Friday, March 31, 2017

कानून ही नहीं लोगों की सेहत के लिए भी घातक हैं अवैध बूचड़खाने

कानून ही नहीं लोगों की सेहत के लिए भी घातक हैं अवैध बूचड़खाने

उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों पर चली कटार को लेकर काफी हल्ला हो रहा है। परंतु सेहत के लिए घातक इन बूचड़खानों की हकीकत सदमे में डाल सकती है। बीमार पशुओं के 60 प्रतिशत रोग उसका मांस खाने वालों में फैलने की आशंका रहती है और विशेषज्ञों का मानना है कि, मनुष्यों में #टीबी व रेबीज समेत कई गंभीर बीमारियों का स्रोत ऐसे मांस ही हैं। ऐसे में अवैध बूचड़खानों के बाद लाइसेंसशुदा बूचड़खाने भी संदेह के घेरे में हैं। उनके यहां पशुओं को काटने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने वाली सरकारी प्रणाली भी ध्वस्त है।
Slaughter Houses

देश के मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की कुल हिस्सेदारी 50 प्रतिशत के आसपास रहती है। पिछले वर्ष सूबे के मीट प्रोसेसिंग केंद्रों ने 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। भैंस का मांस बीफ के तौर पर निर्यात किया जाता है। परंतु समुचित निगरानी के अभाव में #प्रतिबंधित होने के बावजूद गायों की कटाई की सूचनाएं भी बाहर आती रही हैं। भाजपा इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव में पूरे जोर शोर से उठाती रही हैं। सत्ता में आते ही निगरानी प्रणाली को चुस्त बनाने पर जोर देना होगा।

#भारतीय पशु चिकित्सा संस्थान के एक वरिष्ठ #वैज्ञानिक ने बताया कि, पशुओं को काटने से पहले स्थानीय निकायों में तैनात पशु चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी पशुओं की पूरी जांच करनी होती है। कटाई के बाद उसके मांस को खाने योग्य घोषित करना होता है। परंतु ढांचागत खामियों के चलते व्यावहारिक रूप में ऐसा होता नहीं है। रोग ग्रसित #पशुओं का मांस खाने वालों को टीबी, #गर्भपात वाले बैक्टीरिया, #फंगस वाले रोग, #सॉलमोनेला व लैप्टोसपिरा जैसे बैक्टीरिया रोगी बना सकते हैं । #रेबीज से प्रभावित पशुओं का मांस खाने वालों में रेबीज पहुंचने की आशंका रहती है।

राज्य सरकार ने जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले बिना अनुज्ञप्तिपत्र (#लाइसेंस) के अवैध बूचड़खाने बंद कराने के सख्त निर्देश दे रखे है। शहरी क्षेत्रों में बूचड़खानों की निगरानी स्थानीय निकायों की होती है, जहां तैनात पशु चिकित्साधिकारी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को यह दायित्व दिया गया है, जहां पशु चिकित्सालय तक में पशु डॉक्टर नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश में कुल 285 अनुज्ञप्तिपत्र वाले बूचड़खाने चल रहे हैं। पशुओं को काटने के मामले में उत्तर प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। जबकि महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जहां 316 #बूचड़खाने हैं। #उत्तर प्रदेश के लगभग तीन दर्जन बूचड़खाने केंद्र से मान्यता प्राप्त हैं। इनमें अलीगढ़ में सात, गाजियाबाद में पांच, उन्नाव में चार, #मेरठ में तीन और सहारनपुर में दो हैं। इसके अतिरिक्त बाराबंकी, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, झांसी और लखनऊ में एक-एक हैं।

अवैध बूचड़खाने तो किसी भी जांच की परिधि में होते ही नहीं हैं। लिहाजा उनके मांस को खाना जोखिम को मोल लेने के बराबर है। राज्य की पिछली सरकारों में इन पर पाबंदी नहीं होने अथवा सख्ती के अभाव में ‘सब चलता है’ की तर्ज होता रहा है। इसी पर पाबंदी लगाने की अपनी चुनावी घोषणा को लागू करने उतरी राज्य की योगी सरकार को बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।


मांसाहार तथा शराब सेवन ना करें – सत्यपाल सिंह

लोकसभा में भाजपा सांसद #सत्यपाल सिंह ने कहा कि, मन पर अन्न का प्रभाव होने की बात शास्त्रों में भी कही गयी है और इसलिए हमें मांसाहार से तथा शराब सेवन से बचना चाहिए। उन्होने सदन में मानसिक स्वास्थ्य देखरेख विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि, यदि #मनुष्य मन पर नियंत्रण कर ले तो सबकुछ संभव है। मन पर अन्न का प्रभाव होता है और इसलिए कहा जाता है कि ‘जैसा खाओगे अन्न, वैसा रहेगा मन !’ सिंह ने कहा कि, इसलिए हमें मांसाहार से बचना चाहिए। इसके लिए मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी #आदित्यनाथ) को बधाई देता हूँ । उन्होंने अवैध बूचड़खानों को तो बंद कर दिया। यह मन स्वस्थ होने की दिशा में कारगर होगा !’’

पूर्व पुलिस #अधिकारी सिंह ने कहा कि, शराब सेवन से भी बचना चाहिए। कांग्रेस के इतिहास से संबंधित एक किताब के पहले अध्याय में उल्लेख है कि, #ब्रिटिश काल में #कांग्रेस के संस्थापक ए ओ ह्यूम ने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि, सरकार आबकारी पर एक रुपया कमाती है परंतु उससे निपटने में दो रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

सिंह ने कहा कि, सरकार को #शराब और साइकोट्रोपिक #ड्रग्स के नियंत्रण पर भी ध्यान देना चाहिए। 


देश भर में #गाेहत्या पर लगे रोक, मीट खाना बंद करें मुस्लिम : आजम खान

उत्तर प्रदेश मे अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी (सपा) के #वरिष्ठ नेता #आजम_खान ने सोमवार को देश भर में गायों सहित अन्य जानवरों के काटे जाने पर रोक लगाने की मांग की । सपा नेता ने मुस्लिम समुदाय को मीट न खाने की सलाह भी दी है ।

देश में #कानूनों में समानता पर बल देते हुए खान ने कहा, ‘देश भर में गायों के काटे जाने पर प्रतिबंध होना चाहिए । ऐसा क्यों है कि, यह केरल और #पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कानूनी है और अन्य राज्यों में गैर-कानूनी है ।’

राज्य में वैध बूचड़खानों के चलने की अनुमति दिए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए खान ने कहा, ‘इसका अर्थ यह है कि, यदि जानवर वैध #कसाईखानों में काटे जाते हैं तो यह ठीक है परंतु यही जानवर यदि अवैध बूचड़खानों में काटे जाते हैं तो यह गलत है ।’

खान ने कहा, ‘यह वैध, #अवैध की चीजें बंद होनी चाहिए । सभी बूचड़खाने बंद होने चाहिए । किसी भी जानवर को नहीं काटा जाना चाहिए ।’ खान ने जैन समुदाय का हवाला भी दिया जो चिकन और बकरे के काटे जाने की भी मनाही करता है । सपा नेता मुस्लिमों को मीट न खाने की सलाह भी दी है । खान ने कहा, ‘#इस्लाम में मीट खाना अनिवार्य नहीं किया गया है । #उलेमाओं को लोगों से अपील करनी चाहिए कि वे मीट न खाएं ।’

अब उत्तर प्रदेश की तरह हर जहग अवैध बूचड़खानों पर तो #प्रतिबन्ध लगना ही चाहिए साथ-साथ में वैध #बूचड़खानों को भी बन्द कर देना चाहिए मांस खाना छोड़कर केवल शाकाहार ही अपनाना चाहिए ।

कई लोग तर्क देते है #मांस में प्रोटीन होता है उन पढ़े लिखे अनजान मूर्खो को पता नही है कि दूध, आँवला आदि में जितना प्रोटीन और विटामिनस् हैं उससे चौथाई भी मांस में नही होता है पहले हमारे वीर #शिवाजी, #महाराणा प्रताप, भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद कहाँ मांस खाते थे फिर भी शत्रुओं को धूल चटा देते थे ।

अतः #मांसाहार छोड़ो #शाकाहार अपनावो ।

जय हिंद

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