ध पंचमी, शुक्रवार को लिखा गया । (वर्तमान समय में विक्रम संवत 2074 चालू है । अर्थात #शिवालय का निर्माण कार्य लगभग 854 वर्षों की कालावधि बीत गई है ।) (यह कालावधि लेख लिखने के समय का अर्थात वर्ष 1900 के संदर्भ के अनुसार है – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )

#शिवालय के प्रमाण को पुरातत्व शास्त्रज्ञों का समर्थन !

1. प्रख्यात पुरातत्व #शास्त्रज्ञ डी.जे. काले ने भी उपरोक्त दस्तावेज को समर्थन दिया है । उनके संशोधन के अनुसार #राजा परमार्दीदेव ने 2 विशाल संगमरवरी मंदिरों का निर्माण कार्य किया, जिसमें एक श्रीविष्णु का तो दूसरा भगवान शिवजी का था । #कुछ समय पश्चात मुसलमान #आक्रमणकर्ताओं ने इन मंदिरों की पवित्रता भंग की । इस घटना से भयभीत होकर एक व्यक्ति ने दस्तावेज को भूमि में गांडकर रखा होगा। मंदिरों की पवित्रता भंग होने के कारण उनका धार्मिक उपयोग बंद हो गया । इसीलिए बादशहानामा के लेखक अब्दुल हमीद लाहोरी ने मंदिर के स्थान पर महल ऐसा उल्लेख किया होगा ।

२. प्रसिद्ध इतिहासकार आर.सी. मुजुमदार के अनुसार #चंद्रात्रेय (चंदेल) राजा परमार्दिदेव का दूसरा नाम था परमल एवं उसके राज्य का नाम था #बुंदेलखंड । आज #आगरा में दो संगमरवरी प्रासाद हैं, जिसमें एक नूरजहां के पिता की समाधि (श्रीविष्णु मंदिर) है एवं दूसरा (शिवमंदिर) ताजमहल है ।

ताजमहल हिंदुओं का शिवालय होने के और भी स्पष्ट प्रमाण !

प्रसिद्ध इतिहासकार आर.सी. मुजुमदारके मत का समर्थन करने वाले प्रमाण आगे दिए हैं ।

1. ताजमहल के प्रमुख #गुंबज के कलश पर #त्रिशूल है, जो शिवशस्त्र के रूप में प्रचलित है ।

2. मुख्य गुंबज के ऊपर की छत पर एक संकल लटक रही है । वर्तमान में इस संकल का कोई उपयोग नहीं होता; परंतु मुसलमानों के आक्रमण से पूर्व इस संकल को एक पात्र लगाया जाता था, जिसके माध्यम से #शिवलिंग पर अभिषेक होता था ।

3. अंदर ही 2 मंजिल का ताजमहल है । वास्तव समाधि एवं रिक्त समाधि नीचे की मंजिल पर है, जबकि 2  रिक्त कबरें प्रथम मंजिल पर हैं । 2 मंजिल वाले शिवालय उज्जैन एवं अन्य स्थान पर भी पाए जाते हैं ।

4. #मुसलमानों की किसी भी वास्तु में #परिक्रमा मार्ग नहीं रहता; परंतु #ताजमहल में परिक्रमा #मार्ग उपलब्ध है ।

5. फ्रांस देशीय प्रवासी तावेर्नियार ने लिखकर रखा है कि इस #मंदिर के परिसर में #बाजार भरता था । ऐसी प्रथा केवल हिंदु मंदिरों में ही पाई जाती है । मुसलमानों के प्रार्थनास्थलों में ऐसे बाजार नहीं भरते ।

ताजमहल शिवालय होने की बात आधुनिक #वैज्ञानिक प्रयोगद्वारा भी सिद्ध !!

वर्ष 1973 में न्यूयार्क के प्रैट संस्था के प्राध्यापक मर्विन मिल्स द्वारा ताजमहल के दक्षिण में स्थित लकड़ी के दरवाजे का एक टुकडा अमेरिका में ले जाया गया । उसे ब्रुकलिन #महाविद्यालय के #संचालक डॉ. विलियम्स को देकर उस टुकड़े की आयु कार्बन-14 प्रयोग पद्धति से सिद्ध करने को कहा गया । उस समय वह लकड़ा 610 वर्ष (अल्प-अधिक 39 वर्ष) आयु का निष्पन्न हुआ । इस प्रकार से #ताजमहल वास्तु #शाहजहाँ से #पूर्व कितने वर्षों से अस्तित्व में था यह  सिद्ध होता है ।

शिवालय (अर्थात तेजोमहालय) 848 वर्ष पुराना !

यहां के मंदिर में स्थित शिवलिंग को 'तेजोलिंग' एवं मंदिर को तेजोमहालय कहा जाता था । यह #भगवान शिव का मंदिर #अग्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध था । इससे ही इस नगर को आगरा नाम पड़ा । मुंज बटेश्वर आदेश के अनुसार यह मंदिर 848 वर्ष पुराना है । इसका 354 वां स्मृतिदिन मनाना अत्यंत हास्यजनक है ।

(संदर्भ : साप्ताहिक ऑर्गनायजर, 28.11.2004)

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

Thursday, April 6, 2017

रेप और हत्या के झूठे आरोप में हुई आजीवन जेल, 8 साल बाद छुटा निर्दोष

रेप और हत्या के झूठे आरोप में हुई आजीवन जेल, 8 साल बाद छुटा निर्दोष 

आज कल निर्दोष लोगों को साजिश करके फंसाने का एक #ट्रेंड ही चल पड़ा है जो सभी मानव जाति के लिए भयावह है। 

आप भी सावधान रहें,नही तो आप भी इस साजिश के शिकार हो सकते हैं, इस तरह के झूठे आरोपों में फंसकर आपकी भी जिंदगी बर्बाद हो सकती है ।
Innocent Released after 8 years

वास्तविक अपराधी तो छूट जाते हैं लेकिन निर्दोष फंस जाते हैं और उनकी जिंदगी तो बर्बाद हो ही जाती है साथ-साथ में इज्जत, आबरू और संपत्ति भी चली जाती है ।

ऐसे एक दो नही,कई सैंकड़ो उदाहरण देखने को मिल रहे हैं जिसमें निर्दोषों को फंसाया गया हो और सालों बाद कोर्ट ने निर्दोष बरी किया हो । निर्दोषों को फंसाने में सबसे बड़ा अहम रोल #भ्रष्ट तंत्र में लिप्त पुलिस के साथ बढ़ रहे कोर्ट में भ्रटाचार का ।

आइये आपको अभी का एक ताजा उदाहरण बताते हैं , कैसे पुलिस ने फँसाया और कोर्ट ने आजीवन सजा भी सुना दी...

जिस अपराध को कभी किया ही नहीं उस अपराध के आरोप में एक युवक की जिंदगी के आठ साल बर्बाद हो गए। 

आंध्र प्रदेश का पी सत्यम बाबू नाम का यह युवक आठ साल बाद रविवार (2/4/2017) को जेल से तब रिहा हुआ जब दो दिन पहले हैदराबाद #हाईकोर्ट ने बाबू को रेप और हत्या के आरोप से निर्दोष बरी किया ।  बाबू पर #2007 में आरोप लगा था कि उसने एक छात्रा की रेप के बाद हत्या कर दी ।

आठ साल के लंबे इंतजार के बाद निर्दोष बाबू को राजामुंद्री सेंट्रल जेल (आंध्र प्रदेश) से #रविवार को रिहा किया गया। बाबू आठ साल बाद जब जेल से बाहर आया तो गेट के बाहर मां को खड़ा देखकर भावुक हो गया।

जेल से बाहर आकर #मीडिया में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बाबू ने कहा, आखिरकार अंत में सत्य की जीत हुई। मैंने आठ साल जेल की यातनाएं झेली हैं। अब ऐशा मीरा के वास्तविक अपराधियों को सजा मिल पाएगी। ऐशा मीरा 19 साल फारमैसी की छात्रा थी जिसकी 27 अक्टूबर 2007 को एक प्राइवेट वुमेन्स हॉस्टल में #रेप के बाद हत्या कर दी गई थी।

यह केस पुलिसिया करतूत का एक उदाहरण है कि पुलिस किस तरह किसी निर्दोष को फंसा सकती है। बताया जा रहा है पुलिस ने अदालत को बताया था कि 17 अगस्त 2008 को बाबू को एक डकैती में #गिरफ्तार किया है और बाबू ने युवती की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया है।

जिसके बाद 30 सितंबर 2010 को महिला सेशन कोर्ट ने बाबू को #आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

बाबू के निर्दोष #साबित होने पर अदालत ने उसे रिहा करने का आदेश जारी किया । साथ ही सरकार को एक लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश भी दिया। अदालत ने मामले में दोषी पुलिस वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया। अदालत के फैसले के बाद मीरा के माता पिता #बाबू के सपोर्ट में भी दिखे । बाबू ने उन्हें न्याय दिलाने और असली दोषियों को पकड़वाने के लिए धन्यवाद दिया।

अब आपने देखा कैसे $पुलिस झूठे सबूत पेश करके असली अपराधियों को बचा लेती है और निर्दोष को जेल करवा देती है ।

कुछ दिन पहले हरियाणा में भी एक लड़के के साथ यही हुआ था रेप केस में ।

चंडीगढ़ होशियारपुर के थाना महिलापुर पुलिस ने 26 साल के दर्शन सिंह को एक बड़ा तस्कर बताते हुए उसके पास से डेढ़ क्विंटल चूरापोस्त की बरामदगी दिखाई थी। $पुलिस के जुटाए आधे-अधूरे सबूतों के आधार पर जिला अदालत ने भी 27 फरवरी 2005 को उसे दोषी करार देते हुए 10 साल #कैद की सजा सुना दी। एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया। बाद में हाई कोर्ट ने निर्दोष बरी कर दिया 
दर्शन सिंह को जमीन के विवाद के कारण गांव वालों के साथ मिलकर पुलिस ने फंसाया था ।

पहले दर्शन सिंह #जमींदार था अभी वो मजदूरी कर रहा है, कोर्ट के चक्कर काटते काटते जमीन भी बिक गई और इज्जत भी चली गई ।

तो देश में आजकल #अपराधियों से पैसा लेकर निर्दोषो को फंसाने का काम जोर-शोर से चल रहा है ।

ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिसमें #सुप्रिद्ध हस्तियां भी चपेट में आई हैं । इसमें पूर्व #सरकार द्वारा खासकर हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसाया गया है ।

जैसे कि आपने देखा कुछ दिन पहले स्वामी असीमानंद जी को #अजमेर #ब्लास्ट में निर्दोष बरी किया गया । पर इतने साल जो जेल में उन्होंने पीड़ा सही उसका हर्जाना कौन भरेगा ?

#साध्वी को भी #जोशी हत्या कांड और #अजमेर ब्लास्ट में निर्दोष बरी किया और मालेगांव ब्लास्ट में क्लीन चिट मिल चुकी है फिर भी अभी तक रिहा नही किया जा रहा है । बड़ा आश्चर्य है!

ऐसे ही संत #आसारामजी बापू और उनके बेटे नारायण साईं का मामला सामने है । संत आसारामजी बापू के ऊपर जो जोधपुर का केस है उसमें उनको लड़की की मेडिकल के आधार पर क्लीन चिट मिल चुकी है और लड़की के फोन रिकार्ड से भी पता चला चुका है कि जिस समय लड़की द्वारा #छेड़छाड़ी का आरोप लगाया है उस समय तो वो अपने फ्रेड के साथ फोन पर बात कर रही थी   जिसकी कॉल डिटेल भी कोर्ट में सम्मिट हो चुकी है ।
लड़की की सारी बातें भी काल्पनिक हैं ।

लड़की घटना जोधपुर की बता रही है, रहने वाली उत्तर प्रदेश की है, पढ़ती #मध्यप्रदेश में और #FIR करवाती है दिल्ली में वो भी घटना के पांच दिन के बाद रात को ढाई बजे । 

इतने दिन तक आखिर क्यों मौन थी लड़की ?

जब जोधपुर में घटना घटी तो उसी समय क्यों पुलिस के पास नहीं गई ? जबकि उसका परिवार भी उसके साथ था ।

एक इलाके की घटना की #FIR दूसरे इलाके के पुलिस स्टेशन वाले भी नहीं लेते हैं लेकिन एक राज्य की घटना घटती है और दूसरे राज्य में FIR दर्ज हो जाती है वो भी रात के ढाई बजे ।
क्या ये किसी साजिश का हिस्सा नहीं ?

गुजरात सूरत में भी बड़ी बहन ने संत #आसारामजी बापू के ऊपर और छोटी बहन ने उनके बेटे #नारायण साई पर 12 साल पहले रेप का आरोप लगाया है। जबकि 3 साल पुराना केस दर्ज नही होता है और यहाँ 12 साल पुराना केस दर्ज हो रहा है । जब लड़की 2007 की घटना बताती है तो वो खुद क्यों 2012 तक उनके सत्संग में आती रही ???

बाद में तो बड़ी बहन ने #आसारामजी #बापू के ऊपर से केस वापिस लेने का बोला लेकिन पुलिस वापिस लेने को मना कर रही है ।

क्या ये एक #विश्विख्यात संत को बदनाम करने की साजिश की ओर इशारा नही है ?

संत आसारामजी बापू का जीवन चरित्र देखें तो एक पवित्र संत का जीवन देखने को मिलता है जिन्होंने देशहितकारी वो कार्य किये हैं कि जिनकी जितनी भी #भूरि-भूरि #प्रशंसा की जाये,कम है ।

सरकार इस ओर ध्यान दे या न दें पर पाठक तो समझ ही गए हैं कि किस प्रकार से आज झूठे केसों द्वारा #निर्दोषों को फंसाया जा रहा है ।

कई न्यायालयों ने तो इस पर चिंता भी जताई है कि रेप केस करने का एक नया ट्रेड चल पड़ा है । जिसमें बदला लेने की भावना और साजिश के तहत निर्दोषों को #फंसाया जा रहा है ।

रेप केस के ऐसे कई मामले हैं जो साबित ही नही हो पाते हैं ।

झूठे केस करने से देश का बड़ा नुकसान हो रहा है एक ओर जो वास्तविक पीड़ित हैं उनको न्याय नही मिल पा रहा और दूसरी ओर निर्दोषों को सजा मिल रही है। 

इसमें मीडिया का भी बड़ा अहम रोल है जो किसी #हिंदुत्वनिष्ठ पर आरोप लगते ही उनकी इतनी बदनामी करती है समाज में जैसे वो आरोपी नहीं सच में अपराधी हो ।

अब समय आ गया है जब जनता को जगना होगा ।
 पुलिस, #न्यायालय, #मीडिया में व्याप्त #भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए ।

जय हिन्द !!

Wednesday, April 5, 2017

फिल्म देखकर गर्भवती हुई नाबालिक लडकी, कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को भेजा समन...

फिल्म देखकर गर्भवती हुई नाबालिक लडकी, कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को भेजा समन...


चेन्नई के एक न्यायालय में 13 साल की एक लड़की ने कहा है कि, एक फिल्म की वजह से वह गर्भवती हो गई है। दरअसल कुछ महीने पहले एक लड़की अपने #ब्वॉयफ्रेंड के साथ घर से भाग गई थी। उसके बाद वह गर्भवती हो गई। #लड़की के घर से भाग जाने के बाद उसके घरवालों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। एक सप्ताह पहले ही पुलिस ने लड़की को ढूंढ़ निकाला।

लड़की के बयान के बाद न्यायालय ने सेंसर बोर्ड को समन भेजा है और उनसे जवाब मांगा है कि बोर्ड ने ऐसी फिल्म को कैसे #सर्टिफिकेट दिया ?
A minor girl who was pregnant by watching the movie, the court sent summon TO the sensor board

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि, सेंसर बोर्ड की खराब व्यवस्था का नतीजा है कि सिनेमा में #अश्लीलता बढ़ती जा रही है। इस तरह की अश्लीलता युवाओं का चारित्रिक पतन कर रही है ।

न्यायालय ने इस पूरे मामले में #सेंसर बोर्ड को सोमवार को हल्फनामा पेश करने के लिए कहा है।

लड़की को जब न्यायालय में पेश किया गया तो उसने कुछ चौंकाने वाली बातें सामने रखी। उसने अपने बयान में कहा कि 2010 में आई एक फिल्म को देखकर ही उसने भागने का कदम उठाया और उसके #गर्भवती की वजह भी यही फिल्म है।

अनैतिकता को बढावा देनेवाली फिल्मों का परिणाम बतानेवाली यह घटना है । समाज को आज #नैतिकता का पाठ पढाने की कितनी अावश्यकता है, यह ध्यान में आता है ।

आपको बता दें कि #बॉलीवुड में केवल और केवल भारतीय संस्कृति को खत्म करने की साजिश चल रही है और उसको समर्थन कर रहा है सेंसर बॉर्ड क्योंकि हिन्दू विरोधी फिल्में, अश्लीलता भरी फिल्में, डकैती, लूट-पाट आदि भारतीय संस्कृति विरोधी #फिल्में सेंसर बोर्ड तुंरत ही पास करता है लेकिन भारतीय संस्कृति की दिव्यता वाली फिल्में पास करने में सेंसर बोर्ड तुरन्त मना ही कर देता है।

जैसे PK फिल्म, रईस फिल्म आदि सेंसर बोर्ड ने पास कर दी लेकिन #महाराणा प्रताप, राजा भृतहरि आदि फिल्मों पर बेन लगा दिया ।

अभी हाल ही में आई भोजपुरी फिल्म "#बाबरी मस्जिद" बनी है उसको सेंसर बोर्ड ने बैन लगा दिया । 

जहां एक तरफ घोर हिन्दू विरोधी #PK जैसी फिल्मों को अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक मान कर बड़े बड़े मल्टीप्लेक्सों में महीनों चलाया गया वहीं दूसरी तरफ समुदाय विशेष की भावनाओं की बात आते ही मां केला देवी फिल्म के बैनर तले बनी $भोजपुरी फिल्म "बाबरी मस्जिद" को सेंसर बोर्ड ने बैन कर दिया ।

समुदाय विशेष की भावनाओं का ख्याल इस कदर घर कर गया सेंसर बोर्ड के मन में कि उस फिल्म को सिर्फ उसके #कंटेंट के चलते बैन कर दिया गया ।

 ₹सेंसर बोर्ड ने फिल्म को हरी झंडी नहीं देने की वजह बताते हुए कहा कि इस फिल्म की वजह से कम्युनल (सांप्रदायिक) भावना भड़कने का खतरा हैं । जिससे #सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है । सेंसर बोर्ड को इस फिल्म के नाम से भी आपत्ति है पर रामलीला जैसी फिल्मों को पास करने में कोई आपत्ति नहीं ।

इतिहास में शायद ऐसा पहली बार है जब सेंसर बोर्ड ने इतनी तेजी दिखाते हुए बिना किसी से पूछे और बिना विरोध प्रदर्शन आदि के भी किसी #भोजपुरी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इन्कार करते हुए उसे बैन किया है । इतिहास में शायद पहली बार सेंसर बोर्ड को इस प्रकार धार्मिक भावनाओं की चिंता हुई है । 

सरकार तो बदल गई लेकिन पता नही क्यों सेंसर बोर्ड नही बदल रहा है..?

जबकि #बॉलीबुड के अंदर रहें, कई हस्तियों ने पोल भी खोली है लेकिन उनकी बात को दबाया जाता है।

अभिजीत ने तीनों खानों को कहा 'देशद्रोही' !!

अभी हाल ही में एक #न्यूज #चैनल में बात करते हुए सिंगर अभिजीत ने कहा 'तीनों खान (आमिर खान, #शाहरुख खान, सलमान खान) देशद्रोही बातें करते हैं। अपनी फिल्मों में इन्होंने धीरे-धीरे हिन्दू त्यौहारों से जुड़े गानों को बंद कर दिया अब हर जगह 'मौला' ही बजता है।'' उन्होंने महेश भट्ट को भी #देशद्रोही बताया था ।


एक्ट्रेस रश्मि मिश्रा ने खोली बॉलीवुड की पोल !!

रश्मि ने कहा कि बॉलीवुड में #स्ट्रगल और कैरेक्टर की डिमांड ऐसी दो वजह हैं, जिनके कारण 60 फीसदी लड़कियां अपना टेलेंट भूल लौट जाती हैं।

रश्मि ने #बॉलीवुड में कास्टिंग काउच के मुद्दे पर इंडस्ट्री की पोल भी खोली। उन्होंने कहा, बहुत से लोग यही चाहते हैं, कुछ पैसा भी चाहते हैं। वे पार्टियों में बुलाते हैं, फिर घर पर बुलाने लगते हैं। हां इनसे जो लड़की बच जाती है वो अपने टेलेंट के बल पर आगे बढ़ जाती है। जो स्ट्रगल नहीं कर सकती वो लौट जाती है और कुछ वो सब कर लेती हैं जो #इंडस्ट्री के कुछ कथित लोग चाहते हैं।

बॉलीवुड पार्टीज के ये राज जानकर हैरत में पड़ जायेंगे आप !!

1 - लेट नाईट 11 बजे के बाद शुरू होती है हर पार्टी, ताकि कोई देखे न और बेवजह उनके लिंकअप्स की खबरें सुर्खियों में न आएं ।

2 - मीडिया को नहीं मिलती है एंट्री क्योंकि कोई नहीं चाहता कि #बॉलीवुड के अंदरखाने की कोई भी खबर किसी भी तरीके से पब्लिक तक पहुंचे । 

3 - शराब, सेक्स और शबाब की बातें पार्टी में बिंदास होती हैं । इसमें #शराब और सेक्स के टॉपिक पर लोग एक दूसरे से खुल कर बात करते हैं । इन पार्टीज को लेकर एक बार रणधीर कपूर ने खुद खुलासा किया था । 

उनका कहना था, कपूर खानदान में बड़ी से बड़ी #सेलिब्रिटीज आती हैं और इन पार्टियों में शराब, #सेक्स, #नॉन वेज जोक्स और महिलाओं की बातें होती हैं । बॉलीवुड किंग खान और प्रियंका चोपड़ा के अफेयर आदि के किस्से भी इन्हीं पार्टियों की ही देन है । ये है बॉलीवुड पार्टीज के गन्दे राज राज।


श्री सुरेश चव्हाणके ने खोली #षड्यंत्र की पोल 

कुछ दिन पहले सुदर्शन न्यूज चैनल के #चैयरमेन श्री सुरेश #चव्हाणके ने बताया था कि आज सभी ईसाई, मुसलमान एवं खाडी देशों ने अपने पैसों का निवेश दूरचित्रवाहिनियों में किया है; इसलिए इस माध्यम से #‘हिन्दू धर्म’ को अपकीर्त किया जा रहा है। #हिन्दू #साधु एवं #संतों की विश्वसनीयता समाप्त करने का कार्य भी नियोजनबद्ध पद्धति से चल रहा है। यह ‘हिन्दू धर्म’ के विरोध में चलाया जा रहा षडयंत्र है ! ‘

संस्कारहीन #धारावाहिकों का प्रसारण कर समाज को पतन की ओर ले जाने का कार्य आज की इन वाहिनियोंद्वारा किया जा रहा है। आज की वाहिनियां दर्शकों को ‘बलि का बकरा’ बना रही हैं; परंतु #सुदर्शन वाहिनी दर्शकों को बाघ बनाने का काम करनेवाली है। देश में हिंदुत्व एवं क्रांति के विचार पहुंचाने का काम सुदर्शन वाहिनी द्वारा किया जाएगा। 

अतः हिंदुस्तानी सावधान !!

भारतीय #संस्कृति को खत्म करने के लिए बॉलीबुड और #मीडिया में विदेशी लोगों द्वारा पैसा निवेश किया जा रहा है। जिसके जरिये देशवासियों का ब्रेन वॉश करके फिर से देश को गुलाम बनाया जा सकें ।

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