Tuesday, May 2, 2017

"गुजरात समाचार" न्यूज पेपर का लोग कर रहे बहिष्कार, बोले पाकिस्तानी पेपर है

*"गुजरात समाचार" न्यूज पेपर का लोग कर रहे बहिष्कार, बोले पाकिस्तानी पेपर है...*
2 मई 2017

सुकमा में हमारे देश के #जवानों पर जो हुआ उससे पूरे भारत की जनता #दुःखी हुई लेकिन 
कुछ लोग हिंदुस्तान का ही #अन्न खाकर पाकिस्तान का गुणगान गाने वाले भी हैं जो #खुशियाँ मना रहे हैं ।
गुजरात समाचार

अहमदाबाद से प्रकाशित #न्यूज पेपर "गुजरात समाचार" ने मुख्य पेज पर सबसे ऊपर बड़ा #हेडिंग छापा था कि " छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने 26 जवानों को फूंकी मार्या" अर्थात नक्सलियों ने हमारे 26 जवानों को फूंक (जला) दिया ।

इस तरह की भाषा प्रयोग करने पर जनता की #भावनाओं को बड़ी भारी आहत पहुँची है ।

उसमें कई #देशप्रेमियों ने घर पर बोर्ड लगा दिया है कि गुजरात समाचार #कुत्ता है हम घर में रहने की #परमीशन नहीं देते हैं, कई #एफआईआर करवा रहे हैं तो कई लोग उसको फोन कर रहे हैं और कई #सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर देश की जनता को #अपील कर रहे हैं कि गुजरात समाचार का #बहिष्कार करो ।

मुम्बई से विनोद बारोट की एक वीडियो वायरल हो रही है उसमें उन्होंने #सख्त गुस्सा करते हुए कहा है कि गुजरात समाचार ने हमारे देश के शहीद जवानों के लिए इतनी #घटिया भाषा का प्रयोग किया है इससे तो लगता है कि ये पेपर भारत में नहीं #बल्कि पाकिस्तान की #कराची में छप रहा है ।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे एक भाई ने #मैनेजिंग तंत्री श्रेयंस शाह को फोन किया तो उन्होंने बताया कि इन जवानों को #शहीद नहीं बोला जायेगा इनको तो #फूंकी मार्या (जला दिया ) ही बोला जाएगा इस भाषा से आहत होकर #विनोद बरोट ने एफआईआर भी करवायी है और #देशवासियों को कहा है कि इस #पेपर को अब अपने घर में कोई नहीं #मँगवाये मै तो इस पेपर को आज से #जला देता हूँ और कभी घर में नहीं मँगवाऊँगा ।

ओम 


ओम 
जिगर मेहता ने भी #सोशल मीडिया में एक वीडियो #अपलोड किया है उसमें उन्होंने #गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा है कि मेरे #देश के जवान घर-बार छोड़कर देश की रक्षा करते हुए हुए #शहीद हो गए हैं और 26 परिवार बर्बाद हो गए हैं और #गुजरात समाचार बोलता है कि #फूंकी मार्या । क्या समझ रहा है गुजरात समाचार? इस न्यूज पेपर की इतनी #हिम्मत कैसे हुई? हमारे जवानों के खिलाफ #लिखने की । गुजरात समाचार न्यूज पेपर का #बहिष्कार करो ये भारत का नहीं पाकिस्तान का न्यूज पेपर लगता है, देश के जवानों के शहीद होने पर पाकिस्तान से भी अधिक #खुश गुजरात समाचार हुआ है, इसने #हमारे देश का और देश की रक्षा करने वाले जवानों का अपमान किया है, अब हम #सहन नही करेंगे और मैं देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस देशविरोधी गुजरात समाचार #न्यूज पेपर का बहिष्कार करें ।

इस तरीके से अनेक लोग गुजरात समाचार का #बहिष्कार कर रहे थे ।

ऐसे एक-दो न्यूज चैनल नहीं बल्कि ऐसे कई न्यूज #चैनल हैं जो खाते है #हिन्दुस्तान का अन्न लेकिन गुणगान गाते हैं #पाकिस्तान का, नही तो जिस पाकिस्तान को हमारी सेना कई बार #धूल चटा चुकी हो उसकी औकात नही वो हमारे देश के सामने #आँख उठाकर भी देखे..

लेकिन पाकिस्तान ने अपने #हमदर्द कुछ सपोले भारत में पाल रखे हैं, इनकी #गद्दारी पाकिस्तान को मजबूती प्रदान करती है..

गड़बड़ वहाँ नही,यहाँ बैठकर पाकिस्तान का गुणगान कर रहे है गड़बड़ उनमें है ।

दो- दिन पहले #आजतक का ऑनलाइन अखबार पढ़ा उसमें लिखा था कि AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी #देशभक्त है और उनके समर्थन में कई बातें #लिखी थी । अब सवाल उठता है कि जो भारत माता की जय बोलने पर भी #इंकार करता है कि मेरा गला #काट दो लेकिन भारत माता की #जय नही बोलूँगा उसको आजतक अखबार #देशभक्त बता रहा है ।

वहीं दूसरी ओर #हिन्दू साधु-संतों, हिंदुत्वनिष्ठ #कार्यकर्ता जो देश में सुख-शांति और #समृद्धि के लिए दिन रात अथाह प्रयास करते हैं उनको #बदनाम करती है और उनके लिए ये घटिया #शब्दों का इस्तेमाल करती है ।

इससे पता चलता है कि अधिकतर #भारतीय मीडिया विदेशी #फंड से चलती है जो हमारे देश के जवानों, देश के हिन्दू साधु-संतों, हिंदुत्वनिष्ठ #कार्यकर्ताओं को बदनाम करती है और जो #देश विरोधी हैं उनका समर्थन करती है ।

अभी JNU में भी #सुकमा हमले के शहीद जवानों को एक प्रोफेसर ने #श्रद्धांजलि दी तो उन पर JNU के कुछ #स्टूडेंटों ने हमला किया फिर भी #मीडिया JNU के स्टूडेंट्स का ही पक्ष लेगी देशभक्त प्रोफेसर का नहीं ।

पाठक अब समझ गए होंगे कि भारतीय मीडिया #विदेशी फंड से चलती है जो #हिन्दुत्वनिष्ठों को बदनाम करके फिर से भारत को गुलाम बनाने की ओर जा रही है अतः हर #हिन्दुस्तानी सावधान रहें, देशविरोधी न्यूज चैनलों और पेपर का #बहिष्कार करें केवल #राष्ट्रवादी न्यूज चैनल ही देखें ।

जय हिन्द!!

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Monday, May 1, 2017

माँ गंगा के पौराणिक इतिहास एवं महत्ता


माँ गंगा जयंती : 2 मई

पौराणिक कथा के अनुसार राजा सगर ने #तपस्या करके साठ हजार पुत्रों की प्राप्ति की। एक दिन राजा #सगर ने देवलोक पर विजय प्राप्त करने के लिये एक #यज्ञ किया। यज्ञ के लिये #घोड़ा आवश्यक था जो #ईर्ष्यालु इंद्र ने चुरा लिया था। 
Ganga Jayanti

सगर ने अपने सारे पुत्रों को घोड़े की खोज में भेज दिया अंत में उन्हें घोड़ा #पाताल लोक में मिला जो एक #ऋषि के समीप बँधा था। सगर के पुत्रों ने यह सोच कर कि ऋषि ही घोड़े के #गायब होने की वजह हैं उन्होंने ऋषि का अपमान किया। तपस्या में #लीन ऋषि ने हजारों वर्ष बाद अपनी आँखें खोली और उनके क्रोध से सगर के सभी साठ हजार पुत्र जल कर वहीं #भस्म हो गये।

सगर के पुत्रों की #आत्माएँ भूत बनकर विचरने लगीं क्योंकि उनका #अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। सगर के पुत्र #अंशुमान ने आत्माओं की मुक्ति का #असफल प्रयास किया और बाद में अंशुमान के पुत्र #दिलीप ने भी। 

भगीरथ राजा दिलीप की #दूसरी पत्नी के पुत्र थे। उन्होंने अपने #पूर्वजों का अंतिम संस्कार किया। उन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रण किया जिससे उनके #अंतिम संस्कार कर, राख को गंगाजल में #प्रवाहित किया जा सके और भटकती आत्माएं #स्वर्ग में जा सकें। भगीरथ राजा ने ब्रह्मा की घोर तपस्या की ताकि गंगा को #पृथ्वी पर लाया जा सके। ब्रह्मा प्रसन्न हुये और गंगा को पृथ्वी पर भेजने के लिये तैयार हुये और गंगा को पृथ्वी पर और उसके बाद #पाताल में जाने का आदेश दिया ताकि सगर के पुत्रों की आत्माओं की मुक्ति संभव हो सके। 

तब गंगा ने कहा कि मैं इतनी ऊँचाई से जब पृथ्वी पर #गिरूँगी, तो पृथ्वी इतना #वेग कैसे सह पाएगी? तब भगीरथ ने भगवान ₹शिव से निवेदन किया और उन्होंने अपनी खुली #जटाओं में गंगा के वेग को रोक कर, एक लट खोल दी, जिससे गंगा की अविरल धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई। वह धारा भगीरथ के पीछे-पीछे गंगा सागर #संगम तक गई, जहाँ सगर-पुत्रों का #उद्धार हुआ। शिव के स्पर्श से गंगा और भी पावन हो गयी और पृथ्वी #वासियों के लिये बहुत ही श्रद्धा का केन्द्र बन गयीं। 

भारत की सबसे #महत्वपूर्ण नदी गंगा जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर 2,510 किमी की दूरी तय करती हुई #उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के #सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नही, जन जन की #भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2,071 कि.मी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर #क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से #अत्यंत महत्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100 फीट (31 मी) की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में #पवित्र मानी जाती है तथा इसकी #उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है। #भारतीय पुराण और साहित्य में अपने #सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ #वंदित गंगा नदी के प्रति विदेशी साहित्य में भी #
प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं।

गंगा नदी पर बने पुल, बाँध और नदी #परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से संबन्धित जरुरतों को पूरा करती हैं। 

भागीरथी नदी गंगोत्री में

गंगा नदी की #प्रधान शाखा भागीरथी है जो #कुमायूँ में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर #गंगोत्री हिमनद से निकलती है।  गंगा के इस उद्गम स्थल की #ऊँचाई 3140 मीटर है। यहाँ गंगा जी को समर्पित एक #मंदिर भी है।

गंगोत्री तीर्थ, शहर से 19 कि.मी. उत्तर की ओर 3892 मी.(12,770 फी.) की ऊँचाई पर इस #हिमनद का मुख है। यह हिमनद 25 कि.मी. लंबा व 4 कि.मी. चौड़ा और लगभग 40 मी. ऊँचा है। इसी #ग्लेशियर से भागीरथी एक छोटे से #गुफानुमा मुख पर अवतरित होती है। इसका जल #स्रोत 5000 मी. ऊँचाई पर स्थित एक बेसिन है। इस #बेसिन का मूल पश्चिमी ढलान की संतोपंथ की चोटियों में है। गौमुख के रास्ते में 3600 मी. ऊँचे चिरबासा ग्राम से विशाल #गोमुख हिमनद के दर्शन होते हैं। इस हिमनद में नंदा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम #पिघल कर आता है। यद्यपि गंगा के आकार लेने में अनेक छोटी #धाराओं का योगदान है लेकिन 6 बड़ी और उनकी सहायक 5 छोटी धाराओं का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व अधिक है। 

अलकनंदा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। धौली गंगा का अलकनंदा से #विष्णु प्रयाग में संगम होता है। यह 1372 मी. की ऊँचाई पर स्थित है। फिर 2805 मी. ऊँचे नंद प्रयाग में #अलकनन्दा का #नंदाकिनी नदी से संगम होता है। इसके बाद कर्ण प्रयाग में अलकनन्दा का कर्ण गंगा या पिंडर नदी से #संगम होता है। 

फिर #ऋषिकेश से 139 कि.मी. दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मंदाकिनी से मिलती है। इसके बाद भागीरथी व अलकनन्दा 1500 फीट पर स्थित #देव प्रयाग में संगम करती हैं यहाँ से यह सम्मलित जल-धारा गंगा नदी के नाम से आगे प्रवाहित होती है। इन पांच प्रयागों को सम्मलित रूप से #पंच प्रयाग कहा जाता है।इस प्रकार 200 कि.मी. का #संकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश होते हुए प्रथम बार मैदानों का #स्पर्श हरिद्वार में करती है।

त्रिवेणी-संगम, प्रयाग

हरिद्वार से लगभग 800 कि.मी. #मैदानी यात्रा करते हुए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा #इलाहाबाद (प्रयाग) पहुँचती है। यहाँ इसका संगम #यमुना नदी से होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है। इसके बाद हिन्दू धर्म की प्रमुख #मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी) में गंगा एक वक्र लेती है, जिससे यह यहाँ #उत्तरवाहिनी कहलाती है। यहाँ से मीरजापुर, पटना, भागलपुर होते हुए पाकुर पहुँचती है। इस बीच इसमें बहुत-सी सहायक #नदियाँ, जैसे सोन, गंडक, घाघरा, कोसी आदि मिल जाती हैं। भागलपुर में #राजमहल की पहाड़ियों से यह दक्षिणवर्ती होती है। पश्चिम बंगाल के #मुर्शिदाबाद जिले के गिरिया स्थान के पास गंगा नदी दो शाखाओं में #विभाजित हो जाती है-भागीरथी और पद्मा। भागीरथी नदी गिरिया से दक्षिण की ओर बहने लगती है जबकि पद्मा नदी दक्षिण-पूर्व की ओर बहती #फरक्का बैराज (1974 निर्मित) से छनते हुई बंगला देश में प्रवेश करती है। यहाँ से गंगा का #डेल्टाई भाग शुरू हो जाता है। मुर्शिदाबाद शहर से #हुगली शहर तक गंगा का नाम भागीरथी नदी तथा हुगली शहर से मुहाने तक गंगा का नाम #हुगली नदी है। गंगा का यह मैदान मूलत: एक भू-अभिनति गर्त है जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय #पर्वतमाला निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में लगभग 3-4 #करोड़ वर्ष पहले हुआ था। तब से इसे #हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ लाये हुए अवसादों से पाट रही हैं। इन मैदानों में #जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है। इस मैदान में नदी की #प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और निक्षेपण स्थलाकॄतियाँ, जैसे- बालू-रोधका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं।

गंगा की इस #घाटी में एक ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ जिसका #प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और #वैभवशाली है। जहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त #संसार आलोकित हुआ। 

पाषाण या #प्रस्तर युग का जन्म और विकास यहाँ होने के अनेक #साक्ष्य मिले हैं। इसी घाटी में #रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विलय हुआ। शतपथ ब्राह्मण, पंचविश ब्राह्मण, गौपथ ब्राह्मण, ऐतरेय आरण्यक, कौशितकी आरण्यक, सांख्यायन आरण्यक, वाजसनेयी संहिता और #महाभारत इत्यादि में वर्णित घटनाओं से #उत्तर वैदिककालीन गंगा घाटी की जानकारी मिलती है। प्राचीन मगध महाजनपद का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ जहाँ से #गणराज्यों की परंपरा विश्व में पहली बार प्रारंभ हुई। यहीं भारत का वह स्वर्ण युग विकसित हुआ जब मौर्य और गुप्त वंशीय राजाओं ने यहाँ #शासन किया।


सुंदरवन-विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा-गंगा का #मुहाना-बंगाल की खाड़ी में है ।

हुगली नदी कोलकाता, हावड़ा होते हुए #सुंदरवन के भारतीय भाग में सागर से #संगम करती है। #पद्मा में ब्रह्मपुत्र से निकली शाखा नदी जमुना नदी एवं मेघना नदी मिलती हैं। अंततः ये 350 कि.मी. चौड़े सुंदरवन डेल्टा में जाकर #बंगाल की खाड़ी में सागर-संगम करती है। यह #डेल्टा गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई नवीन #जलोढ़ से 1,000 वर्षों में निर्मित समतल एवं निम्न मैदान है। यहाँ #गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है जिसे #गंगा-सागर-संगम कहते हैं।


गोमुख पर शुद्ध गंगा

गंगा नदी विश्व भर में अपनी #शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है। लंबे समय से प्रचलित इसकी शुद्धीकरण की मान्यता का #वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में #बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी के जल में #प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा को बनाए रखने की #असाधारण क्षमता है। किंतु इसका कारण अभी तक अज्ञात है। एक राष्ट्रीय सार्वजनिक #रेडियो कार्यक्रम के अनुसार इस कारण हैजा और पेचिश जैसी #बीमारियाँ होने का खतरा बहुत ही कम हो जाता है, जिससे #महामारियाँ होने की संभावना बड़े स्तर पर टल जाती है। 

लेकिन गंगा के तट पर घने बसे #औद्योगिक नगरों के #नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी में मिलने से गंगा का प्रदूषण पिछले कई सालों से #चिंता का विषय बना हुआ है। औद्योगिक कचरे के साथ-साथ #प्लास्टिक कचरे की #बहुतायत ने गंगा जल को भी बेहद प्रदूषित किया है। 

वैज्ञानिक जांच के अनुसार गंगा का #बायोलाजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री (सामान्य) से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है। 

गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा #प्रतिदिन गिर रहा है।  यह घोर #चिन्तनीय है कि कब गंगा-जल की सफाई पूर्ण होगी । गंगा नदी की सफाई के लिए कई बार पहल की गयी लेकिन कोई भी #संतोषजनक स्थिति तक नहीं पहुँच पाया। 

वाराणसी घाट 

भारत की अनेक #धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया गया है। बहुत से पवित्र #तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं । जिनमें वाराणसी और #हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है एवं  गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे #पापों का नाश हो जाता है । गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त #संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक #अमृत माना गया है। 

महाभारत के अनुसार मात्र प्रयाग में माघ मास में #गंगा-यमुना के संगम पर तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का संगम होता है। ये तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में #सांस्कृतिक एकता स्थापित करते हैं। 

माँ गंगा की अपार महिमा

भारत की राष्ट्र-नदी गंगा जल ही नहीं, अपितु भारत और #हिंदी साहित्य की #मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करती है। ऋग्वेद, महाभारत, रामायण एवं अनेक पुराणों में #गंगा को पुण्य सलिला, पाप-नाशिनी, मोक्ष प्रदायिनी, सरित्श्रेष्ठा एवं महानदी कहा गया है।

जैसे मंत्रों में #ॐकार, स्त्रियों में #गौरीदेवी, तत्वों में #गुरुतत्व और विद्याओं में #आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में #गंगातीर्थ विशेष माना गया है । गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :

संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते । तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः ।।

‘देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली हैं । आप जीवनरूपा हैं । आप आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है ।’  

(स्कंद पुराण, काशी खं. पू. : 27.160)

जिस दिन #गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी - 2 मई) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर #अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी - 4 जून) के नाम से जाना जाता है । इन दिनों में गंगाजी में #गोता मारने से विशेष #सात्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है । वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की #अमावस्या तथा #कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष #पुण्यलाभ होता है ।

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जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय

🚩 जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय

30 अप्रैल 2017

🚩रविवार को ट्वीटर पर #BiasedJustice हैशटैग टॉप ट्रेंड में चल रहा था जिसके द्वारा जनता का आक्रोश देखते ही बनता था ।

🚩सबकी एक ही आवाज थी कि नेताओं, अभिनेताओं, अमीरों, पत्रकारों को अपराध साबित होने पर भी जमानत आसानी से मिल जाती है लेकिन आज भी देशभर की जेलों में बहुत सारे निर्दोष लोग ऐसे हैं जो बिना सबूत सालों से जेल में बन्द है लेकिन उनको जमानत तक नही मिल पा रही है। 

#BiasedJustice
🚩आइये जाने कि क्या कहना चाहते हैं ये लोग...

🚩1.पूनम राजपूत लिखती हैं कि क्या #BiasedJustice से ऐसा नहीं लगता, जैसे लोकशाही में लोकतंत्र व मानवाधिकारों का हनन हो रहा है?

🚩2 - आशी मोंगा का कहना है कि ऐसा कानून किस काम का जो सत्ता व धन के आगे लाचार हो जाए! फिर न्याय कौन करेगा? #BiasedJustice
🚩3.गार्गी लिखती हैं कि हीरो को छींक भी आये तो बेल; वही भयंकर बीमारी से त्रस्त संत आसारामजी बापू को अब तक जेल! #BiasedJustice
🚩4. सलोना लिखती हैं कि जब NIA ने कहा कि दक्षिणपंथी संगठन का मालेगांव के धमाके में हाथ, तो कर्नल पुरोहित को बेल क्यों नहीं?? #BiasedJustice
 🚩5. प्रेम चौधरी ने शिवसेना के Sanjay Raut का बयान लेकर लिखा कि 100 गुनहगार भले छूट जायें पर 1 बेगुनाह को सजा नही हो, फिर संत आशारामजी बापू को जेल क्यो? #BiasedJustice


🚩6. किरण राजदेव का कहना है कि 9 साल से साध्वी प्रज्ञा जी को बिना सबूत सजा दी गई, क्या उनका सम्मान, स्वास्थ्य व समय कोई लौटा पाएगा? #BiasedJustice


🚩7.राघवेंद्र ने लिखा कि बड़े से बड़े आपराधियों को बेल ले कर छूटते देखा है, पर दोष सिद्ध न होने पर भी निर्दोष Asaram Bapu Ji को जेल क्यों?
#BiasedJustice
🚩8.स्वाति लिखती हैं कि पैसे के बल पर अपराधी आजादी पा रहे!
निर्दोष हिन्दू संत झूठे आरोपों में जेल पा रहे!! #BiasedJustice
🚩9.मोहिनी शर्मा कहती हैं कि हीरो ,नेता Fake Medical Certificate बनाकर लेते बेल,
वही बीमार संत आसाराम 
जी बापू को अब तक जेल ?? #BiasedJustice
🚩10 - अमृत प्रजापति ने लिखा कि इंसानो में तो भेदभाव हो ही रहा है, अब क्या इंसाफ में भी भेदभाव करेगा क्या यह देश का संविधान? #BiasedJustice
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🚩11. भावेन उतरेजा लिखते हैं कि Asaram Bapu Ji को अभी तक न्याय न देकर कानून का स्पष्ट पक्षपात जनता के सामने है! #BiasedJustice

🚩इस तरह से हजारों ट्वीट्स द्वारा जनता न्यायप्रणाली से तरह-तरह के सवाल कर रही है।

🚩क्या इसका कोई जवाब है न्याय तंत्र के पास ???

🚩गौरतलब है कि रेप आरोपी पत्रकार तरुण तेजपाल, विजय माल्या, 950 करोड़ चारा घोटालेबाज लालू प्रसाद यादव, , #बोफोर्स_घोटाला, कॉमनवेल्थ_गेम्स_घोटाला,  2जी_स्पेक्ट्रम_घोटाला, अनाज घोटला, कोयला घोटाला आदि आदि अरबो-खरबों के बड़े बड़े घोटालेबाज तो आराम से बाहर घूम रहे हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर अभीतक एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है वह शंकरचार्य अमृतानन्द जी, कर्नल पुरोहित, संत आसारामजी बापू, श्री नारायण साईं, धनंजय देसाई आदि आदि हिंदुत्वनिष्ठ बिना सबूत सालों से जेल में हैं जबकि इन सभी हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसाने के सैकड़ों सबूत भी मिल चुके हैं । उसके बावजूद भी कोर्ट द्वारा इन्हें जमानत तक नहीं दी जा रही है ।

🚩आपको बता दें कि दो दिन पहले शुक्रवार को भी ट्वीटर पर लोगों का ऐसे ही गुस्सा फूटा था और उन्होंने #पक्षपाती_न्यायव्यवस्था हैशटैग द्वारा हजारों ट्वीट्स की थी ।

🚩अब देखना ये है इन हजारों-लाखों लोगों की आवाज सरकार और न्यायालय कब सुनती है ??? 

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Saturday, April 29, 2017

राक्षसों और विधर्मियों के लिए भगवा बहुत बड़ा हथियार है : साध्वी प्रज्ञा

राक्षसों और विधर्मियों के लिए भगवा बहुत बड़ा हथियार है : साध्वी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जमानत मिलने पर बाहर आ गई है और जिन्होंने हिन्दुओं को खत्म करने के लिए एक प्लान बनाया था जिसमें सबसे पहले हिन्दू साधु-संतों एवं हिन्दू नेताओं को फँसाकर खत्म करने की रणनीति बनाई थी जिसका नाम दिया था "भगवा आतंकवाद" इसकी सच्चाई साध्वी जी ने प्रेस #कॉन्फ्रेंस करके मीडिया के सामने बताई ।
#SadhviPragya

साध्वी प्रज्ञा ने मीडिया को संबोधित किया और कांग्रेस के #षड्यंत्र को उजागर किया | उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह से निर्दोष थी और कांग्रेस ने साजिश के तहत मुझे फँसाया था | उन्होंने मुझे 9 साल तक जेल में रखकर बहुत प्रताड़ित किया | मुझे इतना मारा कि मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गयी और मुझे कैंसर हो गया ।

साध्वी ने #मुंबई के कई पुलिस अधिकारियों का नाम लेते हुए बताया कि इन्होंने मुझे इतना प्रताड़ित किया जितना आजाद भारत से पहले और #आजाद भारत के बाद किसी भी स्त्री को प्रताड़ित नहीं किया गया होगा । उन्होंने कहा कि मुझे प्रताड़ित करने वालों में हेमंत करकरे, परमवीर सिंह भी थे | परमवीर सिंह इस वक्त थाणे के पुलिस #कमिश्नर हैं जबकि हेमंत करकरे मुंबई 26/11 हमले में मारा गया था ।

साध्वी ने कहा कि #कांग्रेस मुझे प्रताड़ित करवाकर मारना चाहती थी ताकि वे लोग भगवा #आतंकवाद की #परिभाषा गढ़ सकें, लेकिन इनकी ये कोशिश कामयाब नहीं हो पाई | इन लोगों ने मुझे मार-मारकर बीमार जरूर बना दिया लेकिन ये लोग मेरी #आत्मा, मेरे विश्वास को नहीं तोड़ पाए और आज मैं आप लोगों के सामने हाजिर हूँ ।

जब उनसे भगवा #आतंकवाद के बारे में पूछा गया तो साध्वी ने कहा कि कांग्रेस के तात्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की परिभाषा गढ़ी थी और मुझे फंसाने की साजिश की थी लेकिन कोर्ट में इतना तो साबित हो गया कि कोई भगवा आतंकवाद नहीं होता | उन्होंने पी. चिदम्बरम को विधर्मी और राक्षस बताते हुए कहा कि जो राक्षस और विधर्मी होते हैं वे भगवा से बहुत डरते हैं | इसलिए उनके लिए तो भगवा आतंकवादी ही होगा ना और उन्हें डरना भी चाहिए क्योंकि #राक्षसों के लिए ये भगवा बहुत बड़ा हथियार है।

उन्होंने कहा कि 9 साल तक मुझे लगातार प्रताड़ित किया | इससे ये तो निश्चित हो गया कि यह कांग्रेस का #षड्यंत्र था, पर मुझे भरोसा है कि अब मेरे साथ न्याय होगा ।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि पहले मैं पूरी तरह से ठीक थी और फिजिकली ट्रेंड भी थी लेकिन आज मैं बीमार हूँ, मुझे #कैंसर है, तो इसका कारण है ATS, #मुंबई | इन्होंने मुझे 9 दिन तक गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाकर इतना प्रताड़ित किया था, मुझे इतना मारा था कि मेरे फेफड़ों की झिल्ली फट गयी और मुझे कैंसर हो गया, उस वक्त पांच दिन तक मैं वेंटीलेटर पर थी | उस वक्त उन्होंने मुझे #शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया | लेकिन आत्मिक तौर पर वे मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाए | मैं सिर्फ अपने आत्मबल से आप लोगों के सामने हूँ | वरना कांग्रेसियों ने मुझे ख़त्म करने का पूरा प्रयास किया था ।

आपको बता दें कि जॉइंट #इंटेलीजेंसी कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस.डी. प्रधान ने देश में भगवा आतंक की थ्योरी को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। 

उन्होंने भी स्पष्ट बताया है कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट, #इशरतजहाँ मामला का पहले से ही हमें पता था और अमेरिकन खुफिया विभाग ने भी बताया था कि ये सब घटनाएं होने वाली थी और ये पाकिस्तान करवा रहा है और हमने तात्कालीन #गृहमंत्री पी.चिदंबरम को बताया भी था लेकिन उन्होंने राजनैतिक फायदे के लिए भगवा #आतंकवाद सिद्ध करने के लिए #डी.जी.वंजारा, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी #असीमानन्द, #शंकराचार्य अमृतानन्दजी, कर्नल पुरोहित और बाद में संत आसारामजी बापू और उनके बेटे को जेल भेजा गया था ।

आपको बता दें कि साध्वी की शुरुआत बेहद डरावनी थी ।  पहले उसे 10 पुलिसवालों ने घेरकर मारना शुरू किया, कोई #घूंसे से, कोई बेल्ट से, कोई बूट से ... फ़िर एक पुलिसवाला उस साध्वी के गले में रुद्राक्ष की माला देखता है जिस पर #सूर्यदेव का प्रतीक लगा होता है, गले पर हाथ रखकर वो रुराक्ष की माला को तोड़ देता है और बोलता है कि बुला अपने शिव या सूर्य को उनकी भी ऐसी की तैसी कर दूगा मैं ।

फ़िर दूसरा पुलिसवाला उस साध्वी के झोले को जमीन पर पटक देता है, उस झोले से श्रीमद #भगवतगीता की पवित्र पुस्तक निकलकर बाहर आती है । वो पुलिसवाला उस साध्वी के बाल पकड़कर कहता है कि इसी मनहूस किताब ने दुनिया और तेरे अंदर भगवा का जहर घोल रखा है | फिर वही #पुलिसवाला गीता के एक-एक पन्ने को फाड़कर राक्षसों की तरह हंसकर कहता है कि- बुला द्रौपदी ! बुला अपने कृष्ण को । उस #साध्वी की रीढ की हड्डी टूटी, फेफ़डे की झिल्ली फटी… गीता फाड़ने,
रुद्राक्ष तोड़ने, बूट चलानेवाले आज भी इसी संसार में हैं, पूरी तरह सुखी और संपन्न हैं। आजादी के बाद सबसे #भीषण प्रताड़ना झेलने वाली नारी साध्वी #प्रज्ञा का बुरहान की गोली और याकूब की फांसी की चिंता करनेवालों को कभी हजारों चीखों में से एक आह भी नहीं सुनाई दी, 

कितना बड़ा आश्चर्य का विषय है !!

आपको बता दें कि जो भी हिन्दू साधु #संत या कायकर्ता #ईसाई #धर्मान्तरण पर रोक लगाते थे उनको वेटिकन सिटी के संकेत पर सोनिया गांधी ने सभी निर्दोष #हिन्दू #सन्तों को अपना निशाना बनाया था । 

ये सभी संत हिन्दू संस्कृति का परचम लहराने वाले और #धर्मान्तरण के विरोधी रहे हैं ।

जागो हिन्दू !!

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Friday, April 28, 2017

अहमदाबाद में 7 वर्ष की बच्ची के साथ मदरसा के मौलवी ने किया रेप, मीडिया ने साधी चुप्पी

अहमदाबाद में 7 वर्ष की बच्ची के साथ मदरसा के मौलवी ने किया रेप, मीडिया ने साधी चुप्पी

प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो, किसी हिन्दू साधु-संत के ऊपर आरोप लगते ही उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चालू कर देती है जैसे कि उनके ऊपर आरोप सिद्ध ही हो चुका हो ।
rape by maulvi

लेकिन वहीं दूसरी ओर इस्लाम धर्म के मौलवियों या ईसाई धर्म के पादरियों पर जब आरोप लगता है तो मीडिया कहीं पर भी कोई खबर प्रसारित नही करती ।

गुजरात अहमदाबाद ईसनपुर इलाके में 27 अप्रैल 2017 (गुरुवार) को मदरसे में गरीब परिवार की नाबालिग सात वर्षीय बच्ची सुबह पढ़ने गई थी, उस समय 27 वर्षीय मौलवी #महम्मद मुज्जफर हुसैन शेख बच्ची के पास आया और उसको #मदरसे के पास #बाथरूम में लेकर गया, वहाँ उसने बच्ची के साथ जबरदस्ती #बलात्कार किया, #बच्ची ने जोर-जोर से चिल्लाना चालू किया, लोग बाथरूम के पास आ गए, #मौलवी वहाँ से भाग गया।

बच्ची के माता-पिता भी #मदरसे में आ पहुँचे, बच्ची के माता-पिता ने #ईसनपुर पुलिस स्टेशन में एफ.आई.आर. लिखवाई, पुलिस ने मौलवी महम्मद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया, अब आगे की कार्यवाही चल रही है ।

इतनी बड़ी घटना है लेकिन किसी भी #मीडिया में ये खबर नहीं चल रही है । लेकिन अगर मौलवी की जगह कोई हिन्दू धर्म के गुरु होते और उनके ऊपर कोई #झूठा आरोप भी लगा दे तो भी मीडिया दिन रात दिखाती, डिबेट बैठाती और बताती कि हिन्दू धर्म के सभी साधु-संत खराब हैं ।

अब आपके मन में प्रश्न उठता होगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

हम आपको बताते हैं कि $हिन्दू धर्म सनातन धर्म है । उसको मिटाने के लिए सदियों से दुष्ट प्रकृति के आसुरी स्वभाव के लोग पीछे पड़े हैं जैसे कि भगवान श्री रामजी के समय रावण, कुंभकर्ण आदि, भगवान श्री कृष्ण के समय कंस, कौरव आदि, छत्रपति #शिवाजी के समय मुगल और वर्तमान में ईसाई मिशनरियां और मुस्लिम धर्मान्तरण वाले,विदेशी कम्पनियां और आतंकवादी आदि आदि ।

हिन्दू धर्म जो #सनातन धर्म है, भारत की दिव्य संस्कृति है, उसको नष्ट करने के लिए, पाश्चात्य संस्कृति हमारे ऊपर थोपने के लिए विदेशी लोग पुरजोश प्रयास कर रहे हैं ।


हम आपको बता दें कि मुस्लिम धर्म की स्थापना हुए 1400 साल हुए हैं और ईसाई धर्म की स्थापना हुए 2017 साल हुए हैं, लेकिन हिन्दू धर्म तो सनातन धर्म है । जबसे पृथ्वी की उत्पत्ति हुई है तबसे ही सनातन हिन्दू धर्म है । उस पर जब विदेशी लोग कुठाराघात करते हैं, उसे बचाने के लिए हिन्दू धर्म के साधु-संत आगे आते हैं ।  इसलिए #विदेशी लोग मीडिया को हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने के लिए फन्ड देते हैं।

अब सवाल उठता है कि आखिर वो हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने के लिए इतना पैसा कहाँ से लाते होंगे और उससे उनको क्या फायदा होता होगा?

हम आपको बता देते हैं कि भारतीय संस्कृति प्राचीन संस्कृति है और उसमें सभी कार्य धर्म अनुसार किये जाते हैं ।  उसमें #दारू पीना, व्यसन करना, मांस खाना, अर्धनग्न कपड़े पहनना, फैशन करना, #बॉय फ्रेंड- गर्ल्स फ्रेंड बनाना, हत्या करना आदि हिन्दू संस्कृति में नहीं है ।

लेकिन पश्चात संस्कृति में ये सब है और वे सब भारत पर थोपना चाहते  हैं । लेकिन भारत में साधु-संत गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर लोगों  में जागृति लाते हैं, हिन्दू संस्कृति की महिमा बताते हैं और #भारतवासियों को #पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने से होने वाली हानियों से अवगत करवाते हैं तो भारत के लोग दारू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, #अफीम, चाय आदि व्यसन छोड़ देते हैं, स्वस्थ रहने के लिए घरेलू उपाय बताने पर #एलोपैथिक दवाइयां खरीदना बन्द कर देते हैं, #सिनेमा में जाना, #सेक्सवर्धक सामग्री लेना बंद कर देते हैं, मांस खाना बंद कर देते हैं, टूथपेस्ट, पफ, #पाऊडर आदि का उपयोग बंद कर देते हैं । 

 कहने का सार ये है कि भारत की करोड़ो की जनता में साधु-संतो के कारण अपने धर्म के प्रति जागृति आती है जिससे वे विदेशी सामान लेना बंद कर देते हैं और #हिन्दू #ईसाई या #मुस्लिम धर्म में परिवर्तित होने से बच जाते हैं जिससे उनको #अरबों-खबरों रूपयों का नुकसान होता है जिससे वे कुछ हजार करोड़ रुपये साधु-संतों और हिन्दू कार्यकर्ताओं को बदनाम करने में लगा देते हैं जिससे लोगों का उनके प्रति #श्रद्धाभाव नष्ट हो जाये और हिन्दू धर्म के प्रति जनता को विश्वास कम होता जाए और पाश्चात्य संस्कृति के तरफ #आकर्षित होते जाएं और उनकी विदेशी कंपनियों के सामान खरीदें और धर्मान्तरणवालों की भी दुकानें चलती रहें । इसलिए वे मीडिया को फंडिग करके साधु-संतों को बदनाम करवाते हैं।

अब हमारे पाठक समझ ही गए होंगे कि भारत में किस प्रकार का एक सुनियोजित #षड्यंत्र चल रहा है और हमारी #संस्कृति को नष्ट करने के लिए राष्ट्रविरोधी ताकतें काम कर रही हैं ।

आपने देखा होगा कि जब #साध्वी प्रज्ञा और स्वामी #असीमानंद के ऊपर आरोप लगे थे तब मीडिया ने उनके लिए कितनी खबरें चलाई थी लेकिन जैसे ही वे #निर्दोष छूटे तो एक भी खबर नहीं दिखाई ।

"यह है मीडिया का हिन्दू #साधु-संतों के विरोधी रवैया।"

विदेशी फंडिग से चलने वाली मीडिया किसी भी हिन्दू साधु-संत या कार्यकर्ताओं को बदनाम करती है तो #हिंदुस्तानी #सावधान हो जाएँ और ऐसे चैनल्स को ब्लॉक कर दें, केवल राष्ट्र हितैषी चैनल को ही देखें।

जय हिंद!!

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